Media24Media.com: त्यौहार

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अक्षय तृतीया पर माता कौशल्या महोत्सव का करेंगे आगाज

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कल 22 अप्रैल को अक्षय तृतीया (अक्ती) त्यौहार पर भगवान श्री राम की ननिहाल और माता कौशल्या की नगरी चंदखुरी में  माता कौशल्या महोत्सवका शुभारंभ करेंगे। कौशल्या महोत्सव कार्यक्रम के लिए भव्य और आकर्षक मंच बनकर तैयार है। 

आस्था और भक्ति से ओतप्रोत इस महोत्सव में छत्तीसगढ़ सहित देश के ख्याति प्राप्त कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। आरंग विधानसभा क्षेत्र के ग्राम चंदखुरी में आयोजित माता कौशल्या महोत्सव नारी सशक्तिकरण पर आधारित होगी। महोत्सव 24 अप्रैल तक चलेगा।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा माता कौशल्या की जन्मभूमि चंदखुरी के वैभव को विश्व पटल पर स्थापित करने प्रदेश की कला, संस्कृति एवं पर्यटन को बढ़ावा देने, महिला सशक्तिकरण, कार्यशील कलाकारों के संरक्षण, संवर्धन एवं कला दलों के सतत् विकास हेतु इस वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर माता कौशल्या महोत्सव मनाने की घोषणा की थी। छत्तीसगढ़ में स्थित माता कौशल्या मंदिर पूरे देश में एक मात्र प्राचीन मंदिर है।

पर्यटन कैफे का होगा उद्घाटन:

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल माता कौशल्या महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर मंदिर परिसर में पर्यटन विभाग द्वारा तैयार पर्यटन कैफे का भी उद्घाटन करेंगे। पयर्टन कैफे में छत्तीसगढ़ी व्यंजन सहित मिलेट्स कैफे का उत्पाद उपलब्ध होगा।

स्व-सहायता समूह की स्टॉलों में होगी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक

महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार मेला, उत्सवों एवं अन्य प्रदर्शनी आदि कार्यक्रमों के अवसर पर स्व-सहायता समूह द्वारा उत्पादित वस्तुओं के विक्रय एवं प्रचार-प्रसार हेतु को बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। माता कौशल्या महोत्सव के मौके पर भी महिला स्व-सहायता द्वारा उत्पादित वस्तुओं को विक्रय के लिए नौ स्टॉल तैयार किए गए हैं, जहां छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।  

ख्याति प्राप्त कलाकारों द्वारा दी जाएगी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां -

कौशल्या महोत्सव आस्था और भक्ति से सराबोर होंगे। इस मौके पर छत्तीसगढ़ सहित देश के ख्याति प्राप्त कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे।


बेमेतरा : प्रशासन अलर्ट मोड पर, पुलिस की पुख्ता व्यवस्था, बिरनपुर में लौट रहा अमन चैन

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बेमेतरा जिले के बिरनपुर गांव में अमन चैन फिर से लौट रहा है। शांति समिति की बैठक में समाज प्रमुखों और ग्रामीणों की पहल कामयाब होते दिख रही है। गौरतलब है कि जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस बैठक में सभी समाज प्रमुखों और ग्रामीणों ने सर्व सम्मति से निर्णय लिया गया था कि सभी मिलजुलकर शांति से रहेंगे गांव में पहले की तरह अमन-चैन कायम रखेंगे। बैठक का सकारात्मक असर गाँव में दिख रहा है। गांव में माहौल तेजी से शांति की ओर है।
                   

आज ग्रामीणों ने चर्चा में बताया कि कल प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों ने हम ग्रामीणों की बैठक ली, जिसमें हमने विस्तार से अपने पक्षों को प्रशासन को अवगत कराया था। सब लोग इस बात पर सहमत हुए कि गांव की अच्छी छवि के लिए और सुरक्षा के बेहतर माहौल के लिए शांति बहुत जरूरी है और जो आपसी समस्याएं हैं उसे बैठकर शांतिपूर्ण वातावरण में ही हल करेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि गांव में हमेशा से सभी लोग प्रेमभाव से रहते आए हैं। गाँव के बड़े बुजुर्गों ने कहा कि हम सब लोग त्यौहार वगैरह भी साथ मनाते हैं। कभी ऐसा नहीं हुआ था। जो प्रकरण हुआ, वो बहुत दुखद है। अधिकारी दोषियों पर कार्रवाई कर रहे हैं।

कलेक्टर पदुम सिंह एल्मा सहित अन्य अधिकारी भी आज पूरे समय बिरनपुर गांव में मौजूद रहे। 12 अप्रैल को प्रशासनिक अधिकारियों ने विस्तार से मामले की बारीकियों पर ग्रामीणों से चर्चा की थी। 12 अप्रैल को बिरनपुर गांव में ही हुई बैठक में प्रशासन ने विशेष तौर पर उन बातों को रेखांकित किया जिसकी वजह से पूरे प्रकरण के बारे में आपसी समझ बढ़ी। साथ ही लोगों को बताया गया कि शांति कितनी जरूरी है। आज ग्रामीणों ने भी कहा कि प्रशासन पूरी तरह से सुरक्षा में लगा है। साथ ही जरूरी सुविधाओं को भी उपलब्ध करा रहा है।

गाँव में लोगों को राशन मिलता रहे, इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा पूरी व्यवस्था की गई और घर-घर राशन पहुंचाया गया। साग-सब्जी भी लोगों को मिल पाए, इस बात की भी व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट और मेडिकल स्टाफ पूरी समय मौजूद हैं। 12 अप्रैल को गांव में एक लड़की की तबियत खराब हो गई। जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य की टीम घर पर पहुंच गई और इलाज किया। गांव में पशुधन काफी है और इसके लिए भी पशुधन विभाग ने वेटरनरी डॉक्टर की व्यवस्था की है।

पुलिस की लगातार नजर- पुलिस गांव की हालात पर निरंतर नजर रखे हुए हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए है। इसके चलते गांव में लोग सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कल की बैठक के बाद हम काफी आश्वस्त हैं। बैठक में गांव की परिस्थिति के बारे में भी बारीकी से अवगत कराया गया। अभी फसल भी खेत में है जिसे उठाना है। हम सबने निर्णय लिया है कि जल्द से जल्द माहौल शांत करने के लिए काम करेंगे।

सरपंच ने बताया, प्रशासन की समझाइश का हुआ अच्छा असर- बिरनपुर गांव के सरपंच जेठूराम साहू ने बताया कि कल शांति समिति की बैठक में सबने अपनी बात रखी। खुलकर रखी बात से गांव का माहौल अच्छा बना। अधिकारियों ने भी बताया कि किस तरह शांति से रहने से गांव में अच्छा माहौल बनेगा। उनकी समझाइश का असर हुआ है और लोग यह कह रहे हैं कि अब शांति के लिए पूरा कार्य करेंगे।

पटाखा चलाते समय सावधानी बरतना जरूरी

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रायपुर। रौशनी का त्यौहार दीपावली देशभर में उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। उमंग के इस त्यौहार में जरा सी लापरवाही स्वास्थ्य पर विपरीत असर डाल सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए पटाखा चलाते समय सावधानी बरतना जरूरी होता है। राजधानी रायपुर के वरिष्ठ नेत्र रोग चिकित्सक डॉक्टर सुभाष मिश्रा ने बताया कि दीपावली में पटाखों को लेकर बरती गई लापरवाही के कारण हाथ और उंगलियां जलने के साथ ही आंखों पर भी असर पड़ सकता है। पटाखों के धुएं के कारण आंखों में जलन-चुभन के साथ लालिमा होने का खतरा होता है।



इसके अलावा पटाखों से लगने वाली चोट के कारण आंखों में घाव, रक्त के थक्के बनने के अलावा पुतली को भी नुकसान पहुंच सकता है। डॉक्टर मिश्रा ने त्यौहार के दौरान खान-पान, दिनचर्या और इसे मनाने के तरीकों को लेकर सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। बोतल में जलाए जाने वाले रॉकेट उड़कर लोगों के चेहरों पर लग जाते हैं


जिसके कारण आंखों में चोट लग सकती है, इसलिए पटाखे नजदीक से नहीं जलाना चाहिए। दीपावली के दौरान आंखों से संबंधित किसी भी प्रकार की आपात चिकित्सा के लिए डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर चिकित्सालय और एम्स रायपुर में चौबीस घंटे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध रहेगी।

प्रकाश के महापर्व दीपावली की पूर्व संध्या पर प्रदेशवासियों को बधाई

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रायपुर। आज छोटी दीपावली है। इसे रूप चौदस और नरक चौदस के नाम से भी जाना जाता है। परंपरा के अनुसार रूप चौदस पर घरों के आंगन और बाहर रंगोली सजाकर चौदह दीये जलाए जाते हैं। रौशनी के इस त्यौहार पर प्रतिष्ठानों और घरों में बिजली की झालरों से आकर्षक सजावट की गई है। कल दीपों का पर्व दीपावली मनाया जाएगा। दीपावली को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के सभी शहरों और कस्बों के बाजारों में काफी चहल-पहल और रौनक देखी जा रही है। 



राज्यपाल अनुसुईया उइके और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रकाश के महापर्व दीपावली की पूर्व संध्या पर प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में राज्यपाल ने कहा कि दीपावली हमारी समृद्ध वैभवशाली परंपरा का अभिन्न अंग है। दो वर्षों के कठिन समय के बाद इस वर्ष लोग उल्लास के साथ दीपावली मना रहे हैं। 

राज्यपाल ने गोवर्धन पूजा और भाईदूज की भी शुभकामनाएं दी हैं।इस बीच, आज शाम रायपुर के चंदखुरी स्थित माता कौशल्या मंदिर में राजीव युवा मितान क्लब की ओर से इकतीस हजार दीये जलाए जाएंगे। वहीं, रायपुर पश्चिम विधानसभा के विभिन्न क्षेत्रों में विधायक विकास उपाध्याय ने मिट्टी के दीयों का निःशुल्क वितरण किया।

दोनों आंखों की रोशनी लौटने के बाद पूजा अपनी आंखों से पहली बार देखेगी दीवाली की जगमग

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रायपुर। जन्म से ही मोतियाबिंद से पीड़ित 13 वर्ष की पूजा (बदला हुआ नाम) इस साल पहली बार अपनी आंखों से रोशनी के त्यौहार दीपावली की जगमगाहट देखेगी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत चिरायुयोजना ने उसकी दोनों आंखों की रोशनी लौटा दी है। सरगुजा के बतौली में जीवन ज्योति नेत्रहीन विद्यालय में पढ़ने वाली पूजा जन्म से ही मोतियाबिंद से पीड़ित होने के कारण देखने में असमर्थ थी। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण उसका परिवार इलाज नहीं करवा पा रहा था। स्कूल जाने की उसकी ललक और जिद के कारण पिता ने उसे बतौली के जीवन ज्योति नेत्रहीन विद्यालय में भर्ती करा दिया था।



सरगुजा में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी डॉ. अमीन फिरदौसी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के बतौली के चिरायुदल ने नेत्रहीन स्कूल में पूजा के आंखों की जांच की और उसकी दृष्टि लौटाने ऑपरेशन का सुझाव दिया। बेटी के जीवन में उम्मीद की किरण देख उसके पिता ने सहर्ष ऑपरेशन के लिए सहमति दी। वर्ष-2018 में रायपुर में पूजा की एक आंख का सफल ऑपरेशन किया गया और इस साल अगस्त में अंबिकापुर में उसकी दूसरी आंख का ऑपरेशन हुआ है। समय पर जांच और ऑपरेशन हो जाने के कारण आज पूजा अपनी दोनों आंखों से सब कुछ देख पा रही है। अगले शैक्षणिक सत्र से वह नेत्रहीन विद्यालय छोड़कर सामान्य स्कूल में पढ़ेगी। इस साल की दीवाली को वह पहली बार अपनी आंखों से रोशन होते देखेगी।

 चिरायुके तहत आंगनबाड़ी व स्कूल में 44 तरह की बीमारियों की होती है निःशुल्क जांच व उपचार

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के उप संचालक डॉ. व्ही.आर. भगत ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा संचालित चिरायुयोजना के तहत चिकित्सा दलों द्वारा आंगनबाड़ी में दर्ज व स्कूलों में अध्ययनरत 18 वर्ष तक के सभी बच्चों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण व यथासंभव इलाज किया जाता है। इसके अंतर्गत 44 तरह की बीमारियों का उपचार किया जाता है। 

आंख से कम दिखाई देना, कानों से कम सुनाई देना, विटामिन की कमी, एनीमिया, हृदय रोग जैसी बीमारियों की पहचान कर उनका इलाज किया जाता है। उन्होंने बताया कि जिन बच्चों का इलाज स्थानीय स्तर पर संभव नहीं हो पाता उन्हें चिरायुदलों के द्वारा बेहतर इलाज के लिए उच्च स्वास्थ्य संस्थाओं में रिफर कर इलाज कराया जाता है। वर्तमान में प्रदेश में कुल 330 ‘चिरायुदल सक्रिय हैं।

विशेष लेख: प्रकृति के प्रति प्रेम और समर्पण का लोकपर्व : हरेली

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जन-जीवन में रचा-बसा खेती-किसानी से जुड़ा पहला त्यौहार है, हरेली। सावन मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह त्यौहार वास्तव में प्रकृति के प्रति प्रेम और समर्पण का लोकपर्व है। हरेली के दिन किसान अच्छी फसल की कामना के साथ धरती माता का सभी प्राणियों केे भरण-पोषण के लिए आभार व्यक्त करते हैं। सभी लोग बारिश के आगमन के साथ चारो ओर बिखरी हरियाली और नई फसल का उत्साह से स्वागत करते हैं। हरेली पर्व को छोटे से बड़े तक सभी उत्साह और उमंग से मनाते है। 


गांवों में हरेली के दिन नागर
, गैती, कुदाली, फावड़ा समेत खेती-किसानी से जुड़े सभी औजारों, खेतों और गोधन की पूजा की जाती है। सभी घरों में चीला, गुलगुल भजिया का प्रसाद बनाया जाता है। पूजा-अर्चना के बाद गांव के चौक-चौराहों में लोगों को जुटना शुरू हो जाता है। यहां गेड़ी दौड़, नारियल फेक, मटकी फोड़, रस्साकशी जैसी प्रतियोगिताएं देर तक चलती रहती हैं। लोग पारंपरिक तरीके से गेड़ी चढ़कर खुशियां मनाते हैं। माना जाता है कि बरसात के दिनों में पानी और कीचड़ से बचने के लिए गेड़ी चढ़ने का प्रचलन रहा है, जो समय के साथ परम्परा में परिवर्तित हो गया।


इस अवसर पर किया जाने वाला गेड़ी लोक नृत्य भी छत्तीसगढ़ की पुरातन संस्कृति का अहम हिस्सा रहा है। हरेली में लोहारों द्वारा घर के मुख्य दरवाजे पर कील ठोककर और नीम की पत्तियां लगाने का रिवाज है। मान्यता है कि इससे घर-परिवार अनिष्ट से बचे रहते हैं। 
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर माटी से जुड़ी अपनी गौरवशाली संस्कृति और परम्परा को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की पहल की गई है। छत्तीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री निवास सहित पूरे राज्य में लोकपर्वों के धूम-धाम से सार्वजनिक आयोजन कर इसकी शुरूआत की है।


इससे नई पीढ़ी के युवा भी अपनी पुरातन परम्पराओं से जुड़ने लगे हैं। सरकार ने हरेली त्यौहार के दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। इस साल से प्रदेश के स्कूलों में हरेली तिहार को विशेष रूप से मनाने की शुरूआत की जा रही है। 
इससे बच्चे न सिर्फ अपनी कृषि संस्कृति को समझेंगे, उसका सक्रिय हिस्सा बनेंगे बल्कि अपनी संस्कृति के मूल भाव को आत्मसात भी कर सकेंगे। साथ ही स्कूलों में गेड़ी दौड़, वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण पर संगोष्ठी जैसे आयोजनों से बच्चों में अपनी संस्कृति और प्रकृति के प्रति प्रेम विकसित होगा।   


छत्तीसगढ़ में पारंपरिक लोक मूल्यों को सहेजते हुए गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार रूप दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में पारंपरिक संसाधनों के उपयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का काम किया जा रहा है। इसके चलते राज्य सरकार ने दो साल पहले सन्
2020 में हरेली के दिन गो-धन न्याय योजनाशुरू की थी। शुरूआत में किसी ने कल्पना नहीं की थी, कि गोबर खरीदी की यह योजना गांवों की अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगी। आज यह ग्रामीण अंचल की बेहद लोकप्रिय योजना साबित हुई है। 

इस अनूठी योजना के तहत सरकार ने गोबर को ग्रामीणों की आय का नया जरिया बनाया और किसानों और पशुपालकों से दो रूपए की दर से गोबर खरीदी शुरू की। पशुपालक ग्रामीणों ने गोबर बेचकर पिछले दो सालों में 150 करोड़ रूपये से अधिक की कमाई की है। खरीदे गए गोबर से गौठानों में स्व-सहायता समूहों ने 20 लाख क्विंटल से अधिक वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया है, जिससे प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है। अब तक महिला समूह और गौठान समितियां 143 करोड़ से अधिक की राशि वर्मी खाद के निर्माण और विक्रय से प्राप्त कर चुकी हैं। 

इसके साथ ही गौठानों में गोबर से दिए, गमले सहित विभिन्न सजावटी समान बनाने से स्थानीय महिलाओं को रोजगार का नया साधन मिला है। गोधन न्याय योजना को विस्तार देते हुए राज्य सरकार इस साल हरेली तिहार से गौठानों में 4 रूपए प्रति लीटर की दर से गो-मूत्र की खरीदी की शुरूआत करने जा रही है। इस गो-मूत्र से महिला स्व-सहायता समूह द्वारा जीवामृत और कीट नियंत्रक उत्पाद तैयार किये जाएंगे। इससे रोजगार और आय का नया जरिया मिलने के साथ जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा और कृषि लागत कम होगी। 

गौ-मूत्र से बने कीट नियंत्रक उत्पाद का उपयोग किसान भाई रासायनिक कीटनाशक के बदले कर सकेंगे, जिससे खाद्यान्न की विषाक्तता में कमी आएगी और महंगे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी। इन नवाचारों ने हरेली को प्रदेश में जैविक खेती और आर्थिक सशक्तिकरण के नए अध्यायों का प्रतीक बना दिया है। इससे लगता है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम-स्वराज का सपना अब आत्मनिर्भर गांवों के रूप में छत्तीसगढ़ में साकार हो रहा है। 

छत्तीसगढ़ में परंपराओं को सहेजते हुए उसे आधुनिक जरूरतों के अनुसार ढालने की जो शुरूआत की गई है, उसे जरूरत है सबके सहयोग से आगे बढ़ाने की। प्रकृति से जुड़कर पर्यावरण अनुकूल विकास की दिशा में आगे बढ़ने का हमारा यह कदम बेहतर कल के लिए सर्वोत्तम योगदान होगा।

 

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