Media24Media.com: जागरूकता

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मुख्यमंत्री ने सार्थक एवं रक्षक अभियान का किया शुभारंभ

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के 15 वें स्थापना दिवस समारोह के मौके पर बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता लाने के लिए सार्थक एवं रक्षक अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल आडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य के सुदूर अंचलों में बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि सार्थक एवं रक्षक जैसे नये अभियान जनमानस में बच्चों के अधिकारों के लिए जागरूक करने में कारगर सिद्ध होंगे।

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही सशक्त समाज का निर्माण हो सकता है। छत्तीसगढ़ राज्य के सुदूर अंचल खासकर बस्तर एवं सरगुजा संभाग में कम उम्र में ही बच्चे कामकाज की तलाश में अन्य शहरों के तरफ चले जा जाते हैं, पर जानकारी के अभाव में कई बार शोषण के शिकार हो जाते हैं। आयोग की जिम्मेदारी है कि ऐसे बच्चों का चिन्हांकन कर उन्हें रोजगार से जोड़ते हुए शासन की योजनाओं से लाभ दिलाया जाए। 

बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता लानेराज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पहल

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार बच्चों और युवाओं पर केन्द्रित अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। हमारी सरकार गांव-गांव तक स्कूल, कॉलेज, कोचिंग की सुविधा मुहैया करा रही है। इसके साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में प्रयास, नालन्दा परिसर एवं दिल्ली में ट्राईबल यूथ हॉस्टल जैसे कार्यों के माध्यम से छात्रों को अधिक से अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा ने आयोग की कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। गौरतलब है कि सार्थक अभियान बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता लाने एवं रक्षक अभियान विश्वविद्यालयों में बाल अधिकार संरक्षण कानूनों की विशेष जानकारी प्रदान करने के लिए संचालित की जा रही है।

बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता लाने, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पहल

 आयोग के स्थापना दिवस समारेाह में बाल अधिकारों की जागरूकता के लिए बेहतर कार्य करने वाले पुलिस के जवानों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं छात्राओं को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की नई मार्गदर्शिका बुकलेट, रक्षक बुकलेट एवं गुड टच, बेड टच सेफ टच, मानव तस्करी, एवं शिक्षा के अधिकार पर आधारित कार्टून पुस्तकों का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर विधायक सर्वश्री सुनील सोनी, पुरंदर मिश्रा, गुरु खुशवंत साहेब, नागरिक आपूर्ति निगम अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ सलीम राज सहित अनेक जनप्रतिनिधि और आयोग से जुड़े संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

बैक टू आयुर्वेद: छत्तीसगढ़ के धमतरी में बूटीगढ़ की स्थापना, आयुर्वेदिक रसशाला बन रही आकर्षण का केंद्र

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में जल संरक्षण और आयुर्वेद को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। यहां आयुर्वेदिक चिकित्सा और प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष प्रयास किया गया है। यह प्रदेश में अपनी तरह का पहला नवाचार है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आयुष विभाग और धमतरी जिला प्रशासन के इस नवाचार की सराहना की है और ज्यादा से ज्यादा वन संपदा को सहजने और लोगों को आयुर्वेद के बारे में जागरूक करने के लिए कहा है।इस पहल के अंतर्गत जिला प्रशासन ने आयुर्वेद को स्थानीय लोगों के जीवन में सम्मिलित करने के लिए विशेष रूप से जिले के वंनाचल ग्राम सिंगपुर (बूटीगढ़) में आयुष रसशाला (औषधीय पेय केंद्र) की स्थापना की गई है।

बूटीगढ़ क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से औषधिगुणयुक्त पौधे पाये जाते हैं, इसलिए यहां हर्बेरियम का निर्माण किया जा रहा है। औषधिगुणयुक्त पौधों के संवर्धन, प्रचार-प्रसार और उपयोगिता के लिए रसशाला निर्मित किया जा रहा है। इस रसशाला के माध्यम से स्थानीय लोगों, छात्रों और पर्यटकों को रसपान का लाभ मिल सकेगा।

आयुर्वेद में पानी का महत्व अनमोल है, क्योंकि यह शरीर के सभी प्रमुख तत्वों को संतुलित रखता है। धमतरी जिले में जल जगारकार्यक्रम के माध्यम से जल संरक्षण के साथ-साथ आयुर्वेदिक पेय पदार्थों और औषधियों की उपयोगिता को भी प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी में उपस्थित आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने बूटीगढ़ और रसशाला के महत्व को बताते हुए यह जानकारी दी कि कैसे एक परिवार और समाज शुद्ध पानी और आयुर्वेदिक खानपान को अपनाकर स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

बेहतर मानसिक और शारिरिक स्वास्थ्य के लिए दिया जा रहा काढ़ा

आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवध पचौरी ने बताया कि 160 प्रकार की जड़ी-बूटियों को चिन्हित किया गया है, जिनमें से पहले चरण में बूटीगढ़ में 25,000 पौधे लगाए गए हैं। इनमें से कुछ ऐसी जड़ी-बूटियाँ हैं जिन्हें आयुर्वेदिक उपचार के लिए चूर्ण या टैबलेट बनाकर इस्तेमाल भी किया जा रहा है। समय के साथ जब बूटीगढ़ विकसित होने लगेगा तो रसशाला के जरिए लोगों को आयुर्वेद के प्रति और भी जागरूक किया जा सकता है। इसके साथ ही बूटीगढ़ में विलुप्त होने वाली जड़ी-बूटियों को भी सहजा जा रहा है, ताकि भविष्य में इन पर शोध हो सके। उन्होंने बताया कि वर्तमान में विभिन्न आयुष केंद्रों में योग करने आये लोगों, मरीजों, गर्भवती महिलाओं, किशोर-किशोरियों व बच्चों को विभिन्न जड़ी-बुटियों से बना काढ़ा, औषधी स्वरूप दिया जा रहा है, जिससे लोगों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सकारात्मक परिर्वतन देखने को मिल रहा है।

हृदय रोगियों के लिए रामबाण है अर्जुन क्षीरपाक

डॉ. अवध पचौरी के मुताबिक कोविड काल के बाद से ही लगातार ये देखा जा रहा है कि अचानक हार्ट अटैक से किसी भी उम्र वर्ग के व्यक्ति की ऑन-द-स्पॉट मृत्यु हो रही है, जान बचाने के लिए समय भी नहीं मिल पा रहा है, जो एक चिंता का विषय बन चुका है। आयुर्वेद में अर्जुन पेड़ की छाल से बनें अर्जुन क्षीरपाकके नियमित सेवन इंस्टेंट हार्ट अटैक के मामलों में कमी लाई जा सकती है। अर्जुन की छाल में विशेष औषधीय गुण होते हैं, जो हृदय की धमनियों को मजबूती प्रदान करते हैं और हृदय की मांसपेशियों को शक्ति देते हैं। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यधिक लाभकारी है, जिन्हें हृदय संबंधी समस्याएं हैं या जिनमें हार्ट अटैक का खतरा अधिक होता है।

सामान्य जीवन में बेहद लाभकारी है आयुर्वेदिक औषधियाँ

जिला आयुष अधिकारी डॉ. गुरूदयाल साहू ने जानकारी देते हुए बताया कि हाल ही में जिले में हुए जल जगार महोत्सव में आयुष विभाग की प्रदर्शनी में बूटीगढ़ और रसशाला की प्रदर्शनी में  मुनगा (सहजन) जैसे पौधों के औषधीय गुणों को भी प्रदर्शित किया गया, जिसमें मुनगा का सूप बनाने की विधि बताई गई। साथ ही, विभिन्न जड़ी-बूटियों का अर्क डिस्टिलेशन प्रक्रिया के माध्यम से निकाला गया, जिससे रोज़मर्रा के जीवन में उपयोगी औषधियाँ तैयार की जा सकती हैं। बूटीगढ़ और रससाला का उद्देश्य ही यही है कि आमजनों को ज्यादा से ज्यादा औषधीय गुणों से भरे पेड़-पौधों को लेकर जागरूक किया जाए। हमारे घरों में ही कितनी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ उपलब्ध होती हैं, जिसके सेवन से मौसमी बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। डॉ. गुरूदयाल आगे बताते हैं कि राशि रत्न पौधों को लगाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। ज्यादा से ज्यादा औषधीय पौधरोपण से प्रकृति को भी सहजा जा रहा है और जल सरंक्षण में भी यह कदम सराहनीय है। साथ ही औषधीय पेड़-पौधों से जीवन में सकारात्मकता भी बढ़ती है।

आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथ रसशास्त्र से मिली रसशाला की प्रेरणा

आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में से एक रसशास्त्र में औषधियों को बनाने की कई विधियों का वर्णन मिलता है। इन प्रक्रियाओं में अलग-अलग यंत्रों का उपयोग किया जाता था, जिनसे औषधियों को शुद्ध और तैयार किया जाता था। महर्षि नागार्जुन को इन विधियों का जनक माना जाता है। इन औषधियों का उपयोग विशेष रूप से बीमारियों के इलाज में किया जाता है। पुराने समय में आयुर्वेदाचार्य कई प्रकार के यंत्रों का इस्तेमाल करते थे। जैसे दोला यंत्र, उलूखल यंत्र, कच्छप यंत्र, और स्वेदनी यंत्र। इन यंत्रों से औषधियाँ बनती थीं, जो आज भी कई बीमारियों में कारगर होती हैं। आयुष रसशाला के जरिए ताजा जड़ी-बूटियों से औषधीय रस, अर्क, क्वाथ और पेय बनाए जाते हैं। ये औषधियाँ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं और कई बीमारियों में फायदेमंद साबित होती हैं।

राष्ट्रीय पोषण माह 2024: पोषण जागरूकता गतिविधियों में छत्तीसगढ़ देश में तीसरे स्थान पर

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में 01 सितम्बर से 30 सितम्बर तक जन आंदोलन के रूप में 7वां राष्ट्रीय पोषण माह आयोजित किया गया। इस दौरान गांवों से लेकर राज्यस्तर तक सुपोषण, बच्चों में व्याप्त कुपोषण एवं किशोरी बालिकाओं, गर्भवती एवं शिशुवती महिलाओं में एनीमिया के संबंध में जागरूकता के लिए स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया गया। इस अभियान में हर वर्ग के लोगों की सक्रिय सहभागिता रही।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पोषण माह के प्रारंभ में सुपोषित छत्तीसगढ़ बनाने के लिए राज्य के समस्त जनप्रतिनिधि, पंचायती राज संस्था के प्रतिनिधियों महिला स्व-सहायता समूहों, प्रबुद्ध वर्ग, विद्यार्थी वर्ग, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों के निकायों के प्रतिनिधि एवं समस्त जनसमुदाय से सक्रिय सहभागिता की अपील की थी। पोषण माह की गतिविधियों में महिलाओं और बच्चों को पोषण के प्रति जागरूक करने के लिए है जन प्रतिनिधियों, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों, महिला स्वसहायता समूह, प्रबुद्ध नागरिकों, विद्यार्थियों और स्थानीय जन समुदाय का भरपूर सहयोग मिला। पोषण माह का शुभारम्भ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं विभागीय मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े द्वारा पोस्टर व वीडियो का विमोचन, पोषण रथ को हरी झंडी दिखाकर एवं पोषण शपथ दिलवाकर किया गया था।

पोषण जागरूकता गतिविधियों में छत्तीसगढ़ देश में तीसरे स्थान पर

विभागीय अमलों सहित सम्पूर्ण पोषण माह में जनप्रतिनिधियों, पंचायतीराज संस्थाओं, के प्रतिनिधि, स्व-सहायता समूह के सदस्यों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के कुशल नेतृत्व, श्रीमती शम्मी आबिदी सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रभावी मार्गदर्शन और श्रीमती तुलिका प्रजापति, संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग के सतत् प्रोत्साहन से राष्ट्रीय पोषण माह 2024 में छत्तीसगढ़ ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 01 करोड़ 33 लाख से ज्यादा गतिविधियों का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ ने इसमें पूरे देश में तृतीय स्थान प्राप्त किया।

प्रदेश में कुल गतिविधि संख्या के आधार पर 8.77 लाख गतिविधि आयोजित कर जिला दुर्ग प्रथम, 8.70 लाख गतिविधि आयोजित कर जशपुर द्वितीय, 8.44 लाख गतिविधि आयोजित कर रायपुर तृतीय, 7.92 लाख गतिविधि आयोजित कर गरियाबंद चतुर्थ एवं 7.70 लाख गतिविधि आयोजित कर बलरामपुर पांचवें स्थान पर रहें। प्रति आंगनबाड़ी औसत गतिविधि संख्या के आधार पर जिला क्रमशः दुर्ग प्रथम, गरियाबंद द्वितीय, रायपुर तृतीय, धमतरी चतुर्थ एवं कबीरधाम पांचवे स्थान पर रहें।

23 लाख बच्चों का वृद्धि मापन किया गया

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पोषण माह के दौरान एक विशेष अभियान के रूप में वजन त्यौहार का आयोजन किया गया, जिसमें समुदाय के सभी 0 से 06 वर्ष के बच्चों का वजन एवं ऊंचाई लेकर वृद्धि मापन किया गया। इस अभियान में लगभग 23 लाख बच्चों का वृद्धि मापन किया गया।

राष्ट्रीय पोषण माह 2024 की मुख्य थीम एनीमिया, वृद्धि निगरानी, पूरक पोषण आहार, पोषण भी पढ़ाई भी, बेहतर प्रशासन, पारदर्शिता और कुशल सेवा वितरण के लिए प्रौद्योगिकी का आयोजन और समग्र पोषण रखी गई थी। भारत शासन द्वारा प्रेषित थीम के आधार पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पूरे माह के लिए प्रतिदिन राज्य, जिला, विकासखण्ड, और आंगनबाड़ी केन्द्र स्तर पर आयोजित की जाने वाली गतिविधियांे के लिए रोड मैप के रूप में दिनांकवार गतिविधि कैलेंडर तैयार किया गया। जिसके आधार पर व्यापक पैमाने पर थीम आधारित गतिविधियों का आयोजन किया गया।

एनीमिया कैम्प, स्वास्थ्य जांच शिविर, पोषण संबंधी जागरूकता, भाषण एवं निबंध प्रतियोगिता जैसी गतिविधियां आयोजित की गई-

महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एनीमिया कैम्प, एनीमिया जागरूकता गतिविधियां, वीएचएसएनडी दिवस का आयोजन, आईवायसीएफ गतिविधियां, स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित शालाओं एवं आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों में छात्रों द्वारा पोषण संबंधी जागरूकता के लिए शपथ, व्यंजन प्रतियोगिता, व्यंजन प्रदर्शनी, भाषण प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता, खेल भी पढ़ाई भी, पोषण भी पढ़ाई भी, पोषण चौपाल, खेल खेल में पोषण ज्ञान प्राप्त करने संबंधी गतिविधियों का आयोजन किया गया।

कृषि विभाग के सहयोग से मिलेट आधारित पौष्टिक भोजन संबंधी जागरूकता शिविर, प्रदर्शनी, जैविक उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु प्रचार-प्रसार इत्यादि गतिविधियां आयोजित की गई। लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग द्वारा जल संरक्षण एवं सुरक्षित पेयजल के उपयोग, वेस्ट वाटर के उचित निपटान के संबंध में जागरूकता प्रसार संबंधी उल्लेखनीय कार्य किया गया। वन विभाग द्वारा एक पेड़ मॉं के नाम अभियान अंतर्गत विशेष सहयोग देते हुए वृहत वृक्षारोपण का कार्य किया गया। आयुष विभाग द्वारा राज्य, जिला, विकासखंड एवं आंगनबाड़ी स्तर पर व्यापक पैमाने पर कुपोषण एवं एनीमिया की रोकथाम के लिए स्वस्थ जीवनशैली, पौष्टिक आहार, योग गतिविधियां का प्रचार-प्रसार एवं आयोजन किया गया। खाद्य विभाग के सहयोग से सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से जन समुदाय के मध्य पौष्टिक आहार के सेवन के संबंध में प्रचार प्रसार किया गया। ग्राम पंचायतों में पोषण विषय पर विशेष चर्चा की गई।

पोषण माह के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ अन्य सहयोगी विभागों द्वारा सक्रिय रूप से सहभागिता दी गई एवं सभी विभागों द्वारा समन्वित रूप से पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय पौष्टिक आहार, स्वस्थ्य जीवनशैली, पोषण के साथ पढ़ाई का संदेश जनसमुदाय तक पहुंचाया गया।

लखपति दीदी ममता राय की प्रेरणादायक कहानी पढिए

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एमसीबी। जिले की ममता राय, जो पहले एक साधारण गृहिणी थी। आज लखपति दीदी की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं। उनकी यह सफलता की यात्रा प्रगति महिला स्वसहायता समूह से जुड़ने के बाद शुरू हुई। समूह से जुड़कर ममता राय ने 60,000 रुपये का CIF लोन लिया और अपने स्वंयम का किराना दुकान शुरू किया। सिर्फ किराना दुकान तक ही सीमित न रहते हुए, ममता राय ने समूह के साथ मिलकर अचार, आलू चिप्स और तिलौरी बनाने का काम भी शुरू किया। उनकी मेहनत और लगन का ही परिणाम है कि आज उनकी महीने की आय 6 से 7 हजार रुपये के बीच होती है और उनकी सालाना आय 1 लाख रुपये से भी अधिक है। उन्होंने अपने गाँव की अन्य महिलाओं के उत्थान के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए।

ग्राम पंचायत की महिलाओं और सभी समूहों की दीदियों के साथ मिलकर बीमा, आयुष्मान कार्ड बनवाने व शासकीय योजनाओं के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य करती हैं। ममता राय अपने समूह और गाँव की महिलाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें उनके अधिकारों और लाभों के प्रति जागरूक कर रही हैं। उनके इस प्रयास से गांव की महिलाओं को सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ मिल रहा है और वे आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। आज ममता राय न सिर्फ आर्थिक रूप से स्वतंत्र है बल्कि उन्होंने अपने परिवार और समाज में एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनका यह साहस और आत्मविश्वास दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। ममता राय का यह सफर उन सभी महिलाओं को प्रेरित करता है जो अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से अपनी पहचान बनाना चाहती है।

मलेरिया व डायरिया पीड़ित मरीजों को देखने सिम्स और जिला अस्पताल पहुंचे कलेक्टर

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रायपुर। बिलासपुर कलेक्टर अवनीश शरण ने आज सिम्स और जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। इलाज करा रहे मरीजों से मुलाकात कर कुशलक्षेम पूछा। उनका अच्छे से देखरेख और इलाज करने के निर्देश डॉक्टरों को दिए। उन्होंने यहां मलेरिया और डायरिया के मरीजों के लिए बेड बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि जिला अस्पताल में मलेरिया और डायरिया प्रभावित मरीजों के लिए आपात स्थिति में 15 आईसीयू के बेड और 20 सामान्य बेड बढ़ाया जाए।

इसी प्रकार सिम्स में 10 आईसीयू बेड बढ़ाने कहा। कलेक्टर अवनीश शरण ने मरीजों की बेहतर निगरानी और इलाज के निर्देश दिए हैं। ग्रामीणों को समझाइश दी गई है कि किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य की समस्या होने पर झाड़-फूंक या झोलाछाप डॉक्टर से इलाज न कराकर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र जाकर इलाज कराएं।

उन्होंने प्रभावित गांवों में जनचौपाल लगाकर लोगों में जागरूकता फैलाने को कहा है ताकि वर्षा जनित बीमारियों से बचा जा सके। उन्होंने सभी चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों को मुख्यालय में रहने निर्देशित किया है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वर्षाकाल में जलजनित बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करें और संक्रमण की जानकारी मिलने पर त्वरित स्वास्थ्य शिविर लगाकर उपचार करना सुनिष्चित करें।

कलेक्टर ने जिले में डायरिया के प्रभाव को नियंत्रित करने हेतु जनचौपाल एवं क्षेत्र भ्रमण के निर्देश पर जिला प्रशासन, राजस्व एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मदनपुर में स्वास्थ्य चौपाल लगाया। टीम ने गली कूचों का भ्रमण कर साफ सफाई व्यवस्था का जायज़ा लिया। जिसमें ग्रामीणों को जागरूक करते हुए उन्हें स्वच्छ जल सहित खान-पान की जानकारी दी गई। इस दौरान पानी उबाल कर पीना है - डायरिया को  दूर करना है का स्लोगन भी दिया गया। गांव में मितानिनों एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा डोर टू डोर सर्वे कर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हे जागरूक किया जाकर ओआरएस एवं दवाई का वितरण किया जा रहा है। पीएचई विभाग द्वारा स्वच्छ जल आपूर्ति हेतु टंकी की सफाई कराकर सभी बोर को क्लोरिन डाला गया। नालियों की सफाई सहित ब्लीचिंग छिड़काव भी कराया जा रहा है।

कलेक्टर के निर्देश पर जिले के सभी गांवों में हर शनिवार को स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। मौसमी बीमारियों जैसे डायारिया मलेरिया के प्रति आम जन को जागरूक करने हेतु जनचौपाल आयोजित किया जा रहा है। चौपाल में हाथ धुलाई ,स्वास्थ्य परीक्षण, दवा वितरण एवं  जनजागरुकता का कार्य किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूह की महिला एवं मितानिन द्वारा घर-घर जाकर मौसमी बीमारी के लक्षण एवं रोकथाम के उपाय से लोगों को जागरूक किया जा रहा है।  सार्वजनिक स्थान मंदिर तालाब ,सड़क ,चौक चौराहों ,गली ,नाली की सफाई रंगमंच सार्वजनिक भवन शाला परिसर आदि में स्वच्छता दीदियों, जनप्रतिनिधियों, पंचायत सचिवों के माध्यम से सामूहिक श्रमदान कर साफ सफाई का कार्य एवं कचरा संग्रहण किया जा रहा है।

एक दिन में 7 लाख से अधिक लोगों ने मतदाता जागरूकता की ली शपथ

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रायपुर। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डाॅ. गौरव सिंह के पहल पर लोकसभा निर्वाचन 2024 के तहत आज मतदाता जागरूकता अभियान में इतिहास रच दिया है। एक ही दिन में 29 विभाग और संस्थान के सात लाख एक हजार आठ सौ इन्क्याबे लोगों ने मतदाता जागरूकता की शपथ ली। साथ ही जिले में 100 प्रतिशत मतदान की अपील की गई।

कलेक्टर डाॅ. सिंह ने कहा कि आज पूरे जिले के विभिन्न कार्यालयों और संस्थानों ने मतदान की शपथ लेकर इतिहास बनाया है। मल्टीलेवल पार्किंग के छत पर बरसते पानी में अधिकारी व कर्मचारियों ने एक साथ मतदान करने की शपथ ली। कलेक्टर ने कहा कि 7 मई को रायपुर जिले में मतदान है। उस दिन जाकर हर परिस्थिति में मतदान करें और दूसरों को भी मतदान करने के लिए प्रेरित करें।

कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन, जनपद ग्राम पंचायत रायपुर, शासकीय विद्यालय, मत्स्य विभाग, नालंदा, सेंट्रल व तक्षशिला लाइब्रेरी, महिला एवं बाल विकास, उद्यानिकी विभाग, तहसील कार्यालय रायपुर एवं धरसीवां, लोक निर्माण विभाग, समाज कल्याण विभाग, सांख्यिकी विभाग, निर्माण विभाग, विधिक मापविज्ञान, महानदी जलाशय परियोजना, छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण, जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति,

मनरेगा पशु चिकित्सा विभाग, कलिंगा यूनिवर्सिटी, जिला सहकारिता विभाग, कार्यपालन अभियंता तिल्दा नेवरा, कृषि विभाग नगर पालिका मंदिरहसौद, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, इंडस्ट्रियल एरिया, नगर निगम रायपुर एवं बीरगांव, कार्मिक विभाग रायपुर मंडल दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बैंक इत्यादि स्थानों पर सामूहिक तौर पर मतदाता जागरूकता की शपथ ली गई।

 

प्राधिकार-पत्र धारी मीडिया प्रतिनिधि डाक मतपत्र से कर सकते हैं मतदान

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रायपुर। अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने कहा है कि निर्वाचन की पूरी प्रणाली में मीडिया सेतु के रूप में सशक्त भूमिका निभाती है। उसकी सक्रियता से न केवल मतदाताओं में निर्वाचन के प्रति जागरूकता बढ़ती है, बल्कि वो निर्वाचन तंत्र को भी सजग और अधिक निष्पक्ष बनाएं रखती है। क्षीरसागर ने मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधियों के लिए निर्वाचन संबंधी एक दिवसीय उन्मुखीकरण तथा कार्यशाला को संबोधित करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किए।

अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी क्षीरसागर ने कार्यशाला में कहा कि आज इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईव्हीएम) को लेकर कोई संदेह नहीं रह गया है। इस पर उठने वाली शंकाएं निराधार ही साबित हुई हैं। उन्होंने बताया कि इसके संचालन के लिए निश्चित प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है जो पूर्ण रूप से पारदर्शी प्रक्रिया के तहत होता है। पत्रकार निर्वाचन के दौरान अन्य विभागों के साथ ही अति आवश्यक सेवा में होते हैं। ऐसे में उनके मतदाता के तौर पर कर्तव्य पूरा करने में डाक मतपत्र की सुविधा भारत निर्वाचन आयोग की बड़ी पहल है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्रीमती रीना बाबासाहेब कंगाले के निर्देश पर आज रायपुर के नवीन विश्राम भवन में आयोजित मीडिया कार्यशाला में निर्वाचन संबंधी विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए जनसंपर्क विभाग के आयुक्त मयंक श्रीवास्तव ने उम्मीद जताई कि आज की कार्यशाला में दी गई जानकारी पत्रकारों को निर्वाचन संबंधी सूचनाओं और जानकारियों को प्रसारित व प्रचारित करने में इलेक्शन मशीनरी का सहयोग करने में उपयोगी होगी। उन्होंने कहा कि इलेक्शन मशीनरी और इसमें लगे अधिकारियों-कर्मचारियों की विशेषज्ञता और निष्पक्षता संदेह से परे है।

उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनय अग्रवाल ने कार्यशाला में निर्वाचन प्रक्रिया में प्रौद्योगिकी के उपयोग को रेखांकित करते हुए आम जन से लेकर अभ्यर्थियों के लिए तैयार भारत निर्वाचन आयोग के पोर्टल्स तथा मोबाइल एप्लीकेशन्स की जानकारी दी। सहायक मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्रीमती शारदा अग्रवाल ने पेड न्यूज़, मीडिया मॉनिटरिंग सेल तथा मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति (एमसीएमसी) के कार्यों के बारे में बताया।

कार्यशाला में सहायक मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रूपेश वर्मा और उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी यू.एस. अग्रवाल ने ईव्हीएम की कार्यप्रणाली का उल्लेख करते हुए इसकी सुरक्षा में बरती जाने वाली सावधानियों तथा इसकी पारदर्शी प्रणाली की जानकारी दी। कार्यशाला में राजधानी रायपुर के विभिन्न मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता देकर विषय विशेषज्ञों से सवाल-जवाब के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया।

 

बिना लिखित पूर्व अनुमति के ध्वनि विस्तारक यंत्रों के प्रयोग को आगामी आदेश तक प्रतिबंधित

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महासमुंद। माननीय उच्चतम न्यायालय एवं छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने हेतु दिए गए निर्देशानुसार विद्यार्थियों की पढ़ाई एवं परीक्षा, वृद्धाओं, निःशक्तजनों, रोगियों आदि की बाधा एवं लोक शांति को ध्यान में रखते हुए कोलाहल अधिनियम 1985 की धारा 04 एवं 05 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी प्रभात मलिक ने जिले की सीमा के अंतर्गत बिना लिखित पूर्वानुमति के ध्वनि विस्तारक यंत्रों के प्रयोग को आगामी आदेश तक प्रतिबंधित किया है।

कलेक्टर प्रभात मलिक द्वारा ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने एवं मल्टी टोन हॉर्न, प्रेसर हॉर्न के साथ-साथ डी.जे. के विरुद्ध जप्तीकरण की कार्यवाही किए जाने तथा सम्यक जांच एवं जागरूकता अभियान चलाने के लिए संबंधित अनुविभागीय अधिकारी, कार्यपालिक अधिकारी, थाना प्रभारी, नगर पालिका  अधिकारियों का दल गठित किया गया है। गठित दल अपने-अपने थाना क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 एवं ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम 2010 के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित कराते हुए समय-समय पर स्थल निरीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे।

छत्तीसगढ़ में 15 जनवरी से 15 फरवरी तक सड़क सुरक्षा माह आयोजित किया जाएगा

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में 15 जनवरी से 15 फरवरी तक नागरिकों और सड़क उपयोगकर्ताओं को सड़क सुरक्षा की गंभीरता और चुनौतियों के बारे में जागरूक करने के उद्देश्य से सड़क सुरक्षा माह 2024 आयोजित किया जाएगा। सड़क सुरक्षा माह के दौरान प्रदेश के सभी जिलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

सड़क सुरक्षा माह 2024 के अंतर्गत शिक्षा, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, नगरीय प्रशासन, परिवहन, पुलिस विभाग, एन.सी.सी, एन.एस.एस., स्काउट गाइड्स एवं स्वयंसेवी और समाजसेवी संस्थाओं तथा विभिन्न संबंधित विभागों के समन्वय और सहयोग से सड़क उपयोगकर्ताओं, विशेष रूप से वाहन चालकों, विद्यार्थियों के प्रशिक्षण, कार्यशाला, सेमीनार, नेत्र जांच शिविर सहित सड़क सुरक्षा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इसके साथ ही लोगों के बीच सड़क सुरक्षा की समस्याओं तथा समाधान का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। यह जागरूकता अभियान सड़क दुर्घटना में होने वाली मृत्यु एवं घायलों की संख्या कम करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगा। सड़क सुरक्षा माह के शुभारंभ के साथ जनजागरूकता हेलमेट रैली, सड़क सुरक्षा पर प्रशिक्षण कार्यक्रम, ऑटो वाहन चालकों का प्रशिक्षण, स्वास्थ्य परीक्षण, आंखों के जांच शिविर आयोजित किए जाएंगे।

इसके अलावा स्कूल दिवस आयोजित किया जाएगा। स्कूली बच्चों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए स्लोगन, निबंध, चित्रकला, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाएगा। इसके साथ ई रिक्शा वाहन चालकों का प्रशिक्षण, बस वाहन चालकों का प्रशिक्षण, गणतंत्र दिवस समारोह में सड़क सुरक्षा पर झांकी एवं बैनर, पोस्टर, फ्लैक्स, एम्बुलेंस ड्रायविंग ट्रेनिग, वाहनों का फिटनेस, रेडियम स्ट्रिप्स आदि जांच संधारण, शराब सेवन कर वाहन चालन से होने वाले नुकसान पर रैली आयोजित की जाएगी।

इसी प्रकार ग्राम चौपाल में जन जागरूकता के कार्यक्रम, गंभीर सड़क दुर्घटना स्थलों के चिन्हांकन, सड़क सुरक्षा मितानों का प्रशिक्षण, युवाओं के लिये एरोबिक्स जुम्बा के माध्यम से ‘‘स्वस्थ शरीर रखे स्वस्थ मन, स्वस्थ मन रखेे सुरक्षित जन‘‘ कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। हेलमेट धारी वाहन चालकों को प्रोत्साहन स्वरूप टाफी वितरण सहित स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सड़क सुरक्षा माह 2024 के आयोजन के संबंध में अंतर्विभागीय लीड एजेंसी (सड़क सुरक्षा) के अध्यक्ष संजय शर्मा ने सभी कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को पत्र जारी किया है।

विकसित भारत संकल्प यात्रा से जुड़ रहे ग्रामवासी, योजनाओं का मिल रहा लाभ

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रायगढ़। विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में नागरिकों के बीच जागरूकता पैदा करने और योजनाओं के शत-प्रतिशत संतृप्ति के लिए उनकी भागीदारी को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गांव-गांव में विकसित भारत संकल्प यात्रा चलाया जा रहा है। विकसित भारत संकल्प यात्रा का यह सफर रायगढ़ जिले में भी निरंतर जारी है।

इसी कड़ी में आज जिले के विकासखण्ड धरमजयगढ़ के ग्राम-साजापाली एवं जमाबीरा, घरघोड़ा के कोसमघाट एवं पूरी, लैलूंगा के मुड़ागांव एवं कोड़़ासिया, रायगढ़ के पंडरीपानी पूर्व एवं गोपालपुर तथा तमनार विकासखण्ड के ग्राम-उरबा एवं पेलमा में विकसित भारत संकल्प यात्रा का आयोजन किया गया। यहां मौके पर विभिन्न विभागों द्वारा विभागीय योजनाओं से संबंधित स्टॉल भी लगाये गये थे। जिससे पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा शिविर में आये ग्रामीणों का स्वास्थ्य जांच के साथ सिकल सेल के मरीजों की भी जांच की गई। मौके पर प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को अभिनंदन पत्र वितरित किए गए। मौके पर लोगों ने स्वच्छता की शपथ भी ली।

लाभान्वित हितग्राहियों ने साझा किये अपने अनुभव

कार्यक्रम में मेरी कहानी-मेरी जुबानी के माध्यम से केन्द्र सरकार की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों ने अपने अनुभव साझा किये। कोसमघाट की शारदा राठिया का कहना कि ग्रामीण अंचलों में निवासरत लोगों के लिए पक्के का मकान सपने जैसा होता है, लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना की मदद से पक्के मकान का सपना पूरा हुआ और आज हमें इस शिविर के माध्यम से मकान का अभिनंदन पत्र भी जारी हो गया है। इसी तरह शिविर में आये जयराम राठिया ने बताया कि उसके घर में पहले शौचालय नहीं था, जिससे काफी कठिनाई होती थी। 

लेकिन आज केन्द्र सरकार की योजना स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत उनके घर में शौचालय की सुविधा हो गई। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री को सहृदय धन्यवाद दिया। ग्राम-पूरी की कविता बेहरा ने बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से उनके जीवन में समय की बचत के साथ-साथ धुएं से राहत मिली है। पहले वे चूल्हे में खाना बनाती थी, जिससे निकलने वाले धुुएं से उन्हे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझना पड़ता था। शिविर में आकर समस्त दस्तावेज जमा करने पर उन्हें तुरन्त उज्जवला गैस का कनेक्शन मिल गया। अब उन्हे खाना बनाने में आसानी होगी।

जिले के इन गांवों में कल पहुंचेंगी विकसित भारत संकल्प यात्रा का वैन

विकसित भारत संकल्प यात्रा का वैन कल 20 दिसम्बर को जिले के इन गांवों में पहुंचेगी। जहां केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के संबंध में लोगों को जानकारी दी जाएगी। इनमें धरमजयगढ़ विकासखण्ड के ग्राम-सिसरिंगा एवं सोहनपुर, वि.ख.घरघोड़ा के ग्राम-कुडुमकेला एवं पुसल्दा, वि.खं रायगढ़ के कोतरलिया एवं कोटमार, वि.ख.तमनार के गारे एवं सराईटोला शामिल है।

 

स्वीप मेहंदी प्रतियोगिता में महिलाओं ने अपने हाथ पर लिखा - ‘‘मतदान हमारा अधिकार है’’

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महासमुन्द।  जिले में आज करवा चौथ के अवसर पर महिलाओं द्वारा स्वीप मेहंदी प्रतियोगिता आयोजित कर मतदाता जागरूकता का संदेश दिया गया। प्रतियोगिता में मतदान से संबंधित रोचक और संदेशप्रद स्लोगन लिखकर हाथों में  मेहंदी लगाई गई। इस अवसर पर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी प्रभात मलिक भी प्रतियोगिता में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे और प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाया। 

उन्होंने कहा कि महिलाओं द्वारा अपने हाथों में मेहंदी रचाकर दिया गया संदेश अवश्य जागरूकता लाएगी। उन्होंने कहा कि पूरे जिले में महासमुंद शहर का मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत कम है जिसे बढ़ाने की जिम्मेदारी हम सब की है। उन्होंने मौजूद सभी प्रतिभागियों के माध्यम से संदेश दिया कि महिलाएं अपने स्वयं का वोट देकर अपने आस-पास, घर-परिवार के महिलाओं और लोगों को भी वोट डालने के लिए प्रेरित करें और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अपने मताधिकार का उपयोग करें।


कलेक्टर प्रभात मलिक ने कहा - आपके द्वारा दिए गए संदेश से लोगों में जागरूकता आएगी

कार्यक्रम में एस. आलोक मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत एवं नोडल अधिकारी जिला स्वीप समिति महासमुन्द, समीर पांडेय जिला परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रीमती संगीता सिंह उप संचालक समाज कल्याण विभाग, रेखराज शर्मा जिला परियोजना अधिकारी जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण महासमुंद एवं सहायक नोडल अधिकारी जिला स्वीप समिति महासमुंद उपस्थित थे। प्रतियोगिता में अर्पिता साहू प्रथम, पूर्णिमा देवदास द्वितीय, ललीता तृतीय स्थान पर रही। कलेक्टर प्रभात मलिक के द्वारा मोमेंटो प्रदान कर विजयी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में किरित सोनी ने मतदान कविता सुनाई तथा नवीन मतदाता कुमारी तान्या साहू ने मतदान शपथ दिलाई। कार्यक्रम में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर व्याख्यान समीर पांडेय एवं सुधा रात्रे ने दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में शैल नाविक परियोजना अधिकारी शहरी/चक्रवर्ती परियोजना अधिकारी ग्रामीण महिला एवं बाल विकास विभाग खेमराज चौधरी बाल संरक्षण अधिकारी एवं अभिषेक सिंह, सुधा रात्रे, सुलेखा शर्मा,धनेश यादव, वेदप्रकाश साहू, अन्य सहयोगियों का योगदान रहा।

इसके अलावा बसना के भंवरपुर में करवा चौथ स्वीप मेहंदी प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। जिसमें महिलाओं ने अपने हाथों पर मेहंदी लगाकर मतदान करने की अपील की। स्वीप के नोडल अधिकारी मैनेजमेंट रेखराज शर्मा ने बताया कि जिले में निवासरत विशेष पिछड़ी कमार जनजाति के मतदान प्रतिशत को बढ़ाने भी उनके घर-घर जाकर मतदान के महत्व को बताया जा रहा है। आज सिरपुर के कमार डेरा सहित ग्राम सोनासिल्ली, भिथीडीह, जोरातराई, केशवा, कोलपदर, कुर्रूभाठा गांव में कमार जनजाति के लोगों द्वारा शत प्रतिशत मतदान करने की शपथ ली गई।

हरेली के मौके पर हर घर कम से कम एक पौधा लगाने मुख्यमंत्री की अपील,

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हरेली तिहार के मौके पर प्रदेशवासियों से कम से कम एक पौधा लगाने की अपील की है। साथ ही पौधरोपण को लेकर जागरूकता बढ़ाने प्रदेश के नागरिकों से पौधरोपण करते हुए अपनी फोटो सोशल मीडिया में अपलोड करने का आग्रह भी किया है। 

मुख्यमंत्री ने अपने अपील में कहा है कि न केवल लोग हरीतिमा बढ़ाने अपने घरों में पौधे लगाएं अपितु लोगों को भी इसके लिए चैलेंज दें और उन्हें भी कहें कि पौधरोपण करते हुए अपनी फोटो सोशल मीडिया में अपलोड करें। इसके लिए प्रदेश में हरीतिमा का दायरा बढ़ाने प्रदेश के सभी गांवों में वन विभाग द्वारा ग्रामीणों को अपने घरों में रोपने पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। विभाग के अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दिये हैं।

पीसीसीएफ व्ही. श्रीनिवास राव ने बताया कि मुख्यमंत्री महोदय की मंशा है कि प्रदेश में हरीतिमा का दायरा बढ़े। पर्यावरण को सहेजने के लिए ग्रामीणों की सहभागिता भी लें। जो लोग पर्यावरण को सहेजने अपने घर में पौधा लगाना चाहते हैं। उन्हें वन विभाग की ओर से पौधा उपलब्ध कराने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये हैं इसके अनुरूप ग्रामीण क्षेत्र में सभी इच्छुक ग्रामीणों को पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि हरेली प्रदेश का प्रमुख त्योहार है। सभी लोग इसे उत्साह से मनाएंगे और पौधरोपण भी करेंगे। ऐसे में यदि पौधारोपण करने वाले लोग पौधा लगाते हुए अपनी फोटो भी सोशल मीडिया पर अपलोड करेंगे तो पौधरोपण के लिए सुंदर माहौल छत्तीसगढ़ में तैयार होगा।

उल्लेखनीय है कि हरेली का मौका छत्तीसगढ़ में खास उत्सव का मौका होता है जब बारिश की वजह से चारों ओर हरीतिमा नजर आती है। इस मौके पर पौधरोपण किये जाने से इसके पनपने की संभावना भी अधिक होती है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर वन विभाग द्वारा कार्रवाई तेजी से की जा रही है। सभी वनमंडलों में बीटगार्ड्स को पौधे उपलब्ध कराए गये हैं ताकि इन्हें गांव-गांव में पौधरोपण के इच्छुक ग्रामीणों को निःशुल्क उपलब्ध कराया जा सके।

हैशटैग # हरियर _हरेली के साथ करें साझा

मुख्यमंत्री ने इस मौके पर सभी प्रदेशवासियों से हरेली त्योहार पर पौधा लगाने की अपील की है। उन्होंने पौधे के साथ अपनी तस्वीर सोशल मीडिया के माध्यम से हैशटैग # हरियर _हरेली के साथ लिखकर साझा करने की अपील की है। सोशल मीडिया में पौधरोपण करने वाली तस्वीर के साथ यह संदेश भी जरूर लिखें। ‘‘हरेली तिहार है हरियाली का और हरियाली ही तो श्रृंगार है हमारी छत्तीसगढ़ महतारी का।’’ हरे भरे पेड़ सिर्फ आँखों को सुखद लगने वाली हरियाली भर नहीं है वे धरती के जेवर हैं। धरती को सजाने की जिम्मेदारी हम सबकी है। आभूषणों से सजी धरती मां से मिला आशीष हम सबके जीवन को समृद्ध करेगा।

छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का आगाज हरेली त्योहार से : राजीव युवा मितान क्लब से लेकर राज्य स्तर तक छह स्तरों में होंगे आयोजन

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रायपुर। पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी छत्तीसगढ़िया ओलम्पिक 2023-24 का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर और खेल एवं युवा कल्याण मंत्री उमेश पटेल के निर्देशन में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेलों को प्रोत्साहित करने, खेलों के प्रति जागरूकता फैलाने, खिलाड़ियों को मंच प्रदान करने और खेल भावना का विकास करने के उद्देश्य से शुरू किए गए छत्तीसगढ़िया ओलम्पिक 2023-24 का आगाज हरेली त्योहार के दिन 17 जुलाई से होगा।
                 

लगभग 2 माह 10 दिन तक चलने वाले यह खेल प्रतियोगिता 6 चरणों में आयोजित होगी। इस खेल प्रतियोगिता में बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक हिस्सा ले सकेंगे। प्रतियोगिता में दलीय एवं एकल श्रेणी में 16 तरह के पारम्परिक खेलों को शामिल किया गया है। इस बार के ओलंपिक में एकल श्रेणी में रस्सीकूद एवं कुश्ती को भी जोड़ा गया है। छत्तीसगढ़िया ओलम्पिक के आयोजन का दायित्व ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और नगरीय क्षेत्रों के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को सौंपा गया है। प्रतियोगिता का समापन 27 सितंबर 2023 को होगा।

दो श्रेणियों में 16 प्रकार के खेलों को किया गया है शामिल

छत्तीसगढ़ के पारम्परिक खेल प्रतियोगिता दलीय व एकल दो श्रेणी में आयोजित होगी। छत्तीसगढ़िया ओलम्पिक में दलीय श्रेणी में गिल्ली डंडा, पिट्टूल, संखली, लंगड़ी दौड़, कबड्डी, खो-खो, रस्साकसी और बांटी (कंचा) जैसी खेल विधाएं शामिल की गई हैं। वहीं एकल श्रेणी की खेल विधा में बिल्लस, फुगड़ी, गेड़ी दौड़, भंवरा, 100 मीटर दौड़, लम्बी कूद, रस्सी कूद एवं कुश्ती शामिल हैं।

राजीव युवा मितान क्लब से शुरू होगी प्रतियोगिता

छत्तीसगढ़िया ओलम्पिक का आयोजन ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में सबसे पहले राजीव युवा मितान क्लब स्तर पर प्रतियोगिता 17 जुलाई से 22 जुलाई तक नॉकआउट पद्धति से होगा। वहीं दूसरा स्तर जोन है, जिसमें 8 राजीव युवा मितान क्लब को मिलाकर एक क्लब होगा। इसका आयोजन 26 जुलाई से 31 जुलाई तक होगा।  विकासखंड एवं नगरीय क्लस्टर स्तर पर आयोजन 7 अगस्त से 21 अगस्त तक होगा। जिला स्तर पर आयोजन 25 अगस्त से 04 सितंबर तक होगा। संभाग स्तर पर आयोजन 10 सितंबर से 20 सितंबर तक होगा और अंतिम में राज्य स्तर खेल प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। जिसका की आयोजन 25 सितंबर से 27 सितंबर तक होगा।

प्रत्येक आयु वर्ग के प्रतिभागी ले सकेंगे हिस्सा

छत्तीसगढ़िया ओलम्पिक में आयु वर्ग को तीन वर्गों में बांटा गया है। इसमें प्रथम वर्ग 18 वर्ष की आयु तक, दूसरा वर्ग 18-40 वर्ष आयु सीमा तक और तीसरा वर्ग में 40 वर्ष से अधिक उम्र के प्रतिभागी शामिल होंगे। इस प्रतियोगिता में महिला एवं पुरुष दोनों वर्ग में प्रतिभागी भाग ले सकेंगे।

विजेता प्रतिभागियों को दिया जाएगा पुरस्कार

छत्तीसगढ़िया ओलंपिक में विकासखंड व नगरीय क्लस्टर स्तर पर विजेता प्रतिभागियों से लेकर राज्य स्तर के विजेता प्रतिभागियों को प्रभाणपत्र एवं पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। विकासखंड व नगरीय क्लस्टर स्तर प्रथम आने वाल विजेता खिलाड़ियों को 1000 रूपए, द्वितीय स्थान आने पर 750 रूपए एवं तीसरा स्थान आने पर 500 रूपए की पुरस्कार राशि एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे। इसी तरह जिला स्तर पर प्रथम आने वाल विजेता प्रतिभागियों को 2000 रूपए की राशि, द्वितीय आने पर 1500 रूपए और तीसरे स्थान आने पर 1000 रूपए की राशि सहित प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे। संभाग स्तर पर विजेता प्रतियोगियों को प्रथम आने पर 3000 रूपए, द्वितीय आने पर 2500 रूपए एवं तीसरे स्थान पाने वाले खिलाड़ियों को 2000 रूपए एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे। राज्य स्तर पर ओलंपिक के अंतिम आयोजन में प्रथम आने वाले प्रतिभागियों को 5000 रूपए, द्वितीय आने पर 4500 रूपए एवं तीसरे स्थान आने वाले खिलाड़ियों को 4000 रूपए की राशि और प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।

प्राथमिक चिकित्सा सुविधा रहेगी उपलब्ध

प्रत्येक आयोजन स्तर पर फर्स्ट एड किट की व्यवस्था एवं  स्थानीय स्तर पर यथासंभव आपातकालीन चिकित्सा सुविधा की उपलब्धता आयोजन समिति द्वारा की जाएगी। आयोजन स्थल पर एंबुलेंस व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी जिम्मेदारी आयोजन समिति पर होगी। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के द्वारा जारी निर्देशानुसार महिला खिलाड़ियों के लिए रेफरी एवं निर्णायक महिलाएं ही रखी जाएंगी। इसके अलावा विभाग द्वारा आयोजन के सभी स्तर पर खिलाड़ियों से मान्य पहचान प्रमाण पत्र लिया जाना अनिवार्य किया गया है।


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