Media24Media.com: जनसूचना अधिकारियों पर जुर्माना

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4 जनसूचना अधिकारियों पर लगा 25-25 हजार का जुर्माना, समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराने पर कार्रवाई

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रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के राज्य सूचना आयुक्त मनोज त्रिवेदी ने समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराने वाले और सूचना का अधिकार अधिनियम का पालन नहीं करने वाले 4 जनसूचना अधिकारी पर 25-25 हजार रूपए का जुर्माना लगाया गया है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत को निर्देश दिए हैं कि जुर्माने की राशि संबंधित से वसूली कर शासकीय कोष में जमा कराकर आयोग को सूचित करें। लोकतंत्र में पारदर्शी शासन व्यवस्था की यह निशानदेही होती है कि उनके सभी नागरिकों को शासन व्यवस्था की संपूर्ण गतिविधियों की सूचना प्राप्त करने का मौलिक अधिकार हो। 

सूचना का अधिकार का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक जागरूक नागरिक को उनकी इच्छित सूचनाएं आसानी से उपलब्ध करवाना है। अगर कोई विभाग या संस्था जानकारी देने से इनकार करता है तो उनके खिलाफ सूचना आयोग में शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है। इस अधिनियम की मदद से सभी नागरिक को सूचना संपन्न बनाना, सरकार की कार्यप्रणाली को पारदर्शी और अधिक उतरदायी शासन व्यवस्था की ओर ले जाना हैं। सूचना किसी भी रूप में हो सकता है। प्रिंट मीडिया, मॉस मीडिया, वेब मीडिया ईमेल, जनमत, रिपोर्ट, कागज, संवाद, रिपोर्ट और आकड़े, एडवर्टाइजिंग के रूप में हो सकता है। 

आवंटित राशि और कार्यों की मांगी थी सूची  

सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत केएस क्षत्री नगर पालिक निगम कॉलोनी कोरबा ने जन सूचना अधिकारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत कोरबा को एक सितंबर 2016 को आवेदन देकर ग्राम पंचायत बेंदरकोना जनपद पंचायत कोरबा को शासकीय योजनान्तर्गत जनवरी 2015 से 15 अगस्त 2016 तक आवंटित राशि और कार्यों की सूची की मांग किया था। जानकारी समय में प्राप्त नहीं होने पर प्रथम अपील किया, लेकिन प्रथम अपीलीय अधिकारी के निर्णय नहीं दिए जाने से आयोग में द्वितीय अपील किया। 

राज्य सूचना आयुक्त ने की कार्रवाई

राज्य सूचना आयुक्त त्रिवेदी ने आयोग में सुनवाई के लिए जनसूचना अधिकारी को बार-बार नोटिस दिए जाने के बाद भी आयोग को कोई जवाब नहीं प्रस्तुत किया। आयोग की तरफ से जिला पंचायत कोरबा और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग छ.ग. शासन के माध्यम से जनसूचना अधिकारी को निर्देशित किया गया कि आवेदक को चाही गई जानकारी निशुल्क पंजीकृत डाक से प्रदाय कर पावती प्रस्तुत करें। आयोग के द्वारा जारी नोटिस के बाद जनसूचना अधिकारी आराध्या कमार मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत कोरबा के द्वारा कोई जवाब नहीं देने के कारण त्रिवेदी ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत 25 हजार रूपए का जुर्माना लगाया गया है। 

अधिरोपित जुर्माना की राशि की वसूलने के निर्देश

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कोरबा को निर्देशित किया गया कि अधिरोपित जुर्माना की राशि की वसूली कर शासकीय कोष में जमा कराकर आयेग को सूचित करें। एक अन्य प्रक्ररण में शिकायतकर्ता रामकुमार यादव केदारपुर अंबिकापुर ने जनसूचना अधिकारी वन संरक्षक सरगुजा वृत अंबिकापुर के द्वारा आयोग के प्रकरण में दिए आदेश का पालन नहीं करने का आरोप लगाया। तत्कालीन जनसूचना अधिकारी वन संरक्षक सरगुजा वृत अंबिकापुर जाधव श्रीकृष्ण द्वारा शिकायतकर्ता को जानकारी से वंचित रखा, जिस पर आयुक्त त्रिवेदी ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत 25 हजार रूपए का अर्थदंड लगाया है।

500 क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने  के आदेश

वहीं 500 रूपए क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने आदेश पारित किया गया। आवेदक रामेश्वर ठाकुर टीपी नगर कोरबा ने जनसूचना अधिकारी ग्राम पंचायत मुढुनारा जनपद पंचायत कोरबा को 28 नवंबर 2017 का आवेदन देकर एक फरवरी 2015 से 30 नवंबर 2017 पंचायत में पारित प्रस्ताव बैक से राशि आहरण कर हितग्राहियों का नाम, पता जिसे भुगतान किया गया उसकी रसीद या चेकबुक की छायाप्रति की मांग किया। जानकारी नहीं मिलने पर प्रथम अपील किया और प्रथम अपीलीय अधिकारी के द्वारा निर्णय नहीं दिए जाने के कारण आयोग में द्वितीय अपील किया। आयोग में सुनवाई के लिए जनसूचना अधिकारी को बार-बार नोटिस दिए जाने के बाद भी आयोग को कोई जवाब नहीं प्रस्तुत किया। तत्कालीन जनसूचना अधिकारी पर 25 हजार रूपए का जुर्माना लगाया गया।

कोई जवाब नहीं प्रस्तुत करने पर कार्रवाई

अपीलार्थी विवेक चौबे कवर्धा ने ग्राम पंचायत शीतलपानी के जनसूचना अधिकारी को 25 नवंबर 2016 का आवेदन कर एक जनवरी 2014 से 30 अक्टूबर 2016 तक पंचायत के आय-व्यय की रोकड़ बही की छायाप्रति की मांग की। जानकारी नहीं मिलने पर प्रथम अपील किया और प्रथम अपीलीय अधिकारी के द्वारा निर्णय नहीं दिए जाने के कारण आयोग में द्वितीय अपील किया। आयोग में सुनवाई के लिए तत्कालन जनसूचना अधिकारी लखन लाल मरावी को बार-बार नोटिस दिए जाने के बाद भी आयोग को कोई जवाब नहीं प्रस्तुत किया। आयुक्त मनोज त्रिवेदी ने तत्कालीन जनसूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाया है। वहीं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कबीरधाम को निर्देशित किया गया कि अधिरोपित अर्थदंड की राशि की वसूली कर शासकीय कोष में जमा कराकर आयोग को सूचित करें। इससे पहले भी कई सूचना अधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है।

7 जनसूचना अधिकारियों पर लगा 2 लाख 75 हजार का जुर्माना, समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराने पर कार्रवाई

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रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त एमके अग्रवाल ने बड़ी कार्रवाई की है। आयुक्त ने सूचना का अधिकार अधिनियम का समय पर अनुपालन नहीं करने और समय पर आवेदक को जानकारी उपलब्ध नहीं कराने के कारण 7 जनसूचना अधिकारी पर 2 लाख 75 हजार का जुर्माना लगाया है। उन्होंने जनसूचना अधिकारियों को जुर्माने की राशि तत्काल जमा कर चालान की प्रति आयोग को प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं।  

दरअसल, चिरमिरी के आवेदक कृष्ण कुमार सिंह ने तत्कालीन जनसूचना अधिकारी को 24 नवंबर 2017 को आवेदन देकर मलेरिया विभाग द्वारा क्रय किए गए साल 2012, 2014, 2015 और 2016 की प्रमाणक समेत कैशबुक की छायाप्रति की मांग की थी। जानकारी नहीं मिलने पर उन्होंने 9 जनवरी 2018 को प्रथम अपीलीय अधिकारी को आवेदन दिया, लेकिन प्रथम अपीलीय अधिकारी ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद आवेदक ने आयोग में द्वितीय अपील की। आयोग में जनसूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी को जवाब प्रस्तुत करने समय दिया गया, लेकिन जनसूचना अधिकारी  आशीष करण दास ने आयेग के निर्देशों की अवहेलना की और आयोग की सुनवाई में प्रस्तुत भी नहीं हुए। 

अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा

इस पर कोरिया कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को आयेग की तरफ से जनसूचना अधिकारी  आशीष करण दास को जवाब देने और सुनवाई में उपस्थित होने कहा, लेकिन कोई जवाब प्रस्तुत नहीं करने के कारण राज्य सूचना आयुक्त एके अग्रवाल ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत 25 हजार का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही संचालक स्वास्थ्य सेवाएं को निर्देश दिए कि प्रथम अपीलीय अधिकारी के द्वारा समय पर निराकरण नहीं करने के कारण सचेत किया जाता है कि भविष्य में इस तरह गलती करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।

अपीलार्थी को दी थी गलत जानकारी

एक अन्य प्रक्ररण में रायपुर के आवेदक विवेक टंडन ने आवेदन देकर दुर्ग के वैशालीनगर जनसूचना अधिकारी से केए अप्पल की मां के प्रतिमा की मौत से जुड़ी अंतिम जांच प्रतिवेदन की सत्यापित प्रति की मांग की थी।  के प्रतिमा की मौत 13 जनवरी 2018 को हुई थी, जिसे लेकर आवेदक ने मृतिका की अंतिम पुलिस जांच प्रतिवेदन मिलने की जानकारी मांगी थी। उन्होंने कहा था कि मृतिका का SDM द्वारा नस्तीबद्ध हस्ताक्षर वाला अंतिम जांच प्रतिवेदन की सत्यापित प्रति की उन्हें आवश्यकता है। इसके बाद जनसूचना अधिकारी ने अपीलार्थी को गलत जानकारी देकर भ्रमित किया, जिसके कारण प्रथम अपील का आवेदन 26 नवंबर 2018 को प्रस्तुत किया। 

SP को दिए निर्देश

प्रथम अपीलीय अधिकारी ने कोई फैसला नहीं किया, जिसके बाद आवेदक ने आयोग में द्वितीय अपील की। आयोग में आवेदक के आवेदन और पक्ष को सुना गया। साथ ही जनसूचना अधिकारी को अपना पक्ष रखने और जवाब प्रस्तुत करने का मौका भी दिया गया, लेकिन अधिकारी आयोग की सुनवाई में उपस्थित ही नहीं हुए, जिसके कारण दुर्ग पुलिस अधीक्षक को पत्र जारी कर जनसूचना अधिकारी गोपाल वैश्य निरीक्षक को सुनवाई में उपस्थित होने को कहा गया। 

आयोग के निर्देशों की अवहेलना के कारण कार्रवाई

जनसूचना अधिकारी द्वारा गलत और भ्रामक जानकारी आवेदक को देने और आयोग के निर्देशों की अवहेलना के कारण उस पर 25 हजार का जुर्माना लगाया गया। साथ ही पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए कि वे जुर्माने की राशि की वसूली कर चालान की प्रति आयोग को प्रेषित करें। इसी प्रकार चिरमिरी के कृष्ण कुमार डोमनहिल ने जनसूचना अधिकारी यानी मुख्य नगर पालिका अधिकारी से वित्तीय वर्ष 2015-16 में प्राकृतिक आपदा से बचाव के लिए जारी हुए 20 लाख रूपए को लेकर जानकारी मांगी थी। उन्होंने सूचना अधिकारी से कार्यालय को प्राप्त हुए उस राशि से जो बचाव कार्य किया गया उसकी प्रमाणित प्रति की मांग की थी। 

आयोग ने दोनों पक्षों को सुना

दोनों पक्ष को सुनने के बाद राज्य सूचना आयुक्त अग्रवाल ने जनसूचना अधिकारी शुभेन्दु कुमार श्रीवास्तव पर 25 हजार का जुर्माना लगाया है। पखांजूर के रहने वाले आवेदक देवाशीष राय ने एक मार्च 2018 से 31 मार्च 2020 तक हितग्राहियों को मिलने वाली क्षतिपूर्ति की राशि की वर्षवार सूची की मांग की थी। जानकारी समय पर उपलब्ध कराने में असमर्थ जनसूचना अधिकारी और तहसीलदार शशि शेखर मिश्रा पर 25 हजार का जुर्माना लगाया है। इसी प्रकार अभनपुर की आवेदिका लक्ष्मी शर्मा ने नगर पंचायत अभनपुर के वार्ड क्र. 14 में बस स्टैंड से श्यामजी राइस मिल तक हो रहे नाली और सीसी रोड निर्माण से पूर्व किए गए सीमांकन की छायाप्रति मांगी थी। 

जनसूचना अधिकारी जितेन्द्र कुमार मालेकार पर जुर्माना

वहीं रानीतराई डौंडीलोहारा के गजेन्द्र साहू ने 14 जून 2019 को जनसूचना अधिकारी को आवेदन देकर साल 2017 से आवेदन दिनांक तक 14 वें वित्त मद की बचत खाते से की गई जमा, आहरण संबंधी प्रस्ताव की सत्यापित प्रति की मांग की थी। समय पर जानकारी नहीं देने पर ग्राम पंचायत चिल्हाटीकला के तत्कालीन जनसूचना अधिकारी जितेन्द्र कुमार मालेकार पर 25 हजार का जुर्माना लगाया गया है। रायपुर के बैरनबाजार की आवेदिका मोनिका ने 15 नवंबर 2018 को जनसूचना अधिकारी जिला बाल संरक्षण अधिकारी से किशोर न्याय आदर्श नियम 2016 के मुताबिक मामला लंबित रहने के विषय में प्रारूप 12 अनुसार तिमाही रिपोर्ट मांगी थई।  एक सितंबर 2017 से सितंबर 2018 के मध्य जितनी तिमाही रिपोर्ट बनाई गई है, उसकी छायाप्रति या सॉफ्ट कापी की मांग की थी। 

जनसूचना अधिकारी नवनीत स्वर्णकार पर जुर्माना

जनसूचना अधिकारी के द्वारा समय पर जानकारी नहीं उपलबध कराई गई और राज्य सूचना आयोग के द्वारा सुनवाई में अवसर देने के बाद भी जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने के कारण और दोनों पक्ष को सुनने के बाद राज्य सूचना आयुक्त अग्रवाल ने तत्कालीन जनसूचना अधिकारी नवनीत स्वर्णकार पर जुर्माना लगाया है। साथ ही उन्होंने संचालक महिला एवं बाल विकास को निर्देश दिए है कि वे डेटा एनालिस्ट करण सिंह साहू के खिलाफ स्पष्टीकरण प्राप्त कर अनुशासनात्मक कार्रवाई करें और संबंधित के वेतन से अर्थदंड की राशि वसूलकर शासन के कोष में जमा कराएं।

3 जनसूचना अधिकारियों पर लगा 25-25 हजार का जुर्माना, जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराने पर हुई कार्रवाई

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छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त एमके राउत ने बड़ी कार्रवाई की है। आयुक्त ने सूचना का अधिकार अधिनियम का समय पर अनुपालन नहीं करने और समय पर आवेदक को जानकारी उपलब्ध नहीं कराने के कारण 3 जनसूचना अधिकारी पर 25-25 हजार का जुर्माना लगाया है। मुख्य सूचना आयुक्त राउत ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत महासमुंद को ये भी निर्देश दिए हैं कि जांच कर दोषी पाए जाने पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

उन्होंने जनसूचना अधिकारियों को जुर्माने की राशि तत्काल जमा कर चालान की प्रति आयोग को प्रेषित करने को कहा है। मुख्य सूचना आयुक्त राउत ने कहा है कि सूचना व्यक्ति के जीने और संघर्ष करने की सामर्थ को बढ़ाती है। जो सूचना दे रहा है उसमें सहयोग पारदर्शिता और संयम को विकसित करती है। केंद्र और राज्य सरकारों के अतिरिक्त पंचायतीराज सरथाएं, स्थानीय शासन और गैर-सरकारी संगठन जिन्हें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सरकारी अनुदान प्राप्त होता है, इस कानून में शामिल किया गया है। सरकार के क्रियाकलापों के संबंध में जानकारी के लिए यह अधिनियम मील का पत्थर साबित हो रहा है।

जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराने पर कार्रवाई

सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत विनोद दास बसना ने सचिव ग्राम पंचायत (जनसूचना अधिकारी) बिलेमाल जनपद पंचायत पिथौरा जिला महासमुंद को 19 जुलाई 2018 को आवेदन किया था। आवेदन के जरिए विनोद दास ने एक अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2018 तक ग्राम पंचायत बिलेमाल में 14वें वित आयोग के तहत व्यय और भुगतान किए गए सभी बिल वाउचर और रोकड़ बही की छायाप्रति की जानकारी मांगी थी, लेकिन जनसूचना अधिकारी बिजेमाल ने नियत समय पर आवेदक को कोई जानाकरी उपलब्ध नहीं कराई।

आवेदक ने की थी अपीलीय अधिकारी से शिकायत

इससे व्यथित होकर आवेदक ने प्रथम अपील मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत पिथौरा 13 सितंबर 2018 को आवेदन किया, जिस पर प्रथम अपीलीय अधिकारी ने 02 नवंबर 2018  को निर्णय दिया। प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश का पालन जनसूचना अधिकारी ने नहीं किया गया और न ही अपीलार्थी को जानकारी दिया गया। प्रथम अपीलीय अधिकारी के निर्णय से असंतुष्ट होकर आवेदक ने द्वितीय अपील आयोग में किया।

मुख्य सूचना आयुक्त एमके राउत ने आयोग की सुनवाई

मुख्य सूचना आयुक्त एमके राउत ने आयोग की सुनवाई में जनसूचना अधिकारी के द्वारा समय पर जवाब नहीं देने को गंभीरता से लेते हुए जनसूचना अधिकारी सूचना के द्वारा आवेदक को जानकारी से वंचित रखा गया। जनसूचना अधिकारी ने अपने जवाब में कहा कि पंचायत चुनाव प्रक्रिया और कोविड-19 के तहत क्वारंटाइन सेंटर में ड्यूटी के कारण जानकारी देने में विलंब हुआ। तत्कालीन जनसूचना अधिकारी मुरलीधर साव ने समय पर जानकारी नहीं दी। 

दोषी पाए जाने पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश

प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेशों की अवहेलना की। साथ ही प्रथम अपीलीय अधिकारी का आदेश प्राप्त नहीं होने संबंधी मिथ्या कथन के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा के तहत तत्कालीन जनसूचना अधिकारी  बिलेमाल मुरलीधर साव जनपद पंचायत पिथौरा पर 25 हजार का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत महासमुंद को निर्देशित किए हैं कि जांच कर दोषी पाए जाने पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करें।

एक जनवरी 2017 से 30 सितंबर 2019 तक की मांगी थी जानकारी

इसी प्रकार एक अन्य प्रक्ररण में दास ने सचिव ग्राम पंचायत (जनसूचना अधिकारी) बिलारी (ज) जनपद पंचायत कसडोल जिला महासमुंद को 10 अक्टूबर 2019 में आवेदन कर एक जनवरी 2017 से 30 सितंबर 2019 तक 14वें वित आयोग के तहत व्यय और भुगतान किए गए सभी बिल वाउचर और रोकड़ बही की छायाप्रति की जानकारी मांगी थी। जानकारी प्राप्त नहीं होने के कारण आवेदक ने प्रथम अपीलीय अधिकारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत कसडोल को 28 नवंबर 2019 को आवेदन किया। 

आयोग में नहीं प्रस्तुत किया गया जवाब 

प्रथम अपीलीय अधिकारी कोई विनिश्चय नहीं किया, जिससे क्षुब्ध होकर राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील आवेदन किया। जनसूचना अधिकारी ने अपने जवाब में कहा कि आवेदन प्राप्त नहीं हुआ, जबकि प्रथम अपीलीय अधिकारी ने कहा कि आवेदक को सुनवाई के लिए समय दिया गया, लेकिन आवेदक उपस्थित नहीं हुआ और जनसूचना अधिकारी को जानकारी उपलब्ध कराने निर्देश दिया गया। आयोग ने सचिव ग्राम पंचायत (जनसूचना अधिकारी) बिलारी दौलतराम बर्मन जनपद पंचायत कसडोल नोटिस जारी कर जवाब सहित सुनवाई में उपस्थित होने कहा,  लेकिन बार-बार अवसर देने के बाद भी जनसूचना अधिकारी ने आयोग में नहीं जवाब प्रस्तुत किया और नहीं सुनवाई में उपस्थित हुआ। 

30 दिन के अंदर जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश

मुख्य राज्य सूचना आयुक्त  राउत ने तत्कालीन जनसूचना अधिकारी बिलारी दौलत राम बर्मन जनपद पंचायत कसडोल को 25 हजार रूपए अर्थदंड से अधिरोपित करते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत कसडोल को निर्देशित किए हैं। उन्होंने कहा कि है कि जांच के बाद कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करें और प्रथम अपीलीय अधिकारी को निर्देश दिए कि आवेदक को 30 दिन के अंदर जानकारी निशुल्क उपलब्ध कराएं।

2015-16 से 2018-19 तक किए गए व्यय की जानकारी  

आवेदिका दीपांजलि सरवंश ने जनसूचना अधिकारी जनपद पंचायत सरायपाली को 16 सितंबर 2019 को आवेदन कर 14 वें वित आयोग के तहत साल 2015-16 से 2018-19 तक किए गए व्यय की जानकारी मांगी थी। साथ ही भुगतान किए गए सभी बिल वाउचर और रोकड़ बही, केश बुक, पासबुक और गाइडलाइन की छायाप्रति मांगी थी। जानकारी प्राप्त नहीं होने के कारण आवेदक ने प्रथम अपीलीय अधिकारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत सरायपाली को 18 अक्टूबर 2019 को आवेदन किया। प्रथम अपीलीय अधिकारी 6 नवंबर 2019 को आदेश पारित कर कहा कि 7 दिवस के भीतर आवेदक को जानकारी उपलब्ध कराएं। लेकिन जनसूचना अधिकारी के द्वारा जानकारी उपलब्ध नहीं कराए जाने से क्षुब्ध होकर राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील आवेदन किया। 

तत्काल जुर्माना भरने के निर्देश

जनसूचना अधिकारी ग्राम पंचायत छिबर्रा टेकराम बिशी जनपद पंचायत सरायपाली का नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया, लेकिन विलंब के कारण की जानकारी नहीं दी। मुख्य राज्य सूचना आयुक्त राउत ने कहा कि जनसूचना अधिकारी टेकराम बिशी ने आवेदिका को जानबुझकर कर विलंब से जानकारी दी, जिसकी वजह से जनसूचना अधिकारी टेकराम बिशी जनपद पंचायत कसडोल को 25 हजार रूपए अर्थदंड अधिरोपित किया गया है। साथ ही आधिरोपित राशि तत्काल जमा कर चालान की प्रति आयोग को प्रेषित करने निर्देश दिए हैं।

4 जनसूचना अधिकारियों पर लगा 25-25 हजार का जुर्माना, जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराने पर हुई कार्रवाई

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छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के राज्य सूचना आयुक्त धनवेंद्र जायसवाल ने 18 अगस्त 2021 को बड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 का समय पर पालन नहीं करने और समय पर आवेदक को जानकारी उपलब्ध नहीं कराने, सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रति घोर लापरवाही और अज्ञानता के लिए तत्कालीन तीन जनसूचना अधिकारियों को 5 प्रकरणों पर 25-25 हजार रूपए का जुर्माना लगाया है। साथ ही राशि तत्काल जमा कर चालान की प्रति आयोग में जमा करने के निर्देश दिए हैं। 



सूचना का अधिकार अधिनियम का मूल उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाने, सरकार के कार्य में पारदर्शिता लाने और उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना, भ्रष्टाचार को नियंत्रित करना और वास्तविक अर्थ में हमारे लोकतंत्र को लोगों के लिए कामयाब बनाना है। यह स्पष्ट है कि एक जानकार नागरिक प्रशासन के साधनों पर आवश्यक सतर्कता बनाए रखकर सरकार को ज्यादा जवाबदेह बनाता है। 

अधिकारी से की थी चेक की काउंटर फाइल की मांग 

शिकायकर्ता शरद देवांगन ने जनसूचना अधिकारी (सचिव) ग्राम पंचायत शंकरपाली पद्मलोचन चक्रपाणी, सचिव पुटीडीह  नरहरि प्रसाद पटेल, सचिव छवारीपाली अलेख राम सिदार और जनसूचना अधिकारी (सचिव) ठाकुरपाली विकासखण्ड डभरा जिला जांजगीर-चांपा से एक अप्रैल 2013 से 31 अक्टूबर 2016 के बीच स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शौचालय निर्माण के लिए हितग्राहियों को जारी राशि के चेक की काउंटर फाइल की मांग की थी। 

अधिकारियों ने आवेदक को उपलब्ध नहीं कराया जानकारी  

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 7 (1) के तहत आवेदन प्राप्ति के 30 दिन के अंदर जानकारी आवेदक को देना होता है, लेकिन जनसूचना अधिकारी ने समयसीमा में जानकारी आवेदक को उपलब्ध नहीं कराया। जानकारी प्राप्त नहीं होने के कारण आवेदक ने प्रथम अपीलीय अधिकारी को आवेदन किया कि जानकारी उपलब्ध कराएं। फिर प्रथम अपीलीय अधिकारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत डभरा के विनिश्चय (निर्णय) के बाद भी जनसूचना अधिकारियों ने आवेदक को जानकारी नहीं उपलब्ध कराया। 

5 प्रकरणों पर जनसूचना अधिकारी 25-25 हजार का जुर्माना

राज्य सूचना आयुक्त धनवेंद्र जायसवाल ने प्रकरण का बारिकी से परीक्षण किया और आवेदक को जानकारी उपलब्ध नहीं कराने पर सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा के तहत 5 प्रकरणों पर जनसूचना अधिकारी 25-25 हजार रूपए जुर्माना लगाते हुए मुख्यकार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत डभरा को निर्देश दिए हैं कि जुर्माने की राशि की वसूली संबंधित जनसूचना अधिकारी के वेतन से काटकर शासकीय कोष में जमा कराकर आयोग को पालन प्रतिवेदन प्रेषित करें।

आवेदन को कर दिया था अस्वीकृत 

इसी तरह एक अन्य प्रकरण में आवेदक शरद देवांगन ने जनसूचना अधिकारी ग्राम पंचायत छुछुभांठा जनपद पंचायत डभरा जिला जांजगीर-चांपा से मूलभूत मद से किए गए व्यय की एक अप्रैल 2006 से 31 मार्च 2016 के बीच के सभी चेक रजिस्टर, लेजर, कैशबुक और व्हाउचर की छायाप्रति की मांग की थी। जनसूचना अधिकारी ने अपने पत्र के माध्यम से आवेदक के आवेदन को कई विषय होने के कारण अस्वीकृत कर दिया। जानकारी प्राप्त न होने के कारण आवेदक ने प्रथम अपीलीय अधिकारी को आवेदन किया, जिस पर प्रथम अपीलीय अधिकारी ने गलत ढंग से आवेदन का निराकरण किया। 

 अपीलीय अधिकारी सुनवाई के लिए नहीं हुआ उपस्थित 

प्रथम अपीलीय अधिकारी के निर्णय संतोषजनक नहीं होने के कारण आवेदक ने द्वितीय अपील छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में किया। आयोग के सूचना पत्र के देने के बाद भी प्रथम अपीलीय अधिकारी सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुआ और न हीं कोई जवाब प्रस्तुत किया जो, आपत्तिजनक है।

25 हजार रूपए का जुर्माना

राज्य सूचना आयुक्त जायसवाल ने आवेदन के गुणदोष और आवेदक के तर्क को ध्यान में रखते हुए अनावेदक को पक्ष रखने अवसर प्रदान किया गया और जिला पंचायत जांजगीर-चांपा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सचिव ग्राम पंचायत छुछुभांठा के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। जायसवाल ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा के तहत 25 हजार रूपए का जुर्माना लगाते करते हुए मुख्यकार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत डभरा को निर्देश दिए हैं कि अर्थदण्ड की राशि की वसूली संबंधित जनसूचना अधिकारी के वेतन से काटकर शासकीय कोष में जमा कराकर आयोग को पालन प्रतिवेदन प्रेषित करें।

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