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छत्तीसगढ़ फिल्म नीति 2021 के प्रारूप पत्रों का निर्धारण

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत के मार्गदर्शन में सिनेमा को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ी फिल्म नीति 2021 के प्रारूप पत्रों का निर्धारण किया गया है। संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 13 दिसंबर 2021 को छत्तीसगढ़ फिल्म नीति का प्रकाशन राजपत्र में किया गया है। जिसमें छत्तीसगढ़ एवं अन्य राज्यों के फिल्म निर्माताओं, निर्देशक, प्रोड्यूसर, अभिनेता द्वारा छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों एवं स्थलों में फिल्म शूटिंग किये जाने का प्रावधान रखा गया है।

नियमावली में दर्शायी गयी नीति के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के सब्सिडी, अनुदान निर्धारित किए गए हैं। प्रपत्र में एनेक्चर 1 से 6.1 तक जिसमें हिन्दी फिल्म, छत्तीसगढ़ी फिल्म निर्माण, सिनेमाघर का नवीनीकरण, नया सिनेमाघर का निर्माण, सिनेमा से संबंधित ईक्यूपमेंट आदि के लिए सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। अधिक जानकारी के लिए विभाग की वेबसाईट www.cgculture.in से डाउनलोड कर प्राप्त किया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ी तीज त्यौहारों के आयोजन से हमारी नई पीढ़ी अपनी परंपरा और प्रकृति से जुड़ेगी : सीएम भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में राज्य के गैर-अनुसूचित क्षेत्रों के लिए मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ी पर्व सम्मान निधि योजनाका शुभारंभ किया। ग्रामीण क्षेत्रों के तीज-त्यौहारों, संस्कृति एवं परम्परा को संरक्षित और संवर्धित करने के उद्देश्य से यह योजना मुख्यमंत्री आदिवासी परब सम्मान निधि योजना की तर्ज पर शुरू की गई है।
                     

मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ी पर्व सम्मान निधि योजनाराज्य के गैर अनुसूचित क्षेत्रों के सामुदायिक क्षेत्रों के 61 विकासखंड की 6 हजार 111 ग्राम पंचायतों में लागू होगी। इस योजना की इकाई ग्राम पंचायत होगी। तीज-त्यौहार मनाने के लिए इस योजना में भी हर ग्राम पंचायत को दो किश्तों में 10 हजार रुपए की राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने योजना के शुभारंभ के अवसर पर योजना की पहली किश्त के रूप में सभी 6 हजार 111 ग्राम पंचायतों को 05-05 हजार रुपए के मान से कुल 03 करोड़ 05 लाख 55 हजार रुपए की राशि जारी की।

मुख्यमंत्री बघेल ने इसके साथ-साथ मुख्यमंत्री आदिवासी परव सम्मान निधिके अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्र के सरगुजा संभाग सहित अन्य अनुसूचित क्षेत्रों के शेष 14 जिलों की 03 हजार 793 ग्राम पंचायतों को आज प्रथम किश्त के रुप मे 05-05 हजार रुपए के मान से कुल 01 करोड़ 89 लाख 65 हजार रुपए की राशि भी जारी की। इसके साथ ही यह योजना पूरे प्रदेश में लागू हो गई है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री बघेल ने 13 अप्रैल को बस्तर में आयोजित भरोसा सम्मेलन में मुख्यमंत्री आदिवासी परब सम्मान निधि योजनाका शुभारंभ करते हुए बस्तर संभाग की 1840 ग्राम पंचायतों को योजना की पहली किश्त के रूप में 5-5 हजार रुपए के मान से अनुदान राशि जारी की थी।

मुख्यमंत्री बघेल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास में यहां की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का काम अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से राज्य में तीजा, हरेली, भक्तिन महतारी कर्मा जयंती, मां शाकंभरी जयंती (छेरछेरा), छठ और विश्व आदिवासी दिवस जैसे पर्वाे पर सार्वजनिक अवकाश दिया जा रहा है। साथ ही इन पर्वों पर भव्य आयोजन भी किया जा रहा है। राज्य शासन की यह भावना है कि तीज-त्यौहारों के माध्यम से हमारी नयी पीढ़ी अपने पारंपरिक मूल्यों से जुड़कर संस्कारित हो और अपनी संस्कृति पर गौरव का अनुभव करे। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव, युवा महोत्सव, छत्तीसगढ़िया ओलंपिक जैसे आयोजनों के पीछे भी हमारा यही उद्देश्य है। देवगुड़ियाँ और घोटुलों के विकास का काम भी किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा हमारे लोक पर्व और हमारी लोक संस्कृति प्रकृति से जुड़ी है। हमारे पुरखों ने अपने अनुभव के आधार पर तीज-त्योहारों को संजोया है। हमारे तीज-त्यौहार हरेली से शुरू होते हैं और फागुन में होली तक चलते हैं। सावन और भादों में ज्यादा त्यौहार मनाए जाते हैं, क्योंकि यही वह समय रहता है जब हमारे किसान और मजदूर खूब मेहनत करते हैं, शरीर में थकान रहती है और आर्थिक परेशानियां भी रहती हैं। इस समय त्यौहारों का आयोजन इसलिए महत्वपूर्ण है कि सब मिलजुल कर इकट्ठा होकर त्यौहार मनाते हैं ताकि तनाव को भूल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम तीज त्यौहारों का संरक्षण और संवर्धन करेंगे तो प्रकृति से भी जुड़ेंगे। आज हमारे सामने जलवायु परिवर्तन एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में प्रकृति का संरक्षण और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ी लोक परब सम्मान निधि के अंतर्गत हालांकि 10 हजार रूपए की राशि दी जा रही है, यह कोई बड़ी राशि नहीं है लेकिन पंचायतों के माध्यम से छत्तीसगढ़ी तीज त्यौहारों का आयोजन होने से लोग अपनी परंपरा से, हमारी नई पीढ़ी अपनी परंपरा और प्रकृति से जुड़ेगी।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से छत्तीसगढ़ के तीज-त्यौहारों को मनाने की केवल रस्म अदायगी होती थी। लोग इन त्यौहारों से विलग होते जा रहे थे। यही कारण है कि राज्य सरकार ने तीज-त्यौहारों के संरक्षण के लिए इनका आयोजन प्रारंभ किया है। आज बालोद जिले की भेंड़िया नवागांव की सरपंच श्रीमती आर्य ने बताया कि वे हर तीज में वे मुख्यमंत्री निवास आती हैं। पहले मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़ के तीज-त्यौहारों का आयोजन नहीं होता था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ी खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का आयोजन इस वर्ष किया गया, जिसमें विभिन्न आयु वर्ग के 26 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। छत्तीसगढ़ी ओलंपिक के लिए बजट में 25 करोड़ रूपए का प्रावधान रखा गया है। भेंट-मुलाकात के दौरान अनेक महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे मायके में खेलों में हिस्सा लिया करती थीं, ससुराल में उनका खेलना छूट गया था। छत्तीसगढ़िया ओलंपिक में उन्हें फिर से खेलने का मौका मिला।

इस अवसर पर कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता, संस्कृति, खान-पान, रहन-सहन, तीज-त्यौहारों के संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री बघेल के नेतृत्व में खूब काम किया गया है। वीडियो कॉन्फ्रेंस से जुड़े आदिम जाति विकास विभाग के मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों और गैर अनुसूचित क्षेत्रों में अपने तीज-त्यौहारों के संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री परब निधि सम्मान योजना काफी महत्वपूर्ण साबित होगी।

वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ी तीज-त्यौहारों की परम्परा को आगामी पीढ़ी को हस्तांतरित करने और अपनी संस्कृति को उभारने की दृष्टि से यह अच्छी योजना है। मुख्यमंत्री ने बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर क्षेत्र की ग्राम पंचायत बसंतपुर के सरपंच रामवृक्ष जगते, रायगढ़ जिले की ग्राम सरपंच लोइंग के सरपंच सूरज पटेल और बालोद के भेड़िया नवा गांव की सरपंच श्रीमती चिदाकाश आर्य से वीडियो कांफ्रेंस से चर्चा की। सरपंचों ने योजना की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की संस्कृति को बढ़ावा मिला है। परब सम्मान निधि योजना प्रारंभ करने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार प्रकट किया।  

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू ने मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ी पर्व सम्मान निधि योजनाकी विस्तार से जानकारी दी।  इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अनुसूचित जाति विभाग के सचिव डी.डी. सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

अब गैर-अनुसूचित क्षेत्रों के लिए मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ी पर्व सम्मान निधि‘ योजना

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रायपुर। राज्य शासन द्वारा प्रदेश के सामुदायिक विकासखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों के तीज त्यौहार, संस्कृति एवं परंपरा को संरक्षित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ी पर्व सम्मान निधियोजना प्रारंभ की जा रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 20 अप्रैल को इस योजना का शुभारंभ करेंगे। इससे पहले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने श्रीमती प्रियंका गांधी के विशिष्ट आतिथ्य में बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में बीते 13 अप्रैल को आयोजित भरोसा सम्मेलन में मुख्यमंत्री आदिवासी परब सम्मान निधि योजना की शुरुआत की थी।

मुख्यमंत्री द्वारा 20 अप्रैल को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से प्रारंभ की जा रही एक और योजना का उद्देश्य प्रदेश के गैर-अनुसूचित ग्रामीण क्षेत्रों के तीज-त्यौहारों की संस्कृति एवं परंपरा को संरक्षित करना और इन त्यौहारों, उत्सवों का मूल स्वरूप में आगामी पीढ़ी को हस्तांतरण तथा सांस्कृतिक परंपराओं का अभिलेखन करना है। सामुदायिक क्षेत्रों के गांवों में स्थानीय उत्सवों, त्यौहारों, मेला-मड़ई का विशेष महत्व रहता है। ऐसे सभी उत्सवों, त्यौहारों, सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से प्रत्येक ग्राम पंचायत को राशि उपलब्ध करायी जाएगी। योजना की ईकाई ग्राम पंचायत होगी।

प्रत्येक ग्राम पंचायत को दो किश्तों में 10 हजार रूपए दिए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 61 विकासखंड सामुदायिक क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। यह राशि केवल सामुदायिक विकासखण्ड क्षेत्र के 6 हजार 111 ग्राम पंचायतों को दी जाएगी। योजना के क्रियान्वयन के लिए ग्राम पंचायत स्तरीय शासी निकाय समिति का गठन किया जाएगा। इसमें सरपंच (अध्यक्ष), पुजारी, बैगा सदस्य, ग्राम के 02 बुजुर्ग सदस्य, ग्राम की दो महिला सदस्य, ग्राम कोटवार, पटेल सदस्य एवं ग्राम सचिव को शामिल किया गया है।

अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास ने संबंधित जिलों के कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को निर्देशित किया है कि योजना के क्रियान्वयन के लिए ग्राम पंचायत स्तरीय शासी निकाय समिति के सदस्यों को मार्गदर्शन जनपद पंचायत स्तर से दिया जाय, जिससे राशि का समुचित उपयोग किया जा सके। गांव के किस-किस तीज त्यौहार के लिए इस राशि का उपयोग किया जायेगा, इसका निर्धारण ग्राम पंचायत स्तरीय शासी निकाय समिति द्वारा किया जाएगा।

इस योजना के क्रियान्वयन की निगरानी, समन्वय संबंधी कार्य जनपद स्तरीय शासी निकाय द्वारा किया जाएगा। जिला कलेक्टरों और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत से कहा गया है कि इस योजना का विस्तृत प्रचार-प्रसार करते हुए सर्व संबंधितों की जानकारी में लाया जाए ताकि योजना का लाभ प्रदेश के समस्त सामुदायिक विकासखण्डों के ग्रामीण समाज को प्राप्त हो सके।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से लोक गायिका अलका परगनिहा चंद्राकर ने की सौजन्य मुलाकात

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से आज शाम यहां उनके निवास कार्यालय में सुप्रसिद्ध लोक गायिका श्रीमती अलका परगनिहा चंद्राकर ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री को उन्होंने छत्तीसगढ़ी रेडियो चैनल एफएम 91.2 के शुभारंभ के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने आमंत्रण के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।

श्रीमती चंद्राकर ने बताया रेडियो एफएम चैनल 91.2 का शुभारंभ कुम्हारी जिला दुर्ग में होने जा रहा है। जिसका प्रसारण पूरी तरह से छत्तीसगढ़ी बोली में किया जाएगा। इसके साथ ही इस चैनल के ऐप की भी शुरुआत होने जा रही है। उन्होंने बताया कि इस एफएम के शुरू करने का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ी कला, संस्कृति, बोली एवं स्थानीय लोक-जीवन का प्रचार-प्रसार करना है। इस मौके पर श्याम वर्मा एवं अमित परगनिहा भी मौजूद थे।

कुदरगढ़ महोत्सव में दिखेगी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक, सजेगी लोकगीतों की महफिल

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सूरजपुर। सूरजपुर अंचल की अधिष्ठात्री देवी मां बागेश्वरी के धाम में कुदरगढ़ महोत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है। कुदरगढ़ महोत्सव की तैयारियां जोरो पर हैं। कलेक्टर सुश्री इफ्फत आरा, जिला पंचायत सीईओ सुश्री लीना कोसम ने कुदरगढ़ महोत्सव 2023 की तैयारियों का जायजा लिया। सफल आयोजन के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए है। कुदरगढ़ महोत्सव का आयोजन 26 मार्च से 28 मार्च तक तीन दिन का होगा। इस तीन दिवसीय महोत्सव में छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति की झलक दिखेगी।

साथ ही साथ इस महोत्सव में छत्तीसगढ़ एवं जिले के स्थानीय उभरते कलाकार भी अपनी कला की शानदार प्रस्तुति देंगे। कुदरगढ़ महोत्सव के पहले दिन 26 मार्च को डॉ. पूर्णाश्री राउत क्लासिकल डांस, मास्टर ओम अग्रहरि नन्हा सितारा एवं कला केंद्र सूरजपुर की प्रस्तुति, नासिर खान सूफी गायक, बीजीएम म्यूजिकल ग्रुप, दिलीप षडंगी भजन सम्राट, आमा पान के पतरी करेला, पान के दोना रायगढ़ द्वारा जगराता कार्यक्रम की प्रस्तुति दी जाएगी।

27 मार्च को दूसरे दिन सुश्री आनंदिता तिवारी कथक नृत्य खैरागढ़ विश्वविद्यालय, जाकिर हुसैन स्टार वॉइस ऑफ इंडिया फेम कोरबा, पुनीत ग्रुप जबलपुर द्वारा शिव तांडव, अलका चंद्राकर रायपुर छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध गायिका द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। तीसरे दिन 28 मार्च को संजय सुरीला सरगुजा, हाय रे सरगुजा नाचे फेम, पारंपरिक नृत्य समूह एचडी इवेंट फिलर प्रस्तुति, आरू साहू सिहावा सुआ बोलत हे फेम छत्तीसगढ़ी लोक गीत मुख्य आकर्षक के केन्द्र होंगे। सभी कार्यक्रम शाम 6 बजे से प्रारंभ होंगे। कुदरगढ़ महोत्सव में इसके अतिरिक्त पारंपरिक नृत्य, मानस मंडली एवं विविध खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाएगा।

विशेष लेख : छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य में है यहां की लोककला का प्राणतत्व

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रायपुर। छत्तीसगढ़ी लोककला में लोकनृत्य संपूर्ण प्रमुख छत्तीसगढ़ के जनजीवन की सुन्दर झांकी है। राग-द्वेष, तनाव, पीड़ा से सैकड़ों कोस दूर आम जीवन की स्वच्छंदता व उत्फुल्लता के प्रतीक लोकनृत्य यहां की माटी के अलंकार है। छत्तीसगढ़ के लोकनृत्य सुआ, करमा, पंथी राउत नाचा, चंदैनी, गेड़ी, नृत्य, परब नृत्य, दोरला, मंदिरी नृत्य, हुलकी पाटा, ककसार, सरहुल शैला गौरवपाटा, गौरव, परथौनी, दशहरा आदि हैं। छत्तीसगढ़ के लोकनृत्य में यहां की लोककला का प्राणतत्व है। 



यह मानवीय जीवन के उल्लास - उमंग-उत्साह के साथ परंपरा के पर्याय हैं। समस्त सामाजिक, धार्मिक व विविध अवसरों पर छत्तीसगढ़ वासियों द्वारा अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने के ये प्रमुख उद्विलास हैं। छत्तीसगढ़ की नृत्य परंपरा अनंत व असीम है। छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकनृत्यों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है:-

सुआ नृत्य

यह छत्तीसगढ़ का सबसे लोकप्रिय नृत्य है। छत्तीसगढ़ी ग्रामीण जीवन की सुंदरता  बरबस इस नृत्य से छलक पड़ती है। छत्तीसगढ़ क्षेत्र की महिलाएं व किशोरियां यह नृत्य बड़े ही उत्साह व उल्लास से उस समय प्रारंभ करती हैं, जब छत्तीसगढ़ की प्रमुख फसल धान के पकने का समय पूर्ण हो जाता है। यह नृत्य दीपावली के कुछ दिन पूर्व प्रारंभ होता है और इसका समापन शिवगौरी के विवाह आयोजन के समय दीपावली के दिन रात्रि के समय होता है। 



इस नृत्य में महिलाएं प्रत्येक घर के सामने गोलाकार झुंड बनाकर ताली की थाप पर नृत्य करते हुए सुन्दर गायन करती हैं। टोकरी जिसमें धान भरा होता है, उसमें मिट्टी से बने दो सुआ शिव और गौरी के प्रतीक के रूप में श्रद्धापूर्वक रखे जाते हैं। नृत्य करते समय महिलाएं टोकरी गोलाकर वृत के बीचों-बीच रख देती है, और सामूहिक रूप से झूम-झूमकर ताली बजाते हुए सुआ गीत गाती हैं। वस्तुतः सुआ नृत्य प्रेम नृत्य है जिसे शिव और गौरी के नाम से व्यक्त किया जाता है।

पंथी नृत्य

छत्तीसगढ़ में निवास करने वाली सतनामी जाति का परंपरागत नृत्य है। माघ महीने की पूर्णिमा को गुरू घासीदास के जन्म दिन पर सतनामी सम्प्रदाय के लोग जैतखाम की स्थापना करके उसका पूजन करते हैं और फिर उसी के चारों तरफ गोल घेरा बनाकर गीत गाते हैं, नाचते हैं। पंथी नृत्य का प्रारंभ देवताओं की स्तुति से होता है। उनके गीतों में गुरू घासीदास का चरित्र ही प्रमुख होता है जिसमें मनुष्य के जीवन की गौरव गाथा के साथ उसकी क्षण भंगुरता प्रकट होती है गहरे आध्यामिक रंग में रंगे उनके गीत निगुण भक्ति की ऊंचाईयों का स्पर्श करते हैं। इन नृत्य के प्रमुख वाद्य मृदंग और झांझ हैं। 



नृत्य का आरंभ तो विलम्बित गति से ही होता है, पर लय प्रतिपल द्रुत होती है और समापन नृत्य की चरम द्रुतगति पर होता है। नर्तकों की ताम्बे के रंग की देह से उभरती आंगिक चेष्टाएं आलौकिक भाव का सृजन करती हैं। ऐसे कम ही लोक नृत्य है और वह भी उन क्षणों में जब जीवन की क्षणभंगुरता का गीत गाया जा रहा हो।

राऊत नाचा

दीपावली के तुरंत बाद राऊतों द्वारा नृत्य का सामूहिक आयोजन किया जाता है। वे समूह में सिंग बाजा के साथ गांव के मालिक जिनके वे पशुधन की देखभाल करते हैं, के घर में जाकर नृत्य करते हैं। उनके लिए यह एक बड़ा वार्षिक पर्व है। स्थानीय लोगों को इसमें उत्साहित होने का मौका मिलता है। मालिक इन्हें 10-20 दिन तक काम से मुक्त कर देते हैं। इस बीच वे नाथ गाना का उत्सव करते हैं। देवउठनी, पुन्नी पूर्णिमा के दिन गायों को सोहई बांधकर अपने सुमधुर कंठ से मालिक की सुख-समृद्धि की कामना कर दोहा कहते हैं। इस समय राऊतों के विशिष्ट परिधान देखते ही बनता है। बिलासपुर में होने वाले राऊत नृत्य प्रतियोगिता ने तो अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि पा ली है।

चंदैनी नृत्य

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में लोककथाओं पर आधारित यह एक महत्त्वपूर्ण लोकनृत्य है। लोरिक चंदा के नाम से ख्यातिलब्ध चंदैनी मुख्य रूप से एक प्रेमगाथा है जिसमें पुरुष पात्र विशेष पहनावे में अनुपम नृत्य के साथ चंदैनी कथा को अत्यंत ही सम्मोहक शैली में प्रस्तुत करते हैं जो कि सम्पूर्ण रात्रि तक दर्शकों को सम्मोहित किये रहती है। छत्तीसगढ़ में चंदेनी दो शैलियों में विख्यात है। एक तो लोककथा के रूप में एवं द्वितीय गीत नृत्य के रूप में चंदैनी नृत्य में मुख्य रूप से ढोलक की संगत एवं टिमकी प्रमुख वाद्य यंत्र है।

छत्तीसगढ़ में जनजातियों की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 31 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति एवं सभ्यता को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। इसी कड़ी में राज्य में तीसरी बार राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री बघेल की पहल पर इंटरनेशनल ट्राइबल डांस फेस्टिवल के रूप में एक बहुत महत्वपूर्ण परंपरा की शुरुआत छत्तीसगढ़ में की गई है। यह प्रयास न केवल छत्तीसगढ़ के लिए, बल्कि देश और पूरी दुनिया के जन-जातीय समुदायों के आपसी मेलजोल, कला-संस्कृतियों के आदान-प्रदान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। 

आखिर कका की गोद तक पहुंच ही गई नन्हीं फ्रेंड वैष्णवी

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रायपुर। ग्राम जगन्नाथपुर की रहने वाली 3 साल की बच्ची वैष्णवी यादव को जब भेंट मुलाकात कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल स्वयं इस बच्ची के पास आए और उसे पहचानते हुए कहा, अच्छा यही है वैष्णवी। उन्होंने बच्ची के परिजनों से बातचीत भी की और वैष्णवी द्वारा दिए गए फ्रेम तोहफे को स्वीकार किया। वैष्णवी अपने "कका" से मिलने के इंतजार में काफी देर तक बैठी हुई थी। कका से मिलने के लिए भीड़ इतनी थी कि लोग धक्का-मुक्की कर रहे थे।



ऐसे में वह निराश होकर रोने भी लगी थी, जिसे देखते हुए कका ने तत्काल उसे दुलारते हुए उनके पिता दीपक यादव की गोद से उठाकर अपनी गोद में ले लिया और उसे दुलार किया । इस दौरान मुख्यमंत्री की नजर वैष्णवी की हथेली पर पड़ी, जिस पर मेहंदी सजी थी, जिस पर लिखा था मोर मयारू कका भूपेश बघेल। मेहंदी देखकर उन्होंने कहा- वाह! बढ़िया मेहंदी सजाई हो। मोर से बिकट मया करथस का नोनी? यह सुनकर आसपास खड़े लोग ठहाके मारकर हंस पड़े।

मुख्यमंत्री के गांव पहुंचते ही उत्साहित थी बेटी, बार-बार मिलने के लिए पिता का हाथ खींचती रही

 जैसे ही मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर गांव पहुंचा वैष्णवी उनसे मिलने के लिए आतुर हो रही थी। वह बार-बार पिता के हाथ खींचते हुए मंच की ओर बढ़ने का इशारा करती थी। जब मुख्यमंत्री पहुंचे तो उसकी आतुरता और बढ़ गई, लेकिन मुलाकात नहीं हो पा रही थी। वह इंतजार में ही बैठी थी, फिर कार्यक्रम के अंत में स्वयं मुख्यमंत्री वैष्णवी से मिलने के लिए उनके पास पहुंचे और उसे पहचान भी गए। इस दौरान विधायक संगीता सिन्हा ने मुख्यमंत्री से वैष्णवी को मिलवाते हुए कहा कि यह वही बेटी है।

 पिता ने भेंट किया सीएम को फ्रेम, लिखा था पहुना ल मया के पाती, साथ मे दिया एक अनूठा पत्र

इस दौरान पिता दीपक ने मुख्यमंत्री को बेटी वैष्णवी की ओर से एक फोटो फ्रेम भेंट किया जिसमें "पहुना ल मया के पाती" के साथ कका के लिए छत्तीसगढ़ी में शायरी लिखा था। इसके अलावा उन्होंने एक पत्र भी दिया जिसमें बेटी है तो कल है के उद्देश्य को बतलाया गया था। उन्होंने इस पत्र के जरिए मुख्यमंत्री से अपेक्षा भी की कि दिवाली पर लक्ष्मी पूजन दिवस पर बेटी तिहार के रूप में भी मनाया जाना चाहिए। जैसे बेटियों के सम्मान में जगन्नाथपुर में मिट्टी के दीपक जलाए  जाते हैं वैसे हर गांव और शहर में होना चाहिए। उन्होंने पत्र के जरिए बताया कि समाज में बेटी बेटा के प्रति भेदभाव दूर होना चाहिए। 

 मुख्यमंत्री से वैष्णवी को उपहार के तौर पर मिला फ्रॉक, गुल्लक और पहाड़ा

 मुख्यमंत्री के भेंट मुलाकात के दौरान वैष्णवी को तोहफा भी मिला, जिसमें फ्रॉक, गुल्लक और पहाड़ा था। घर आते ही उसने वही फ्रॉक पहनकर सबको बताती रही कि उनके कका ने यह गिफ्ट दिया है।

हमर अबड़ हवे भाग, मुख्यमंत्री ह आय हे हमर घर, खाय बर पितर भात

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज बालोद जिले के विधानसभा डौंडीलोहारा के ग्राम कुसुमकसा में किसान पुरषोत्तम जीराम के घर पितर नवमीं के अवसर पर पहुँचकर स्नेहपूर्वक भोजन किया। मुख्यमंत्री जब पुरषोत्तम जीराम के घर पहुँचे तो घर वालों ने मुख्यमंत्री का घर के देवरावठी में चौक पूरकर ज़ोडा कलश जलाकर पीढ़हा में खडे़कर ओरछा उतारकर घर में प्रवेश कराया। मुख्यमंत्री जब घर में प्रवेश किए, तब घर परिवार में एक अलग माहौल बन गया। परिवार के सभी लोगों के चेहरे में सुंदर मुस्कान और खुशियां साफ झलक रही थी।



 मुख्यमंत्री को जब भोजन परोसा गया तब छत्तीसगढ़ी व्यंजनों से भरी थाली देखकर उन्होंने जीभर कर भोजन किया। पुरषोत्तम जीराम की पत्नी श्रीमती सावित्रीबाई ने भोजन परोसा। मुख्यमंत्री की थाली में तोरई, बरबटी, प्याज भाजी, लालभाजीकोचई पत्ता कढ़ीपूड़ी, बड़ा, खीर, चावल- दाल, टमाटर चटनी तवा रोटी, अइरसा, खुरमी सलोनी, पापड़ परोसा गया। मुख्यमंत्री ने पुरषोत्तम के यहां उनके दिवंगत माता स्वर्गीय श्रीमती गनेशी बाई व पिता स्वर्गीय भगवानी राम के नवमीं पितर मिलन के अवसर पर यहां उनके निवास पहुँचे थे।



वे यहां जमीन पर बैठकर पीढ़हा के ऊपर फुलकास की थाली से भोजन का आनन्द लिए। मुख्यमंत्री ने ठेठ छत्तीसगढ़ी अंदाज में भोजन ग्रहण किये। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा मोला अतक बढ़िया भात साग खवाय हव। मोला अपन गांव अउ घर के सुरता आगे। गांव के साग भात बने सुहाथे। मोला तुंहर इहां पितर खाय के भाग मिलिस। मेहा ओ दाई अउ ददा ल परनाम करत हव। ये बात ल सुनके सावित्री बाई कहिस आज मुख्यमंत्री ह हमर गरीब के कुटिया म आके हमर घर खाना खाय हो हमन ल अबड़  सुग्घर लागथे। हमर अबड़ जनिक भाग के मुख्यमंत्री ल भात साग परोसे के मौका मिलिस। मुख्यमंत्री ने इस दौरान घर वालों से बात कर हाल चाल जाना। मुख्यमंत्री ने कहा मोरो घर के नेवता हेवे हमरो घर आहू।

सभी स्कूलों में अब सप्ताह में एक दिन छत्तीसगढ़ी की शिक्षा

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रायपुर। राज्य में छत्तीसगढ़ी भाषा को बढ़ावा देने के लिए सभी स्कूलों में अब सप्ताह में एक दिन छत्तीसगढ़ी और आदिवासी बोली की शिक्षा दी जाएगी। बस्तर और सरगुजा क्षेत्रों में स्थानीय आदिवासी बोलियों के अनुसार तथा अन्य क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ी भाषा में पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शिक्षक दिवस पर यह घोषणा की। मुख्यमंत्री ने एक और घोषणा करते हुए कहा कि भारत की संस्कृति और परंपरा को बढ़ावा देने के लिए स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में संस्कृत विषय की भी पढ़ाई होगी। इसके साथ ही स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में कम्प्यूटर शिक्षा को भी मुख्यमंत्री ने अनिवार्य करने की बात कही।



बालवाड़ी योजना का शुभारंभ

प्रदेश में जाबो बालवाड़ी बढ़ाबो शिक्षा के गाड़ीकी थीम पर आधारित बालवाड़ी योजना आज से शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस योजना का शुभारंभ किया। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शुरू की गई यह योजना नई शिक्षा नीति के तहत संचालित होगी। यह योजना पांच से छह वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए है। इसके माध्यम से खेल-खेल में बच्चों को शिक्षा दी जाएगी। हर बालवाड़ी में आंगनबाड़ी सहायिका के अलावा प्राथमिक शाला के एक सहायक शिक्षक की नियुक्ति की जाएगी और इसके लिए सहायक शिक्षक को हर माह पांच सौ रुपए अतिरिक्त मानदेय भी दिया जाएगा। प्रदेश में इस वर्ष पांच हजार से अधिक बालवाड़ियां शुरू की गई हैं।

उत्कृष्ट शिक्षण संस्थान नया रायपुर में नवा रायपुर में विश्व स्तरीय सुविधाओं से युक्त उत्कृष्ट शिक्षण संस्थान शुरू होगा, जहां छठवीं से लेकर बारहवीं तक के सात सौ से अधिक छात्र अध्ययन कर सकेंगे। बीस एकड़ क्षेत्र में बनने वाले इस आवासीय शिक्षण संस्थान का शिलान्यास आज मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वर्चुअल माध्यम से किया। इस शिक्षण संस्थान का संचालन छत्तीसगढ़ उत्कृष्ट विद्यालय सोसायटी द्वारा किया जाएगा। इस सोसायटी के अध्यक्ष मुख्यमंत्री और उपाध्यक्ष स्कूल शिक्षा मंत्री होंगे। संस्थान के प्रथम चरण के निर्माण के लिए सोसायटी द्वारा करीब साढ़े उनचास करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत की गई है।

फिल्म नीति बनने से मिल रहा छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। छत्तीसगढ़ी फिल्मों का सफर 1965 में श्कहि देबे संदेशश् और श्घर-द्वारश् से शुरू हुआ, जो निरंतर जारी है। छत्तीसगढ़ी फिल्म जगत ने बहुत से उतार-चढ़ाव देखा है। इन फिल्मों ने सामाजिक व्यवस्था, सामाजिक कुरीतियां और समाजिक परिवेश पर अपनी बात कही है। दर्शकों के मन में मनोरंजन के साथ फिल्मों के माध्यम से अपनी संस्कृति को लेकर गौरव की अनुभूति की अपेक्षा होती है। दूसरी ओर प्रदेश की कला, संस्कृति और फिल्म को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार कटिबद्ध है। छत्तीसगढ़ी फिल्म नीति इसी कड़ी का हिस्सा है। छत्तीसगढ़ी फिल्म नीति बनने से छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है। 



मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज छत्तीसगढ़ी फिल्म महोत्सव के समापन समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। इस मौके पर संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत, संसदीय सचिव विकास उपाध्याय, राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह बाबरा विशेष रूप से मौजूद थे। छत्तीसगढ़ी फिल्म महोत्सव के माध्यम से छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग से जुड़े, कलाकारों, निर्माता, निर्देशक, गीतकार, संगीतकार, गायक-गायिका तकनीशियनों का सम्मान किया गया। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि कलाकारों के लिए असली इनाम दर्शकों से मिलने वाला प्रतिसाद है। 


उन्होंने छत्तीसगढ़ी फिल्मों के सफर पर बात करते हुए कहा कि, ‘‘कहि देबे संदेश’’ ने जहां तात्कालीन जातीय परिदृश्य पर करारा प्रहार किया था। वहीं ‘‘घर-द्वार’’ में टूटते पारिवारिक रिश्तों को रेखांकित किया गया था। लगभग हर छत्तीसगढ़ी फिल्म ने सामाजिक व्यवस्था और सामाजिक परिवेश को दर्शाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि, हमारी सरकार आने के बाद छत्तीसगढ़ी फिल्म नीति बनाने के लिए बहुत मेहनत की गई। संस्कृति मंत्री ने कैबिनेट में फिल्म नीति का प्रारूप पेश किया, जिसे कैबिनेट ने अनुमोदित भी कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि, छत्तीसगढ़ फिल्म नीति बनने से यहां के फिल्म उद्योग को तो प्रोत्साहन मिलेगा ही


साथ
ही पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। छत्तीसगढ़ में ही ऐसे अनेक मनोरम स्थान हैं, जो फिल्मों के शूटिंग के लिए उपयुक्त हैं। फिल्म नीति के साथ ही राज्य सरकार की नीतियों से अब ऐसा वातावरण तैयार हुआ है, जिससे अन्य प्रदेशों के फिल्मकारों की रुचि भी छत्तीसगढ़ को लेकर बढ़ी है। मुख्यमंत्री बघेल ने छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग से जुड़े सभी लोगों को फिल्म महोत्सव की बधाई शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कटिबद्ध है। अध्यक्षीय उद्बोधन में संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि


मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हर मौके पर छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है। उनकी सोच है कि छत्तीसगढ़ की कला, साहित्य, संस्कृति और फिल्म आगे बढ़े। पहले कभी फिल्म नीति नहीं बनी थी, लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसके लिए पहल की। फिल्म नीति होने से स्थानीय कलाकारों के पास विजन भी नहीं था, अब छत्तीसगढ़ फिल्म नीति बनने से यहां के कलाकारों और फिल्म जगत से जुड़े लोगों को विजन मिला है। उन्होंने नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली फिल्म को एक करोड़ रुपये और इंटरनेशनल अवॉर्ड जीतने पर पांच करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि राज्य सरकार की ओर से देने के प्रावधान का विशेष रूप से उल्लेख किया। 

संस्कृति मंत्री ने उम्मीद जताई कि छत्तीसगढ़ी फिल्म नीति और राज्य सरकार द्वारा स्थानीय फिल्म उद्योग को दिए जा रहे प्रोत्साहन के फलस्वरूप नित नयी कड़ी छत्तीसगढ़ी फिल्मों की उपलब्धि में जुड़ेगी। छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। स्थानीय शहीद स्मारक भवन के आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं संस्कृति मंत्री भगत अन्य अतिथियों के हाथों छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों को सम्मानित किया गया। वहीं इस मौके पर एक फिल्म का पोस्टर भी लॉन्च किया गया। 

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