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अर्जुन मुंडा बने देश के नए कृषि मंत्री, करंदलाजे, चंद्रशेखर और प्रवीण को मिले ये विभाग

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य विधानसभाओं के लिए चुने जाने के बाद केंद्रीय मंत्रिपरिषद से तीन केंद्रीय मंत्रियों, नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद सिंह पटेल और रेणुका सिंह का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। 


राष्ट्रपति भवन की विज्ञप्ति के अनुसार, अर्जुन मुंडा को उनके मौजूदा पोर्टफोलियो के अलावा, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है। पहले नरेंद्र सिंह तोमर पर यह मंत्रालय था।

इनके अलावा, राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे को प्रह्लाद सिंह पटेल के स्थान पर उनके मौजूदा पोर्टफोलियो के अलावा, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री का प्रभार दिया गया है। आईटी राज्य मंत्री राजीव चन्द्रशेखर को उनके मौजूदा विभागों के अलावा, जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री का प्रभार सौंपा गया है।

 इस मंत्रालय का नेतृत्व भी प्रह्लाद सिंह पटेल ही करते थे। वहीं राज्य मंत्री डॉक्टर भारती प्रवीण पवार को उनके मौजूदा पोर्टफोलियो के अलावा, जनजातीय मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री का प्रभार दिया गया है। वह रेणुका सिंह सिंह की जगह लेंगी।


आगामी खरीफ सीजन में किसानों से बायोमेट्रिक व्यवस्था से होगी धान की खरीदी

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रायपुर। खाद्य मंत्री अमरजीत भगत की अध्यक्षता में आगामी खरीफ विपणन वर्ष की धान खरीदी एवं कस्टम मीलिंग की नीति की समीक्षा कर सुझाव देने हेतु गठित मंत्रि-मंडलीय उप समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक में कृषि मंत्री ताम्रध्वज साहू वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से शामिल हुए।

बैठक में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के घोषणा की अनुरूप छत्तीसगढ़ में पंजीकृत किसानों से आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2023-2024 में 20 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान खरीदी का निर्णय लिया गया। पिछले वर्ष की तरह ही इस वर्ष भी 01 नवंबर 2023 से धान खरीदी बैंक लिंकिंग व्यवस्था के तहत शुरू होगी और 31 जनवरी 2024 तक चलेगा। इसी तरह मक्का खरीदी भी 01 नवंबर 2023 से ही शुरू होगी और 28 फरवरी 2024 तक चलेगी। गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष में किसानों से 125 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का अनुमानित लक्ष्य रखा गया है।

बैठक में जानकारी दी गई कि केंद्र सरकार द्वारा औसत अच्छी किस्म (एफएक्यू) के धान एवं मक्का के लिए निर्धारित समर्थन मूल्य पर खरीदी की जाएगी। धान कामन के लिए निर्धारित समर्थन मूल्य 2183 रूपए प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान के लिए 2203 रूपए प्रति क्विंटल के मान से धान खरीदी की जाएगी। इसी तरह मक्का प्रति क्विंटल 2090 रूपए के भाव से खरीदी की जाएगी।

मंत्रिमण्डलीय उपसमिति की बैठक में केंद्र सरकार से राज्य की लेनदारी के अंतर्गत केंद्र सरकार की एजेन्सी के रूप में केन्द्रीयकृत एवं विकेन्द्रीकृत योजनांतर्गत भारतीय खाद्य निगम एवं नागरिक आपूर्ति निगम में चावल जमा किया जाता है। आज की स्थिति में जमा चावल के विरूद्ध भारतीय खाद्य निगम से 2205.30 करोड़ एवं नागरिक आपूर्ति निगम की केंद्र सरकार से 4195 करोड़ रूपए सहित कुल राशि 6400.30 करोड़ रूपए लेनदारी केंद्र सरकार से शेष है। जिसमें पत्र लिखकर लेनदारी की राशि के लिए अनुग्रह करने का निर्णय लिया गया है।

बैठक में खाद्य विभाग भारत सरकार द्वारा दिए गए निर्देश के तारतम्य में छत्तीसगढ़ प्रदेश में आगामी खरीफ वर्ष 2023-24 में बायोमेट्रिक आधारित धान खरीदी व्यवस्था लागू किए जाने का निर्णय लिया गया है। अभी तक प्रदेश के लगभग 05 लाख किसानों के पंजीयन का कार्य पूर्ण हो चुका है। बायोमेट्रिक धान खरीदी व्यवस्था के संबंध में किसानों को जानकारी देने हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए है। बैनर और पोस्टर समिति स्तर पर लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा कृषि एवं सहकारिता से संबंधित संगठनों की बैठक लेकर किसान पंजीयन की जानकारी देने के निर्देश दिए गए है।

मंत्रिमण्डलीय उपसमिति की बैठक में प्रदेश में किसानों के धान विक्रय में सहुलियत को ध्यान में रखते हुए उपार्जनों केन्द्रों की संख्या लगातार वृद्धि की जा रही है। किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष और भी कुछ धान उपार्जन केंद्र खुलेंगे। वर्तमान में 2617 धान उपार्जन केंद्र संचालित है। विगत वर्ष राज्य के 24.96 लाख किसानों ने पंजीयन करवाया था, जिसका रकबा 32.15 है। राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों और फैसलों के चलते गत वर्ष लगभग ढाई लाख नवीन किसानों ने पंजीयन करवाया था और किसानों से रिकॉर्ड 107.53 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी। 

इस वर्ष भी किसानों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है। राज्य सरकार द्वारा किसानों से 125 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी अनुमानित की लक्ष्य के मद्देनजर बारदाने एवं खरीदी व्यवस्था दुरूस्त किए जा रहे हैं। पिछले वर्ष धान खरीदी के लिए बारदाने की पर्याप्त व्यवस्था की गई थी। साथ ही ऑनलाईन एवं ऑफलाईन टोकन व्यवस्था के चलते सफलतापूर्वक धान खरीदी हुई थी। इस वर्ष भी धान खरीदी के अनुमानित लक्ष्य के अनुसार लगभग साढ़े सात लाख गठान जूट बारदाने की आवश्यकता होगी। इसमें 4.03 लाख नए और 3.43 लाख गठान पुराने बारदाने की जरूरत पड़ेगी। बारदाने की व्यवस्था के लिए खाद्य विभाग द्वारा पहले से ही तैयारी की जा रही है।

बैठक में अधिकारियों ने चर्चा के दौरान बताया कि अनुमानित धान खरीदी के लिए सहकारी समितियों में धान खरीदी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही है। इसमें किसानों के पंजीयन से लेकर बारदाने की व्यवस्था, खरीदी केन्द्रों में किसानों के लिए आवश्यक सुविधाएं, भुगतान की व्यवस्था आदि का संधारण कार्य किया जा रहा है। बैठक में खाद्य विभाग के सचिव टोपेश्वर वर्मा, प्रबंध संचालक मार्कफेड मनोज कुमार सोनी, प्रबंध संचालक अपेक्स बैंक के.एन. काण्डे, कृषि विभाग के संयुक्त सचिव के.सी. पैकरा सहित अन्य संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


कांग्रेस की अगली सरकार, 3600 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदेंगी धान : कृषि मंत्री

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। धान खरीदी को लेकर कैबिनेट मंत्री रविंद्र चौबे का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा देश में सबसे ज्यादा धान की कीमत छत्तीसगढ़ सरकार दे रही है।


अगली सरकार के कार्यकाल तक 36 सौ रुपए क्विंटल में धान खरीदा जाएगा। मंत्री चौबे ने कहा इस बार किसानों के समर्थन से कांग्रेस 75 पार की सरकार भी बनाएगी

मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ में 75 पार बहुमत के साथ कांग्रेस सरकार बनने जा रही है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार किसानों के समर्थन से ही सरकार बनेगी और आगामी कार्यकाल में किसानाें को धान की कीमत 3600 रुपए तक मिलेगी।

रविंद्र चौबे का कहना है कि इस वर्ष भी धान की कीमत पूरे देश में सबसे ज्यादा छत्तीसगढ़ के किसानों को मिली। आने वाले साल धान की कीमत किसानाें को लगभग 2800 रुपए मिलेगी। एमएसपी में वृद्धि और राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत इनपुट सब्सिडी के कारण से अगले कार्यकाल तक किसानों को 3600 रुपए कीमत मिलने लगेगी।


कृषि मंत्री 4 अगस्त को फसल बीमा जागरूकता रथों को करेंगे रवाना

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रायपुर। कृषि मंत्री ताम्रध्वज साहू 4 अगस्त को दुर्ग स्थित अपने निवास कार्यालय से पूर्वान्ह 11 बजे राज्य में प्रधानमंत्री फसल बीमा के प्रचार-प्रसार के लिए 8 जागरूकता रथों को रवाना करेंगे। राज्य में खरीफ फसलों का बीमा ज्यादा से ज्यादा किसान कराएं, इसके लिए यह जागरूकता रथ गांव-गांव घूमकर किसानों को बीमा संबंधी जानकारी देंगे।

यहां यह उल्लेखनीय है कि राज्य में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्राकृतिक आपदाओं, कीट और रोगों के कारण फसल नष्ट होने की स्थिति में किसानों को बीमा कव्हरेज और इसकी सहायता प्रदान की जाती है, ताकि कृषि में होने वाले नुकसान की भरपाई हो सके। राज्य में खरीफ फसलों के अंतर्गत धान सिंचित एवं असिंचित, मक्का, सोयाबीन, अरहर, मूंग एवं उड़द अधिसूचित फसलें हैं, जिनका बीमा किसान करा सकते हैं।  उक्त फसलों का बीमा कराने के लिए किसानों को प्रीमियम राशि का मात्र 2 प्रतिशत राशि देनी होती है, शेष राशि का वहन शासन द्वारा किया जाता है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के राज्य प्रभारी ने बताया कि अब तक राज्य के 10 लाख 52 हजार 308 किसान अपनी फसलों का बीमा करा चुके हैं। कृषि विभाग ने शत्-प्रतिशत किसानों से अपनी फसलों का बीमा 16 अगस्त तक कराने जाने की अपील की है, ताकि जोखिम से बचा जा सके।

मंत्री का एक्शन ऑन द स्पॉट, निलंबित-बर्खास्त FIR तीनों का फरमान

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भोपाल : मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल ने सड़क पर हादसों का कारण बन रहे एक डंपर के कई दिनों के बाद भी न हटाए जाने पर अपनी नाराजगी खुले तौर पर जताई। इतना ही नहीं थाने मंत्री भी जा धमके और पूरे स्टॉफ को निलंबित, बर्खास्त करने के साथ उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का फरमान भी सुना गए।


मामला इंदौर से हरदा के सड़क मार्ग पर पड़ने वाले सतवास थाना क्षेत्र का है, पटेल हरदा लौट रहे थे, तभी गांव वालों ने उन्हें रोककर बीते कई दिनों से एक डंपर के सड़क पर खड़े होने की शिकायत की। इतना ही नहीं गांव वालों ने बताया कि इस डंपर के चलते कई हादसे भी हो चुके हैं।

मंत्री पटेल को जब गांव वालों ने घेरा तो वे अपने वाहन से उतर और वास्तविकता जानी। फिर क्या था मंत्री पटेल ने पहले सड़क पर खड़े डंपर का अपने मोबाइल से वीडियो बनाया और सीधे जा पहुंचे थाने। उन्होंने यहा थाना प्रभारी से लेकर तमाम कर्मचारियों को खूब खरीखोटी सुनाई और कहा कि आप लोग सरकार की छवि को बिगाड़ने में लगे हैं।

मंत्री पटेल इतने गुस्से में थे कि उन्होंने थाना प्रभारी सहित पूरे थाने के स्टॉफ केा निलंबित, बर्खास्त करने के साथ एफआईआर तक दर्ज कराने का फरमान सुना दिया।



छत्तीसगढ़ फसल बीमा के क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में शुमार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के बेहतर एवं सफल क्रियान्वयन के लिए भारत सरकार के कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ को उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने इस सम्मान के लिए कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ देश भर में अग्रणी राज्यों में शुमार है। 

भारत सरकार के कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग द्वारा आज राजधानी रायपुर में आयोजित 9 वी राष्ट्रीय समीक्षात्मक कार्यशाला भारत सरकार के सचिव मनोज आहूजा ने छत्तीसगढ़ के कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह को उत्कृष्ट पुरस्कार से सम्मानित करते हुए प्रशस्ति पत्र सौंपा। इस मौके पर कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ. अय्याज एफ. तम्बोली, संचालक कृषि श्रीमती रानू साहू, संचालक उद्यानिकी विभाग व्ही. माथेश्वरण, अपर संचालक उद्यानिकी श्री भूपेन्द्र पाण्डेय और संयुक्त संचालक कृषि बी.के मिश्रा भी उनके साथ थे।

राष्ट्रीय समीक्षात्मक कार्यशाला में जानकारी दी गई कि भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल की स्वचलित गणना और  निपटान के लिए डिजीक्लेम मॉड्यूल के सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया गया है। साथ ही पोर्टल दर्ज करने और बीमा का लाभ किसानों तक पहुंचाने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। छत्तीसगढ़ में इस योजना के तहत वर्ष 2022-23 में 6 लाख 77 हजार 558 पात्र किसानों को फसल बीमा का लाभ दिलाया गया है। किसानों को बीमा राशि के रूप में 192.41 करोड़ रूपए की राशि दी गई है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज गोधन न्याय योजना के तहत 5 करोड़ 32 लाख रूपए का किया भुगतान

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहाँ अपने निवास कार्यालय से गोधन न्याय योजना के तहत पशुपालक ग्रामीणों, गौठानों से जुड़ी महिला समूहों और गौठान समितियों को 5 करोड़ 32 लाख रूपए की राशि ऑनलाइन जारी किया। इसके अंतर्गत 16 मार्च से 31 मार्च तक खरीदे गए 1 लाख 45 हजार क्विंटल गोबर के एवज में 2 करोड़ 91 लाख रूपए का भुगतान किए जाने के साथ ही गौठान समितियों को 1.43 करोड़ रूपए और महिला समूहों को 98 लाख रूपए की लाभांश राशि शामिल है।

इस अवसर पर कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, मुख्यमंत्री के सलाहकार विनोद वर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत रामसुंदर दास कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ. अय्याज एफ. तम्बोली मुख्यमंत्री निवास में उपस्थित हैं तथा मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा और राज्य नोडल अधिकारी RIPA गौरव सिंह वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये जुड़े हैं।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि गोधन न्याय योजना में हम लोगों ने निरंतर उपलब्धियां हासिल की है, लेकिन स्वावलंबी गौठानों की संख्या में जिस तेजी से वृद्धि हो रही है, वह हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इस योजना का मुख्य उद्देश्य ही अपने गांवों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना है। गोबर विक्रेताओं को दी जा रही राशि में से 01 करोड़ 67 लाख रुपए की राशि स्वावलंबी गौठानों की ओर से स्वयं भुगतान की जा रही है। जबकि विभाग की ओर से 01 करोड़ 24 लाख रुपए का भुगतान किया जा रहा है।

गौठान समितियों को स्वावलंबन के लिए प्रोत्साहित करने के लिए हम लोगों ने स्वावलंबी गौठान समिति के अध्यक्षों को 750 रुपए और सदस्यों को 500 रुपए हर महीने प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया है। किसान भाइयों को यह खुशखबरी तो पहले ही मिल चुकी होगी कि आने वाले नवंबर महीने से अब 20 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान की खरीदी की जाएगी। इसकी मांग किसान भाइयों द्वारा बहुत लंबे समय से की जा रही थी। निश्चित रूप से इसका लाभ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा

इसी तरह राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना का भी अब विस्तार कर दिया गया है। अब नगर पंचायतों और अनुसूचित क्षेत्र की नगर पालिकाओं के भूमिहीन कृषि मजदूरों को भी इस योजना का लाभ मिलेगा। इस योजना का लाभ लेने के लिए भूमिहीन कृषि मजदूर 15 अप्रैल तक अवश्य आवदेन कर दें। 01 अप्रैल से गांवों में सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण भी शुरू किया गया है, क्योंकि 2011 के बाद से जनगणना ही नहीं हो पाई है। इस सर्वेक्षण से नये हितग्राही भी चिन्हित होंगे। उन्हें भी आवास, गैस सिलेंडर, शौचालय जैसी योजनाओं का लाभ मिल पाएगा।

01 अप्रैल से ही शिक्षित बेरोजगारों से बेरोजगारी भत्ते के लिए आवेदन लेना भी शुरू कर दिया है। इसके लिए उन्हें ऑन लाइन आवेदन की सुविधा दी गई है। पहले ही दिन 6000 से ज्यादा बेरोजगारों के आवेदन मिले, जिसे उसी दिन मंजूर भी कर लिया गया। आज इस कार्यक्रम के माध्यम से जिन किसानों, गोबर विक्रेताओं, पशुपालकों, गौठान समितियों और स्व सहायता समूहों के खाते में राशि का अंतरण हो रहा है, उन सभी को बहुत बधाई।

मुख्यमंत्री अपने निवास कार्यालय में गोधन न्याय योजना के राशि अंतरण के लिए आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में शामिल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने निवास कार्यालय में गोधन न्याय योजना के राशि अंतरण के लिए आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं। बैठक में कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू भी उपस्थित हैं।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में पशुपालक ग्रामीणों, गौठानों से जुड़ी महिला समूहों और गौठान समितियों को 8 करोड़ 23 लाख रूपए की राशि ऑनलाइन जारी की।  इस राशि में 15 जनवरी से 31 जनवरी तक गौठानों में पशुपालक ग्रामीणों, किसानों, भूमिहीनों से क्रय 2.38 लाख क्विंटल गोबर के एवज में 4 करोड़ 76 लाख रूपए, गौठान समितियों को 2.04 करोड़ रूपए और महिला समूहों को 1.43 करोड़ रूपए की लाभांश राशि शामिल है।

गोधन न्याय योजना के तहत गोबर खरीदी के एवज में विक्रेताओं को अंतरित की गई 4.76 करोड़ रूपए की राशि में से मात्र 1.98 करोड़ की राशि कृषि विभाग द्वारा तथा 2.78 करोड़ रूपए का भुगतान स्वावलंबी गौठानों द्वारा किया गया है।  राज्य में अब तक 4927 गौठान स्वावलंबी हो चुके हैं, जो स्वयं की जमा पूंजी से गोबर क्रय करने लगे हैं।

स्वावलंबी गौठानों द्वारा अब तक 40.49 करोड़ रूपए का गोबर स्वयं की राशि से क्रय कर भुगतान किया गया है। गौठानों में गोबर से  प्राकृतिक पेंट बनाने की 13 यूनिट शुरू हो चुकी हैं। क्रियाशील यूनिटों के माध्यम से अब तक 17936 लीटर प्राकृतिक पेंट का उत्पादन किया गया है, जिसमें से 9622 लीटर प्राकृतिक पेंट के विक्रय से 22 लाख 51 हजार 110 रूपए की आय अर्जित हुई है। राज्य के 21 जिलों के 29 चिन्हित गौठानों में गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने की यूनिट स्थापना अंतिम चरण में है। शीघ्र ही इनसे प्राकृतिक पेंट का उत्पादन होने लगेगा।

गांव-गांव जाकर मैदानी अमला किसानों की समस्याओं का करें निराकरण : रविन्द्र चौबे

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रायपुर। कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में गांव-गांव में कृषि विभाग के मैदानी अधिकारी जाकर किसानों की समस्याओं का निराकरण करेंगे। मैदानी अधिकारी गांवों में भ्रमण के दौरान सप्ताह में कम से कम 5 गौठानों का अवलोकन करेंगे। अवलोकन के दौरान गौठानों के संचालन और वहां चल रही आर्थिक गतिविधियों का जायजा लेंगे। वे आज यहां महानदी भवन मंत्रालय में कृषि विभाग के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे।

कृषि मंत्री चौबे ने कहा कि राज्य सरकार का मुख्य फोकस किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप मैदानी अमले कृषि और उससे जुड़े विभागों की गतिविधियों पर विशेष ध्यान दें। किसानों से जुड़ी समस्याओं और उनके निराकरण के लिए पहल करें। किसानों को समय पर आदान सहायता के साथ ही अन्य जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने गोधन न्याय योजनांतर्गत 5 हजार गौठानों को स्वावलंबी बनाने का आव्हान करते हुए प्रत्येक जिले के 50 प्रतिशत गौठानों को स्वावलंबी बनाने को कहा। साथ ही वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग के लिए किसानों को प्रशिक्षित करें। चौबे ने कहा कि जहां-जहां ग्रीष्मकालीन धान बोया जा रहा है, उसकी जगह लघु धान्य रागी बोने के लिए प्रोत्साहित किया जाए औा इसके लिए जो कार्ययोजना बनाई गई उसे क्रियान्वित करें।

कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि विभाग के मैदानी अधिकारी निरतंर फील्ड में रहकर भ्रमण करें किसानों के सम्पर्क में रहकर उनकी मदद करें, उन्हें किसान चौपाल के माध्यम से अच्छी किस्म के बीज, खाद और फसलों की किस्मों की जानकारी प्रदान करें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कृषि मजदूरों की कई बार अनुपलब्धता के कारण कृषि यंत्रों की मांग बढ़ी है, अतः विभागीय योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक कृषकों तक पहुंचाने हेतु पर्याप्त आंकलन करना सुनिश्चित करें, जिससे कि कृषि लागत में कमी, उत्पादन एवं वृद्धि का किसान अधिक से अधिक लाभ प्राप्त कर सकेगा। उन्होंने कहा कि गन्ना की नई किस्मों का अधिक से अधिक प्रचार करें इससे किसान उनका उपयोग करेंगे, जिससे शक्कर उत्पादन में बढ़ोत्तरी होगी।

चौबे ने कहा कि किसान समृद्धि योजना और शाकम्भरी योजना से किसानों को सिंचाई का लाभ दिलाये इसके लिए प्राथमिकता से परंपरागत माली मरार पटेल समाज को लाभ दिलाये। चौबे ने कहा कृषि विभाग द्वारा आयोजित किए जा रहे प्रदर्शनों की जानकरी हेतु प्रदर्शन बोर्ड लगाए जाए। उन्होंने कहा कि जैविक खेती का रकबा अधिक से अधिक बढ़ाए और साथ ही इसका प्रमाणीकरण भी करें। उन्होंने कहा कि बीज और खाद की माग निरंतर बढते जा रही है। यहां अच्छी बात है विभाग इसकी पूर्ति बेहतर ढंग कर रही है। उन्होंने कहा कि विभागीय योजनाओं का ही परिणाम है कि सरकार द्वारा वर्ष 2022-23 में धान खरीदी के लक्ष्य 110 लाख मे.टन के विरूद्ध अद्यतन 100 लाख मे.टन धान की खरीदी कर सका है।

कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह ने मैदानी अधिकारी समस्त केन्द्रीय एवं राज्य पोषित योजनाओं तथा कृषि से संबंद्ध अन्य विभागों की समन्वित योजना के बेहतर क्रियान्वयन हेतु मैदानी अधिकारियों को सक्रिय कर शत-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति करने के निर्देश दिए। डॉ. कमलप्रीत ने कहा कि जो किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना अंतर्गत लाभ ले रहे हैं उन्हीं कृषकों का लगभग 50 प्रतिशत कृषकों को किसान क्रेडिट कार्ड नहीं बना है। अतः बैंक एंव कृषि विभाग द्वारा विशेष कैंप लगाकर किसान क्रेडिट कार्ड बनाना सुनिश्चित करें। उन्होंने उद्यानिकी फसलों में दिए जाने वाले शून्य प्रतिशत ऋण योजना को प्रचार करने के निर्देश दिए।

समीक्षा में कृषि विभाग के संचालक अयाज तम्बोली, बीज निगम के प्रबंध संचालक माथेश्वरन व्ही., मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक पी.एस. एल्मा, संयुक्त सचिव के.सी. पैकरा, कृषि विभाग के उप सचिव श्रीमती तुलिका प्रजापति, अपर संचालक एस.सी. पदम, जी.के. पीढ़िया, सी.बी. लोढ़ेकर, आर.के. चन्द्रवंशी सहित राज्य के सभी जिलों के कृषि विभाग के संभागीय एवं जिला अधिकारी शामिल हुए।

किसानों की बेहतरी छत्तीसगढ़ सरकार की प्राथमिकता : कृषि मंत्री रविंद्र चौबे

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रायपुर। कृषि मंत्री रविंद्र चौबे आज सेवा सहकारी केंद्र धमधा में 14 लाख रूपए की लागत से बने किसान कुटीर भवन लोकार्पण और नवीन धान खरीदी उपकेंद्र करेली का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्र के किसानों को कुटीर भवन व नवीन धान खरीदी उपकेंद्र के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी। मंत्री चौबे ने कहा कि किसानों की बेहतरी छत्तीसगढ़ सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने कहा कि किसान कड़ी धूप में तपस्या कर, हर परिवार के थाली में अन्न मुहैया कराता है, ऐसे अन्नदाता किसान भाईयों के हितों का ध्यान रखना और उनका सम्मान करना हम सबकी जिम्मेदारी है।



मंत्री चौबे ने कहा कि सरकार ने सहकारी समिति के अंतर्गत किसानों की सुविधा के लिए किसान कुटीर भवन का निर्माण कराया है, ताकि यहां आने वाले किसान भाईयों को विश्राम, पेयजल आदि की सुविधा उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि किसान भाई आसानी से अपनी उपज बेच सके। इसको ध्यान में रखकर नए धान खरीदी उपकेंद्र भी खोले गए हैं, इसका एक उदाहरण करेली भी है। उन्होंने यह भी बताया कि धमधा समिति में में कुल 11 गांव  थे, जिनमें से 3 गांव  वर्ष 2020 में बरहापुर नवीन समिति में स्थानांतरित हो गए। 8 शेष गांव धमधा में थे, जिसमें से 4 गांव वर्तमान में धान खरीदी उपकेंद्र करेली में स्थानांतरित हुए हैं। इस क्षेत्र के किसानों को अपने निकटतम स्थल पर धान विक्रय करने की सुविधा प्राप्त होगी।

मंत्री श्री चौबे ने इस अवसर पर फसल बीमा को लेकर भी शासन की मंशा पर प्रकाश डाला और कहा कि फसल बीमा आपदा की स्थिति में किसानों का सुरक्षा कवच है। जिसका लाभ हर किसान को लेना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कृषक की आमदनी मुख्य रूप से तीन बातों पर निर्भर करती है,पहला कृषक सभी सीजन में फसल ले, दूसरा खेती के लिए नवीनतम टेक्नोलॉजी का उपयोग करें और तीसरा उन्नत किस्म के बीज का उपयोग करें। छत्तीसगढ़ सरकार इसी दिशा में कर रही है और किसानों के लिए ऐसा इकोसिस्टम बनाया जा रहा है, जोकि उनके आर्थिक विकास का आधार स्तंभ हो।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि अपेक्स बैंक अध्यक्ष व केबिनेट मंत्री दर्जा छत्तीसगढ़ शासन माननीय बैजनाथ चन्द्राकर भी उपस्थित थे। चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार नीति में किसानों व नागरिकों की सेवा निहित है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ उन चुनिंदा राज्यों में से एक है जहां 750 करोड़ बीमा क्लेम किसानों को दिया गया है। चार सालों में किसानों की बदलती हुई तकदीर का जिक्र भी किया, जिसमें उन्हें बैंकिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी जोड़ा गया और माइक्रो एटीएम जैसे सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई।

इस अवसर पर किसानों को कृषि यंत्रों का भी  वितरण किया गया। कार्यक्रम में संचालक कृषि डा.अयाज़ तम्बोली, संचालक उद्यानिकी माथेश्वरन व्ही. अपर संचालक कृषि पीडिया, अपर संचालक मंडी बोर्ड सवन्नी, अपेक्स बैंक के डीजीएम भूपेश चंद्रवंशी, प्रबंधक अभिषेक तिवारी, बड़ी संख्या में किसानों, सोसाइटी प्रतिनिधियों, कृषि विभाग, उद्यानिकी, सहकारिता तथा मंडी बोर्ड के अधिकारी व कर्मचारीगण उपस्थित थे।

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