Media24Media.com: किसान आंदोलन

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किसान आंदोलन के बीच कांग्रेस का ऐलान, राहुल गांधी ने कहा- हम देंगे MSP की कानूनी गारंटी

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 Farmers Protest : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के साथ मिलकर मंगलवार को एक उल्लेखनीय घोषणा की। उन्होंने घोषणा की कि अगर आगामी लोकसभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन सत्ता में आता है तो I.N.D.I.A ब्लॉक विभिन्न फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित करने वाला एक कानून लाएगा। गौरतलब है कि देशभर के किसानों की यह लंबे समय से लंबित मांग है। राहुल ने अपने एक्स पोस्ट में कहा कि किसान भाइयों आज ऐतिहासिक दिन है! कांग्रेस ने हर किसान को फसल पर स्वामीनाथन कमीशन के अनुसार MSP की कानूनी गारंटी देने का फैसला लिया है।


कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि यह कदम 15 करोड़ किसान परिवारों की समृद्धि सुनिश्चित कर उनका जीवन बदल देगा। न्याय के पथ पर यह कांग्रेस की पहली गारंटी है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि कँटीले तार, ड्रोन से आँसू गैस, कीले और बंदूक़ें… सबका है इंतज़ाम, तानाशाही मोदी सरकार ने किसानों की आवाज़ पर जो लगानी है लगाम ! याद है ना “आंदोलनजीवी” व “परजीवी” कहकर किया था बदनाम, और 750 किसानों की ली थी जान? 10 सालों में मोदी सरकार ने देश के अन्नदाताओं से किए गए अपने तीन वादे तोड़े हैं। 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी। स्वामीनाथन रिपोर्ट के मुताबिक़ Input Cost + 50% MSP लागू करना। MSP को क़ानूनी दर्जा। उन्होंने कहा कि हमारा किसान आंदोलन को पूरा समर्थन है। (Farmers Protest)

कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि बातचीत करके सरकार ने जो किसानों से समझौता किया था उन बातों की मांगो को सरकार बातचीत के जरिए समाधान करने का काम करे। किसानों की MSP की मांग जायज मांग है, उनके साथ बैठकर शांति पूर्ण तरीके से समझौता किया जाए। कांग्रेस नेता कमलनाथ ने कहा कि किसान ही आर्थिक गतिविधि को पैदा करते हैं। किराने की दुकान तब चलती है जब किसान की जेब में पैसा होता है... किसानों के साथ लगातार ये अन्याय होता रहा है। सबसे न्यूनतम मांग तो MSP की होनी चाहिए। कम से कम उन्हें सही भाव तो मिले। ये बहुत आवश्यक है। रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि पूरा बॉर्डर सील कर दिया गया है जैसे ये कोई दुश्मन देशों का बॉर्डर हो... हरियाणा-पंजाब, दिल्ली से सटे राजस्थान और उत्तर प्रदेश से सटे दिल्ली के पड़ोसी जिलों में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह से बंद कर दी गई हैं वो भी तब जब बोर्ड पेपर सर पर हैं... दिल्ली के चारो तरफ के जिलो में मौखिक हिदायत दी गई है कि किसी किसान के ट्रैक्टर में 10 लीटर से ज्यादा डीज़ल ना डाला जाएगा... चौतरफा जुल्म का आलम है। (Farmers Protest)

किसान नेता करेंगे कलेक्टोरेट, पुलिस अधीक्षक और मंडी कार्यालय का घेराव, अन्नदाताओं के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे-जागेश्वर

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महासमुन्द। किसान नेताओं ने कलेक्टोरेट, पुलिस अधीक्षक और मंडी कार्यालय का घेराव करने का ऐलान कर दिया है। पूंजीवादी व्यवस्था में अन्नदाता परेशान हैं। किसानों का धान खरीदी कर राइस मिलर भुगतान नहीं कर रहे हैं। हालात ऐसी हो गई है कि किसान आत्महत्या करने मजबूर हो गए हैं। शासन-प्रशासन को कुम्भकर्णी निद्रा से जगाने किसान नेता अब आंदोलन करने जा रहे हैं। इस कड़ी में 13 सितम्बर को कलेक्टोरेट, पुलिस अधीक्षक और मंडी कार्यालय का घेराव किया जाएगा।

प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए किसान नेता




प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने बताया कि ग्राम कन्हारपुरी के किसान कांतिलाल साहू को बेचे गए धान का भुगतान नहीं कर क्रेता व्यापारी  बजरंग इण्डस्ट्रीज कोसरंगी (महासमुन्द) के संचालक  सुमित अग्रवाल पिता  बजरंग अग्रवाल द्वारा इतना परेशान किया गया कि किसान ने आत्महत्या कर लिया। धान का 366826/- रुपये भुगतान व्यापारी द्वारा नहीं किये जाने पर कृषक ने 20 अगस्त 2022 को कीटनाशक पी लिया। उपचार के दौरान मेकाहारा रायपुर में 24 अगस्त 2022 को उसकी  मृत्यु हो गई। किसान आत्महत्या के मामले में उनके समस्त दस्तावेज/प्रकरण की जानकारी सचिव कृषि उपज मंडी समिति महासमुन्द से सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त किया गया है। जिसके  अनुसार सचिव कृषि उपज मंडी समिति महामुन्द ने किसान कांतिलाल साहू के प्रकरण में भारी लापरवाही बरती है। अपने कर्तव्यों का निर्वाह नही कर किसान कांतिलाल साहू को आत्महत्या करने दुष्प्रेरित  किया है। कांतिलाल साहू ने सचिव कृषि उपज मंडी समिति महासमुन्द को  09.09.2019 को लिखित शिकायत कर बेचे गये धान की कीमत  भुगतान के लिए आवेदन प्रस्तुत किया है। अंतिम आवेदन 24/06/2022 को भी प्रस्तुत की गई है। 

        उच्च न्यायालय के आदेश को किया दरकिनार

आवेदन पर सचिव कृषि उपज मंडी समिति महासमुन्द ने क्रेता व्यापारी बजरंग अग्रवाल फर्म बजरंग इण्डस्ट्रीज ग्राम कोसरंगी के विरूद्ध कागजी कार्यवाही किया गया है।  कागजी कार्यवाही के खिलाफ क्रेता व्यापारी बजरंग अग्रवाल ने मंडी प्रशासन के विरुद्ध उच्च न्यायालय बिलासपुर में रिट याचिका कमांक डब्लू.पी.सी . 3877/2019 दायर किया था। उच्च न्यायालय बिलासपुर ने दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए  15.11.2019 को निर्णय पारित किया है कि प्रकरण का निराकरण मंडी प्रशासन सचिव, दोनों पक्षों को बुलाकर उनके पक्ष सुनने के पश्चात अतिशीघ्र निर्णय पारित कर क्रेता-विक्रेता को आदेशित करें । इस प्रकरण पर मंडी बोर्ड मुख्यालय प्रबंध संचालक रायपुर ने भी मंडी सचिव महासमुन्द को अनेको बार पत्र प्रेषित कर  उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार 15 दिवस के भीतर कार्यवाही करने निर्देश दिया गया है। परन्तु मंडी सचिव ने प्रकरण पर 03 वर्ष व्यतीत होने के बाद भी कोई रूचि नहीं दिखाई। उच्च न्यायालय एवं वरिष्ठ कार्यालय के निर्देशों के प्रति गंभीर लापरवाही बरतते हुए आदेशों का उल्लंघन किया। यदि समय पर आदेशों का पालन कर प्रकरण में पहल कर लिया गया होता तो किसान कांतिलाल साहू की जान बच सकती थी।

पीड़ित किसान कांति लाल साहू अपने प्रकरण पर न्याय पाने के लिए मंडी सचिव के पास बार - बार जाया करता था ।  सचिव उनके निवेदन आवेदन पर विगत 03 वर्षों से कोई ध्यान नहीं दिया और न ही मंडी बोर्ड के अधिकारी कोई जांच पड़ताल के लिए मंडी आये। जिस कारण से कांतिलाल साहू निराश होकर कीटनाशक दवाई का सेवन कर आत्महत्या कर लिया। कृषि उपज मंडी समिति महासमुन्द क्षेत्र में ऐसे बहुत से किसान हैं जो अपने बेचे गये धान की राशि भुगतान प्राप्त करने के लिए वर्षों से भटक रहे हैं।

किसान का फर्जी हस्ताक्षर कर किया गड़बड़ी

          मंडी से प्राप्त दस्तावेज अनुसार कांतिलाल साहू के नाम से उपमंडी भोरिंग में क्रेता फर्म एम.पी. राईस ट्रेडिंग कम्पनी राईस मिल में सौदा पत्रक व भुगतान पत्रक काटा गया है। जिसमें पर्ची तैयार करने वाले कर्मचारी का लिखावट एवं किसान का हस्ताक्षर एक समान है। भुगतान में हस्ताक्षर अंग्रेजी में है तथा सौदा पत्रक में हस्ताक्षर हिन्दी में है। जबकि किसान कांतिलाल साहू अंग्रेजी में हस्ताक्षर नहीं करता था। भुगतान पत्रक में किसान का हस्ताक्षर फर्जी है, जो किसान के साथ फर्जीवाड़ा किये जाने का संदेह पैदा करता है। मंडी से काटे गये सौदा पत्रक पर्ची में गाड़ी नंबर लिखा हुआ है जो जांच योग्य है। कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 की उपविधि 16(4) के अनुसार सौदा पत्रक में किसान का हस्ताक्षर होना अनिवार्य है। मंडी प्रशासन द्वारा नियम विरूद्ध सौदा पत्रक जारी किया गया है जिसकी जानकारी उपज बेचने वाले किसान को भी नहीं है। इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि जांच अधिकारियों द्वारा विक्रेता किसान कांतिलाल साहू, परिवहनकर्ता वाहन चालक  नारायण साहू, श्री बजरंग इण्डस्ट्रीज में धान की बोरी खाली करने वाले श्रमिक हमाल  लाला साहू,  शिवचरण साहू से लिये गये बयान और धर्मकांटा से प्राप्त तौल पर्ची से होती है। क्रेता व्यापारी श्री बजरंग अग्रवाल के दो फर्म श्री बजरंग इण्डस्ट्रीज एवं एम.पी. राईस ट्रेडिंग है।  दोनो फर्म का मालिक  बजरंग अग्रवाल के पुत्र सुमित अग्रवाल है। कृषक कांतिलाल साहू का मिल मालिक  बजरंग अग्रवाल ने अपने मिल परिसर ग्राम कोसरंगी में सीधे धान खरीदी किया है। धान लाने के लिए खाली बारदाना का आवक-जावक पर्ची बनाकर दिया गया है। पर्ची में एम.पी. राईस ट्रेडिंग कम्पनी लिखा है।

मंडी और व्यापारियों की मिलीभगत से लुटे जा रहे किसान

         सारांश यह है कि कृषि उपज मंडी समिति महासमुन्द क्षेत्र में व्यापारियों द्वारा किसानों से सीधे धान खरीदी कर मंडी प्रशासन की मिलीगत से फर्जी सौदा पत्रक काटकर किसानों को आर्थिक रुप से लूटा जा रहा है।  और किसानों को मानसिक रुप से प्रताड़ित किया जा रहा है। समय रहते प्रशासनिक  रुप से सुनवाई कर उसका निराकरण नहीं किया गया है। जिसका ताजा परिणाम है कि मृतक किसान कांतिलाल साहू को व्यापारी  बजरंग अग्रवाल द्वारा  366826/- रुपये देयक शेष है।  महामाया एग्रोटेक एवं सांई कृपा राईस मील के संचालक तेजा प्रकाश चन्द्राकर ग्राम साराडीह महासमुन्द द्वारा 57 किसानों का भुगतान 16175282/- रुपये बकाया है। इसी प्रकार राकेश चौहान पिता बुधराम चौहान चण्डी मेडिकल बागबाहरा द्वारा 19 किसानों का भुगतान  6188650.50 रुपये बकाया है। सभी प्रकरणों की जानकारी लिखित रुप में कृषि उपज मंडी समिति महासमुन्द, मंडी बोर्ड रायपुर और जिला कलेक्टर महासमुन्द को अवगत कराया गया है। इन सभी प्रकरणों को 03 से 04 साल बीत गया है, जिसका भुगतान आज तक नहीं किया गया है।

           इसके विरोध में 13 सितम्बर 2022 दिन मंगलवार को दोपहर एक बजे किसानों द्वारा कलेक्टर, पुलिस अधिक्षक व कृषि उपज मंडी समिति महासमुन्द का घेराव कर  इन सभी प्रकरणों को अपने संज्ञान में लेते हुए यथा संभव किसानों को अतिषीघ्र भुगतान कराने और साथ ही कृषि उपजों का क्रय-विक्रय मंडी प्रशासन के सानिध्य में मंडी प्रांगण में कराना अनिवार्य करने मांग पत्र सौंपेंगे। पत्रकार वार्ता में संयोजक जागेश्वर जुगनू चन्द्राकर, तेजराम विद्रोही संयोजक मंडल सदस्य छ.ग. किसान मजदूर महासंघ, सुरेश उर्फ शंकर चन्द्राकर ग्राम बेलसोण्डा, पवन चन्द्राकर ग्राम खरोरा, बिसहत चन्द्राकर ग्राम बेलसोण्डा, प्रवीण चन्द्राकर ग्राम लभराखुर्द प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

ट्रैक्टर रैली के बाद अब रेल का चक्का जाम करने की तैयारी में प्रदर्शनकारी किसान

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केंद्र सरकार (Central government) के तीनों नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में किसान आंदोलन का आज 78वां दिन है, लेकिन अब तक किसानों (Farmers protest Update) की सरकार से बात नहीं बनी। हालांकि बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में किसानों को लेकर चर्चा की बात जरूर कही, जिस वक्त PM संसद से किसान आंदोलन पर अपनी बात रख रहे थे, उसके ठीक कुछ घंटे बाद ही किसान संयुक्त मोर्चा ने नए सिरे से अपने आंदोलन का एक्शन प्लान पेश कर दिया।





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संयुक्त किसान मोर्चा ने रेलवे की राह रोकने का आह्वान (Rail Roko Aandolan) किया है। तारीख 18 फरवरी की मुकर्रर की गई है, लेकिन ट्रैक्टर मार्च की तरह कहीं ये नई कोशिश भी हिंसा की भेंट न चढ़ जाए, इसलिए शांति की अपील अभी से कर दी गई है।





Farmers protest Update- किसान आंदोलन का नया कैलेंडर जारी





  • 12 फरवरी को राजस्थान में सभी टोल प्लाजा को फ्री करने की मुहिम चलाई जाएगी।
  • 14 फरवरी को पुलवामा के शहीदों की याद में देशभर में कैंडल मार्च और मशाल जुलूस निकाला जाएगा।
  • 16 फरवरी को किसान मसीहा छोटूराम की जयंती के दिन देशभर में किसान एकजुटता का प्लान है।
  • देशभर में पहले से चल रहे किसान पंचायत कार्यक्रम को भी आगे बढ़ाया जाएगा।




दिल्ली के लिए निकले पंजाब के किसानों की राह सबसे पहले खट्टर सरकार ने ही रोकी थी। इसीलिए संयुक्त किसान मोर्चा ने हरियाणा से ही हुंकार भरने का ऐलान कर दिया है। निशाने पर सीधे-सीधे BJP-JJP की गठबंधन सरकार है। रणनीति दोनों ही दलों के विधायकों की घेराबंदी का है, लेकिन लोगों के बीच संदेश ये न जाए कि संयुक्त किसान मोर्चा का कार्यक्रम किसी दल विशेष के खिलाफ है, इसलिए आंदोलन की धार, राजस्थान में भी दिखेगी।





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नवंबर में जब किसान आंदोलन दिल्ली पहुंचा था, तब केंद्र सरकार ने समाधान ढूंढने के लिए 11 दौर की बातचीत भी की, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। हालांकि बुधवार को पीएम ने भी लोकसभा में एक बार फिर कहा कि कृषि कानूनों पर विपक्ष को राजनीति बंद करनी चाहिए और ये कानून किसानों के हित में है।





ट्रैक्टर रैली





26 जनवरी को तीन कृषि कानूनों के खिलाफ ट्रैक्टर रैली (Farmers protest Update) के दौरान प्रदर्शनकारी किसान पुलिस से भिड़ गए थे। झड़प के दौरान, प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग ने लाल किले में प्रवेश किया और एक धार्मिक झंडा फहराया। अब तक पुलिस ने लगभग 130 लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं इस हिंसा के मास्टमाइंड दीप सिद्धू को भी गिरफ्तार ( mastermind of Delhi violence Deep Sidhu arrested) कर लिया गया है।





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बता दें कि 3 फरवरी को दिल्ली पुलिस ने दीप सिद्धू (Deep Sidhu arrested), जुगराज सिंह सहित 4 लोगों पर एक-एक लाख का इनाम घोषित किया था। ये लोग लाल किला पर धार्मिक झंडा फहराने और लोगों को हिंसा के लिए उकसाने में शामिल थे।


दंगे की आड़ में निर्दोष किसान नेताओं को न बनाएं बलि का बकरा : मायावती

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लखनऊ. कृषि बिल के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन (Kisan Andolan) को लेकर सियासत तेज है। दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर बवाल के बाद शुरू हुई कार्रवाई को लेकर तमाम विपक्षी दलों ने सरकार को घेराना शुरू कर दिया है। इस बीच बसपा सुप्रीमो मायावती (Mayavati on Republic Day Violence's) ने ऐलान किया है कि किसानों के समर्थन में आज संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण का उनकी पार्टी बहिष्कार करेगी।





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मायावती (Mayavati on Republic Day Violence's) ने कहा कि गणतंत्र दिवस पर दंगे की आड़ में निर्दोष किसान नेताओं का बलि का बकरा न बनाया जाए। बसपा सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट कर कहा है कि बी.एस.पी. ने देश के आन्दोलित किसानों के तीन विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग नहीं मानने व जनहित आदि के मामलों में भी लगातार काफी ढुलमुल रवैया अपनाने के विरोध में, आज राष्ट्रपति के संसद में होने वाले अभिभाषण का बहिष्कार करने का फैसला लिया है।


किसान आंदोलन: आखिरकार सरकार और संगठनों के बीच बन रही सहमति की स्थिति

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किसान आंदोलन (Farmers Movement) को खत्म करने के लिए किसानों और सरकार के बीच वार्ता किसी नतीजे पर पहुंचती हुई नजर आ रही है। किसान यूनियनों (Farmer Unions) ने 10वीं वार्ता के बाद अब आंदोलन (Farmers Protest Updates) समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार नए कृषि कानूनों को 18 महीने रोक लगाने के लिए तैयार हो गई है। माना कि अभी इस मामले को लेकर अंतिम नतीजे सामने नहीं आए हैं। इसके लिए अगली बैठक का इंतजार करना पड़ेगा, क्योंकि किसान संगठनों की ओर से इस प्रस्ताव पर बताने के लिए वक्त मांगा गया है।





किसान यूनियनों से बातचीत के बाद केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि' सरकार एक से डेढ़ साल तक नए कानून के क्रियान्वयन को स्थगित करने के लिए सहमत है। इस दौरान किसान और सरकार के प्रतिनिधि मिलकर समस्याओं का हल खोजें और जो समाधान हो उस को आगे बढ़ाया जाए।' केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि किसान यूनियनों की ओर से 21 जनवरी को इस विषय में विस्तार पूर्वक चर्चा की जाएगी। इसके बाद 22 जनवरी को होने वाली बैठक में यूनियन अपना फैसला बताएंगे।





ट्रैक्टर निकालने की मांग को लेकर हुई बैठक(Farmers Protest Updates)





हालांकि गणतंत्र दिवस पर किसानों की ओर से ट्रैक्टर निकालने की मांग को लेकर हुई बैठक बेनतीजा रही। दिल्ली पुलिस ने किसानों को रिंग रोड पर ट्रैक्टर रैली निकालने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। जानकारी के अनुसार किसान रिंग रोड पर ट्रैक्टर रैली निकालने को लेकर आए हुए हैं। लेकिन गुरुवार को तीसरे दौर की वार्ता के बाद भी कोई नतीजा सामने नहीं आ रहा। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के मद्देनजर ट्रैक्टर रैली निकालने पर रोक लगा दी गई है।





प्रदर्शनकारियों की मौत जारी





कृषि कानूनों को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों से किसान संगठन और किसान राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर धरना देकर आंदोलन कर रहे हैं। लगभग 2 महीने से महीने से अधिक समय से यह आंदोलन चल रहा है। भारतीय किसान यूनियन के अनुसार आंदोलन में अब तक 100 से अधिक आंदोलनकारियों की मौत हो चुकी है। यह सिलसिला लगातार जारी है।





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मंगलवार रात ही हरियाणा के रोहतक निवासी एक 42 वर्षीय व्यक्ति ने जहर खाकर अपनी जान दे दी। मृतक का नाम जय भगवान राणा बताया जा रहा है जो कि किसान था। करीब 2 महीने उनके प्रदर्शन में 5 किसानों ने अब तक आत्महत्या कर ली है। राणा ने मंगलवार शाम सल्फेट टेबलेट खा ली और सड़क पर गिर पड़ा। अस्पताल लाया गया लेकिन इस दौरान रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।


सरकार कृषि कानून स्थगित करने पर हुई राजी

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दिल्ली की सीमाओं पर तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ बीते 55 दिनों से जारी आंदोलन के बीच आज (बुधवार) किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच 10वें दौर की बातचीत एक बार फिर बेनतीजा ही खत्म हो गई। बैठक के दौरान सरकार ने सहमित बनने तक कृषि कानूनों को स्थगित करने का प्रस्ताव (Proposal to Defer Agricultural Law) दिया है। सरकार के प्रस्ताव को लेकर किसान नेताओं ने विज्ञान भवन में अलग से बैठक की। कुछ देर बैठक करने के बाद किसान नेताओं ने तय किया कि वे गुरुवार को अन्य किसानों से बातचीत करने के बाद फैसला लेंगे।





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वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बैठक में कहा कि आज प्रकाश पर्व का शुभ दिन है। हमें इस मुद्दे पर मिलकर कोई बीच का रास्ता निकालना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आखिर कब तक किसान इस आंदोलन के कारण सड़कों पर बैठे रहेंगे। इसके लिए हम सभी को मिलकर समाधान निकालना पड़ेगा।





कानून लागू नहीं करेंगे : नरेंद्र सिंह तोमर(Proposal to Defer Agricultural Law)





कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि हम तीनों कानूनों पर आपके (किसान नेताओं) साथ बिंदुवार चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार किसी भी कीमत पर कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी। कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार और किसान संगठनों के नेताओं की एक कमेटी बना देते हैं, जब तक बीच का रास्ता नहीं निकलेगा तब तक हम कानून को लागू नहीं करेंगे। सरकार ये एफिडेविट सुप्रीम कोर्ट में भी देने को तैयार हैं। 


किसान आंदोलन : किसान संगठन और सरकार के बीच वार्ता टली, अब 20 जनवरी को होगी बातचीत

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नई दिल्ली : केंद्र के नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन (Farmer's Protest Updates) जारी है। किसान संगठनों और सरकार के बीच दसवें दौर की वार्ता अब 20 जनवरी यानी बुधवार को होगी। केंद्र सरकार की ओर से कहा गया है कि दोनों पक्ष जल्द से जल्द गतिरोध सुलझाना के इच्छुक हैं, लेकिन अलग विचारधारा के लोगों की एंट्री इसमें होने के कारण देरी हो रही है।





मिली जानकारी के मुताबिक पहले यह बैठक 19 जनवरी मंगलवार को निर्धारित थी। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के निकटवर्ती सूत्रों के अनुसार अब यह बैठक 20 जनवरी को होगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, किसान संगठनों के साथ, सरकार की ओर से मंत्री समूह की बैठक 19 जनवरी 2021 की बजाय अब 20 जनवरी 2021 को दोपहर दो बजे विज्ञान भवन में होगी।





केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह ने कहा (Farmer's Protest Updates)





केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह ने तोमर मध्यप्रदेश के ग्वालियर में सोमवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “किसान यूनियनों से हर बार यही कहा गया है कि वे प्रावधान पर चर्चा करें, जिस प्रावधान से किसान को तकलीफ है उस पर विचार करने के लिए और उसमें संशोधन करने के लिए सरकार खुले मन से चर्चा कर रही है और करना चाहती है मगर यूनियन की तरफ से प्रावधान पर चर्चा नहीं हो पा रही है, इसलिए गतिरोध जारी है।”





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उन्होंने उम्मीद जाहिर की है कि अगले दौर की बैठक में किसान यूनियन विकल्पों पर चर्चा करेंगे तो समाधान का रास्ता निकलेगा। किसान संगठन पिछले 55 दिनों से दिल्ली की सीमा पर अपनी मांगो को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं । किसान संगठनों और सरकार के बीच नौ दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। सरकार कृषि सुधार कानूनों में संशोधन करना चाहती है जबकि किसान संगठन कानून वापस लेने कि मांग पर अड़े हुए है ।


सरकार के दबाव में आकर सुप्रीम कोर्ट सुना रहा फैसला!

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कृषि कानून (Agricultural Law News) को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप करने वाले फैसले को लेकर किसान संगठनों में जमकर नाराजगी है। छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के बैनर तले रायपुर में लंबे समय से केंद्र के इस कानून को लेकर धरना प्रदर्शन चल रहा है। लगातार किसान संगठनों के पदाधिकारी और किसान धरना देकर क्रमिक भूख हड़ताल कर आंदोलन कर रहे हैं। किसानों ने आज कृषि कानून (Agricultural Law News)की प्रतियां जलाकर अपना विरोध जताया है।





रायपुर में मरे मिले 12 से 15 कबूतर, जांच के लिए भेजे सैंपल






छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के कई सदस्य दिल्ली में भी आंदोलन में शामिल हुए हैं। ऐसे में आंदोलन को खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाए जा रहे कमेटी को लेकर भी किसानों ने नाराजगी जताई है।






कमेटी को लेकर विश्वसनीयता नहीं (Agricultural Law News)





छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के संचालक मंडल सदस्य डॉ संकेत ठाकुर ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि सरकार उनकी है सुप्रीम कोर्ट भी उनके ही दबाव में आकर यह फैसला सुना रहा है। ऐसे में आने वाले समय में भी बनाई जा रही कमेटी को लेकर किसी तरह की कोई विश्वसनीयता नजर नहीं आ रही है। आने वाले समय में किसान लगातार इसे लेकर आंदोलन करेंगे। जब तक सरकार कृषि कानून को वापस नहीं लेती आंदोलन जारी रहेगा।


किसान आंदोलन और कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट में आज होगी सुनवाई

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प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के साथ सरकार की बातचीत में गतिरोध बरकरार है, इस बीच उच्चतम न्यायालय नए कृषि कानूनों को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं और दिल्ली की सीमा पर चल रहे किसानों के प्रदर्शन (farmer's protest news) से जुड़ी याचिकाओं पर आज सुनवाई करेगा।





उद्धव सरकार ने घटाई पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस की सुरक्षा





केंद्र और किसान संगठनों के बीच 7 जनवरी को हुई आठवें दौर की बाचतीच में भी कोई समाधान निकलता नजर नहीं आया, क्योंकि केंद्र ने विवादास्पद कानून निरस्त करने से इनकार कर दिया. जबकि किसान नेताओं ने कहा कि वे अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं और उनकी 'घर वापसी' सिर्फ 'कानून वापसी' के बाद होगी।





सुनवाई महत्वपूर्ण (farmer's protest news)





प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा आज की जाने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र और किसान नेताओं के बीच 15 जनवरी को अगली बैठक निर्धारित है। शीर्ष न्यायालय को केंद्र सरकार ने पिछली तारीख पर बताया था कि उसके और किसान संगठनों के बीच सभी मुद्दों पर 'स्वस्थ चर्चा' जारी है और इस बात की संभावना है कि दोनों पक्ष निकट भविष्य में किसी समाधान (farmer's protest news)पर पहुंच जाएं।





पिछली सुनवाई की गई थी स्थगित





अदालत ने तब सरकार को भरोसा दिया था कि अगर वह उससे कहेगी कि बातचीत के जरिये समाधान संभव है तो वह 11 जनवरी को सुनवाई नहीं करेगी। अदालत ने कहा था कि हम स्थिति को समझते हैं और चर्चा को बढ़ावा देते हैं। हम सोमवार (11 जनवरी) को मामला स्थगित कर सकते हैं अगर आप जारी वार्ता प्रक्रिया की वजह से ऐसा अनुरोध करेंगे तो।





आठवें दौर की बातचीत में नहीं निकला हल





आठवें दौर की बातचीत के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका क्योंकि किसान नेताओं ने कानून को निरस्त करने की अपनी मांग का कोई विकल्प नहीं सुझाया। किसानों की एक संस्था ‘कंसोर्टियम ऑफ इंडियन फार्मर्स असोसिएशन’ (सीआईएफए) ने तीनों कृषि कानूनों का समर्थन करते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया और मामले में पक्षकार बनाए जाने का अनुरोध किया।





उसने कहा कि कानून किसानों के लिए 'फायदेमंद' हैं और इनसे कृषि में विकास और वृद्धि आएगी। उच्चतम न्यायालय ने इससे पहले तीनों विवादित कृषि कानूनों को लेकर दायर कई याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर उससे जवाब मांगा था।


कृषि कानून पर सरकार ने रखा पक्ष, जानिए 10 अहम बातें

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कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली में किसानों का आंदोलन जारी है। 14 दिन से आंदोलनरत किसान तीनों कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग पर अड़े हैं। सरकार और किसान संगठनों के बीच हुई पांच दौर की बैठक बेनतीजा रही। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद भी सरकार किसानों को मना पाने में असमर्थ रही। इसे लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस की।





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कृषि मंत्री ने बतायी 10 अहम बातें-





  • कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि इस कानून में ऐसे प्रावधान हैं कि बिना जोखिम उठाए पैसे मिलें। किसान की जमीन को पूरी तरह से सुरक्षित रखने का प्रबंध किया गया है। अगर विवाद होता है तो एसडीएम 30 दिन के भीतर उसका निराकरण करेगा।
  • पहले यूरिया की काफी किल्लत होती थी। जब किसानों को जरूरत होती थी तो मुख्यमंत्री दिल्ली आ जाते थे। कई बार यूरिया लूटने की घटनाएं भी हुईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरिया की पूर्ति नियमित की। 
  • कृषि कानूनों पर कांट्रैक्ट फार्मिंग को लेकर किसानों में डर है। कृषि मंत्री ने कहा कि समझौता किसान की फसल का होगा। किसान की जमीन, पट्टा या लीज पर नहीं ली जा सकेगी। फसल तैयार करने के दौरान कोई खेत पर कोई ढांचा बनाने की जरूरत पड़ी तो बाद में ये ढांचा हटाना पड़ेगा। पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात में कांट्रैक्ट फार्मिंग पहले से ही हो रही है। 
  • कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि हम बार-बार एमएसपी के बारे में किसानों को आश्वासन दे चुके हैं, लेकिन अब भी किसानों को कोई शंका है तो मोदी सरकार एमएसपी पर लिखकर देने को तैयार है।
    किसानों को डर है कि इन कानूनों से एपीएमसी की मंडियां खत्म हो जाएंगी। किसान प्राइवेट मंडी के चंगुल में फंस जाएगा। राज्य सरकार प्राइवेट मंडियों का पंजीकरण कर सकें ऐसी व्यवस्था की जाएगी।
  • कृषि कानून में प्रावधान है कि पैन कार्ड से व्यापारी खरीदारी कर सकता है, लेकिन किसानों को लगता था कि कोई भी पैन कार्ड के जरिए खरीदकर भाग जाएगा। इस आशंका के समाधान के लिए राज्य सरकार को शक्ति दी जाएगी कि वह इस प्रकार की परिस्थिति में कोई भी नियम बना सकती है। 
  • कृषि मंत्री ने कहा कि स्वामीनाथन आयोग ने 2006 में एमएसपी को डेढ़ गुना करने की बात कही थी, हमने उसे भी पूरा करने की कोशिश की। अधिक उम्र के किसानों के लिए भी केंद्र सरकार ने कई योजनाएं बनाई हैं। किसानों की सामाजिक सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है। नया कानून नए मौके और नई टेक्नोलॉजी लेकर आएगा। 
  • तोमर ने कहा कि जब तक कृषि और कृषक और गांव दोनों आत्मनिर्भर नहीं होंगे तब तक कृषि क्षेत्र का उत्थान नहीं हो सकता। फसलों की खरीदी पिछले वर्ष की तुलना में अधिक हुई। हमारी कोशिश है कि ऐसी संरचनाओं का निर्माण किया जाए जिससे किसानों को फायदा हो। हर्बल पार्क, मधुमक्खी पालन के लिए लोन उपलब्ध कराया जाए। 
  • कृषि मंत्री ने कहा कि उपज बेचने के बाद किसान को उसकी कीमत मिलने का प्रावधान हो जाएगा, लेकिन इस कानून में यह प्रावधान सुनिश्चित किया गया है। हमें लगता है कि लोग इसका फायदा उठाएंगे, किसान महंगी फसलों की ओर आकर्षित होंगे, बुवाई के समय उसे मूल्य की गारंटी मिल जाएगी। किसान की भूमि को पूरी सुरक्षा देने का प्रबंध किया गया है।  
  • आरोप लग रहे थे कि कृषि कानून अवैध हैं क्योंकि कृषि राज्य का विषय है और केंद्र सरकार ये नियम नहीं बना सकती है। इस बारे में तोमर ने स्पष्ट किया कि केंद्र के पास व्यापार पर कानून बनाने का अधिकार है।





किसान आंदोलन के दौरान बाप बेटा और चाचा भतीजा आए आमने-सामने

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किसान आंदोलन के दौरान ऐसे कई मामले सामने आए हैं कि जब किसान पिता आंदोलन में शामिल होकर किसान एकता का नारा लगाते हुए आगे बढ़ रहा है और वहीं दूसरी तरफ उनका अपना बेटा वर्दी में खड़ा होकर उन्हें रोकने का प्रयास कर रहा है।





फतेहपुर पुटठी गांव के किसान का बेटा दिल्ली पुलिस में है।उनका कहना है कि बेटा अपनी ड्यूटी निभा रहा है और मैं किसानों के साथ हक की लड़ाई में कृषि कानून का विरोध कर रहा हूं। इस आंदोलन में भले ही हम आमने सामने है लेकिन हमारे दिल जुड़े हुए हैं।





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ऐसा ही एक मामला कृषि आंदोलन के दौरान देखने मिला जब चाचा और भतीजा आंदोलन के दौरान आमने-सामने आ गए. दरअसल इस किसान आंदोलन में ऐसे कई परिवार है जिनके परिवार के सदस्य पुलिस में हैं। इस दौरान अक्सर किसान और जवान कई बार भिड़े हैं।





किसान ने कहा दिल का रिश्ता तो रिश्ता है





भारतीय किसान युवा के पूर्व जिला अध्यक्ष का कहना है कि किसान आंदोलन के दौरान एक भी ऐसा काम नहीं करेंगे, जो बच्चों का सिर झुका दे। हमारे ही बच्चे ड्यूटी कर रहे हैं, उन्हें लाठी चलाने के लिए कहा जाएगा तो वे लाठी चलाएंगे और हम सहेंगे, लेकिन दिल का रिश्ता तो रिश्ता होता है।





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इस आंदोलन के दौरान जब किसानों से पूछा गया कि इस दौरान अपने ही बच्चों के सामने आकर रोके जाने से उन्हें कैसा महसूस होता है तो उनका है था कि हमारे घर के बच्चे हैं न हम चाहते हैं कि माहौल खराब हो और न ही उनकी ऐसी मंशा है। सरकार हमारी मांग मान ले तो आंदोलन खत्म हो जाएगा। 






किसान आंदोलन : आठ दिसंबर को भारत बंद करेंगे किसान

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नई दिल्ली: दिल्ली को घेरने के बाद किसानों का यह आंदोलन (Peasant movement) पूरे देश में फैलता जा रहा है। किसानों ने अब 8 दिसम्बर को भारत बंद (8 December Bharat band) की घोषणा की है। इस दौरान सभी टोल प्लाजा भी बंद करवाए जाएंगे, इसके साथ ही दिल्ली आने वाले सभी रास्ते भी बंद किए जाएंगे। हालांकि कल सरकार के साथ एक दौर की बात और होना है, पर किसान बिल वापसी और MSP की गारंटी से कम पर तैयार नहीं हैं।





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किसानों की मांग है, कि MSP स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों की तरह C2+50 परसेंट होना चाहिए। इससे पहले बीते रोज पूरे देश में 2 घंटे के चक्का जाम किया गया, अब 5 दिसम्बर को हर गांव में मोदी, अंबानी और अडानी का पुतला जलाया जाएगा।





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सिंघु बॉर्डर पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि इसे सिर्फ पंजाब आंदोलन बोलना सरकार की साजिश है मगर आज किसानों ने दिखाया कि ये आंदोलन पूरे भारत (8 December Bharat band) में हो रहा है और आगे भी होगा। हमने फैसला लिया है कि अगर सरकार कल कोई संशोधन रखेगी तो हम संशोधन स्वीकार नहीं करेंगे।





प्रेस वार्ता के दौरान आंदोलन कर रहे किसान नेताओं ने कहा कि आज तमिलनाडु में और कर्नाटक में हमारा प्रदर्शन था। अब इन किसानों को भी दिल्ली आने को बोल दिया गया है। पूरे देश के किसानों को दिल्ली आने का आह्वान किया गया है। अब सरकार से लड़ाई आर पार की होगी। आंदोलन को लेकर पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता है।


पंजाब के पूर्व CM प्रकाश सिंह बादल ने पद्म विभूषण लौटाया

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नई दिल्ली : किसान आंदोलन (Peasant movement) के समर्थन में और कृषि कानून के विरोध में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल (Parkash Singh Badal returned padma vibhushan) ने अपना पद्म विभूषण सम्मान लौटाया है।





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पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल (Prakash Singh Badal) ने यह सम्मान लौट आते हुए कहा कि “वह किसानों के साथ किए जा रहे केंद्र सरकार के व्यवहार से बेहद आहत है। किसानों के समर्थन सहित कृषि कानून के विरोध में उन्होंने अपना यह सम्मान केंद्र सरकार को वापस लौटाने का फैसला किया है।





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बादल (Prakash Singh Badal) ने अपना सम्मान लौटाने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को 3 पन्नों की चिट्ठी लिखी है। जिसमें उन्होंने लिखा है कि “मैं इतना गरीब हूं कि किसानों के लिए कुर्बान करने के लिए मेरे पास कुछ और नहीं। मैं जो भी हूं, किसानों की वजह से हूं, ऐसे में अगर किसानों का अपमान हो रहा है तो किसी तरह का सम्मान मेरे द्वारा रखने का कोई फायदा नहीं है।”





Prakash Singh Badal बोले किसानों से किया धोखा





पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल (Parkash Singh Badal returned padma vibhushan) ने अपने पत्र में आगे लिखा कि किसानों के साथ जिस तरह का धोखा किया गया है, मैं उस से आहत हूं। केंद्र सरकार के रवैए पर उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि किसानों के आंदोलन को जिस तरह से गलत नजरिए से पेश किया जा रहा है, वह बेहद दर्दनाक है।





प्रधानमंत्री मोदी और बादल के अच्छे है संबंध





गौरतलब है कि शिरोमणि अकाली दल के कद्दावर नेता प्रकाश सिंह बादल आर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अच्छे संबंध है। यही वजह है कि अटल बिहार बाजपेयी के समय से भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल का गठबंधन भी अब तक ज़ारी रहा।





प्रकाश सिंह के बेटे सुखबीर बादल को पार्टी की कमान देने के बाद से ही वे राजनैतिक गतिविधियों से दूर रहते है, जिसके बाद भाजपा और शिरोमणि अकाली दल का गठबंधन भी टूटा था। यहां यह बताना भी जरूरी है कि प्रकाश सिंह बादल 5 बार पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके है।


Farmers Protest: सरकार और किसान नेताओं के बीच आज बातचीत

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नई दिल्ली : किसान आंदोलन (Farmer protest Live Update) को खत्म करने के प्रयास में जुटी केंद्र सरकार ने किसान नेताओं से मीटिंग के लिए आमंत्रण भेजा है। बताया जा रहा है कि आज दोपहर 3 बजे किसान नेताओं संग बैठक होगा। इससे पहले किसान नेताओं ने केंद्र की अपील को दरकिनार करते हुए सोमवार को कहा कि वे नए कृषि कानूनों के खिलाफ 'निर्णायक लड़ाई' के लिए दिल्ली आए हैं और मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन (Farmer Protest) जारी रहेगा।





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प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर किया हमला





वहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कानूनों का बचाव किया और विपक्षी दलों पर हमला बोलते हुए कहा कि वे सरकार के फैसले पर भ्रम फैला रहे हैं। उधर, विपक्षी दलों ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है और कहा है कि केंद्र को किसानों के 'लोकतांत्रिक संघर्ष का सम्मान' (Farmer protest Live Update) करना चाहिए तथा संबंधित कानूनों को निरस्त करना चाहिए। प्रदर्शनकारी किसानों के एक प्रतिनिधि ने सिंघू बॉर्डर पर संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।





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'मांगों से नहीं होगा समझौता'





भारतीय किसान यूनियन (दकौंडा) के महासचिव जगमोहन सिंह ने कहा, 'हम अपनी मांगों से समझौता नहीं कर सकते।'' उन्होंने कहा कि यदि सत्तारूढ़ पार्टी उनकी चिंता पर विचार नहीं करती तो उसे 'भारी कीमत' चुकानी होगी। किसानों के प्रतिनिधि ने कहा, 'हम यहां निर्णायक लड़ाई के लिए आए हैं।' उन्होंने कहा, 'हम दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहेंगे और यहां से अपनी रणनीति बनाएंगे। हम प्रधानमंत्री से यह कहने के लिए दिल्ली आए हैं कि वह किसानों के 'मन की बात' सुनें, अन्यथा सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी को भारी कीमत चुकानी होगी।'





31 मामले दर्ज किए गए





वहीं, भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि आंदोलन को ''दबाने'' के लिए अब तक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लगभग 31 मामले दर्ज किए गए हैं। चढूनी ने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं हो जातीं, किसानों का प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने दावा किया कि नए कृषि कानूनों से देश के कृषि व्यवसाय पर कॉरपोरेट घरानों का एकाधिकार हो जाएगा।


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