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शीघ्र ही पशुओं के इलाज के लिए बनेगा ओ.टी. शहर में भी होगा पशु मेला का आयोजन

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महासमुन्द। पशु चिकित्सा कार्यालय में नगर पालिका उपाध्यक्ष देवीचन्द राठी एवं भाजपा नेता शत्रुघन यादव ने उपसंचालक अजंना नायडू से मुलाकात कर पशु विभाग से संबंधित चर्चा की राठी ने उपसंचालक से योजनाओं की जानकारी ली तथा पशु अस्पताल में ओ.टीं कक्ष निर्माण की जानकरी उनके द्वारा दी गई कि शीघ्र ही पशुओं के इलाज के लिए अलग से ओ.टी. बनाया जा रहा है।

शहर में पशु मेला का आयोजन नही हो रहा है राठी नें सुझाव दिया कि विकासखण्ड स्तरीय पशु मेला का आयोजन कराया जावे उपसंचालक ने बताया कि डेयरी से संबंधित योजनाओं को पंजीकृत सोसायटी के माध्यम से दिया जाना है जो पंजीकृत सोसायटी होगें उन्हे लाभ मिलेगा इसके अलावा मुर्गी पालन की की भी जानकारी प्राप्त हुई। राठी ने अधिकारी से कहा कि पशु विभाग से संबंधित योजनाओं की जानकरी ग्राम स्तर तक प्रचार प्रसार कर दिया जावे जिससे कमजोर वर्ग भी लाभ उठा पायेगें।

जीवन जीने का कला जीवन मे संस्कार सिखाती है रामचरितमानस : पप्पू पटेल

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तुमगांव। तुमगांव नगर के वार्ड क्रमांक  14 शिव भोला मानस परिवार व वार्ड क्रमांक 15 के समस्त नगरवासी गाड़ाघाट के सामुहिक रूप से त्रिदिवसीय मानस गान का आयोजन किया गया था जिसमे बतौर अतिथि नगर पंचायत के उपाध्यक्ष पप्पू पटेल व पार्षद गण सम्मिलित हुए। पटेल ने मानस मंच से अपने विचार देते हुए कहा की रामचरितमानस जीवन जीने की कला जीवन मे संस्कार सिखाती है, अन्यथा हममें और पशुओं में कोई अंतर नहीं होता। विवेकवान को मनुष्य और विवेक हीन को पशु कहते हैं। संसार को मानव धर्म सिखाने हेतु प्रभू का प्राकट्य इस धरा धाम पर हुआ। 

प्रभु या तो धर्म के लिए आते हैं, अथवा प्रेम के लिए आते हैं  प्रभु के प्राकट्य के पश्चात भगवान उनके दर्शन हेतु काकभुशुंडि जी महाराज के साथ गए। काकभुशुंडि जी महाराज एक ऐसे भक्त हैं, जिनकी दृढ़ भक्ति है और हमारी जड़ भक्ति होती है। जबकि भक्ति में दृढ़ता होनी चाहिए। प्रभु शिक्षा ग्रहण के लिए गुरु के पास गए। जिससे हमें यह शिक्षा मिलती है कि ज्ञान प्राप्त करने हेतु हमें गुरु की आवश्यकता होती है।

विश्वामित्र भगवान राम को दशरथ से मांगने आए  क्योंकि संत भगवान से नहीं मांगता भगवान को ही मांग लेता है। चाहते तो विश्वामित्र जी समस्त राक्षसों का वध एक संकल्प मात्र से कर देते। क्योंकि वह समस्त विधाओं के ज्ञाता थे। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया क्योंकि संत सुधार कर्ता होता है संघारकर्ता नहीं होता। मानस मंच में मुख्य रूप से पार्षद धर्मेंद्र यादव, गंगा प्रसाद निषाद, श्रीमती अन्नपूर्णा राजेंद्र निर्मलकर, भुनेश्वर साहू, संतोष साहू, नवीन चंद्राकर, द्रोणाचार्य साहू, रोशन साहू, शिव यादव उपस्थित थे। 

आयोजन समिति के उत्तम निर्मलकर दिनेश निर्मलकर, भारत साहू, नारद साहू, हीरालाल साहू राजू साहू, डॉक्टर देवचरण साहू राम सजीवन साहू रामानंद प्रजापति, भागवत प्रसाद कृष्ण कुमार चंद्राकर, विष्णुध्रुव जगदीश, शत्रुघ्न, धनुष, खेलावन साहूसुरेंद्र साहू, देव् साहू, श्रीमती रामकुमारी साह नवरात्रि प्रजापति द्रोपति मानक़ी शांति निर्मला रानू  साहू शिव भोला मानस परिवार के सभी सदस्य सहित अनेकों श्रद्धालु उपस्थित थे।

राजकीय सम्मान के साथ विधानसभा उपाध्यक्ष स्व. मनोज मण्डावी को दी गई अंतिम विदाई

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रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के उपाध्यक्ष स्वर्गीय मनोज सिंह मण्डावी को विकासखण्ड कांकेर अंतर्गत उनके गृह ग्राम नथिया-नवागांव में आज शाम राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। दुख के इस घड़ी में मुख्यमंत्री बघेल आज उनके गृह ग्राम पहुंचकर स्वर्गीय मण्डावी के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने इस दौरान विधानसभा उपाध्यक्ष स्वर्गीय मनोज सिंह मण्डावी के शोक संतप्त परिवारजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।



स्वर्गीय मण्डावी के अंतिम विदाई में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया, नगरीय प्रशासन एवं विकास तथा श्रम मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया, संसदीय सचिव शिशुपाल सोरी, वरिष्ठ विधायक मोहन मरकाम, राज्य खाद्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष राम गोपाल अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि तथा क्षेत्रवासी बड़ी संख्या में शामिल हुए। 



मुख्यमंत्री बघेल विधानसभा उपाध्यक्ष मण्डावी के आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वे वरिष्ठ आदिवासी नेता थे। स्वर्गीय मण्डावी छात्र जीवन से ही राजनीति से जुड़े हुए थे। उन्होंने नवगठित छत्तीसगढ़ के गृह राज्यमंत्री और विधानसभा के उपाध्यक्ष सहित अनेक महत्वपूर्ण पदों को सुशोभित किया और प्रदेश की सेवा की। वे वर्ष 1998 में अविभाजित मध्यप्रदेश विधानसभा के तथा वर्ष 2013 और 2018 में छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। मंडावी छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष भी रहे।



मुख्यमंत्री ने कहा कि मनोज सिंह मंडावी आदिवासी समाज के बड़े नेता थे। वे आदिवासियों की समस्याओं को विधानसभा में प्रभावशाली ढंग से रखते थे। मंडावी आदिवासी समाज की उन्नति और अपने क्षेत्र के विकास के लिए सदैव प्रयासरत रहे। विधानसभा उपाध्यक्ष के रूप में उनकी कार्यशैली को पक्ष और विपक्ष के सभी लोग प्रशंसा करते थे। सरल, सौम्य व मृदुभाषी व्यवहार वाले स्वर्गीय मनोज सिंह मण्डावी को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। प्रदेश के विकास में उनके योगदान को सदैव याद रखा जाएगा। उनका निधन क्षेत्र के साथ-साथ आदिवासी समाज और प्रदेश सहित हम सबके लिए अपूरणीय क्षति है।

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