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महतारी वंदन योजना : आर्थिक संबल से आत्मविश्वास तक, सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की महिलाएं

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 डॉ. दानेश्वरी संभाकर, उप संचालक जनसंपर्क


रायपुर : किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तब मानी जाती है जब उसकी महिलाएं सशक्त, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने लगें। छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना इसी दिशा में एक ऐतिहासिक और संवेदनशील पहल बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में यह योजना आज लाखों महिलाओं के जीवन में आत्मविश्वास, आर्थिक संबल और नई उम्मीदों का संचार कर रही है।

महतारी वंदन योजना केवल हर माह मिलने वाली 1000 रुपये की आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के सपनों को पंख देने, उनके आत्मसम्मान को मजबूत करने और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का सशक्त माध्यम बन गई है। प्रदेश के गांव-गांव से ऐसी प्रेरक कहानियां सामने आ रही हैं, जो बताती हैं कि छोटे-छोटे आर्थिक सहयोग से भी बड़े सामाजिक बदलाव संभव हैं।

आर्थिक संबल से आत्मविश्वास तक, सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की महिलाएं

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बस्तर में आयोजित वृहद महतारी वंदन कार्यक्रम के दौरान कई महिलाओं ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से वर्चुअल संवाद कर अपने जीवन में आए बदलाव साझा किए। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के ग्राम खोडरी की अनीता साहू ने बताया कि पहले आर्थिक कठिनाइयों के कारण परिवार चलाना मुश्किल था, लेकिन योजना से मिली राशि से उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और “अनीता सिलाई सेंटर” शुरू किया। आज वे सिलाई, खेती और मजदूरी के माध्यम से अपने परिवार को बेहतर जीवन दे रही हैं। उनका यह सफर संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक की प्रेरक कहानी बन गया है।

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले की श्रीमती मिथलेश चतुर्वेदी ने भी अपने जीवन का भावुक अनुभव साझा किया। पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। ऐसे कठिन समय में महतारी वंदन योजना ने उन्हें आर्थिक संबल दिया और उन्होंने ई-रिक्शा खरीदकर आजीविका का नया रास्ता चुना। आज वे आत्मसम्मान के साथ अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं और समाज में आत्मनिर्भर महिला की पहचान बना चुकी हैं।

कोरिया जिले की ग्राम डुमरिया निवासी श्रीमती बाबी राजवाड़े बताती हैं कि खेती-किसानी में मिलने वाली मासिक राशि उनके लिए बड़ी मदद साबित हो रही है। बीज, खाद और अन्य कृषि जरूरतों को पूरा करना अब पहले की तुलना में आसान हो गया है। वहीं ग्राम आमापारा की श्रीमती सुंदरी पैकरा इस राशि का उपयोग अपने बच्चों की पढ़ाई में कर रही हैं, जिससे उनके बच्चों के भविष्य को नई दिशा मिल रही है।

भरतपुर विकासखंड के ग्राम चांटी की सविता सिंह की कहानी इस योजना की सार्थकता को और मजबूत करती है। उन्होंने महतारी वंदन योजना की राशि को बचाकर सिलाई मशीन खरीदी और सिलाई कार्य शुरू किया। आज वे गांव में कपड़ों की सिलाई कर नियमित आय अर्जित कर रही हैं और अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च स्वयं उठा रही हैं। उनकी सफलता ने गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी है।

महतारी वंदन योजना का व्यापक प्रभाव प्रदेश के हर जिले में दिखाई दे रहा है। लगभग 69 लाख विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जा रही है और अब तक 25 किस्तों के माध्यम से 16 हजार 237 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीबीटी के जरिए प्रदान की जा चुकी है। यह नियमित आर्थिक सहयोग महिलाओं के जीवन में स्थिरता और आत्मविश्वास ला रहा है।

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह महिलाओं को केवल सहायता नहीं देती, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देती है। महिलाएं इस राशि से छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू कर रही हैं, बच्चों की पढ़ाई में निवेश कर रही हैं, खेती-किसानी को मजबूत बना रही हैं और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इससे परिवार, समाज और राज्य—तीनों स्तरों पर सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है।

महिलाओं का कहना है कि पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब महतारी वंदन योजना ने उन्हें आत्मसम्मान के साथ जीने की ताकत दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना उनके जीवन में नई उम्मीद और नया आत्मविश्वास लेकर आई है।

आज महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण का मजबूत स्तंभ बन चुकी है। यह योजना न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी दे रही है।

निश्चित रूप से महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ की महिलाओं के लिए आत्मसम्मान, सशक्तिकरण और उज्ज्वल भविष्य की नई सुबह साबित हो रही है, जो आने वाले समय में प्रदेश के समग्र विकास की मजबूत आधारशिला बनेगी।

 

छत्तीसगढ़ को स्किल हब बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा – 'समाज के हर वर्ग की भागीदारी से ही बनेगा विकसित छत्तीसगढ़'

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रायपुर। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा है कि “हम विकसित भारत–विकसित छत्तीसगढ़” के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर कार्यरत हैं, और इसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। मुख्यमंत्री साय आज भिलाई स्थित रूंगटा यूनिवर्सिटी में आयोजित विश्व युवा कौशल उत्सव 2025 के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह आयोजन इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज किया जाएगा। गोल्ड बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की टीम ने 8183 प्रतिभागियों को एक सप्ताह के भीतर दिए गए प्रशिक्षण को प्रमाणित किया है और संस्थान को इसका प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है। उन्होंने रूंगटा यूनिवर्सिटी प्रबंधन को इस नि:शुल्क और अभूतपूर्व आयोजन के लिए बधाई दी और कहा कि राज्य सरकार युवाओं को आत्मनिर्भर एवं दक्ष बनाने के लिए संकल्पबद्ध है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि भिलाई को इस्पात नगरी के साथ-साथ मिनी इंडिया भी कहा जाता है और शिक्षा के क्षेत्र में रूंगटा यूनिवर्सिटी का योगदान अत्यंत सराहनीय है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने विगत 25 वर्षों में प्रत्येक क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और इस वर्ष को हम राज्य की रजत जयंती के रूप में मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में उच्च शिक्षा संस्थानों का विस्तार हुआ और वर्तमान में राज्य में 15 मेडिकल कॉलेज, आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईटी, सिपेट, एम्स, और लॉ यूनिवर्सिटी जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान कार्यरत हैं।

उन्होंने बताया कि शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों में राज्य सरकार ने समान रूप से उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं। बीते डेढ़ वर्षों में सुशासन की स्थापना के लिए ठोस प्रयास हुए हैं। शासन को पारदर्शी बनाने हेतु अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन की गई हैं, जिससे भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है और राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज संपदा से समृद्ध प्रदेश है और इसे आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने स्किल इंडिया मिशन की शुरुआत की थी। जब यह मिशन प्रारंभ हुआ था, भारत विश्व की 10वीं अर्थव्यवस्था था — और आज, केवल एक दशक में भारत चौथे स्थान पर पहुँच चुका है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मेगा प्लेसमेंट कैंप्स के माध्यम से नियोक्ताओं और प्रशिक्षित युवाओं के बीच संतुलन स्थापित हुआ है। यह कार्य डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना को बेहद उपयोगी बताते हुए कहा कि यह योजना युवाओं के लिए अनुभव के साथ-साथ आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान कर रही है, जिससे उनके लिए संभावनाओं के नए द्वार खुल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति में युवाओं के लिए विशेष अवसर सुनिश्चित किए गए हैं। एक हजार से अधिक स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाले उद्योगों को अनुदान देने का प्रावधान है।

बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में अतिरिक्त रियायतें दी गई हैं। उन्होंने बताया कि बस्तर के सभी 32 विकासखंडों में स्किल इंडिया मिशन की गतिविधियाँ आरंभ हो चुकी हैं।उन्होंने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग को प्रोत्साहन देने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से उद्योगों को क्लीयरेंस की प्रक्रिया को अत्यंत सरल बनाया गया है। इससे राज्य में निवेश को गति मिली है। अब तक 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनके अनुमोदन की प्रक्रिया प्रगति पर है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हाल ही में नवा रायपुर में फार्मास्युटिकल कंपनी का शुभारंभ हुआ है। यह दो कारणों से संभव हुआ—एक, नवा रायपुर को फार्मा हब के रूप में विकसित किया गया है, और दूसरा, फार्मा उद्योग के लिए नई नीति में विशेष प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश के पहले सेमीकंडक्टर यूनिट का शिलान्यास हाल ही में किया गया है। इसके पीछे एआई और आईटी क्षेत्र में निवेश हेतु विशेष अनुदान का योगदान है।छत्तीसगढ़ सरकार ने देश का पहला एआई डाटा सेंटर पार्क भी नवा रायपुर में स्थापित किया है।

मुख्यमंत्री ने निजी संस्थानों, विशेषकर रूंगटा यूनिवर्सिटी की सराहना करते हुए कहा कि वे राज्य सरकार के प्रयासों में पूर्ण सहभागी बनकर छत्तीसगढ़ को स्किल हब के रूप में विकसित कर रहे हैं। उन्होंने प्रतिभागियों और यूनिवर्सिटी परिवार को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई दी।

उल्लेखनीय है कि भिलाई स्थित रूंगटा यूनिवर्सिटी में आयोजित विश्व युवा कौशल उत्सव 2025 के समापन समारोह में छत्तीसगढ़ को स्किल हब बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया। कार्यक्रम में 8183 युवाओं को ऑनलाइन माध्यम से विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण दिया गया। 25 चयनित प्रतिभागियों को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। गूगल, आईबीएम और इंटरनेशनल काउंसिल के साथ संयुक्त डिग्री कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। हार्वर्ड और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालयों के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा एक सप्ताह में सबसे अधिक प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देने के कीर्तिमान की पुष्टि की गई।

इस अवसर पर सांसद विजय बघेल और विधायक रिकेश सेन ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया और इस ऐतिहासिक आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पहल युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में क्रांतिकारी कदम है।

रूंगटा यूनिवर्सिटी के कुलपति संतोष रूंगटा ने स्वागत उद्बोधन में विश्वविद्यालय की गतिविधियों की जानकारी दी और कहा कि संस्थान राज्य सरकार के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ को ग्लोबल स्किल हब बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

इस अवसर पर संभागायुक्त एस.एन. राठौर, आईजी  आर.जी. गर्ग, कलेक्टर अभिजीत सिंह, रूंगटा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर, विषय विशेषज्ञ, प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।


प्रेरणा की मिसाल बनीं ड्रोन दीदी गोदावरी साहू

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक नई पहचान बना चुकी ड्रोन दीदी गोदावरी साहू को आज राजभवन में राज्यपाल रमेन डेका ने स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने उन्हें 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी भेंट की और उनके कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वे ग्रामीण महिलाओं के लिए सच्ची प्रेरणा हैं। इस अवसर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना भी उपस्थित थे।

मुंगेली जिले के नगर पंचायत सरगांव की निवासी गोदावरी साहू नमो ड्रोन दीदी के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक तकनीकों को अपनाया और ड्रोन के माध्यम से किसानों के खेतों में नैनो यूरिया, डीएपी खाद और कीटनाशकों का छिड़काव करना शुरू किया। इससे न केवल फसलों की पैदावार बेहतर हुई, बल्कि समय और श्रम की भी बचत हुई।

राज्यपाल ने कहा कि गोदावरी साहू की यह यात्रा बताती है कि अगर संकल्प और नवाचार हो तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं और दूसरों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दे सकती हैं। गोदावरी न सिर्फ अपने जीवन को संवार रही हैं, बल्कि आसपास के किसानों की प्रगति में भी भागीदार बन चुकी हैं।



महतारी वंदन योजना ने खोले आत्मनिर्भरता के द्वार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल बन चुकी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित इस योजना ने लाखों महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सक्षम बनाया है। योजना के तहत अब तक 11081.68 करोड़ रुपये की राशि 69.23 लाख से अधिक हितग्राही महिलाओं को उनके बैंक खातों के माध्यम से अंतरित की जा चुकी है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि ,महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता का जरिया नहीं, बल्कि महिलाओं को सम्मानजनक और सशक्त जीवन की ओर बढ़ाने वाला माध्यम है। यह योजना राज्य की महिलाओं के आत्मबल, स्वास्थ्य और समाज में भागीदारी को मजबूत करने का कार्य कर रही है। इस योजना की 17वीं किश्त का वितरण 1 जुलाई 2025 को किया गया, जिसमें 647.66 करोड़ रुपये की राशि हितग्राहियों के खातों में अंतरित की गई। योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की आयु वर्ग की विवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये की वित्तीय सहायता राज्य शासन द्वारा दी जाती है।

नारायणपुर जिले के बासिंग गांव की निवासी एतवारिन कुमेटी इस योजना का प्रत्यक्ष उदाहरण हैं, जिन्होंने सरकारी सहयोग से मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू किया और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में ठोस कदम उठाया। वर्षों तक मजदूरी कर जीवन बिताने वाली एतवारिन कहती हैं। मुझे अब तक योजना से 17,000 रुपये की सहायता मिली है। इस राशि ने न सिर्फ मेरी आर्थिक स्थिति सुधारी बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब मैं अपने छोटे व्यवसाय को आगे बढ़ा रही हूं और अन्य महिलाओं को भी प्रोत्साहित कर रही हूं।

वह मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि महतारी वंदन योजना हमारे जैसे महिलाओं के लिए वरदान है, जो हमारे जीवन में उम्मीद और बदलाव लेकर आई है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष मुख्यमंत्री साय का आत्मनिर्भर बस्तर विजन

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रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ का दूरदर्शी विकास मॉडल प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि कभी नक्सल हिंसा के लिए पहचाना जाने वाला बस्तर अब देश को विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया मॉडल देने जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने नीति आयोग के मंच पर छत्तीसगढ़ के लिए 75 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था का दीर्घकालिक लक्ष्य रखा और इसके केंद्र में ‘3T मॉडल’ (Technology, Transparency, Transformation) को बताया। उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन अब तकनीक आधारित, पारदर्शी और तेज़ गति से निर्णय लेने वाला बन रहा है। हर योजना को डिजिटली ट्रैक किया जा रहा है, ताकि आम जनता को समय पर और सटीक सेवाएं मिल सकें। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह मॉडल न केवल छत्तीसगढ़ को विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने में सहायक होगा, बल्कि भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य में भी राज्य की अहम भूमिका सुनिश्चित करेगा।

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2047 तक के लिए एक विस्तृत रणनीति तैयार की है, जिसके तहत राज्य की अर्थव्यवस्था को 6 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 75 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस दौरान प्रति व्यक्ति आय में 10 गुना वृद्धि का अनुमान है। इस रणनीति को छत्तीसगढ़ अंजोर विजन डॉक्यूमेंटनाम दिया गया है, जिसमें राज्य के आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय विकास की समग्र योजना निहित है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु शिक्षा, स्वास्थ्य, अधोसंरचना, कृषि, आईटी, पर्यटन और कौशल विकास जैसे 13 प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। इन सभी क्षेत्रों के बेहतर क्रियान्वयन हेतु 10 विशिष्ट मिशन प्रारंभ किए गए हैं।

बस्तर अब संघर्ष नहीं, संभावना का प्रतीक

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर अब संघर्ष का नहीं, बल्कि संभावनाओं का क्षेत्र बन गया है। बस्तर और उसके आसपास के 32 ब्लॉकों में स्किल डेवलपमेंट सेंटर खोले गए हैं, जहां युवाओं को कंप्यूटर, स्वास्थ्य सेवा, फूड प्रोसेसिंग और तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। अब यहां के बच्चे जंगल में लकड़ी चुनने के बजाय लैपटॉप और मशीनें चला रहे हैं।

उन्होंने बताया कि बस्तर में अब बड़े निवेश आ रहे हैं। नवा रायपुर में स्थापित की जा रही देश की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट और एआई डेटा सेंटर से बस्तर एवं समूचे राज्य में रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे। अब बस्तर मेक इन इंडियाका उपयुक्त स्थल बन रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि  सरकार द्वारा मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए पुनर्वास, प्रशिक्षण और स्वरोजगार योजनाएं तैयार की गई हैं। अब बस्तर में आदिवासियों को स्वरोजगार, प्रशिक्षण और बाज़ार की सुविधाएं मिल रही हैं। स्थानीय उत्पादों की बिक्री से रोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं। बस्तर का धुड़मारास गांव संयुक्त राष्ट्र द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवकी सूची में शामिल किया गया है।

भौगोलिक और औद्योगिक अधोसंरचना में ऐतिहासिक निवेश

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क को 1100 किलोमीटर से बढ़ाकर 2200 किलोमीटर तक ले जाने का कार्य प्रगति पर है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर 21 हजार करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। रायपुर एयरपोर्ट से अब कार्गो सेवा भी प्रारंभ हो चुकी है, जिससे राज्य एक प्रमुख लॉजिस्टिक हब के रूप में उभर रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में प्रचुर मात्रा में खनिज संपदा उपलब्ध है। विशेषकर स्टील, कोयला, डोलोमाइट और लिथियम जैसे संसाधनों की उपलब्धता के चलते छत्तीसगढ़ औद्योगिक दृष्टि से अग्रणी राज्य बनता जा रहा है। स्टील उत्पादन क्षमता को 28 मिलियन टन से बढ़ाकर 45 मिलियन टन और बिजली उत्पादन को 2030 तक देश में शीर्ष स्थान तक ले जाने का लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री साय ने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जहां लिथियम ब्लॉक की सफल नीलामी हुई है। यह उपलब्धि ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक सिद्ध होगी।

प्रशासनिक नवाचार और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन

मुख्यमंत्री साय ने राज्य सरकार द्वारा किए गए 350 से अधिक नीतिगत सुधारों की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि जमीन पंजीकरण जैसे कार्य अब केवल 500 रुपये में घर बैठे संभव हो गए हैं। नई औद्योगिक नीति के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में प्ले स्कूल, हॉस्पिटल और कॉलेज खोलने वालों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है।नीति आयोग में छत्तीसगढ़ के 2047 रोडमैप की प्रमुख बातें

1. छत्तीसगढ़ - ऊर्जा और उद्योग की रीढ़: मुख्यमंत्री साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ बिजली, कोयला, स्टील और सीमेंट जैसे संसाधनों के माध्यम से भारत की औद्योगिक नींव को सुदृढ़ करता है। छत्तीसगढ़ की यह विशिष्टता देश के आर्थिक विकास को मजबूत आधार प्रदान करती है।

2. खेती और जंगल ग्रामीण समृद्धि का आधार: कृषि, मछलीपालन और वनोपज आधारित आजीविका से ग्रामीणों और आदिवासियों की आय और आत्मनिर्भरता बढ़ी है जो आदिवासी और ग्रामीण जीवन की दिशा में सकारात्मक परिवर्तन को परिलक्षित करता है।

3. आदिवासी अधिकारों में नई क्रांति: आदिवासी परिवारों को जमीन का अधिकार पाने की प्रक्रिया सरल होने से आदिवासियों का सुरक्षा और सम्मान बढ़ेगा, जो सामाजिक न्याय और अधिकारों की दिशा में क्रांतिकारी पहल है।

4. HHH मॉडल से पर्यटन को नया विस्तार: HHH मॉडल के माध्यम से हॉस्पिटैलिटी, हाउसिंग और हैंडीक्राफ्ट के जरिए स्थानीय महिलाओं और कारीगरों को रोजगार मिलने के साथ ही छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान मिलेगी।

5. डिजिटल बदलाव से प्रशासन में पारदर्शिता और गति : अब सरकारी कामों में तकनीक का ज़्यादा इस्तेमाल हो रहा है। छत्तीसगढ़ ने “3T” मॉडल अपनाया  है टेक्नोलॉजी, ट्रांसपेरेंसी और ट्रांसफॉर्मेशन। इसका मतलब है कि सरकारी काम अब साफ-सुथरे और जल्दी होंगे। ऑनलाइन फॉर्म, समय पर सेवाएं और आसान प्रक्रिया से जनता का भरोसा बढ़ेगा। यह भ्रष्टाचार को घटाकर जनता के विश्वास को मजबूत करता है।

6. नीतिगत नेतृत्व में अग्रणी राज्य: मुख्यमंत्री ने बताया कि अब छत्तीसगढ़ सिर्फ संसाधन बहुल राज्य नहीं, बल्कि नीति और प्रशासन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बन रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासनके विचार को छत्तीसगढ़ पूरी लगन से लागू कर रहा है। अब तक 350 से ज्यादा सरकारी सुधार किए गए हैं।

 7. सड़क परिवहन और हवाई सुविधाओं की बढ़ी रफ्तार: 11 साल में 21,380 करोड़ से नई सड़कें बनीं। अब जगदलपुर, बिलासपुर और अंबिकापुर एयरपोर्ट का सीधा सम्पर्क  देश के विभिन्न क्षेत्रों से बन चुका है।

8. रेल सुविधाओं  का विस्तार: राज्य में 161 साल में 1100 किमी रेल लाइन बनी थी। अब 2030 तक ये दोगुनी होकर 2200 किमी होगी जो कनेक्टिविटी को बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

जहां कभी गोलियों की गूंज थी, वहां अब सुनाई देता है विकास का शंखनाद - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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 रायपुर : माओवादी खून खराबे और आतंक के पक्षधर हैं, हम विकास और सद्भाव के लिए काम कर रहे हैं। अब बस्तर की तस्वीर तेजी से बदल रही है। जहां कभी गोलियों की गूंज थी, वहां अब विकास का शंखनाद सुनाई देता है। जहां कभी बेकारी और लाचारी थी, वहीं इस जिले के ग्रामीण युवाओं को उच्च शिक्षा और रोजगार उपलब्ध कराकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। हम माओवाद को जड़ से खत्म करके ही दम लेंगे। हमारे शहीद जवानों की शहादत बेकार नहीं जाने देंगे.



मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल बचेली में आयोजित विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण शिलान्यास कार्यक्रम  को संबोधित करते हुए यह बात कही। 


मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि डबल इंजन की सरकार में विकास का पहिया तेजी से घूम रहा है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी के विकसित भारत के सपनों को साकार करने के लिए हम विजन 2047 छत्तीसगढ़ के  अंतर्गत विकासशील छत्तीसगढ़ को विकसित छत्तीसगढ़ बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल, बड़े बचेली में हमने 160 करोड़ रूपये के 501 कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन किया है। इनमें 49 करोड़ रूपये के 367 कार्यों का लोकार्पण और 112 करोड़ रूपये के 134 कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। साथ ही इस मौके पर हमने 114 करोड़ रूपये के हितग्राही मूलक कार्यों का चेक और सामग्री का वितरण भी कर रहे हैं। आज जिन बड़े विकास कार्यों का लोकार्पण हुआ है, उनमें गीदम ब्लाक के छिन्दनार से बड़ेकरका मार्ग पर 33 करोड़ रूपये का पुल, जिले के सभी विकासखंडों में एक करोड़ रूपये से बने पुल-पुलिया, गीदम, कुआकोंडा, कटेकल्याण मार्ग का चौड़ीकरण और मजबूतीकरण शामिल है।इसके अलावा मोर मकान-मोर आवास के अंतर्गत सवा सात करोड़ रूपये की लागत से 321 हितग्राहियों के लिए बने पक्के मकानों की चाबी भी हमने सौंपी है। जलावर्धन और जलशोधन संयंत्र स्थापना के लिए किरंदुल में करीब 45 करोड़ और बारसूर में 15 करोड़, दंतेवाड़ा में अंतरराज्यीय बस स्टैंड और दंतेवाड़ा जिले के सभी विकासखंडों में आश्रम भवन निर्माण कार्यों के लिए हमने अभी भूमिपूजन किया है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आप सबको पता है कि हमारी सरकार ने सुशासन के एक साल पूरे कर लिये हैं। इस एक साल के दौरान मोदी जी की गारंटी को हमने पूरी गारंटी के साथ पूरा किया है। हमारी सरकार ने पहली बार बस्तर ओलंपिक का आयोजन किया जिसमें करीब 1 लाख 65 हजार लोगों ने भाग लिया। इस आयोजन की सराहना यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी ने मन की बात में भी की। हमारी सरकार गांव-गरीब और किसानों के हित में लगातार काम कर रही है। तेंदूपत्ता संग्राहकों को हमारी सरकार 4 हजार रुपए से बढ़ाकर साढ़े 5 हजार रुपए प्रति मानक बोरा दे रही है। इससे वनवासियों के जीवन स्तर में बदलाव दिखने लगा है। नियद नेल्लानार योजना अंतर्गत जिले के चिन्हित सभी 765 किसानों को 48 लाख रूपये का पावर स्प्रेयर, 1 करोड़ 70 लाख रूपये की लागत से पॉवर ट्रिलर जल्द ही वितरण करने की तैयारी कृषि विभाग ने की है। नियद नेल्लानार योजना के तहत 1200 परिवारों को निःशुल्क मोबाइल फोन का वितरण किया जा रहा है। इससे दूरस्थ अंचल के ग्रामीण मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे। सुदूर अंचल के क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए जन सुविधा एक्सप्रेस अभियान के तहत करीब 4 करोड़ रूपये की लागत से 37 वाहन महिला समूहों और युवा संगठनों के माध्यम से संचालित हैं।  

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यहां माता-बहनों की बड़ी संख्या में उपस्थिति है। यह इस बात का प्रमाण है कि इनके खाते में हर महीने एक-एक हजार रूपये सांय-सांय जा रहा है। अभी हाल ही में हमने इस साल के पहले दिन ही माता-बहनों के खाते में रूपये जमा कराया। इससे महिला सशक्तिकरण को बल मिला है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारी सरकार गांव-गरीब और किसानों के हित में लगातार काम कर रही है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने अंत्योदय के विकास का जो सपना देखा था। उसे हम सब मिलकर पूरा करने में जुटे हैं। प्रधानमंत्री मोदी जी का सपना है कि कोई भी भारतीय खुले आसमान के नीचे नहीं सोएगा। हर नागरिक का पक्का मकान होगा। इसी कड़ी में हमारी सरकार बनते ही हमने 18 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति दी। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने 3 लाख 88 हजार आवासों की स्वीकृति पुनः प्रदान की है।  

मुख्यमंत्री  साय ने आवास प्लस का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2024 में बहुत से लोग आवास योजना के लाभान्वित होने से वंचित हुए थे इसके साथ ही वाहन, आय और भूमि संबंधी अन्य संसाधनों होने के साथ ही वे आवास योजना के दायरे से बाहर में थे उनके लिए आवास प्लस योजना के तहत सर्वे कार्य प्रारंभ किया गया हैं। और शीघ्र ही उन्हें सूची में जोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि वहीं 2.5 एकड़ सिंचित एवं 5 एकड़ असिंचित भूमि वाले किसान भी आवास योजना के लाभार्थी होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई संसाधन और सड़कों के रखरखाव पर फोकस करते हुए अंतिम छोर के व्यक्ति तक सुशासन पहुंचाने प्रतिबद्ध है।  

उन्होंने कहा कि दन्तेवाड़ा जिला खनिज सम्पदा और जैविक कृषि में अग्रणी जिला है। अतः क्षेत्र के सर्वांगीण विकास हेतु राज्य शासन प्रतिबद्ध है। शीघ्र ही जिले में वन्य प्राणी के संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने की दृष्टि से ’’जू पार्क" (चिड़ियाघर ) का निर्माण भी किया जाएगा। इसके अलावा जैविक कृषि को महत्व देने के लिए सभी लेम्पस और राशन दुकानों में जैविक खाद उपलब्ध किए जाएंगे। मुख्यमंत्री  साय ने दान-पुण्य के महापर्व छेरछेरा और मकर संक्रांति की सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

वनमंत्री  केदार कश्यप ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अपने संबोधन में  कहा कि सरकार के एक वर्ष के नेतृत्व में दन्तेवाड़ा जिला प्रगति के पथ पर अग्रसर है । जिले में कई योजनाएं संचालित किए जा रही है जो राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल साबित होगी। आमसभा में सांसद बस्तर  महेश कश्यप एवं क्षेत्र के विधायक  चैतराम अटामी द्वारा भी जिले के विकास कार्यो पर प्रकाश डाला गया।  इस अवसर पर  डीआईजी  कमलोचन कश्यप, कलेक्टर  मयंक चतुर्वेदी, एसपी  गौरव राय, डीएफओ  सागर जाधव तथा जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

महतारी वंदन योजना ने महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर, स्वाभिमान से जीने का मिला अवसर

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मोहला। किसी भी व्यक्ति के जीवन के लिए पैसे का बड़ा अहमियत होता है। पैसा ही वह सहारा होता है, जिससे वह अपने इच्छाओं को पूरा कर सकता है। जरूरत चाहे छोटी-छोटी हो या बड़ी। हर चीज के लिए पैसे की बड़ी अहमियत होती है। महिलाओं को अपने दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पैसे की आवश्यकता तो होती  है, ऐसे में महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए कारगर साबित हो रहा है। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि से महिलाएं अपनी इच्छाओं को पूरी कर रही है।

जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी के अंतर्गत 82 हजार से अधिक महिलाओं को महतारी वंदन योजना का लाभ मिल रहा है। इन महिलाओं के लिए योजना कारगर साबित हो रहा है। जिससे वह अपनी इच्छाओं को पूरी कर जीवन में उल्लास ला रही है। महिलाओं को आत्मनिर्भरता के साथ स्वाभिमान पूर्वक जीवन जीने की राह प्रशस्त हुआ है। योजना अंतर्गत मिलने वाली राशि से महिलाएं अपने दैनिक आवश्यकताओं के साथ-साथ घर गृहस्ती की वस्तुओं की खरीदारी करने के साथ ही अपने बच्चों की देखरेख के लिए खर्च कर रही है।

विकास खंड मानपुर के ग्राम बेलगांव निवासी श्रीमती अनीता विश्वास ने बताया कि उसे हर महीने उसके खाते में 1000 रूपये की राशि मिल रही है। वह इस राशि को लेकर बेहद उत्साहित है। उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना अंतर्गत मिलने वाली राशि से वह अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के साथ ही अपनी जरूरत को पूरा कर रही है। योजना के लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति अपना आभार व्यक्त किया है।

विशेष लेख : लखपति दीदी योजना : स्वावलंबी महिलाओं का सफर - झलक महिला स्वसहायता समूह की प्रेरणादायक यात्रा

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बेमेतरा। ज़िले में महिलाओं को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अद्वितीय प्रयास किए जा रहे हैं। इस दिशा में, लखपति दीदी योजना के तहत महिलाओं को एक मजबूत आधार प्रदान किया जा रहा है, ताकि वे वित्तीय और सामाजिक रूप से सक्षम बन सकें। ज़िला महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से किए जा रहे इन प्रयासों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। झलक महिला स्वसहायता समूह। यह समूह न केवल आर्थिक सशक्तिकरण का प्रतीक है, बल्कि सामुदायिक विकास और आत्मनिर्भरता की ओर एक प्रेरणादायक कदम भी है।

शुरुआत और प्रशिक्षण

झलक झंकार महिला स्वसहायता समूह की अध्यक्ष, श्रीमती गायत्री सोनी, बताती हैं कि समूह की यात्रा अगस्त 2024 के अंत में शुरू हुई जब ज़िला प्रशासन द्वारा कलेक्टर की उपस्थिति में समूह को मशीन से रूई से फूलबाती बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इसके तहत न केवल तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया, बल्कि आर्थिक सहायता भी दी गई, जिससे महिलाएं कच्चामाल और मशीनें खरीद सकीं।

प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को फूलबाती बनाने की विधि सिखाई गई, जो एक सरल प्रक्रिया होते हुए भी आर्थिक रूप से लाभदायक हो सकती है, विशेष रूप से त्योहारों के मौसम में। महिलाएं अपने दैनिक घरेलू कामों को निपटाने के बाद, मशीन से फूलबाती बनाती हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है। इस योजना ने उन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का एक ठोस रास्ता प्रदान किया है, जो पहले केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं।

आर्थिक सशक्तिकरण और विपणन

समूह की महिलाओं ने प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता का सही उपयोग करते हुए अपना काम शुरू किया। उन्होंने कच्चा माल ख़रीदा और फूलबाती बनाने का काम तेज़ी से शुरू कर दिया। दिवाली का त्यौहार नज़दीक है और इस अवसर को भुनाने के लिए महिलाएं पूरी लगन से काम कर रही है।

फूलबाती की बढ़ती मांग को देखते हुए, स्थानीय बाजार से उन्हें अच्छे ऑर्डर मिलने लगे। इसके साथ ही, समूह ने स्थानीय स्तर पर भी मार्केटिंग शुरू की, जिससे उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। ज़िला प्रशासन के अधिकारियों ने भी उनकी प्रोडक्ट्स को खरीदा, जिससे उन्हें और प्रोत्साहन मिला। इस प्रकार, समूह की महिलाएं न केवल घरेलू कामों को निभा रही थीं, बल्कि समाज में अपनी आर्थिक स्थिति को भी सुधार रही है।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

फूलबाती बनाने के इस कार्य ने झलक महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आयेंगे। पहले जो महिलाएं केवल अपने घरों तक सीमित थीं, आज वे खुद का काम संभाल रही हैं और समाज में अपनी पहचान बना रही हैं। इस कार्य ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया और साथ ही उनकी आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ किया।

समूह की अध्यक्ष श्रीमती गायत्री सोनी ने बताया कि इस योजना के तहत मिले प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता से महिलाएं आत्मविश्वास से भर गई हैं। उन्होंने यह साबित किया कि यदि सही दिशा और अवसर मिलें, तो महिलाएं हर चुनौती का सामना कर सकती हैं और आर्थिक रूप से सशक्त हो सकती हैं।

चुनौतियाँ और समाधान

शुरुआत में, झलक महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जैसे कि कच्चे माल की उपलब्धता और बाज़ार में प्रतिस्पर्धा। लेकिन समूह ने अपनी एकजुटता और कड़ी मेहनत से इन समस्याओं का समाधान निकाला। उन्होंने अपनी गुणवत्ता पर ध्यान दिया और ग्राहक संतुष्टि को प्राथमिकता दी। इसके साथ ही, ज़िला प्रशासन ने भी उनकी मदद की और उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत और सहायता उपलब्ध कराई।

समूह की महिलाओं ने खुद को सशक्त बनाने के लिए तकनीकी ज्ञान और वित्तीय सहायता का बेहतरीन उपयोग किया। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ, बल्कि उन्होंने अपने परिवार और समाज के सामने एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया।

भविष्य की योजनाएँ

झलक महिला स्वसहायता समूह की महिलाएं अब और बड़े लक्ष्यों की ओर अग्रसर हैं। वे फूलबाती के अलावा अन्य उत्पादों के निर्माण की भी योजना बना रही हैं, ताकि उनकी आय में और इज़ाफा हो सके। समूह ने यह भी तय किया है कि वे आने वाले समय में और अधिक महिलाओं को इस योजना से जोड़ेंगी, ताकि उन्हें भी आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिले।

समूह की सदस्याओं का मानना है कि लखपति दीदी योजना उनके जीवन में एक सुनहरा अवसर लेकर आई है, और वे इस अवसर का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

निष्कर्ष

झलक महिला स्वसहायता समूह की कहानी यह दर्शाती है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो वे अपने जीवन में किसी भी बदलाव को संभव बना सकती हैं। लखपति दीदी योजना के तहत मिली सहायता और प्रशिक्षण ने इन महिलाओं के जीवन को बदलकर रख दिया।

यह कहानी न केवल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की है, बल्कि उनके आत्मविश्वास, कड़ी मेहनत और सामूहिक प्रयासों की भी है। बेमेतरा ज़िले की ये महिलाएं आज स्वावलंबी बनकर अपनी और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।

179 महतारी सदन की मिली स्वीकृति, 25 सौ वर्गफुट में बनेगा महतारी सदन

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रायपुर। प्रदेश के प्रत्येक ग्राम पंचायतों में ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनाने तथा आपसी समरसता स्थापित करने सामायिक कार्यक्रमों में सामूहिक भागीदारी तथा महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के निर्देशानुसार महतारी सदन का निर्माण कार्य किया जाना है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयास से 179 महतारी सदन की स्वीकृति आदेश जारी किया गया है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि न्यू इंडिया के ग्रोथ साइकल में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत अभियान महिलाओं की क्षमता को देश के विकास के साथ जोड़ रहा है। प्रदेश के ग्राम पंचायतों में बनने जा रहा महतारी सदन भी इसी दिशा में एक प्रयास है।

उन्होंने कहा कि लगातार ग्राम भ्रमण के दौरान महिलाओं द्वारा बैठने की स्थान न होने की शिकायत की और बैठने हेतु स्थान दिलाने की मांग की जाती रही इसलिए महतारी सदन बनाने का विचार आया। ततपश्चात महिलाओं को रोजगार दिलाने और उनको काम काज के लिए स्थान उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार गांवों में महतारी सदन बनाने जा रही है। 179 महतारी सदन की स्वीकृति इसी उद्देश्य को पूर्ति के लिये जारी किया गया है। कार्यों में एकरूपता के दृष्टिकोण से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कार्य का एक मानक डिजाईन एवं प्राक्कलन तैयार किया गया है। प्रति महतारी सदन की लागत राशि रुपये 29.20 लाख होगी। उक्त कार्य महतारी सदन योजना के बजट से 24.70 लाख तथा स्वच्छ भारत मिशन के बजट से 4.50 लाख के अभिसरण से किया जाएगा। इसप्रकार 179 महतारी सदन हेतु 52 करोड़ 20 लाख रुपये स्वीकृत किया गया है।

5 वर्षो में सभी ग्राम पंचायतों में महतारी सदन बनाने की योजना

प्रदेश के सभी ग्राम पंचायतों में महतारी सदन बनाया जाएगा। महतारी सदन बनाने की शुरुआत हो गयी है। पहले चरण में प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में महतारी सदन बनना प्रारंभ किया जा रहा है व 5 साल में सभी ग्राम पंचायत में महतारी सदन बनेंगे।

प्रदेश में बनने वाले महतारी सदन का निर्माण लगभग 25 सौ वर्गफुट में कराया जाएगा। सदन में कमरा, शौचालय, बरामदा, हाल, किचन और स्टोररूम जैसी सुविधाएं रहेगी। पानी के लिए ट्यूबवेल के साथ वाटर हार्वेस्टिंग भी किया जाएगा। महिलाओं की सुरक्षा के लिए इसमे बॉउंड्रीवाल भी बनाये जाएंगे। महतारी सदन में सामुदायिक शौचालय का भी निर्माण किया जाएगा।

 

हरिबोल स्व सहायता समूह : वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र डोंगानाला की प्रेरक सफलता

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 रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर वनौषधि प्रसंस्करण के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें। वन औषधियों के प्रसंस्करण से न केवल प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग हो रहा है, बल्कि स्थानीय महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने इस क्षेत्र में महिलाओं की सक्रीय भूमिका को प्रोत्साहित करते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया है।


छत्तीसगढ़ के कटघोरा वनमंडल में स्थित हरिबोल स्व सहायता समूह, डोंगानाला की 12 महिलाओं द्वारा संचालित वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र ने अपनी मेहनत, लगन और सामूहिक प्रयासों से एक प्रेरक सफलता हासिल की है। वर्ष 2006-07 में शुरू हुई यह केंद्र यूरोपियन कमीशन परियोजना के अंतर्गत संचालित होता है। आज यह समूह अपने अनूठे प्रयासों के कारण प्रदेशभर में एक मिसाल बन चुका है।


इस समूह की महिलाओं का शुरुआती जीवन बेहद संघर्षपूर्ण था। पहले वे गांव में मजदूरी करके अपनी आजीविका चलाती थी। उनकी मासिक आय मुश्किल से 500-600 रुपये होती थी। आर्थिक तंगी से जूझते हुए उनके सामने कई चुनौतियाँ थी, लेकिन एक सामूहिक संकल्प ने उनकी जिंदगी बदल दी।

समूह ने वनौषधियों के प्रसंस्करण के क्षेत्र में कदम रखा और आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्माण शुरू किया। समूह द्वारा हिंगवाष्टक चूर्ण, अश्वगंधादि चूर्ण, सीतोपलादी चूर्ण, पुष्यानुग चूर्ण, बिलवादी चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, पंचसम चूर्ण, शतावरी चूर्ण, आमलकी चूर्ण, पयोकिल दंतमंजन, हर्बल काफ़ी चूर्ण, महिला मित्र चूर्ण, हर्बल फेसपैक चूर्ण, हर्बल केशपाल चूर्ण आदि जैसी कई आयुर्वेदिक वनौषधियों का निर्माण किया जाता है। कच्ची वनौषधियों का संग्रहण, घटकों का निर्धारण और प्रसंस्करण कार्य आयुर्वेद चिकित्सक (टेक्निकल स्टाफ) के मार्गदर्शन में किया जाता है। समूह ने हाल ही में आयुष विभाग से 2 करोड़ रुपये का ऑर्डर प्राप्त किया है, जिससे समूह की गुणवत्ता का प्रमाण स्वयं सिद्ध होता है। यह न केवल उनकी उत्कृष्टता को दर्शाता है, बल्कि उनके प्रयासों की निरंतर बढ़ती विश्वसनीयता और मांग को भी साबित करता है।

हरिबोल स्व सहायता समूह की महिलाओं की उद्यमिता से उत्पादित इन वनौषधियों की मांग स्थानीय और प्रदेश स्तर पर अत्यधिक है। समूह द्वारा प्रतिवर्ष औसतन लगभग 44 लाख की वनौषधियों का विक्रय किया जाता है। इसके अलावा केंद्र में नियुक्त अनुभवी वैद्य की देखरेख में स्थानीय एवं आसपास के सैकड़ों मरीजों का विभिन्न बीमारियों का इलाज भी किया जा रहा है।

हरिबोल स्व सहायता समूह की कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम यह हुआ कि वर्ष 2007-08 में 97,204 रुपये का लाभ अर्जित किया गया। यह शुरुआत की सफलता ने महिलाओं का आत्मविश्वास और बढ़ा दिया। वर्ष 2023-24 में समूह ने 6,57,254 रुपये का शुद्ध लाभ कमाया, जिससे प्रत्येक सदस्य की वार्षिक आय लगभग पौने दो लाख रुपये तक पहुँच गई। यह आर्थिक परिवर्तन उनकी पुरानी स्थिति के मुकाबले एक विशाल उन्नति थी।

इसके अतिरिक्त समूह की प्रत्येक सदस्य को प्राप्त लाभांश में से 3000 रुपये घरेलू कामों के लिए दिया जाता है, जबकि शेष राशि का उपयोग केंद्र के उन्नयन और विकास के लिए किया जाता है। इस प्रकार समूह न केवल व्यक्तिगत आय में वृद्धि कर रहा है, बल्कि स्थिर और दीर्घकालिक विकास की दिशा में भी अग्रसर है।

हरिबोल स्व सहायता समूह ने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारा है, बल्कि समाज में अपनी पहचान भी मजबूत की है। महिलाएँ अब आत्मनिर्भर हैं और अपने परिवारों को बेहतर जीवन प्रदान कर रही हैं। उनके आत्मविश्वास में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, और वे अपनी उद्यमशीलता से दूसरों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।

समूह की अध्यक्ष श्रीमती सरोज पटेल ने इस सफलता के बारे में कहा, राज्य वन विभाग के सहयोग से हमारा जीवन स्तर बहुत सुधर गया है। आज हम आत्मनिर्भर हैं और समाज में सम्मानित स्थान पा चुके हैं।

इस परियोजना की सफलता में छत्तीसगढ़ वन विभाग ने अहम भूमिका निभाई है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री व्ही. श्रीनिवास राव ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन औषधियों के संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन में स्व सहायता समूहों को शामिल करके आय सृजन के प्रति राज्य वन विभाग प्रतिबद्ध है। इस पहल से न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया गया है, बल्कि राज्य की वन संपदा का भी सही उपयोग हो रहा है।

हरिबोल स्व सहायता समूह को न केवल स्थानीय स्तर पर सराहा गया है, बल्कि इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला है। सिंगापुर में इसे प्रतिष्ठित ग्रिट पुरस्कार से सम्मानित किया गया और भारत सरकार के ट्राइफेड और छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बेस्ट फॉरेस्ट प्रोड्यूस पुरस्कार से नवाजा गया है।

डोंगानाला का यह वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र न केवल हरिबोल स्व सहायता समूह की महिलाओं के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बन गया है। इस पहल ने यह साबित किया है कि सही दिशा और संकल्प के साथ किए गए प्रयास बड़े से बड़े परिवर्तन ला सकते हैं। आज यह समूह अन्य स्व सहायता समूहों और ग्रामीण समुदायों के लिए एक आदर्श उदाहरण है कि सामूहिकता, मेहनत और दृढ़ निश्चय से सपने पूरे किए जा सकते है।

लक्ष्मीकांत कोसरिया, डिप्टी डायरेक्टर जनसंपर्क

गौठान बना समूह की महिलाओं के लिए आमदनी का जरिया

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रायपुर। राज्य में महत्वाकांक्षी सुराजी गांव योजना के अंतर्गत संचालित गौठान समूह की महिलाओं के लिए आमदनी का जरिया बन गया है। गौठानों में समूह की महिलाएं विभिन्न आजीविकामूलक गतिविधि अपनाकर स्वावलंबन व आत्मनिर्भर होने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं। जिससे महिलाओं के जीवन में एक नया बदलाव आ रहा है। इसी कड़ी में मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड के ग्राम सांवतपुर के गौठान में इंदिरा महिला स्व-सहायता समूह और भारत वाहिनी स्व-सहायता समूह द्वारा शासन की महत्वाकांक्षी गोधन न्याय योजना के तहत क्रय किए गए गोबर से वर्मी कंपोस्ट व सुपर कंपोस्ट निर्माण कर रहे हैं।

गोधन न्याय योजना की शुरुआत से अब तक समूह द्वारा 621.85 क्विंटल वर्मीं कंपोस्ट का उत्पादन किया गया है, जिसमें से 538 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का विक्रय किया जा चुका है। इसी तरह समूह द्वारा 318 क्विंटल सुपर कम्पोस्ट का भी निर्माण किया गया है, जिसमें से 71 क्विंटल सुपर कम्पोस्ट का विक्रय किया जा चुका है। इससे समूह की महिलाओं को लगभग 04 लाख 22 हजार रूपए की आमदनी हुई है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशानुरूप ग्रामीण अर्थव्यव्स्था को मजबूती प्रदान करने तथा ग्रामीणों को ग्राम में ही रोजगार व स्वरोजगार से जोड़ने शासन की महत्वाकांक्षी सुराजी गांव योजना के तहत निर्मित गौठानों में विभिन्न आजीविकामूलक गतिविधि संचालित की जा रही है। इन गौठानों से जुड़कर स्वसहायता समूह की महिलाएं अब सशक्त व आत्मनिर्भर हो रही हैं।

भारतीय परंपरागत चिकित्सा पद्धति के महत्व को समझें : आयुष मंत्री

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नई दिल्ली। केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भारतीय परंपरागत चिकित्सा पद्धति की क्षमता, शक्ति और प्रभाव के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया है। नई दिल्ली में आज सातवें आयुर्वेद दिवस समारोह में सोनोवाल ने कहा कि यह परंपरागत प्रणाली न केवल बीमारियों की रोकथाम करती है, बल्कि यह लोगों को स्वस्थ बनाए रखती है। सोनोवाल ने कहा कि देशवासियों को हजारों वर्षों से उपयोग में लाई जा रही भारतीय परंपरागत चिकित्सा पद्धति के महत्व को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे देश को आत्मनिर्भर बनने में सहायता मिलेगी। 



सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समर्थन से आयुष क्षेत्र ने पूरे विश्व में अपनी अनूठी पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि आयुष और जनजातीय कार्य मंत्रालयों ने देश के दस करोड़ जनजातीय लोगों के लाभ के लिए काम करने के वास्ते एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इधर, छत्तीसगढ़ में भी आज आयुर्वेद दिवस पर अनेक कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को आयुर्वेद चिकित्सा के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसी कड़ी में जांजगीर-चांपा जिले में आयुष विभाग द्वारा निःशुल्क आयुष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने किया।

बिहान योजना से जुड़कर दीदियों के सपनों को मिले पंख

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बिलासपुर। बिहान ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत महिलाओं एवं युवतियों को स्वयं सहायता समूह के रूप में गठित कर एवं उन्हें प्रेरित कर स्व रोजगार से जोड़े जाने की महत्वकांक्षी योजना है। आज छत्तीसगढ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान की महिलाएं समूह से जुड़कर सफलता की नयी कहानियां लिख रही है तथा अपने सपने को पंख दे कर नयी उड़ान के लिए तैयार है। तीनों स्तर की पंचायतों एवं बिहान टीम की सहायता से इन महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे है।



विकासखंड बिल्हा के ग्राम पंचायत रहंगी में चांदनी महिला स्वयं सहायता समूह का गठन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत किया गया। इस समूह में कुल 11 सदस्य है। इस योजना से जुड़कर समूह की महिलाओं को 2 लाख से अधिक की आमदनी हो चुकी है। इन दीदियों का परिवार व्यक्तिगत रूप से कृषि एवं गैर कृषि कार्य में संलग्न हैं एवं यह इनके परिवार की आय का एक प्रमुख स्त्रोत भी है। योजना से जुड़ने के बाद इन्हें अतिरिक्त आय का साधन मिल गया है। समाज में भी उनका मान अब बढ़ गया है। 

बिहान योजना के तहत समूह को मिलने वाले वित्तीय सहायता एवं लाभ ने इस समूह की दीदियों को अधिक प्रभावित किया और सभी दीदियों ने मिलकर एक स्वयं सहायता समूह का गठन करने एवं इसके माध्यम से मिलने वाले वित्तीय सहायता एवं लाभ लेकर आर्थिक रूप से अपने परिवार को मजबूत बनाने का निर्णय लिया। समूह की अध्यक्ष श्रीमती अंजली श्रीवास एवं सचिव श्रीमती मीना ध्रुव है। बिहान योजना से जुडने बाद समूह की सभी दीदियों को बिहान योजना के तहत 15 हजार रूपये मिले। इसके एक वर्ष के बाद समूह को सामूदायिक निवेश कोष की राशि 60 हजार प्राप्त हुए। इस राशि का उपयोग करते हुए समूह की दो दीदियों ने अपने परिवार की आय बढ़ाने के उद्देश्य से किराना दुकान और बाड़ी विकास का कार्य प्रारंभ किया। समूह ने ग्राम में ही बने तालाब में सामुहिक रूप से मछली पालन करने की योजना बनाई एवं इस हेतु आवेदन दिया।

इसके अलावा समूह की दीदियां ने अपने आय के साधन बढाने के लिए विकासखंड परियोजना प्रबंधन इकाई की टीम की मदद से लोन हेतु आवेदन बैंक में प्रस्तुत किया। जिससे समूह को लोन के रूप में बैंक से 50 हजार रूपये की सहायता राशि प्राप्त हुई। इस राशि में से 17 हजार रूपये की राशि का उपयोग करते हुए समूह ने मछली पालन का कार्य प्रारंभ किया। समूह की दीदियों को मछली पालन का कार्य करते हुए तीन वर्ष से अधिक हो चुका है दीदीयों को इस कार्य से अच्छी आमदनी भी प्राप्त हो रही है। इस कार्य से समूह को अब तक 2 लाख 9 हजार रू आय प्राप्त हुई है। जिससे सभी समूह की दीदियां काफी उत्साहित है। चांदनी महिला स्वयं सहायता समूह की सभी दीदियों ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान योजना से जुड़कर गांव की अन्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनने हेतु प्रेरणा दे रही है।

PMFME योजना अंतर्गत् खाने की वस्तुएं बनाने के लिए मिलेगा 10 लाख रूपए तक का अनुदान

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कवर्धा। केंद्र सरकार द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान अंतर्गत खाने की वस्तुएं बनाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) संचालित है। योजना अंतर्गत वर्ष 2022-23 के लिए जिले में 32 हितग्राहियों को लाभान्वित करने का भौतिक लक्ष्य प्राप्त हुआ है। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक ने बताया कि योजना अंतर्गत् खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में कार्यरत व कार्य करने के इच्छुक व्यक्ति योजना का लाभ ले सकते है,



जिसमें परियोजना लागत का 35 प्रतिशत अधिकतम 10 लाख रूपए अनुदान प्रदान की जाएगी। साथ ही बैंक द्वारा ब्याज अनुदान क्लेम किए जाने पर 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान की पात्रता होगी। योजना अंतर्गत आवेदन ऑनलाईन पीएमएफएमई के पोर्टल में करना होगा जिसमें फोटो, आधार कार्ड, पेन कार्ड, बैंक पास बुक व अन्य आवश्यक दस्तावेज अपलोड करना होगा।

जिला व्यापार उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक ने बताया कि व्यक्तिगत तथा स्वयं सहायता समूह दोनों को योजना में अनुदान मिलेगा तथा गुड़ उद्योग, राईस मिल, कोदो मिल, मसाला उद्योग, आटा चक्की, पोहा मिल, बेसन निर्माण, नमकीन मिक्चर निर्माण, पापड़ निर्माण, बेकरी, टमाटर सॉस, चिप्स, पापड़ी, रेवड़ी, ब्रेड, मिठाई, गुपचुप, लड्डू, रेडी टू ईट निर्माण जैसे सभी तरह के खाने की वस्तुएॅ बनाने वाले उद्यमी इस योजना का लाभ ले सकते है। अधिक जानकारी के लिए जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र कबीरधाम में संपर्क कर सकते है।

लक्ष्य निर्धारित कर उसे प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम करें युवा : राज्यपाल

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रायपुर। राज्यपाल अनुसुईया उइके ने युवाओं से आव्हान किया है कि वे जीवन में अपने लक्ष्य निर्धारित कर उसे प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम का संकल्प लें। इसी संकल्प से आप सफल होंगे और राष्ट्र के विकास में अपना योगदान दे पाएंगे। यह बात राज्यपाल ने आज भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित युवा उत्सव कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने आत्मनिर्भर भारत की जो संकल्पना की है



उसे पूरा करने में भारत के युवा उद्यमियों की बड़ी भूमिका होगी। परिसंघ के रायपुर वाय.आई. चेप्टर द्वारा आयोजित युवा उत्सव में देश और प्रदेश के प्रमुख उद्योगपति, विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों के विद्यार्थी शामिल हुए। इस दौरान राज्यपाल ने चयनित औद्योगिक इकाइयों और परिसंघ के विशिष्ट सदस्यों को पुरस्कार प्रदान किया।

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