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RAIPUR NEWS : अश्लील तस्वीरें वायरल करने की धमकी देकर सहकर्मी से दुष्कर्म, सलाखों के पीछे पहुंचा होटल का कर्मचारी

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 RAIPUR NEWS : प्रदेश में लाख कोशिशों के बाद भी महिलाओं से संबंधित अपराध कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बदमाश बेखौफ होकर इस तरह के कृत्य को अंजाम दे रहे हैं। ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सामने आया है। यहां एक युवक ने अपने सहकर्मी की अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर हवस का शिकार बना लिया।


मिली जानकारी के अनुसार पूरा मामला टिकरापारा थाना इलाके का है। युवक चंदूलाल साहू शहर के एक प्रतिष्ठित होटल में काम करता है। उसने अपने महिला सहकर्मी की पहले चुपचाप अश्लील तस्वीरें खींच ली। इसके बाद उसे वायरल करने की धमकी देकर हवस मिटाता रहा। युवती ने परेशान होकर इसकी शिकायत पुलिस से की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी युवक चंदूलाल साहू को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उसके खिलाफ रेप और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।


पुलिस के प्रति अपराधियों के मन में डर और आम जनता में सम्मान हो : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि अपराध, नशाखोरी और अवैध गतिविधियों पर हमारी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति है। अपराधों पर लगाम नहीं लगी तो सबंधित जिले के पुलिस कप्तान पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर में आज आयोजित पुलिस महानिरीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस को लेकर अपराधियों के मन में डर और आम जनता के मन में सेना की तरह सम्मान होना चाहिए।



मुख्यमंत्री  विष्णु देव ने अधिकारियों से कहा कि पुलिस का व्यवहार अपराधियों के लिए कठोर हो और आमजनों के लिए उतना ही नम्र और मृदु होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अवैध शराब, जुआ, सट्टा जैसी सामाजिक बुराईयां समाज को अंदर तक खोखला कर देती हैं। जब युवा इससे प्रभावित होते है तो यह सर्वाधिक चिंता जनक है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़ा निर्देश देते हुए कहा कि यदि आपराधिक गतिविधियों पर लगाम नहीं लगेगी तो ना केवल संबंधित जिले के पुलिस कप्तान बल्कि थाना स्तर के पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।

     साय ने कहा कि पुलिस विभाग अनुशासित विभाग है, पुलिस अधिकारियों में यह अनुशासन दिखना चाहिए, जो अंततः अनुशासित और अपराध मुक्त समाज की स्थापना में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की दंड से न्याय की ओर की संकल्पना को स्थापित करने के लिए किये जा रहे प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि नए कानून समयबद्ध तरीके से लागू हों, यह सुनिश्चित किया जाए।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश के माओवाद प्रभावित क्षेत्र में हमारे जवान कठिन परिस्थितियों में उनका डटकर मुकाबला कर रहे हैं। उन्होंने संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ सरकार हर मोर्चे पर पुलिस कर्मियों के साथ खड़ी है और उनके सुविधाओं में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। पुलिस के कल्याण के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं। समय पर पदोन्नति, आवास, जरूरी अधोसंरचना सहित संसाधनों की आपूर्ति के लिए हमने व्यवस्थाएं की हैं, इसे आगे भी जारी रखेंगे। मुख्यमंत्री  साय ने छत्तीसगढ़ शासन के वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट का उल्लेख करते हुए कहा कि इस बजट में पुलिस विभाग के लिए बड़ी राशि आवंटित की गई है। यह बजट कानून का राज स्थापित करने में निर्णायक साबित होगा।

    उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय सरकार के पहले बजट में गृह विभाग को काफी कुछ मिला है, पिछले वर्ष के बजट की तुलना में गृह विभाग के बजट में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस बजट में नक्सल ऑपरेशन में जाने वाले जवानों के लिये राशन का बैग और स्पाईक रेसिस्टेंट शूज का प्रावधान किया गया है, जिससे अब नक्सल ऑपरेशन में जाने वाले जवानों को सुविधा होगी। पुलिस विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारियों की सुविधाओं में वृद्धि के लिए भी इस बजट में प्रावधान किये गए हैं। उन्होंने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री के हृदय में बड़े अधिकारी से लेकर आरक्षक तक के अधिकारी के लिए समान रूप से संवेदना है। हम सबका कर्तव्य है कि अपराध हुआ तो अपराधी को जल्द से जल्द पकड़ लें।  शर्मा ने कहा कि समाज में वातावरण बने कि अपराध ही न हो और इसी लक्ष्य के साथ अधिकारियों को अपने दायित्वों का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस का कप्तान यह ठान ले कि जिले में अपराध न हो, नशे का व्यापार न हो तो वह बिल्कुल नहीं होगा। छत्तीसगढ़ शांति का टापू था, इसे हम फिर से  शांति के टापू के रूप में स्थापित करेंगे, उन्होंने यह संकल्प दोहराया।

    सम्मेलन में पुलिस महानिदेशक  अशोक जुनेजा ने स्वागत उद्बोधन दिया और पुलिस विभाग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की। इस मौके पर मुख्य सचिव  अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव  मनोज कुमार पिंगुआ, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  हिमांशु गुप्ता,  प्रदीप गुप्ता,  एस.आर.पी कल्लुरी,  विवेकानंद सिन्हा,  अमित कुमार गुप्ता, मुख्यमंत्री के सचिव  पी. दयानंद,  राहुल भगत, डॉ. बसवराजू एस. सहित छत्तीसगढ़ के सभी रेंज के पुलिस महानिरीक्षक और जिलों के पुलिस अधीक्षक मौजूद रहे।

सम्मेलन के अंत में ग्रुप फोटोग्राफी भी कराई गयी जिसमें कृषि मंत्री  राम विचार नेताम, विधायक  अमर अग्रवाल तथा प्रबोध मिंज उपस्थित रहे।

बाल विवाह एक सामाजिक बुराई ही नहीं अपितु कानूनन अपराध भी

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गरियाबंद। कलेक्टर प्रभात मलिक ने बाल विवाह की पूर्णतः रोकथाम के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा है कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई ही नहीं अपितु कानूनन अपराध है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अंतर्गत बाल विवाह करने वाले वर एवं वधु के माता-पिता, सगे-संबंधी, बाराती यहाँ तक कि विवाह कराने वाले पर भी कानूनी कार्यवाही की जा सकती है।

इसके अतिरिक्त यदि वर या कन्या बाल विवाह पश्चात विवाह को स्वीकार नहीं करते है, तो बालिक होने के पश्चात विवाह को शून्य घोषित करने के लिए आवेदन कर सकते है। उन्होंने कहा है कि बाल विवाह के कारण बच्चों में कुपोषण, शिशु मृत्यु दर एवं मातृ मृत्यु दर के साथ घरेलू हिंसा में भी वृद्धि होती है। हम सभी का दायित्व है कि समाज में व्याप्त इस बुराई के पूर्णतः उन्मूलन के लिए जनप्रतिनिधियों नगरीय निकाय, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों एवं आमजनों से सहयोग प्राप्त कर इस प्रथा के उन्मूलन हेतु कारगर कार्यवाही किया जा सकता है।

कलेक्टर ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा है कि बाल विवाह के रोकथाम के लिए विशिष्ट जातियों का चिन्हांकन, ग्राम पंचायत स्तर पर विवाह पंजी का संधारण एवं पंजीयन, गांवों में कोटवारों के माध्यम से बाल विवाह को रोकने के लिए मुनादी, जिले में आयोजित होने वाले सभी ग्राम सभाओं में बाल विवाह के रोकथाम के उपाय एवं बाल विवाह के कारण महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव के बारें में चर्चा की जाए।

ग्राम पंचायत एवं विकासखण्ड स्तरीय बाल संरक्षण समितियों के माध्यम से बाल विवाह की रोकथाम, प्रचार-प्रसार, सूचना तंत्र का प्रभावी होना एवं पुलिस थानों में किसी भी माध्यम से प्राप्त बाल विवाह संबंधी लिखित एवं मौखिक शिकायत प्राप्त होने पर तत्काल कार्यवाही किया जाए। कलेक्टर ने कहा है कि बच्चों के सर्वोत्तम हित में बाल विवाह की पूर्ण रोकथाम हेतु प्रभावी कार्यवाही करते हुये कार्यवाही से महिला एवं बाल विकास विभाग गरियाबंद को अवगत कराना सुनिश्चित करेंगे।

बाल-विवाह अपराध : रिश्तेदार, बाराती और पुरोहित पर भी हो सकती है कानूनी कार्यवाही

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रायपुर। देश में अक्षय तृतीया के अवसर पर आज भी बाल विवाह के कई मामले सामने आते हैं। बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति ही नहीं अपराध भी है। इससे बच्चों के अच्छा स्वाथ्य, पोषण व शिक्षा पाने और हिंसा, उत्पीड़न व शोषण से बचाव के मूलभूत अधिकारों का हनन होता है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अनुसार विवाह के लिए लड़के की आयु 21 वर्ष और लड़की की आयु 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए।


वर एवं वधु की आयु तय सीमा से कम होने पर माता-पिता, सगे-संबंधी, बाराती यहां तक कि विवाह कराने वाले पुरोहित पर भी कानूनी कार्यवाही हो सकती है। अधिनियम के तहत व्यस्क पुरूष यदि 18 वर्ष से कम आयु की किसी महिला से विवाह करता है तो उसे 2 वर्ष तक के कठोर कारावास अथवा जुर्माना अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है। बाल विवाह करवाने, करने या उसमें सहायता करने वाले व्यक्ति तथा बाल विवाह को बढ़ावा देने वाले, अनुमति देने वाले या बाल विवाह में सम्मिलित होने वाले व्यक्ति को भी 2 वर्ष तक के कठोर कारावास अथवा जुर्माना से दंडित किया जा सकता है।

बाल विवाह के बाद यदि वर या कन्या विवाह को स्वीकार नहीं करते, तो वाद मित्र, संरक्षक या बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी के माध्यम से या बालिग होने के बाद शून्य घोषित करने के लिए न्यायालय में याचिका दायर कर सकते हैं। यदि किसी बालक को बाल विवाह के लिए बलपूर्वक बाध्य किया जाता है, फुसलाया या उत्प्रेरित किया जाता है अथवा विक्रय कर विवाह किया जाता है और अनैतिक प्रयोजनों के लिए उसका उपयोग किया जाता है तो ऐसा विवाह अकृत और शून्य माना जाता है।

विवाह शून्य घोषित होने पर दोनों पक्षों के मध्य आदान-प्रदान किये गये धन, कीमती वस्तुएं, गहने तथा अन्य उपहारों को भी वापस करना पड़ता है। अधिनियम में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला अधिकारी को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी घोषित किया गया है। बाल विवाह की सूचना अनुविभागीय दंडाधिकारी, पुलिस थाने में, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सरपंच, कोटवार या महिला एवं बाल विकास विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी कर्मचारियों को दी जा सकती है।

 

राज्य बाल संरक्षण आयोग ने की बच्चों के साथ लैंगिक अपराध मामलों में पहचान उजागर नहीं करने की अपील

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रायपुर। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अपील की है कि समाज और परिवार के लिए बेहद जरूरी है वे बच्चों को शक, संशय और संवादहीनता से बचाएं। उन्होंने यह भी कहा है कि मीडिया को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों के साथ लैंगिक अपराध के प्रकरणों में उनकी पहचान उजागर करना पाक्सो एक्ट की धारा 23 के तहत दंडनीय अपराध है। इसका उल्लंघन होने पर 6 माह से 1 वर्ष तक की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकता है।


बच्चों की पहचान उजागर नहीं करने की अपील

राज्य बाल संरक्षण आयोग ने अपील की है कि बच्चों के साथ लैंगिक अपराध होने की दशा में किसी भी प्रकार से पहचान प्रकट नहीं की जा सकती है। समाचार पत्रों, इलेक्ट्रानिक मीडिया एवं वेब पोर्टल्स के द्वारा संस्थाओं का नाम, फोटो आदि प्रकाशित किये जाने की घटनाएं घट रही हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा ऐसी घटनाओं को रोकने और बच्चों को सुरक्षित एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

राज्य बाल संरक्षण आयोग ने की जिम्मेदारी के साथ रिपोर्टिंग की अपील

राज्य बाल संरक्षण आयोग के अनुसार, बच्चों के संरक्षण के लिए मीडिया के साथियों को बाल अधिकारों से जुड़े कानूनों को जानना आवश्यक है। पत्रकारों को आयोग से पहले पता होता है कि अपराध कहां घटित हुआ है। मीडिया को बाल अधिकारों के उल्लंघन और शोषण के मामलों की रिपोर्टिंग संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से करनी चाहिए। उन्होंने अपील की है कि बच्चों से जुड़े हर मामले की सूचना आयोग को दी जाए।

कानूनों से आम लोगों को भी जागरुक होने की जरूरत

राज्य बाल संरक्षण आयोग ने अपील की है कि बच्चों से जुड़े अपराधों पर नीति निर्माताओं, न्यायपालिका, पुलिस और मीडिया को संवेदनशील होने और उन्हें गंभीरता से लेने की सख्त जरूरत है, ताकि किसी पीड़ित बच्चे और विशेषकर यौन अपराधों से पीड़ित बच्चों की गरिमा को ठेस पहुंचे बगैर उन्हें न्याय मिल सके। कानूनों के क्रियान्वयन के लिए आम लोगों को भी जागरुक होने की जरूरत है। बच्चों के साथ अपराध की स्थिति में समाज के हर वर्ग की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह उसके खिलाफ आवाज उठाएं।

बैंक के लेखापाल सूरज साहू के खिलाफ 3 करोड़ 23 लाख के गबन मामले में पलारी थाना में एफआईआर दर्ज

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बलौदाबाजार। कलेक्टर रजत बंसल के निर्देश पर जिला सहकारी बैंक वटगन के लेखापाल सूरज साहू द्वारा 3 करोड़ 23 लाख से अधिक राशि का गबन करने के मामले में पलारी पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। बंसल के निर्देश पर बुधवार को सूरज साहू के खिलाफ गबन का रिपोर्ट दर्ज कराने बैंक के अधिकारी पलारी थाना पहुंचे। जिसमें नोडल अधिकारी अविनाश शर्मा और शाखा प्रबंधक पहलाद पटेल वटगन ने सीईओ एस के जोशी जिला सहकारी बैंक रायपुर के आदेश और जांच रिपोर्ट के साथ पलारी थाना पहुंचे।


जहां पर दस्तावेजों का परीक्षण के बाद थाना प्रभारी उमेश वर्मा ने उक्त गबन के मामले में अपराध दर्ज कर लिया है। वही सूरज साहू के खिलाफ एक और अपराध बलौदाबाजार थाने में अलग से दर्ज होगा क्योंकि करीब
21लाख से अधिक राशि सूरज साहू ने बलौदाबाजार शाखा से गबन किया था। जिसकी रिपोर्ट अलग से संबंधित थाना बलौदाबाजार में दर्ज कराया जाएगा।

 

मृत महिला के खाते से 1.5 लाख रुपए निकाले सूरज तो खुल गई 3 करोड़ 45 लाख के गबन का राज

गबन का राज भी बड़े दिलचस्प तरीके से खुला आरोपी लेखापाल ने जब अपने ही बैंक की मृत महिला बैसाखिन बाई गेंडरे के खाता क्रमांक 624046114649 13 मई 2022को एक लाख और एक माह बाद 14  जून 2022 को 4900 इस तरह दो बार पैसा निकाल लिया जिसका मैसेज जब घर के मोबाईल पर गया तो घर के लोगो ने इसकी जानकारी लेने बैंक पहुंचे जहां पर शाखा प्रबंधक को फोन में आए बैंक के मैसेज को दिखाते हुए बताया की उसकी मां की मौत हो चुकी है। और उनके खाते से दो बार पैसा निकाल दिया गया। मैसेज को देखकर शाखा प्रबंधक भी आवक रह गया और  इसकी जांच की तो उनके ही बैंक के लेखापाल सूरज साहू द्वारा उक्त राशि निकालने की पुष्टि हो गई। 

जिसके बाद पटेल ने सूरज को उक्त राशि तत्काल उपभोक्ता के खाते में जमा करने का निर्देश दिया। जिस पर सूरज ने अधिकारी को गुमराह करते हुए वापस बैंक के अन्य खाते से उपभोक्ता के खाते में पैसा डाल दिया। जब इस बात की जानकारी प्रबंधक को हुआ तो उन्होंने बैंक के अन्य खाते की प्रारंभिक जांच किया जिसमें बड़ी गडबडी सामने आया तब इसकी सूचना उन्होंने मुख्यालय को देकर इसकी जांच कराई जिसमें आरोपी लेखापाल ने चार साल में बैंक को लगभग 3 करोड़ 45 लाख रुपए बैंक को चुना लगा चुका था। जिसमे 3 करोड़ 23 लाख वटगन बैंक तो 21 लाख से अधिक बलौदा बाजार ब्रांच से गबन किया है।

वही इस संबध में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पीताम्बर पटेल ने कहा कि जिला सहकारी बैंक वटगन के लेखापाल प्रभारी शाखा प्रबंधक सूरज साहू के खिलाफ करीब करोड़ 23 लाख रुपए का बैंक के पैसों को गबन करने का मामला है। पुलिस थाना में दर्ज किया गया है अब इसकी जांच कर जल्द कार्यवाही कि जाएगी। गौरतलब है कि सीईओ एस के जोशी जिला सहकारी बैंक रायपुर के आदेश पर 3 सदस्यीय सदस्य जांच समिति का गठन किया गया था। जिसमें रायपुर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अंतर्गत शाखा प्रबंधक विधान तिवारी जोशी,युवराज दुबे,परमेश्वर वर्मा शामिल थे। तीनों के प्रारंभिक जांच उपरांत कार्रवाई की गयी है।

बेटे को जेल से छुड़ाने मां एकत्र कर रही थी रुपये, युवकों ने बुजुर्ग मां को ही मार डाला

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महासमुन्द। चंद रुपयों की लालच में दो युवकों ने मिलकर एक बुजुर्ग महिला की हत्या कर डाली। इससे जेल में बंद बेटे को छुड़ाने का एक मां का सपना अधूरा रह गया। बताया गया है कि बेटे को जेल से रिहा कराने कके लिए भीख मांग कर बुजुर्ग महिला ने पांच हजार रुपये जुटाए थे। जिसे लालची युवकों ने हत्या करके छीन लिया था। पुलिस ने रुपये बरामद करके दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।

प्रेसवार्ता में जानकारी देते हुए एएसपी आकाश राव

पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आकाश राव ने बताया कि दो दिन पहले खीरबाई पति नित्यानंद राणा निवासी खेमडा ने बसना थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि खेमडा रोड किनारे झोपड़ीनुमा उसकी हाॅटल में विशाखा पति बेड़ा भोई (उम्र 77 वर्ष) निवासी इंदिरा कॉलोनी बसना रात्रि में सोती थी। वह दिन में घूम- घूमकर भीख मांगती थी । 28अगस्त 2022 को रात्रि में 9 बजे खीरबाई के घर से हाॅटल में सोने गई थी । सुबह करीबन सात बजे देखी तो हाॅटल के अंदर पाटा के ऊपर वह मृत पड़ी थी। किसी अज्ञात आरोपी ने गला दबाकर हत्या कर दिया है। रिपोर्ट पर थाना बसना में मर्ग कायम कर विवेचना में लिया गया।पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल ने इसे बहुत गंभीरता से लेते हुए बसना टीआई कुमारी चंद्राकर, सायबर सेल की टीम एवं फाॅरेसिंक टीम रायपुर को अलर्ट किया।  घटना स्थल पर पहुचकर बारिकी से जाॅच करने निर्देशित किया।


खाट में मृत मिली थी बुजुर्ग विशाखा

मृतिका विशाखा भोई खाट में मृत हालत में पडी थी। जीभ बहार निकाला हुआ था। फाॅरेंसिक टीम द्वारा शव निरीक्षण कर विशाखा भोई की मृत्यु गला दबाने व दम घुटने से होने की बात कही गई। पीएम रिपोर्ट में भी इसका खुलासा हुआ। तब अज्ञात आरोपियों के विरूध्द धारा 302 के तहत हत्या का अपराध पंजीबध्द कर विवेचना में लिया गया।
सायबर सेल की टीम व बसना पुलिस की टीम घटना स्थल पर पहुच करजांच कर रही थी। इस बीच पता चला कि खीरबाई का पुत्र सुशील राणा का कामकाज बंद होने से आर्थिक रूप से परेशान था।  मृतिका का पुत्र रोहित किसी प्रकरण में जेल में बंद है, जिसे छुडाने के लिए वह भीख मांग कर पैसा इकठ्ठा कर रही थी। उसके साथ कुष्टो यादव भी भीख मांगकर जीवनयापन करता है। सुशील राणा व कुष्टो यादव दोनो जान पहचान के है। पुलिस की टीम द्वारा दोनो व्यक्ति पर संदेह जाहिर करते हुये संदेही सुशील राण व कुष्टो यादव को पुलिस अभिरक्षा में लेकर पूछताछ करना प्रारंभ किया ।


गले में लटकाकर रखती थी जमा पूंजी
 बहुत मशक्कत के बाद आरोपियों ने बताया कि विशाखा भोई अपने गले में कपड़ा की एक छोटी थैली लटका के रखती थी। जिसमें भीख मांग- मांग कर एकत्र किए जमा पूंजी को लटकाए रखती थी। जिससे कि वह अपने बेटे को जेल से छुड़ा सके।  वह करीबन 05 हजार रूपये को  रखी हुई थी । घटना की रात बारिश हो रही थी। रास्ता सुनसान था। सुनसान देखकर हाॅटल में लगे पर्दानुमा किवाड़ को हटाकर  दोनो आरोपी अन्दर प्रवेश किये और गला घोंटकर हत्या कर दिया। रुपये लेकर वहां से फरार हो गए और पैसे को आपस में बांट लिये। पुलिस के द्वारा पकड़े जाने पर आरोपियों ने बटवारे में मिले नगदी 5000 रूपये को घर में छुपाकर रखना स्वीकार किया। आरोपीगण के कब्जे से नगदी रकम 5000 रूपये को जप्त कर आरोपी सुशील राणा पिता स्व. नित्यानंद राणा उम्र 23 वर्ष सा. ग्राम खेमडा बसना महासमुन्द और कुष्टो यादव पिता धनुर्जय यादव उम्र 40 वर्ष सा. ग्राम खेमडा बसना को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। जहां से जेल भेज दिया गया है। 

सोसायटी में अभद्र व्यवहार करने और कम्यूटर को तोड़फोड़ करने वाले व्यक्ति के विरूद्ध अपराध दर्ज

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कवर्धा। सहसपुर लोहारा विकासखण्ड के ग्राम रणवीरपुर में संचालित सेवा सहकारी समिति में वहां के कर्मचारियों के समक्ष अभद्र व्यवहार करने तथा समिति के कम्यूटर व अन्य समाग्री को तोड़फोड़ करने वाले संतोष धुर्वे के विरूद्ध समिति प्रबंधक द्वारा अपराध पंजीपद्ध करा दिया गया है। बताया जाता है कि संषोष धुर्वे ग्राम के निवासी है वह इस समिति के संचालक मंडल के भूतपूर्व सदस्य रह चुके है। इनके द्वारा इस वर्ष खरीफ फसल के लिए खाद्-बीज एवं उर्वरक का उठाव भी किया गया है।



कलेक्टर जनमेजय महोबे के निर्देश पर कृषि उपसंचालक व अन्य अधिकारियों ने संयुक्त रूप में रणवीरपुर में संचालित सेवा सहकारी समिति का निरीक्षण कर वहां मंगलवार को घटित घटना की पूरी जानकारी ली। समिति के निरीक्षण के दौरान कमलेश मेरावी, सहायक समिति प्रबंधक, रमेश रजक, कम्प्यूटर ऑपरेटर एवं उपस्थित कृषकों द्वारा बताया गया कि किसानां के द्वारा किसी प्रकार से हंगामा नहीं किया गया है।

केवल जमुनिया निवासी भूतपूर्व सदस्य, संचालक मण्डल सेवा सहकारी समिति, रणवीरपुर संतोष धुर्वे द्वारा सोसायटी में रखे कम्प्यूटर को तोड़ा गया है एवं दुर्व्यवहार किया गया। किन्तु धुर्वे द्वारा पूर्व में ही खाद, बीज एवं उर्वरक का उठाव कर लिया गया है तथा स्वयं के लिए खाद उठाव के लिए नहीं आया था। जब इनके द्वारा समिति में कम्प्यूटर तोड़ा गया तो वहॉ पर उपस्थित कृषकों में किसी भी प्रकार का रोष नहीं था। इनके द्वारा मनमानी करते हुए अभद्र र्व्यवहार किया गया। जिसके कारण समिति प्रबंधक द्वारा एफ.आई.आर. दर्ज कराया गया है।

रणवीरपुर सेवा सहकारी समिति द्वारा अब तक 899 मी.टन खाद वितरण किया जा चुका है

समिति के प्रंबधक ने बताया कि समिति में किसानों के लिए अब तक 437 मी.टन यूरिया, 231 मी.टन एस.एस.पी., 125 मी.टन डी.ए.पी., 110 मी.टन पोटास तथा 25 मी.टन एन.पी.के. इस प्रकार कुल 928 मी.टन उर्वरक की आपूर्ति की गई है। जिसमें 411 मी.टन यूरिया, 125 मी.टन डी.ए.पी., 227 मी.टन एस.एस.पी., 110 मी.टन पोटास, 25 मी.टन एन.पी.के. कुल 899 मी.टन वितरण किया जा चुका है। वर्तमान में 25.20 मी.टन यूरिया, 4.35 मी.टन एस.एस.पी. कुल 29.55 मी.टन उर्वरक उपलब्ध है। डबल लॉक केन्द्रो में 2947 मी.टन उर्वरक उपलब्ध है। समिति प्रबंधक के द्वारा 130 मी.टन उर्वरक का भण्डारण के लिए अतिरिक्त आर.ओ., डी.डी. जारी किया गया है।

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