Media24Media.com: अनुसूचित जाति

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अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण मद से स्वीकृत कार्यों को गंभीरता से लेकर पूरी गुणवत्ता के साथ समय सीमा में पूर्ण कराएं कलेक्टर्स : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज जांजगीर-चांपा जिले के जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण की बैठक में प्राधिकरण के बजट को 50 करोड़ से बढ़ाकर 75 करोड़ रुपये करने की स्वीकृति दी गई। मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए कि प्राधिकरण मद से स्वीकृत कार्यों को सभी कलेक्टर्स गंभीरता से लें और उन्हें उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समयसीमा में पूर्ण कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि अब प्राधिकरण की बैठक हर वर्ष समय पर आयोजित होगी और कार्यों की गहन समीक्षा की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि संविधान की मंशा के अनुरूप अनुसूचित जाति समुदाय के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक उत्थान के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा प्रदत्त संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करते हुए हम बाबा गुरु घासीदास जी के ‘मनखे-मनखे एक समान’ के संदेश को आत्मसात कर समाज में सम्मान और समानता की भावना को सशक्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचे, यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

अनुसूचित जाति वर्ग के पांच युवाओं को हर साल पायलट बनाने दी जाएगी आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जांजगीर-चांपा जिले को इस बैठक के लिए विशेष रूप से इसलिए चुना गया क्योंकि यह अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य अपनी स्थापना के 25वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, और अब समय आ गया है कि हम विकास की दिशा में नए कीर्तिमान स्थापित करें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की संकल्पना के अनुरूप राज्य में विकास के कार्य हुए हैं। अनुसूचित जाति समाज के समुचित विकास के लिए प्राधिकरण एक सशक्त माध्यम है, जिसके माध्यम से सरकार ठोस प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने गिरौधपुरी धाम के विकास के लिए 2 करोड़ रुपये, अजा वर्ग के विद्यार्थियों हेतु कोचिंग व्यवस्था के लिए 50 लाख रुपये, प्रत्येक वर्ष अनुसूचित जाति वर्ग के 5 युवाओं को पायलट प्रशिक्षण हेतु सहायता, तथा जोड़ा जैतखंभ के निर्माण में सीमेंट के साथ-साथ लकड़ी के उपयोग हेतु राशि स्वीकृत करने की घोषणा की। साथ ही, दिल्ली में संचालित ट्राइबल यूथ हॉस्टल में सीट संख्या बढ़ाकर 200 करने की जानकारी दी और विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु इसका लाभ लेने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने आगामी समय में सभी जिला मुख्यालयों में ‘नालंदा परिसर’ के निर्माण की भी बात कही।

मुख्यमंत्री साय ने बैठक के दौरान प्राधिकरण मद से स्वीकृत कार्यों के वर्षों से लंबित रहने पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि भले ही प्राधिकरण के कार्यों की राशि कम हो, लेकिन उनका सामाजिक महत्व अत्यंत बड़ा है। इन कार्यों का समय पर पूर्ण न होना चिंता का विषय है।

बैठक को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में अनुसूचित जाति समाज के उत्थान के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की सोच समाज के वंचित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में स्पष्ट है। उन्होंने सभी लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए और सभी समाज को साथ लेकर छत्तीसगढ़ के समग्र विकास का संकल्प दोहराया।

अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष गुरु खुशवंत साहेब ने मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में समाज के विकास के लिए किए जा रहे कार्यों हेतु आभार प्रकट किया। उन्होंने गिरौधपुरी धाम में रोपवे निर्माण, मेला आयोजन के दौरान बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, जोक नदी के पास स्नान हेतु आवश्यक व्यवस्था, ठहरने की सुविधा, जोड़ा जैतखंभ में लकड़ी के उपयोग, बाराडेरा धाम में ऐतिहासिक तालाब का संरक्षण और सौंदर्यीकरण, विद्यार्थियों के लिए स्मार्ट क्लास की व्यवस्था जैसी मांगें बैठक में रखीं। उन्होंने बजट वृद्धि और मांगों की स्वीकृति के लिए भी आभार व्यक्त किया।

बैठक में प्राधिकरण के स्वरूप, कार्यक्षेत्र, अनुमोदित कार्यों की समीक्षा, बजट प्रावधानों की जानकारी, एवं वित्तीय वर्ष 2020 से 2025 तक स्वीकृत कार्यों की प्रगति सहित नागरिक सुविधाओं, सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों, और शैक्षणिक सुविधा विस्तार जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं प्राधिकरण सदस्यों के प्रस्तावों के आधार पर 49 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के विकास एवं हितग्राही मूलक कार्यों का अनुमोदन किया गया।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव, उपाध्यक्ष गुरु खुशवंत साहेब, मंत्री दयाल दास बघेल, लखन लाल देवांगन, लक्ष्मी राजवाड़े, टंकराम वर्मा, सांसद कमलेश जांगड़े, विधायक पुन्नूलाल मोहले, डोमनलाल कोर्सेवाड़ा, दिलीप लहरिया, शेषराज हरवंश, उतरी गणपत जांगड़े, कविता प्राण लहरे, हर्षिता स्वामी बघेल सहित रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग संभाग के आयुक्त, आईजी, एवं 17 जिलों के कलेक्टर उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि अनुसूचित जाति प्राधिकरण का कार्यक्षेत्र संपूर्ण राज्य है जिसमें प्रदेश के 17 अनुसूचित जाति बाहुल्य जिले – जांजगीर-चांपा, सक्ती, बिलासपुर, मुंगेली, रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, गरियाबंद, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़, दुर्ग, बेमेतरा, बालोद, महासमुंद, राजनांदगांव, खैरागढ़ सहित अन्य वे जिले भी शामिल हैं, जिनमें अनुसूचित जाति जनसंख्या 25 प्रतिशत से अधिक है।

बैठक में जांजगीर-चांपा जिला पंचायत अध्यक्ष सत्यलता आनंद मिरी, बिलासपुर से राजेश सूर्यवंशी, गरियाबंद से गौरीशंकर कश्यप, अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद एवं बसव राजू, पुलिस महानिदेशक अरुणदेव गौतम, विभागीय सचिव शहला निगार, रोहित यादव, कमलप्रीत सिंह, रीना बाबा साहेब कंगाले, आर. प्रसन्ना, शम्मी आबिदी सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय बनेगा आदिवासियों के गौरव, शौर्य एवं बलिदान का प्रतीक

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रायपुर। आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने आज नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के समीप बन रहे आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर आधारित शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय प्रदेश का पहला संग्रहालय है, जो छत्तीसगढ़ के आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के अदम्य शौर्य एवं बलिदान को समर्पित है। इसके निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। संग्रहालय का निर्माण 30 सितंबर तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने समीक्षा के दौरान इसके सभी गैलरियों में और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक सुझाव दिए और समय-सीमा में कार्य संपन्न करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संग्रहालय के निर्माण में लगने वाली प्रत्येक सामग्री उच्च गुणवत्तायुक्त एवं मानकीकृत हो। उन्होंने मध्यप्रदेश, ओडीशा एवं झारखंड राज्य में निर्मित संग्रहालयों का भी अवलोकन कर इसकी विशेषताओं का अध्ययन करने को कहा। जिससे इस संग्रहालय में सभी आधारभूत विषयों एवं ऐतिहासिक तथ्यों विशेष रूप से ध्यान दिया जा सके।

उल्लेखनीय है कि शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय में स्वतंत्रता आंदोलन के समय छत्तीसगढ़ में हुए विभिन्न आदिवासी विद्रोहों जैसे- हल्बा विद्रोह, सरगुजा विद्रोह, भोपालपट्टनम विद्रोह, परलकोट विद्रोह, तारापुर विद्रोह, लिंगागिरी विद्रोह, कोई विद्रोह, मेरिया विद्रोह, मुरिया विद्रोह, रानी चौरिस विद्रोह, भूमकाल विद्रोह, सोनाखान विद्रोह, झण्डा सत्याग्रह एवं जंगल सत्याग्रह के वीर आदिवासी नायकों के संघर्ष एवं शौर्य के दृश्य का जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है।

बैठक में टीआरटीआई के संचालक जगदीश कुमार सोनकर, उपसचिव बी.के.राजपूत, उपायुक्त श्रीमती गायत्री नेताम, कार्यपालन यंत्री त्रिदीप चक्रवर्ती, सहित इंजीनियर्स एवं अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।


मंत्रिपरिषद के निर्णय : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां सिविल लाईन स्थित उनके निवास कार्यालय में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए -

मंत्रिपरिषद ने अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति सूची में तकनीकी कारणों से शामिल होने से वंचित जातियों को प्राप्त होने वाली कतिपय सुविधाएं के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए डिहारी कोरवा, बघेल क्षत्री, संसारी उरांव तथा पबिया, पविया, पवीया समाज के विद्यार्थियों को अनुसूचित जनजाति के समतुल्य एवं डोमरा जाति के विद्यार्थियों को अनुसूचित जाति के समतुल्य राज्य मद से मात्र राज्य छात्रवृत्ति तथा शिष्यवृत्ति प्रदान किये जाने एवं छात्रावास-आश्रमों में स्वीकृत सीट के अधीन प्रवेश दिए जाने की सुविधा प्रदान करने की सहमति दी है।

मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ में अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने और बिजली उपभोक्ताओं को आर्थिक लाभ पहुँचाने के लिए प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना अंतर्गत घर की छतों में सोलर रूफटॉप संयंत्र की स्थापना में राज्य शासन द्वारा उपभोक्ताओं को वित्तीय सहायता दिए जाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के माध्यम से पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत घरेलू उपभोक्ताओं के घरों पर सोलर रूफटॉप संयंत्र लगाने पर केंद्रीय वित्तीय सहायता के साथ-साथ राज्य की ओर से अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी दी जाएगी, जो सोलर प्लांट की क्षमता (1 किलोवाट, 2 किलोवाट, 3 किलोवाट और उससे अधिक) के आधार पर अलग-अलग होगी। उदाहरण के लिए, 1 किलोवाट प्लांट के लिए कुल 45,000 रूपए, (30,000 रूपए केंद्रीय और 15,000 रूपए राज्य सहायता) जबकि 3 किलोवाट या उससे अधिक के प्लांट के लिए 1,08,000 रूपए (78,000 रूपए केंद्रीय और 30,000 रूपए राज्य सहायता) की मदद मिलेगी। हाउसिंग सोसाइटी/रेसिडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशन के लिए भी इसी तरह की सहायता प्रस्तावित की गई है। यह अनुदान राशि CSPDCL को अग्रिम रूप से मिलेगी और वही इसे लाभार्थियों को देगी। वर्ष 2025-26 में 60,000 और 2026-27 में 70,000 सोलर पावर प्लांट की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। इससे वित्तीय वर्ष 2025-26 में 180 करोड़ एवं 2026-27 में 210 करोड़ रूपए का वित्तीय भार आएगा।

CSPDCL इस योजना की कार्यान्वयन एजेंसी होगी और नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE), भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार इसे लागू करेगी। कंपनी इस योजना के संचालन के लिए एक अलग बैंक खाता खोलेगी, जिसमें सब्सिडी की राशि रखी जाएगी और उसका हिसाब-किताब किया जाएगा। राज्य वित्तीय सहायता उन घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता से दी जाएगी जिनके सोलर प्लांट का ग्रिड सिंक्रोनाइजेशन 1 अप्रैल 2025 या उसके बाद हुआ है।

मंत्रिपरिषद ने राज्य में वन्यजीव, खासकर बाघों के संरक्षण और ईको-पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘‘छत्तीसगढ़ टाइगर फाउंडेशन सोसायटी‘‘ का गठन करने का निर्णय लिया है। यह सोसायटी वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत काम करेगी। मध्य प्रदेश में यह 1996 से संचालित है। इसका मुख्य लक्ष्य

छत्तीसगढ़ में लगातार घट रही बाघों की आबादी (फिलहाल लगभग 18-20) को बचाना है। यह संस्था स्व-वित्तपोषित होगी, जिससे सरकारी खजाने पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। यह सहयोग देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं से फंड जुटाएगी।

यह सोसायटी बाघों और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों में सीधे शामिल होगी। यह स्थानीय समुदाय की भागीदारी से ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देगी, जिससे न केवल पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार और आय के अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही, यह पर्यावरणीय शिक्षा, अनुसंधान और प्रशिक्षण को प्रोत्साहित करेगी, जिससे भविष्य के संरक्षणवादी तैयार होंगे। इस पहल से संरक्षण के लिए बाहरी धन, विशेषज्ञता और संसाधन मिलेंगे, जिससे स्थानीय समुदायों को रोज़गार के नए अवसर मिलेंगे और राज्य का पर्यावरणीय संतुलन बना रहेगा।

यह छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगी, जो जैव विविधता की रक्षा के साथ-साथ ईको-टूरिज्म को भी मजबूत आधार देगी।

मंत्रिपरिषद द्वारा अशासकीय अनुदान प्राप्त शिक्षण संस्था ‘‘रामकृष्ण मिशन आश्रम नारायणपुर की सहयोगी संस्था ‘‘विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल हेल्थ वेलफेयर एवं सेवायें, छत्तीसगढ़ (विश्वास)‘‘ को रामकृष्ण मिशन आश्रम नारायणपुर में अंतर्भूत (मर्ज) करने का अनुमोदन किया गया।

उद्यानिकी महाविद्यालय (उद्यानिकी विश्वविद्यालय) की स्थापना के लिए बेमेतरा जिले के साजा तहसील अंतर्गत बेलगांव में राजगामी संपदा की 94.290 हेक्टेयर भूमि में से 100 एकड़ भूमि उद्यानिकी विभाग को निःशुल्क प्रदान करने का निर्णय लिया गया।

जशपुर जिले में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा हर्बल व महुआ चाय जैसे पारंपरिक उत्पाद ‘JashPure’ ब्रांड के तहत तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने और विपणन को बढ़ावा देने हेतु इस ब्रांड को राज्य शासन अथवा CSIDC को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव का मंत्री परिषद ने अनुमोदन किया है।

ब्रांड हस्तांतरण से एग्रो व फूड प्रोसेसिंग इकाइयों को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय कच्चे माल की मांग बढ़ेगी और आदिवासी महिलाओं को  रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे। ट्रेडमार्क हस्तांतरण से राज्य पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।

मंत्रिपरिषद द्वारा शहीद पुलिसकर्मियों के सर्वाेच्च बलिदान को ध्यान में रखते हुए अनुकम्पा नियुक्ति हेतु जारी एकजाई पुनरीक्षित निर्देश-2013 की कंडिका 13 (3) में संशोधन करते हुए निर्णय लिया है कि - नक्सली हिंसा में शहीद पुलिस सेवकों के प्रकरण में उनके परिवार के किसी भी पात्र सदस्य (महिला या पुरूष) को विकल्प के आधार पर पुलिस विभाग के अलावा, किसी अन्य विभाग में, राज्य के किसी भी जिला, संभाग में अनुकम्पा नियुक्ति दी जा सकेगी। पहले अनुकम्पा नियुक्ति यथासंभव उसी विभाग या कार्यालय में देने की व्यवस्था थी, जिसमें दिवंगत शासकीय सेवक निधन के पूर्व कार्यरत था।

मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में गौण खनिजों के सुव्यवस्थित अन्वेषण, पूर्वेक्षण एवं अधोसंरचना के विकास के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ‘‘स्टेट मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट‘‘ (एसएमईटी) के गठन की अधिसूचना के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में स्टेट मिनिरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट के तहत समस्त गौण खनिजों से प्राप्त होने वाली रायल्टी 2 प्रतिशत राशि अतिरिक्त रूप से एसएमईटी फंड में जमा की जाएगी। जिसका उपयोग गौण खनिजों के अन्वेषण, अधोसंरचना विकास में उच्च तकनीकों का उपयोग, इन्फॉर्मेशन सिस्टिम, लॉजिस्टिक सपोर्ट, मानव संसाधनों के उन्नयन आदि में किया जा सकेगा। भारत सरकार के नेशनल मिनिरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट की तर्ज पर राज्य में स्टेट मिनिरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट का गठन किया जाएगा।

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान की राज्य स्तरीय समिति की बैठक सम्पन्न

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रायपुर। मुख्य सचिव अमिताभ जैन की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान की राज्य स्तरीय समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव जैन ने जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान योजना के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने अपनी विभागीय योजनाओं के अंतर्गत ग्राम उत्कर्ष अभियान में शामिल गतिविधियों की जानकारी प्रस्तुत की। बैठक में अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि योजना अंतर्गत शामिल कार्यों के संबंध में स्वीकृत करीब 25 गतिविधियों को संबंधित विभागों द्वारा जिला एवं ग्रामवार चिन्हांकन किया गया है।


धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार द्वारा सामाजिक बुनियादी ढांचे में स्वास्थ्य, शिक्षा एवं आजीविका के महत्वपूर्ण अंतराल को समाप्त करना है। अधिकारियों ने बताया कि केन्द्र सरकार ने जनजातीय समुदायों के समग्र विकास और उनके जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसी क्रम में 2 अक्टूबर 2024 से धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान की शुरुआत की गई है। बैठक में गैप ऐनालिसिस के आधार पर स्वीकृत गतिविधियों के प्रस्ताव तैयार करने तथा भारत सरकार को प्रेषित करने की स्थिति की जानकारी दी गई। इसी तरह से भारत सरकार से संबंधित मंत्रालय द्वारा प्रेषित प्रस्ताव पर स्वीकृति अनुसार लक्ष्य तथा स्वीकृत राशि की जानकारी के संबंध में अधिकारियों ने जानकारी दी। इसी तरह से अभियान के अंतर्गत संबंधित विभागों के नोडल अधिकारियों के नामांकन की भी जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष योजना के अंतर्गत आईपीसी कैम्पेन की योजना तैयार की जा रही है।

मुख्य सचिव ने पीएमजनमन के कार्यों की भी समीक्षा की

मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने प्रधानमंत्री आदिवासी नया महाअभियान (पीएमजनमन) के अंतर्गत राज्य में किए जा रहे विभिन्न विभागों के कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने आवास गतिविधि के अंतर्गत जिला एवं बसाहटवार स्वीकृत आवास निर्माण की पूर्णता की स्थिति तथा बसाहटों में आवास उपलब्धता की स्थिति की समीक्षा की। सम्पर्क सड़कों के अंतर्गत स्वीकृत सड़क निर्माण की पूर्णता की वर्तमान स्थिति तथा बसाहटों में आवास उपलब्धता के आधार सेचुरेशन की स्थिति की समीक्षा की गई। इसी तरह से नलजल योजना, विद्युतीकृत घरों, वन धन विकास केन्द्र और जिलेवार पीबीटीजी बसाहटों में चिन्हांकन, व्यक्तियों के कौशल विकास प्रशिक्षण के संबंध में अधिकारियों से जानकारी ली। इसी तरह से पीएमजनमन योजना के तहत जिलेवार पीबीटीजी बसाहटों हेतु निर्धारित लक्ष्य के विरूद्ध स्वीकृत छात्रावास निर्माण कार्यों को प्रारंभ करने और छात्रावास भवनों की अद्यतन स्थिति के बारे में विभागीय अधिकारियों से जानकारी ली गई।

बैठक में कृषि विभाग की सचिव श्रीमती शहला निगार, खाद्य विभाग की सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, ऊर्जा, क्रेडा, स्कूल शिक्षा, वन, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, कौशल विकास, सूचना एवं प्रौद्योगिकी, पर्यटन सहित अन्य विभागों के अधिकारी शामिल थे।

जनजातीय गौरव दिवस पर 14 और 15 नवम्बर को संगोष्ठी-परिचर्चा का होगा आयोजन

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रायपुर। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भगवान बिरसा मुण्डा जी के जन्म दिवस के अवसर पर आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग एवं आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष्य में 14 एवं 15 नवंबर को दो दिवसीय कार्यक्रम संगोष्ठी-परिचर्चा का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम राजधानी रायपुर के साईंस कॉलेज मैदान में आयोजित होगा।

जनजातीय गौरव दिवस जिसमें जनजातीय संस्कृति, संरक्षण, संवर्धन एवं विकास, जनजातीय विधार्थियों के करियर निर्माण संबंधी विभिन्न संभावनाएं, भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष में जनजातीय नायकों का योगदान, जनजातीय समुदायों के युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां, भारतीय सभ्यता के मूल में जनजातीय समाज, जनजातीय ज्ञान परम्परा, जनजातीय समुदाय पर्यावरण संरक्षण वैश्विक परिपेक्ष में, जनजातीय चित्रकला के प्रायोगिक पक्ष एवं संभावना, वन अधिकार अधिनियम, क्रियान्वयन एवं चुनौतियाँ, जनजातीय क्षेत्रों में चुनौतियां और समाधान विषयों को सम्मिलित किया गया है, जिसमें जनजातीय अनुसंधान क्षेत्र के विशिष्ट विषय विशेषज्ञों के साथ-साथ अन्य अनुसंधानकर्ताओं, शोधकर्ताओं, छात्रों एवं विषय पर रूची रखने वाले बुद्धिजीवियों से विचार विमर्श किया जावेगा। प्रतियोगिता से संबंधित अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए सुश्री पार्वती जगत, सहायक अनुसंधान अधिकारी (मो. नं. +91-7805982502) एवं श्रीमती अनिता डेकाटे, सहायक अनुसंधान अधिकारी (मो.नं. +91-9893674509) से संपर्क किया जा सकता है।

महासमुंद : छात्रावासी बच्चों को ट्रैक शूट और जूता का वितरण किया गया

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महासमुंद। आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के द्वारा जिला मुख्यालय में संचालित प्री मेट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास महासमुंद में छात्रावासी बच्चों के दिवाली त्यौहार के पूर्व अधीक्षक के द्वारा ट्रैक शूट और जूता का वितरण किया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार विभाग के द्वारा संचालित प्री मेट्रिक छात्रावास और आश्रमों में प्रतिवर्ष छात्रावासी बच्चों को शिष्यवृत्ति की बच्चा राशि के कॉपी, किताब, पेन, स्कूल बैग, जूता, मोजा, ट्रैकशूट आदि आवश्यक चीजें प्रदाय करने का पिछले वर्ष से प्रावधान है, जिसके अंतर्गत पूरे सत्र के दौरान बीच में बीच में बचत राशि के अनुसार सामग्री का वितरण किया जाना होता है। शासन की इस निर्देश के पालन में प्री मेट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास महासमुंद के बच्चों को संस्था के अधीक्षक मदन कुमार चौधरी के द्वारा दीवाली के पूर्व जूता मोजा और ट्रैक शूट का वितरण किया गया।

छात्रावासी में दूरस्थ पिछड़े अंचलों के बच्चे आकर निवास करते है और यही रहकर आसपास की स्कूलों में अपना शिक्षा प्राप्त करते है, ऐसे में बच्चों को छात्रावास में रहने खाने के साथ ही साथ इस तरह आवश्यकता की सामग्री भी मिलने से आजकल सभी छात्रावासी बच्चों में सकारात्मक विचार बने रहते है साथ ही छात्रावास में रहकर अच्छी पढ़ाई करने की प्रेरणा भी प्राप्त होती है। प्री मेट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास महासमुंद के अधीक्षक के द्वारा प्रतिदिन शाम को बच्चों की सामान्य ज्ञान संबंधी जानकारी भी दी जाती है।

वन अधिकार अधिनियम के बेहतर क्रियान्वयन हेतु आदिम जाति विकास विभाग और एनजीओ एटीआरईई के मध्य एम.ओ.यू.

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में वन अधिकार अधिनियम-2006 के बेहतर  कियान्वयन हेतु आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विभाग और स्वयं सेवी संस्था अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी एण्ड एनवायरोमेंट (एटीआरईई) के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) हुआ है। विभागीय मंत्री रामविचार नेताम एवं विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की उपस्थिति में एटीआरईई के प्रतिनिधि डॉ. शरतचंद्र लेले एवं विभाग की ओर से सचिव सह आयुक्त नरेन्द्र कुमार दुग्गा ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। एमओयू का कार्यक्रम मंत्रालय महानदी भवन में सम्पन्न हुआ।

इस मौके पर मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि यह समझौता वन अधिकार अधिनियम-2006 के उचित अनुपालन में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (सीएफआरआर), सीएफआर प्रबंधन एवं वन अधिकार पत्रों के आनॅलाइन डिजिटाइजेशन के संबंध में जमीनी स्तर पर अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अब इस समझौते के माध्यम से एफआरए अधिनियम के उचित क्रियान्वयन  में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि वन अधिकार अधिनियम केन्द्र एवं राज्य शासन की एक महत्वाकांक्षी योजना है। अतः इसके उचित कियान्वयन में सबका समन्वित प्रयास अत्यंत आवश्यक है।

इस समझौते के माध्यम से सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (सीएफआरआर) प्रकरणों में त्रुटियों की पहचान और समाधान करने के लिए विभाग को जमीनी स्तर के अनुभव के आधार पर सलाह प्रदाय करेगा। इसके अलावा विभाग द्वारा विकसित किये जाने वाले एफआरए एटलस के लिए एटीआरईई के द्वारा जिला स्तरीय सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (सीएफआरआर) संभावित ग्रामों का मानचित्र एवं डाटा भी प्रदाय किया जाएगा। साथ ही विभाग द्वारा (सीएफआरआर) के अंतर्गत परंपरागत सीमा के संबंध में विकसित किये जा रहे भौगोलिक सूचना प्रणाली (वेबजीआईएस) के पोर्टल के लिए आवश्यकतानुसार तकनीकी सलाह भी प्रदाय करेगा। इसके अलावा सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन और गौण वनोपज आधारित आजीविका वृद्धि की सुविधा के लिए नीतियों और कार्यक्रमों में सुधार पर विभाग को सुझाव देगा। साथ ही अन्य राज्यों के क्षेत्रीय अनुभव और उत्तम पहल के आधार पर सीआरएफ प्रबंधन के क्रियान्वयन के लिए संस्थागत व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने के उपायो के संबंध में भी विभाग को सुझाव प्रदान करेगा।

जीवन में तरक्की के साथ-साथ प्रकृति से जुड़ के रहना जरूरी : सोनमणि बोरा

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रायपुर। आदिम जाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग तथा अल्प संख्यक विकास विभाग के प्रमुख सचिव एवं जांजगीर-चांपा जिले के प्रभारी सचिव सोनमणि बोरा ने छात्रावास-आश्रम व पीएम स्वामी आत्मानंद स्कूल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। प्रभारी सचिव बोरा ने निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में तरक्की के साथ-साथ प्रकृति से जुड़ के रहना जरूरी है। प्रकृति से जुड़े रहने से मन शांत और एकाग्र रहता है।

जिले के प्रभारी सचिव ने कहा कि छात्रों को बेहतर शैक्षिक वातावरण मिले और सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों। उन्होंने छात्रावासों में बिजली, पानी और अन्य जरूरी संसाधनों की पर्याप्त आपूर्ति के लिए भी विशेष ध्यान देने संबंधितों को निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने छात्रावासों की व्यवस्था, स्वच्छता और छात्रों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया। बोरा ने छात्रावास में रहने वाले छात्रों से भी चर्चा की। उन्होंने बच्चों को नियमित योगाभ्यास करने कहा।

पीएम स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय के विद्यार्थियों से चर्चा करते हुए जिले के प्रभारी सचिव बोरा ने कहा कि अपने विषय की तैयारी लक्ष्य बनाकर करें। इससे संबंधित विषय को लेकर बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने जिले में चलाये जा रहें उत्कृष्ट जांजगीर-चांपा अभियान को लेकर शिक्षकों और विद्यार्थियों से चर्चा की और बोलेगा बचपन, पढ़ाई का कोना अभियान की सराहना भी की। उन्होंने बारहवीं के विद्यार्थियों से कहा कि शिक्षा में लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ने से आप सफलता की ओर बढ़ सकते हैं। इसके लिए आपको लक्ष्य बनाने से आपको मोटिवेशन मिलता है। उन्होंने कहा कि आपके पास अभी जो समय है उसका सही तरीके से उपयोग करें। लक्ष्य बनाकर मेहनत करते हुए आगे बढ़ने से सफलता प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन के लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं। बच्चों ने अपने हाथों से बनायें ग्रीटिंग भी जिले के प्रभारी सचिव बोरा को भेंट किये, जिन्हे देखकर उन्होंने बच्चों की सराहना की। इस अवसर पर उन्होंने जाति प्रमाण पत्र का वितरण भी किया।

प्रमुख सचिव बोरा ने राहौद के शासकीय नवीन प्री मैट्रिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास का निरीक्षण कर छात्रवास के बच्चों से खेल कूद मनोरंजन एवं पढ़ाई से संबंधित सवाल जवाब किये। उन्होंने एसडीएम तहसीलदार को समय-समय पर छात्रावास का निरीक्षण करने तथा बच्चों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्य को तत्काल पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने छात्रावास में बागवानी एवं फल-सब्जी भी लगाने कहा। इस मौके पर कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक विवेक शुक्ला, सहायक कलेक्टर दुर्गा प्रसाद अधिकारी उपस्थित थे।

रायपुर में खुलेंगे सिविल सर्विस के टॉप कोचिंग इंस्टीट्यूट, आदिम जाति विभाग ने की पहल

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रायपुर : देश के सिविल सर्विस के टॉप कोचिंग इंस्टीट्यूट अब रायपुर में अपनी शाखा खोलेंगे, जिससे राज्य के अनुसूचित जाति, जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को दिल्ली के अलावा रायपुर में भी उच्च स्तरीय कोचिंग की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इसके लिए आदिम जाति विकास विभाग ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने दिल्ली के ट्राइबल यूथ हॉस्टल का दौरा कर  छात्रों से मुलाक़ात किया। इस दौरान उन्होंने कोचिंग इंस्टीट्यूट्स के प्रतिनिधियों से बात की। इन संस्थानों के छात्रों को प्रदान की जा रही सुविधाओं और पठन-पाठन के तरीकों के बारे में जानकारी प्राप्त की। साथ ही,  उन्होंने रायपुर में इन कोचिंग इंस्टीट्यूट्स की शाखाएं खोलने के विषय पर भी चर्चा की।  प्रमुख सचिव ने पूछा कि यदि रायपुर में उनकी शाखाएं खोली जाती हैं, तो उन्हें शासन से किस प्रकार की मदद चाहिए होगी। इस संबंध में कोचिंग संस्थानों को एक हफ्ते में अपनी रिपोर्ट विभाग को प्रेषित करने को कहा है।

 बोरा ने ट्राइबल यूथ हॉस्टल दिल्ली के छात्रों से उनकी शिक्षा और करियर संबंधी विभिन्न बातों पर चर्चा की और उनकी समस्याओं को सुनकर समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया। इस दौरान उन्होंने छात्रों की सुविधाओं को और बेहतर बनाने पर जोर दिया, ताकि वे बिना किसी व्यवधान के अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें।  सोनमणि बोरा ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां भी आवश्यक हो, वहां पर एयर कंडीशनर लगाए जाएं। इसके साथ ही उन्होंने मेस को सुव्यवस्थित ढंग से तैयार करने और हॉल में तत्काल एसी टीवी लगाने के भी निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होने दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा दिये गए निर्देशों के पालन की जानकारी ली।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि ‘विद्यार्थियों को गुणवत्ता पूर्ण कोचिंग सुविधा के साथ-साथ बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी है। रायपुर में कोचिंग इंस्टीट्यूट खुलने से अनुकूल वातावरण में विद्यार्थी बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे।‘

वहीं, आदिम जाति और अनुसूचित जनजाति मंत्री  राम विचार नेताम ने कहा, "हमारी सरकार शिक्षा के महत्व को समझती है और हम चाहते हैं कि हमारे आदिवासी और अनुसूचित जाति के विद्यार्थी भी सर्वोत्तम शिक्षा और सुविधाओं का लाभ उठाएं। यह योजना उनके भविष्य को उज्ज्वल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होने कहा सिर्फ सिलेबस पढ़ना महत्वपूर्ण नहीं है, जरूरी है अनुकूल वातावरण मिले जिससे बच्चे परीक्षा के मानसिक तौर पर तैयार हो सकें। इसी सोच के साथ रायपुर में कोचिंग शुरू की जा रही है। रायपुर में तैयारी के बाद विद्यार्थी चाहे तो तैयारी के लिए दिल्ली जा सकते हैं।

प्रमुख सचिव ने बताया कि मुख्यमंत्री और विभाग के मंत्री  राम विचार नेताम के निर्देश पर दिल्ली के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी देश के प्रतिष्ठित सिविल सर्विस कोचिंग इंस्टीट्यूट की शाखाएं खोलने पर कार्ययोजना तैयार की गई है। राज्य सरकार की इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और कोचिंग प्रदान करके उनके करियर को संवारना है। दिल्ली के प्रमुख कोचिंग इंस्टीट्यूट्स की रायपुर में शाखाएं खोलने से विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।


नैसर्गिक कोसा से दो लाख से अधिक लोगों को रोजगार

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व और ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रुद्रकुमार के निर्देशन में विगत पौने पांच साल में रेशम प्रभाग ने दो लाख से लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है। रेशम प्रभाग में संचालित नैसर्गिक टसर बीज प्रगुणन एवं संग्रहण कार्यक्रम अंतर्गत 2 लाख 5 हजार 565 लोगों को नियमित रोजगार मिला है। इस योजना अंतर्गत 6386.56 लाख नग नैसर्गिक टसर का ककून का उत्पादन किया गया है।

जिससे एक लाख 9 हजार 856 अनुसूचित जनजाति और 19 हजार 196 अनुसूचित जाति के लोगों को रोजगार मिला है। राज्य के दंतेवाड़ा, जगदलपुर (बस्तर), उत्तर बस्तर के तहत कोण्डागांव, नारायणपुर, कांकेर तथा धमतरी, रायपुर, राजनांदगांव, कबीरधाम, दुर्ग, कोरबा, जशपुर, कोरिया जिला वनों से आच्छादित क्षेत्र है। इन सभी जिलों में मूलतः अनुसूचित जाति, जनजाति के परिवार निवास करते है जो कि समाज की मुख्य धारा से जुड़े गए हैं। इन लोगों को शासन द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से स्वरोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर रेशम पालन को कृषि का दर्जा मिला है। इससे रेशम पालन को बढ़ावा मिलेगा। वनांचल के सभी जिलों में नैसर्गिक कोसा उत्पादन के संग्रहण के माध्यम से अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों द्वारा आर्थिक लाभ अर्जित किया जा रहा है। इस दिशा में ग्रामोद्योग संचालनालय द्वारा प्राकृतिक वन क्षेत्रों में नैसर्गिक बीज का प्रगुणन कर उसे सघन वन क्षेत्रों में फैलाया जाता है, जिससे वनवासी हितग्राहियों द्वारा नैसर्गिक कोसा संग्रहण कर आय का एक अतिरिक्त साधन प्राप्त कर सकंे। इस क्षेत्र में निवासरत् परिवार मूलतः वनों पर आधारित उपज का विपणन कर अपना जीविकोपार्जन करते हैं। उक्त सभी जिलों के वन खण्डों में प्राकृतिक रूप से साल, साजा, सेन्हा, धौरा, बेर के वृक्ष प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। इन वृक्षों में टसर कोसा की रैली, लरिया एवं बरफ प्रजाति के कोसाफल नैसर्गिक रूप से उत्पादित होते हैं।

अनुसूचित जाति वर्ग के युवतियों को मिलेगा गारमेंट मेकिंग में निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण

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रायपुर। जिला प्रशासन के अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति द्वारा अनुसूचित जाति वर्ग की युवतियों के कौशल विकास के लिए पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय परिसर के अंत्यावसायी व्यवसायिक प्रशिक्षण केन्द्र में गारमेंट मेकिंग ट्रेड में निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के लिए अनुसूचित जाति वर्ग की युवतियां जिनकी आयु 18 से 45 वर्ष के बीच हो, न्यूनतम 8वीं कक्षा पास हो और जिनकी वार्षिक आय 1 लाख पचास हजार रुपए से अधिक न हो वे आवेदन कर सकती हैं।

अंत्यवसायी सहकारी विकास समिति के कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि प्रशिक्षण के लिए आवेदिका 15 सितम्बर 2023 तक कलेक्टर परिसर के जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति के कार्यालय, कक्ष क्रमांक-34 में सुबह 10 बजे से शाम 5 तक आवेदन प्राप्त कर जमा कर सकते है। अधिक जानकारी हेतु कार्यालय के दूरभाष क्रमांक 0771-4915063 एवं मोबाईल नम्बर 7247463357 पर सम्पर्क कर सकते है।

शासकीय योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ दिलाना शासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता : मोहन मरकाम

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रायपुर। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग एवं मनेंद्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी जिले के प्रभारी मंत्री मोहन मरकाम ने शनिवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन हेतु आवश्यक दिशा निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि सरकार की जनहितैषी योजनाआंे का लाभ सभी को मिले। जनता को किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होनी चाहिए।

समीक्षा बैठक जिले के प्रभारी मंत्री मोहन मरकाम ने कहा कि मुख्यमंत्री बघेल के मंशानुसार व्यक्तिगत वनाधिकार पत्र धारियों को मनरेगा के अंतर्गत भूमि समतलीकरण व अन्य कार्य प्राथमिकता से स्वीकृत किया जा रहा है। इससे वनाधिकार पत्र धारी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रहे हैं। किसी भी कारण से अस्वीकृत वनाधिकार पत्रों को फिर से रिव्यू किया जाए और पात्र हितग्राहियों को वनाधिकार पत्र वितरित करने के निर्देश दिए। इसी तरह राजस्व विभाग के लंबित प्रकरणों का तत्काल निराकरण किया जाए। उन्होंने नगरीय निकाय क्षेत्रों में जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित कर लोगों की समस्याओं का निराकरण करने के निर्देश दिए।

बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों को यथाशीघ्र पूर्ण करने को कहा। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा करते हुए प्रभारी मंत्री ने मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लीनिक योजना के सम्बन्ध में जनता के बीच प्रतिक्रिया से अवगत होते हुए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारी से जिले में खाद-बीज की उपलब्धता की जानकारी ली। खाद्य बीज की काला बाजारी को रोकने के लिए सतत् रूप से दुकानों का निरीक्षण करने के निर्देश दिये। उन्होंने उप संचालक कृषि को राजीव गांधी किसान न्याय योजना तथा अन्य योजनाओं से अधिक से अधिक कृषकों को लाभान्वित करने को कहा।

गोधन न्याय योजना की समीक्षा करते हुए मरकाम ने जिले के गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट उत्पाद व गौठानों में कार्यरत स्व.-सहायता समूहों की जानकारी ली तथा अधिक से अधिक महिला स्व-सहायता समूह को जोड़ने के निर्देश दिये। इसी तरह जिले मे रीपा अंतर्गत संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी लेते हुए क्षेत्र की महिलाओं और युवाओं को अधिक से अधिक स्व-रोजगार से जोड़ने को कहा। शिक्षा विभाग की समीक्षा करते हुए प्रभारी मंत्री ने मुख्यमंत्री शाला जतन योजना के अंतर्गत मरम्मत व अन्य प्रगतिरत निर्माण कार्यों को गुणवत्तापूर्ण और शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिये। उन्होनें स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी एवं हिन्दी माध्यम स्कूलों में प्रवेशित छात्र-छात्राओं की जानकारी ली।

मरकाम ने कहा कि सरकार की मंशानुरूप ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ सकें। उन्होंनेे लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अंतर्गत चल रहे जल जीवन मिशन के कार्यों को गुणवत्तापूर्ण यथाशीघ्र पूरा करने को कहा। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति हो सकेगी। मरकाम ने कहा कि सड़कें विकास की जीवन रेखा होती है, सड़कों का नियमित रूप से मरम्मत व नवीनीकरण का कार्य करने के निर्देश लोक निर्माण विभाग व प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधिकारियों को दिये।

बैठक में उन्होंने जिला खनिज संस्थान न्यास योजना के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों की जानकारी ली। इस मद की राशि का उपयोग आवश्यकता के अनुरूप प्राथमिकता के आधार पर जिले के विकास कार्यों में करने को कहा। उन्होंने आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावास -आश्रमों के संबंध में जानकारी लेते हुए कहा की कन्या छात्रावासों-आश्रमों में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दें। इस बात का ध्यान रखें कि कोई भी अनाधिकृत व्यक्ति छात्रावास परिसर में प्रवेश ना कर सके। इसी प्रकार प्रभारी मंत्री ने अन्य विभागों की गहन समीक्षा करते हुए जिला स्तरीय अधिकारियों को शासन की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ आमजनो तक पहुंचाने हेतु आवश्यक दिशा निर्देश दिये।

बैठक में सीजीएमएससी के संचालक एवं मनेंद्रगढ़ विधायक डॉ. विनय जायसवाल, जिला पंचायत के अध्यक्ष श्रीमती रेणुका सिंह, महापौर चिरमिरी श्रीमती कंचन जायसवाल, नगर पालिका परिषद मनेंद्रगढ़ की अध्यक्ष श्रीमती प्रभा पटेल, कलेक्टर नरेंद्र कुमार दुग्गा, पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी, वनमण्डलाधिकारी एलएन पटेल, अपर कलेक्टर अनिल सिदार, निगम आयुक्त सुश्री लवीना पाण्डेय, संयुक्त कलेक्टर व मनेंद्रगढ़ एसडीएम श्रीमती अभिलाषा पैकरा सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।


शासन की योजनाओं का पूर्ण लाभ अंतिम छोर के हितग्राही को मिले - के.पी. खाण्डे

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रायपुर। जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष के.पी. खाण्डे की अध्यक्षता में सर्व विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। उन्होंने जिला सभाकक्ष में आयोजित बैठक में जिला स्तरीय अधिकारियों को अनुसूचित जाति वर्ग के सबन्ध में निर्देशित किया कि शासन की योजनाओं का पूर्ण लाभ अंतिम छोर के हितग्राही को मिले। समाज के लोगों के साथ पूर्वाग्रह से मुक्त होकर उदारता और सद्भावना पूर्वक व्यवहार करें। अध्यक्ष खाण्डे ने अनुसूचित जाति आयोग के गठन, कार्यक्षेत्र और पीड़ितों को न्याय के बारे में सभा को जानकारी दी।

बैठक में आयोग के सचिव बी.एल.बंजारे, स्थानीय विधायक श्रीमती यशोदा वर्मा और कलेक्टर गोपाल वर्मा सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे। बैठक में उपस्थित विधायक श्रीमती यशोदा वर्मा के द्वारा सुझाये गए जानकारियों को विभागों ने संज्ञान में लिया। कलेक्टर ने पुलिस विभाग को निर्देश दिया कि पिपरिया के लापता युवक के मामले में जीरो एफ. आई. आर. दर्ज कर तत्काल जाँच करें।

राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष के.पी. खाण्डे ने अधिकारियों से कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग के लिए शासन द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को मिले यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा इस जाति के लोगों को जागरूक भी किया जाए ताकि वे शासन की योजनाओं का पूरा लाभ उठा सके। अनुसूचित जाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत आर्थिक, मानसिक एवं शारीरिक रुप से पीड़ित हितग्राही को न्याय दिलाने एवं शासन की योजनाओं के तहत उन्हे मिलने वाली सहायता राशि से लाभान्वित किया जाए। उन्होंने कहा कि केसीजी में जातिगत प्रताड़ना का मामला शून्य है, यह सद्भावना की बड़ी बात है।

आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि छात्रावासों में सुरक्षा के दृष्टिकोण से जिले में संचालित सभी महिला छात्रावास में महिला गार्ड की तैनाती होनी चाहिए। बैठक में सहायक आयुक्त ने जिले के छात्रावास की सुविधा, अंतर्जातीय विवाह, पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति एवं शाला आश्रमों की जानकारी तथा विभागीय गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। बैठक में अनुसूचित आयोग के सदस्य संतोष सारथी एवं अन्य प्रतिनिधि सहित बैठक में नव-पदोन्नत अपर कलेक्टर डी. एस. राजपूत, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व रेणुका रात्रे, नोडल दिलीप कुर्रे, सहायक आयुक्त आर.एस. टंडन, डॉ के.वी. राव, डॉ रविशंकर सत्यर्थी, राजकुमार सोलंकी, रविन्द्र मेहरा एवं अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

कंजक्टिवाइटिस की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने स्कूल शिक्षा और आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग को लिखा पत्र

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रायपुर। स्वास्थ्य विभाग ने कंजक्टिवाइटिस की रोकथाम के लिए स्कूल शिक्षा और आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के संचालक को परिपत्र जारी किया है। स्वास्थ्य विभाग ने दोनों विभागों को स्कूलों, छात्रावासों, आवासीय विद्यालयों तथा आश्रम-छात्रावासों में कंजक्टिवाइटिस से बचाव के लिए आवश्यक निर्देश प्रसारित करने को कहा है। स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों को इस संक्रमण के लक्षणों, उपचार और बचाव की जानकारी देने भी कहा है।

संचालक, महामारी नियंत्रण द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग और आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग को जारी परिपत्र में कहा गया है कि राज्य में मौसम के कारण "आँख आने की बीमारी" (कंजक्टिवाइटिस) बढ़ गई है। यह सम्पर्क से फैलने वाली बीमारी है जो सघन रहवासी क्षेत्र में अधिक फैलता है। राज्य में संचालित विद्यालय, आवासीय विद्यालय, आश्रम-छात्रावास एवं छात्रावास में छात्र-छात्राएं समूह में रहते हैं जिनमें यह बीमारी फैल सकती है। उन्होंने दोनों विभागों द्वारा संचालित संस्थाओं में इसकी रोकथाम के लिए आवश्यक निर्देश प्रसारित करने को कहा है।

संचालक, महामारी नियंत्रण ने अपने परिपत्र में कंजक्टिवाइटिस के लक्षणों, उपचार और इससे बचाव के बारे में भी जानकारी दी है। उन्होंने परिपत्र में कहा है कि कंजक्टिवाइटिस आंख की आम बीमारी है जिसे हम आँख आना भी कहते हैं। इस बीमारी में रोगी की आँख लाल हो जाती है, कीचड़ आता है, आँसू आते हैं, चुभन होती है तथा कभी-कभी सूजन भी आ जाती है।

कंजक्टिवाइटिस होने पर एंटीबायोटिक ड्रॉप जैसे जेंटामिसिन (Gentamicine), सिप्रोफ्लॉक्सिन (Ciprofloxacine), मॉक्सीफ्लॉक्सिन (Moxifloxacin) आई ड्रॉप आँखों में छह बार एक-एक बूंद तीन दिनों के लिए मरीज को देना चाहिए। तीन दिनों में आराम न आने पर किसी अन्य बीमारी की संभावना हो सकती है। ऐसे में नेत्र विशेषज्ञ के पास दिखाना उचित होता है। अन्यथा गंभीर स्थिति निर्मित हो सकती है। कंजक्टिवाइटिस की जाँच एवं उपचार की सुविधा चिकित्सा महाविद्यालयों, जिला चिकित्सालयों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में निःशुल्क उपलब्ध है।

कंजक्टिवाइटिस संक्रामक बीमारी है जो सम्पर्क से फैलती है। अतः मरीज को अपनी आँखों को हाथ न लगाने की सलाह देनी चाहिए। रोगी से हाथ मिलाने से बचकर एवं उसकी उपयोग की चीजें अलग कर इस बीमारी के फैलाव को रोका जा सकता है। संक्रमित आँख को देखने से इस बीमारी के फैलने की धारणा केवल भ्रम है। यह बीमारी केवल सम्पर्क से ही फैलती है।

वन अधिकार पत्र के वितरण में लाएं तेजी : मंत्री मरकाम

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रायपुर। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग के मंत्री मोहन मरकाम ने आज जिला कार्यालय बिलासपुर के सभाकक्ष में बिलासपुर संभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर विभागीय कामकाज में प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने वन अधिकार अधिनियम के तहत व्यक्तिगत, सामुदायिक अधिकार पत्र के साथ-साथ ऋण पुस्तिका के वितरण में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों की आजीविका मजबूत करने के लिए मनरेगा और अन्य योजनाओं से उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने कहा। 

मंत्री मरकाम ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशानुरूप अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लोगों को विभागीय योजनाओं से शत प्रतिशत लाभान्वित करना है। उन्होंने इसके लिए समन्वित प्रयास पर जोर दिया। उन्होंने देवस्थल में देवगुड़ी का निर्माण जल्द करने के निर्देश दिए। मरकाम ने 09 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस पर जिला स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर वन अधिकार पत्रों का वृहद पैमाने पर वितरण करने और शिविर लगाकर हितग्राहियों को लाभान्वित करने के निर्देश दिए। मरकाम ने जिलों में आश्रम-छात्रावासों के उचित रखरखाव और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास पर ध्यान देने के निर्देश सहायक आयुक्तों को दिए। बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने कहा।

मंत्री मरकाम ने छात्रावास के मरम्मत कार्याे को प्राथकिता से जल्द पूरा करने  के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसमें किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय और प्रयास आवासीय विद्यालयों की भी समीक्षा की। बैठक में मरम्मत एवं निर्माण कार्य में भौतिक एवं वित्तीय प्रगति, प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना, विशेष केंद्रीय सहायता से अनुसूचित जनजाति उपयोजना की भी प्रगति की समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत स्वीकृत कार्यों की समीक्षा करते हुए मुंगेली और जांजगीर की प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुए इसे जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में सचिव आदिम जाति तथा अनुसूचित जनजाति विभाग डीडी सिंह, आयुक्त श्रीमती शम्मी आबिदी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जिलों के सहायक आयुक्त एवं जनपद पंचायतों के सीईओ मौजूद थे।   

शासन की योजनाओं का लाभ अनुसूचित जाति वर्ग को दिलाएं : अध्यक्ष खाण्डे

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष के. पी. खाण्डे ने आज कोरबा कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में विभागीय अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने अनुसूचित जाति वर्ग के कल्याण के लिए संचालित शासन की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और कहा कि योजनाओं का लाभ पात्र लोगों दिलाना सुनिश्चित करें।

अध्यक्ष खाण्डे ने इस मौके पर आयोग की कार्यप्रणाली और अनुसूचित जाति वर्ग के हितों के संरक्षण के लिए संचालित प्रावधान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस वर्ग के हितों की रक्षा के लिए आयोग प्रतिबद्ध है। आयोग के अध्यक्ष ने सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग अंतर्गत संचालित योजनाओं की समीक्षा करते हुए निर्देशित किया कि छात्रावास, आश्रमों में बच्चों को योजनाओं का लाभ निर्धारित नियमों के अनुसार मिलना चाहिए। अश्पृश्यता निवारण के संबंध में जनजागरूकता तथा अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के हितग्राहियों को शासन द्वारा निर्धारित प्रोत्साहन राशि यथाशीघ्र प्रदान किया जाना चाहिए।

इस मौके पर उन्होंने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज पर नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। बैठक में श्रीकांत कसेर, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग द्वारा शासन की योजनाओं का लाभ अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को प्राथमिकता से दिलाने की बात कही। बैठक में चेतन चंदेल सामाजिक प्रवक्ता, प्रतिनिधि मनीराम जांगड़े, यू. आर. महिलांगे आदि उपस्थित थे।

महासमुंद : ‘हॉस्पिटैलिटी एवं होटल मैनेजमेंट’ प्रशिक्षण हेतु आवेदन की अंतिम तिथि 20 जुलाई

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महासमुंद : अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवक/युवतियों के लिए ‘‘हॉस्पिटैलिटी (गेस्ट शिप) एवं होटल मैनेजमेंट में प्रशिक्षण‘‘ योजनांतर्गत प्रशिक्षण दिया जाएगा। सहायक आयुक्त आदिवासी विकास ने बताया कि वर्ष 2023-24 के लिये हॉस्पिटैलिटी (गेस्ट शिप) एवं होटल मैनेजमेंट में कैरियर बनाने की आकांक्षा रखने वाले प्रदेश के युवक/युवतियों से 20 जुलाई 2023 शाम 05ः00 बजे तक पुनः आवेदन पत्र आमंत्रित किया गया है।


आवेदन पत्र का प्रारूप, नियम तथा शर्ते विभागी की वेबसाइट  http://tribal.cg.gov.in   पर उपलब्ध है। आवेदन पत्र पंजीकृत डाक द्वारा या सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कार्यालय में उपस्थित होकर जमा कर सकते हैं। निर्धारित तिथि एवं समय पश्चात प्राप्त आवेदन-पत्रों पर विचार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण अंतर्गत कुल 100 अभ्यर्थियों को लाभान्वित किया जाएगा। बजट उपलब्धता के आधार पर लक्ष्य परिवर्तनशील होगा। यह प्रशिक्षण पूर्णकालिक होगा एवं प्रशिक्षण अवधि में अन्यत्र किसी नियमित पाठ्यक्रम व नौकरी/व्यवसाय करने की अनुमति नहीं होगी। प्रशिक्षणार्थियों के प्रशिक्षण व्यय विभाग द्वारा वहन किया जाएगा। यह प्रशिक्षण आवासीय है। प्रशिक्षण में छात्रावास एवं मेस की सुविधा भी निःशुल्क होगी। प्रशिक्षण उपरांत प्रशिक्षण देने वाली संस्था द्वारा जॉब प्लेसमेंट की प्रक्रिया से प्रशिक्षण से संबंधित जॉब भी उपलब्ध करायी जाएगी।


अभियान चलाकर छात्रावासों-आश्रमों का करें निरीक्षण: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा समाज के सभी वर्गों सहित अनुसूचित जाति वर्ग को शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। इसी तारतम्य में छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति सलाहकार परिषद का गठन किया गया है। इस परिषद द्वारा अनुसूचित जाति वर्ग के उत्थान के लिए राज्य सरकार को परामर्श दिया जाएगा। परिषद के माध्यम से इस वर्ग के लिए संचालित योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में भी मदद मिलेगी।

                             

मुख्यमंत्री बघेल आज यहां अपने निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति सलाहकार परिषद की प्रथम बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। बघेल ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि अभियान चलाकर छात्रावासों का निरीक्षण किया जाए और वहां साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि बैठक में सदस्यों द्वारा बहुत अच्छे सुझाव दिए गए हैं। उन्होंने परिषद के सदस्यों द्वारा प्री मैट्रिक छात्रावासों के पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों में उन्नयन और सीटों की संख्या में वृद्धि संबंधी आग्रह पर अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन संभागों में अनुसूचित जाति वर्ग की जनसंख्या अधिक है, वहां प्राथमिकता के आधार पर छात्रावासों के उन्नयन तथा सीटों की संख्या में वृद्धि की जाए। सदस्यों द्वारा स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम तथा हिन्दी माध्यम स्कूलों में छात्रों को आरक्षण का लाभ देने के आग्रह पर उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कक्षा पहली में प्रवेशित छात्रों को आरक्षण का लाभ दिया जाएगा।

                           

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा जाति प्रमाण पत्रों को बनाने की प्रक्रिया में किए गए सरलीकरण के प्रावधानों के प्रचार-प्रसार के लिए वाल राईटिंग कराने तथा पाम्पलेट छपवाकर वितरित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने बैठक में परिषद के सदस्यों का स्वागत करते हुए उनसे सुझाव भी मांगे। सदस्य ने सुझाव दिया कि कोरोना की आपदा के दौरान लोगों का दाह संस्कार करने वाले समाज के लोगों को सम्मानित किया जाए।

बैठक में आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री तथा परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, सहित परिषद के सदस्यगण, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव श्री सुब्रत साहू, सचिव आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग डी. डी. सिंह, आयुक्त श्रीमती शम्मी आबिदी उपस्थित थी।

सलाहकार परिषद की बैठक में सभी सदस्यों द्वारा अनुसूचित जाति के हितों के लिए परिषद का गठन कर इसमें सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। बैठक में जानकारी दी गई कि अनुसूचित वर्ग के विद्यार्थियों के लिए प्रदेश में 90 पोस्ट मैट्रिक छात्रावास, 342 प्री मैट्रिक छात्रावास, 50 आश्रम संचालित किए जा रहे हैं। 

विशेष पिछड़ी जनजातियों के वन अधिकार पट्टेधारियों को सभी योजनाओं का लाभ दिलवाएं: मंत्री डॉ. टेकाम

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रायपुर। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने वन अधिकार पत्र वितरण के प्रकरणों में तेजी लाने के निर्देश दिए। इसके अलावा सामुदायिक वन अधिकार, सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पत्र एवं वन अधिकार पत्र प्राप्त हितग्राहियों को मनरेगा के तहत् स्वीकृत कार्यों एवं अन्य आनुषंगिक कार्यों में प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा है विशेष पिछड़ी जनजातियों के वन अधिकार पट्टेधारियों को सभी विभागीय योजनाओं का लाभ दिलाया जाए।

इनके वन अधिकार पट्टे की भूमि पर मनरेगा के तहत अभिसरण से कार्य कराया जाए। जिला समन्वय समिति बनाकर विभागों को कार्य का लक्ष्य दिया जाए। जिन गांवों में वन अधिकार के अधिक पट्टे दिए गए हैं उन्हें आदर्श गांव घोषित कर इन वर्गो के लिए कार्य कराया जाए। आदर्श गांवों की सूची सभी विभागों को दी जाए तथा विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित करवाएं। मंत्री डॉ. टेकाम आज यहां आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग के सहायक आयुक्तो एवं परियोजना प्रशासकों को संबोधित कर रहे थे। बैठक में विभाग के सचिव श्री डी.डी.सिंह और आयुक्त श्रीमती शम्मी आबिदी सहित वरिष्ट अधिकारी उपस्थित थे।

मंत्री डॉ. टेकाम ने कहा कि वर्तमान में मौसम को देखते हुए वन अधिकार पट्टेधारियों की भूमि पर पौधा रोपण करवाएं। यहां सब्जी, फल के पौधो का वितरण भी किया जाए। विभाग के सचिव डी.डी. सिंह ने कहा कि गतवर्ष हर गांव में सामुदायिक भवन अधिकार पत्र वितरण का लक्ष्य दिया गया था, इस कार्य को भी पूरा करें। विशेष पिछड़ी जनजातियों के वन अधिकार पट्टेधारियों को आयुष्मान कार्ड का वितरण, पेंशन योजना और राशनकार्ड वितरण कर लाभान्वित किया गया। इसके साथ ही इन वर्गो के बच्चों के शिक्षा का विशेष ध्यान दें। आजीविका के लिए लघु वनोपज संग्रहण कार्य से भी जोड़ा जाए। वन अधिकार मान्यता के लिए आवेदकों की संख्या बढ़ाएं।

मंत्री डॉ. टेकाम ने विभागीय योजनाओं के लक्ष्य को पूरा करने, निर्माण कार्यो को स्थल पर निरीक्षण कर अपेक्षित प्रगति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य के साथ केन्द्रीय योजनाओं के कार्यो को भी समय पर पूरा करें। देवगुड़ी आदिवासियों के आस्था का केन्द्र है। समुदाय का इससे जुड़ाव होना चाहिए। देवगुड़ी निर्माण के सभी स्वीकृत कार्यो को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। आयुक्त श्रीमती शम्मी आबिदी ने कहा कि विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति के लिए आवास भी बनाए जाने है, इसके लिए इन वर्गो के मुखिया और हितग्राहियों से चर्चा कर उनके संस्कृति के अनुरूप घर बनाया जाए।

आवास का निर्माण वैध जमीन पर ही किया जाए और वहां बिजली पानी की मूलभुत सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में शिक्षा सत्र 2023-24 के लिए मेस संचालन, खेल सामग्री क्रय करने की कार्रवाई नियमानुसार शीघ्र पूर्ण कर ली जाए। इन विद्यालयों में कक्षा 10 वीं और 12 वीं के विद्यार्थियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए। जिले के सहायक आयुक्त इसके लिए इन स्कूलों का अकादमी कैलेण्डर तैयार कर उसका पालन सुनिश्चित करवाए। इन स्कूलों के शिक्षकों को विषय-वस्तु के अनुसार प्रशिक्षित किया जाए। इन स्कूलों के बच्चों का प्रत्येक माह यूनिट टेस्ट लेकर बच्चों की शैक्षणिक गतिविधियों का आकलन करें। विभाग द्वारा प्रदेश में संचालित क्रीडा परिसरों में स्वीकृत लघु निमार्ण कार्यो का मौके पर मुआयना कर इन कार्यो को शीघ्र ही पूरा करवाए। क्रीडा परिसरों में बच्चों की समय पर भर्ती हो। इन क्रीडा परिसरों में खेल विधाओं के अनुसार कैम्प लगाकर बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाए।

बैठक में सहायक आयुक्तों को निर्देशित किया कि सभी निर्माण कार्यों एवं उन्नयन किये गए छात्रावास-आश्रमों की मौके पर जाकर समीक्षा करें। विभाग अंतर्गत संचालित विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था को दुरूस्त करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में अनुरक्षण, लघु मद अन्तर्गत किए गए कार्यो की समीक्षा भी की गई। बैठक में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की समीक्षा के अंतर्गत गणवेश आपूर्ति, पाठ्यपुस्तक तथा विद्यालयवार, शिक्षकवार बोर्ड परीक्षा परिणाम एवं अतिथि शिक्षकों की भर्ती की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।

 सीबीएसई पैटर्न के आधार पर बच्चों को पढ़ाने वाले अच्छे शिक्षकों की नियुक्त करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा प्रयास आवासीय विद्यालयों में वर्ष 2022-23 में प्रवेश एवं परीक्षा परिणाम तथा नवीन प्रारंभ प्रयास स्कूलों की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। बैठक में प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना अन्तर्गत चयनित ग्रामों में स्वीकृत कार्यो की प्रगति की समीक्षा भी गई। चयनित ग्रामों में किए गए कार्यों का निरीक्षण करने के निर्देश सहायक आयुक्तों को दिए गए। इसके अलावा अत्याचार निवारण अधिनियम, न्यायालयीन प्रकरणों, भर्ती, पदोन्नति एवं अनुकंपा नियुक्ति की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

इसी प्रकार परियोजना प्रशासकों से आदिग्राम पोर्टल में आवश्यक जानकारी की प्रगति को शीघ्र दर्ज करने के निर्देश दिए। संविधान के अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत वर्ष 2021-22 एवं 2022-23 एवं केन्द्रीय क्षेत्रीय योजना अन्तर्गत विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूह अभिकरण, प्रकोष्ठ के कार्यो में वर्ष 2021-22 एवं 2022-23 की समीक्षा गई एवं आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। उल्लेखनीय है कि विभागीय योजनाओं की समीक्षा हेतु तीन चरणों में होने वाली इस बैठक के तृतीय चरण में सरगुजा संभाग की समीक्षा बैठक 15 जून को की जाएगी। 

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