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अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.आई.आई.टी.) के डॉ. व्यास निदेशक नियुक्त

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रायपुर। राज्यपाल एवं कुलाधिपति रमेन डेका द्वारा प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश व्यास को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.आई.आई.टी.) नवा रायपुर अटल नगर, जिला रायपुर छत्तीसगढ़ का निदेशक नियुक्त किया गया है।

राज्यपाल द्वारा उनकी नियुक्ति अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.आई.आई.टी.) विश्वविद्यालय अधिनियम, 2013 (संशोधन अधिनियम, 2014 एवं 2015) की धारा 20(2) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए की गई है। डॉ. व्यास का कार्यकाल, परिलब्धियां तथा सेवा शर्ते विश्वविद्यालय अधिनियम एवं परिनियम में निहित प्रावधान अनुसार होगी। इस संबंध में आज राजभवन सचिवालय से आदेश जारी किया गया है।

वर्तमान में प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश व्यास, अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.आई.आई.टी.) प्रयागराज (उत्तरप्रदेश) में डीन के पद पर कार्यरत हैं।

ऐतिहासिक नगरी सिरपुर में 21 जून को ग्यारहवां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस में राजस्व मंत्री होंगे शामिल

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रायपुर। राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ग्यारहवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जिला स्तरीय योगाभ्यास कार्यक्रम में पुरातत्व एवं ऐतिहासिक नगरी सिरपुर में शामिल होंगे। यह आयोजन 21 जून को सुबह 5:30 बजे से प्रारंभ होगा। इस वर्ष योग दिवस की थीम ‘‘योग संगम’’ एवं ‘‘हरित योग’’ तय की गई है। कार्यक्रम में सांसद, विधायक, कलेक्टर, सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, छात्र-छात्राएं, सामाजिक संगठन व दिव्यांगजन एवं आमजन बड़ी संख्या में सामूहिक योगाभ्यास में हिस्सा लेंगे।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर सिरपुर में योग दिवस का आयोजन जिले में स्वास्थ्य, एकता और जागरूकता का संदेश देगा। इस आयोजन के माध्यम से योग को जन-जन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे निरोग और स्वस्थ समाज का निर्माण सुनिश्चित हो सके। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जिले में मुख्य समारोह लक्ष्मण मंदिर सिरपुर में प्रातः 05:30 बजे से आयोजित होगा। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण का सीधा प्रसारण होगा। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य कार्यक्रम में प्रातः 5:30 बजे सभी प्रतिभागियों का आगमन एवं प्रातः 6:00 बजे गणमान्य अतिथियों का आगमन होगा। प्रातः 6:10 बजे से 6:30 बजे तक योग प्रदर्शन व मुख्य अतिथि का भाषण होगा तथा प्रातः 6:30 बजे से 7:00 बजे तक योग संबंधी गतिविधियों का सीधा प्रसारण किया जाएगा।

अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस पर पूरे प्रदेश में चला बाल श्रम विरोधी अभियान, कलेक्टरों ने दिए सख्त निर्देश

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा बाल श्रम की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे प्रयासों को प्रदेश स्तर पर सख्ती के साथ क्रियान्वयन किया जा रहा है। प्रशासनिक प्रतिबद्धता, जन-जागरूकता और कड़ी निगरानी के माध्यम से बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और गरिमामय जीवन की ओर अग्रसर करने का संकल्प लिया गया है।

अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ में बाल श्रम उन्मूलन के लिए जिलेवार अभियान चलाया गया। महासमुंद और कोण्डागांव सहित विभिन्न जिलों में प्रशासन, श्रम विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग, पुलिस तथा बाल संरक्षण इकाई के संयुक्त प्रयासों से बाल श्रमिकों की पहचान, पुनर्वास और जन-जागरूकता की दिशा में व्यापक गतिविधियाँ आयोजित की गईं।

महासमुंद में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेते हुए निर्देश दिए कि जिले में बाल श्रम की किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने संयुक्त जांच दल को होटल, ढाबा, निर्माण स्थल, दुकानों एवं अन्य संभावित स्थलों पर निरीक्षण करने कहा। साथ ही विकासखंड स्तर पर बाल श्रम विरोधी रैली, पोस्टर प्रदर्शनी और स्कूलों में विशेष सत्र आयोजित करने के निर्देश दिए। बाल श्रमिकों के पहचान हेतु 15 जून से 30 जून तक जिले में विशेष अभियान चलाया जाएगा। कलेक्टर ने बाल संरक्षण समिति की मासिक बैठक आयोजित कर सतत समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्कूल से बाहर रह रहे बच्चों को पुनः स्कूल में लाया जाएगा और उनके परिवारों को शासकीय योजनाओं से जोड़ा जाएगा। बाल श्रम की रोकथाम हेतु बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम 2005 की धारा 13, 1415 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

श्रम पदाधिकारी डी.एन. पात्र ने बताया कि वर्ष 2024 में 92 संस्थानों का निरीक्षण किया गया, जिनमें से 14 के विरुद्ध श्रम न्यायालय में अभियोजन दायर किया गया। न्यायालय ने 9 संस्थानों को 5-5 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। वहीं 2025 में अब तक 52 संस्थानों का निरीक्षण हुआ, जिसमें 12 संस्थानों पर सूचना बोर्ड न लगाने पर अभियोजन दायर किया गया है।

14 वर्ष से कम आयु के बच्चों का नियोजन पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष के किशोरों को खतरनाक और अधिसूचित व्यवसायों में कार्य कराना दंडनीय अपराध है। इनमें होटल, ढाबा, ईंट-भट्ठा, पत्थर खदान, बीड़ी उद्योग, ऑटो गैरेज, घरेलू काम, आदि शामिल हैं। दोषी पाए जाने पर 6 माह से 2 वर्ष तक की सजा या 20 हजार से 50 हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। बाल श्रम की शिकायत के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन 1098 और 1800-2332-197 पर संपर्क किया जा सकता है।

कोण्डागांव में चला विशेष निरीक्षण अभियान, दो बच्चों का रेस्क्यू कर पुनर्वास

कोण्डागांव जिले में कलेक्टर श्रीमती नुपूर राशि पन्ना के मार्गदर्शन में श्रम विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, पुलिस व चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम द्वारा बाल श्रमिकों और भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों के चिन्हांकन और पुनर्वास के लिए अभियान चलाया गया। ढाबों, होटल, मोटर गैरेज, दुकानों में निरीक्षण कर संचालकों को समझाइश दी गई। दो बच्चों को रेस्क्यू कर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिन्हें परिवार के पास सुरक्षित पुनर्वासित किया गया तथा शिक्षा विभाग के माध्यम से स्कूल से जोड़ा जाएगा।

प्रदेश की नई औद्योगिक नीति का पहला ड्राफ्ट 31 जुलाई तक होगा तैयार

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रायपुर। उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने प्रदेश की नवीन औद्योगिक नीति 2024-29 के पहले ड्राफ्ट को 31 जुलाई तक जारी करने के निर्देश विभाग के अधिकारियों को दिए हैं। नई औद्योगिक नीति के लिए उद्योग विभाग द्वारा लगातार अलग-अलग उद्योग संगठनों से विचार-विमर्श कर उनके अमूल्य सुझाव लिए जा रहे हैं, अब तक प्रदेश के 20 अलग-अलग उद्योग संघों से सुझाव लिए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिसा, मध्यप्रदेश समेत अन्य प्रदेशों के उद्योग नीति पर स्टडी भी विभाग द्वारा की जा रही है। राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों और उद्योगपतियों को छत्तीसगढ़ में निवेश प्रोत्साहन बढ़ाने की दिशा में जोर दिया जा रहा है।

उद्योग मंत्री देवांगन ने अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं की नई औद्योगिक नीति में हर सेक्टर पर फोकस होना चाहिए। नए सेक्टर जैसे फार्मास्युटिकल, एग्रीकल्चर, टेक्सटाइल समेत अन्य सेक्टरों के उद्योग ज्यादा से ज्यादा लगें, ताकि रोजगार भी अधिक लोगों को मिले और प्रदेश में निवेश भी बढ़े। इन सेक्टरों के उद्योग लगने से प्रदूषण के बढ़ने की संभावना भी कम रहेगी।

नई औद्योगिक नीति के लिए इस मेल आईडी पर भेज सकते हैं सुझाव

उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने बताया की नई औद्योगिक नीति 2024-29 के लिए मेल आईडी ेनहहमेजपवदेण्ब्हपदकचवसपबल2024/हउंपसण्बवउ पर या फिर सीधे विभाग में अपने अमूल्य सुझाव दे सकते हैं।

उद्योग मंत्री स्वयं जाएंगे अन्य राज्य, उद्योग प्रतिनिधियों से लेंगे सुझाव

नई नीति के लिए उद्योग मंत्री देवांगन स्वयं अन्य राज्यों का दौरा कर वहां के उद्योग प्रतिनिधियों से मुलाकात कर सुझाव लेंगे। ताकि उन राज्यों के उद्योग नीति के अच्छे और प्रोत्साहन परक अनुदान मांगों पर अध्ययन परीक्षण किया जा सके। अभी हाल ही में मंत्री देवांगन ने नई दिल्ली में आईसीसी के प्रतिनिधियों से नई नीति हेतु विचार विमर्श किया था।

सभी मंत्रीगण और विभागों से भी लिए जाएंगे राय

प्रदेश की नई औद्योगिक नीति के लिए सभी विभागों और मंत्री गणों से विमर्श के पश्चात ही आगे 5 वर्षों के लिए नीति बनाई जाएगी। ताकि नीति में सभी विभागों का समावेश हो और हर सेक्टर में उद्योग लग सके।

 

तीन दिवसीय सिरपुर महोत्सव की तैयारी को लेकर कलेक्टर ने ली बैठक, महोत्सव के भव्य और गरिमामय आयोजन के लिए चर्चा

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महासमुंद। अंतर्राष्ट्रीय ऐतिहासिक, धार्मिक एवं पुरातात्विक नगरी सिरपुर में 24 से 26 फरवरी 2024 तक आयोजित होने वाले तीन दिवसीय सिरपुर महोत्सव की तैयारियां को लेकर कलेक्टर  प्रभात मलिक ने आज जिला कार्यालय के सभाकक्ष में जनप्रतिनिधियों, ट्रस्ट के प्रतिनिधि एवं संबंधित अधिकारियों की बैठक लेकर आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में पुलिस अधीक्षक  आशुतोष सिंह, मुख्य कार्यपालन अधिकारी एस. आलोक भी मौजूद थे।

कलेक्टर प्रभात मलिक ने बैठक में सिरपुर महोत्सव के आयोजन के लिए की जा रही तैयारियों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सिरपुर महोत्सव स्थल अंतर्गत सुव्यवस्थित आयोजन के लिए तैयारी प्रारम्भ कर दी गई है। उन्होंने बताया कि तीन दिवसीय सिरपुर महोत्सव में साफ-सफाई, पार्किंग, शौचालय, पेयजल आदि की चाक चौबंद व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने बताया कि सड़कों में लगे स्ट्रीट लाईट में स्थायी लाईटिंग करने एवं महोत्सव परिसर के अंतर्गत सड़कों का मरम्मत करने के निर्देश दिए गए हैं।

कलेक्टर ने बताया कि मुख्य मंच तक पहुंचने के लिए पर्याप्त जगह छोड़ने तथा व्यवस्थित बाजार व्यवस्था बनाने तथा सिरपुर सहित स्थानीय व्यवसायियों को दुकान आबंटन के लिए प्राथमिकता दी जाएगी। महोत्सव में स्थानीय एवं छत्तीसगढ़ी स्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों की छटा बिखरेगी। बैठक में जनप्रतिनिधियों के सुझाव अनुसार राज्य के ख्यातिनाम कलाकारों में प्रख्यात गायक सुनील सोनी, भूपेन्द्र साहू,  नितिन दुबे सहित अन्य कलाकारों से संपर्क किया जा रहा है। वहीं इंडियन आइडल विजेता अभिजीत सांवत द्वारा भी कार्यक्रम प्रस्तुति देने पर सहमति हुई है। बैठक में कहा कि प्रतिदिन शाम 3 से  6 बजे तक स्थानीय लोक कलाकारों को सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुति के लिए अवसर दिया जाएगा। तत्पश्चात मुख्य कार्यक्रम प्रारम्भ होगा।

इसके अलावा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक नगरी सिरपुर के पुरातात्विक इतिहास को लेजर शो के माध्यम से दिखाया जाएगा। महोत्सव के दौरान पहली बार महानदी आरती आयोजन किया जाएगा, इसके लिए गंधेश्वरनाथ महोदव मंदिर ट्रस्ट को आवश्यक तैयारी करने कहा गया है। इसके अलावा महत्वपूर्ण प्रवेश द्वारा पर स्वागत गेट भी लगाया जाएगा। मंदिरों में आकर्षक लाइटिंग की जाएगी। पुलिस अधीक्षक आशुतोष सिंह ने कहा कि जन सामान्य की सुविधाओं को दृष्टिगत रखते हुए पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही आकस्मिक एवं आपातकालीन स्थिति को भी ध्यान में रखा जाएगा।

इस मौके पर मौजूद जनप्रतिनिधियों ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। सुझाव में महोत्सव का व्यापक प्रचार-प्रसार करने सोशल मीडिया के माध्यम से छोटे-छोटे वीडियो अपलोड करने एवं ग्राम पंचायतों में मुनादी करने सहमति बनी। बैठक में सांसद प्रतिनिधि संदीप दीवान, जिला पंचायत सदस्य अमर चंद्राकर, जनपद उपाध्यक्ष त्रिलोकी ध्रुव, जनपद सदस्य अजय मंगल ध्रुव, गंधेश्वरनाथ महोदव मंदिर ट्रस्ट के दाऊलाल चंद्राकर, पार्षद मंगेश टाकसाले,  मोहन साहू, पवन साहू, ग्राम जलकी सरपंच रमेश चौधरी सहित अन्य प्रतिनिधि, एसडीएम महासमुंद उमेश साहू, डिप्टी कलेक्टर आशीष कर्मा, लोक निर्माण के ईई चंद्राकर, आर ई एस, सहित तहसीलदार, नायब तहसीलदार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लिखा पत्र

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक बड़ी पहल करते हुए विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ सरकार की ’’छत्तीसगढ़ कल्चरल कनेक्ट’’ योजना  से अवगत कराया है। मुख्यमंत्री ने पत्र में ’’छत्तीसगढ़ कल्चरल कनेक्ट’’ योजना की जानकारी देते हुए लिखा है कि इन केंद्रों की स्थापना से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्व के स्थानों में छत्तीसगढ़ के लोगों के निवास और भ्रमण की सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने उक्त केंद्रों की स्थापना हेतु विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री से दो एकड़ शासकीय भूमि आबंटित करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आश्वस्त किया है कि छत्तीसगढ़ में संस्कृति केंद्र खोलने के लिए भूमि आबंटन की उन्हें भी सहर्ष स्वीकृति दी जाएगी।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से ऋषिकेश, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र भाई पटेल से गिरनार एवं सोमनाथ, ओड़िसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से पुरी में, आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री वाय.एस. जगनमोहन रेड्डी से तिरूपति में, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से शिरडी में, झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से देवघर में, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदिनाथ से वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज एवं मथुरा में दो एकड़ शासकीय भूमि आबंटित करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पत्र में लिखा है कि भारत में विभिन्न भाषाओं, जातियों, धर्मों तथा संस्कृतियों के लोग एक साथ रहते है। 

अनेकता में एकता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति एवं धरोहर है। विभिन्न संस्कृतियों के परस्पर आदान-प्रदान की प्रक्रिया की निरंतरता ने हमारे राष्ट्र को एकजुट रखने एवं शक्तिशाली बनाने में सहायता प्रदान की है। छत्तीसगढ़ की सरकार ने ’’छत्तीसगढ़ कल्चरल कनेक्ट’’ नामक योजना प्रारंभ करने का निर्णय लिया है। देश के विभिन्न भागों में स्थित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक महत्व के स्थानों में छत्तीसगढ़ के लोगों के भ्रमण एवं निवास हेतु छत्तीसगढ़ संस्कृति केन्द्रोंकी स्थापना की जाये। इन केन्द्रों के माध्यम से राज्य वासियों को न केवल देश की सांस्कृतिक बहुलता की जानकारी प्राप्त होगी बल्कि उन स्थानों पर छत्तीसगढ़ राज्य की संस्कृति, पुरातत्व एवं पर्यटन स्थलों की जानकारी दिये जाने के साथ ही छत्तीसगढ़ के परंपरागत हस्तशिल्प उत्पादों की भी अन्य राज्यों एवं देशों से आने वाले पर्यटकों को जानकारी मिल सकेगी।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आश्वस्त किया है कि यदि वे अपने राज्य की संस्कृति के प्रति छत्तीसगढ़ के लोगों की रूचि बढ़ाने की दृष्टि से छत्तीसगढ़ में सांस्कृतिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों पर भूमि आवंटन की मांग करते है तो उस पर सहर्ष स्वीकृति प्रदान की जाएगी।

सबसे महत्वपूर्ण समय में साथ देने वाला केवल गुरु - राज्यपाल

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दुर्ग। गुरु का सदैव सम्मान करें उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण समय में आप का साथ दिया है। गुरुओं एवं वरिष्ठ जनों की सदेव जीवन में आवश्यकता होती है जब भी अवसर मिले अपने गुरुओं एवं वरिष्ठ जनों से अवश्य मिलते रहना चाहिए। उन्हें समय देना चाहिए उपरोक्त बातें राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके ने आज बीआईटी दुर्ग के वर्ष 97 बैच के छात्र छात्राओं द्वारा आयोजित रजत जयंती समारोह के अवसर पर कहीं।

  बीआईटी दुर्ग के वर्ष 97 बैच के एलुमनी रजत जयंती समारोह में शामिल हुई राज्यपाल

रजत जयंती समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल ने कहा कि बीआईटी के छात्र-छात्राएं आज देश-विदेश में जाकर समाज, राज्य एवं राष्ट्र का नाम रोशन कर रहे हैं। जिस संस्था में शिक्षा एवं दीक्षा प्राप्त की है उससे निकलकर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचना बहुत ही गौरव एवं सम्मान का कार्य है। ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन से संस्थान के अन्य छात्र-छात्राओं को भी प्रेरणा मिलती है। उन्होंने अपने अनुभव भी साझा करते हुए कहा कि उनके द्वारा भी अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत महाविद्यालय की राजनीति से ही की है और वे अनेक पदों पर रहते हुए आज राज्यपाल तक पहुंची हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी लक्ष्य प्राप्ति के लिए संकल्प लें और पूरी चुनौती के साथ सामना करते हुए आगे बढ़े निश्चित रूप से सफलता प्राप्त होगी।

आसानी से जीवन में कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जीवन के शीर्ष में पहुंचे परंतु कभी भी यह भूलना नहीं चाहिए कि जिसने हमें शिक्षा दीक्षा दी उसी के कारण यह सफलता प्राप्त हुई है। सदैव अहंकार से दूर रहें। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान में वांछित कौशल एवं ज्ञान अर्जित कर देश की प्रगति में अपनी भूमिका निभाने के लिए युवा तैयार होते हैं वह संस्थान किसी पुण्यभूमि से कम नहीं है। भारत आज विशाल स्वरूप के कारण विश्व गुरु की उपाधि मिल चुकी है। भारत में सदैव से ही परंपरा रही है गुरुओं को ईश्वर के समान माना गया है। गुरु का सदैव सम्मान करें।

उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण समय में आप का साथ दिया है इसलिए हमें भी अपने गुरुओं का वरिष्ठ जनों का सदैव सम्मान करना चाहिए। गुरुओं एवं वरिष्ठ जनों को जब भी अवसर मिले अवश्य मिले उन्हें समय देवें अंत में राज्यपाल ने कहा कि ईमानदारी से की गई कोशिश एवं परिश्रम का प्रतिसाद अवश्य ही प्राप्त होता है इस अवसर पर बीआईटी संस्थान की ट्रस्टी आई पी मिश्रा डायरेक्टर, बिलासपुर विधायक एवं एलुमनी शैलेश पांडे बीआईटी दूर के डायरेक्टर डॉ अरुण अरोरा प्राचार्य डॉ मोहन गुप्ता भी उपस्थित थे।

41वें भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले के छत्तीसगढ़ पवेलियन पहुंचे पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू

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रायपुर। नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में लगाए गए छत्तीसगढ़ पवेलियन वर्तमान में देश व विदेश के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना है। छत्तीसगढ़ पवेलियन में गढ़बो नवा छत्तीसगढ़की झलक देखने को मिल रही है। छत्तीसगढ़ पवेलियन में छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग ने भी अपना स्टाल लगाया है।



छत्तीसगढ़ पैवेलियन में आज छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण, गृह, पर्यटन एवं धर्मस्व मंत्री ताम्रध्वज साहू ने विभागीय अधिकारियों के साथ छत्तीसगढ़ टूरिज्म के स्टॉल का जायजा लिया और प्रदर्शित परियोजनाओं का अवलोकन करते हुए उनकी जानकारी ली। 

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में छत्तीसगढ़ पवेलियन में सुदृढ़ ग्रामीण अर्थव्यवस्था व आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते छत्तीसगढ़ को दिखाने का प्रयास किया गया है। यहाँ प्रदर्शनी बोर्ड के माध्यम से आगंतुकों को छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाली योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। इस मंच से छतीसगढ़ की संस्कृति एवं सभ्यता के साथ यहाँ के पर्यटन को वैश्विक पहचान मिल रही है । छत्तीसगढ़ पवेलियन में यहां की कला, संस्कृति, सभ्यता और परंपरा की परिभाषा को हर तरीके से परिभाषित किया जा रहा है।

सी मार्ट- ग्रामीणों का अपना शॉपिंग मॉल

छत्तीसगढ़ पवेलियन में सी-मार्ट का स्टॉल लगा हुआ है। सी मार्ट ग्रामीण अर्थव्यवस्था के तेजी से विकास के लिए गांवों में तैयार उत्पादों को शहरों से जोड़ने की पहल की गयी है। यहाँ महिला स्व सहायता समूहों, शिल्पियों, बुनकरों व अन्य पारंपरिक एवं कुटीर उद्योगों द्वारा निर्मित उत्पादों का विक्रय किया जाता है। पवेलियन में भी इस स्टाल पर विभिन्न उत्पादों की खरीदी की जा सकती है।

स्टालों में दिख रही छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति

पवेलियन में छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति से जुड़े हुए उत्पादों को बखूबी डिस्प्ले किया गया है। छत्तीसगढ़ की जनजाति समुदाय द्वारा हाथ से बनाई गयी शिल्प वस्तु, कलाकृति, चित्रकारी, परिधानों की प्रदर्शनी लगाई गयी है। यहाँ बुनकर राज्य की खास पहचान कोसा सिल्क की साड़ियाँ लेकर पहुंचे हैं। इसके अलावा विश्व प्रसिद्ध शिल्पकारी बेलमेटल, ढोकरा और गोदना आर्ट को प्रस्तुत किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ पवेलियन में दिख रही ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ की झलक

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नई दिल्ली। दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में लगाए गए छत्तीसगढ़ पवेलियन वर्तमान में देश व विदेश के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना है। छत्तीसगढ़ पवेलियन में गढ़बो नवा छत्तीसगढ़की झलक देखने को मिल रही है। इस बार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में छत्तीसगढ़ पवेलियन में भी सुदृढ़ ग्रामीण अर्थव्यवस्था व आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते छत्तीसगढ़ को दिखाने का प्रयास किया गया है। यहाँ प्रदर्शनी बोर्ड के माध्यम से आगंतुकों को छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाली योजनाओं की जानकारी दी जा रही है।


आज मेले में छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सीएसआईडीसी) के मुख्य महाप्रबन्धक एसके सिन्हा ने ज्यूरी के सदस्यों को छत्तीसगढ़ के पवेलियन का अवलोकन कराया। उन्होने ज्यूरी के सदस्यों को नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी के साथ ही ग्रामीण औद्योगिक पार्क के संबंध में विशेष जानकारी प्रदान की। पवेलियन में मॉडल के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार की नई पहल ग्रामीण औद्योगिक पार्क को प्रस्तुत किया गया है, जो ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के नये अवसर प्रदान कर रहा है।

इस योजना के माध्यम से चयनित गौठानों को ग्रामीण औद्योगिक पार्क के रूप में विकसित किया गया है। जहां केंचुआ खाद उत्पादन के अलावा मुर्गी पालन, मत्स्य पालन, खाद्य प्रसंस्करण जैसी गतिविधियां चल रही है। इस योजना से गौठान से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और स्थानीय युवाओं को रोजगार प्राप्त हो रहा है।

इसके साथ ही पवेलियन में छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी सुराजी गाँव योजना, नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना को प्रस्तुत किया गया है। इन योजनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। वहीं, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी के स्टॉल पर ग्रामीण विद्युतीकरण योजना को मॉडल द्वारा प्रदर्शित किया गया है। इस योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ के आंतरिक क्षेत्रों में शत-प्रतिशत का लक्ष्य रखा गया है।

सी मार्ट- ग्रामीणों का अपना शॉपिंग मॉल

छत्तीसगढ़ पवेलियन में सी-मार्ट का स्टॉल लगा हुआ है। सी मार्ट ग्रामीण अर्थव्यवस्था के तेजी से विकास के लिए गांवों में तैयार उत्पादों को शहरों से जोड़ने की पहल की गयी है। यहाँ महिला स्व सहायता समूहों, शिल्पियों, बुनकरों व अन्य पारंपरिक एवं कुटीर उद्योगों द्वारा निर्मित उत्पादों का विक्रय किया जाता है। पवेलियन में भी इस स्टाल पर विभिन्न उत्पादों की खरीदी की जा सकती है।

स्टालों में दिख रही छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति

पवेलियन में छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति से जुड़े हुए उत्पादों को बखूबी डिस्प्ले किया गया है। छत्तीसगढ़ की जनजाति समुदाय द्वारा हाथ से बनाई गयी शिल्प वस्तु, कलाकृति, चित्रकारी, परिधानों की प्रदर्शनी लगाई गयी है। यहाँ बुनकर राज्य की खास पहचान कोसा सिल्क की साड़ियाँ लेकर पहुंचे हैं। इसके अलावा विश्व प्रसिद्ध शिल्पकारी बेलमेटल, ढोकरा और गोदना आर्ट को प्रस्तुत किया जा रहा है।

बाल सुरक्षा सप्ताह का आयोजन, पुलिस बच्चों की कानूनी जानकारी दे रही है

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महासमुन्द। अंतर्राष्ट्रीय बाल दिवस 14 नवम्बर 2022 के उपलक्ष्य में बच्चों को शुभकामना देते हुये महासमुन्द पुलिस विभाग के द्वारा टाउन हाॅल महासमुन्द परिसर में बच्चों की सुरक्षा जागरूकता विषय पर बाल सुरक्षा सप्ताह ( 14 नवंबर से 20 नवंबर तक) 07 दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के शुभारंभ पश्चात अथितियों के द्वारा महिला एवं बच्चों से संबंधित सुरक्षा विषय पर विस्तृत उद्बोधन दिया गया। 


पुलिस अधीक्षक महासमुन्द भोजराम पटेल ने बच्चों प्रेरणा देते हुए कहा कि जीवन में अपने आप को इतना मजबूत बनाओ कि कोई भी आपको किसी भी गलत कार्याें व नशा के लिए प्रेरित न कर सके। अपने आप को मानसिक रूप मजबूत करें ताकि किसी प्रतिस्थिति का सामना कर सके। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आकाश राव ने
  स्वामी विवेकानंद के सिध्दांतों को बच्चों में अपने विचार रूप में प्रकट किया गया।

मुख्य अतिथि
  विधायक महासमुन्द विनोद सेवनलाल चन्द्राकर ने कहा कि गुरूओं का सम्मान करें। संघर्ष कर जमीन से उठकर जिम्मेदार नागरिक बनें। उन्होंने देश की तरक्की में अपना योगदान देने की बात कही। जिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष श्रीमति डाॅ. रश्मि चन्द्राकर के द्वारा चाचा नेहरू जैसे बच्चों को आगे बढने की प्रेरणा दी गई। नपाध्यक्ष श्रीमति राशि त्रिभुवन महिलांग ने बच्चों को घर के माता-पिता से प्राप्त छूट का ज्यादा फायदा नही उठाते हुये। माता-पिता के सपनों पर खरा उतरने की बात कही।


कार्यक्रम में महासमुन्द जिले विभिन थानों में बाल मित्र, पुलिस अधिकारी, राजपत्रित पुलिस अधिकारी व शहर के गणमान्य नागरिक, पुलिस परिवार उपस्थित थे। बाल दिवस के अवसर पर बच्चों की जागरूकता कार्यक्रम के द्वितीय दिवस 15 नवम्बर को शहरी क्षेत्र महासमुन्द में स्कुल, काॅलेज, अन्य शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित किया जाएगा। जिसमे गुड टच-बैड टच, पोक्सो एक्ट के प्रावधान, साईबर सुरक्षा, जेजे एक्ट, मानव तस्करी, नशा के दुष्प्रभाव की जानकारी दिया जावेगा।

तृतीय दिवस 16 नवम्बर को सार्वजनिक क्षेत्र (रेल्वे स्टेशन, बस स्टैण्ड, माॅल, पार्क, आदि) में गुड टच-बैड टच पोक्सो एक्टके प्रावधान, मानव तस्करी, बाल विवाह, बाल श्रम, स्वच्छता, नशा के दुष्प्रभाव, पीडित क्षतिपूर्ति योजना आदि से संबंधित जानकारी दी जावेगी।

चतुर्थ दिवस 17 नवम्बर को स्कुल, काॅलेज के बच्चों को पुलिस थाना, चैकी का भ्रमण में पुलिस की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी जावेगी।

पंचम दिवस 18 नवम्बर को विभिन्न प्रकार के बाल देखरेख संस्थान जैसे बाल गृह, बाल सम्प्रेक्षण गृह, विशेष गृह, खुला आश्रय गृह में गुड टच-बैड टच, पोक्सो एक्ट के प्रावधान, मानव तस्करी,, बाल विवाह, बाल श्रम, स्वास्थ्य, स्वच्छता, नशा के दुष्प्रभाव जानकारी दी जावेगी ।

षष्टम दिवस दिनांक 19 नवम्बर को छात्रावास/हाॅस्टल आदि में गुड टच-बैड टच, पोक्सो एक्ट के प्रावधान, बाल विवाह, बाल श्रम, पौष्टिक आहार, नशा के दुष्प्रभाव आदि की जानकारी दी जाएगी ।

सप्तम दिवस दिनांक 20 नवम्बर को खेलकूद, निबंध, कविता, रंगोली प्रतियोगिता आदि का आयोजन को अभियान का समापन महासमुन्द में गणमान्य नागरिकों के मध्य किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ की प्रख्यात चेस खिलाड़ी किरण अग्रवाल बनी भारतीय शतरंज टीम की कोच

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की प्रख्यात अंतर्राष्ट्रीय शतरंज खिलाड़ी सु़श्री किरण अग्रवाल को अखिल भारतीय शतरंज महासंघ ने भारतीय शतरंज टीम का कोच नियुक्त किया है। सुश्री किरण आगामी 13 नवम्बर से 23 नवम्बर तक श्रीलंका में आयोजित होने जा रही कामनवेल्थ चेस चौम्पियनशिप में शामिल होने वाली 16 सदस्यीय भारतीय टीम में बतौर कोच शिरकत करेंगी। कोच बनाए जाने पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी और कहा कि उनके खेल कौशल और अनुभव का लाभ भारतीय टीम को मिलेगा। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री उमेश पटेल ने उन्हें बधाई दी और कहा की नई खेल प्रतिभाओं को तराशने में उनका अहम योगदान रहा है।



उनके मार्गदर्शन में भारतीय शतरंज टीम अपना अच्छा प्रदर्शन अवश्य करेगी। इससे पूर्व 2004 में दुर्ग जिले के भिलाई की किरण अग्रवाल ने भारतीय शतरंज टीम की कोच बनने का गौरव हासिल किया था। किरण अग्रवाल को कोच बनाये जाने पर प्रदेश के शतरंज खिलाडियों में हर्ष व्याप्त है। उल्लेखनीय है कि शतरंज ओलंपियाड के समय छत्तीसगढ़ में टॉर्च रिले लाया गया था तथा टॉर्च थामने का सौभाग्य भी किरण को मिला था। सुश्री किरण के अलावा प्रवीण थिप्से, व्ही रविचंद्रन एवं प्रसन्नजीत दत्ता भी भारतीय शतरंज टीम के कोच बनाए गए हैं।

किरण अग्रवाल की उपलब्धियां

सुश्री किरण अग्रवाल प्रदेश की एकमात्र महिला शतरंज खिलाड़ी है, जिन्हें वीमेन फीडे मास्टर का टाइटल विश्व शतरंज महासंघ द्वारा प्रदत्त किया गया है। किरण ने लंदन, दुबई, जर्मनी, यूगोस्लाविया, बांग्लादेश, दोहा (कतर) जैसे लगभग 15 से अधिक प्रमुख देशों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अपने प्रदर्शन से प्रतिद्वंदियों को लोहा मनवा चुकी हैं। इनकी उपलब्धियों को देखते हुए तात्कालीन मध्यप्रदेश सरकार ने 1986 में उन्हें विक्रम एवार्ड से नवाजा था।

छत्तीसगढ़ में तीसरी बार राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का होगा भव्य आयोजन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य के गठन को आगामी 1 नवम्बर को 22 साल पूरे हो जाएंगे। इस मौके पर 23वें राज्य स्थापना दिवस का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति और सभ्यता को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की कवायद में तीसरी बार राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का भव्य एवं गरिमामय आयोजन 1 से 3 नवम्बर तक राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में होगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर राज्य की ओर से मंत्री, संसदीय सचिव, विधायकगण सहित अन्य जनप्रतिनिधि देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, मंत्रीगण, जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करने पहुंच रहे हैं।



राज्योत्सव एवं राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के लिए आमंत्रण की कड़ी में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को आमंत्रित करने विधायक श्रीमती अनिता योगेन्द्र शर्मा और डॉ. लक्ष्मी ध्रुव पहुंची। उन्होंने गहलोत से मुलाकात कर उन्हें छत्तीसगढ़ की आदिवासी कलाकृति भेंट करते हुए महोत्सव में सम्मिलित होने  आमंत्रित किया। वहीं असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमन्त बिश्व शर्मा से मुलाकात कर संसदीय सचिव पारसनाथ राजवाड़े ने आमंत्रित किया। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से विधायक खेलसाय सिंह एवं संसदीय सचिव श्रीमती रश्मि आशीष सिंह ने मुलाकात की।



उन्होंने मुख्यमंत्री सोरेन को रायपुर में आयोजित हो रहे तृतीय राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर से निमंत्रण पत्र दिया। पुद्दूचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगास्वामी से संसदीय सचिव इन्द्रशाह मंडावी एवं विधायक दलेश्वर साहू ने मुलाकात कर आमंत्रण पत्र सौंपा। सिक्किम के लोक निर्माण एवं संस्कृति मंत्री संदूप लेपचा को आमंत्रित करने पहुंचे संसदीय सचिव कुंवरसिंह निषाद एवं विधायक भुनेश्वर बघेल ने आमंत्रण पत्र और आदिवासी कलाकृति भेंट किया। विधायक सत्यनारायण शर्मा ने लक्षद्वीप के प्रशासक के प्रतिनिधि से मुलाकात कर उन्हें आमंत्रित किया है।



इसी कड़ी में संसदीय सचिव गुरूदयाल बंजारे ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को, संसदीय सचिव द्वारिकाधीश यादव ने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मानिक साहा को, संसदीय सचिव शिशुपाल सोरी ने जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अरूण मेहता को और लघु वनोपज संघ के जीएम एस. मनीवासगन ने तमिलनाडु सरकार के उद्योग मंत्री थांगम थेन्नारासु को आमंत्रित किया है।



गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ की आदिवासी कला संस्कृति, रीति-रिवाज, उत्सव, परम्परा के संरक्षण एवं संवर्धन तथा देश के राज्यों सहित विश्व के अन्य देशों में निवासरत आदिवासी लोगों के कला-संस्कृति के आदान-प्रदान के उद्देश्य से भव्य आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन शुरू किया गया है।

 

 

रायपुर में अंतर्राष्ट्रीय कृषि मड़ई का आयोजन, महासमुन्द भी आएंगे 10 देशों के कृषि वैज्ञानिक

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महासमुन्द।रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आज चौदह अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय कृषि मड़ई का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉक्टर चरणदास महंत होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे करेंगे। वहीं, सोलह अक्टूबर को कृषक सम्मेलन होगा, जिसे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल संबोधित करेंगे। अट्ठारह अक्टूबर तक चलने वाले इस मेले के दौरान प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसमें कृषि के नये यंत्रों और उपकरणों का प्रदर्शन किया जाएगा।



इस मड़ई के आयोजन में अन्तर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के साथ ही फिलीपींस सहित कुछ अन्य देशों की संस्थाएं सहयोग कर रही हैं। इस दौरान कृषि वैज्ञानिकों का संवाद कार्यक्रम होगा, जिसमें कृषि उद्यमी और प्रगतिशील किसान शामिल होंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दस देशों के कृषि वैज्ञानिक महासमुन्द जिले के ग्राम कौंदकेरा आएंगे। यहां प्रगतिशील व नवाचारी कृषक योगेश्वर चंद्राकर के खेत में लगे ब्लैक, ग्रीन, रेड और व्हाइट चार वेराइटी के चावल वाले धान फसल का अवलोकन करेंगे।

महासमुन्द की बेटी की ऊंची उड़ान, नासा के प्रोजेक्ट के लिए चयन

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महासमुंद। जिला मुख्यालय महासमुन्द में नयापारा के स्वामी आत्मानंद शासकीय इंग्लिश मीडियम स्कूल की कक्षा 11वीं की छात्रा रितिका ध्रुव का चयन नासा (National Aeronautics and Space Administration) के सिटीजन साईंस प्रोजेक्ट के अंतर्गत क्षुद्रग्रह खोज अभियान के लिए हुआ है। नासा का यह प्रोजेक्ट इसरो के साथ अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय खोज सहयोग कार्यक्रम के अंतर्गत साझेदारी का हिस्सा है। सोसाइटी फॉर स्पेस एजुकेशन रिसर्च एंड डेवलपमेंट (एसएसईआरडी) ने क्षुद्र ग्रह खोज अभियान की प्रक्रिया के माध्यम से छात्रों को प्रोत्साहित करने कहा है।


 

इस प्रोजेक्ट के लिए देशभर से छह स्कूली विद्यार्थियों को चुना गया है। इसमें छत्तीसगढ़ के सिरपुर की रहने वाली और महासमुन्द स्थित स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल की छात्रा रितिका ध्रुव भी शामिल है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम  ने रितिका ध्रुव की इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उल्लेखनीय है कि छात्रा रितिका ध्रुव बचपन से ही विज्ञान के प्रति रूचि रखती रही है। कक्षा 8वीं में रहने के दौरान उसने पहली बार अंतरिक्ष प्रश्नोत्तरी स्पर्धा में हिस्सा लिया था।

इसके बाद वे लगातार विज्ञान संबंधी गतिविधियों में प्रतिभागी बनती रही है। नासा के प्रोजेक्ट के लिए जब आवेदन आमंत्रित किया गया, तब निर्धारित प्रारूप में रितिका ने भी आवेदन करते हुए अपना प्रोजेक्ट रखा। चयन के स्तरों में पहले उन्होंने बिलासपुर में विषय संबंधी प्रश्नोत्तरी प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लिया तो इसके बाद भिलाई स्थित आईआईटी में अपनी प्रस्तुति दी। फिर जाकर रितिका को इसरो के श्रीहरिकोटा (आंध्रप्रदेश) सेंटर में प्रशिक्षण के लिए आमंत्रित किया गया। इस प्रोजेक्ट में रितिका के साथ देश के छह अन्य स्कूली विद्यार्थियों का चयन हुआ है। 

जिनमें वोरा विघ्नेश (आंध्रप्रदेश), वेम्पति श्रीयेर (आंध्रप्रदेश), ओलविया जॉन (केरल), के. प्रणीता (महाराष्ट्र) और श्रेयस सिंह (महाराष्ट्र) शामिल हैं। इन विद्यार्थियों ने अंतरिक्ष के वैक्यूम में ब्लैक होल से ध्वनि की खोज विषय पर एक प्रस्तुति दी थी। इसमें स्वामी आत्मानंद शासकीय इंग्लिश मीडियम स्कूल नयापारा महासमुन्द की छात्रा रितिका ने ध्रुव अपनी टीम का प्रतिनिधित्व किया एवं बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। जज पैनल में डॉ. बेलवर्ड (नासा), डॉ. जोनाथ (इसरो) और डॉ. ए. राजराजन (सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र) शामिल थे। 

वैज्ञानिक जजों की पूरी टीम ने रितिका ध्रुव को बधाई दी और उन्हें उन्हें एसडीएससी में अधिक जानने के लिए आमंत्रित किया। इसी क्रम मे रितिका ध्रुव प्रशिक्षण के लिए 1 अक्टूबर से 6 अक्टूबर तक सतीश धवन स्पेस सेंटर हरिकोटा आंध्रप्रदेश में प्रशिक्षण लेने पहुंची है। अगले चरण का प्रशिक्षण नवम्बर में बैंगलूरू इसरो में क्षुद्रग्रह प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेंगी

विशेष लेख : विश्व पर्यटन दिवस : देश के पर्यटन नक्शे में तेजी से उभर रहा है छत्तीसगढ़

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रायपुर। पर्यटन की दृष्टि से छत्तीसगढ़ अत्यंत समृद्ध राज्य है। छत्तीसगढ़ की धरती वन और खनिज संपदा से भरपूर तो है ही इसके साथ ही यहां की कला, संस्कृति और पर्यटन स्थल भी आकर्षण के केन्द्र है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व और छत्तीसगढ़ के पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू के मार्गनिर्देशन में छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल द्वारा प्रदेश में पर्यटन विकास एवं पर्यटकों की गतिविधियों के लिए राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है कि कोविड महामारी के दौर से उबरने के बाद छत्तीसगढ़ में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 



वर्ष 2021 में भारतीय और विदेशी मिलाकर 1 करोड़ 15 लाख 32 हजार सैलानियों ने छत्तीसगढ़ का भ्रमण किया है। छत्तीसगढ़ एक ऐसी पवित्र भूमि है, जहां वनवास काल में भगवान राम के चरण उत्तर में कोरिया जिले के सीतामढ़ी हरचौका से दक्षिण में सुकमा जिले के कोंटा तक पड़े। उत्तर से दक्षिण तक सात सौ किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला  विविध प्रकार के प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक धरोहरों को समेटे हुए हैं। यहां की धरती वन, वन्यजीव, नदी, पर्वत-पहाड़ और झरनों जैसी प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है।

उत्तर के पाट क्षेत्र से दक्षिण की पहाडियों तक प्रकृति द्वारा उकेरे अनेक रमणीय प्राकृतिक स्थल और अनुपम सौंदर्य इस राज्य को प्रकृति का वरदान है। भौगोलिक खूबसूरती और सांस्कृतिक विरासत को धारण किये इस छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास की असीम संभावनाएं हैं, यहां के प्राचीन विरासत ,धार्मिक स्थल और प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को सुखद अनूभूति देते हैं। छत्तीसगढ़ में सिरपुर, भोरमदेव जैसे कई ऐसे पुरातात्विक एवं धार्मिक महत्व के स्थल है जो वास्तुकौशल की कला का अनुपम उदाहरण है। यहां के वास्तु सौंदर्य अपनी अद्भुत रचनात्मकता के कारण घरेलू एवं विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते रहे हैं।



छत्तीसगढ़ में अनगिनत ऐसे रमणीय प्राकृतिक स्थल विद्यमान हैं जो पर्यटकों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इसके अलावा बीते कुछ समय में राज्य के दुर्गम ईलाकों में कुछ नये प्राकृतिक स्थलों की पहचान भी की गई है जिनके विकास के प्रयास किये जा रहे हैं।इन पर्यटन स्थलों में पर्यटन की दृष्टि से नई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। राज्य में पर्यटन की विकास की असीम संभावनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के दिशा निर्देश पर राज्य भर के प्राकृतिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का विकास किया जा रहा है। 

यहां के पर्यटन क्षेत्रों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने बहुआयामी विकास की दिशा में कार्य किये जा रहे हैं। जनजातीय अंचल की प्राकृतिक एवं कला-संस्कृति कों विश्वपटल पर लाने के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा से ग्रामीण पर्यटन का  विकास किया जा रहा है। इन स्थलों में खान-पान एवं आवास की सुविधा युक्त होटल, मोटल ,रिसार्ट एवं रेस्टोरेंट की सुविधा विकसित की जा रही है। भगवान राम का ननिहाल छत्तीसगढ़, राम नाम की महिमा यहां की संस्कृति में रची बसी हुई है।

छत्तीसगढ़ की संस्कृति में जब किसी से मिला जाता है तो राम नाम से संबोधन किया जाता है। यहां के कण-कण में राम का नाम बसा है। यहीं भगवान राम की माता ‘‘ माता कौशल्या‘‘ का पूरे विश्व का एकमात्र मंदिर स्थित है। राजधानी रायपुर के निकट चंदखुरी स्थान पर यह मंदिर स्थित है। इस स्थान की महिमा और जनमानस में बसी भगवान राम की आस्था को देखकर राज्य सरकार द्वारा चंदखुरी का विकास पौराणिक कथाओं में दर्शाए गए वातावरण के अनुसार किया जा रहा है। वनवास के दौरान भगवान का राम के चरण जिस-जिस स्थान पर पड़े उन राममय क्षेत्र का विकास ‘‘ राम वनगमन पर्यटन परिपथ विकास परियोजना‘‘ के माध्यम से किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा राम वनगमन पर्यटन परिपथ के 75 स्थलों को चिन्हित किया गया  है। प्रथम चरण में 9 स्थलों सीतामढ़ी-हरचौका (कोरिया)रामगढ़ (सरगुजा), शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा-सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर) और रामाराम (सुकमा) में राम वनगमन पर्यटन परिपथके रूप में नई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। पूरे परिसर का सैांदर्यीकरण भी किया जा रहा है। राम वन गमन पर्यटन परिपथ लम्बाई लगभग 2260 किलोमीटर है जिसका  निर्माण, चौड़ीकरण एवं मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। यहां पर्यटकों के ठहरने, भोजन, पानी, पार्किंग आदि की व्यवस्था के लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा कार्य किया जा रहा है।

राज्य के डोंगरगढ़ पहाड़ी पर माता बम्लेश्वरी देवी विराजमान है। यह पहाड़ी राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ नगर में स्थित है। माँ बम्लेश्वरी की इस नगरी डोंगरगढ़ को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने प्रसाद योजना में शामिल किया है। इस योजना के तहत् डोंगरगढ़ का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के रूप में व्यवस्थित विकास का काम हाथ में लिया गया है। यहां श्राद्धालुओं के लिए ‘‘श्रीयंत्र‘‘ के बनावट के अनुरूप पिलग्रिम एक्टिविटी सेंटर (श्रद्धालुओं के लिए सुविधा केन्द्र) का निर्माण  किया जा रहा है।स्वदेश दर्शन योजना के तहत् छत्तीसगढ़ के 13 स्थानों पर ट्राइबल टूरिज्म सर्किट' विकसित की जा रही है। 

इस परियोजना के तहत् जशपुर ,कुनकुरी ,मैनपाट, कमलेश्वरपुर, महेशपुर, कुरदर, सरोधादादर, गंगरेल, नथियानवागांव, कोण्डागांव, जगदलपुर, चित्रकोट और तीरथगढ़ को विकसित किया जा रहा है। इनमें से कुरदर हिल ईको रिसॉर्ट कुरदर (बिलासपुर), बैगा एथनिक रिसॉर्ट सरोधादादर (कबीरधाम), धनकुल एथनिक रिसॉर्ट (कोण्डागांव), सरना एथनिक रिसॉर्ट बालाछापर (जशपुर), कोईनार हाइवे ट्रीट कुनकुरी (जशपुर), हिल मैना हाईवे ट्रीट नथियानवागांव (कांकेर), सतरेंगा बोट क्लब एंड रिसॉर्ट सतरेंगा (कोरबा) और वे साइड अमेनिटी महेशपुर (सरगुजा) में पर्यटन सुविधाएं विकसित की गई हैं।

पर्यटकों की सुविधा के लिए उच्च स्तरीय पर्यटन सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। राज्य के प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थानों पर एथनिक रिसॉर्ट, कॉटेज,वॉटर स्पोर्ट्स जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। यहां राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्य प्राणी अभ्यारण्यों के साथ-साथ गौरवशाली लोक संस्कृति का अद्वितीय उदाहरण भी है। बस्तर क्षेत्र में कुटुमसर गुफा एवं कांगेर घाटी, राष्ट्रीय उद्यान, चित्रकोट जलप्रपात महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है जो अपनी अद्भुत छटा के कारण पर्यटकों का दिल जीत रहे हैं। छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों के बारे में पर्यटकों को सुलभ जानकारी उपलब्घ कराने तथा पर्यटन स्थलों के भ्रमण के लिए व्यक्तिगत एवं टूर पैकेज के अन्तर्गत आरक्षण की सुविधा प्रदान करने के लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल द्वारा नई दिल्ली, गुजरात मध्य प्रदेश के अतिरिक्त प्रदेश में 11 स्थानों पर पर्यटन सूचना केन्द्र स्थापित किया गया है।

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