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बस्तर में 'तिरंगा यात्रा 2026' का आगाज़: महिला बाइकर्स भी होंगी शामिल, पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचेगा शांति और विकास का संदेश

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 रायपुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बस्तर अंचल में राष्ट्रभक्ति, शांति और विकास का संदेश लेकर 12 से 15 अगस्त तक भव्य ‘बस्तर तिरंगा यात्रा 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत आयोजित इस मोटरसाइकिल यात्रा में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी विशेष रूप से शामिल होंगे। यह यात्रा बस्तर के उन दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों एवं ग्रामों तक पहुंचेगी, जो कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे हैं और अब शांति, सुरक्षा व विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहे हैं।




1. महिला बाइकर्स की विशेष सहभागिता

इस यात्रा में प्रत्येक जिले से बड़ी संख्या में बाइक राइडर्स के साथ-साथ महिला बाइकर्स भी हाथ में तिरंगा थामे विशेष रूप से शामिल होंगी। इसके अलावा स्थानीय युवा, स्वयंसेवी संगठन, महिला समूह, NCC, NSS, नेहरू युवा केंद्र, स्काउट-गाइड और जनप्रतिनिधि भी अपनी सहभागिता निभाएंगे।

2. 3 दिवसीय यात्रा का विस्तृत रूट प्लान

12 अगस्त (पहला दिन): यात्रा नारायणपुर से प्रारंभ होकर धौड़ाई, कन्हारगांव, कोड़ेनार, बोदली, सातधार, बारसूर और गीदम होते हुए दंतेवाड़ा पहुंचेगी, जहाँ रात्रि विश्राम होगा।

13 अगस्त (दूसरा दिन): दंतेवाड़ा से कुआकोंडा, भुसारास घाटी, चिंगावरम, सुकमा, एर्राबोर, मनीकोंटा, दोरनापाल, पोलमपल्ली, बुर्कापाल, मिनपा-ताड़मेटला, चिंतलनार, जगरगुंडा, सिलगेर, टेकलगुड़ेम और आवापल्ली होते हुए बीजापुर पहुंचेगी, जहाँ रात्रि विश्राम होगा।

14 अगस्त (तीसरा दिन): बीजापुर से आवापल्ली, उसूर, गलगम, नंबी और ताड़पाला होते हुए कुर्रेगुट्टालु पहाड़ी पहुंचेगी। यात्रा के अंतिम पड़ाव पर कभी माओवादियों का गढ़ माने जाने वाले इस पहाड़ी स्थल पर तिरंगा फहराया जाएगा।

3. शहीदों को श्रद्धांजलि और शहादत स्थल की मिट्टी का संरक्षण

नक्सली हमलों में शहीद हुए वीर जवानों और नागरिकों के स्मरणीय स्थलों पर पुष्पांजलि अर्पित कर दो मिनट का मौन रखा जाएगा तथा शहीद परिवारों का सम्मान किया जाएगा। एक ऐतिहासिक पहल के रूप में, शहीदों की शहादत वाले स्थानों की पवित्र मिट्टी को संग्रहित कर भविष्य में निर्मित होने वाले शहीद संग्रहालय में सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां इससे प्रेरणा ले सकें।

4. ‘एक पेड़ शहीदों के नाम’ अभियान एवं जन-जागरूकता

प्रत्येक घटना स्थल पर शहादत की संख्या के बराबर पौधरोपण किया जाएगा। इसके साथ ही यात्रा के दौरान युवाओं और विद्यार्थियों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित होंगे तथा नशामुक्ति एवं साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया जाएगा।

5. सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विकास प्रदर्शनी

यात्रा के दौरान आयोजित सांस्कृतिक संध्याओं में बस्तर के पारंपरिक लोकनृत्य, देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए जाएंगे। साथ ही सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि व डिजिटल सेवाओं पर आधारित विकास प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी और मुख्यधारा में लौटे (पुनर्वासित) युवाओं की सफलता की कहानियों को प्रदर्शित किया जाएगा।

6. 'बस्तर शांति दौड़' का आयोजन

प्रत्येक जिला मुख्यालय में बस्तर की वादियों के मध्य 'शांति दौड़', विशाल तिरंगा मार्च, राष्ट्रगान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

बस्तर की नई पहचान का प्रतीक

‘बस्तर तिरंगा यात्रा 2026’ केवल एक बाइक रैली नहीं, बल्कि शहादत को नमन, युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने, सामाजिक एकता मजबूत करने और बस्तर की बदलती सुखद तस्वीर को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का एक ऐतिहासिक अभियान है।

नारायणपुर के आदिवासी अंचल प्रतिभावान विद्यार्थियों का नई दिल्ली स्थित संसद भवन का शैक्षणिक भ्रमण

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राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता में EMRS छेरीबेड़ा के बच्चों ने बिखेरी चमक, छत्तीसगढ़ की टीम उपविजेता 

रायपुर- राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता (National Youth Parliament Competition) संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा स्कूली और कॉलेज छात्रों के लिए आयोजित एक प्रमुख कार्यक्रम है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय प्रक्रियाओं की समझ और नेतृत्व गुणों का विकास करना है ताकि वे जिम्मेदार नागरिक और भविष्य के जन-प्रतिनिधि बन सकें।  जब हौसले बुलंद हों और मार्गदर्शन सही मिले, तो छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के नारायणपुर के सुदूर वनांचल की प्रतिभाएँ भी देश की राजधानी दिल्ली तक अपनी धमक दर्ज करा सकती हैं।

छत्तीसगढ़ की टीम उपविजेता बनकर उभरी

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के नारायणपुर जिले में स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) छेरीबेड़ा के विद्यार्थियों ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। राजस्थान के उदयपुर (खेरवाड़ा) में आयोजित आंचलिक (जोनल) स्तरीय राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता में इस विद्यालय की 53 सदस्यीय टीम ने न केवल छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया, बल्कि अपने उत्कृष्ट और ओजस्वी प्रदर्शन से पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की टीमों के बीच कड़ा मुकाबला था, जिसमें छत्तीसगढ़ की टीम उपविजेता बनकर उभरी।

संसद की कार्यवाही देखने नई दिल्ली जाएंगे 8 होनहार विद्यार्थी

इस प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाने वाले 8 प्रतिभावान विद्यार्थियों का चयन राष्ट्रीय स्तर के लिए हुआ है। इन बच्चों को अब देश के लोकतंत्र के मंदिर—नई दिल्ली स्थित संसद भवन का शैक्षणिक भ्रमण करने और वहाँ लाइव कार्यवाही देखने का ऐतिहासिक अवसर मिलेगा। ज्ञात हो कि स्पीकर की भूमिका में हर्षा को प्रथम स्थान,द्वितीय स्थान में मनसाय और अनुराधा तथा तृतीय स्थान अंजीला, निकिता, वेदिका, जयबति और शामी को मिला। इन बच्चों ने जिस आत्मविश्वास के साथ लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संसदीय बहसों को मंच पर जीवंत किया, उसने निर्णायकों का दिल जीत लिया।



सफलता के पीछे का 'मार्गदर्शन और समर्पण'

इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे विद्यालय के प्राचार्य का प्रेरणादायी नेतृत्व और विज़न रहा है। वहीं, बच्चों को संसद की बारीकियां सिखाने और उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाने में कार्यक्रम प्रभारी व सामाजिक विज्ञान के शिक्षक के कड़े प्रशिक्षण और समर्पण की मुख्य भूमिका रही। प्राचार्य ने इस गौरवमयी उपलब्धि पर NESTS हेड क्वार्टर (नई दिल्ली), EMRS स्टेट सोसायटी CTD रायपुर, नारायणपुर कलेक्टर  और आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त  सहित सभी उच्चाधिकारियों का आभार व्यक्त किया है, जिनके निरंतर सहयोग से बच्चों को आगे बढ़ने का हौसला मिला।

बस्तर संभाग के नारायणपुर जैसे वनांचल क्षेत्र के बच्चों की इस बड़ी छलांग से पूरे प्रदेश में हर्ष का माहौल है। विद्यालय परिवार, अभिभावकों और क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने चयनित छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

​दशकों का अंधेरा छँटा: 'नियद नेल्लानार योजना' से जगमगाए नारायणपुर के वनांचल गांव

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल में बसे नारायणपुर जिले के ग्राम मोहन्दी और मसपुर के लोगों के लिए साल 2026 की यह गर्मियां एक ऐतिहासिक बदलाव लेकर आईं। दशकों से लालटेन और ढिबरी की मद्धम रोशनी में जिंदगी गुजार रहे इन आदिवासी बाहुल्य गांवों में जब पहली बार बिजली का बल्ब जला, तो ग्रामीणों की आंखें खुशी से छलक उठीं। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 'नियद नेल्लानार (आपका अच्छा गांव) योजना' ने इन दुर्गम इलाकों में विकास का नया सवेरा ला दिया है।

​दुर्गम राहें, दृढ़ संकल्प और सफलता

घने जंगलों, ऊंची पहाड़ियों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ग्राम मोहन्दी के मिचिंगपारा, कोडियारपारा व बीचपारा और ग्राम मसपुर के गुडरापारा तक बिजली पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं था। लेकिन जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के दृढ़ संकल्प के आगे हर बाधा छोटी साबित हुई।

कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) की टीम और निर्माण एजेंसी एम/एस माँ शारदा ने युद्धस्तर पर काम करते हुए समय-सीमा के भीतर इस चुनौतीपूर्ण विद्युत लाइन विस्तार कार्य को सफलता पूर्वक पूरा किया।

लाखों का निवेश, परिवारों के जीवन में उजाला

वनांचल के इन गांवों को रोशन करने के लिए सरकार ने दिल खोलकर बजट स्वीकृत किया। जिसमें ​ग्राम मोहन्दी में लगभग 61.79 लाख रूपए की लागत से तीनों पाराओं में बिजली का विस्तार किया गया, जिससे सीधे 40 परिवारों को पहली बार बिजली मिली। ​ग्राम मसपुर गुडरापारा 22.42 लाख रूपए की लागत से कार्य पूर्ण कर 5 परिवारों के घरों को विद्युत कनेक्शन से जोड़ा गया।

बदलेगी गांवों की तस्वीर: शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका को नई उड़ान

बिजली पहुंचने से वनांचल के इन गांवों में अब विकास की रफ्तार तेज होने वाली है। अब रात के अंधेरे में बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकेगी। बेहतर रोशनी मिलने से बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य को नई दिशा मिलेगी। मोबाइल चार्जिंग, पंखे और अन्य आवश्यक बिजली उपकरणों के उपयोग से ग्रामीणों की दैनिक जीवनशैली बेहद सुगम हो गई है। बिजली की उपलब्धता से स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य केंद्रों और जीवन रक्षक चिकित्सा उपकरणों का संचालन अब बेहतर ढंग से हो सकेगा। ग्रामीणों में अब स्वरोजगार को लेकर नया उत्साह है। सिलाई, कुटीर उद्योग और छोटे व्यवसायों के शुरू होने से गांवों में आजीविका के नए साधन विकसित होंगे।

सपना हुआ साकार, ग्रामीणों ने जताया आभार

​वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अपने घरों को रोशनी से जगमगाता देख ग्रामीणों के चेहरों पर आत्मसंतुष्टि और खुशी की लहर है। ग्रामीणों का कहना है कि यह बदलाव उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल के लिए राज्य शासन, जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया है।

​'नियद नेल्लानार योजना' सिर्फ गांवों तक बिजली पहुंचाना नहीं, बल्कि वनांचल के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की एक सशक्त मुहीम बन चुकी है। प्रशासन का लक्ष्य अब जिले के अन्य वंचित गांवों में भी इसी तरह चरणबद्ध तरीके से विकास की रोशनी पहुंचाना है।

नारायणपुर की अनूठी पहल: ट्रैक्टर से दुर्गम वनांचल गांवों तक पहुंचा 3 माह का राशन

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खाद्यान्न और पोषण सामग्री पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विशेष रणनीतियां लागू की गई हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश है कि राज्य के पहुच विहीन क्षेत्रों में वर्षा व भौगोलिक बाधाओं को पार करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर राशन दुकानें खोलना, ट्रैक्टर के माध्यम से डोर-स्टेप डिलीवरी और मॉनसून से पहले तीन महीने का अग्रिम राशन भंडारण करने के निेर्दश दिए हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देश के परिपालन में नारायणपुर जिले के दूरस्थ और दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ समय पर पहुंचाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक विशेष और सराहनीय पहल की है। बारिश के मौसम और कठिन रास्तों को देखते हुए प्रशासन ने ट्रैक्टरों के माध्यम से अंदरूनी गांवों तक तीन माह का खाद्यान्न सुरक्षित पहुंचाया है। कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देशन में जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित छह गांवों मुरुमवाड़ा, गुडेकोर, दिवालूर, धोबे, बोटेर और हरबेल के राशनकार्डधारी हितग्राहियों को जुलाई, अगस्त और सितम्बर माह का राशन एक साथ वितरित किया गया।

6 गांवों के 151 परिवारों को मिला लाभ

खाद्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार भौगोलिक रूप से बेहद दुर्गम क्षेत्रों में बसे कुल 151 राशनकार्डधारी परिवारों को उनकी निर्धारित मात्रा में तीन महीने का खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया है। लाभान्वित गांवों और परिवारों में मुरुमवाड़ा के 98 परिवार, दिवालूर के 32 परिवार, गुडेकोर के 13 परिवार, धोबे के 03 परिवार, हरबेल के 03 परिवार, बोटेर के 02 परिवार शामिल हैं।

बारिश और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों को दी मात

इन वनांचल गांव घने जंगलों, कच्चे रास्तों और नदी-नालों से घिरे होने के कारण सामान्य दिनों में भी परिवहन के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण माने जाते हैं। बरसात के दिनों में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है, जिससे ग्रामीणों को राशन के लिए कई किलोमीटर की पैदल और जोखिमभरी यात्रा करनी पड़ती थी। इस समस्या को भांपते हुए जिला प्रशासन ने मानसून के दौरान राशन सामग्री को सीधे ट्रैक्टर के जरिए गांवों तक भिजवाया, जिससे ग्रामीणों को अपने घर के पास ही राशन मिल गया।

बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों को मिली बड़ी राहत

खाद्यान्न वितरण की पूरी प्रक्रिया स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के कर्मचारियों की मौजूदगी में अत्यंत पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराई गई। गांव में ही राशन मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इस पहल से उनके समय और श्रम दोनों की बचत हुई है। विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग हितग्राहियों के लिए यह व्यवस्था किसी वरदान से कम नहीं रही, क्योंकि उन्हें अब राशन के लिए कठिन रास्तों से होकर नहीं गुजरना पड़ा।

अंतिम छोर के व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना लक्ष्य

इस संबंध में जिला प्रशासन का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य जिले के अंतिम छोर पर बसे प्रत्येक पात्र और जरूरतमंद परिवार तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाना है। इसके लिए दुर्गम क्षेत्रों में विशेष परिवहन व्यवस्था की कार्ययोजना पर लगातार काम किया जा रहा है। प्रशासन की इस मुस्तैदी ने यह साबित कर दिया है कि भौगोलिक कठिनाइयां भी जनता तक उनका हक पहुंचाने में बाधा नहीं बन सकतीं।

अबूझमाड़ में कॉफी की खुशबू से बदलेगी तस्वीर: सतत खेती से आदिवासी समुदायों को मिलेगा नया रोजगार

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के सबसे दुर्गम और वनाच्छादित क्षेत्रों में शामिल अबूझमाड़ अब विकास की नई दिशा में कदम बढ़ा रहा है। वर्षों तक भौगोलिक दुर्गमता और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में अब कॉफी की खेती के माध्यम से स्थानीय आदिवासी समुदायों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर तैयार करने की पहल शुरू की गई है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में आजीविका बढ़ाने की नीति के तहत नारायणपुर जिला प्रशासन ने अबूझमाड़ के चयनित वन ग्रामों में कॉफी की खेती शुरू करने की तैयारी शुरू कर दी है।

इसी क्रम में नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन ने कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया के विशेषज्ञों के साथ कुटुल, कच्छपाल, कोडलीयार, इराकभट्टी और टोके जैसे गांवों का दौरा कर वहां की जलवायु, मिट्टी, वर्षा, तापमान और ऊंचाई का वैज्ञानिक अध्ययन कराया।

विशेषज्ञों की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, अबूझमाड़ की प्राकृतिक परिस्थितियां कॉफी आधारित कृषि-वनीकरण (Agroforestry) के लिए अनुकूल हैं। परियोजना के पहले चरण में उपयुक्त भूमि की पहचान, पौधशालाओं (नर्सरी) की स्थापना और किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से कॉफी के पौधे लगाए जाएंगे।

कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया पूरे प्रोजेक्ट के दौरान तकनीकी मार्गदर्शन देगा, जिसमें नर्सरी विकास, पौधरोपण, फसल प्रबंधन और किसानों का प्रशिक्षण शामिल होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर क्षेत्र की जलवायु, पर्याप्त वर्षा, उपजाऊ वन भूमि और प्राकृतिक छायादार वातावरण जैविक (ऑर्गेनिक) कॉफी उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त हैं। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी), जगदलपुर द्वारा प्रकाशित तकनीकी अध्ययन में भी बस्तर को कॉफी उत्पादन के लिए संभावनाओं से भरपूर क्षेत्र बताया गया है।

कॉफी आधारित कृषि से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। छायादार पेड़ मिट्टी का कटाव रोकने, जैव विविधता बनाए रखने, पोषक तत्वों के संरक्षण और प्राकृतिक पारिस्थितिकी को मजबूत करने में सहायक होंगे।

जिला प्रशासन का मानना है कि लगभग चार वर्षों के बाद कॉफी का व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो सकता है। इसके बाद स्थानीय लोगों को कॉफी उत्पादन, नर्सरी, पौधरोपण, रखरखाव, तुड़ाई और प्रसंस्करण जैसे कार्यों में स्थायी रोजगार के अवसर मिलेंगे। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की भी इस परियोजना में महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य अबूझमाड़ की प्राकृतिक संपदा का संरक्षण करते हुए विकास को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक योजना और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से कॉफी की खेती इस क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक और टिकाऊ आजीविका का मजबूत आधार बन सकती है।

इसके अलावा भविष्य में अबूझमाड़ के उपयुक्त क्षेत्रों में चाय की खेती की संभावनाओं का भी अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

यदि यह परियोजना सफल होती है, तो अबूझमाड़ में कॉफी की खेती केवल आर्थिक विकास का माध्यम नहीं बनेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी समुदायों के सतत विकास का एक नया मॉडल भी स्थापित करेगी।

नारायणपुर अंचल में अमन शांति, आजीविका और स्थानीय सहभागिता बढ़ाने पर फोकस: मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री विभिन्न कार्यक्रमों में हुए शामिल

रायपुर- दो दिवसीय नारायणपुर प्रवास पर पहुँचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अबूझमाड़ क्षेत्र में आयोजित पीस हाफ मैराथन के शुभारंभ के साथ-साथ अनेक सामाजिक, खेल और पर्यटन गतिविधियों में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में शांति स्थापना, आजीविका संवर्धन और स्थानीय सहभागिता को बढ़ाने के लिए राज्य शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों का अवलोकन किया, उन्हें प्रोत्साहित किया तथा लोगों से संवाद कर सहभागिता और विश्वास को और मजबूत किया।

बाइकर्स को दिखाई हरी झंडी

मुख्यमंत्री साय ने शांत सरोवर के समीप रायपुर के छत्तीसगढ़ राइडिंग क्लब के 40 बाइकर्स को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह बाइकर्स समूह नारायणपुर के सुदूर पर्यटन स्थल कच्चापाल तक की यात्रा करेगा। इस पहल के माध्यम से अबूझमाड़ को जानने, समझने और शांति का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है।

शांत सरोवर में नौका विहार

बिजली गाँव के समीप स्थित शांत सरोवर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वन मंत्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, सांसद बस्तर महेश कश्यप एवं लघु वनोपज के अध्यक्ष रूपसाय सलाम के साथ नौका विहार का आनंद लिया। स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह विशेष पहल स्थानीय प्रशासन के द्वारा की गई है। 

तीर-धनुष से साधा लक्ष्य

मुख्यमंत्री साय ने बिंजली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान तीरंदाजी के स्थानीय युवा खिलाड़ियों से आत्मीय मुलाकात की और स्वयं तीर-धनुष उठाकर लक्ष्य साधते हुए खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि बस्तर अंचल में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आदिवासी समाज की पारंपरिक दक्षताओं को आधुनिक प्रशिक्षण से जोड़कर राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। शांति, आजीविका और खेलों के विकास में प्रशासन द्वारा समन्वित प्रयास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार जिला प्रशासन और सुरक्षा बलों के साथ मिलकर क्षेत्र में शांति स्थापना, आजीविका संवर्धन, खेल प्रतिभाओं को मंच देने और विश्वास का वातावरण बनाने के लिए सतत कार्य कर रही है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी सुंदरराज पी, कलेक्टर नम्रता जैन, पुलिस अधीक्षक रॉबिन्सन गुरिया, सीईओ आकांक्षा शिक्षा खलखो सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

राजकुमार भगत ने नारायणपुर धान खरीदी केंद्र में बेचा धान

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ऑनलाइन टोकन जारी होने से किसानों को मिल रही बड़ी सुविधा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार राज्यभर के सभी धान खरीदी केंद्रों में खरीदी प्रक्रिया सुचारू और व्यवस्थित रूप से जारी है। इसी क्रम में आज जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड के ग्राम नारायणपुर धान खरीदी केंद्र में किसान राजकुमार भगत अपने धान की बिक्री के लिए पहुँचे। उन्होंने बताया कि उनका ऑनलाइन टोकन आसानी से कट गया और उन्हें किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ा।

राजकुमार भगत ने कहा कि वे हर वर्ष इसी केंद्र में धान बेचते हैं और इस बार भी सभी व्यवस्थाएँ बेहद सुव्यवस्थित हैं। उन्होंने खरीदी केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं जैसे—ऑनलाइन टोकन जारी व्यवस्था, माइक्रो एटीएम, पर्याप्त बारदाना, पेयजल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर संतोष प्रकट किया।

प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुरूप सभी प्रबंध किसानों की सुविधा को ध्यान में रखकर किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रत्येक किसान को धान खरीदी की प्रक्रिया सहज, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध हो। इसके लिए प्रशासनिक टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।

क्या है माइक्रो एटीएम सुविधा?

धान उपार्जन केंद्रों में किसानों की त्वरित जरूरतों को पूरा करने हेतु छत्तीसगढ़ सरकार ने माइक्रो एटीएम सुविधा उपलब्ध कराई है। इस सुविधा के माध्यम से किसान 2,000 रुपये से 10,000 रुपये तक की राशि तुरंत प्राप्त कर सकते हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की इस पहल से किसानों को बैंक की शाखाओं में लंबी कतारों में लगने की आवश्यकता नहीं पड़ती, और धान बेचने के तुरंत बाद आवश्यक राशि आसानी से मिल जाती है।

यह सुविधा किसानों की तत्काल आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में अत्यंत मददगार साबित हो रही है और संपूर्ण धान खरीदी प्रक्रिया को और अधिक सुविधाजनक, सुगम एवं किसान-फ्रेंडली बना रही है।

नारायणपुर-अबूझमाड़ को महाराष्ट्र से जोड़ेगा नेशनल हाईवे 130-डी

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कुतुल से नीलांगुर महाराष्ट्र बॉर्डर तक एनएच-130-डी का होगा निर्माण

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने के लिए सरकार सतत प्रयासरत – मुख्यमंत्री साय

रायपुर- बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी के निर्माण को नई गति मिली है। छत्तीसगढ़ शासन ने कुतुल से नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक 21.5 किलोमीटर हिस्से के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस सड़क के निर्माण के लिए न्यूनतम टेंडर देने वाले ठेकेदार से अनुबंध की प्रक्रिया शर्तों सहित पूरी करने के निर्देश लोक निर्माण विभाग मंत्रालय द्वारा प्रमुख अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र रायपुर को दिए गए हैं। कुल तीन खंडों में निर्मित होने वाले 21.5 किलोमीटर सड़क के निर्माण हेतु लगभग 152 करोड़ रुपए न्यूनतम टेंडर दर प्राप्त हुई है, जिसे छत्तीसगढ़ शासन ने मंजूरी प्रदान कर दी है।

यह उल्लेखनीय है कि कुतुल, नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में स्थित है और कुतुल से महाराष्ट्र सीमा पर स्थित नीलांगुर की दूरी 21.5 किलोमीटर है। यह नेशनल हाईवे 130-डी का हिस्सा है। इस सड़क का निर्माण टू-लेन पेव्ड शोल्डर सहित किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि एनएच-130डी राष्ट्रीय राजमार्ग है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 195 किलोमीटर है। यह एनएच-30 का शाखा मार्ग (स्पर रूट) है। यह कोण्डागांव से शुरू होकर नारायणपुर, कुतुल होते हुए नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक जाता है। आगे महाराष्ट्र में यह बिंगुंडा, लहरे, धोदराज, भमरगढ़, हेमा, लकासा होते हुए आलापल्ली तक पहुँचता है, जहाँ यह एनएच-353डी से जुड़ जाता है। इस मार्ग के विकसित होने से बस्तर क्षेत्र सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ जाएगा और व्यापार, पर्यटन एवं सुरक्षा को बड़ी मजबूती प्राप्त होगी।

नेशनल हाईवे 130-डी का कोण्डागांव से नारायणपुर तक का लगभग 50 किमी हिस्सा निर्माणाधीन है। नारायणपुर से कुतुल की दूरी 50 किमी है और वहाँ से महाराष्ट्र सीमा स्थित नीलांगुर तक 21.5 किमी की दूरी है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई 195 किमी है, जिसमें से लगभग 122 किमी का हिस्सा कोण्डागांव-नारायणपुर से कुतुल होते हुए नीलांगुर तक छत्तीसगढ़ राज्य में आता है। इस सड़क के बन जाने से बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से सीधा और मजबूत सड़क संपर्क मिलेगा तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित एवं सुगम यातायात सुविधा सुलभ हो सकेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के सहयोग से इस नेशनल हाईवे के अबूझमाड़ इलाके में स्थित हिस्से के लिए फॉरेस्ट क्लियरेंस और निर्माण की अनुमति प्राप्त हुई, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण का रास्ता खुल गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी केवल सड़क नहीं बल्कि बस्तर अंचल की प्रगति का मार्ग है। हमारी सरकार ने इस परियोजना को तेजी देने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। इस सड़क से बस्तर के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। यह सड़क न केवल छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र को जोड़ेगी, बल्कि बस्तर अंचल के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगी। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने के लिए यह परियोजना मील का पत्थर साबित होगी।

नारायणपुर में ITBP का निशुल्क स्वास्थ्य शिविर, महिलाओं और ग्रामीणों को स्वास्थ्य एवं जागरूकता की सुविधा

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छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में, 29वीं बटालियन, इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) ने धनोरा में COB परिसर में “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान” के तहत एक निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया। इस शिविर का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं और आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान करना और बल और समुदाय के बीच आपसी विश्वास और सहयोग को मजबूत करना था।

इस शिविर में लगभग 150 महिलाओं, 50 पुरुषों और 20 बच्चों के साथ ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और ITBP कर्मियों ने भाग लिया। मेडिकल सेवाएँ ITBP सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. दीपक ठाकुर, प्राइमरी हेल्थ सेंटर धनोरा के डॉ. अविनाश शक्रदांडे और उनकी टीम द्वारा प्रदान की गईं। शिविर के दौरान स्वास्थ्य जांच कराई गई और आवश्यक चिकित्सीय सलाह दी गई।

महिलाओं के लिए विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किए गए, जिनमें स्वच्छता, संतुलित पोषण और मौसमी रोगों से सुरक्षा पर जानकारी दी गई। ग्रामीणों को “नशा मुक्त भारत अभियान” के महत्व के बारे में भी संवेदनशील किया गया।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में ITBP कर्मी, स्थानीय ग्रामीण और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। यह पहल न केवल ITBP की सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाती है, बल्कि बल और समुदाय के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करने में एक उत्कृष्ट प्रयास साबित हुई।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने नारायणपुर की बेटियों से जुड़ी घटना पर जताई गंभीर चिंता

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नारायणपुर की तीन बेटियों से संबंधित घटना पर गंभीर चिंता प्रकट की है। यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब इन बेटियों को नर्सिंग ट्रेनिंग और जॉब दिलाने का प्रलोभन देकर दुर्ग रेलवे स्टेशन पर दो ननों के माध्यम से आगरा ले जाया जा रहा था।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस प्रकरण में ह्यूमन ट्रैफिकिंग और मतांतरण की आशंका व्यक्त की जा रही है, जो महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने वाला गंभीर विषय है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच जारी है और यह न्यायालयीन प्रक्रिया में है। सरकार पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है, तथा कानून अपनी प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लेगा।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ एक शांतिप्रिय और समावेशी प्रदेश है जहाँ सभी धर्म और समुदाय के लोग आपसी सद्भाव के साथ रहते हैं। साय ने कहा कि हमारी सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। हमारी बस्तर की बेटियों से जुड़े मुद्दे को राजनीतिक रूप देना दुर्भाग्यजनक है। उन्होंने कहा की कि इस प्रकार की घटनाओं को राजनीतिक रंग देने से बचना चाहिए, विशेषकर जब बात हमारी बस्तर की बेटियों की सुरक्षा से जुड़ी हो।


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