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मोर गांव-मोर पानी अभियान से ग्रामीण आजीविका को मिली नई उड़ान

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47 आजीविका डबरियां किसानों के लिए बनेंगी संबल, जल संरक्षण के साथ बढ़ेगी आय

विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत सिंचाई, मत्स्य पालन और कृषि गतिविधियों को मिलेगा नया आधार

रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू किया गया 'मोर गांव-मोर पानी' महाअभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को एक बड़ा जनआंदोलन बना रहा है। इसके तहत सोख्ता गड्ढे, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, तालाब गहरीकरण और खेत-पोंड जैसी जल संरचनाएं बनाकर भूजल स्तर को बढ़ाया जा रहा है और ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में 'मोर गांव-मोर पानी' अभियान के तहत 'नवा तरिया आय के जरिया' और अन्य जल संरचनाओं के माध्यम से भूजल संवर्धन और जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा और महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर बढ़ रहे हैं।

कृषि एवं मत्स्य पालन के माध्यम से किसानों होंगे आत्मनिर्भर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित मोर गांव-मोर पानी अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, सिंचाई विस्तार और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में प्रभावी पहल साबित हो रहा है। विकसित भारत जी राम जी योजना के अंतर्गत जांजगीर-चांपा जिले में आजीविका आधारित जल संरचनाओं का निर्माण कर किसानों को कृषि एवं मत्स्य पालन के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं।

47 आजीविका डबरियों का निर्माण स्वीकृत

जांजगीर-चांपा जिले में अभियान के तहत कुल 47 आजीविका डबरियों का निर्माण स्वीकृत किया गया है, जिनमें से 35 डबरियों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। वर्षा जल से भर चुकी इन डबरियों के माध्यम से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो रहा है, जिससे खेती का रकबा बढ़ने के साथ कृषि उत्पादन में भी वृद्धि हो रही है।

14 डबरियों में मत्स्य पालन एवं कृषि आधारित गतिविधियां संचालित

आजीविका डबरियां अब केवल जल संरक्षण का माध्यम नहीं रहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का सशक्त स्रोत भी बन रही हैं। वर्तमान में 14 डबरियों में मत्स्य पालन एवं कृषि आधारित गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। डबरियों की मेड़ों पर दलहन, तिलहन तथा अन्य फसलों की खेती से किसानों को अतिरिक्त उत्पादन और बेहतर आमदनी प्राप्त हो रही है। जिले में 4 डबरियों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन से वर्षा जल संरक्षण, भू-जल स्तर में सुधार तथा सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को नई गति मिली है। इससे किसान अब वर्षभर कृषि एवं मत्स्य पालन जैसी आजीविका गतिविधियों से जुड़कर अपनी आय में निरंतर वृद्धि कर रहे हैं।

मोर गांव-मोर पानी अभियान प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण

मोर गांव-मोर पानी अभियान प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रहा है। यह अभियान जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण विकास को नई गति प्रदान कर रहा है।

​सेंचुरी पार कर चुका मुरूमसिल्ली बाँध पूरी तरह सुरक्षित

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अफवाहों पर लगा विराम, मानसून से निपटने जल संसाधन विभाग मुस्तैद

​रायपुर- छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक जल संरचनाओं के मुकुटमणि और गंगरेल जलाशय के मुख्य मददगार मुरूमसिल्ली बाँध को लेकर सोशल मीडिया पर तैर रहीं तमाम तरह की आशंकाएं पूरी तरह बेबुनियाद और भ्रामक हैं। जल संसाधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि 103 साल पुराना यह ऐतिहासिक बाँध पूरी तरह सुरक्षित, अडिग और मजबूत है। मानसून की आहट के बीच बाँध की दीर्घकालिक सुरक्षा और जल प्रबंधन को लेकर विभाग न केवल सतर्क है, बल्कि विशेषज्ञ अभियंताओं की देखरेख में नियमित तकनीकी परीक्षण और मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

दरअसल, मानसून के आगमन के साथ ही बांधों की सुरक्षा को लेकर कई तरह की अफवाहें सिर उठाने लगती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की तथ्यहीन खबरों का शिकार न हों और केवल अधिकृत सूचनाओं पर ही विश्वास करें।

​शीर्ष तकनीकी टीम ने परखी एक-एक दीवार

परियोजना की संवेदनशीलता और इसके महत्व को देखते हुए हाल ही में जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता  के नेतृत्व में शीर्ष अधिकारियों के एक दल ने मुरूमसिल्ली बाँध का सघन और विस्तृत तकनीकी निरीक्षण किया। इस उच्च स्तरीय टीम में अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता  तथा अनुविभागीय अधिकारी शामिल थे।

इस दौरान टीम ने बाँध के तटबंधों, संरचनात्मक स्थिति और जल निकासी (स्लुइस गेट्स) की व्यवस्था का गहन बारीकी से परीक्षण किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बाँध की दीवारों या मुख्य ढांचे में किसी भी प्रकार की दरार या क्षति नहीं है।

​रेनकट रोकने के लिए 'वर्षा पूर्व' सुरक्षा चक्र

तेज बारिश के दौरान मिट्टी के कटाव (रेनकट) से बाँध के किनारों को सुरक्षित रखना एक सामान्य और अनिवार्य तकनीकी प्रक्रिया है। मुख्य अभियंता ने इसी कड़ी में वर्षा पूर्व तटबंधों के संरक्षण और मरम्मत कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। विभागीय अमला इस समय युद्धस्तर पर मुस्तैद होकर इन सुरक्षात्मक कार्यों को अंजाम दे रहा है, ताकि आने वाले समय में बाँध की कार्यक्षमता और जन सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित रहे।

​भविष्य के संकट से निपटने के लिए जल प्रबंधन

इस वर्ष पानी की हर बूंद को सहेजने के लिए विभाग अभी से बेहद वैज्ञानिक और दूरदर्शी जल प्रबंधन अपना रहा है। वर्तमान में मुरूमसिल्ली बाँध अपनी क्षमता के शिखर की ओर बढ़ रहा है। यहाँ 130.07 एमसीएम (80.29 प्रतिशत) जल संग्रहण हो चुका है, जबकि मुख्य गंगरेल जलाशय में 325.95 एमसीएम (42.50 प्रतिशत) पानी दर्ज किया गया है।​चूंकि मुरूमसिल्ली में जलस्तर काफी बेहतर स्थिति में है, इसलिए भविष्य में यदि कम वर्षा या अवर्षा के हालात बनते हैं, तो भी सिंचाई और पेयजल का संकट न हो, इस रणनीति के तहत मुरूमसिल्ली से नियंत्रित और सुरक्षित मात्रा में पानी गंगरेल जलाशय की ओर छोड़ा जा रहा है। 

वर्ष 1923 में निर्मित मुरूमसिल्ली बाँध केवल एक जल संरचना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी व्यवस्था का एक ऐतिहासिक हिस्सा है। वर्तमान में इसके रख-रखाव के लिए किए जा रहे सभी कार्य पूरी तरह नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।


राजस्थान-हरियाणा के बीच यमुना जल परियोजना पर ऐतिहासिक समझौता, तीन दशक पुरानी पेयजल समस्या के समाधान की दिशा में बड़ा कदम

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नई दिल्ली- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में राजस्थान और हरियाणा सरकारों ने यमुना जल परियोजना के निर्माण एवं क्रियान्वयन के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल सहित केंद्र और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

प्रमुख बातें

  • लगभग 30 वर्षों से लंबित पेयजल विवाद के समाधान की दिशा में बड़ी सफलता।

  • जुलाई से अक्टूबर तक यमुना नहर से राजस्थान को 580 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी उपलब्ध कराया जाएगा।

  • पानी की आपूर्ति 3.6 मीटर से अधिक व्यास वाली तीन भूमिगत पाइपलाइनों के माध्यम से की जाएगी।

  • परियोजना से राजस्थान और हरियाणा दोनों राज्यों को पेयजल उपलब्ध होगा।

किन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ?

राजस्थान

  • सीकर

  • चूरू

  • झुंझुनूं

हरियाणा

  • भिवानी

  • फतेहाबाद

समझौते की विशेषताएं

  • जल बंटवारा, लागत साझा करने और रखरखाव की स्पष्ट व्यवस्था।

  • आधुनिक निगरानी प्रणाली और पारदर्शी संचालन तंत्र।

  • विवाद समाधान के लिए मजबूत और वैज्ञानिक व्यवस्था।

  • केंद्र सरकार, दोनों राज्य सरकारों और केंद्रीय जल आयोग (CWC) के समन्वय से तैयार व्यापक ढांचा।

अमित शाह ने क्या कहा?

अमित शाह ने कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "संवाद से समाधान" और सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) के सिद्धांत का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि वर्षों से व्यर्थ बह रहा पानी अब लोगों की प्यास बुझाएगा, भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद करेगा और दोनों राज्यों के विकास को नई गति देगा।

परियोजना का उद्देश्य

यह परियोजना 1994 के अपर यमुना बेसिन जल बंटवारा समझौते के तहत राजस्थान को आवंटित यमुना जल का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करेगी। साथ ही, शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में लाखों लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराकर सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी।

जशपुर में जल संरक्षण बना जन आंदोलन, नवाचारों से मजबूत हो रहा भू-जल संवर्धन

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सोक पिट, वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच, कंटूर ट्रेंच, आजीविका डबरी और नवा तरिया जैसी संरचनाएं बढ़ा रही जल संचयन क्षमता

मनरेगा और जनभागीदारी से जल सुरक्षा की दिशा में जशपुर का अभिनव मॉडल

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन की दिशा में जशपुर जिला एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रहा है। जिले में मनरेगा तथा जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन के लिए विभिन्न नवाचार आधारित संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है, जिससे वर्षा जल संचयन को बढ़ावा मिलने के साथ ग्रामीण आजीविका को भी नई मजबूती मिल रही है। जशपुर जिले में वर्षा जल के अधिकतम संचयन और भू-जल पुनर्भरण के उद्देश्य से घरों, शासकीय संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर बड़ी संख्या में सोक पिट बनाए जा रहे हैं। इन संरचनाओं से उपयोग किए गए जल का पुनर्भरण संभव हो रहा है तथा जलभराव की समस्या में भी कमी आ रही है। पहाड़ी एवं ढलान वाले क्षेत्रों में वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच और कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया जा रहा है। ये संरचनाएं वर्षा जल के तीव्र बहाव को नियंत्रित कर मिट्टी के कटाव को रोकने के साथ जल को भूमि में समाहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इससे भू-जल स्तर में सुधार और पर्यावरणीय संतुलन को भी बढ़ावा मिल रहा है।

ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने के लिए जिले में आजीविका डबरी निर्माण कार्य तेजी से संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में 495 आजीविका डबरियां निर्माणाधीन हैं। इन डबरियों में वर्षा जल संग्रहित होने से किसानों को रबी एवं ग्रीष्मकालीन फसलों की सिंचाई सुविधा मिलेगी, वहीं सब्जी उत्पादन, मत्स्य पालन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। जल संरक्षण के क्षेत्र में ‘नवा तरिया’ अभियान भी उल्लेखनीय परिणाम दे रहा है। नए तालाबों के निर्माण और पुराने जलाशयों के जीर्णाेद्धार से जल भंडारण क्षमता में वृद्धि हुई है। इसके सकारात्मक प्रभाव कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन गतिविधियों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।

जशपुर जिले में 5 प्रतिशत मॉडल को भी प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक ग्राम के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के कम से कम 5 प्रतिशत हिस्से को जल संरक्षण संरचनाओं से आच्छादित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पहल से वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और जल उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। कलेक्टर रोहित व्यास ने जल संरक्षण कार्यों में सभी विभागों और ग्रामीण समुदायों की सक्रिय भागीदारी पर बल देते हुए कहा है कि जल संरक्षण केवल एक शासकीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी से संचालित जन आंदोलन है। सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सकता है। जशपुर जिले में संचालित ये नवाचार आधारित जल संरक्षण प्रयास जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। साथ ही ये पहल कृषि उत्पादन बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।


जल संकट के बीच रीवा में वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था शुरू, बिछाई जा रही नई पाइपलाइन

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पंचायत प्रतिनिधियों ने श्रीफल तोड़कर किया कार्य का शुभारंभ 

आरंग- ग्राम रीवा में गहराए भारी पेयजल संकट को देखते हुए ग्राम पंचायत ने बड़ी राहत दी है। ग्रामीणों को पानी की किल्लत से निजात दिलाने के लिए रविवार को गांव में वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था के तहत पीएचई विभाग द्वारा नई पाइपलाइन विस्तार का कार्य शुरू किया गया। उसके पहले पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों की मौजूदगी में विधि-विधान से श्रीफल तोड़कर इस कार्य का शुभारंभ किया गया।


भीषण गर्मी के इस दौर में पानी की किल्लत से जूझ रहे ग्रामीणों के लिए यह बड़ी राहत साबित होगी। इस दौरान सरपंच घंसियाराम साहू ने कहा कि गांव के हर घर तक पीने का साफ पानी पहुंचाना हमारी पहली प्राथमिकता है। पेयजल की इस विकट समस्या को अस्थाई रूप से दूर करने के लिए यह वैकल्पिक पाइपलाइन बिछाई जा रही है, जिससे सभी को पानी सुलभता से मिल सके।


इस मौके पर मुख्य रूप से सरपंच घंसियाराम साहू, उपसरपंच सूरज साहू सहित पंच रमेश चंद्राकर, मनबोध साहू, वेदप्रकाश साहू, घनश्याम डहरिया, चंद्रकली टिकेश्वर डहरिया, धनेश्वरी संजू ढीढी, मीरा अश्विनी चंद्राकर और बड़ी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित थे।

पेयजल संकट दूर करने रीवा में जल प्रबंधन पर महामंथन आज,एसडीएम और भूगर्भ वैज्ञानिक देंगे संरक्षण के गुर

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आरंग- ग्राम पंचायत रीवा में गहराते पेयजल संकट से निपटने के लिए आज सोमवार को जल प्रबंधन एवं संरक्षण विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन होगा। पीपला वेलफेयर फाउंडेशन और समस्त ग्रामवासियों के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस कार्यक्रम में प्रशासनिक अफसर, विशेषज्ञ और ग्रामीण एक मंच पर जुटेंगे। फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने बताया कि गांव में पानी की विकट समस्या को देखते हुए साल 2025 से यह कार्यशाला लगातार आयोजित की जा रही है, जिसके अब तक बेहद सकारात्मक परिणाम मिले हैं। कार्यशाला में मुख्य रूप से आरंग एसडीएम अभिलाषा पैकरा, जनपद सीईओ अभिषेक बेनर्जी, पीएचई विभाग से ईई अनिल बच्चन, एसडीओ शुभ्रा बघेल, इंजीनियर रानू दिनकर और जिओ हाइड्रोलॉजिस्ट घनश्याम वर्मा,देवव्रत साहू शामिल होकर ग्रामीणों को वाटर रिचार्जिंग व जल सहेजने की तकनीक सिखाएंगे। इसके अलावा जिला पंचायत सदस्य वतन चंद्राकर, जनपद सदस्य कृष्णा महेश साहू, सरपंच घंसियाराम साहू और फाउंडेशन के संरक्षक आनंदराम पत्रकारश्री,अध्यक्ष दूजेराम धीवर, शिक्षाविद मुरली मनोहर देवांगन, समाजसेवी पायलेट ओ के तिवारी,सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे।




हर हाल में नागरिकों के लिए पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करे,कोई बहानेबजी नहीं चलेगी

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कोरिया जिले में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की चौपाल, पेयजल व्यवस्था पर दिखे सख्त तेवर

पेयजल समस्या का समाधान ना होने पर कलेक्टर की जिम्मेदारी तय होगी

पेयजल समस्या को लेकर आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सख्त तेवर देखने को मिले । मुख्यमंत्री ने सुशासन तिहार के दौरान कोरिया जिले में आयोजित चौपाल में अधिकारियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए पेयजल व्यवस्था को लेकर कड़े तेवर दिखाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि गांवों और नगरीय निकायों में कहीं भी पेयजल आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में आम जनता को पानी की समस्या से जूझना पड़े, यह किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से राज्य के अलग-अलग हिस्सों में पेयजल की समस्या आ रही है अधिकारी तत्काल पेयजल समस्या का निराकरण करें किसी भी स्तर पर कोताही  बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पेयजल समस्या उत्पन्न होने पर संबंधित कलेक्टर की जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्माणाधीन पानी टंकियों का कार्य समय सीमा में पूरा कराया जाए। जहां टंकियों का निर्माण कार्य जारी है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था कर लोगों तक नियमित पानी पहुंचाने के उपाय सुनिश्चित किए जाएं।

भारत-श्रीलंका सहयोग को नई दिशा: जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन पर साझा अनुभव

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श्रीलंका की संसद की इंफ्रास्ट्रक्चर और स्ट्रैटेजिक डेवलपमेंट संबंधी सेक्टोरल ओवरसाइट कमेटी का एक उच्चस्तरीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल, एस. एम. मरिक्कर, सांसद (अध्यक्ष) के नेतृत्व में, इस समय भारत के एक सप्ताह के आधिकारिक अध्ययन दौरे पर है।

इस दौरे के तहत जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) ने प्रतिनिधिमंडल के लिए जल जीवन मिशन (JJM) और स्वच्छ भारत मिशन–ग्रामीण (SBM-G) पर एक विस्तृत प्रस्तुति का आयोजन किया।

इस अवसर पर DDWS के सचिव अशोक के. के. मीना, अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक (NJJM) कमल किशोर सोअन सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए सचिव, DDWS अशोक के. के. मीना ने बताया कि भारत में केंद्र और राज्य सरकारें बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रमों को ग्राम पंचायतों के माध्यम से लागू करती हैं, ताकि जमीनी स्तर पर लोगों तक आवश्यक सेवाएं प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा सकें। उन्होंने बताया कि भारत में ग्रामीण पेयजल और स्वच्छता के लिए दो प्रमुख मिशन—जल जीवन मिशन (2019) और स्वच्छ भारत मिशन–ग्रामीण (2014)—लागू किए जा रहे हैं।

उन्होंने इन मिशनों के क्रियान्वयन से जुड़े चार प्रमुख बिंदुओं को साझा किया:

  • ग्राम पंचायतों के माध्यम से विकेंद्रीकरण और समुदाय आधारित सेवा वितरण

  • विभिन्न विभागों के बीच समन्वय

  • पारदर्शिता और निगरानी के लिए तकनीक का उपयोग

  • सतत विकास, जैसे ग्रे-वॉटर प्रबंधन और वर्षा जल संचयन

इसके बाद जल जीवन मिशन के निदेशक हरि नारायणन मुरुगन ने भारत-श्रीलंका पेयजल सहयोग पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर ग्रामीण घर तक नल से जल पहुंचाने की घोषणा की थी, जिसके बाद जल जीवन मिशन शुरू किया गया। वर्तमान में 17% से बढ़कर 82% ग्रामीण घरों तक नल जल पहुंच चुका है और 15 करोड़ से अधिक घरों में कनेक्शन दिए जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि हाल ही में केंद्र सरकार ने मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाकर JJM 2.0 के रूप में लागू करने का निर्णय लिया है, जिसमें संचालन, रखरखाव, जनभागीदारी और सतत जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

स्वच्छ भारत मिशन–ग्रामीण पर प्रस्तुति देते हुए उप सचिव कृतिका कुलहरी ने बताया कि यह मिशन 2014 में शुरू हुआ था और 2019 तक पूरे देश को खुले में शौच मुक्त (ODF) घोषित किया गया। अब इसका दूसरा चरण ODF प्लस और ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर केंद्रित है।

उन्होंने बताया कि इस मिशन के तहत:

  • 12 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए

  • 2.72 लाख से अधिक सामुदायिक शौचालय परिसरों का निर्माण हुआ

  • शौचालय निर्माण के लिए ₹12,000 की प्रोत्साहन राशि दी जाती है

इसके बाद एक संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें श्रीलंकाई प्रतिनिधियों ने भारत के अनुभवों से सीखने में गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने अपने देश में जल स्रोतों में भारी धातुओं (जैसे पारा) की समस्या और जल शुद्धिकरण की उच्च लागत जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया तथा सस्ती और प्रभावी तकनीकों के लिए सहयोग का आग्रह किया।

कार्यक्रम के समापन पर संयुक्त सचिव (जल) स्वाति मीना नाइक ने कहा कि भारत और श्रीलंका आपसी सहयोग और ज्ञान साझा करने के माध्यम से जल प्रबंधन और स्वच्छता के क्षेत्र में बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ को जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान

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  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में राज्य के 12 जिलों को किया सम्मानित 
  • प्रदेश का जल भविष्य सुरक्षित करने में यह पुरस्कार होगा प्रेरणादायी : मुख्यमंत्री साय

रायपुर- जल संरक्षण एवं सामुदायिक भागीदारी के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित कर छत्तीसगढ़ के 12 जिलों रायपुर, गरियाबंद, महासमुंद, राजनांदगांव, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी, बालोद, बलरामपुर, बिलासपुर, रायगढ़, दुर्ग और सूरजपुर ने राष्ट्रीय स्तर पर नया इतिहास रच दिया है। विज्ञान भवन, नई दिल्ली में कल आयोजित 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार एवं जल संचय जनभागीदारी 1.0 अवार्ड समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इन जिलों को सम्मानित किया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और संवेदनशील प्रशासनिक प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण की दिशा में देशभर में विशेष पहचान बनाई है। पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार के अभिनव प्रयासों और जनभागीदारी ने जल संचयन की दिशा में नए आयाम हासिल किए हैं। मुख्यमंत्री ने इन जिलों के नागरिकों और जिला प्रशासन को अपनी शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि जल संचयन के प्रति लोगों में आई यह चेतना जल के समुचित उपयोग को बढ़ावा देगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का जल भविष्य सुरक्षित करने में यह पुरस्कार प्रेरणादायी होगा। 

रायपुर जिले को जल संचय जनभागीदारी अभियान में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया है। देशभर के नगर निगमों में रायपुर नगर निगम प्रथम स्थान पर रहा, जबकि पूर्वी जोन कैटेगरी 01 में रायपुर जिला तीसरे स्थान पर रहा। रायपुर जिले और नगर निगम ने मिलकर सामुदायिक सहभागिता को जल संचय का व्यापक अभियान बनाया। रायपुर नगर निगम द्वारा 33,082 कार्य और जिला प्रशासन द्वारा 36,282 कार्य किए गए हैं।

राजनांदगांव जिले को ईस्ट जोन के अंतर्गत राष्ट्रीय जल अवार्ड में प्रथम स्थान तथा जनभागीदारी केटेगरी 01 में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है तथा प्रोत्साहन स्वरूप 2 करोड़ रूपए की राशि प्रदान की गई है। यहां 58,967 जल संचय के कार्य जनभागीदारी से पूर्ण किए गए हैं। बालोद जिले को केटेगरी 01 में बेस्ट परफॉर्मिंग के लिए पहला स्थान प्राप्त हुआ है, साथ ही 2 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। यहां 92,742 नई जल संरचनाएँ निर्मित की गई। 

 महासमुंद जिले को कैटेगरी 2 अंतर्गत प्रथम स्थान के लिए सम्मानित किया है। यहां 35,182 जल संरचनाओं का निर्माण किया गया है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले को कैटेगरी 2 के तहत दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है तथा प्रोत्साहन स्वरूप 01 करोड़ रूपए की पुरस्कार राशि दी गई है। यहां 30,927 संरचनाओं का निर्माण किया गया है। गरियाबंद जिला को केटेगरी-2 में देश में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है तथा प्रोत्साहन स्वरूप एक करोड़ रूपए की राशि मिली है। यहां 26,025 सतही जल के बेहतर रख-रखाव के कार्य किए गए हैं। 

बिलासपुर को केटेगेरी 03 में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है तथा प्रोत्साहन स्वरूप 25 लाख रूपए की पुरस्कार राशि मिली है। यहां 21,058 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य किया गया है। दुर्ग जिले को केटेगरी-03 में 16वां स्थान प्राप्त हुआ है तथा 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है। यहां 5010 जल संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है। बलरामपुर जिले को केटेगरी-03 में 6वें स्थान के लिए सम्मानित किया गया है तथा 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है। यहां 8644 जल संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है। 

धमतरी जिले को केटेगरी 3 में 8वां स्थान के लिए सम्मानित कर 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है। यहां 7674 जन संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है। रायगढ़ जिले को केटेगरी 3 में द्वितीय स्थान के लिए सम्मानित कर 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है। यहां 19088 जल संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है। सूरजपुर जिले को केटेगरी 3 में 12वां स्थान के लिए सम्मानित कर 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है तथा यहां 5797 जल संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है।


स्वच्छ गंगा मिशन को गति: राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की 67वीं कार्यकारी समिति में बड़े शोध व प्रदूषण नियंत्रक प्रोजेक्ट्स को मंजूरी

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राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) की 67वीं कार्यकारी समिति (EC) की बैठक का आयोजन महानिदेशक राजीव कुमार मितल की अध्यक्षता में किया गया। बैठक में गंगा नदी के पुनर्जीवन, प्रदूषण नियंत्रण, वैज्ञानिक शोध, यमुना नदी के संरक्षण और दिल्ली के स्कूलों में जन-जागरूकता को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

बैठक में डब्ल्यूआर मंत्रालय, एनएमसीजी और विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

वैज्ञानिक शोध आधारित नदी संरक्षण पर जोर

EC ने कई बड़े शोध परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिनका उद्देश्य गंगा बेसिन में वैज्ञानिक समझ को मजबूत कर डेटा-आधारित योजना को बढ़ावा देना है। मंजूर परियोजनाओं में शामिल हैं—

  • हिमालयी गंगा हेडस्ट्रीम ग्लेशियरों की मॉनिटरिंग

  • गंगा का डिजिटल ट्विन विकसित करना

  • 1,100 किमी में SONAR आधारित नदी तल सर्वे (बिजनौर से बलिया तक)

  • पुरातन पेलियो-चैनल्स के जरिए ग्राउंडवॉटर रिचार्ज

  • ऐतिहासिक मानचित्रों का डिजिटाइजेशन और जियोस्पेशल डेटाबेस

ये परियोजनाएँ AI, रिमोट सेंसिंग और हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग को river basin प्रबंधन में जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

पश्चिम बंगाल में बड़ा शहरी प्रदूषण नियंत्रण प्रोजेक्ट मंजूर

सिलीगुड़ी में महाआनंदा नदी के प्रदूषण नियंत्रण के लिए ₹361.86 करोड़ की परियोजना को मंजूरी:

  • 25 इंटरसेप्शन एवं डायवर्ज़न संरचनाएँ

  • 4 लिफ्टिंग स्टेशन

  • 27 MLD और 22 MLD क्षमता के दो STP

  • HAM आधारित PPP मॉडल पर क्रियान्वयन

इससे शहरी स्वच्छता में व्यापक सुधार होगा और नदी में प्रदूषण भार कम होगा।


यमुना के लिए कोरोनेशन पिलर STP से सुरक्षित निस्तारण

EC ने दिल्ली के कोरोनेशन पिलर STP से उपचारित अपशिष्ट जल को सुरक्षित रूप से यमुना नदी तक ले जाने की परियोजना को मंजूरी दी। परियोजना में शामिल होंगे—

  • जहांगिरपुरी ड्रेन से अवैध सीवेज टैपिंग

  • नए पंपिंग स्टेशन

  • राइजिंग मेन और RCC चैनल

  • ट्रस ब्रिज

  • ट्रिटेड वाटर की सुरक्षित डिलीवरी

यह यमुना एक्शन प्लान को मजबूत करेगा।

 "यूथ फॉर गंगा–यमुना" पहल को मंजूरी

₹39.37 लाख की इस परियोजना के तहत—

  • दिल्ली–NCR के 200+ स्कूलों में 2.5 लाख से अधिक बच्चों को जागरूक किया जाएगा

  • "रिवर यूथ क्लब" बनाए जाएंगे

  • जल संरक्षण पर व्यवहारिक परिवर्तन को बढ़ावा दिया जाएगा



निष्कर्ष

इन सभी अनुमोदनों के साथ, EC ने—

  • नदी संरक्षण को वैज्ञानिक शोध आधारित दिशा

  • प्रदूषण नियंत्रण को मजबूत आधार

  • जल प्रबंधन प्रणाली में सुधार

  • युवा जागरूकता को नया आयाम

प्रदान किया है।
यह गंगा और यमुना दोनों की पुनर्जीवन पहलों को गति देने वाला महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ सिंचाई परियोजना मंडल की 33वीं बैठक संपन्न

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  • प्रदेश की सिंचाई क्षमता बढ़ाने, भूजल स्तर सुधारने और शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को सुदृढ़ बनाने पर हुई व्यापक चर्चा
  • प्रदेश में 14 नई सिंचाई परियोजनाओं को मिली सैद्धांतिक सहमति

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ सिंचाई परियोजना मंडल की 33वीं तथा वर्तमान सरकार के कार्यकाल की पहली बैठक संपन्न हुई। बैठक में प्रदेश की सिंचाई क्षमता बढ़ाने, भूजल स्तर सुधारने और शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को सुदृढ़ बनाने पर विस्तृत विमर्श किया गया। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों के लिए 14 नई परियोजनाओं को सैद्धांतिक सहमति प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों की आय में वृद्धि और कृषि उत्पादन बढ़ाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से सिंचाई नेटवर्क का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सिंचाई रकबा बढ़ने से न केवल किसानों को लाभ मिलेगा बल्कि भूजल स्तर में सुधार होगा और पेयजल आपूर्ति को बेहतर ढंग से सुनिश्चित किया जा सकेगा।

बैठक में सरगुजा, बस्तर सहित मैदानी इलाकों तक सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर व्यापक चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने सभी परियोजनाओं की रूपरेखा, लागत और उनके लाभों की विस्तृत जानकारी ली और कहा कि प्रदेशभर में संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए इन परियोजनाओं को गति प्रदान की जाएगी।

गौरतलब है कि इन परियोजनाओं के माध्यम प्रदेश में लगभग 01 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता में वृद्धि होगी। इन परियोजनाओं में बस्तर जिले के अंतर्गत देउरगांव बैराज सह उदवहन सिंचाई परियोजना, बस्तर जिले के अंतर्गत मटनार बैराज सह उद्धवहन सिंचाई परियोजना, रायपुर जिले के विकासखण्ड आरंग में महानदी पर मोहमेला सिरपुर बैराज योजना, अहिरन से गाजरीनाला जल संवर्धन निर्माण (खारंग अहिरन लिंक परियोजना) कार्य, बिलासपुर जिले के कोटा विकासखण्ड अंतर्गत छपराटोला फीडर जलाशय परियोजना, कुम्हारी जलाशय जल क्षमता वृद्धि (जलावर्धन) योजना के अंतर्गत समोदा बैराज से कुम्हारी जलाशय तक पाईप लाईन बिछाने का कार्य, दुर्ग जिले के विकासखण्ड धमधा के सहगांव उद्धवहन सिंचाई योजना, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में लमती फीडर जलाशय एवं नहरों का निर्माण कार्य, राजनांदगांव जिले में स्थित मोहारा एनीकट में पेय जल हेतु चौकी एनीकट से मोहारा एनीकट तक पाईप लाईन के माध्यम से जल प्रदाय योजना, जशपुर जिले के मैनी नदी में बगिया बैराज सह दाबयुक्त उद्ववहन सिंचाई योजना की स्वीकृति, जांजगीर-चांपा जिले के हसदेव बांगों परियोजना अंतर्गत वृहद परियोजना ऑगमेण्टेशन के अंतर्गत परसाही दाबयुक्त उद्ववहन सिंचाई परियोजना, कोरबा जिले के अंतर्गत मड़वारानी बैराज निर्माण सह उदवहन सिंचाई योजना, गरियाबंद जिले के पैरी परियोजना के अंतर्गत सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय लिंक नहर (पाईप लाईन) योजना तथा बिलासपुर जिले के खारंग जलाशय योजना के बाएं तट नहर के आर्वधन हेतु पाराघाट व्यपवर्तन योजना से उद्धवहन फीडर सिंचाई का निर्माण कार्य शामिल किया गया है। 

बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वित्त मंत्री ओ पी चौधरी, मुख्य सचिव  विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, ऊर्जा  विभाग के सचिव रोहित यादव, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश कुमार बंसल, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो, प्रमुख अभियंता इंद्रजीत उइके सहित जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण मौजूद रहे।


जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024 के विजेताओं की घोषणा की

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नई दिल्ली- केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने आज श्रम शक्ति भवन, नई दिल्ली में 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों (National Water Awards – NWA) के विजेताओं की घोषणा की। जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग (DoWR, RD & GR), जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत, वर्ष 2024 के लिए कुल 46 विजेताओं (संयुक्त विजेताओं सहित) की घोषणा की गई है।

ये पुरस्कार 10 श्रेणियों में दिए जा रहे हैं — श्रेष्ठ राज्य, श्रेष्ठ जिला, श्रेष्ठ ग्राम पंचायत, श्रेष्ठ शहरी स्थानीय निकाय, श्रेष्ठ स्कूल या कॉलेज, श्रेष्ठ उद्योग, श्रेष्ठ जल उपभोक्ता संघ, श्रेष्ठ संस्था (स्कूल या कॉलेज के अलावा), श्रेष्ठ सिविल सोसायटी, और जल क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए श्रेष्ठ व्यक्ति।

‘श्रेष्ठ राज्य’ श्रेणी में महाराष्ट्र ने पहला स्थान प्राप्त किया है, जबकि गुजरात को दूसरा और हरियाणा को तीसरा स्थान मिला है।

विजेताओं को एक प्रशस्ति-पत्र और ट्रॉफी प्रदान की जाएगी, साथ ही कुछ श्रेणियों में नकद पुरस्कार भी दिए जाएंगे।

पुरस्कार वितरण समारोह 18 नवंबर 2025 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा, जिसमें भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी।

इस अवसर पर जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी, जल संसाधन विभाग के सचिव वी.एल. कंथा राव, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक के.के. मीणा, और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

जल शक्ति मंत्रालय देश में जल प्रबंधन, संरक्षण और संसाधनों के सतत उपयोग के लिए नीतिगत ढांचा तैयार करने एवं कार्यक्रमों के कार्यान्वयन का केंद्रीय निकाय है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंत्रालय द्वारा जल प्रबंधन और संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने हेतु व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।

पहले राष्ट्रीय जल पुरस्कार वर्ष 2018 में शुरू किए गए थे। इसके बाद क्रमशः 2019, 2020, 2022 और 2023 के लिए पुरस्कार दिए गए। वर्ष 2021 में कोविड महामारी के कारण पुरस्कार नहीं दिए गए थे।

2024 के लिए 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार 23 अक्टूबर 2024 को गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल पर लॉन्च किए गए थे। कुल 751 आवेदन प्राप्त हुए, जिनकी जांच और मूल्यांकन जूरी समिति द्वारा किया गया। चयनित आवेदनों का ग्राउंड ट्रुथिंग केंद्रीय जल आयोग (CWC) और केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) द्वारा किया गया।

इन आकलनों के आधार पर 10 श्रेणियों में कुल 46 विजेताओं का चयन किया गया।

राष्ट्रीय जल पुरस्कारों का उद्देश्य देशभर में जल संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्र में व्यक्तियों एवं संस्थानों के उत्कृष्ट कार्यों को पहचान देना और ‘जल समृद्ध भारत’ के लक्ष्य की दिशा में जनभागीदारी को प्रोत्साहित करना है। ये पुरस्कार जल के महत्व पर जागरूकता बढ़ाने और सर्वोत्तम जल उपयोग प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करने का माध्यम हैं।

मुख्य विजेता:

  • श्रेष्ठ राज्य: महाराष्ट्र (प्रथम), गुजरात (द्वितीय), हरियाणा (तृतीय)

  • श्रेष्ठ जिला (पूर्वी क्षेत्र): राजनांदगांव, छत्तीसगढ़

  • श्रेष्ठ ग्राम पंचायत: दुब्बिगनिपल्ली (आंध्र प्रदेश) एवं पायम (केरल) – संयुक्त विजेता

  • श्रेष्ठ शहरी निकाय: नवी मुंबई (महाराष्ट्र)

  • श्रेष्ठ उद्योग: अपोलो टायर्स लिमिटेड, कांचीपुरम (तमिलनाडु)

  • श्रेष्ठ व्यक्ति: किशोर जायसवाल (बिहार), बजरंग लाल जैठू (राजस्थान),  मोहन चंद्र कंडपाल (उत्तराखंड), पोदिली राजशेखर राजू (आंध्र प्रदेश)



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