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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई और शुभकामनाएं

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प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ के विकास में केंद्र सरकार के सहयोग के प्रति प्रकट किया आभार

नक्सल उन्मूलन, अधोसंरचना, किसानों, आदिवासियों, महिलाओं और युवाओं के सशक्तिकरण में केंद्र की भूमिका को सराहा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनके नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर छत्तीसगढ़ के विकास में केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किए गए अभूतपूर्व सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी, निर्णायक और जनकल्याणकारी नेतृत्व में संचालित योजनाओं ने छत्तीसगढ़ के विकास को नई गति प्रदान की है तथा प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री साय ने पत्र में उल्लेख किया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास को प्राथमिकता देने की केंद्र सरकार की नीति के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ को विशेष केंद्रीय सहायता (SCA) योजना के तहत ₹2,080.29 करोड़ की सहायता प्राप्त हुई है। इसके साथ ही विशेष अधोसंरचना योजना (SIS), सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE), आधुनिक हथियारों की उपलब्धता, जंगल वारफेयर प्रशिक्षण और एयर सपोर्ट जैसी पहलों ने सुरक्षा बलों को मजबूत बनाया है तथा राज्य को नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक बढ़त दिलाई। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ₹2,377 करोड़ की लागत से 3,222 किलोमीटर लंबी 391 सड़कों तथा 88 वृहद पुलों की स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं ने बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ते हुए विकास और सुरक्षा दोनों को मजबूती प्रदान की है।

पत्र में मुख्यमंत्री ने वित्तीय सुदृढ़ीकरण के क्षेत्र में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हुए सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यों को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत किए जाने से छत्तीसगढ़ को अभूतपूर्व वित्तीय स्वायत्तता प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में राज्य को केंद्रीय करों में ₹3,46,806 करोड़ तथा विभिन्न योजनाओं में ₹1,43,328 करोड़ की सहायता प्राप्त हुई है। इसके अतिरिक्त पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता योजना के तहत ₹22,021 करोड़ तथा जीएसटी क्षतिपूर्ति के रूप में ₹22,600 करोड़ की अतिरिक्त सहायता भी मिली है।

मुख्यमंत्री ने सड़क अधोसंरचना विकास को केंद्र सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि केंद्रीय सड़क एवं अवसंरचना कोष (CRIF) के तहत ₹4,468 करोड़ तथा राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए ₹35,766 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है। इससे रायपुर-विशाखापट्टनम, बिलासपुर-धनबाद, रायपुर-दुर्ग बायपास तथा अन्य महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को गति मिली है और राज्य की कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक सुधार हुआ है।

ग्रामीण विकास के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत राज्य के 24.50 लाख पात्र हितग्राहियों को आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से लगभग 19.70 लाख आवास पूर्ण हो चुके हैं। मनरेगा के तहत पिछले 12 वर्षों में ₹39,123 करोड़ व्यय कर 152 करोड़ मानव दिवस सृजित किए गए हैं। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत ₹2,398 करोड़ की सहायता से 36.44 लाख परिवारों को शौचालय सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के विभिन्न चरणों के अंतर्गत 13,040 किलोमीटर सड़कों एवं 347 पुलों के निर्माण के लिए ₹7,951 करोड़ की स्वीकृति प्राप्त हुई है। वहीं पीएम जनमन के अंतर्गत 2,902 किलोमीटर सड़कों हेतु ₹2,007 करोड़ तथा पीएमजीएसवाई-4 के तहत 2,427 किलोमीटर सड़कों के लिए ₹2,246 करोड़ की स्वीकृति दी गई है।कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत राज्य के 25.51 लाख किसानों को अब तक ₹10,784 करोड़ की राशि सीधे उनके खातों में हस्तांतरित की गई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत ₹5,064 करोड़ की प्रीमियम सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना तथा अन्य केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से कृषि क्षेत्र को व्यापक सहयोग प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के 56 लाख राशन कार्डधारी परिवारों के 1.99 करोड़ सदस्यों को प्रति माह खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए प्रतिवर्ष लगभग ₹5,600 करोड़ की सब्सिडी दी जा रही है। उज्ज्वला योजना के तहत 39.54 लाख महिलाओं को निःशुल्क गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है।

खनिज क्षेत्र में किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 62 से अधिक खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी हुई है, जिनसे भविष्य में ₹4.34 लाख करोड़ से अधिक का संभावित राजस्व प्राप्त होगा। जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) एवं पीएमकेकेकेवाई के माध्यम से ₹17,887 करोड़ से अधिक की राशि संकलित कर 81,553 विकास कार्य पूर्ण किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने आदिवासी विकास के क्षेत्र में प्रधानमंत्री जनमन योजना, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान तथा वन अधिकारों की मान्यता को ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में 56,569 पीवीटीजी परिवारों को लाभान्वित किया जा रहा है तथा 4.83 लाख व्यक्तिगत और 48 हजार से अधिक सामुदायिक वन अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं।

महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से 11,490 आंगनबाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनबाड़ी के रूप में उन्नत किया गया है तथा 2,264 नए केंद्र स्वीकृत हुए हैं। राज्य के सभी जिलों में संचालित 42 सखी वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को सहायता और संरक्षण प्रदान कर रहे हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन तथा प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। राज्य में 5,499 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हैं। इसके अतिरिक्त 91 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट, 28 जिला सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं तथा 23 क्रिटिकल केयर ब्लॉकों की स्वीकृति प्राप्त हुई है।

कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 18,330 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत 82,952 हितग्राहियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जबकि स्ट्राइव परियोजना के माध्यम से 17 आईटीआई संस्थानों का उन्नयन किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से 31.37 लाख ग्रामीण परिवारों को 2.88 लाख स्व-सहायता समूहों से जोड़ा गया है। समूहों को ₹1,661 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। ‘लखपति दीदी’ पहल के अंतर्गत 10.42 लाख महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर नई पहचान बना रही हैं।

डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि डिजिटल भारत निधि (DBN) के माध्यम से राज्य के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 1,247 मोबाइल टावर स्थापित किए जा चुके हैं तथा 577 नए टावरों को स्वीकृति दी गई है, जिससे हजारों गांव डिजिटल सेवाओं से जुड़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र में केंद्र सरकार के सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण विद्युतीकरण और विद्युत अधोसंरचना विकास के लिए लगभग ₹2,808 करोड़ की सहायता प्रदान की गई है। पीएम सूर्यघर योजना के अंतर्गत राज्य में 64 हजार से अधिक घरों में सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं तथा 46,649 परिवारों को ₹362 करोड़ की सब्सिडी प्रदान की गई है।

मुख्यमंत्री साय ने पत्र में पर्यटन, संस्कृति और खेल अधोसंरचना के क्षेत्र में केंद्र सरकार के सहयोग का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत ₹94.23 करोड़ की लागत से जशपुर, सरगुजा, बिलासपुर और जगदलपुर सहित जनजातीय अंचलों में पर्यटन सुविधाओं का विकास किया गया है। प्रसाद योजना के तहत ₹48.43 करोड़ की लागत से डोंगरगढ़ स्थित माँ बम्लेश्वरी मंदिर क्षेत्र का विकास किया गया है। वहीं नवा रायपुर में ₹147.66 करोड़ की लागत से चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर का निर्माण प्रदेश को सांस्कृतिक और पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगा। खेलो इंडिया योजना के तहत राज्य के आठ जिलों में खेल अधोसंरचना विकास के लिए ₹48 करोड़ तथा बहतराई स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए ₹5 करोड़ की सहायता दी गई है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रथम खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी और इसके लिए मिली ₹17 करोड़ की सहायता छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है।

मुख्यमंत्री ने ग्रामोद्योग, हस्तशिल्प, रेशम और पारंपरिक कला के संरक्षण में केंद्र सरकार के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि रायपुर में ₹200 करोड़ की लागत से प्रस्तावित पीएम एकता मॉल राज्य के हस्तशिल्प, हथकरघा और ओडीओपी उत्पादों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजार उपलब्ध कराएगा। राष्ट्रीय हाथकरघा विकास कार्यक्रम के तहत 4,694 बुनकरों को लाभान्वित किया गया है, जबकि हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना के अंतर्गत 2,400 शिल्पियों के सशक्तिकरण हेतु विशेष परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। रेशम विकास कार्यक्रमों के माध्यम से हजारों कृषकों और महिला हितग्राहियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया है।

पत्र में भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण, डिजिटल प्रशासन और सुशासन के क्षेत्र में हुए नवाचारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम, स्वामित्व योजना, एग्रीस्टैक और फार्मर रजिस्ट्री जैसी पहलों ने प्रशासन को अधिक पारदर्शी और नागरिकोन्मुख बनाया है। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 में राज्य को ₹598 करोड़ का विशेष सहायता अनुदान प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना है जिसने शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में ऑटो-म्यूटेशन व्यवस्था को पूर्ण रूप से लागू किया है। पिछले एक वर्ष में दो लाख से अधिक प्रकरणों का स्वतः नामांतरण किया गया है तथा 32 लाख से अधिक दस्तावेजों का डिजिटलीकरण कर नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने सामाजिक न्याय, उद्यानिकी, जैव प्रौद्योगिकी, परिवहन सुरक्षा तथा अन्य क्षेत्रों में प्राप्त केंद्रीय सहयोग का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति पुनः आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नशा मुक्त भारत अभियान, अटल वयो अभ्युदय योजना, सुगम्य भारत अभियान, बायोटेक इंक्यूबेशन सेंटर, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च तथा महिला सुरक्षा हेतु स्थापित निर्भया कमांड सेंटर जैसी पहलों ने प्रदेश के विकास को नई दिशा दी है।

मुख्यमंत्री ने पत्र के अंत मे उल्लेखित किया कि छत्तीसगढ़ की साढ़े तीन करोड़ जनता की ओर से वे प्रधानमंत्री के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और विश्वास जताते हैं कि विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में केंद्र सरकार का मार्गदर्शन और सहयोग भविष्य में भी इसी प्रकार प्राप्त होता रहेगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्वोत्तर भारत पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया के लेख को किया साझा

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया द्वारा लिखे गए उस लेख को साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया है कि किस प्रकार पूर्वोत्तर भारत दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भारत का “प्राकृतिक द्वार” बनता जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि,

“इस विचारोत्तेजक लेख में केंद्रीय मंत्री @JM_Scindia ने पूर्वोत्तर भारत की यात्रा के अपने अनुभव साझा किए हैं, जहाँ उन्होंने इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और इसके लोगों की अटूट भावना का वर्णन किया है।

मंत्री ने पूर्वोत्तर को ‘अष्टलक्ष्मी’ के रूप में रेखांकित करते हुए बताया है कि यह क्षेत्र अब केवल भारत की सीमा नहीं, बल्कि उसका अग्रिम चेहरा बन चुका है।”

अपने लेख में सिंधिया ने विस्तार से बताया है कि किस प्रकार पूर्वोत्तर भारत अब देश की आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक प्रगति का प्रमुख केंद्र बन रहा है। “अष्टलक्ष्मी” के रूप में प्रसिद्ध आठों राज्यों की पहचान आज विकास, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में नए मानक स्थापित कर रही है।

प्रधानमंत्री द्वारा इस लेख को साझा किए जाने से यह संदेश स्पष्ट होता है कि पूर्वोत्तर भारत केवल भौगोलिक दृष्टि से नहीं, बल्कि भारत के विकास और दक्षिण-पूर्व एशिया से जुड़ाव के सेतु के रूप में भी अहम भूमिका निभा रहा है।

https://x.com/PMOIndia/status/1987393072146358424?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1987393072146358424%7Ctwgr%5E929000f5d7d8e33223e2815070c166a54ceae55b%7Ctwcon%5Es1_c10&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.pib.gov.in%2FPressReleasePage.aspx%3FPRID%3D2187969

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चलाईं 4 नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें, भारतीय रेल के आधुनिकीकरण में एक और बड़ा कदम

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वाराणसी-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वाराणसी से चार नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये ट्रेनें — बनारस–खजुराहो, फिरोजपुर–दिल्ली, लखनऊ–सहारनपुर और एर्नाकुलम–बेंगलुरु — भारत की आधुनिक रेल व्यवस्था को और मजबूती देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम हैं।

इस अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया और बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी की जनता को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि आज का दिन ‘विकास के पर्व’ के रूप में मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के हर विकसित देश की प्रगति का आधार मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचा) रहा है और भारत भी अब उसी राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

इन चार नई ट्रेनों के साथ देश में वंदे भारत एक्सप्रेस की कुल संख्या 160 से अधिक हो गई है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “वंदे भारत, नामो भारत और अमृत भारत जैसी ट्रेनें भारतीय रेल के अगले युग की नींव रख रही हैं।” उन्होंने बताया कि वंदे भारत ट्रेन “भारत में बनी है, भारत के लिए बनी है, और भारतवासियों के गर्व का प्रतीक है।”

आस्था, संस्कृति और विकास का संगम

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में तीर्थ यात्रा सदियों से राष्ट्रीय चेतना का माध्यम रही है। अब इन तीर्थ स्थलों को वंदे भारत नेटवर्क से जोड़कर संस्कृति और विकास के बीच एक सेतु बनाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रयागराज, अयोध्या, हरिद्वार, चित्रकूट और खजुराहो जैसे पवित्र स्थलों को जोड़ने से धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी और यह भारत की संस्कृति, आस्था और विकास यात्रा का संगम बनेगा।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 11 करोड़ श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए वाराणसी आए और 6 करोड़ से अधिक भक्तों ने राम मंदिर, अयोध्या में रामलला के दर्शन किए। इससे हजारों करोड़ रुपये का आर्थिक प्रवाह हुआ है, जिससे होटल, व्यापार, परिवहन, कला और नौकायन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर बने हैं।

विकसित हो रहा है बनारस

प्रधानमंत्री ने कहा कि वाराणसी आज विकसित काशी के रूप में उभर रही है। शहर में स्वास्थ्य, सड़क, गैस पाइपलाइन, डिजिटल कनेक्टिविटी और खेल सुविधाओं में तेजी से सुधार हो रहा है।
उन्होंने बताया कि आज बनारस में महामना कैंसर हॉस्पिटल, शंकर नेत्रालय, BHU का एडवांस ट्रॉमा सेंटर और पांडेयपुर का मंडलीय अस्पताल जैसी सुविधाएँ हैं, जो पूरे पूर्वांचल और आसपास के राज्यों के लिए वरदान साबित हो रही हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत और जन औषधि केंद्रों के कारण गरीब मरीजों ने लाखों रुपये की बचत की है। इसी कारण आज काशी को पूर्वांचल की स्वास्थ्य राजधानी कहा जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि रोपवे प्रोजेक्ट, गंजारी और सिगरा स्टेडियम, और सड़क व इंटरनेट नेटवर्क के विकास से बनारस का हर आगंतुक एक नई ऊर्जा और अनुभव महसूस करेगा।

बच्चों की प्रतिभा को मिला सम्मान

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने उन विद्यार्थियों से भी मुलाकात की जिन्होंने वंदे भारत ट्रेन लॉन्च से जुड़ी पेंटिंग और कविता प्रतियोगिता में भाग लिया था। उन्होंने बच्चों की रचनात्मकता की प्रशंसा की और प्रस्ताव दिया कि देश भर के प्रतिभाशाली बच्चों के लिए एक राष्ट्रीय साहित्यिक बाल महोत्सव आयोजित किया जाए।

चार नई वंदे भारत ट्रेनें और उनके लाभ

  1. बनारस–खजुराहो वंदे भारत – यात्रा समय में लगभग 2 घंटे 40 मिनट की बचत; वाराणसी, प्रयागराज, चित्रकूट और खजुराहो जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को जोड़ेगी।

  2. लखनऊ–सहारनपुर वंदे भारत – लगभग 7 घंटे 45 मिनट में यात्रा पूरी करेगी; हरिद्वार तक पहुंच को भी सुगम बनाएगी।

  3. फिरोजपुर–दिल्ली वंदे भारत – 6 घंटे 40 मिनट में यात्रा पूरी करेगी; पंजाब और राष्ट्रीय राजधानी के बीच व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देगी।

  4. एर्नाकुलम–बेंगलुरु वंदे भारत – यात्रा समय में 2 घंटे से अधिक की बचत; दक्षिण भारत के प्रमुख आईटी और व्यावसायिक केंद्रों को जोड़ेगी।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और अन्य गणमान्य उपस्थित रहे। वहीं, केरल के राज्यपाल राजेन्द्र अर्लेकर और अन्य केंद्रीय मंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।

इन चार नई ट्रेनों के शुभारंभ के साथ, वंदे भारत एक्सप्रेस भारत की तेजी, सुविधा और आत्मगौरव का प्रतीक बनती जा रही है — जो देश के सपने “विकसित भारत” की दिशा में एक और सशक्त कदम है।


नीति आयोग ने भारत के सेवा क्षेत्र पर प्रारंभिक रिपोर्टें जारी कीं — क्षेत्रीय संतुलन, रोजगार प्रवृत्तियों और विकसित भारत @2047 के लिए रोडमैप पर केंद्रित

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नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी. वी. आर. सुब्रह्मण्यम ने आज सदस्य डॉ. अरविंद विरमानी और भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंथा नागेश्वरन की उपस्थिति में सेवाएं विषयक श्रृंखला (Services Thematic Series) के तहत दो प्रारंभिक रिपोर्टें जारी कीं। इस अवसर पर केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग संघों के प्रतिनिधि तथा शिक्षाविद उपस्थित थे। ये रिपोर्टें सेवाक्षेत्र का व्यापक मूल्यांकन प्रस्तुत करती हैं — उत्पादन और रोजगार के परिप्रेक्ष्य से — जो समग्र प्रवृत्तियों से आगे बढ़कर राज्य-स्तरीय विश्लेषण भी प्रदान करती हैं।

पहली रिपोर्ट, “भारत का सेवाक्षेत्र: सकल मूल्य वर्धन प्रवृत्तियों और राज्य-स्तरीय गतिशीलता से अंतर्दृष्टि”, राष्ट्रीय और राज्य-स्तर की प्रवृत्तियों का अध्ययन करती है ताकि यह समझा जा सके कि सेवाक्षेत्र-आधारित विकास विभिन्न क्षेत्रों में कैसे आगे बढ़ रहा है और क्या अपेक्षाकृत पिछड़े राज्य अग्रणी राज्यों की बराबरी कर रहे हैं — जो संतुलित क्षेत्रीय विकास का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।

सेवाक्षेत्र अब भारत की आर्थिक वृद्धि का आधार बन गया है, जिसने वित्त वर्ष 2024–25 में राष्ट्रीय सकल मूल्य वर्धन (GVA) में लगभग 55 प्रतिशत योगदान दिया। रिपोर्ट के अनुसार, सेवाक्षेत्र आधारित विकास अब अधिक क्षेत्रीय रूप से संतुलित हो रहा है। यद्यपि राज्यों के बीच सेवाक्षेत्र के हिस्से में असमानता में थोड़ी वृद्धि हुई है, फिर भी प्रमाण मिलते हैं कि संरचनात्मक रूप से पिछड़े राज्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। यह प्रवृत्ति इंगित करती है कि भारत का सेवाक्षेत्र रूपांतरण अब व्यापक और समावेशी होता जा रहा है।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि क्षेत्रीय स्तर पर डिजिटल अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स, नवाचार, वित्त और कौशल विकास को प्राथमिकता दी जाए, ताकि विविधीकरण और प्रतिस्पर्धात्मकता को गति दी जा सके। राज्य स्तर पर, रिपोर्ट स्थानीय क्षमताओं पर आधारित सेवाक्षेत्र रणनीतियाँ विकसित करने, संस्थागत क्षमता बढ़ाने, उद्योग-सेवा एकीकरण को प्रोत्साहित करने तथा शहरी और क्षेत्रीय सेवा क्लस्टरों को सशक्त बनाने की सिफारिश करती है।

दूसरी रिपोर्ट, “भारत का सेवाक्षेत्र: रोजगार प्रवृत्तियों और राज्य-स्तरीय गतिशीलता से अंतर्दृष्टि”, सेवाक्षेत्र के रोजगार पैटर्न का विश्लेषण करती है। इसमें उप-क्षेत्र, लिंग, क्षेत्र, शिक्षा और व्यवसाय के आधार पर भारत के सेवा कार्यबल की बहुआयामी तस्वीर प्रस्तुत की गई है। रिपोर्ट बताती है कि सेवाक्षेत्र में एक द्वैत संरचना दिखाई देती है — आधुनिक, उच्च उत्पादकता वाले क्षेत्र जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हैं परंतु रोजगार की दृष्टि से सीमित हैं, और पारंपरिक क्षेत्र जो अधिक श्रमिकों को समाहित करते हैं किंतु अधिकतर अनौपचारिक और कम वेतन वाले हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यद्यपि सेवाक्षेत्र भारत की रोजगार वृद्धि और महामारी के बाद पुनर्प्राप्ति का मुख्य आधार बना हुआ है, फिर भी कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं। रोजगार सृजन सभी उप-क्षेत्रों में समान नहीं है, अनौपचारिकता व्यापक है, और रोजगार की गुणवत्ता उत्पादन वृद्धि के अनुरूप नहीं है। लैंगिक असमानता, ग्रामीण-शहरी अंतर और क्षेत्रीय विषमताएँ यह दर्शाती हैं कि रोजगार नीति में औपचारिकता, समावेशन और उत्पादकता वृद्धि को केंद्र में रखना आवश्यक है।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए रिपोर्ट चार-स्तरीय नीति मार्गदर्शिका सुझाती है —

  1. गिग, स्वरोजगार और एमएसएमई श्रमिकों के लिए औपचारिकता और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देना,

  2. महिलाओं और ग्रामीण युवाओं के लिए लक्षित कौशल प्रशिक्षण और डिजिटल पहुँच का विस्तार,

  3. उभरते और हरित अर्थव्यवस्था क्षेत्रों में कौशल निवेश, और

  4. टियर-2 और टियर-3 शहरों में सेवा हब विकसित कर संतुलित क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करना।

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि सेवाक्षेत्र न केवल उत्पादन और आय का स्रोत है, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले, समावेशी और उत्पादक रोजगार का प्रमुख चालक बन सकता है, जिससे विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने में सहायता मिलेगी।

ये दोनों रिपोर्टें राज्य सरकारों और उद्योग जगत के लिए एक रणनीतिक मार्गदर्शिका प्रस्तुत करती हैं — जो भारत के सेवाक्षेत्र को अगले चरण के विकास की ओर अग्रसर करने के लिए डिजिटल अवसंरचना, कौशल, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और सेवा मूल्य शृंखलाओं के एकीकरण पर बल देती हैं, जिससे भारत को वैश्विक सेवाक्षेत्र में एक विश्वसनीय अग्रणी के रूप में स्थापित किया जा सके।

प्रधानमंत्री आवास योजना(ग्रामीण) ने बदली ग्रामीण भारत की तस्वीर

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (PMAY-G) ने ग्रामीण भारत में गरीब और बेघर परिवारों को सुरक्षित एवं गरिमामय आवास उपलब्ध कराने में नई मिसाल कायम की है। वर्ष 2016 में शुरू हुई इस योजना का लक्ष्य था “सभी के लिए आवास”। योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को पक्का घर बनाने के लिए वित्तीय सहायता, शौचालय, रसोई, पानी, बिजली और एलपीजी जैसी बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।

त्रिपुरा की गरीब आदिवासी महिला कक्रती देबबर्मा का जीवन इसका उदाहरण है। पहले वे कच्चे घर में असुरक्षित जीवन जी रही थीं, लेकिन PMAY-G के तहत ₹1.30 लाख की सहायता से उन्होंने पक्का घर बनाया। अब उनका परिवार तूफ़ान और बारिश से सुरक्षित, गरिमा और खुशी के साथ जीवन बिता रहा है।

सरकार ने 2016–24 के लिए 2.95 करोड़ घरों का लक्ष्य तय किया था, जिसे 2029 तक बढ़ाकर 4.95 करोड़ कर दिया गया है। 4 अगस्त 2025 तक 3.85 करोड़ घर स्वीकृत और 2.82 करोड़ घर पूरे हो चुके हैं। केवल पिछले चार वर्षों (2020–25) में ही 176 लाख से अधिक घर पूरे किए गए।

योजना की पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए AwaasSoft MIS और Awaas+ ऐप का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें e-KYC, जियो-टैगिंग और आधार-आधारित भुगतान जैसी तकनीक शामिल है।

PMAY-G न केवल आवासीय सुविधा देता है, बल्कि रोज़गार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने का भी काम कर रहा है। अब तक 2.82 करोड़ घरों के निर्माण से लगभग 568 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार पैदा हुआ है।

योजना के अगले चरण (2024–29) में 2 करोड़ और घर बनाकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को एक सुरक्षित, गरिमामय और सुविधायुक्त आवास मिले।


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