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डिजिटल इंडिया: भारत की डिजिटल क्रांति

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परिचय

भारत का डिजिटल परिवर्तन दुनिया के सबसे बड़े जनसंख्या स्तर पर कनेक्टिविटी और तकनीक आधारित सार्वजनिक सेवा वितरण के विस्तारों में से एक है। यह परिवर्तन डिजिटल इंडिया कार्यक्रम पर आधारित है, जिसे 2015 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य हर नागरिक के लिए डिजिटल अवसंरचना को एक बुनियादी सुविधा बनाना, डिजिटल विभाजन को कम करना, मांग पर शासन और सेवाएँ प्रदान करना और डिजिटल माध्यम से लोगों को सशक्त बनाना है।

एक दशक पहले भारत में डिजिटल विभाजन काफी स्पष्ट था। तेज़ इंटरनेट मुख्यतः शहरों तक सीमित था, ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी कम थी और ऑनलाइन सेवाओं तक पहुँच स्थान, आय और डिजिटल साक्षरता पर निर्भर करती थी। समय के साथ सरकार के निवेश से ब्रॉडबैंड नेटवर्क और ऑप्टिकल फाइबर अवसंरचना का तेजी से विस्तार हुआ, जिससे गाँवों और दूरदराज़ क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर हुई।

आज यह डिजिटल अंतर तेजी से कम हो रहा है। सस्ता इंटरनेट, डिजिटल सेवा केंद्र और इंटरऑपरेबल डिजिटल प्लेटफॉर्म नागरिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, डिजिटल भुगतान करने, ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त करने और शासन में भाग लेने में सक्षम बना रहे हैं।

भारत का डिजिटल अवसंरचना निर्माण

भारत का डिजिटल ढांचा तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है:

  1. सार्वभौमिक कनेक्टिविटी अवसंरचना

  2. डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)

  3. कम्प्यूटिंग क्षमता

ये तीनों मिलकर डिजिटल अर्थव्यवस्था में भागीदारी को संभव बनाते हैं।

सार्वभौमिक डिजिटल कनेक्टिविटी और सस्ती इंटरनेट सुविधा

भारत की डिजिटल क्रांति का आधार तेज़ और सस्ती इंटरनेट सुविधा है।

भारतनेट

BharatNet परियोजना के तहत ग्रामीण भारत में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुँचाया जा रहा है।

  • 2026 तक 2.15 लाख से अधिक ग्राम पंचायतें जुड़ चुकी हैं।

  • ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क 2019 में 19.35 लाख रूट किमी से बढ़कर 2025 में 42.36 लाख रूट किमी हो गया।

5G विस्तार

भारत का तेज़ 5G नेटवर्क अब 99.9% जिलों तक पहुँच चुका है और 5.18 लाख बेस ट्रांसीवर स्टेशन स्थापित किए गए हैं।

सस्ता डेटा

डेटा की कीमतों में भारी कमी आई है:

  • 2014: लगभग ₹269 प्रति GB

  • 2025–26: लगभग ₹8–10 प्रति GB

इसके परिणामस्वरूप ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 100 करोड़ से अधिक हो गई है।

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर इंटरनेट को वास्तविक सेवाओं में बदलता है।

आधार

Aadhaar के तहत 143 करोड़ से अधिक डिजिटल पहचान जारी की गई हैं, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे नागरिकों तक पहुँचता है।

यूपीआई

Unified Payments Interface के माध्यम से जनवरी 2026 में लगभग 21.7 अरब लेनदेन हुए, जिनकी कुल राशि लगभग ₹28.33 लाख करोड़ रही।

डिजीलॉकर

DigiLocker के 62 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं, जहाँ नागरिक अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित रख सकते हैं।

उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग और क्लाउड

National Supercomputing Mission के तहत भारत में 38 सुपरकंप्यूटर स्थापित किए गए हैं जिनकी कुल क्षमता 44 पेटाफ्लॉप्स है।

इसके अलावा MeghRaj सरकारी क्लाउड प्लेटफॉर्म पर 2170 से अधिक मंत्रालय और विभाग अपने एप्लिकेशन चला रहे हैं।

भारत का डेटा सेंटर क्षमता लगभग 1280 मेगावाट है, जिसे 2030 तक 4–5 गुना बढ़ाने की योजना है।

समावेशी डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र

डिजिटल परिवर्तन का लक्ष्य केवल इंटरनेट देना नहीं है, बल्कि हर नागरिक को डिजिटल अर्थव्यवस्था में भागीदारी का अवसर देना है।

डिजिटल साक्षरता

Pradhan Mantri Gramin Digital Saksharta Abhiyan के तहत 6.39 करोड़ ग्रामीण लोगों को डिजिटल प्रशिक्षण दिया गया।

डिजिटल शिक्षा

दीक्षा

DIKSHA प्लेटफॉर्म पर:

  • 19,000 से अधिक कोर्स

  • 18 करोड़ से अधिक नामांकन

स्वयं

SWAYAM प्लेटफॉर्म पर:

  • 18,500 से अधिक कोर्स

  • 6 करोड़ से अधिक नामांकन

इंस्पायर-मानक

INSPIRE‑MANAK कार्यक्रम के तहत हर साल 1 लाख छात्र नवाचार विचार चुने जाते हैं।

कॉमन सर्विस सेंटर (CSC)

Common Service Centres ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाएँ पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

  • 6.5 लाख से अधिक VLE (Village Level Entrepreneurs) कार्यरत हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था का डिजिटलीकरण

  • e‑NAM के तहत 1.79 करोड़ किसान और 1522 मंडियाँ जुड़ी हैं।

  • MGNREGA के तहत 99% मजदूरी भुगतान डिजिटल हो चुका है।

PM-WANI

PM‑WANI योजना के तहत फरवरी 2026 तक:

  • 4,09,111 सार्वजनिक Wi-Fi हॉटस्पॉट लगाए गए हैं।

भविष्य के लिए डिजिटल कौशल

अटल इनोवेशन मिशन

Atal Innovation Mission के तहत:

  • 10,000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब

  • 1.1 करोड़ छात्र जुड़ चुके हैं।

इंडिया AI मिशन

IndiaAI Mission के तहत:

  • 38,000 GPU स्थापित

  • 9,500 से अधिक AI डेटासेट उपलब्ध

स्टार्टअप इंडिया

Startup India के तहत:

  • 2016 में 400 स्टार्टअप से बढ़कर 2025 में 2 लाख से अधिक स्टार्टअप

  • 21 लाख नौकरियाँ सृजित

निष्कर्ष

पिछले एक दशक में भारत का डिजिटल परिवर्तन तकनीक, शासन, शिक्षा और आर्थिक अवसरों तक पहुँच को पूरी तरह बदल चुका है। डिजिटल कनेक्टिविटी, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत कंप्यूटिंग के माध्यम से शहरों, गाँवों और दूरदराज़ क्षेत्रों के नागरिक डिजिटल अर्थव्यवस्था में भागीदारी कर पा रहे हैं।

डिजिटल साक्षरता, नवाचार, स्टार्टअप और युवाओं पर केंद्रित पहलें यह सुनिश्चित कर रही हैं कि डिजिटल विकास समावेशी, समान और सतत हो। यह मॉडल भारत को एक डिजिटल रूप से सशक्त और समावेशी राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।


डॉ. जितेन्द्र सिंह ने DTU में i-TBI का निरीक्षण किया; विश्वविद्यालयों में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर

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विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने देशभर में 15 समावेशी टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर (i-TBI) स्थापित किए हैं, जो नवाचार और उद्यमिता को महानगरों के बाहर भी लोकतांत्रिक बनाने के उद्देश्य से विभिन्न विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में कार्यरत हैं।

यह जानकारी आज केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, और प्रधानमंत्री कार्यालय, कर्मियों, लोक शिकायतें, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष मंत्रालय के मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय (DTU) का दौरा करते हुए दी। दौरे का उद्देश्य DST समर्थित i-TBI की कार्यप्रणाली और प्रभाव का अवलोकन करना था, जिसे राष्ट्रीय नवाचार विकास और उपयोग (NIDHI) कार्यक्रम के तहत स्थापित किया गया है।

दौरे के दौरान, मंत्री ने DTU i-TBI सुविधा का निरीक्षण किया और यह आंका कि यह इनक्यूबेटर नवाचार, शोध और स्टार्टअप विकास के लिए किस हद तक उपयोग में लाया जा रहा है। शिक्षक, छात्र नवप्रवर्तनकर्ता और स्टार्टअप संस्थापकों से बातचीत करते हुए डॉ. जितेन्द्र सिंह ने विश्वविद्यालय की सराहना की कि उन्होंने DST के सहयोग का प्रभावी उपयोग करते हुए एक जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम का निर्माण किया है।

मंत्री ने बताया कि DST ने देशभर में 15 i-TBI स्थापित किए हैं, जिनमें से एक DTU में है। यह इनक्यूबेटर विशेष रूप से समावेशिता और महिला-उद्यमिता पर ध्यान केंद्रित करते हुए शैक्षणिक विचारों को बाजार-तैयार समाधान में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त की कि DTU i-TBI ने अब तक 15 स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट किया है, जो विश्वविद्यालय पारिस्थितिकी तंत्र में बढ़ती उद्यमशीलता क्षमता को दर्शाता है। इस अवसर पर, तीन स्टार्टअप्स को DST-NIDHI फ्रेमवर्क के तहत प्रत्येक को 5 लाख रुपये का स्टार्टअप इग्निशन ग्रांट प्रदान किया गया, जिससे वे अपने विचार को प्रोटोटाइप और प्रारंभिक व्यावसायीकरण तक ले जा सकें। उन्होंने कहा कि ये ग्रांट प्रेरक (catalytic) हैं और युवाओं में जोखिम लेने और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

बड़े नीति दृष्टिकोण पर जोर देते हुए, मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, पिछले दशक में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को अभूतपूर्व प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं रहा, बल्कि तकनीक निर्माता के रूप में उभर रहा है, जिसमें शोध अवसंरचना, शैक्षणिक उत्कृष्टता, इनक्यूबेशन, स्टार्टअप और उद्योग सहयोग सहित पूरे नवाचार चक्र का संरचित समर्थन शामिल है।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने विश्वविद्यालयों को केवल पारंपरिक शिक्षण और शोध तक सीमित रहने के बजाय नवाचार और उद्यमिता के हब बनने पर जोर दिया। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों को उद्योग के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने, निजी निवेश आकर्षित करने और वित्तीय स्रोत विविधीकरण करने के लिए प्रोत्साहित किया, साथ ही FIST, PURSE और NIDHI जैसे सरकारी योजनाओं का उपयोग कर अपने शोध और नवाचार क्षमता को मजबूत करने का आग्रह किया।

राष्ट्रीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का संदर्भ देते हुए, मंत्री ने कहा कि सरकार ने सुनिश्चित किया है कि नवाचार के अवसर छोटे शहरों और आकांक्षी जिलों तक पहुँचें। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता, मेरिट-आधारित चयन और समावेशी पहुंच ने पूरे देश में युवा नवप्रवर्तकों के बीच विश्वास बनाया है, जिससे वैज्ञानिक क्षमता और महत्वाकांक्षा दोनों का लोकतंत्रीकरण हुआ है।

DTU में DST समर्थित i-TBI, DTU इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन फाउंडेशन के अंतर्गत संचालित होता है और ज्ञान-आधारित स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, जिसमें विशेष जोर महिला उद्यमियों पर है। इनक्यूबेटर आइडिएशन से लेकर प्रोटोटाइप, उत्पाद विकास और बाजार तक पहुँच तक पूर्ण सहायता प्रदान करता है, आधुनिक अवसंरचना, मेंटरिंग और वित्तीय सहायता के माध्यम से।

दौरे के समापन पर, डॉ. जितेन्द्र सिंह ने विश्वविद्यालय-आधारित नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और यह आश्वासन दिया कि वे ऐसी संस्थाओं का समर्थन जारी रखेंगे जो सार्वजनिक निधियों का प्रभावी उपयोग कर शोध, स्टार्टअप और सामाजिक प्रभाव में ठोस परिणाम उत्पन्न कर रही हैं।

कोंडापल्ली में संचार क्रांति का नया सवेरा: मोबाइल नेटवर्क पहुंचते ही नाच उठे ग्रामीण

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दशकों की प्रतीक्षा समाप्त: कोंडापल्ली में पहली बार मोबाइल नेटवर्क, गांव में उत्सव का माहौल

नियद नेल्ला नार योजना ने बदली तस्वीर: कोंडापल्ली में जीवन हुआ आसान

रायपुर- दूरसंचार, बिजली और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएँ जहाँ देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य जीवन का आधार बन चुकी हैं, वहीं बस्तर संभाग के कुछ सुदूर वनांचलों ने दशकों तक इन सुविधाओं को कभी देखा ही नहीं था। ऐसे ही एक इलाके, बीजापुर जिले के ग्राम कोंडापल्ली, में अभूतपूर्व उत्सव का माहौल देखने को मिला जब गाँव में पहली बार मोबाइल नेटवर्क आया।

कोंडापल्ली तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित एक घना वनांचल है, जहाँ वर्षों से सड़क, बिजली और पेयजल जैसी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थीं। ऐसे में गाँव में मोबाइल टॉवर स्थापित होना स्थानीय समुदाय के लिए केवल तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि दुनिया से जुड़ने का प्रतीक बन गया।

जैसे ही टॉवर के सक्रिय होने की घोषणा हुई, ग्रामीणों में उत्साह की लहर दौड़ पड़ी। महिलाएँ, पुरुष, बच्चे — सभी रैली के रूप में टॉवर स्थल तक पहुँचे। पारंपरिक विधि से टॉवर की पूजा-अर्चना की गई। माँदर की थाप पर लोग भावुक होकर नाच उठे। यह दृश्य किसी उत्सव से कम नहीं था।

इस उत्सव में केवल कोंडापल्ली ही नहीं, बल्कि आसपास के गाँवों के लोग भी शामिल हुए। ग्रामीणों ने कहा कि यह उनके लिए केवल एक तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि “बाहरी दुनिया से पहला वास्तविक जुड़ाव” है। सुरक्षा बलों के जवानों ने भी ग्रामीणों की खुशी में शामिल होकर मिठाइयाँ वितरित कीं।

अब मोबाइल नेटवर्क ग्रामीणों के लिए बैंकिंग, आधार, राशन, स्वास्थ्य योजनाओं, पेंशन और शैक्षणिक सुविधाओं का प्रवेश-द्वार बनेगा। जिनके लिए यह सेवाएँ अब तक दूर का सपना थीं, उनके लिए यह दिन जीवन में एक नया अध्याय लेकर आया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित नियद नेल्ला नार योजना का उद्देश्य संवेदनशील क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाकर लोगों में विश्वास बढ़ाना और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है। योजना के तहत सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बैंकिंग, संचार सहित प्रशासनिक सेवाओं को तेज़ी से पहुँचाने का काम किया जा रहा है।

योजना का दायरा व्यापक है — 69 नवीन कैम्पों के आसपास स्थित 403 ग्रामों में 09 विभागों की 18 सामुदायिक सेवाएँ और 11 विभागों की 25 व्यक्तिमूलक योजनाएँ पहुँचाई जा रही हैं, ताकि ग्रामीण किसी भी मूलभूत सुविधा से वंचित न रहें।

इस पूरी प्रक्रिया में संचार अधोसंरचना सबसे प्रभावी साबित हो रही है। पिछले दो वर्षों में इस क्षेत्र में 728 नए टॉवर स्थापित किए गए हैं — जिनमें 116 एलडब्ल्यूई कार्यक्रम से, 115 आकांक्षी जिलों में, और 467 टावर 4G नेटवर्क के रूप में लगाए गए हैं। इसके साथ ही 449 टॉवरों का 2G से 4G में उन्नयन किया गया है।

कोंडापल्ली में नियद नल्ला नार योजना से तेज़ी से बदलाव आए हैं। दिसम्बर 2024 में कैम्प स्थापित होने के बाद पहली बार प्रशासन गाँव तक नियमित रूप से पहुँचने लगा। यहाँ लंबे समय से बंद पड़ी सड़क का पुनर्निर्माण बार्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन ने अपने जिम्मे लिया है और 50 किलोमीटर सड़क का कार्य प्रगति पर है।

गाँव में दो महीने पहले ही पहली बार विद्युत लाइन पहुँची है। बिजली आने के बाद से बच्चों की पढ़ाई, छोटे व्यवसाय और ग्रामीण जीवन में अभूतपूर्व सकारात्मक बदलाव देखे जा रहे हैं। प्रशासन द्वारा लगातार सेचुरेशन शिविर आयोजित कर सभी योजनाओं का लाभ प्रत्येक परिवार तक पहुँचाया जा रहा है।

कोंडापल्ली में मोबाइल नेटवर्क के आगमन से यह स्पष्ट हो गया है कि विकास की किरण अब उन इलाकों तक भी पहुँच रहा है, जो वर्षों से प्रतीक्षा में थे। संचार सुविधा के इस नए सवेरे ने ग्रामीणों को भरोसा दिया है कि अब उनका गाँव भी राज्य के अन्य हिस्सों की तरह आधुनिक सुविधाओं से जुड़कर आगे बढ़ेगा।

बीजापुर जिले के कोंडापल्ली में मोबाइल नेटवर्क का पहुँचना सिर्फ एक टॉवर का खड़ा होना नहीं है, यह उन लोगों के सपनों का उठ खड़ा होना है जो वर्षों से दुनिया से कटे हुए थे। हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर का हर गांव–हर परिवार विकास की मुख्यधारा से जुड़े, डिजिटल सुविधाओं तक पहुँचे और अवसरों के नए द्वार उनके लिए खुलें। यह सिर्फ संचार की शुरुआत नहीं, बल्कि विश्वास, बदलाव और नई संभावनाओं के युग का आरंभ है। - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

अंतर्राष्ट्रीय भारत 6G संगोष्ठी 2025 में 6G को वैश्विक सार्वजनिक संपत्ति के रूप में विकसित करने की साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की गई

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नई दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय भारत6G संगोष्ठी 2025 के दौरान, विश्व के अग्रणी अनुसंधान गठबंधनों — भारत 6G, 6G Smart Networks and Services Industry Association (6G-IA), ATIS’ Next G Alliance, XGMF, 6G Forum, 6G Brazil, UKI-FNI, UK TIN, UK Federated Telecoms Hubs (CHEDDAR, HASC, JOINER & TITAN) और 6G Flagship — ने एक संयुक्त घोषणा पत्र (Joint Statement) जारी करते हुए 6G को “वैश्विक सार्वजनिक हित” के रूप में विकसित करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

साझा घोषणा में ‘6G by Design’ के लिए निम्नलिखित मार्गदर्शक सिद्धांतों का समर्थन किया गया —

🔹 विश्वसनीय और सुरक्षित (Trusted and Secure)
🔹 लचीला और भरोसेमंद (Resilient and Reliable)
🔹 खुला और अंतःप्रचालनीय (Open and Interoperable)
🔹 समावेशी और किफायती (Inclusive and Affordable)
🔹 सतत और वैश्विक रूप से जुड़ा हुआ (Sustainable and Globally Connected)

यह घोषणा नेटवर्क को विश्वसनीयता और सुरक्षा के साथ डिजाइन करने की आवश्यकता पर बल देती है। इसमें भरोसेमंद इकोसिस्टम, जोखिम न्यूनीकरण, और एआई-आधारित सुरक्षा उपायों के महत्व को रेखांकित किया गया।

6G नेटवर्क की मजबूती और गोपनीयता-संरक्षित संरचनाएं सुनिश्चित करेंगी कि अरबों उपकरणों और उपयोगकर्ताओं के लिए हमेशा कनेक्टिविटी बनी रहे।

घोषणा में कहा गया कि 6G को एक वैश्विक सार्वजनिक संपत्ति (Global Public Good) के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, और इसके लिए खुले, पारदर्शी एवं समावेशी मानकीकरण (Standardisation) की आवश्यकता है।

इसमें खुले इंटरफेस, मल्टी-वेंडर इंटरऑपरेबिलिटी, और एआई-सक्षम नेटवर्क ऑर्केस्ट्रेशन को बढ़ावा देने पर बल दिया गया ताकि नवाचार और किफायत में तेजी लाई जा सके।

घोषणा में सततता (Sustainability) को 6G डिजाइन का केंद्र बताया गया — जिसमें ऊर्जा-कुशल, मरम्मत योग्य और पुनर्नवीनीकरण योग्य प्रणालियों के विकास पर बल दिया गया ताकि कार्बन उत्सर्जन में कमी लाते हुए 6G को सुलभ और किफायती बनाया जा सके।

इसके तहत स्थलीय (terrestrial) और गैर-स्थलीय (non-terrestrial) नेटवर्क — उपग्रह, उच्च ऊंचाई वाले प्लेटफॉर्म और भविष्य की अंतरिक्ष-आधारित प्रणालियों — के एकीकरण से भूमि, समुद्र, आकाश और अंतरिक्ष तक निर्बाध वैश्विक कवरेज का लक्ष्य रखा गया।

घोषणा में भविष्य की पीढ़ी को बदलते हुए दूरसंचार परिदृश्य के लिए तैयार करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। साझेदार संगठनों ने हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और नेटवर्क मानकों में कुशल प्रतिभा विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई।

अंत में, सभी सहभागी संगठनों ने — भारत 6G, 6G-IA, ATIS’ Next G Alliance, XGMF, 6G Forum, UK TIN, UK Federated Telecoms Hubs, 6G Flagship, 6G Brazil, और UKI-FNI — सरकारों, उद्योग, शिक्षाविदों और नागरिक समाज से इन साझा सिद्धांतों के इर्द-गिर्द एकजुट होने का आह्वान किया।

घोषणा में कहा गया —

“हम सुरक्षा, पारदर्शिता, लचीलापन, समावेशन, किफायत और सततता को केंद्र में रखकर ऐसा 6G नेटवर्क ताना-बाना बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो समाजों को सशक्त करे, डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं को गति दे और किसी को पीछे न छोड़े।”

अंतर्राष्ट्रीय भारत6G संगोष्ठी 2025 में जारी यह संयुक्त घोषणा 6G को सार्वभौमिक, विश्वसनीय और समावेशी बुद्धिमान नेटवर्क बनाने की दिशा में एक वैश्विक मील का पत्थर है।

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