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भारत-यूके सहयोग से EV चार्जिंग में बड़ी पहल, उन्नत तकनीक से बनेगा स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर

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नई दिल्ली: भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) ने Scharge Pvt Limited के साथ “Powering EV Charging Innovation” परियोजना के लिए समझौता किया है। यह परियोजना भारत-यूके संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रम के तहत चलाई जा रही है, जिसमें ब्रिटेन की Albright Product Design Limited भी भागीदार है।

⚡ EV चार्जिंग में नई तकनीक

इस परियोजना का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए अगली पीढ़ी की चार्जिंग प्रणाली विकसित करना है, खासकर:

  • कमर्शियल फ्लीट

  • डिपो ऑपरेशन्स

के लिए।

इसमें Scharge द्वारा विकसित स्मार्ट चार्ज कंट्रोलर और यूके पार्टनर की पेटेंटेड ऑटोमैटेड केबल मैनेजमेंट सिस्टम को जोड़ा जाएगा।

🚗 क्या है खास?

नई तकनीक में:

  • मोटराइज्ड ओवरहेड केबल मैनेजमेंट सिस्टम

  • कम मैन्युअल काम

  • केबल की कम टूट-फूट

  • बेहतर सुरक्षा और सुविधा

जैसी विशेषताएं शामिल हैं।

यह सिस्टम मौजूदा AC Type-2 EV चार्जर्स के साथ भी काम करेगा।

🏭 डिपो में काम होगा आसान

इस समाधान से:

  • चार्जिंग समय कम होगा

  • उपकरण सुरक्षित रहेंगे

  • कार्य प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी

साथ ही केबल डैमेज और अन्य जोखिमों को भी कम किया जा सकेगा।

स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा

Scharge Pvt Limited इस परियोजना के जरिए:

  • भारत में EV तकनीक को मजबूत करेगा

  • स्मार्ट चार्जिंग सिस्टम विकसित करेगा

  • टिकाऊ और बड़े स्तर पर उपयोगी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करेगा

क्या बोले अधिकारी?

TDB के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि भारत-यूके जैसे सहयोगी कार्यक्रम नई और उपयोगी तकनीकों के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। EV चार्जिंग में नवाचार, देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने के लिए जरूरी है।

निष्कर्ष

यह परियोजना भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को नई गति देगी। उन्नत तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए देश में सुरक्षित, स्मार्ट और भविष्य के लिए तैयार EV चार्जिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा।

वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल: वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) का 10वां प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

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देहरादून- वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) ने आम नागरिकों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए आयोजित 10वां वन्यजीव संरक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह 10 दिवसीय कार्यक्रम 2 से 11 मार्च 2026 तक आयोजित हुआ, जिसमें देशभर से 15 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अंतर्गत संचालित इस संस्थान द्वारा शुरू की गई इस पहल के तहत वर्ष 2012 से अब तक कुल 148 लोग प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।

यह विशेष कोर्स उन लोगों के लिए तैयार किया गया है, जिन्हें वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में औपचारिक प्रशिक्षण नहीं है, लेकिन इस विषय में गहरी रुचि रखते हैं। कार्यक्रम में विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों—जैसे सशस्त्र बल, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, आईटी, कॉर्पोरेट, मीडिया, शिक्षा और छात्र समुदाय—से प्रतिभागियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को चार दिनों तक विशेषज्ञों द्वारा सैद्धांतिक प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें भारतीय जैव-भूगोल, वन्यजीव संरक्षण की रणनीतियां, बड़े स्तनधारियों का प्रबंधन, वन्यजीवों की अवैध तस्करी, फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका, संकटग्रस्त वन्यजीवों का संरक्षण और नागरिक विज्ञान जैसे विषय शामिल रहे।

इसके अलावा, प्रतिभागियों को लैंसडाउन वन प्रभाग (उत्तराखंड) में पांच दिवसीय फील्ड विजिट पर ले जाया गया, जहां उन्होंने जंगल और वन्यजीवों का प्रत्यक्ष अध्ययन किया। इस दौरान उन्हें जंगल प्रबंधन, संरक्षण की चुनौतियों और स्थानीय समुदायों की वन संसाधनों पर निर्भरता के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का समापन 11 मार्च को हुआ, जिसमें रमेश कुमार पांडे, अतिरिक्त महानिदेशक (वन्यजीव), ने प्रतिभागियों से संवाद किया और भारत में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य आम नागरिकों में जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है।

यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि वन्यजीव संरक्षण केवल विशेषज्ञों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की जिम्मेदारी है।

भारत में सौर ऊर्जा का सशक्त विकास: 2025 में 129 GW क्षमता और वैश्विक नेतृत्व

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मुख्य बिंदु:

  • भारत की सौर क्षमता 2014 के 3 GW से बढ़कर 2025 में 129 GW हो गई।

  • गैर-जीवाश्म ऊर्जा 500 GW कुल क्षमता का 50% पार कर चुकी है।

  • PM Surya Ghar योजना के तहत 22.65 लाख घरों को रूफटॉप सोलर पैनल के माध्यम से मुफ्त बिजली प्राप्त हुई।

  • PM-KUSUM योजना के तहत 9.2 लाख सोलर पंप किसानों को दिए गए, जिससे कृषि में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ा।

भारत का सौर ऊर्जा सफर:

भारत ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का मुख्यालय गुरुग्राम में स्थापित कर वैश्विक सौर ऊर्जा में नेतृत्व सुनिश्चित किया है। 2025 में आयोजित 8वीं ISA असेंबली में 125 से अधिक देशों के मंत्री और प्रतिनिधि शामिल हुए।

पंचामृत ढांचा और लक्ष्य:

  1. 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता।

  2. 2030 तक कुल बिजली क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म स्रोतों से।

  3. 2030 तक कुल कार्बन उत्सर्जन में 1 बिलियन टन की कटौती।

  4. 2030 तक अर्थव्यवस्था की कार्बन तीव्रता में 45% कमी (2005 के स्तर के मुकाबले)।

  5. 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन।

नीतिगत पहल और योजनाएं:

  • PM Surya Ghar: 1 करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम, हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली।

  • राष्ट्रीय सौर मिशन (NSM): 2025 तक 129.92 GW सौर ऊर्जा स्थापित।

  • PLI योजना: घरेलू उच्च दक्षता सोलर मॉड्यूल के उत्पादन के लिए ₹24,000 करोड़ का प्रोत्साहन।

  • PM-KUSUM: किसानों के लिए सोलर पंप, भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्र।

  • सोलर पार्क और अल्ट्रा-मेगा सोलर परियोजनाएं: 55 सोलर पार्क, 39,973 MW क्षमता।

वैश्विक सहयोग और नेतृत्व:

  • भारत ने OSOWOG (One Sun, One World, One Grid) पहल के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय ग्रिड कनेक्शन का प्रस्ताव रखा।

  • ISA 8वीं असेंबली में “एक सूरज, एक विश्व, एक ग्रिड” दृष्टिकोण को बल मिला।

  • G20 और IEA ने भारत की क्लीन एनर्जी लीडरशिप की सराहना की।

निष्कर्ष:

भारत की सौर ऊर्जा यात्रा दिखाती है कि नीति, तकनीकी नवाचार और वैश्विक सहयोग से ऊर्जा संक्रमण को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है। सौर ऊर्जा न केवल भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का आधार है, बल्कि यह आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक जलवायु नेतृत्व का भी प्रेरक है।

CoP30 में भारत का उच्च-स्तरीय वक्तव्य: समावेशी नेतृत्व, जलवायु न्याय और वैश्विक समानता पर बल

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भारत ने 22.11.2025 को ब्राज़ील के बेलेम में आयोजित UNFCCC CoP30 के समापन पूर्ण अधिवेशन में दिए गए उच्च-स्तरीय वक्तव्य में CoP30 अध्यक्षता के समावेशी नेतृत्व के प्रति अपना गहरा समर्थन व्यक्त किया और सम्मेलन में अपनाए गए कई महत्वपूर्ण निर्णयों का स्वागत किया।

वक्तव्य में भारत ने CoP अध्यक्ष के नेतृत्व के लिए आभार व्यक्त किया, जो समावेश, संतुलन और ब्राज़ील की मुतिराओ भावना पर आधारित था और जिसने CoP30 का ईमानदारी और निष्ठा के साथ मार्गदर्शन किया।

ग्लोबल गोल ऑन अडैप्टेशन (GGA) के तहत हुई प्रगति का स्वागत करते हुए भारत ने इस निर्णय के समानता (equity) आयाम को रेखांकित किया और कहा कि यह विकासशील देशों में अनुकूलन की अत्यधिक आवश्यकता को स्वीकार करता है।

भारत के वक्तव्य का एक प्रमुख संदेश विकसित देशों की जलवायु वित्त (Climate Finance) प्रदान करने की लम्बे समय से लंबित प्रतिबद्धताओं पर जोर था। वक्तव्य में अध्यक्षता द्वारा भारत को अनुच्छेद 9.1 पर लंबे समय से आवश्यक ध्यान केंद्रित करने की यात्रा शुरू करने में दिए गए समर्थन की सराहना की गई। भारत ने आशा व्यक्त की कि बेलें में पार्टियों द्वारा उठाए गए प्रथम कदमों के कारण 33 वर्ष पहले रियो में किए गए वादे अब पूरे होंगे।

भारत ने CoP30 के प्रमुख परिणामों, विशेषकर जस्ट ट्रांज़िशन मैकेनिज़्म की स्थापना पर संतोष व्यक्त किया। वक्तव्य ने इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और आशा व्यक्त की कि यह वैश्विक एवं राष्ट्रीय स्तर पर समानता और जलवायु न्याय को लागू करने में सहायक ہوگا।

भारत ने एकतरफ़ा व्यापार-प्रतिबंधात्मक जलवायु उपायों पर चर्चा का अवसर उपलब्ध कराने के लिए अध्यक्षता को धन्यवाद दिया। ऐसे उपाय सभी विकासशील देशों को प्रभावित कर रहे हैं और कन्वेंशन तथा उसके पेरिस समझौते में निहित समानता और CBDR-RC के सिद्धांतों के विपरीत हैं। वक्तव्य में ज़ोर दिया गया कि इन मुद्दों को अब और नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता, और पार्टियों ने इस प्रवृत्ति को उलटने की दिशा में पहला कदम उठाया है।

भारत ने जलवायु कार्रवाई के प्रति अपने सिद्धांतिक दृष्टिकोण को दोहराते हुए कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि शमन (Mitigation) का बोझ उन देशों पर न डाला जाए जिनकी इस समस्या को उत्पन्न करने में सबसे कम ज़िम्मेदारी है। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों से स्वयं को बचाने के लिए वैश्विक दक्षिण में स्थित कमजोर आबादी को अधिक वैश्विक समर्थन की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।

भारत ने विज्ञान-आधारित और समानतापूर्ण जलवायु कार्रवाई के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई। यह उल्लेख किया गया कि भारत कानून-आधारित, समान और राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करने वाले वैश्विक व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्ध है। साथ ही भारत सभी पार्टियों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि जलवायु महत्वाकांक्षा समावेशी, न्यायसंगत और समानतापूर्ण हो।

अंत में, वक्तव्य ने आगे की राह में ब्राज़ील और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के प्रति भारत के समर्थन और आभार को पुनः दोहराया। यह सभी पार्टियों से सामूहिक प्रयास करने का आह्वान करता है ताकि बेलें से शुरू हुई यह यात्रा निष्पक्षता, एकजुटता और सभी के साझा समृद्धि से परिभाषित भविष्य की ओर ले जाए।


एसईसीआई और आंध्र प्रदेश सरकार ने 1200 MWh BESS और 50 MW हाइब्रिड सोलर परियोजना के लिए सरकारी आदेशों का आदान-प्रदान किया

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Solar Energy Corporation of India Limited (SECI), जो नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE), भारत सरकार के अंतर्गत एक नवरत्न सीपीएसयू है, ने आज आंध्र प्रदेश सरकार के साथ 1200 MWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के नंद्याल में विकास तथा 50 मेगावाट हाइब्रिड सोलर प्रोजेक्ट के लिए सरकारी आदेशों (GOs) का आदान-प्रदान किया।

यह आदान-प्रदान विशाखापट्टनम में आयोजित आंध्र प्रदेश पार्टनरशिप समिट 2025 के ऊर्जा सत्र के दौरान हुआ, जिसे आंध्र प्रदेश सरकार के उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग ने CII के साथ मिलकर आयोजित किया था।

परियोजना अनुमोदन और कार्यान्वयन

बिजली मंत्रालय ने 23 जनवरी 2025 के आदेश के माध्यम से 1200 MWh BESS परियोजना को मार्केट-बेस्ड ऑपरेशंस मोड के तहत लागू करने के लिए SECI को नामित किया था।

यह परियोजना SECI बोर्ड के अध्यक्ष संतोष कुमार सारंगी द्वारा 22 अक्टूबर 2025 को अनुमोदित की गई। MNRE लगातार दोनों परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर रहा है।

CAPEX मोड के तहत परियोजनाओं का विकास करेगा SECI

दोनों—BESS और हाइब्रिड सोलर प्रोजेक्ट—CAPEX मोड में विकसित किए जाएंगे, जिसमें SECI पूरी निवेश ज़िम्मेदारी निभाएगा।

आंध्र प्रदेश के ऊर्जा मंत्री गोट्टिपाटी रवि कुमार ने SECI प्रतिनिधियों को सरकारी आदेश सौंपे। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव के. विजयानंद और NREDCAP के उपाध्यक्ष एम. कमलाकर बाबू उपस्थित रहे।

SECI की ओर से शिवकुमार वेंकट वेपाकोंमा और  रोहित चौबे मौजूद थे।

भारत के स्वच्छ ऊर्जा इकोसिस्टम को मजबूती

इन सरकारी आदेशों का आदान-प्रदान आंध्र प्रदेश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इन परियोजनाओं से—

  • राज्य की ग्रीन एनर्जी स्टोरेज क्षमता बढ़ेगी

  • एक सक्षम और लचीला ग्रीन ग्रिड तैयार होगा

  • भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में तेजी आएगी

SECI ने राज्यों और केंद्र सरकार के साथ मिलकर भारत के ऊर्जा भविष्य को अधिक हरित और सक्षम बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की आठवीं महासभा का उद्घाटन किया

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (28 अक्टूबर, 2025) नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की आठवीं महासभा के उद्घाटन सत्र का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) मानवता की साझा आकांक्षा का प्रतीक है — सौर ऊर्जा को समावेश, गरिमा और सामूहिक समृद्धि के स्रोत के रूप में उपयोग करने की दिशा में एक वैश्विक प्रयास।

राष्ट्रपति ने कहा कि जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है, और इस खतरे से निपटने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। भारत जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके समाधान के लिए दृढ़ कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा कि ISA सौर ऊर्जा को अपनाने और उसके उपयोग को प्रोत्साहित कर इस वैश्विक चुनौती का समाधान प्रस्तुत करता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि समावेश का विचार भारत की विकास यात्रा की पहचान है। देश के सबसे दूरस्थ क्षेत्रों में घरों को रोशन करने के हमारे अनुभव ने इस विश्वास को मजबूत किया है कि ऊर्जा समानता ही सामाजिक समानता की नींव है। सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता समुदायों को सशक्त बनाती है, स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देती है और बिजली आपूर्ति से कहीं आगे जाकर अवसरों के द्वार खोलती है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि सशक्तिकरण और समावेशी विकास का साधन है।

राष्ट्रपति ने सभी सदस्य देशों से आह्वान किया कि वे केवल अवसंरचना निर्माण से आगे बढ़कर लोगों के जीवन पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने कहा कि इस महासभा को एक सामूहिक कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए जो सौर ऊर्जा को रोजगार सृजन, महिलाओं के नेतृत्व, ग्रामीण आजीविका और डिजिटल समावेशन से जोड़े। प्रगति को केवल मेगावॉट में नहीं, बल्कि रोशन हुए जीवन, सशक्त परिवारों और परिवर्तित समुदायों की संख्या से मापा जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रौद्योगिकी विकास और उन्नत तकनीकों के साझा उपयोग पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि सभी देशों को अधिकतम लाभ मिल सके। साथ ही, बड़े पैमाने पर सौर संयंत्रों के विस्तार के दौरान पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि पर्यावरण संरक्षण ही हरित ऊर्जा की मूल प्रेरणा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमें अपने देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया और आने वाली पीढ़ियों के लिए अधिक समर्पण के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस महासभा की चर्चाएँ और निर्णय सौर ऊर्जा उत्पादन में एक मील का पत्थर साबित होंगे और एक समावेशी व न्यायपूर्ण विश्व के निर्माण में योगदान देंगे।


अबू धाबी में ‘गार्डियंस ऑफ द वाइल्ड’ रिपोर्ट जारी; केंद्रीय मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने वन रक्षकों के योगदान को सराहा

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वन एवं वन्यजीव संरक्षण में समर्पित हमारे बहादुर पुरुषों और महिलाओं के प्रयासों को सम्मानित करना गौरव की बात है — केंद्रीय मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह

"वनों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए अपने जीवन को समर्पित करने वाले हमारे बहादुर पुरुषों और महिलाओं के प्रयासों को सम्मानित करने वाले पुरस्कार समारोह में उपस्थित होना मेरे लिए सम्मान की बात है," यह बात केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने 11 अक्टूबर, 2025 को अबू धाबी में कही।
वे आईयूसीएन वर्ल्ड कंज़र्वेशन कांग्रेस 2025 के दौरान आयोजित ‘फॉरेस्ट रेंजर्स के सम्मान समारोह’ में भाग ले रहे थे।

इस अवसर पर मंत्री महोदय ने कहा कि “ये वही लोग हैं जो यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारे देश की समृद्ध वन्यजीव विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रहे।” इस दौरान उन्होंने ‘गार्डियंस ऑफ द वाइल्ड’ शीर्षक से एक रिपोर्ट भी जारी की।

सभा को संबोधित करते हुए कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि दुनिया भर के देशों ने वनों और वन्यजीवों की रक्षा के लिए व्यापक कानून और नीतिगत ढाँचे तैयार किए हैं, परंतु इन्हें वास्तविक रूप से धरातल पर लागू करने का कार्य हमारे वन रेंजर और सहयोगी कर्मचारी करते हैं। उनका कार्य गश्त करना, वन्यजीवों की गणना करना, जंगल की आग से लड़ना आदि अनेक प्रकार की गतिविधियों को शामिल करता है।
उन्होंने कहा कि वन रक्षक अपने जीवन को जोखिम में डालकर शिकारी और अवैध लकड़ी तस्करों से जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा करते हैं, और कई ने इस कर्तव्य-पालन में अपने प्राणों की आहुति दी है।

मंत्री ने वन रक्षकों और सहयोगी स्टाफ की निष्ठा और समर्पण को सलाम किया तथा आईयूसीएन और डब्ल्यूटीआई को उनके इस सम्मान और सराहना के लिए बधाई दी। कीर्ति वर्धन  सिंह ने अपने बचपन से लेकर अब तक वन कर्मचारियों के साथ हुई अनेक मुलाकातों का उल्लेख किया और वनों तथा वन्यजीवों के बारे में उनके पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय बुद्धिमत्ता की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकारों को इस अमूल्य ज्ञान को मान्यता देनी चाहिए और इसका दस्तावेज़ीकरण करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि भारत में वनों की रक्षा करने वाले पुरुषों और महिलाओं को क्रमशः ‘वनरक्षक’ और ‘वनरक्षिका’ के रूप में सम्मानित किया जाता है।

कीर्ति वर्धन सिंह ने इस अवसर पर यह आश्वासन दिया कि सरकार अग्रिम पंक्ति के वन कर्मचारियों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हरसंभव सहायता प्रदान करती रहेगी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार नियमित रूप से क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाती है तथा आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रही है — जैसे कि ड्रोन निगरानी, सैटेलाइट ट्रैकिंग और वन्यजीवों की रेडियो कॉलरिंग।
इन कदमों से यह सुनिश्चित होता है कि जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मचारी आधुनिक तकनीक से सुसज्जित हों और अवैध गतिविधियों से वनों और वन्यजीवों की रक्षा के साथ-साथ मानव-वन्यजीव संघर्षों की रोकथाम भी कर सकें।


भूपेन्द्र यादव ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ पहल के तहत असोल भट्टी में पौधारोपण किया

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सेवा पर्व 2025 के तहत, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने आज असोल भट्टी वन्यजीव अभयारण्य (ABWLS), नई दिल्ली में एक पौधा लगाया। यह वृक्षारोपण कार्यक्रम सरकार की पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करता है और यह राष्ट्रीय अभियान ‘एक पेड़ माँ के नाम’ के तहत आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम में स्कूल के बच्चों, केंद्रीय मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, दिल्ली राज्य सरकार के वन विभाग (GNCTD) और 132 इको टास्क फोर्स (ETF), राजपूत रेजिमेंट के अधिकारियों ने भाग लिया, जो ABWLS में तैनात हैं।

भूपेन्द्र यादव ने छात्रों और ETF कर्मियों के साथ बातचीत करते हुए उन्हें प्रकृति की देखभाल करने और पर्यावरण संरक्षण को समाज में एक सामूहिक आंदोलन बनाने के लिए प्रेरित किया। केंद्रीय और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी ने देश के लिए हरित और सतत भविष्य की दिशा में सहयोग को और मजबूत किया।

कार्यक्रम का समापन सेवा पर्व के तहत सामुदायिक गतिविधियों को जारी रखने के संकल्प के साथ हुआ, जिसमें नागरिकों को ‘एक पेड़ माँ के नाम’ पहल के माध्यम से अपनी माताओं के सम्मान में पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रेरित किया गया।

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