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सशक्त समाज निर्माण में शिक्षा और संगठन की भूमिका अहम : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बलौदा बाजार जिले के ग्राम चांपा में आयोजित छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के दो दिवसीय 80वें महाअधिवेशन में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी एवं समाज सुधारक डॉ. खूबचंद बघेल की पुण्य तिथि पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की तथा समाज की विभूतियों को पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री का गजमाला पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया।

मुख्यमंत्री साय ने मनवा कुर्मी समाज को परिश्रमी, संगठित और उन्नत कृषक परंपरा वाला समाज बताते हुए कहा कि समाज का योगदान राज्य की प्रगति में महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने 80वें महाअधिवेशन की बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में मेल-मिलाप, समन्वय और सकारात्मक निर्णयों को बढ़ावा देते हैं, जिसका लाभ पूरे प्रदेश और देश को मिलता है। उन्होंने कहा कि राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा के गृह ग्राम चांपा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होना उनके लिए सौभाग्य की बात है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा सशक्त समाज निर्माण का सबसे मजबूत आधार है। उन्होंने समाज द्वारा बेटा-बेटी दोनों को शिक्षा से जोड़ने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षित समाज ही आत्मनिर्भर और प्रगतिशील समाज बनता है। उन्होंने महिला स्वरोजगार को बढ़ावा देने, युवाओं में नशामुक्ति के प्रति जागरूकता और सामाजिक सुधार के प्रयासों को भी सराहनीय बताया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करने में पूरी प्रतिबद्धता से कार्य किया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए गए हैं। इस वर्ष समर्थन मूल्य पर 25 लाख 24 हजार किसानों से 141 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदा गया है तथा होली से पूर्व किसानों को लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की अंतर राशि प्रदान की जाएगी। महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख महिलाओं को अब तक 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में अब विकास की नई तस्वीर दिखाई दे रही है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री के संकल्प के अनुरूप मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में सरकार दृढ़ता से काम कर रही है। नियद नेल्लार योजना के माध्यम से लगभग 400 गांवों में विकास कार्यों को गति दी गई है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्राम नरदहा में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 50 लाख रुपये तथा बलौदा बाजार में सामुदायिक भवन के लिए 25 लाख रुपये की राशि प्रदान करने की घोषणा की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में पिछले दो वर्षों में उल्लेखनीय विकास हुआ है और किसानों, महिलाओं तथा युवाओं के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं प्रभावी रूप से लागू की गई हैं।

अधिवेशन में समाज के केंद्रीय अध्यक्ष खोड़स राम वर्मा ने समाज द्वारा लिए गए सामाजिक सुधार के महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी दी। कार्यक्रम में राजिम विधायक रोहित साहू सहित बड़ी संख्या में समाज के पदाधिकारी, महिलाएं, युवा और स्वजातीय बंधु उपस्थित थे।

स्वस्थ समाज ही समृद्ध राज्य की नींव : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री ने जीपीएम में नवीन जिला अस्पताल भवन निर्माण कार्य का किया शुभारंभ

18 करोड़ के लागत से बनेगा 100 बिस्तरयुक्त जिला अस्पताल भवन 

52 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त और 71 ग्राम पंचायतें बाल विवाह मुक्त

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जीपीएम जिले की स्थापना की छठवीं वर्षगांठ के अवसर पर जिले को स्वास्थ्य क्षेत्र की एक बड़ी सौगात दी है। उन्होंने जिला अस्पताल के नवीन भवन के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। नवीन जिला अस्तपाल करीब 18 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगा। यह अत्याधुनिक अस्पताल 100 बिस्तरयुक्त होगा। इस अस्पताल के बनने से जिले के नागरिकों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता विधायक प्रणव मरपच्ची ने की।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि स्वस्थ समाज ही समृद्ध राज्य की नींव होता है। जीपीएम जिले में नए अस्पताल भवन का निर्माण स्वास्थ्य सुविधाओं को नई मजबूती देगा। टीबी मुक्त और बाल विवाह मुक्त पंचायतें इस बात का प्रमाण हैं कि जब शासन और समाज मिलकर काम करते हैं, तो बड़े सामाजिक बदलाव संभव होते हैं। छत्तीसगढ़ को रोगमुक्त, सुरक्षित और सशक्त बनाने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। 

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में जिले की 52 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त एवं 71 ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित किया। इन पंचायतों के सरपंचों को प्रशस्ति पत्र एवं महात्मा गांधी जी की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया गया। गौरतलब है कि बाल विवाह मुक्त घोषित ग्राम पंचायतों में पिछले दो वर्षों में एक भी बाल विवाह के प्रकरण सामने नहीं आए हैं, वहीं टीबी मुक्त पंचायतों में दो से तीन वर्षों से कोई नया प्रकरण दर्ज नहीं हुआ है। यह उपलब्धि जनजागरूकता, स्वास्थ्य विभाग और पंचायतों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को गति देने के लिए जागरूकता हेतु तीन प्रचार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जन-जागरूकता और अधिक सशक्त हो सके। यह अभियान 10 फरवरी से शुरु होकर 25 फरवरी तक चलेगा। जिसमें लोगो को निःशुल्क रुप से फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सामूहिक दवा सेवन कराया जाएगा। कार्यक्रम में विधायक अनुज शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष समीरा पैंकरा, अनेक जनप्रतिनिधियों सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।

न्यूयॉर्क में सामाजिक विकास आयोग के इतर भारत–ग्वाटेमाला वार्ता, द्विपक्षीय सहयोग को नई मजबूती

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न्यूयॉर्क में आयोजित सामाजिक विकास आयोग (Commission for Social Development) की बैठक के इतर केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने ग्वाटेमाला की सामाजिक विकास उप-मंत्री महामहिम क्लाउडिया टेरेसा वालेंज़ुएला लोपेज़ से मुलाकात की। इस अवसर पर दोनों देशों के बीच गर्मजोशीपूर्ण और पारस्परिक लाभकारी साझेदारी को और सशक्त करने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया गया।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने महिला-नेतृत्व वाले और समावेशी विकास के लिए भारत के “समग्र सरकार दृष्टिकोण” (Whole-of-Government Approach) पर प्रकाश डाला। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कौशल विकास, डिजिटल सशक्तिकरण तथा महिलाओं की आर्थिक भागीदारी से जुड़ी प्रमुख पहलों की जानकारी साझा की।

सावित्री ठाकुर ने स्वयं सहायता समूह (SHG), प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), पीएम-पोषण स्कूल भोजन योजना और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे प्रमुख कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए इन क्षेत्रों में भारत के अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने की इच्छा जताई। उन्होंने यह भी कहा कि ग्वाटेमाला का ‘शक्ति-सैट’ (ShakthiSAT) वैश्विक STEM पहल में शामिल होना, विशेष रूप से बालिकाओं के लिए, अत्यंत उत्साहजनक है।

दोनों पक्षों ने लैंगिक समानता, गरीबी उन्मूलन, समावेशी विकास और संयुक्त राष्ट्र में बहुपक्षीय सहयोग के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। साथ ही सामाजिक विकास, महिला सशक्तिकरण और आदिवासी समुदायों के कल्याण जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

इसके अतिरिक्त, केंद्रीय मंत्री ने भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों से भी संवाद किया। इस दौरान उन्होंने पंखुड़ी पोर्टल की जानकारी साझा की और प्रवासी भारतीयों से आग्रह किया कि वे आंगनवाड़ी केंद्रों और बाल देखभाल गृहों के समर्थन सहित, स्वैच्छिक और परोपकारी योगदान के माध्यम से भारत के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।

यह मुलाकात भारत और ग्वाटेमाला के बीच सामाजिक विकास और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

सामाजिक विकास आयोग के 64वें सत्र में भारत ने समावेशी और अधिकार-आधारित विकास के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई

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महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सामाजिक विकास आयोग (CSocD) के 64वें सत्र में समावेशी और अधिकार-आधारित सामाजिक विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया। भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए सावित्री ठाकुर ने कहा कि भारत में सामाजिक न्याय और सामाजिक संरक्षण संविधान में निहित मूल्यों पर आधारित हैं तथा देश की दीर्घकालिक दृष्टि “विकसित भारत 2047” के अनुरूप हैं।

उन्होंने “सबका साथ, सबका विकास” के मार्गदर्शक सिद्धांत को रेखांकित किया, जो यह दर्शाता है कि सरकार और समाज मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कोई भी पीछे न छूटे।

सावित्री ठाकुर ने समावेशन, व्यापक पहुँच और अंतिम छोर तक सेवा वितरण को दर्शाने वाली प्रमुख राष्ट्रीय पहलों का उल्लेख किया, जिनमें शामिल हैं:

  • शिक्षा में लड़कियों और लड़कों की समान भागीदारी, जिसे बेहतर स्कूल अवसंरचना और दूरदराज़ क्षेत्रों में आवासीय विद्यालयों से समर्थन मिला है

  • पेयजल, स्वच्छ खाना पकाने की ऊर्जा और स्वच्छता सुविधाओं जैसी बुनियादी सेवाओं का बड़े पैमाने पर विस्तार, जिससे महिलाओं और कमजोर समुदायों को विशेष लाभ हुआ है

  • करोड़ों बैंक खातों के माध्यम से वित्तीय समावेशन में क्रांतिकारी प्रगति, जिसमें महिलाएँ उद्यमिता और ऋण योजनाओं की प्रमुख लाभार्थी बनकर उभरी हैं

  • महिलाओं और बच्चों के लिए समर्पित हेल्पलाइनों और एकीकृत सेवा केंद्रों के माध्यम से देशव्यापी संरक्षण और सहायता तंत्र

  • 100 मिलियन से अधिक लाभार्थियों तक पहुँचने वाले व्यापक मातृ, शिशु स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यक्रम

  • वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, असंगठित श्रमिकों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए विस्तारित सामाजिक सुरक्षा एवं लक्षित योजनाएँ

भारत ने सार्वजनिक सेवा वितरण में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही बढ़ाने में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) की महत्वपूर्ण भूमिका को भी उजागर किया।

वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल देते हुए भारत ने सामाजिक विकास के मॉडल को आगे बढ़ाने हेतु बहुपक्षीय सहयोग, क्षमता निर्माण और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को मजबूत करने के समर्थन की बात कही।

सामाजिक विकास आयोग के 64वें सत्र की अध्यक्षता यूक्रेन की संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि एवं आयोग की अध्यक्ष राजदूत ख्रिस्तीना हायोविषिन ने की। सत्र को संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव अमीना जे. मोहम्मद, महासभा की अध्यक्ष महामहिम अन्नालेना बेयरबॉक, ईकोसॉक के अध्यक्ष एवं नेपाल के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत लोकबहादुर थापा, नीति समन्वय के लिए सहायक महासचिव (DESA) ब्योर्ग सैंडक्येर तथा सामाजिक विकास पर एनजीओ समिति की अध्यक्ष गिलियन डी’सूज़ा-नज़रेथ ने संबोधित किया। इस सत्र में 100 से अधिक संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों ने भाग लिया।


MGR की जयंती पर प्रधानमंत्री ने श्रद्धांजलि अर्पित की

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत रत्न डॉ. एम.जी. रामचंद्रन (MGR) की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

प्रधानमंत्री ने एक बयान में MGR की बहुआयामी विरासत की सराहना की और तमिलनाडु के सामाजिक-आर्थिक विकास में उनके महत्वपूर्ण योगदान तथा तमिल संस्कृति को वैश्विक मंच पर पहुँचाने के उनके प्रयासों को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री ने X पर अलग-अलग पोस्ट में कहा:

“अपनी जयंती पर असाधारण MGR को श्रद्धांजलि। तमिलनाडु की प्रगति में उनका योगदान उत्कृष्ट है। तमिल संस्कृति को लोकप्रिय बनाने में उनकी भूमिका भी समान रूप से उल्लेखनीय है। हम हमेशा उनके समाज के लिए दृष्टिकोण को साकार करने के लिए काम करते रहेंगे।”

बाबा के बताए मार्ग पर चलकर ही बनेगा विकसित छत्तीसगढ़: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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लालपुर में महाविद्यालय की घोषणा सहित विकास कार्यों की सौगात

सरकार प्रत्येक पात्र किसान से धान खरीदी के लिए पूर्णतः संकल्पित

मंदिर एवं जैतखाम में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि की कामना

लालपुर धाम में गुरु घासीदास जयंती एवं तीन दिवसीय मेले में शामिल हुए मुख्यमंत्री साय

रायपुर- बाबा गुरु घासीदास द्वारा बताए गए सत्य, समानता और मानवता के मार्ग पर चलकर ही छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार महापुरुषों के आदर्शों और सपनों के अनुरूप समतामूलक, न्यायपूर्ण और समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज मुंगेली जिले के लालपुर में आयोजित गुरु घासीदास जयंती एवं तीन दिवसीय मेला कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने  इस अवसर पर लालपुर में नवीन महाविद्यालय की स्थापना, मेला एवं कार्यक्रम आयोजन हेतु दी जाने वाली राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये करने, कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश द्वार निर्माण के लिए 25 लाख रुपये तथा मुंगेली सतनाम भवन के जीर्णोद्धार हेतु 25 लाख रुपये की स्वीकृति की घोषणा की।

कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्यमंत्री साय ने बाबा गुरु घासीदास मंदिर एवं जैतखाम में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और जनकल्याण के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अधिकांश गारंटियों को पूरा किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 18 लाख आवासों की स्वीकृति दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रत्येक पात्र किसान से धान खरीदी के लिए पूर्णतः संकल्पित है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बीते दो वर्षों में धान के रकबे और किसानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 70 लाख महिलाओं को महतारी वंदन योजना का लाभ दिया जा रहा है। पीएसी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में नई औद्योगिक नीति लागू की गई है, जिससे समाज के प्रत्येक वर्ग का बेटा-बेटी उद्यमी बन सके। उन्होंने सभी के सहयोग से विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का आह्वान किया। इस अवसर पर सतनाम आचार संहिता एवं जागरूकता कैलेंडर का भी विमोचन किया गया।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि अनुसूचित जाति प्राधिकरण को सशक्त करते हुए इसके बजट को 50 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 75 करोड़ रुपये किया गया है। कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में सर्व समाज का समावेशी विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित समाज के पांच प्रतिभावान बेटा-बेटियों को पायलट प्रशिक्षण हेतु 15-15 लाख रुपये की सहायता देने का निर्णय सरकार की दूरदर्शिता को दर्शाता है।

कार्यक्रम में खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, विधायक डोमन लाल कोरसेवाड़ा, पूर्व विधायक सनम जांगड़े, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीकांत पांडेय, उपाध्यक्ष  शांति देवचरण भास्कर, जनपद अध्यक्ष लोरमी वर्षा विक्रम सिंह, नगर पंचायत अध्यक्ष सुजीत वर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में सतनामी समाज के अनुयायी उपस्थित थे।

डॉ. मनसुख मांडविया करेंगे दोहा में द्वितीय विश्व सामाजिक विकास शिखर सम्मेलन (WSSD-2) में भारत का नेतृत्व —वैश्विक मंच पर सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के लिए भारत की प्रतिबद्धता

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श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया 4 से 6 नवंबर, 2025 तक दोहा, क़तर में आयोजित होने वाले द्वितीय विश्व सामाजिक विकास शिखर सम्मेलन (World Summit for Social Development – WSSD-2) में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।

डॉ. मांडविया उद्घाटन सत्र में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य प्रस्तुत करेंगे और विश्व नेताओं के साथ मिलकर ‘दोहा राजनीतिक घोषणा’ को अपनाएंगे। वे उच्च-स्तरीय गोलमेज बैठक में भी शामिल होंगे, जिसका विषय है — “सामाजिक विकास के तीन स्तंभों को सुदृढ़ करना: गरीबी उन्मूलन, सभी के लिए पूर्ण एवं उत्पादक रोजगार और सम्मानजनक कार्य, तथा सामाजिक समावेशन।” इस दौरान वे भारत की समावेशी, डिजिटल रूप से समर्थ और नागरिक-केन्द्रित विकास यात्रा को साझा करेंगे।

भारत अब एक ऐसे राष्ट्र के रूप में वैश्विक मंच पर है जिसने गरीबी उन्मूलन में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। 2011 से 2023 के बीच 24.8 करोड़ भारतीय बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले, जिससे 2022-23 में अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली जनसंख्या घटकर केवल 2.3% रह गई। इस परिवर्तन का श्रेय प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और जन धन योजना जैसी प्रमुख योजनाओं को जाता है।

भारत का सामाजिक सुरक्षा कवरेज भी तेजी से बढ़ा है — जो अब विश्व के सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा तंत्रों में से एक है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) द्वारा सत्यापित आंकड़ों के अनुसार, 2015 में 19% से बढ़कर 2025 में 64.3% जनसंख्या को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिला है — यानी 94 करोड़ से अधिक नागरिक। यह सफलता जन धन–आधार–मोबाइल (JAM) ढांचे के माध्यम से पारदर्शी और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण की बदौलत संभव हुई है।

भारत की भागीदारी का एक प्रमुख आकर्षण होगा नीति आयोग द्वारा आयोजित साइड इवेंट — “Pathways Out of Poverty: India’s Experience in Empowering the Last Mile” (5 नवंबर 2025)। इस सत्र में भारत की गरीबी उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा के विस्तार में उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में ब्राज़ील, मालदीव और ILO जैसे अंतरराष्ट्रीय साझेदारों की भागीदारी भी होगी, जो भारत की “2030 सतत विकास एजेंडा” और “किसी को पीछे न छोड़ने” की प्रतिबद्धता को और मज़बूती देगी।

डॉ. मांडविया ILO द्वारा आयोजित “Global Coalition for Social Justice” मंत्री स्तरीय कार्यक्रम में भी शामिल होंगे और क़तर, रोमानिया, मॉरीशस, यूरोपीय संघ तथा ILO के महानिदेशक सहित कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं और वरिष्ठ संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों से द्विपक्षीय वार्ताएं करेंगे। ये बैठकें श्रमिक गतिशीलता, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार सृजन के क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करेंगी।

इसके अलावा, डॉ. मांडविया राष्ट्रीय करियर सेवा (NCS) पोर्टल पर आयोजित कार्यक्रम में भी भाग लेंगे, जिसे श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और भारतीय व्यवसाय एवं प्रोफेशनल्स परिषद (IBPC) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। यह मंच नौकरी चाहने वालों और नियोक्ताओं को पारदर्शी और समावेशी अवसर प्रदान करता है।

शिखर सम्मेलन के दौरान Aspire Zone Complex और अन्य खेल अवसंरचना स्थलों का दौरा भी प्रस्तावित है, ताकि खेल प्रबंधन और युवा सहभागिता के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान किया जा सके।

विश्व सामाजिक विकास शिखर सम्मेलन (WSSD-2) 1995 के कोपेनहेगन शिखर सम्मेलन के उद्देश्यों — गरीबी उन्मूलन, सम्मानजनक कार्य और सामाजिक समावेशन — को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है। दोहा शिखर सम्मेलन देशों को साझा लक्ष्यों की पुनः पुष्टि और सहयोग मजबूत करने के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करता है।

डॉ. मांडविया की यह यात्रा भारत की “विकसित भारत @2047” की दृष्टि और समाज न्याय, समावेशी विकास एवं डिजिटल सशक्तिकरण के प्रति भारत की वैश्विक प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।


पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के संयोजन में प्रादेशिक संगोष्ठी आयोजित

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 लोकतंत्र में लोक की अहम भूमिका-डा. चितरंजन कर 

महासमुंद- स्वाध्याय केंद्र महासमुंद में स्वयंसेवी सामाजिक संगठन पीपला वेलफेयर फाउंडेशन छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में रविवार को ‘लोकतंत्र में लोक की भूमिका‘ विषय पर संगोष्ठी आयोजित हुआ।

जिसमें स्वर्णिम छत्तीसगढ़ के निर्माण में जन सामान्य, साहित्यकारों, विद्वानों और सामाजिक संगठनों की भूमिका पर गहन विमर्श व चिंतन किया गया। संगोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती की पूजा आराधना व राजगीत से हुआ। फाउंडेशन के अध्यक्ष दूजेराम धीवर ने संगोष्ठी आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा समाज में बढ़ रही अराजकता को सामाजिक चेतना से ही रोका जा सकता है। इसलिए संगोष्ठी के माध्यम से सामाजिक चेतना जागृत करने का प्रयास किया जा रहा है। संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने लोकतंत्र में लोक की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा-पड़ोस में आग लगने से धुंआ सबको प्रभावित करता है। इसलिए समाज में बढ़ती अराजकता को रोकने, विद्वानों व चिंतकों को समय रहते कदम उठाना चाहिए।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भाषाविद डॉ. चितरंजन कर ने कहा कि सामाजिक चेतना जागृत करने के लिए इस तरह का आयोजन होते रहना चाहिए। उन्होंने लोकतंत्र में लोक की महत्ता बताते हुए कहा कि सार्थक, क्रियात्मक और प्रेरणास्पद पहल की आवश्यकता है। हम अपने दायरे में रहकर जो कर सकते हैं, वह निरंतर करते रहंे यही लोक की भूमिका है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही सेवानिवृत्त शिक्षाधिकारी सौरिन चंद्रसेन ने कहा कि हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का बोध होना चाहिए। लोग अपने-अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाएं। 

वरिष्ठ साहित्यकार अशोक शर्मा ने लोकतंत्र में लोक की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि जन जागरण के लिए चिंगारी जलाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में लोक स्वामी हैं और तंत्र सेवक की भूमिका में हैं। उन्होंने वर्तमान परिवेश पर कटाक्ष करते हुए कहा कि-

‘अंधेरा कितना भी घना हो, उसकी उम्र एक रात से अधिक नहीं होती।‘

वरिष्ठ पत्रकार व चिंतक आनंदराम पत्रकारश्री ने पीपला वेलफेयर फाउंडेशन की उत्पत्ति से लेकर विकास यात्रा और समाज में मीडिया की भूमिका, लोकतंत्र के लोभतंत्र में तब्दीली और चुनाव प्रणाली लोकतांत्रिक नहीं होकर पार्टी तंत्र से संचालित होने पर कटाक्ष किया।

शिक्षाविद् और थिंक आईएएस एकेडमी रायपुर के डायरेक्टर मुरली मनोहर देवांगन ने लोकतंत्र में लोक और तंत्र की परिभाषा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साहित्य मोटी होती जा रही है, भाषा पतली। हमें समय के अनुरूप साहित्य लेखन व शिक्षा में परिवर्तन करते रहना चाहिए।

डॉ. साधना कसार ने पीपला फाउंडेशन द्वारा वैचारिक चेतना जागृत करने की पहल की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि समाज में महिलाएं आधुनिक होती जा रही है। इससे परिवार और बच्चों का संस्कार बदल रहा है।

राजनीतिक चिंतक योगेश्वर चंद्राकर ने कहा कि हमें अपनी भूमिका पर अवश्य चिंतन करना चाहिए। अच्छाई के चुप रहने से समाज में बुराईयां पनपती है। 

आधार वक्तव्य देते हुए मंच संचालक शशांक खरे ने कहा कि लोकतंत्र में लोक की भूमिका जब तक जागरूकता के साथ सुनिश्चित नहीं होगी। लोकतांत्रिक व्यवस्था और सफलता पर सवाल उठते रहेंगे। संरक्षक पारसनाथ साहू ने किसानों की पीड़ा और नशा की लत से बिखरते परिवार को बचाने में लोक की भूमिका रेखांकित की। शिक्षाविद् छत्रधारी सोनकर ने आभार ज्ञापित करते हुए कहा कि भीड़ तंत्र और दल तंत्र से लोकतंत्र प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक जागरूकता का पर्याय शिक्षा व्यवस्था अब स्वार्थ का पर्याय बनकर रह गया है। लोगों को जागरूक होना ही पड़ेगा। संगोष्ठी में जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी टिकवेंद्र जाटवर ने भी सारगर्भित उद्बोधन दिया। 

प्रादेशिक संगोष्ठी के आयोजन और संयोजन में फाउंडेशन से अध्यक्ष दूजेराम धीवर, संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल, कोषाध्यक्ष कोमल लाखोटी, सचिव अभिमन्यु साहू, समाजसेवी शेखर चंद्राकर, सक्रिय सदस्य यादेश देवांगन, राहुल पटेल, समाजसेवी तिलक साव, सुरेन्द्र मानिकपुरी, गोवर्धन साहू, कमलेश साहू, यशस्वी, साक्षी, भूमि, हिमांशी, भूजल, उज्जवल व दीपक पटेल की अहम् भूमिका रही। सभी ने फाउंडेशन द्वारा सामाजिक चेतना जागृत करने संगोष्ठी आयोजन की पहल की सराहना की।

संगोष्ठी का संचालन दूरदर्शन व आकाशवाणी के अनाउंसर शशांक खरे ने किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से माधुरी कर, पूर्व नपाध्यक्ष पवन पटेल, डॉ सविता चंद्राकर, समाजसेवी त्रिपुरारी पटेल, टेकराम सेन, पोखनदास मानिकपुरी, उमाशंकर पांडे, प्रमोद धीवर, द्रौपदी साहू, ओम पटेल सहित बड़ी संख्या में साहित्यकारों, चिंतकों और नागरिकों की उपस्थिति रही।

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