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‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने दुनिया को भारत की सैन्य शक्ति और नागरिकों की सुरक्षा के संकल्प का संदेश दिया: राजनाथ सिंह

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारतीय सशस्त्र बलों के अद्वितीय शौर्य और पराक्रम को प्रदर्शित किया तथा पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और हमारी महिलाओं के सिंदूर की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

रक्षा मंत्री 9 अगस्त 2026 को दिल्ली कैंट स्थित बेस अस्पताल में आयोजित ‘सिंदूर महारक्तदान यात्रा’ रक्तदान शिविर को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भारतीय रक्षा बलों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पाकिस्तान में स्थित आतंकवादियों और उनके आकाओं का सफाया किया तथा भारत की ओर बुरी नजर से देखने वालों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़े।

‘सिंदूर महारक्तदान यात्रा’ की तुलना ऑपरेशन सिंदूर से करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि जहां ऑपरेशन सिंदूर ने साहस और शौर्य का परिचय दिया, वहीं यह विशाल रक्तदान शिविर करुणा और मानव सेवा का प्रतीक है। शिविर में महाराष्ट्र के लगभग 1,000 पहलवानों और खिलाड़ियों ने रक्तदान कर निस्वार्थ सेवा और सशस्त्र बलों के प्रति एकजुटता की भावना का प्रदर्शन किया।

रक्तदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि आज दान किया गया रक्त भविष्य में जरूरतमंद सैनिकों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण भंडार के रूप में काम आएगा। उन्होंने रक्तदान को ‘जीवनदान’ और ‘महादान’ बताते हुए कहा कि विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद मानव रक्त का अभी तक कोई कृत्रिम विकल्प विकसित नहीं किया जा सका है। रक्त केवल मानव शरीर द्वारा ही बनाया जा सकता है और एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को रक्तदान कर सकता है। इसलिए रक्तदान मानव सेवा और परोपकार के सबसे महान कार्यों में से एक है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रत्येक रक्तदाता और रक्त प्राप्त करने वाला व्यक्ति अपने-अपने तरीके से राष्ट्र की सेवा कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से रक्तदान को अपनी जीवनशैली और सामाजिक संस्कृति का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि जब भारत वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब हमारा लक्ष्य केवल विकसित अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं होना चाहिए। हमें एक ऐसे संवेदनशील समाज की भी कल्पना करनी चाहिए, जहां लोग स्वस्थ और सुरक्षित हों तथा जरूरत के समय रक्त जैसी जीवनरक्षक सामग्री आसानी से उपलब्ध हो।

युवाओं से फिटनेस को प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि स्वस्थ और फिट व्यक्ति समाज के लिए अधिक उपयोगी होता है और रक्तदान जैसे नेक कार्यों में बेहतर योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ जैसी पहलों के माध्यम से विशेष रूप से युवाओं को फिटनेस को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

महाराष्ट्र की वीरता और करुणा की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि शारीरिक शक्ति का वास्तविक उद्देश्य दूसरों की रक्षा करना और राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि से आए खिलाड़ियों और पहलवानों का यह योगदान राष्ट्र के लिए एक महान सेवा के रूप में याद रखा जाएगा।

कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रताप राव जाधव, महाराष्ट्र सरकार के उद्योग मंत्री उदय रविंद्र सामंत, सांसद डॉ. श्रीकांत लता एकनाथ शिंदे, थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा (AFMS) के महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन, एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल वी.पी.एस. कौशिक, बेस अस्पताल दिल्ली कैंट के कमांडेंट मेजर जनरल विशाल चौधरी सहित वरिष्ठ सैन्य एवं नागरिक अधिकारी उपस्थित रहे।

सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा (AFMS) के लिए पर्याप्त रक्त भंडार बनाए रखना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि सैन्य अस्पताल नियमित स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ ऑपरेशनल, ट्रॉमा और आपातकालीन परिस्थितियों में भी चिकित्सा सहायता प्रदान करते हैं। लगभग 500 स्वैच्छिक रक्तदाताओं की भागीदारी ने ‘सेवा परमो धर्म’ की भावना को मजबूत किया और यह संदेश दिया कि प्रत्येक पात्र नागरिक नियमित स्वैच्छिक रक्तदान के माध्यम से जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

लेफ्टिनेंट जनरल वीएमबी कृष्णन ने पूर्वी कमान के जीओसी-इन-सी का संभाला पदभार

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लेफ्टिनेंट जनरल वीएमबी कृष्णन ने पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पदभार संभाल लिया है। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल आरसी तिवारी का स्थान लिया, जो 31 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त हुए।

11 जून 1988 को भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल कृष्णन लगभग चार दशकों के समृद्ध और विविध सैन्य अनुभव के साथ इस महत्वपूर्ण कमान की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके करियर में देश के सबसे चुनौतीपूर्ण परिचालन क्षेत्रों में विभिन्न कमान, स्टाफ और प्रशिक्षण संबंधी नियुक्तियां शामिल रही हैं।

वे प्रमुख सैन्य संस्थानों के पूर्व छात्र हैं और उन्होंने सियाचिन जैसे अत्यंत दुर्गम उच्च हिमालयी क्षेत्र में एक इन्फैंट्री बटालियन और इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली है। इसके अलावा, उन्होंने एक इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में भी कार्य किया और बाद में प्रतिष्ठित ब्रह्मास्त्र कोर की कमान संभाली।

रणनीतिक और संस्थागत स्तर पर उन्होंने रक्षा मंत्रालय (सेना) के एकीकृत मुख्यालय में महानिदेशक सूचना प्रौद्योगिकी के रूप में कार्य किया तथा लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में रक्षा सलाहकार के रूप में भी सेवाएं दीं। वर्तमान पदभार संभालने से पहले वे सेना मुख्यालय में क्वार्टर मास्टर जनरल के रूप में कार्यरत थे, जहां उन्होंने आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण सुधार करते हुए परिचालन क्षमता और युद्धक तैयारियों को सुदृढ़ किया।

लेफ्टिनेंट जनरल कृष्णन ‘डोगरा रेजिमेंट’ और ‘डोगरा स्काउट्स’ के कर्नल के प्रतिष्ठित पद भी संभाल रहे हैं। काउंटर इंसर्जेंसी एंड जंगल वारफेयर स्कूल के कमांडेंट के रूप में उनके कार्यकाल ने विशेष प्रशिक्षण और सैन्य सिद्धांतों के विकास में उच्च मानक स्थापित किए।

पदभार ग्रहण करते हुए उन्होंने शहीद वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की और पूर्वी कमान के सभी रैंकों से उच्चतम स्तर की परिचालन तत्परता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने संयुक्तता को मजबूत करने, तकनीकी एकीकरण को गति देने और सभी हितधारकों के साथ समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया, ताकि पूर्वी क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।

लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र पाल सिंह ने पश्चिमी कमान के जीओसी-इन-सी का संभाला पदभार

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लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र पाल सिंह, जो पहले सेना के उप प्रमुख (VCOAS) रह चुके हैं, ने 01 अप्रैल 2026 को पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में पदभार ग्रहण किया। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार का स्थान लिया, जो 31 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त हुए।

पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेस) के अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र पाल सिंह को दिसंबर 1987 में 4वीं बटालियन, पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेस) में कमीशन मिला था। वे भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून और लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं।

लगभग चार दशकों के करियर में उन्होंने विभिन्न कमान और स्टाफ पदों पर सेवाएं दी हैं। उन्होंने उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर उच्च ऊंचाई वाले और संवेदनशील क्षेत्रों में सैन्य इकाइयों का नेतृत्व किया है। उनके परिचालन अनुभव में ऑपरेशन पवन में भागीदारी के साथ-साथ नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कई बार आतंकवाद-रोधी अभियानों का संचालन शामिल है।

VCOAS बनने से पहले उन्होंने सेना मुख्यालय में महानिदेशक परिचालन लॉजिस्टिक्स (DGOL) के रूप में कार्य किया, जहां उन्होंने परिचालन गतिशीलता, लॉजिस्टिक्स एकीकरण और स्थायित्व क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। VCOAS के रूप में उन्होंने सेना की संरचना, क्षमता विकास और समग्र परिचालन तैयारी में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट, सिकंदराबाद से डिफेंस मैनेजमेंट कोर्स तथा भारतीय लोक प्रशासन संस्थान से एडवांस्ड प्रोफेशनल प्रोग्राम इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन किया है। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में मास्टर डिग्री भी प्राप्त की है। उनके उत्कृष्ट सेवा और वीरता के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल और दो सेना मेडल से सम्मानित किया गया है।

पदभार ग्रहण करते हुए उन्होंने उच्च परिचालन तत्परता बनाए रखने, नवाचार को बढ़ावा देने तथा सभी रैंकों के कल्याण और मनोबल को सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह नेतृत्व परिवर्तन भारतीय सेना की निरंतरता और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उनके नेतृत्व में पश्चिमी कमान बहु-क्षेत्रीय अभियानों, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग, खुफिया-आधारित अभियानों तथा बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान देती रहेगी, साथ ही नागरिक प्रशासन के साथ समन्वय भी बनाए रखेगी।

एयर मार्शल सीथेपल्ली श्रीनिवास ने ट्रेनिंग कमांड के AOC-in-C का कार्यभार संभाला

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एयर मार्शल सीथेपल्ली श्रीनिवास ने 01 जनवरी 2026 को एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (AOC-in-C), ट्रेनिंग कमांड, भारतीय वायु सेना के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। अपने नए पद का कार्यभार संभालने के बाद, एयर मार्शल ने ट्रेनिंग कमांड वॉर मेमोरियल पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

एयर मार्शल श्रीनिवास राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पूर्व छात्र हैं और उन्हें 13 जून 1987 को भारतीय वायु सेना के फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त हुआ। वे ‘कैटेगरी ए’ योग्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर हैं और उनके पास 4200 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव है। उन्होंने मिग-21, इस्क्रा, किरण, पीसी-7 एमके-II, एचपीटी-32 और माइक्रोलाइट सहित विभिन्न विमानों पर उड़ान भरी है। वे चेतक/चीता हेलीकॉप्टर पर सेकंड पायलट के रूप में भी योग्य हैं तथा पेचोरा मिसाइल सिस्टम पर श्रेणीकृत ऑपरेशंस ऑफिसर हैं।

अपने करियर में उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण कमांड नियुक्तियाँ संभाली हैं। वे एयर फोर्स अकादमी के कमांडेंट, पश्चिमी सीमा पर एक अग्रिम पंक्ति के फाइटर बेस तथा एक प्रमुख फ्लाइंग ट्रेनिंग बेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग (AOC) रह चुके हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने एडवांस्ड हेडक्वार्टर वेस्टर्न एयर कमांड (जयपुर) में AOC, फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स स्कूल के कमांडिंग ऑफिसर, इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस सेफ्टी के कमांडेंट तथा बेसिक फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल के CO के रूप में भी कार्य किया है।

उनकी स्टाफ नियुक्तियों में असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (पर्सनल ऑफिसर्स), एयर फोर्स अकादमी में चीफ इंस्ट्रक्टर (फ्लाइंग), मुख्यालय सेंट्रल एयर कमांड में ऑपरेशंस स्टाफ, तथा कॉलेज ऑफ एयर वारफेयर में डायरेक्टिंग स्टाफ शामिल हैं। वर्तमान नियुक्ति से पूर्व वे मुख्यालय साउथ वेस्टर्न एयर कमांड (HQ SWAC) में सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर के रूप में कार्यरत थे।

एयर मार्शल श्रीनिवास नेशनल डिफेंस कॉलेज, कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट और डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज के स्नातक हैं। उनकी शैक्षणिक योग्यताओं में डिफेंस एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ में एम.फिल., मास्टर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ तथा डिफेंस एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ में एम.एससी. शामिल हैं।

उनकी उत्कृष्ट और विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें 2017 में विशिष्ट सेवा पदक (VSM) तथा 2024 में अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) से, माननीय राष्ट्रपति द्वारा, सम्मानित किया गया।


भारतीय सेना ने नई दिल्ली में ‘आर्मी स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव 2025’ का आयोजन किया, ओलंपिक मिशन 2036 के विज़न को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम

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भारतीय सेना ने आज नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में ‘आर्मी स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव 2025’ का आयोजन किया। यह आयोजन भारत की खेल यात्रा के एक निर्णायक क्षण पर आयोजित हुआ, जिसने ‘ओलंपिक मिशन 2036’ के प्रति सेना की प्रतिबद्धता और राष्ट्र के खेल विज़न में उसके योगदान को पुनः स्थापित किया।

कार्यक्रम की शुरुआत लेफ्टिनेंट जनरल अजय रामदेव, महानिदेशक (इंटीग्रेटेड ट्रेनिंग) के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि “आर्मी स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव 2025 एक ऐसा मंच है जहां उद्देश्य और जुनून मिलते हैं,” जो भारत की खेल महत्वाकांक्षाओं को नई दिशा देने का कार्य कर रहा है। उन्होंने मिशन ओलंपिक विंग और पैरा-एथलीट्स के प्रयासों की सराहना की और वैज्ञानिक, डेटा-आधारित तथा मानसिक रूप से सशक्त प्रशिक्षण प्रणाली पर बल दिया।

कार्यक्रम में हरि रंजन राव, सचिव (खेल) ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने विश्व स्तरीय खिलाड़ियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और पैरा व एडवेंचर स्पोर्ट्स को राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बनाया है। उन्होंने ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’, ‘खेलो इंडिया सेंटर’ और खेल विज्ञान एकीकरण जैसी सरकारी पहलों का उल्लेख करते हुए सभी हितधारकों के बीच तालमेल की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि भारत 2036 ओलंपिक मिशन के लक्ष्य को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और दीर्घकालिक योजना के माध्यम से प्राप्त कर सके।

लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर, डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (इंफॉर्मेशन सिस्टम्स एंड ट्रेनिंग) ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय सेना और खेलों के बीच संबंध अनुशासन, फिटनेस और टीमवर्क पर आधारित हैं। उन्होंने सेना की खेल पहलों और वैज्ञानिक प्रशिक्षण पर केंद्रित दृष्टिकोण की चर्चा की और सेना, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI), निजी क्षेत्र और अकादमिक संस्थानों के बीच समन्वय की आवश्यकता बताई।

कॉन्क्लेव दो मुख्य विषयों पर केंद्रित था — ‘इंस्टिट्यूशनल सिनर्जी’ और ‘एथलीट 360’, जिसमें राष्ट्रीय खेल नीतियों, संस्थागत ढांचे और तकनीकी नवाचारों के माध्यम से सतत ओलंपिक सफलता सुनिश्चित करने पर विचार-विमर्श हुआ।

एक विशेष ‘फायर साइड चैट’ सत्र में वरिष्ठ अधिकारियों, खिलाड़ियों और खेल प्रशासकों ने भारत के ओलंपिक लक्ष्यों की दिशा में रणनीतिक संवाद किया। इसमें सशस्त्र बलों, खेल प्राधिकरणों और निजी क्षेत्र की संयुक्त भूमिका पर बल दिया गया।

कॉन्क्लेव के दौरान तीन महान खिलाड़ियों को जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, थल सेनाध्यक्ष द्वारा ‘आर्मी स्पोर्ट्स लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया —

  • कर्नल बलबीर सिंह कुल्लर (सेवानिवृत्त) – ओलंपिक कांस्य पदक विजेता, हॉकी (1968)
  • मुरलीकांत पेटकर – पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता (1972)
  • हॉनरी कैप्टन विजय कुमार शर्मा – ओलंपिक रजत पदक विजेता, शूटिंग (2012)

यह सम्मान समारोह साउथ ब्लॉक में आयोजित किया गया, जहां इन खिलाड़ियों की वीरता, समर्पण और उत्कृष्टता का उत्सव मनाया गया — जो भारतीय सेना के आदर्श वाक्य “सेवा परमो धर्मः” (Service Before Self) की सच्ची भावना को दर्शाते हैं।

कॉन्क्लेव ने ‘आर्मी रोडमैप 2032’, ‘नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट बिल’ और ‘खेल नीति 2025’ के अनुरूप सेना की दिशा को भी रेखांकित किया।

कार्यक्रम का समापन भारत को 2036 तक एक वैश्विक खेल महाशक्ति के रूप में स्थापित करने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

आर्मी हॉस्पिटल (R&R) में आठवें बैच की 29 सैन्य नर्सिंग कैडेट्स का कमीशनिंग समारोह आयोजित

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आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रिफरल) की कॉलेज ऑफ नर्सिंग ने 04 नवंबर, 2025 को अपने आठवें बैच के 29 सैन्य नर्सिंग कैडेट्स के कमीशनिंग समारोह का आयोजन किया। यह समारोह आर्मी हॉस्पिटल (R&R) में आयोजित हुआ। चार वर्षों की कठोर शिक्षा और प्रशिक्षण की परिणति के रूप में, नव-नियुक्त नर्सिंग अधिकारियों को प्रिंसिपल मैट्रन द्वारा शपथ दिलाई गई कि वे स्वयं को दयालु और समर्पित सेवक के रूप में राष्ट्र की सेवा में समर्पित करेंगी।

इस अवसर पर समारोह की समीक्षा लेफ्टिनेंट जनरल अविनाश दास, कमांडेंट, आर्मी हॉस्पिटल (R&R) ने की। अपने संबोधन में उन्होंने मिलिटरी नर्सिंग सर्विस की 100 वर्षों की गौरवशाली परंपरा और विरासत को बनाए रखने पर बल दिया। उन्होंने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और शांतिपूर्ण सैन्य स्टेशनों पर सैनिकों और उनके परिवारों को दी जा रही नर्सिंग सेवाओं की सराहना की।

लेफ्टिनेंट जनरल दास ने कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्रिंसिपल और उनके दल के अथक प्रयासों की भी प्रशंसा की, जिन्होंने उच्च गुणवत्ता वाली नर्सिंग शिक्षा और प्रशिक्षण सुनिश्चित किया।

इस अवसर पर अनेक अधिकारी, नर्सिंग अधिकारी और नव-नियुक्त नर्सिंग अधिकारियों के अभिभावक उपस्थित रहे।


थलसेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी का केंद्रीय सेक्टर के अग्रिम चौकियों का दौरा — परिचालन तैयारी की समीक्षा और सैनिकों का उत्साहवर्धन

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थलसेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने केंद्रीय सेक्टर के अग्रिम चौकियों का दौरा किया, जहां उन्होंने परिचालन तैयारी की समीक्षा की, सैनिकों का उत्साहवर्धन किया और रणनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण क्षेत्र में नागरिक-सैन्य संबंधों को सुदृढ़ किया।

अपने दौरे के दौरान, थलसेना प्रमुख ने पिथौरागढ़ और उससे सटे ऊँचाई वाले अग्रिम क्षेत्रों में तैनात सैन्य टुकड़ियों का निरीक्षण किया। उन्होंने उन्नत निगरानी प्रणालियों, विशेष गतिशीलता उपकरणों, नेक्स्ट-जनरेशन तकनीकों के एकीकरण, टोही संसाधनों के अनुकूलन और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय सहित चल रही क्षमता वृद्धि पहलों की जानकारी ली। जनरल द्विवेदी ने चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों में सैनिकों के पेशेवर रवैये, अनुशासन, सामरिक दक्षता और नवाचार की सराहना की।

दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात सैनिकों से बातचीत करते हुए, उन्होंने कठिन जलवायु और ऊबड़-खाबड़ भूभाग में कर्तव्यपालन के प्रति उनके साहस, धैर्य और निष्ठा की प्रशंसा की। उन्होंने “सेवा परमो धर्म” की भावना को दोहराते हुए कहा कि भारतीय थलसेना हर परिस्थिति में देश की सुरक्षा के लिए पूर्णतः तत्पर है। थलसेना प्रमुख ने क्षेत्र के पूर्व सैनिकों और स्थानीय नागरिकों से भी मुलाकात की तथा सभी सैन्य कर्मियों और उनके परिवारों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

कुमाऊं क्षेत्र के सामरिक महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए, विशेषकर नेपाल और चीन की सीमा से लगे क्षेत्रों के द्वार के रूप में, जनरल द्विवेदी ने स्थानीय लोगों की देशभक्ति और दृढ़ता की सराहना की। उन्होंने कुमाऊं रेजिमेंट की गौरवशाली विरासत को याद किया और ऑपरेशन सद्भावना तथा वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत चल रही पहलों—जैसे गर्ब्यांग और कालापानी में टेंट आधारित होमस्टे, सड़क अवसंरचना, हाइब्रिड पावर सिस्टम, चिकित्सा शिविर और पॉलीहाउस के माध्यम से कृषि सहायता—की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि कुमाऊं में भारतीय सेना “दृढ़ता और संवेदना” का प्रतीक है, जो सीमाओं की रक्षा करते हुए सीमांत समुदायों को सशक्त बना रही है।

दौरे के समापन पर, थलसेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने राष्ट्र सेवा, गौरव और कर्तव्य की उच्च परंपराओं को निभाते हुए परिचालन उत्कृष्टता बनाए रखने तथा नागरिक-सैन्य समरसता को सुदृढ़ करने की भारतीय थलसेना की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया


1965 युद्ध की हीरक जयंती: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीर जवानों और शहीदों को किया नमन

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1965 युद्ध की हीरक जयंती पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीर जवानों और शहीदों के परिजनों से की भेंट, शौर्य और बलिदान को दी श्रद्धांजलि

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 19 सितम्बर 2025 को नई दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक में भारतीय सेना द्वारा आयोजित कार्यक्रम में 1965 के युद्ध के वीर जवानों और शहीदों के परिजनों से संवाद किया। यह कार्यक्रम पाकिस्तान पर भारत की जीत की 60वीं वर्षगांठ (हीरक जयंती) के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने उन सभी शूरवीरों को नमन किया जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया और उन सैनिकों को याद किया जिनके अदम्य साहस ने भारत को विजय दिलाई। उन्होंने कहा—“पाकिस्तान ने सोचा कि वह घुसपैठ, गुरिल्ला युद्ध और अचानक हमलों से हमें डरा देगा, परंतु उसे यह नहीं पता था कि हर भारतीय सैनिक मातृभूमि की सेवा इस भावना से करता है कि राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता किसी भी कीमत पर अक्षुण्ण रहेगी।”

राजनाथ सिंह ने असाधारण साहस और देशभक्ति का उल्लेख किया, जो भारतीय सैनिकों ने असल उत्ताड़, चौहिंडा और फिल्लौरा जैसी लड़ाइयों में प्रदर्शित किया। उन्होंने विशेष रूप से परमवीर चक्र विजेता कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद को याद किया, जिन्होंने असल उत्ताड़ की लड़ाई में दुश्मन के कई टैंकों को ध्वस्त करते हुए शहादत दी।
 उन्होंने कहा—“हमारे वीर अब्दुल हमीद ने सिखाया कि शौर्य हथियार के आकार से नहीं, बल्कि दिल के आकार से तय होता है। उनका पराक्रम हमें यह सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी साहस, संयम और देशभक्ति का संगम असंभव को संभव बना देता है।”

रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि युद्ध केवल रणभूमि में नहीं लड़ा जाता, बल्कि जीत पूरे राष्ट्र की सामूहिक प्रतिबद्धता का परिणाम होती है। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के अडिग नेतृत्व को याद करते हुए कहा—
“1965 में अनिश्चितताओं और चुनौतियों के बीच शास्त्री जी ने निर्णायक राजनीतिक नेतृत्व प्रदान किया और पूरे राष्ट्र का मनोबल बढ़ाया। प्रतिकूल परिस्थितियों में भी हमने एकजुट होकर युद्ध जीता।”

उन्होंने हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया और कहा—
“पाहलगाम का कायराना आतंकी हमला हमारे दिलों को दुख और पीड़ा से भर गया, पर उसने हमारे हौसले को नहीं तोड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकल्प लिया कि आतंकियों को ऐसा सबक सिखाया जाएगा जो उन्होंने कभी सोचा भी न होगा। ऑपरेशन सिंदूर ने हमारे दुश्मनों को दिखा दिया कि हम कितने मजबूत हैं। हमारे लिए जीत अब अपवाद नहीं, बल्कि आदत बन चुकी है।”

रक्षा मंत्री ने यह भी दोहराया कि सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिजनों का सम्मान और कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा—
“हमारा संकल्प है कि रक्षा आधुनिकीकरण, सैनिकों का बेहतर प्रशिक्षण और अत्याधुनिक उपकरण सुनिश्चित किए जाएँ, ताकि हमारी सेनाओं को संसाधनों की कोई कमी न हो।”

इस अवसर पर सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार, दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार, अन्य वरिष्ठ अधिकारी, वीरता पदक प्राप्तकर्ता, युद्ध के दिग्गज और शहीदों के परिजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में पश्चिमी कमान की भूमिका पर ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत किया गया और एक विशेष डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई, जिसमें असल उत्ताड़, अखनूर और खेमें करन जैसी निर्णायक लड़ाइयों को याद किया गया।

युद्ध के दिग्गजों ने भी अपने अनुभव साझा किए। लेफ्टिनेंट जनरल सतीश के. नाम्बियार (सेवानिवृत्त) ने रणनीतिक विचार प्रस्तुत किए, वहीं वीर चक्र विजेता मेजर आर.एस. बेदी (सेवानिवृत्त) ने अपने रोमांचक युद्ध अनुभव साझा किए, जो भारतीय सैनिकों के साहस और धैर्य का जीवंत उदाहरण हैं।

यह समारोह 1965 के युद्ध में दिए गए बलिदानों का सशक्त स्मरण रहा और आने वाली पीढ़ियों को साहस, बलिदान और “सेवा परमो धर्म” के मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा दी।


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