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सरदार पटेल की 75वीं पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री मोदी ने अर्पित की श्रद्धांजलि

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 75वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने और देश की एकता को मजबूत करने के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एकीकृत और सशक्त भारत के निर्माण में सरदार पटेल का अतुलनीय योगदान देश की सामूहिक स्मृति में सदैव अंकित रहेगा।

मोदी ने कहा कि सरदार पटेल का जीवन आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए विशेष प्रेरणा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि लौह पुरुष द्वारा स्थापित राष्ट्रीय एकता की भावना ‘विकसित भारत’ के संकल्प के लिए आज भी ऊर्जा का सशक्त स्रोत बनी हुई है।

प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि राष्ट्र निर्माण में सरदार पटेल की अद्वितीय भूमिका, उनका निर्णायक नेतृत्व और भारत की अखंडता को सुदृढ़ करने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता एक मजबूत और सक्षम राष्ट्र के लिए सदैव मार्गदर्शक शक्ति बनी रहेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अलग-अलग पोस्ट में कहा:

“लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को उनकी 75वीं पुण्यतिथि पर मेरा सादर नमन। उन्होंने देश को एकसूत्र में पिरोने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। अखंड और सशक्त भारतवर्ष के निर्माण में उनका अतुलनीय योगदान कृतज्ञ राष्ट्र कभी भुला नहीं सकता।”

“भारत रत्न सरदार पटेल की 75वीं पुण्यतिथि आत्मनिर्भर भारत के लिए प्रेरणा लेने का भी एक विशेष अवसर है। उन्होंने देशवासियों में राष्ट्रीय एकता की जो भावना भरी, वह ‘विकसित भारत’ के लिए ऊर्जा का स्रोत है। राष्ट्र निर्माण में उनकी अद्वितीय भूमिका सशक्त और सामर्थ्यवान भारत के लिए पथ-प्रदर्शक बनी रहेगी।”


अंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस पर NCSC का राष्ट्रीय संगोष्ठी, सरदार पटेल की 150वीं जयंती को भी दी श्रद्धांजलि

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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने डॉ. भीमराव आंबेडकर की महापरिनिर्वाण दिवस पर प्रधनमंत्री राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। यह कार्यक्रम सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती और सरदार पटेल एकता यात्रा के समापन अवसर के साथ आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता NCSC के माननीय अध्यक्ष किशोर मकवाना और आयोग के सदस्यों ने की। इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में प्रख्यात इतिहासकार और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय संग्रहालय के सदस्य प्रो. रिज़वान क़ादरी ने मुख्य वक्तव्य दिया। उन्होंने डॉ. आंबेडकर और सरदार पटेल के ऐतिहासिक योगदानों—सामाजिक न्याय, राष्ट्रीय एकता, संवैधानिक शासन और वंचित वर्गों के उत्थान—पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने दोनों नेताओं की अस्पृश्यता उन्मूलन, सामाजिक सुधार, शिक्षा और समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

इससे पहले NCSC के सचिव गुडे श्रीनिवास ने स्वागत भाषण देते हुए डॉ. आंबेडकर और सरदार पटेल के जीवनभर के संघर्षों और समर्पण को याद किया। उन्होंने डॉ. आंबेडकर की भेदभाव के खिलाफ लड़ाई और संविधान में दिए गए सुरक्षा प्रावधानों को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने सरदार पटेल के नेतृत्व में 562 रियासतों के सफल एकीकरण और "अखंड भारत" की नींव मजबूत करने की भूमिका पर प्रकाश डाला।

आयोग के माननीय सदस्य लवकुश कुमार और वड्डेपल्ली रामचंदर ने भी दोनों महान नेताओं द्वारा समानता आधारित समाज निर्माण के लिए किए गए कार्यों को याद किया।

अपने संबोधन में NCSC के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने डॉ. आंबेडकर और सरदार पटेल के बीच महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संवादों और सहयोग का उल्लेख किया—जिसमें सरदार पटेल द्वारा सामाजिक अशांति के दौरान अस्पृश्यों के अधिकारों की रक्षा के प्रयास भी शामिल थे। उन्होंने डॉ. आंबेडकर के उस सिद्धांत को विशेष रूप से रेखांकित किया कि राष्ट्र सदैव किसी भी व्यक्ति या संगठन से ऊपर होता है।

समापन सत्र में केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने आयोग द्वारा संगोष्ठी आयोजित करने के प्रयासों की सराहना की और दोनों राष्ट्रनिर्माताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि उनका सामाजिक न्याय, एकता और कल्याण का साझा दृष्टिकोण आज भी देश का मार्गदर्शन कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरदार पटेल की राष्ट्र-निर्माण की भावना को आगे बढ़ाया जा रहा है।


Sardar@150 राष्ट्रीय एकता पदयात्रा: सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर युवाओं और नागरिकों की भारी भागीदारी

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MY Bharat, युवा मामलों और खेल मंत्रालय के अंतर्गत आयोजित Sardar@150 राष्ट्रीय एकता पदयात्रा ने आज अपने चौथे दिन का उत्साहजनक आगाज़ किया। 26 नवंबर 2025 को सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर अानंद से शुरू हुई यह पदयात्रा पूरे देश के युवाओं को एकजुट करने और भारत की एकता के वास्तुकार को सम्मानित करने के लिए आयोजित की जा रही है।

पदयात्रा की विस्तृत पहुंच

शुरुआत से ही पदयात्रा में असाधारण सहभागिता रही है। अब तक 15.5 लाख से अधिक नागरिकों ने 640 जिलों, 1,524 पदयात्राओं, 451 लोकसभा क्षेत्रों और 23,820 से अधिक संस्थानों में भाग लिया है।

  • क़रमसाद से केवड़िया तक राष्ट्रीय पदयात्रा ने चौथे दिन तक 57 किलोमीटर की दूरी तय की, जिसमें समुदायों, युवा समूहों और MY Bharat स्वयंसेवकों का उत्साहपूर्ण सहयोग दिखाई दिया।

चौथे दिन की यात्रा

चौथे दिन की यात्रा में यश कॉम्प्लेक्स, ISKCON मंदिर (गोत्री रोड), BPCL चार्जिंग स्टेशन, ब्रह्माकुमारी अतलदरा और अतलदरा BAPS मंदिर शामिल थे।
इस अवसर पर पीयूष गोयल, केंद्रीय मंत्री, वाणिज्य और उद्योग, पदयात्रा में शामिल हुए और युवाओं को प्रेरित किया।

अतलदरा BAPS मंदिर में विशेष कहानी कथन सत्र “सरदार गाथा: द डैज़लिंग कमांडर” आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित रहे:

  • डॉ. मनसुख मांडविया, केंद्रीय मंत्री, युवा मामले एवं खेल और श्रम एवं रोजगार

  • जे.पी. नड्डा, केंद्रीय मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और रसायन एवं उर्वरक

  • डॉ. वीरेंद्र कुमार, केंद्रीय मंत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता

  • रवनीत सिंह बिट्टू, राज्य मंत्री, रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग

MLAs, MPs और अन्य वरिष्ठ स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

जेपी नड्डा का संदेश

जे.पी. नड्डा ने सरदार पटेल के अद्वितीय योगदान और एकता की भावना को याद करते हुए कहा कि पटेल ही सच्चे राष्ट्रपुरुष थे, जिन्होंने एकीकृत भारत की नींव रखी। उन्होंने पटेल की लंदन में कानूनी शिक्षा, अहमदाबाद में प्रारंभिक सुधार, बारडोली आंदोलन और अहमदाबाद नगर निगम अध्यक्ष के रूप में योगदान का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि 1.6 करोड़ भारतीयों के लिए एकता का प्रतीक है।

मनसुख मांडविया का संदेश

डॉ. मनसुख मांडविया ने युवाओं की व्यापक भागीदारी की सराहना की और कहा कि गुजरात में राष्ट्रीय पदयात्रा हर निर्वाचन क्षेत्र तक पहुँच चुकी है। उन्होंने कहा कि यह एकता मार्च प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प का साकार दर्शन है।

नर्मदा और गोदावरी प्रवाह

  • नर्मदा प्रवाह, नागपुर से शुरू होकर पदयात्रा में शामिल हुआ।

  • गोदावरी प्रवाह, मुंबई से रवाना होकर मार्ग में है।
    ये प्रतीकात्मक रूप से भारत के नदी क्षेत्रों को एकजुट कर रहे हैं।

सांस्कृतिक और पर्यावरणीय गतिविधियाँ

  • स्मृति वन में प्राथमिक स्कूल के छात्रों द्वारा बनाई गई सरदार पटेल की चित्रकला प्रदर्शित की गई।

  • वृक्षारोपण अभियान के माध्यम से पर्यावरणीय जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया।

प्रदर्शनियाँ और ग्राम सभा

  • नवलखी ग्राउंड, वडोदरा में “राज्य समेकन के सरदार – राष्ट्र की मौन क्रांति” प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया।

  • दिन का समापन ग्राम सभा से हुआ, जिसमें डायरो प्रस्तुतियाँ, सामुदायिक चर्चाएँ और सरदार पटेल के आदर्शों का सामूहिक reaffirmation शामिल था।

समापन

Sardar@150 राष्ट्रीय एकता पदयात्रा Statue of Unity की ओर बढ़ते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित कर रही है और युवा पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी, साझा प्रयास और राष्ट्रीय गर्व के माध्यम से पूरे भारत को एकजुट करने का संदेश दे रही है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एकता नगर में ‘म्यूज़ियम ऑफ रॉयल किंगडम्स ऑफ इंडिया’ की आधारशिला रखी — भारत की शाही विरासत और राष्ट्रीय एकता को समर्पित एक भव्य पहल

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परिचय

राष्ट्रीय एकता दिवस की पूर्व संध्या पर, साझा विरासत और एकता के संकल्प के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘म्यूज़ियम ऑफ रॉयल किंगडम्स ऑफ इंडिया’ की आधारशिला रखी। यह संग्रहालय भारत की शाही और राजवंशीय विरासत को सम्मान देने का एक भव्य प्रयास है, जो ₹367 करोड़ की अनुमानित लागत से एकता नगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परिसर में पाँच एकड़ भूमि पर निर्मित किया जाएगा।

संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत स्थापित यह संग्रहालय भारत के शाही राज्यों और राजवंशों की गौरवशाली धरोहर को संरक्षित और प्रदर्शित करेगा। इसमें विभिन्न राजवंशों और रियासतों से संबंधित राजचिह्न, कलाकृतियाँ, वस्त्र, पांडुलिपियाँ, चित्रकला और अभिलेखीय सामग्री प्रदर्शित की जाएगी। चार थीम आधारित गैलरियों के माध्यम से यह संग्रहालय आगंतुकों को एक इंटरैक्टिव अनुभव प्रदान करेगा, जो इतिहास, एकता और त्याग की भावना से प्रेरित करेगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत की स्वतंत्रता के समय, देश ब्रिटिश प्रशासनिक क्षेत्रों और 550 से अधिक रियासतों में विभाजित था। इन रियासतों का भारतीय संघ में एकीकरण स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है।

उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में, रियासतों के शासकों को ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ के माध्यम से भारत में विलय के लिए राज़ी किया गया। 1949 तक लगभग सभी रियासतें भारतीय संघ का हिस्सा बन गईं, जिसने एक एकीकृत और संप्रभु गणराज्य की नींव रखी। यह शांतिपूर्ण एकीकरण भारत की कूटनीतिक कुशलता, समावेशिता और राष्ट्र निर्माण की भावना का प्रतीक है।

मुख्य उद्देश्य

इस संग्रहालय की स्थापना निम्नलिखित उद्देश्यों के साथ की जा रही है:

  • भारत की शाही और रियासती विरासत का दस्तावेजीकरण और प्रदर्शन करना।

  • उन ऐतिहासिक कलाकृतियों और अभिलेखों को संरक्षित करना जो भारत की सांस्कृतिक एकता और पहचान को दर्शाते हैं।

  • जनता को भारत के एकीकरण की ऐतिहासिक प्रक्रिया, रियासतों के योगदान और शासन के विकास के बारे में शिक्षित करना।

  • भारत की शाही और लोकतांत्रिक विरासत पर शोध, संरक्षण और सार्वजनिक अधिगम का एक प्रमुख केंद्र बनना।

मुख्य डिज़ाइन विशेषताएँ

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 से प्रेरित होकर, संग्रहालय में एक इंटरएक्टिव और अनुभवात्मक अधिगम गैलरी होगी, जो इतिहास को जीवंत तरीके से प्रस्तुत करेगी।

  • संग्रहालय की वास्तुकला प्राकृतिक परिदृश्य के साथ सामंजस्य बिठाती है, जिसमें जल निकाय, फव्वारे, आंगन और उद्यान प्रमुख संरचनात्मक तत्व हैं।

  • प्रवेश द्वार शाही बाग़ों से प्रेरित लैंडस्केप के माध्यम से होगा, जो अंदर की भव्यता का अनुभव कराएगा।

  • यात्रा का समापन म्यूज़ियम कैफ़े में होगा, जहाँ पर्यटक राजसी व्यंजन का आनंद लेते हुए अपने अनुभव पर विचार कर सकेंगे।

गैलरी अवलोकन

  1. गैलरी 1: ओरिएंटेशन गैलरी – फिल्मों और ऑडियो-विज़ुअल माध्यमों के ज़रिए शाही इतिहास और संग्रहालय की कहानी का परिचय।

  2. गैलरी 2: “द थ्रोन एंड द स्टेट” – राजपरिवारों, शासन व्यवस्था, जनकल्याण नीतियों और प्रजा के प्रति उनके स्नेह को प्रदर्शित करेगी।

    • व्यूइंग लाउंज और डेक से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और नर्मदा नदी का विहंगम दृश्य देखा जा सकेगा।

  3. गैलरी 3: “द स्टोरी ऑफ़ इंडिया’स इंटीग्रेशन” – भारत के राजनीतिक एकीकरण से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम और दस्तावेज़ों को प्रदर्शित करेगी।

  4. गैलरी 4: “हॉल ऑफ यूनिटी” – सभी रियासतों के प्रतीक और चिन्हों को प्रदर्शित करेगी, जिन्होंने भारत की एकता में योगदान दिया।

निष्कर्ष

रियासतों का एकीकरण स्वतंत्र भारत की असाधारण उपलब्धि है, जो "एकता में विविधता" की भावना का प्रतीक है। प्रस्तावित ‘म्यूज़ियम ऑफ रॉयल किंगडम्स ऑफ इंडिया’ इस ऐतिहासिक प्रक्रिया का उत्सव मनाएगा, भारत की शाही विरासत को संरक्षित करेगा और उनके योगदान को राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रदर्शित करेगा।

यह संग्रहालय अतीत की विरासत और आधुनिक तकनीक का संगम होगा — एक जीवंत प्रतीक के रूप में, जो भारत की सांस्कृतिक एकता और गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाएगा।


केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में ‘रन फॉर यूनिटी’ को हरी झंडी दिखाकर किया शुभारंभ, सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर एकता की शपथ दिलाई

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केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज राष्ट्रीय एकता दिवस – 2025 के अवसर पर नई दिल्ली में ‘रन फॉर यूनिटी’ को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनसमूह को एकता प्रतिज्ञा भी दिलाई। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, डॉ. मनसुख मांडविया, दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता तथा गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि आज का दिन हम सबके लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि 2014 से हर वर्ष 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की स्मृति में ‘रन फॉर यूनिटी’ का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि आज सरदार पटेल की 150वीं जयंती है और इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह निर्णय लिया है कि इसे पूरे देश में विशेष रूप से मनाया जाए।

अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल ने स्वतंत्रता संग्राम में ही नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत के वर्तमान स्वरूप को गढ़ने में भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी के आह्वान पर सरदार पटेल ने अपने वकालत के पेशे को त्याग दिया और स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। 1928 के बारडोली सत्याग्रह के दौरान उनके नेतृत्व कौशल की सच्ची झलक देखने को मिली, जब किसानों के साथ अन्याय के विरोध में आंदोलन छेड़ा गया। यह आंदोलन जो एक छोटे से कस्बे में शुरू हुआ था, वह देखते ही देखते पूरे देश में फैल गया और ब्रिटिश शासन को किसानों की माँगें मानने पर मजबूर होना पड़ा। इसी आंदोलन के बाद महात्मा गांधी ने उन्हें “सरदार” की उपाधि दी और वे सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम से प्रसिद्ध हुए।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत के 562 रियासतों में विभाजन की चुनौती थी और यह प्रश्न उठता था कि इतनी बिखरी हुई रियासतों वाला देश एकजुट भारत कैसे बनेगा।अमित शाह ने बताया कि सरदार पटेल के अथक प्रयास, दृढ़ निश्चय और राजनीतिक कौशल से इन सभी रियासतों का विलय संभव हुआ और वर्तमान भारत का नक्शा आकार में आया। काठियावाड़, भोपाल, जूनागढ़, जोधपुर, त्रावणकोर और हैदराबाद जैसी रियासतों ने अलग रहने की कोशिश की, लेकिन सरदार पटेल की लौह इच्छाशक्ति ने उन्हें भारत के साथ जोड़ दिया।

अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल का केवल एक अधूरा कार्य शेष रह गया था — कश्मीर का पूर्ण एकीकरण। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अनुच्छेद 370 को हटाकर वह कार्य पूरा किया, जो सरदार पटेल का सपना था, और आज हमारे सामने वास्तविक रूप से एकीकृत भारत है।

अमित शाह ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के दिन जब देश के लोग तिरंगा फहरा रहे थे, तब सरदार पटेल नौसेना के युद्धपोत की निगरानी कर रहे थे। उस समय लक्षद्वीप पर नियंत्रण को लेकर प्रश्न उठा था, और सरदार पटेल ने तत्काल नौसेना को वहाँ भेजकर तिरंगा फहरवाया, जिससे लक्षद्वीप भारत का अभिन्न अंग बन गया।

गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष की सरकारों ने सरदार पटेल को वह सम्मान नहीं दिया, जिसके वे वास्तव में अधिकारी थे। उन्हें भारत रत्न प्राप्त करने में 41 वर्ष लग गए। उन्होंने बताया कि सरदार पटेल के योगदान के अनुरूप कोई भव्य स्मारक भी नहीं बनाया गया था। जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तब उन्होंने केवडिया में एक भव्य स्मारक — स्टैच्यू ऑफ यूनिटी — बनाने का संकल्प लिया। इस स्मारक की आधारशिला 31 अक्टूबर 2013 को रखी गई और केवल 57 महीनों में 182 मीटर ऊँची यह प्रतिमा तैयार हुई, जो आज पूरे देश की एकता का प्रतीक है।

अमित शाह ने बताया कि सरदार पटेल किसानों के नेता थे, और इस प्रतिमा के निर्माण में उपयोग किए गए लगभग 25,000 टन लोहे का संग्रह किसानों के उपकरणों को पिघलाकर किया गया। प्रतिमा के निर्माण में लगभग 90,000 घन मीटर कंक्रीट और 1,700 टन कांसे का प्रयोग हुआ। अब तक लगभग 2.5 करोड़ लोग स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का भ्रमण कर चुके हैं।

अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल ने जिस मार्ग पर चलकर देश की एकता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा की नींव रखी, उसी मार्ग पर आज भारत आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में केवडिया में सभी राज्यों की पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) ने सरदार पटेल को भव्य परेड के माध्यम से श्रद्धांजलि दी। गृह मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि सरदार पटेल की 150वीं जयंती के उपरांत हर वर्ष यह एकता परेड इसी भव्य स्वरूप में आयोजित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष ‘रन फॉर यूनिटी’ और प्रतिज्ञा कार्यक्रम भी विशेष रूप से मनाए जा रहे हैं।अमित शाह ने बताया कि कश्मीर से कन्याकुमारी और द्वारका से कामाख्या तक पूरे देश में सरदार पटेल के विचारों को विशेषकर युवाओं तक पहुँचाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो युवा आज राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा की प्रतिज्ञा ले रहे हैं, वही भारत के उज्ज्वल भविष्य के निर्माता होंगे।

वर्ष 2025 के लिए 1,466 कर्मियों को ‘केंद्रीय गृहमंत्री दक्षता पदक’ से सम्मानित किया गया

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वर्ष 2025 के लिए विभिन्न राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों (UTs)/केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs)/केंद्रीय पुलिस संगठनों (CPOs) के 1,466 कार्मिकों को ‘केंद्रीय गृहमंत्री दक्षता पदक’ से सम्मानित किया गया है।

यह पदक उत्कृष्ट कार्य के लिए मान्यता प्रदान करने, उच्च व्यावसायिक मानकों को प्रोत्साहित करने और संबंधित अधिकारी/कर्मचारी के मनोबल को बढ़ाने के उद्देश्य से निम्नलिखित चार क्षेत्रों में दिया जाता है –

(i) विशेष अभियान (Special Operation)
(ii) अन्वेषण (Investigation)
(iii) गुप्तचर सेवा (Intelligence)
(iv) न्याय विज्ञान (Forensic Science)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में आरंभ किए गए ‘केंद्रीय गृहमंत्री दक्षता पदक’ से देशभर के पुलिस बलों का मनोबल और उत्साह बढ़ेगा।

“केंद्रीय गृहमंत्री दक्षता पदक” की स्थापना भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 1 फरवरी, 2024 को अधिसूचना के माध्यम से की गई थी। यह पदक पुलिस बलों, सुरक्षा संगठनों, राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के गुप्तचर विंग/शाखा/विशेष शाखा, केंद्रीय पुलिस संगठनों (CPOs), केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) तथा न्याय विज्ञान (केंद्र/राज्य/केंद्र शासित प्रदेश) में कार्यरत सरकारी वैज्ञानिकों को अभियानों में उत्कृष्टता, अन्वेषण में उत्कृष्ट सेवा, असाधारण प्रदर्शन, साहसिक गुप्तचर सेवा तथा न्याय विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए प्रदान किया जाता है।

यह पदक प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर घोषित किया जाता है।

पुरस्कृत व्यक्तियों की सूची गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है – https://www.mha.gov.in

पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं की सूची देखने के लिए क्लिक करें।☝

राष्ट्रीय एकता दिवस 2025: सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर एक भारत, श्रेष्ठ भारत का उत्सव

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परिचय

राष्ट्रीय एकता दिवस (Rashtriya Ekta Diwas) हर वर्ष 31 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिन भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के उपलक्ष्य में देश की एकता, अखंडता और विविधता में एकता के मूल्यों को सम्मान देने हेतु मनाया जाता है। सरदार पटेल ने स्वतंत्र भारत के राजनीतिक और राष्ट्रीय एकीकरण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। इस दिवस का उद्देश्य नागरिकों को देश की एकता, संप्रभुता और अखंडता के प्रति संकल्पबद्ध करना है।

राष्ट्रीय एकता दिवस पहली बार वर्ष 2014 में मनाया गया था, जब भारत सरकार ने इसे औपचारिक रूप से घोषित किया। 31 अक्टूबर 2015 को आयोजित समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत (Ek Bharat Shreshtha Bharat)’ पहल की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच आपसी संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और भावनात्मक एकता को सुदृढ़ करना है।

2025 का वर्ष विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती का वर्ष है।

सरदार पटेल की विरासत

भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1947 में स्वतंत्रता के बाद भारत के राजनीतिक एकीकरण में निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने 560 से अधिक रियासतों — जो देश के लगभग 40% क्षेत्र और जनसंख्या को कवर करती थीं — को भारत संघ में विलय कराया।
‘स्टेट्स डिपार्टमेंट’ के प्रमुख के रूप में उन्होंने कूटनीति, संवाद और आवश्यकतानुसार प्रशासनिक दृढ़ता का प्रयोग करते हुए देश के विखंडन को रोका और भारत की भौगोलिक एकता सुनिश्चित की। उनके नेतृत्व में आधुनिक भारत की एकीकृत लोकतांत्रिक संरचना की नींव पड़ी।

पटेल ने अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) की स्थापना की, जिसे उन्होंने देश की “इस्पाती ढांचा (Steel Frame)” कहा — जो आज भी राष्ट्रीय एकता और प्रशासनिक स्थिरता का आधार है।

एक भारत श्रेष्ठ भारत – सरदार पटेल के दृष्टिकोण की निरंतरता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 31 अक्टूबर 2015 को आरंभ की गई ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत (EBSB)’ पहल, सरदार पटेल के एकीकृत भारत के दृष्टिकोण का मूर्त रूप है।
यह कार्यक्रम राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करता है, जिससे “विविधता में एकता” का संदेश सशक्त हो सके।

मुख्य उद्देश्य:

  • नागरिकों के बीच भावनात्मक एकता को सुदृढ़ करना

  • राज्यों के बीच संवाद और साझेदारी बढ़ाना

  • भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करना

  • पारस्परिक समझ और श्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना

EBSB से जुड़े प्रमुख कार्यक्रम:

  • भाषा संगम ऐप – 22 आधिकारिक भाषाओं में 100 से अधिक वाक्यों को सीखने हेतु

  • युवा संगम एवं EBSB क्लब्स – युवाओं के लिए अंतर-राज्यीय संवाद मंच

  • काशी-तमिल संगमम् – उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक बंधन का उत्सव

  • My Bharat डिजिटल पोर्टल – नागरिक सहभागिता, क्विज़ और अभियान

  • Dekho Apna Desh एवं EBSB वॉल जैसी डिजिटल पहलें – देश की विविधता का उत्सव

2025 के आयोजन और कार्यक्रम

इस वर्ष राष्ट्रीय एकता दिवस विशेष रूप से ऐतिहासिक है, क्योंकि यह सरदार पटेल की 150वीं जयंती का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अक्टूबर को एकता नगर (केवड़िया), गुजरात में आयोजित मुख्य समारोह में भाग लेंगे।

मुख्य कार्यक्रमों की झलक:

  • मुख्य परेड स्थल: एकता नगर, नर्मदा जिला

  • विशेष प्रदर्शन: वायुसेना की ‘सूर्य किरण’ टीम द्वारा एयर शो

  • भागीदारी: 9 राज्यों और 1 केंद्रशासित प्रदेश के 16 मार्चिंग दस्ते, 4 CAPF इकाइयाँ, NCC कैडेट्स, महिला अधिकारी द्वारा प्रधानमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर

  • सांस्कृतिक झांकियाँ: “विविधता में एकता” थीम पर आधारित 900 कलाकारों का प्रदर्शन

  • भारत पर्व (1–15 नवंबर): विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक कार्यक्रम, फूड फेस्टिवल और बिरसा मुंडा जयंती विशेष समारोह

  • Run for Unity: दिल्ली में राजघाट से लाल किला तक आयोजित मैराथन, जिसमें छात्र, विकलांगजन, और सुरक्षा बल शामिल होंगे

  • ₹280 करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का शुभारंभ

देशी नस्ल के कुत्तों की परेड

इस वर्ष की परेड में रामपुर हाउंड्स और मुढ़ोल हाउंड्स (BSF के भारतीय नस्ल के कुत्ते) का दल भी शामिल होगा। यह “आत्मनिर्भर भारत” की भावना को प्रदर्शित करेगा।
इन कुत्तों ने राष्ट्रीय सुरक्षा अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ‘रिया’ नामक मुढ़ोल हाउंड, जिसने ‘ऑल इंडिया पुलिस डॉग प्रतियोगिता’ में प्रथम स्थान प्राप्त किया, दल का नेतृत्व करेगी।

Sardar@150 Unity March

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा My Bharat प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से “Sardar@150 Unity March” का आयोजन किया जा रहा है।
यह यात्रा युवाओं में एकता, देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई है।

मुख्य बिंदु:

  • लॉन्च: 6 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया द्वारा

  • प्रतियोगिताएँ: सोशल मीडिया रील्स, निबंध लेखन, Sardar@150 Young Leaders प्रोग्राम

  • पहला चरण (31 अक्टूबर – 25 नवंबर): सभी जिलों में पदयात्राएँ, निबंध-वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, महिला कल्याण शिविर आदि

  • राष्ट्रीय पदयात्रा (26 नवंबर – 6 दिसंबर): करमसद (पटेल का जन्मस्थान) से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (केवड़िया) तक 152 किमी की यात्रा

निष्कर्ष

  • राष्ट्रीय एकता दिवस सरदार पटेल की उस दूरदर्शी नेतृत्व की याद दिलाता है, जिसने विभाजित रियासतों को जोड़कर एक भारत की नींव रखी।
  • आज यह दिवस केवल एक ऐतिहासिक स्मरण नहीं, बल्कि नागरिक एकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रनिर्माण की सतत प्रेरणा बन चुका है।
  • ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के माध्यम से यह उत्सव अब केवल एक दिन नहीं, बल्कि सालभर चलने वाला जन आंदोलन बन गया है — जो भारत की विविधता में एकता के अमर मंत्र को जीवंत रखता है।

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