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CSIR एकीकृत कौशल पहल के फेज-III के प्रथम वर्ष की समीक्षा के लिए समन्वयकों की बैठक पुणे में आयोजित

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पुणे- CSIR एकीकृत कौशल पहल (CSIR Integrated Skill Initiative) के फेज-III (2025–30) के प्रथम वर्ष की निगरानी समिति की समन्वयक सम्मेलन-सह-बैठक (Coordinators' Conclave-cum-Meeting) का सफल आयोजन 6–7 अगस्त 2026 को पुणे स्थित CSIR-राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (CSIR-NCL) में किया गया। इस दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन CSIR-मानव संसाधन विकास केंद्र (CSIR-HRDC), गाजियाबाद ने CSIR-NCL, पुणे के सहयोग से किया।

इस सम्मेलन का उद्देश्य फेज-III के प्रथम वर्ष में हासिल प्रगति की व्यापक समीक्षा करना, विभिन्न CSIR प्रयोगशालाओं के बीच ज्ञान और अनुभवों का आदान-प्रदान करना तथा कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आपसी सहयोग को मजबूत करना था।

कार्यक्रम की शुरुआत उद्घाटन सत्र से हुई, जिसमें अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत तथा पारंपरिक दीप प्रज्वलन किया गया। CSIR-NCL के वैज्ञानिक-जी डॉ. राजेश जी. गोन्नाडे ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए सहयोग, नवाचार और कौशल विकास के महत्व पर प्रकाश डाला।

इसके बाद CSIR-HRDC के वैज्ञानिक-जी एवं स्किल नोडल प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. विनय कुमार ने सम्मेलन के उद्देश्यों की जानकारी दी और वर्ष 2025–26 के दौरान CSIR एकीकृत कौशल पहल के तहत हासिल महत्वपूर्ण प्रगति का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यह पहल देशभर में एक मजबूत कौशल विकास तंत्र तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जिसका उद्देश्य उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रतिभाओं को तैयार करना और तकनीक-आधारित कार्यबल का निर्माण करना है।

CSIR-सेंट्रल प्लानिंग डायरेक्टोरेट (CPD) के वैज्ञानिक-एफ डॉ. अभिषेक कुमार ने पहल की प्रमुख उपलब्धियों और वर्ष के दौरान किए गए नीतिगत हस्तक्षेपों पर प्रकाश डाला। वहीं, CSIR-HRDC, गाजियाबाद के प्रमुख डॉ. टी. एस. राणा ने कौशल विकास के लिए डिजिटल तकनीक, व्यावहारिक प्रशिक्षण और नवाचार-आधारित समाधानों में CSIR की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

इंस्टीट्यूट ऑफ पेस्टिसाइड फॉर्मुलेशन टेक्नोलॉजी (IPFT), गुरुग्राम के निदेशक एवं निगरानी समिति के अध्यक्ष डॉ. मोहना कृष्ण रेड्डी मुदियम ने कहा कि कौशल विकास राष्ट्र निर्माण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने CSIR एकीकृत कौशल पहल को मजबूत, भविष्य के लिए तैयार और उद्योग-केंद्रित कौशल विकास व्यवस्था बनाने के लिए पांच प्रमुख प्राथमिकता स्तंभों की रूपरेखा प्रस्तुत की।

वहीं, CSIR-NCL, पुणे के निदेशक डॉ. आशीष लेले ने कहा कि देशभर में फैली CSIR की प्रयोगशालाओं और वैज्ञानिक विशेषज्ञता के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से CSIR, Skill India Mission में महत्वपूर्ण योगदान देने की अनूठी स्थिति में है। उन्होंने भारत को कुशल प्रतिभाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में इस पहल की भूमिका पर जोर दिया।

37 CSIR प्रयोगशालाओं की प्रगति की समीक्षा

सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण वर्ष 2025–26 के दौरान फेज-III के तहत हुई प्रगति की व्यापक समीक्षा रहा। पहले दिन CSIR की सभी 37 भाग लेने वाली प्रयोगशालाओं के स्किल नोडल कोऑर्डिनेटर्स ने अपनी वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।

इन प्रस्तुतियों में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों, प्रशिक्षुओं तक पहुंच, नवाचार आधारित पहलों, सामने आई चुनौतियों और भविष्य की कार्ययोजनाओं की जानकारी दी गई। इससे निगरानी समिति को विभिन्न प्रयोगशालाओं में कार्यक्रम के क्रियान्वयन की स्थिति का व्यापक मूल्यांकन करने के साथ-साथ कौशल विकास से जुड़े सफल मॉडलों और बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करने का अवसर मिला।

निगरानी समिति ने दिन के अंत में विस्तृत समीक्षा और चर्चा की। समिति ने अब तक हुई प्रगति की सराहना करते हुए कार्यक्रम की गुणवत्ता, प्रभावशीलता, पहुंच और दीर्घकालिक प्रभाव को और बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

उद्योग और कौशल विकास पर तकनीकी सत्र

सम्मेलन के दूसरे दिन दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। Life Sciences Sector Skill Development Council (LSSSDC) के उपाध्यक्ष श्री अंशुल सक्सेना ने CSIR और LSSSDC के बीच सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने उद्योग-अकादमिक साझेदारी को मजबूत करने, रोजगार क्षमता बढ़ाने और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रम तैयार करने पर जोर दिया।

इसके बाद CSIR-CPD के वैज्ञानिक-एफ डॉ. अभिषेक कुमार ने परियोजना योजना और बजट प्रबंधन पर तकनीकी सत्र लिया। इसमें प्रभावी योजना निर्माण, वित्तीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, निगरानी और कौशल विकास कार्यक्रमों के कुशल क्रियान्वयन जैसे विषयों पर चर्चा की गई।

भविष्य की रणनीति पर जोर

कार्यक्रम का समापन समापन सत्र के साथ हुआ, जिसमें स्किल नोडल अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए और पहल को और मजबूत बनाने के लिए सुझाव दिए।

दो दिवसीय सम्मेलन ने CSIR की विभिन्न प्रयोगशालाओं के बीच समन्वय और सहयोग को मजबूत करने, फेज-III के प्रथम वर्ष की उपलब्धियों की व्यापक समीक्षा करने तथा कार्यक्रम की पहुंच, गुणवत्ता और प्रभाव को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण रणनीतियां तय करने में अहम भूमिका निभाई।

बैठक से सामने आए सुझाव और सिफारिशें CSIR एकीकृत कौशल पहल के प्रभावी क्रियान्वयन को और मजबूत करने में सहायक होंगी। साथ ही, यह पहल देश के लिए उच्च कौशलयुक्त वैज्ञानिक और तकनीकी कार्यबल तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

भुवनेश्वर में संपन्न हुई 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक, भारत ने शिक्षा सहयोग को नई दिशा देने का किया आह्वान

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भुवनेश्वर- केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की अध्यक्षता में ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। बैठक के अंत में 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की घोषणा (Declaration) को सर्वसम्मति से अपनाया गया। इस दौरान भारत ने "जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम" दृष्टिकोण के साथ ब्रिक्स देशों के बीच शिक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 का विषय "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability" है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो युवाओं को भविष्य के अवसरों के लिए तैयार करे, साथ ही उन्हें मानवीय मूल्यों से भी जोड़े रखे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और युवाओं को नीति निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के केंद्र में रखा जाना चाहिए।

जोशी ने कहा कि शिक्षा समावेशी विकास और साझा समृद्धि की आधारशिला है। उन्होंने पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी बल देते हुए कहा कि नवाचार और विरासत एक-दूसरे के पूरक हैं। ब्रिक्स देशों की समृद्ध सभ्यतागत विरासत पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का अनूठा अवसर प्रदान करती है।

उन्होंने ओडिशा की प्राचीन शिक्षा परंपरा का उल्लेख करते हुए भारत के "अतिथि देवो भव" और "वसुधैव कुटुम्बकम्" जैसे मूल्यों को वैश्विक सहयोग की प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग परंपराओं और अनुभवों के बावजूद सभी देशों की प्रगति एक-दूसरे से जुड़ी हुई है।

बैठक में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, ईरान, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात सहित ब्रिक्स सदस्य देशों के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

घोषणा पत्र की प्रमुख बातें

ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की घोषणा में भारत की अध्यक्षता के तहत पांच प्रमुख प्राथमिकताओं पर सहमति बनी—

  • प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (ECCE) और बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN) को मजबूत करने तथा सभी बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने पर जोर।

  • कौशल विकास और तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा (TVET) में सहयोग बढ़ाने तथा भारत की अंतरराष्ट्रीय कौशल अंतर अध्ययन (International Skill Gap Study) पहल का स्वागत।

  • शोध, नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने, शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सुरक्षित एवं नैतिक उपयोग तथा उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति।

  • शैक्षणिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता (Mutual Recognition of Qualifications) के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) की दिशा में कार्य आगे बढ़ाने का निर्णय।

  • शैक्षणिक नेतृत्व और संस्थागत क्षमता निर्माण को मजबूत करने, ब्रिक्स रेक्टर्स फोरम, छात्रवृत्ति कार्यक्रमों तथा STEM शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर जोर।

बैठक में भारत की पारंपरिक एवं स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों पर शैक्षणिक सहयोग के लिए ब्रिक्स मार्गदर्शक सिद्धांत (BRICS Guiding Principles) की पहल का भी स्वागत किया गया।

इसके अलावा, शिक्षा मंत्रालय ने 5 अगस्त 2026 को भुवनेश्वर में तीसरी ब्रिक्स वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक (SOM) का भी आयोजन किया, जिसमें समावेशी, सशक्त और भविष्य उन्मुख शिक्षा व्यवस्था विकसित करने पर व्यापक चर्चा हुई।

भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के दौरान विभिन्न क्षेत्रों की मंत्रिस्तरीय बैठकों की मेजबानी करता रहेगा। इसका समापन 12–13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के साथ होगा।

सीएसआईआर–राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनसीएल), पुणे में अत्याधुनिक कौशल विकास केंद्र का उद्घाटन

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सीएसआईआर–राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (CSIR–NCL), पुणे ने अपने नवनिर्मित एवं अत्याधुनिक कौशल विकास केंद्र (Skill Development Center) का औपचारिक उद्घाटन किया। इस आधुनिक सुविधा का उद्घाटन सीएसआईआर-एनसीएल के निदेशक डॉ. आशीष लेले ने मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार, नोडल वैज्ञानिक, सीएसआईआर-एकीकृत कौशल पहल (CSIR-Integrated Skill Initiative), सीएसआईआर-एचआरडीसी, गाज़ियाबाद, तथा एनवेलियर (Envalior) टीम के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया। एनवेलियर ने अपनी कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहल के तहत इस केंद्र के आधुनिकीकरण को प्रायोजित किया है। कार्यक्रम में डॉ. राजेश गोनाडे, एनसीएल स्किल नोडल अधिकारी, तथा कनिका गोयल, नियंत्रक प्रशासन (COA), सीएसआईआर-एनसीएल सहित अनेक गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे।

सीएसआईआर की एकीकृत कौशल पहल (CSIR-ISI) के अंतर्गत संचालित सीएसआईआर-एनसीएल के कौशल विकास कार्यक्रम (Skill Development Program–SDP) का उद्देश्य राष्ट्रीय कौशल पारिस्थितिकी तंत्र में विश्वस्तरीय उच्च स्तरीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। इसका लक्ष्य प्रयोगशाला की विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में उद्योगों की वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले कुशल मानव संसाधन का निर्माण करना है। यह कार्यक्रम एनसीएल के अनुभवी वैज्ञानिकों तथा अत्याधुनिक अनुसंधान अवसंरचना के माध्यम से संचालित किया जाता है।

उन्नत कौशल विकास केंद्र को एक समर्पित एवं पूर्णतः एकीकृत सुविधा के रूप में विकसित किया गया है, जहाँ एनसीएल की सभी कौशल विकास एवं तकनीकी प्रशिक्षण गतिविधियों का संचालन एक ही परिसर में किया जाएगा। इस आधुनिक केंद्र में इंटरैक्टिव स्मार्ट डिस्प्ले और डिजिटल पोडियम से युक्त अत्याधुनिक कक्षाएँ, समर्पित कंप्यूटर प्रशिक्षण कक्ष, उन्नत डिजिटल कॉन्फ्रेंस रूम, विश्लेषणात्मक प्रयोगशालाएँ तथा कौशल विकास कार्यक्रम (SDP) के लिए केंद्रीकृत कार्यालय जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. आशीष लेले ने कहा कि नई सुविधाएँ प्रशिक्षुओं को अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों पर व्यावहारिक अनुभव प्रदान करेंगी, उनकी औद्योगिक दक्षता को सुदृढ़ करेंगी तथा नवाचार को बढ़ावा देंगी।

मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार ने इस आधुनिक अवसंरचना की सराहना करते हुए कहा कि यह सीएसआईआर-एकीकृत कौशल पहल के उस राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक कौशल को सशक्त बनाना तथा देश में टिकाऊ तकनीकी क्षमता का विकास करना है।



बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय पहुंचे डॉ. जितेंद्र सिंह, SATHI केंद्र की अत्याधुनिक वैज्ञानिक सुविधाओं का किया निरीक्षण

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) का दौरा कर भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के सहयोग से स्थापित बहु-विषयक वैज्ञानिक सुविधा “साथी” (SATHI) का निरीक्षण किया।

मंत्री ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए.के. चतुर्वेदी तथा संकाय सदस्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान देश के अन्य विश्वविद्यालयों के लिए प्रेरणादायक सफलता की कहानी है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग देशभर के विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में वैज्ञानिक अधोसंरचना और शोध सहायता प्रणाली का विस्तार कर रहा है, ताकि उन्नत तकनीक, नवाचार और वैज्ञानिक सुविधाओं तक सभी की पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने कहा कि SATHI, FIST, ARRF आधारित शोध सहायता तंत्र और अन्य संस्थागत कार्यक्रमों के माध्यम से शोध, नवाचार, स्टार्टअप्स तथा उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत किया जा रहा है, जिससे विशेष रूप से युवा शोधकर्ताओं, MSMEs और उभरते उद्यमों को लाभ मिल रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि DST की विभिन्न योजनाएं विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर रही हैं। इसके तहत कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को अंतरिक्ष आधारित प्रयोगशालाओं एवं शोध कार्यक्रमों से भी जोड़ा जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं में वैज्ञानिक सोच, नवाचार आधारित शिक्षा और उभरती तकनीकों की क्षमता विकसित हो सके।

मंत्री ने Sophisticated Analytical & Technical Help Institute (SATHI) का विस्तृत निरीक्षण किया और वहां उपलब्ध वैज्ञानिक उपकरणों, विश्लेषणात्मक क्षमताओं, उपलब्धियों तथा भविष्य की योजनाओं की जानकारी ली। इस दौरान विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, संकाय सदस्य तथा SATHI केंद्र के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

लगभग 72 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित SATHI-BHU एक राष्ट्रीय स्तर की साझा वैज्ञानिक अधोसंरचना सुविधा है, जो शिक्षण संस्थानों, शोध संगठनों, उद्योगों, MSMEs और स्टार्टअप्स को अत्याधुनिक उपकरण, विश्लेषणात्मक सेवाएं और तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराती है। यह केंद्र विश्वविद्यालय परिसर में सेक्शन-8 कंपनी मॉडल के तहत संचालित हो रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालयों में वैज्ञानिक अधोसंरचना को मजबूत करना आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने और भारत को उभरती तकनीकों एवं उन्नत शोध के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार संस्थागत शोध क्षमता, स्वदेशी नवाचार और तकनीक आधारित विकास को लगातार प्रोत्साहित कर रही है।

SATHI-BHU में सुपर रेजोल्यूशन कॉन्फोकल माइक्रोस्कोपी विद लाइव सेल इमेजिंग, उन्नत NMR स्पेक्ट्रोस्कोपी सिस्टम, हाई रेजोल्यूशन मास स्पेक्ट्रोमेट्री, क्लीन रूम सुविधाएं, इलेक्ट्रोकेमिकल वर्कस्टेशन, क्रोमैटोग्राफी प्लेटफॉर्म और आइसोटोप विश्लेषण प्रणाली जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इनका उपयोग जीवन विज्ञान, फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य सेवा, सेमीकंडक्टर, खाद्य विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत सामग्री अनुसंधान में किया जा रहा है।

मंत्री को बताया गया कि SATHI-BHU ने अब तक अकादमिक संस्थानों, शोध संगठनों और उद्योगों के लगभग 1,100 उपयोगकर्ताओं को सेवाएं प्रदान की हैं, 30,000 से अधिक नमूनों का विश्लेषण किया है तथा लगभग 1,000 शोधकर्ताओं और हितधारकों को प्रशिक्षण दिया है। इसके अतिरिक्त क्षमता निर्माण के लिए लगभग 60 अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा चुके हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने NABL मान्यता प्राप्त करने तथा उद्योग एवं शोध क्षेत्रों के साथ मजबूत सहभागिता के माध्यम से टिकाऊ विश्लेषणात्मक सेवा मॉडल विकसित करने के लिए SATHI-BHU की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह केंद्र उच्च प्रभाव वाले शोध प्रकाशनों, पेटेंट और राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं एवं औद्योगिक संस्थानों के साथ सहयोग के जरिए विज्ञान, नवाचार और आर्थिक विकास के बीच मजबूत सेतु का कार्य कर रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पत्रकारों और मीडिया प्रतिनिधियों के साथ अनौपचारिक लंच पर किया संवाद

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर पत्रकारों और मीडिया प्रतिनिधियों के लिए एक अनौपचारिक लंच का आयोजन किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह पिछले एक दशक से समय-समय पर अपने आवास पर मीडिया के साथ इस प्रकार की अनौपचारिक बैठकों का आयोजन करते रहे हैं। यह आयोजन पत्रकारों के साथ खुले और सहज संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।

इस अवसर पर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शासन सुधार और राष्ट्रीय विकास से जुड़े समकालीन विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों ने विभिन्न नीतिगत पहलों, उभरते जनहित के विषयों और समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार साझा किए तथा अनौपचारिक सुझाव भी दिए।

संवाद के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने SHANTI अधिनियम, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) की भूमिका और देश के विभिन्न हिस्सों में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की स्थिति जैसे महत्वपूर्ण विधायी और नीतिगत विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती रहेगी।

सरकार के सुधार एजेंडे पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि विज्ञान सुधारों का दायरा लगातार बढ़ रहा है, जबकि शासन सुधार तेजी से प्रौद्योगिकी आधारित हो रहे हैं। उन्होंने CPGRAMS जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार तकनीक पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित शासन को मजबूत कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के प्रशासनिक और डिजिटल गवर्नेंस मॉडल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती रुचि देखने को मिल रही है, जिसके चलते विदेशी छात्र भारत आकर इन मॉडलों का अध्ययन कर रहे हैं।

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC) अभियान जैसी नागरिक-केंद्रित पहलों का भी उल्लेख किया, जिससे पेंशनधारकों को बड़ी सुविधा मिली है। उन्होंने कहा कि ऐसी डिजिटल सुधार पहलें सरकार की “ईज ऑफ लिविंग” और “ईज ऑफ वर्किंग” की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में हाल ही में घोषित ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) फंड का उल्लेख करते हुए मंत्री ने इसे भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा और विचार से प्रभाव तक की यात्रा तेज होगी।

अंतरिक्ष क्षेत्र में हो रहे विकास पर बात करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने संचार, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन, कृषि और नेविगेशन जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष अनुप्रयोगों की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 जैसे आगामी अंतरिक्ष अभियानों की जानकारी भी साझा की, जो भारत की चंद्र अन्वेषण क्षमता को और मजबूत करेंगे।

मंत्री ने लैवेंडर क्रांति जैसे विज्ञान आधारित सामाजिक-आर्थिक अभियानों का भी उल्लेख किया, जो ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और स्थानीय उद्यमिता को जोड़कर आजीविका के नए अवसर सृजित कर रहे हैं।

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पूरे संवाद के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने मीडिया के साथ निरंतर संवाद के महत्व पर जोर देते हुए पत्रकारों को जटिल नीतिगत पहलों और वैज्ञानिक उपलब्धियों को आम जनता तक पहुँचाने में सरकार का अहम साझेदार बताया। उन्होंने सूचित जन विमर्श और रचनात्मक प्रतिक्रिया को बढ़ावा देने में मीडिया की भूमिका की सराहना की।

यह अनौपचारिक लंच खुले संवाद और आपसी सराहना के माहौल में संपन्न हुआ, जिसने सरकार और मीडिया के बीच पारदर्शिता, सहयोग और राष्ट्र निर्माण के प्रति साझा प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया।

IISF 2025: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विज्ञान उत्सव का उद्घाटन किया, तीन ‘C’ – Celebration, Communication और Career पर दिया जोर

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पंचकुला- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज हरियाणा के पंचकुला में चार दिवसीय भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (IISF) 2025 का उद्घाटन किया। मंत्री ने कहा कि भारत की वैज्ञानिक प्रगति केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे नागरिकों, छात्रों और युवा पेशेवरों के साथ सार्थक रूप से जोड़ना आवश्यक है। यह महोत्सव 6 से 9 दिसंबर तक आयोजित किया जा रहा है।

तीन ‘C’ – Celebration, Communication और Career

डॉ. जितेंद्र सिंह ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि IISF को साधारण शैक्षणिक सभा के रूप में नहीं, बल्कि एक खुला, जन-सामना करने वाला मंच के रूप में विकसित किया गया है, जो विज्ञान को लोगों के करीब लाता है।

मंत्री ने तीन “C” का अर्थ समझाया:

  1. Celebration – भारत की वैज्ञानिक यात्रा और उपलब्धियों का उत्सव।

  2. Communication – शैक्षणिक संस्थानों से बाहर वैज्ञानिक ज्ञान का प्रसार।

  3. Career – युवा प्रतिभागियों के लिए करियर खोज का मंच।

उन्होंने कहा कि महोत्सव में छात्रों, शोधकर्ताओं और नए शिक्षार्थियों को स्टार्टअप, उद्योग और अनुसंधान में उभरते अवसरों के बारे में जानकारी मिलती है, जिसमें औपचारिक सत्रों के साथ-साथ अनौपचारिक नेटवर्किंग के मौके भी शामिल हैं।

Viksit Bharat@2047 में विज्ञान की भूमिका

डॉ. सिंह ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी आर्थिक विकास और सामाजिक परिवर्तन की नींव हैं। उन्होंने पिछले दशक में भारत द्वारा अपनाई गई मिशन-ड्रिवन विज्ञान नीति, सुधारों, बुनियादी ढांचे में निवेश और प्रतिभा विकास पर जोर दिया। उन्होंने वैज्ञानिक प्रगति के सरकारी कार्यान्वयन और सार्वजनिक सेवा में योगदान जैसे बेहतर मौसम पूर्वानुमान, चेतावनी प्रणाली, ध्रुवीय अनुसंधान और डिजिटल तकनीकों का उदाहरण दिया।

आत्मनिर्भर भारत और प्रमुख वैज्ञानिक पहल

IISF 2025 का विषय है – “विज्ञान से समृद्धि: आत्मनिर्भर भारत की ओर”। मंत्री ने कहा कि विज्ञान में आत्मनिर्भरता धीरे-धीरे आकार ले रही है। प्रमुख पहलें:

  • बहुउद्देश्यीय ऑल-वेदर अनुसंधान पोत (2028 में कमीशन होने की संभावना)

  • देश का मानव-सबमर्सिबल कार्यक्रम

  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल होने वाले जलवायु डेटा और मॉडल

वैश्विक मान्यता और अनुसंधान उपलब्धियां

मंत्री ने भारत की वैश्विक नवाचार, अनुसंधान उत्पादन और उद्यमिता में प्रगति का उल्लेख किया। उदाहरण स्वरूप:

  • चंद्रयान-3 मिशन

  • कोविड-19 महामारी के दौरान देशी टीका विकास

  • जैव प्रौद्योगिकी में उपलब्धियां

उन्होंने कहा कि ये सभी अनुसंधान के साक्ष्य-आधारित परिणाम हैं।

युवा सहभागिता और करियर अवसर

डॉ. सिंह ने बताया कि IISF की गतिविधियों का एक बड़ा हिस्सा स्कूल, कॉलेज छात्रों और युवा शोधकर्ताओं के लिए डिज़ाइन किया गया है। उन्होंने विज्ञान करियर की व्यापक संभावनाओं पर जोर दिया, जिसमें स्टार्टअप्स, उद्योग-नेतृत्व वाले अनुसंधान और लागू नवाचार शामिल हैं। इस वर्ष के कार्यक्रम में क्वांटम तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी, ब्लू इकोनॉमी और डीप-टेक उद्यमिता पर सत्र शामिल हैं।

सार्वजनिक-निजी सहयोग और नवाचार

मंत्री ने सार्वजनिक अनुसंधान संस्थानों और निजी उद्योग के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने हाल की नीतिगत पहलें बताईं जो अंतरिक्ष, स्वास्थ्य तकनीक और उन्नत निर्माण जैसे क्षेत्रों में निजी भागीदारी बढ़ाने के लिए बनाई गई हैं।

प्रदर्शनी और वैज्ञानिक इंटरैक्शन

उद्घाटन कार्यक्रम में मंत्री ने Science-Technology-Defence-Space Exhibition और “Science on a Sphere” इंस्टॉलेशन का उद्घाटन किया। उन्होंने भारत के अंटार्कटिका रिसर्च स्टेशन, भारतीय अनुसंधान केंद्र, भारती से लाइव इंटरफेस के माध्यम से बातचीत की और चरम ध्रुवीय परिस्थितियों में हो रहे अनुसंधान का अवलोकन किया।

उद्देश्य और दीर्घकालिक प्रभाव

IISF 2025 में प्रदर्शनी, व्याख्यान और इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि जनता के साथ विज्ञान की सहभागिता बढ़े और भारत के दीर्घकालिक अनुसंधान, नवाचार और मानव संसाधन विकास के राष्ट्रीय लक्ष्यों में योगदान मिले।


IISF 2025 में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने उद्योग और निवेशकों से रीसर्च और इनोवेशन में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया

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पंचकुला- भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (IISF) 2025 के दौरान आयोजित एक राउंड टेबल में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को उद्योग, निवेशकों और शोधकर्ताओं से भारत के अनुसंधान और नवाचार परिदृश्य को आकार देने में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। यह बैठक ₹1 लाख करोड़ के रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन (RDI) फंड के क्रियान्वयन को लेकर आयोजित की गई थी।

विज्ञान नीति का उद्देश्य और निजी क्षेत्र की भूमिका

मंत्री ने कहा कि विज्ञान नीति की सफलता केवल प्रकाशनों से नहीं बल्कि अनुसंधान को वास्तविक परिणामों, नौकरियों और तकनीकी क्षमता में बदलने की क्षमता से मापी जानी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि सार्वजनिक संस्थान अकेले नवाचार का भार नहीं उठा सकते और इसलिए निजी क्षेत्र की भागीदारी अब भारत की फ्रंटियर तकनीकों में महत्वाकांक्षाओं के लिए आवश्यक है।

RDI फंड के उद्देश्य और संरचना

RDI फंड का उद्देश्य निजी क्षेत्र-नेतृत्व वाले उच्च-प्रभाव और व्यावसायिक परियोजनाओं का समर्थन करना है। इसमें शामिल क्षेत्र हैं:

  • स्वच्छ ऊर्जा

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)

  • बायोटेक्नोलॉजी

  • डीप-टेक मैन्युफैक्चरिंग

  • सेमीकंडक्टर्स

  • डिजिटल इकोनॉमी

फंड सीधे कंपनियों को अनुदान देने की बजाय पेशेवर, स्तरित संरचना के माध्यम से काम करेगा।

  • अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) पहली कड़ी के रूप में फंड की देखरेख करेगा।

  • दूसरी कड़ी में चयनित फंड मैनेजर जैसे अल्टरनेट इन्वेस्टमेंट फंड, डेवलपमेंट फाइनेंस इंस्टिट्यूशन्स, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB), और BIRAC शामिल होंगे।

  • वित्तपोषण मुख्यतः दीर्घकालिक, कम ब्याज वाले ऋण या इक्विटी सपोर्ट के रूप में होगा, और इसका जोर बाजार-तैयार परियोजनाओं पर होगा।

भारत की वैज्ञानिक प्रगति और स्टार्टअप पारिस्थितिकी

मंत्री ने बताया कि हाल के वर्षों में भारत वैश्विक वैज्ञानिक अनुसंधान और पेटेंट योगदान में अग्रणी बनकर उभरा है। साथ ही, भारत का स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र पिछले दशक में तेजी से बढ़ा है। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियाँ तकनीकी आत्मनिर्भरता के बड़े राष्ट्रीय प्रयास से जुड़ी हैं और RDI फंड का उद्देश्य प्रयोगशालाओं में किए गए अनुसंधान को वाणिज्यिक रूप में लागू करने के अंतर को पाटना है।

ANRF के सहयोग और उद्योग से सुझाव

प्रतिभागियों को बताया गया कि RDI फंड ANRF के कार्यों को पूरक करेगा, जो:

  • मौलिक और फ्रंटियर अनुसंधान का समर्थन करता है

  • युवा वैज्ञानिकों को पोषण देता है

  • समर्पित अनुदान कार्यक्रमों और संयोजन अनुसंधान केंद्रों के माध्यम से अकादमी–उद्योग सहयोग को बढ़ावा देता है

मंत्री ने उद्योग और निवेशकों से फंड के डिजाइन और कार्यान्वयन पर सुझाव देने का आग्रह किया और इसे एक साझा राष्ट्रीय परियोजना करार दिया। उन्होंने कहा कि उद्योग को दीर्घकालीन अनुसंधान निवेश के लिए साहस और महत्वाकांक्षा दिखानी होगी।

Viksit Bharat@2047 और नवाचार में भारत का अग्रणी कदम

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि जैसे-जैसे भारत Viksit Bharat@2047 के लक्ष्यों की ओर बढ़ रहा है, RDI फंड भारतीय कंपनियों को केवल अन्य देशों द्वारा विकसित तकनीकों का उत्पादन करने से हटकर उन्हें खुद आविष्कार करने और वैश्विक स्तर पर निर्यात करने की दिशा में प्रेरित करेगा। यह भारत में नवाचार के वित्तपोषण और संचालन के तरीके में बदलाव का प्रतीक है।


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