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छत्तीसगढ़ में बस्तर से सरगुजा तक रेल संपर्क मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ में  प्रमुख रेल परियोजनाओं को गति देने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से की विस्तृत चर्चा

रेल नेटवर्क का विस्तार छत्तीसगढ़ के संतुलित और समावेशी विकास का मजबूत आधार बनेगा : मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली प्रवास के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से सौजन्य भेंट कर छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना के विस्तार, नई रेल परियोजनाओं तथा लंबित रेल लाइनों की प्रगति के संबंध में विस्तृत चर्चा की। इस अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू तथा राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र के सांसद संतोष पांडे उपस्थित थे।

बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के औद्योगिक, खनिज एवं कृषि दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। प्रदेश में रेलवे नेटवर्क का विस्तार केवल यातायात सुविधा का विषय नहीं, बल्कि औद्योगिक विकास, व्यापार, पर्यटन, कृषि विपणन, जनजातीय अंचलों के विकास तथा क्षेत्रीय संतुलित प्रगति से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में रेल अधोसंरचना के अभूतपूर्व विस्तार का लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिल रहा है और राज्य सरकार इस दिशा में केंद्र सरकार के साथ पूर्ण समन्वय के साथ कार्य कर रही है।

बैठक में कटघोरा-डोंगरगढ़ नई रेलवे लाइन परियोजना पर विशेष रूप से चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि लगभग 295 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना का विकास रेल मंत्रालय और छत्तीसगढ़ शासन के संयुक्त उपक्रम (ज्वाइंट वेंचर) के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए दोनों संस्थाओं की साझेदारी में एक स्पेशल परपज़ व्हीकल (SPV) का गठन किया जाएगा। यह रेल लाइन कटघोरा से करतला, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक पहुंचेगी तथा ऐसे अनेक क्षेत्रों को पहली बार रेलवे नेटवर्क से जोड़ेगी, जहां अब तक रेल सुविधा उपलब्ध नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी, उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा लाखों नागरिकों को बेहतर आवागमन की सुविधा प्राप्त होगी।

बैठक में रावघाट-जगदलपुर रेलवे लाइन परियोजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 140 किलोमीटर लंबी इस महत्वपूर्ण रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण की आवश्यक कार्यवाही पूरी की जा चुकी है तथा रेलवे द्वारा निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ होने से बस्तर अंचल की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश की तीन अन्य महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं - सरडेगा-पत्थलगांव-अंबिकापुर (244 किलोमीटर), धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा (301 किलोमीटर) तथा अंबिकापुर-बरवाडीह (200 किलोमीटर) - को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से उत्तर छत्तीसगढ़ सहित सीमावर्ती क्षेत्रों की रेल संपर्क व्यवस्था सुदृढ़ होगी तथा व्यापार, पर्यटन, खनिज परिवहन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इस पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने की दिशा में सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।

बैठक के दौरान किरंदुल-कोत्तागुडेम (180 किलोमीटर) तथा गढ़चिरौली-बीजापुर-किरंदुल (बचेली) (490 किलोमीटर) नई रेल लाइन परियोजनाओं के सर्वे कार्य की प्रगति पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने सर्वे कार्य शीघ्र पूर्ण कर आगामी कार्यवाही प्रारंभ करने का अनुरोध किया, जिससे बस्तर क्षेत्र की कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत हो सके तथा विकास एवं सुरक्षा से जुड़े प्रयासों को गति मिले।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में रेलवे विकास के नए अध्याय लिखे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई रेल परियोजनाएं प्रदेश के औद्योगिक विकास, खनिज परिवहन, कृषि उत्पादों की सुगम आवाजाही, पर्यटन संवर्धन और जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ का रेल नेटवर्क आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगा तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति मिलेगी।

कोंडागांव के विकास का नया स्वर्णिम अध्याय: मुख्यमंत्री ने दी 152 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात

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बस्तर के सुदूर अंचलों तक पहुंचेगी विकास की रोशनी, 43 निर्माण एवं अधोसंरचना कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन

40–45 डिग्री की गर्मी में उमड़ रहा जनसैलाब, मुख्यमंत्री ने कहा – जनता का यह विश्वास हमारी सबसे बड़ी ताकत

बड़े कनेरा को मिली विकास कार्यों की बड़ी सौगात, कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं

सुशासन तिहार के समाधान शिविर में योजनाओं की जमीनी हकीकत से हुए रूबरू

रायपुर- सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज कोंडागांव जिले के ग्राम बड़े कनेरा में आयोजित समाधान शिविर में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया, हितग्राहियों से संवाद किया तथा शासन की योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी किया।


सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 44-45 डिग्री की भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में दूर-दूर से पहुंचे ग्रामीणों का उत्साह इस बात का प्रमाण है कि जनता का सरकार पर विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने उपस्थित नागरिकों का अभिनंदन करते हुए कहा कि यह जनसहभागिता सुशासन की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

सुशासन तिहार का उद्देश्य जनता के बीच जाकर सुनना और समाधान करना

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य केवल योजनाओं की समीक्षा करना नहीं, बल्कि जनता के बीच पहुंचकर यह जानना है कि योजनाओं का लाभ वास्तव में लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं। रायपुर में बैठकर जमीनी हकीकत का आकलन नहीं किया जा सकता, इसलिए सरकार गांव-गांव जाकर लोगों से सीधे संवाद कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि 1 मई से प्रारंभ हुआ सुशासन तिहार 10 जून तक चलेगा और इस दौरान प्राप्त आवेदनों का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बड़े कनेरा का यह शिविर प्रदेश का 19वां जिला स्तरीय समाधान शिविर है, जहां लोगों का उत्साह और सहभागिता उल्लेखनीय रही।

कोंडागांव को मिली 152 करोड़ की ऐतिहासिक सौगात सड़क, सिंचाई और अधोसंरचना परियोजनाओं से बदलेगी जनजातीय अंचल की तस्वीर

छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल बस्तर संभाग में बुनियादी सुविधाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कोंडागांव जिले के विकास का एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख दिया है। सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित समाधान शिविर में मुख्यमंत्री ने जिले को 152 करोड़ 18 लाख 84 हजार रुपये की लागत वाले 43 महत्वपूर्ण निर्माण एवं विकास कार्यों की सौगात दी।

इन कार्यों में जनता को त्वरित लाभ पहुंचाने वाले 96 करोड़ 30 लाख 63 हजार रुपये की लागत के 14 विकास कार्यों का लोकार्पण तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए 55 करोड़ 88 लाख 21 हजार रुपये की लागत के 29 नए विकास कार्यों का भूमिपूजन शामिल है।

बड़े कनेरा को मिली विकास कार्यों की बड़ी सौगात

समाधान शिविर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इन घोषणाओं से सड़क, पर्यटन, सामाजिक अधोसंरचना और धार्मिक स्थलों के विकास को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने नारंगी नदी स्थित स्टॉप डेम सह पुलिया के जीर्णोद्धार के लिए 2 करोड़ रुपये की स्वीकृति की घोषणा की। इसके साथ ही केशकाल–बांसकोट–माकड़ी–एरला मार्ग के 53 किलोमीटर लंबे मार्ग के मजबूतीकरण कार्य को मंजूरी दी गई।

उन्होंने बड़े कनेरा से बड़ेबेंद्री, बाईकापदर और चिपावंड तक पुल-पुलियों सहित 12 किलोमीटर सड़क निर्माण तथा बड़े कनेरा से नवागुड़ा तक पुल-पुलियों सहित 5 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य की घोषणा की।

स्थानीय व्यापार और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बड़े कनेरा में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स भवन का निर्माण कराया जाएगा। वहीं कोसारटेडा में पर्यटन विकास कार्य किए जाएंगे, जिससे क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं को नई पहचान मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने विश्रामपुरी में गोंडवाना भवन तथा केशकाल में सर्व आदिवासी समाज भवन निर्माण की घोषणा भी की। इसके अलावा बड़े कनेरा स्थित प्राचीन शिव मंदिर के जीर्णोद्धार की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता है।

बड़े कनेरा बना जागरूकता और नवाचार का मॉडल

मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े कनेरा एक जागरूक गांव के रूप में उभरकर सामने आया है। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही चमन लाल और पीएम सूर्य घर योजना के लाभार्थी आनंद कुमार पवार से मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां के लोग योजनाओं का लाभ लेकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि जिस घर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान बना है, उसी घर में पीएम सूर्य घर योजना के तहत सोलर पैनल भी स्थापित किया गया है। इससे बिजली बिल शून्य हो गया है और परिवार ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मोदी की गारंटी के अधिकांश वादे हुए पूरे

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में  हमने "मोदी की गारंटी" के नाम से जो वादे किए थे, उनमें से अधिकांश को मात्र ढाई वर्षों के भीतर पूरा कर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि पिछली सरकार के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित रहे 18 लाख गरीब परिवारों के लिए सरकार ने सत्ता संभालते ही आवास स्वीकृत किए। आज छत्तीसगढ़ में प्रतिदिन लगभग 1600 प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण हो रहा है और इस मामले में राज्य देश में अग्रणी स्थान पर है।

किसानों, माताओं और बहनों के लिए कई बड़ी पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदा जा रहा है तथा 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। साथ ही दो वर्षों का लंबित बोनस भी किसानों को प्रदान किया गया है। उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। आने वाले समय में 10 लाख लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी।

तेंदूपत्ता संग्राहकों और वनवासियों को मिला बड़ा लाभ


मुख्यमंत्री ने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण की दर को 4000 रुपये से बढ़ाकर 5500 रुपये प्रति मानक बोरा किया गया है। तेंदूपत्ता संग्राहकों के बच्चों को छात्रवृत्ति एवं प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है। वन आधारित आजीविका को मजबूत करने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

अटल डिजिटल सुविधा केंद्र से गांव में मिल रही 400 से अधिक सेवाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीणों को अपनी आवश्यक सेवाओं के लिए शहरों या कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। अटल डिजिटल सुविधा केंद्रों के माध्यम से 400 से अधिक सेवाएं गांव स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इन केंद्रों में बैंकिंग सेवाएं, प्रमाण पत्र, भुगतान सेवाएं तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं से जुड़ी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं। आने वाले समय में मोबाइल एप के माध्यम से भी लोग घर बैठे आवेदन और प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकेंगे।

जून से शुरू होगी मुख्यमंत्री हेल्पलाइन

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जून माह से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शुरू की जाएगी। इसके माध्यम से नागरिक घर बैठे अपनी समस्याएं दर्ज करा सकेंगे। प्रत्येक शिकायत के निराकरण के लिए समय-सीमा निर्धारित होगी और तय अवधि में समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

बिजली बिल समाधान योजना से मिल रही राहत

मुख्यमंत्री ने नागरिकों से मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना का लाभ लेने की अपील करते हुए कहा कि कोरोना काल के दौरान बढ़े बिजली बिलों से राहत देने के लिए सरकार ने विशेष योजना शुरू की है। इसके तहत बकाया राशि में छूट और आसान किस्तों की सुविधा प्रदान की जा रही है। प्रदेश में लगभग 757 करोड़ रुपये की राहत दी जा रही है।

हर घर सोलर की दिशा में बढ़ रहा छत्तीसगढ़मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार हर घर जल, हर घर बिजली, हर घर शौचालय और हर घर बैंक खाता अभियान सफल हुए हैं, उसी प्रकार अब हर घर सोलर लगाने का लक्ष्य लेकर सरकार आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकार मिलकर लाखों परिवारों को सब्सिडी प्रदान कर रही हैं, जिससे लोग ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि विकास और सुशासन का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और इसी उद्देश्य से सुशासन तिहार के माध्यम से शासन स्वयं जनता के द्वार तक पहुंच रहा है।

इस अवसर पर बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं कोंडागांव विधायक लता उसेंडी, केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल, कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में 19 मई को बस्तर में आयोजित होगी मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उच्च स्तरीय बैठक लेकर तैयारियों की समीक्षा की

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में बस्तर में आयोजित होने वाली मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक की तैयारियों को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। यह महत्वपूर्ण बैठक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित होगी, जिसमें मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। 

बैठक के दौरान अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण (पीपीटी) के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा परिषद की बैठक में उठाए जाने वाले विभिन्न विषयों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। मुख्यमंत्री ने सभी बिंदुओं की विस्तार से समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।

मुख्यमंत्री साय ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपते हुए निर्देश दिए कि आयोजन की तैयारियों में किसी प्रकार की कमी न रहे और सभी व्यवस्थाएं गंभीरता एवं समन्वय के साथ सुनिश्चित की जाएं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में मध्य क्षेत्रीय परिषद के राज्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह परिषद देश की ऐसी क्षेत्रीय परिषद है जहां सदस्य राज्यों के बीच किसी प्रकार का विवाद नहीं है, जो आपसी सहयोग और समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय परिषदें राज्यों तथा केंद्र और राज्यों के बीच विभिन्न विषयों पर संवाद, सहयोग और समन्वय को मजबूत करने का प्रभावी मंच बन चुकी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “मजबूत राज्य ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण करते हैं” और इसी भावना के साथ क्षेत्रीय परिषदें विकास, प्रशासनिक समन्वय और राष्ट्रीय एकता को नई दिशा प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में इन परिषदों ने राज्यों के बीच स्वस्थ सहयोग और विकासोन्मुखी सोच को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर में इस महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति स्थापना के बाद इस स्तर की राष्ट्रीय बैठक का आयोजन यह दर्शाता है कि राज्य सरकार क्षेत्र के विकास और नई संभावनाओं को लेकर पूरी तरह संकल्पित है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सल उन्मूलन से क्षेत्र में शांति स्थापित हुई है तथा अब बस्तर विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इंद्रावती की गोद से बस्तर विकास की नई गाथा लिखेगा और मध्य क्षेत्रीय परिषद की यह बैठक क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की बड़ी सौगात: जशपुर में श्री नदी पर बनेगा उच्च स्तरीय पुल, तीन राज्यों की कनेक्टिविटी होगी मजबूत

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9 करोड़ 45 लाख की लागत से बनेगा श्री नदी पर  उच्च स्तरीय पुल  

  झारखंड और ओडिशा राज्य को जोड़ने वाले मार्ग पर आवागमन होगा आसान  

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले को एक और महत्वपूर्ण विकास परियोजना की सौगात मिली है। राज्य शासन द्वारा वर्ष 2025-26 के बजट अंतर्गत कुनकुरी-तपकरा-लवाकेरा मार्ग पर श्री नदी में उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग निर्माण कार्य के लिए 9 करोड़ 45 लाख 85 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।

यह मार्ग छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। उच्च स्तरीय पुल के निर्माण से तीनों राज्यों के बीच आवागमन अधिक सुरक्षित, सुगम और निर्बाध हो सकेगा। साथ ही व्यापार, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

वर्तमान में इस मार्ग पर स्थित सकरा पुल बरसात के मौसम में बड़ी समस्या बन जाता था। जलस्तर बढ़ने पर आवागमन बाधित हो जाता था और ग्रामीणों एवं राहगीरों को जोखिम उठाकर यात्रा करनी पड़ती थी। लंबे समय से क्षेत्रवासी उच्च स्तरीय पुल निर्माण की मांग कर रहे थे। अब प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद क्षेत्र में खुशी का माहौल है।

स्थानीय ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार सीमावर्ती एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देते हुए लगातार जनहितकारी कार्य कर रही है। पुल निर्माण से हजारों लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी।

क्षेत्रवासियों का मानना है कि श्री नदी पर बनने वाला यह उच्च स्तरीय पुल जशपुर जिले के लिए विकास का नया द्वार साबित होगा तथा राज्य के दूरस्थ अंचलों को बेहतर संपर्क सुविधा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

भारत-नेपाल व्यापार को नई रफ्तार देगा NH-927 हाईवे परियोजना

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भारत और नेपाल दक्षिण एशिया के सबसे सक्रिय स्थलीय व्यापारिक साझेदारों में से हैं। नेपाल के कुल व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 60% से अधिक है, जो दोनों देशों के बीच गहरे आर्थिक संबंधों को दर्शाती है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा NH-927 के बाराबंकी–बहराइच 4-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे को मंजूरी मिलने से भारत-नेपाल व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना रूपईडीहा लैंड पोर्ट और नेपालगंज से बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिससे सीमा पार व्यापार और आर्थिक सहयोग मजबूत होगा।

प्रमुख लाभ:

व्यापार में तेजी

  • रूपईडीहा–नेपालगंज बॉर्डर भारत से नेपाल निर्यात का प्रमुख मार्ग है।

  • बेहतर सड़क से तेज और सुगम परिवहन संभव होगा, जिससे व्यापार बढ़ेगा।

कृषि और खाद्य आपूर्ति को बढ़ावा

  • चावल, गेहूं, सब्जियां, डेयरी उत्पाद और पशु चारा नियमित रूप से नेपाल भेजे जाते हैं।

  • यात्रा समय 150 मिनट से घटकर 75 मिनट हो जाएगा।

  • खराब होने वाले उत्पादों की बर्बादी कम होगी, किसानों को लाभ मिलेगा।

आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति

  • दवाइयां और उपभोक्ता सामान की सप्लाई बेहतर होगी।

  • ट्रैफिक जाम और देरी कम होने से लागत घटेगी और आपूर्ति स्थिर रहेगी।

लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बढ़ावा

  • रूपईडीहा में ट्रकों की आवाजाही बढ़ेगी।

  • वेयरहाउसिंग, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स व्यवसाय में नए अवसर पैदा होंगे।

सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास

  • बहराइच और आसपास के इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

  • होटल, ढाबे, छोटे व्यापार और रिटेल सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा।

  • स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा और बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी।

आम लोगों पर प्रभाव:

  • ट्रक ड्राइवर, किसान और छोटे व्यापारियों की आय बढ़ेगी

  • परिवहन लागत कम होगी

  • आय के स्थायी अवसर बढ़ेंगे

यह परियोजना न केवल व्यापार को मजबूत करेगी, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



जशपुर को विकास की नई सौगात: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 19.51 करोड़ के 6 विकास कार्यों का किया भूमिपूजन

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ऑडिटोरियम, मुक्तिधाम और सड़कों के निर्माण से शहरी-ग्रामीण ढांचे को मिलेगी मजबूती

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जशपुरनगर में पुलिस लाइन हेलीपैड के समीप कुल 19 करोड़ 51 लाख 78 हजार रुपए की लागत से 6 महत्वपूर्ण विकास कार्यों का भूमिपूजन कर क्षेत्र को विकास की नई सौगात दी। इस अवसर पर उन्होंने शहरी एवं ग्रामीण बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

मुख्यमंत्री साय ने नगर पालिका जशपुर के वार्ड क्रमांक 18 भागलपुर में 35.46 लाख रुपए की लागत से मुक्तिधाम निर्माण कार्य तथा वार्ड क्रमांक 16 में 6.76 करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक ऑडिटोरियम निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। इन परियोजनाओं से शहरवासियों को बेहतर सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री साय ने जशपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन को सुगम एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से चार प्रमुख सड़कों के निर्माण कार्यों का भी भूमिपूजन किया। इनमें 2.89 करोड़ रुपए लागत से चटकपुर-रेंगारबहार मार्ग, 3.01 करोड़ रुपए लागत से कुनकुरी-औंरीजोर-मतलूटोली-पटेल पारा मार्ग, 3.29 करोड़ रुपए लागत से रानीबंध-चिड़ाटांगर-उपरकछार मार्ग तथा 3.18 करोड़ रुपए लागत से धुरीअम्बा-कटुखोसा मार्ग का निर्माण शामिल है। इन सड़कों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के समग्र और संतुलित विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार और ग्रामीण अंचलों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन विकास कार्यों के पूर्ण होने से क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को नई दिशा और गति मिलेगी।

इस अवसर पर विधायक  गोमती साय, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

सरगुजा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और जनजातीय समाज का सशक्तिकरण हमारी सरकार की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक में विकास कार्यों की समीक्षा: वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु 50 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान को स्वीकृति, 543 विकास कार्यों को मंजूरी

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज कोरिया जिले के बैकुंठपुर में आयोजित सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक में सरगुजा संभाग के जिलों में संचालित विकास कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई तथा जनप्रतिनिधियों के सुझावों के आधार पर नई योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने सरगुजा और बस्तर क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता में रखा है।प्राधिकरण के माध्यम से पिछड़े एवं वनांचल क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरगुजा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास, जनजातीय समाज के सशक्तिकरण और क्षेत्र की समृद्धि के लिए सरकार पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और सभी के सहयोग से इस क्षेत्र को प्रगति के नए शिखर पर पहुंचाया जाएगा।

बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए प्राधिकरण हेतु 50 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान को स्वीकृति प्रदान की गई। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों के आधार पर 543 विकास कार्यों के लिए 4905.58 लाख रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी गई, जबकि वर्ष 2024-25 में स्वीकृत 606 कार्यों को भी औपचारिक अनुमोदन प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री साय ने सभी स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने तथा लंबित कार्यों को मार्च तक पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने बैठक में स्पष्ट कहा कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने गर्मी के मौसम में पर्याप्त पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के सोनहत विकासखंड में विद्युतीकरण का कार्य तेजी से जारी है। मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वीकृत कार्यों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा किया जाए, ताकि विकास योजनाओं का लाभ सीधे जनजातीय एवं वनांचल क्षेत्रों के लोगों तक पहुंच सके।

बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में हाईमास्ट सोलर लाइट लगाने, किसानों की समस्याओं के समाधान, बिजली बिल त्रुटियों को दूर करने तथा गुणवत्ताहीन निर्माण कार्यों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्राधिकरण की पिछली बैठक जशपुर जिले के मयाली में आयोजित हुई थी, जिसके बाद मयाली की पहचान पर्यटन केंद्र के रूप में बढ़ी है। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में विश्व के बड़े शिवलिंग को स्थान मिला तथा स्वदेश दर्शन योजना के तहत राशि स्वीकृत हुई। उन्होंने कहा कि बैकुंठपुर में आयोजित इस बैठक से भी जिले की पहचान और पर्यटन संभावनाओं को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि झुमका जलाशय सहित यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और इस प्रकार विभिन्न जिलों में बैठक आयोजित करने से स्थानीय विकास को गति मिलती है।

बैठक में कृषि मंत्री रामविचार नेताम, प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, सांसद  चिंतामणि महाराज, विधायकगण, वरिष्ठ अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

बस्तर अंचल का होगा चहुंमुखी विकास: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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कांकेर जिले को 284 करोड़ रूपए के विकास कार्यों की दी सौगात 

बंग समाज के 135 ग्रामों की प्राथमिक शालाओं में नये शिक्षा सत्र से बांग्ला भाषा में शिक्षा प्रांरभ करने सहित कई घोषणाएं

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि बस्तर अंचल का चहुंमुखी विकास होगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि प्रदेश में नक्सलवाद समाप्ति की ओर है और इसके बाद बस्तर अंचल में तेजी से विकास दृष्टिगोचर होगा। मुख्यमंत्री साय आज कांकेर जिले पखांजूर में आयोजित कार्यक्रम में 284 करोड़ रूपए के विकास कार्यों का लोकार्पण-शिलान्यास किया। 

मुख्यमंत्री साय ने नेताजी सुभाष स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में परलकोट क्षेत्रवासियों के विकास के लिए विभिन्न घोषणाएं भी की गई, जिनमें नए शिक्षा सत्र से बंग समाज के 135 ग्रामों की प्राथमिक शालाओं में नये शिक्षा सत्र से बांग्ला भाषा में शिक्षा प्रांरभ करने की घोषणा की। उन्होंने संबलपुर से दुर्गूकोंदल होते हुए पखांजूर तक सड़क निर्माण, पखांजूर के मंडी गेट से अंजाड़ी नाला तक गौरवपथ, मछली मार्केट पखांजूर से नर-नारायण सेवा आश्रम तक सीसी सड़क, शासकीय कन्या शाला मैदान में बाउण्ड्रीवॉल निर्माण, पखांजूर में फायर ब्रिगेड वाहन सेवा शुरू करने तथा सिविल अस्पताल पखांजूर में धनवंतरि जेनेरिक मेडिकल स्टोर्स स्थापित करने की घोषणा की। 

मुख्यमंत्री ने जनसमुदाय को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार प्रशासनिक कार्याेें में स्वच्छता एवं पारदर्शिता के साथ कार्य करने की इच्छा शक्ति के साथ लगातार विकास की ओर आगे बढ़ रही है। साय ने बताया कि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों का अनुसरण करते हुए प्रदेश सरकार तेजी से कार्य कर रही है। दो साल की अल्पावधि में राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 18 लाख आवास की स्वीकृति दी है, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 08 लाख हितग्राहियों ने गृह प्रवेश भी कर लिया है। इसी तरह महतारी वंदन योजना में 70 लाख महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में नियद नेल्लानार, धरती आबा अभियान, पीएम जनमन जैसी अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही है, जिससे विकास कार्याे कों गति मिली है। मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना को पुनः प्रारंभ किया गया। मेहनतकश किसानों से 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मान से 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान की खरीदी की जा रही है। कार्यक्रम को कांकेर सांसद भोजराज नाग अंतागढ़ विधायक विक्रमदेव उसेण्डी ने भी सम्बोधित किया।  

मुख्यमंत्री साय ने नर नारायण सेवा आश्रम पहंुचे और वहां पूजा अर्चना कर तथा प्रदेशवासियांे की समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि नर सेवा ही नारायण की सेवा है ध्येय से स्थापित किए गए इस आश्रम में आस्था और परंपरा को आगे बढ़ाने का पुण्य कार्य किया जा रहा है। उन्होंने वहां आश्रम के संस्थापक स्वामी सत्यानंद परमहंस के तैलचित्र एवं प्रतिमा का विधिविधानपूर्वक पूजन किया। इसके पश्चात वे पखांजूर के मुख्य मार्ग पर स्थित परकोट विद्रोह के क्रांतिकारी शहीद गैंद सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनकी शहादत को नमन किया। 

इस अवसर पर विधायक आशाराम नेताम, राज्य हस्तशिल्प बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण नरेटी, पूर्व सांसद मोहन मण्डावी, पूर्व विधायक मंतूराम पवार सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे।


बस्तर अंचल से सतत संवाद, विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से मजबूत होगा जनविश्वास : मुख्यमंत्री साय

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बस्तर के समग्र विकास को लेकर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

डबल इंजन सरकार में बस्तर का हो रहा है सर्वांगीण विकास, विशेष केंद्रीय सहायता के लिए ठोस पहल

नक्सल उन्मूलन के साथ विकास के रोडमैप पर हुई व्यापक चर्चा

सचिवों को बस्तर क्षेत्र का दौरा कर योजनाओं की जमीनी प्रगति की समीक्षा के निर्देश

कनेक्टिविटी, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, पेयजल, बिजली और संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं पर विशेष फोकस

रायपुर- छत्तीसगढ़ के विकास में लंबे समय से सबसे बड़ी बाधा रहे नक्सलवाद का अंत अब निर्णायक चरण में पहुँच चुका है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के सशक्त नेतृत्व तथा सुरक्षाबलों के अदम्य साहस के कारण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाल हो रही है। यह सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है कि नक्सलवाद की हिंसक विचारधारा फिर कभी सिर न उठा सके और इसके लिए बस्तर अंचल से सतत संवाद, विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में बस्तर अंचल के समग्र विकास पर केंद्रित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि डबल इंजन की सरकार का स्पष्ट लक्ष्य बस्तर का सर्वांगीण और संतुलित विकास सुनिश्चित करना है। राज्य और केंद्र सरकार मिलकर सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ बस्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि आगामी तीन वर्षों के लिए बस्तर के विकास का एक व्यापक एक्शन प्लान तैयार कर मिशन मोड में उसका क्रियान्वयन किया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने सभी विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने तथा सचिवों को बस्तर क्षेत्र का दौरा कर योजनाओं की जमीनी प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, पेयजल, बिजली और संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं का तीव्र गति से विस्तार अत्यंत आवश्यक है, ताकि दूरस्थ से दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास की रोशनी पहुँचे और शासन-प्रशासन पर लोगों का भरोसा सुदृढ़ हो। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों में स्वस्फूर्त जनभागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बस्तर के लोग शांति और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

बैठक में पेयजल, विद्युतीकरण और मोबाइल कनेक्टिविटी की गहन समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी समाधान के लिए सतही जल स्रोतों से आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित करने, शेष गांवों के शीघ्र विद्युतीकरण तथा दूरस्थ इलाकों में मोबाइल टावरों की स्थापना में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने आधार कार्ड निर्माण, बच्चों के लिए विशेष अभियान चलाकर शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। पर्यटन विकास पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने होम-स्टे को प्रोत्साहन देने, स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत चिन्हित स्थलों के विकास, बस्तर टूरिज्म कॉरिडोर के निर्माण तथा युवाओं को पर्यटन आधारित आजीविका से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आईआईटीटीएम ग्वालियर से प्रशिक्षित बस्तर के 32 स्थानीय गाइडों को प्रशिक्षण दिए जाने के पहल की विशेष रूप से सराहना की।

बैठक में वनधन केंद्रों के माध्यम से लघु वनोपज के संग्रहण एवं प्रसंस्करण, शिक्षा के क्षेत्र में भवन विहीन विद्यालयों के लिए शीघ्र राशि स्वीकृति, नवोदय एवं पीएमश्री स्कूलों का विस्तार, स्वास्थ्य अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण, मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, पीएम-अभीम योजना, बाइक एम्बुलेंस सेवा, सिंचाई परियोजनाएँ, आंगनबाड़ी एवं बालवाड़ी संचालन, ग्रामीण बस योजना तथा रोजगार और आजीविका से जुड़े विभिन्न कार्ययोजनाओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री साय ने सभी संबंधित विभागों को विशेष केंद्रीय सहायता के लिए आवश्यक प्रस्ताव शीघ्र मुख्य सचिव कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए, ताकि बस्तर के समग्र, संतुलित और टिकाऊ विकास को नई गति मिल सके।

बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश बंसल, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. बसवराजु एस., समस्त विभागीय सचिव तथा वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता: मुख्यमंत्री ने कहा - बस्तर में शांति, विश्वास और विकास का स्थायी सूर्योदय सुनिश्चित

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि विश्वास, विकास और सुरक्षा ही बस्तर की नई दिशा है, जहाँ अब हिंसा नहीं, शांति ही एकमात्र विकल्प बन चुकी है। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर रेंज के बीजापुर और सुकमा जिलों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए नक्सल विरोधी अभियान में निर्णायक सफलता प्राप्त हुई है, जिसमें 14 माओवादियों को न्यूट्रलाइज़ किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति, सतत दबाव और मजबूत जमीनी पकड़ के कारण माओवादी नेटवर्क तेजी से कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर अब विकास, निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसरों के साथ आगे बढ़ रहा है। यह परिवर्तन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व, सुरक्षा बलों की अदम्य वीरता एवं प्रतिबद्धता, संवेदनशील पुनर्वास नीति तथा बस्तर की जनता के अटूट विश्वास का परिणाम है। 

मुख्यमंत्री ने सुरक्षा बलों के शौर्य को नमन करते हुए अभियान में शामिल सभी जवानों को बधाई दी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जो लोग अब भी हिंसा का रास्ता चुन रहे हैं, वे आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ें, सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएँ और सम्मानपूर्वक जीवनयापन करें अन्यथा राज्य शासन और सुरक्षा बल कानून एवं संविधान के अनुरूप अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए पूरी तरह सक्षम और प्रतिबद्ध हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की अंधेरी रात अब अपने अंतिम चरण में है और बस्तर में शांति, विश्वास और विकास का स्थायी सूर्योदय सुनिश्चित है।

https://x.com/vishnudsai/status/2007391997062168672?s=46

उत्तर पूर्वी क्षेत्र के समग्र विकास हेतु DoNER मंत्रालय द्वारा आठ उच्च स्तरीय टास्क फोर्स गठित

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उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र के विकास मंत्रालय (DoNER) ने 31 जनवरी 2025 को आठ उच्च-स्तरीय कार्यबल (High-Level Task Forces – HLTFs) का गठन किया, ताकि प्रमुख क्षेत्रों— कृषि एवं बागवानी, खेल प्रोत्साहन, पर्यटन, हथकरघा एवं हस्तशिल्प, आर्थिक कॉरिडोर विकास, पशु-आधारित आवश्यक प्रोटीन में आत्मनिर्भरता, निवेश प्रोत्साहन, तथा बुनियादी ढांचा एवं संपर्क—के लिए रणनीतियाँ और सिफारिशें तैयार की जा सकें।

अब तक HLTFs की कुल 23 बैठकें हो चुकी हैं।

ये कार्यबल पूरे उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र (NER) के लिए कार्य करते हैं। प्रत्येक कार्यबल की अध्यक्षता किसी एक उत्तर-पूर्वी राज्य के माननीय मुख्यमंत्री/ राज्यपाल द्वारा की जाती है, जबकि अन्य तीन उत्तर-पूर्वी राज्यों के मुख्यमंत्री और माननीय मंत्री (DoNER) इसके सदस्य होते हैं। अंतर-राज्यीय समन्वय संरचित परामर्श के माध्यम से सुनिश्चित किया जाता है, जिसमें संयोजक राज्य सभी सहभागी राज्यों से इनपुट एकत्र करता है और सामूहिक निर्णय लेने में सहयोग करता है।

पूर्वोत्तर विकास सेतु (Poorvottar Vikas Setu) पोर्टल, जिसे DoNER मंत्रालय द्वारा विकसित किया गया है, NER में परियोजनाओं के प्रस्तुतिकरण और मूल्यांकन के लिए एक व्यापक सिंगल-विंडो डिजिटल सिस्टम के रूप में कार्य करता है। इस पोर्टल पर राज्य सरकारें और केंद्रीय एजेंसियाँ अपनी कंसेप्ट नोट/ DPRs अपलोड करती हैं, जिससे परियोजना प्रस्तावों का सुव्यवस्थित प्रसंस्करण संभव होता है। यह प्रणाली त्वरित परीक्षण, मंत्रालयों के बीच परामर्श, और निर्णय प्रक्रिया को तेज बनाती है, क्योंकि यह मैनुअल प्रक्रियाओं को समाप्त कर पारदर्शी एवं संरचित वर्कफ़्लो सुनिश्चित करती है।

यह पोर्टल स्वीकृत प्रस्तावों के खिलाफ धनराशि जारी करने से संबंधित मांगों के प्राप्ति और प्रसंस्करण, एकीकृत निगरानी एवं समन्वय तंत्र के रूप में भी कार्य करता है। इसके माध्यम से मंत्रालय, विभाग और राज्य प्राधिकरण अपने प्रस्तावों की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, प्रश्नों का उत्तर दे सकते हैं, और क्रियान्वयन प्रगति को अपडेट कर सकते हैं। इससे जवाबदेही मजबूत होती है, योजनाओं में अभिसरण बढ़ता है, दोहराव कम होता है, और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के तेज विकास के लिए समयबद्ध एवं समन्वित कार्रवाई संभव होती है।

वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के अंतर्गत, गृह मंत्रालय ने उत्तर-पूर्वी राज्यों में चयनित "वाइब्रेंट विलेजेज" को समग्र विकास गतिविधियों के लिए प्रस्तावित किया है। हस्तक्षेपों का मुख्य फोकस बुनियादी ढांचा निर्माण, आजीविका समर्थन, और बेहतर सेवा वितरण पर है।

DoNER मंत्रालय परियोजना नियोजन और क्रियान्वयन को मज़बूत करने के लिए तकनीक-सक्षम प्रणालियों का प्रभावी उपयोग कर रहा है, विशेष रूप से PM गतिशक्ति पोर्टल का। राज्य सरकारों और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत कंसेप्ट नोट्स को इस पोर्टल के माध्यम से संरेखित किया जाता है, जिससे किसी भी संभावित दोहराव को रोका जा सके। यह पोर्टल स्वीकृति पूर्व परीक्षण और पूर्णता के बाद समीक्षा दोनों का समर्थन करता है, जिससे अभिसरण, पारदर्शिता और निगरानी में सटीकता बढ़ती है।

यह जानकारी आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय के राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार द्वारा दी गई।

राष्ट्रीय नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) की 102वीं बैठक में सड़क, परिवहन और राजमार्ग परियोजनाओं का मूल्यांकन

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राष्ट्रीय नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) की 102वीं बैठक आज आयोजित की गई, जिसमें सड़क, परिवहन और राजमार्ग विभाग (MoRTH) की परियोजनाओं के साथ-साथ रेलवे परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया। बैठक का मुख्य उद्देश्य पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PMGS NMP) के अनुरूप मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ाना था।

बैठक में तीन परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया, जिनमें एक सड़क/हाईवे परियोजना और दो रेलवे परियोजनाएं शामिल थीं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य इंटीग्रेटेड मल्टीमॉडल इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्थिक एवं सामाजिक नोड्स तक अंतिम मील कनेक्टिविटी और ‘Whole of Government’ दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है। ये परियोजनाएं लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने, यात्रा समय घटाने और परियोजना क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देने की संभावना रखती हैं।

परियोजनाओं का संक्षिप्त विवरण:

रेल मंत्रालय (MoR):

  1. पुनरख – कीउल स्टेशन के बीच तीसरी और चौथी लाइन (बिहार)

    • लंबाई: लगभग 49.57 किमी

    • क्षेत्र: पटना और लखीसराय जिले

    • महत्व: राज्य के प्रमुख औद्योगिक और कृषि गलियारों में रेलवे क्षमता और लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाना

    • लाभार्थी: Ultratech Cement Plant, ACC Cement, NTPC Barauni, NTPC Super Thermal Power Plant, Carriage Repair Workshop, SJVN Power Plant और अन्य छोटे और मध्यम उद्योग

    • अतिरिक्त लाभ: पर्यटन स्थलों (बापू टॉवर, महावीर मंदिर, गांधी संग्रहालय, खुदा बक्स़ लाइब्रेरी, कुम्हार पार्क, तख़त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब, गोल घर, बिहार संग्रहालय) की पहुंच में सुधार

  2. सिलघाट – डेकर्गाओं नई BG लाइन (असम)

    • लंबाई: लगभग 27.50 किमी

    • महत्व: ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ना

    • लाभ: राष्ट्रीय राजमार्ग NH-15 और NH-715 के साथ मजबूत मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी

    • उद्देश्य: क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाना, औद्योगिक गतिविधियों, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देना

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH):

  1. ओल्ड पुणे नाका से बोरमानी नाका तक 4-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर (NH-65, महाराष्ट्र)

    • लंबाई: लगभग 9.66 किमी

    • परियोजना: भरतमाला परियोजना (चरण-I) के तहत

    • उद्देश्य: शहरी ट्रैफिक कम करना, यात्रा समय घटाना, सड़क सुरक्षा बढ़ाना और वाहनों के उत्सर्जन को कम करना

    • लाभ: क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत करना, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन को प्रोत्साहित करना

बैठक की अध्यक्षता संयुक्त सचिव, लॉजिस्टिक्स, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने की। बैठक में परियोजनाओं की संभावित सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और कनेक्टिविटी में सुधार पर विशेष चर्चा हुई।

ये पहलें पीएम गति शक्ति के तहत भारत में एकीकृत और दक्ष लॉजिस्टिक्स नेटवर्क बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की 32वीं बैठक: अमित शाह की अध्यक्षता में आपसी सहयोग और विकास पर चर्चा

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केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह 17 नवंबर, 2025 को हरियाणा के फरीदाबाद में उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की 32वीं बैठक की अध्यक्षता करेंगे। उत्तरी क्षेत्रीय परिषद में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख और चंडीगढ़ शामिल हैं। इस बैठक में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और संघ शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी भी भाग लेंगे। यह बैठक अंतर-राज्यीय परिषद सचिवालय, गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित की जा रही है, और इसके मेजबान के रूप में हरियाणा सरकार कार्य करेगी।

उत्तरी क्षेत्रीय परिषद और संरचना

राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 15 से 22 के तहत पांच क्षेत्रीय परिषदों की स्थापना की गई थी, जिनमें उत्तरी क्षेत्रीय परिषद भी शामिल है। केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह उत्तरी क्षेत्रीय परिषद के अध्यक्ष हैं, जबकि हरियाणा के मुख्यमंत्री इसके उपाध्यक्ष हैं। सदस्य राज्यों के मुख्यमंत्री (वार्षिक रूप से घूर्णन प्रणाली के तहत) उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं। प्रत्येक सदस्य राज्य के राज्यपाल दो मंत्रियों को परिषद का सदस्य नामित करते हैं। प्रत्येक क्षेत्रीय परिषद ने मुख्य सचिव स्तर पर एक स्थायी समिति भी गठित की है। राज्यों द्वारा प्रस्तावित मुद्दों पर पहले स्थायी समिति में विचार किया जाता है और उसके बाद शेष मुद्दे परिषद की बैठक में प्रस्तुत किए जाते हैं।

टीम भारत और क्षेत्रीय परिषदों की भूमिका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'टीम भारत' विज़न के तहत क्षेत्रीय परिषदों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। "मजबूत राज्य = मजबूत राष्ट्र" के विश्वास के साथ, क्षेत्रीय परिषदें दो या अधिक राज्यों या केंद्र और राज्यों से संबंधित मुद्दों पर संवाद और चर्चा का संरचित मंच प्रदान करती हैं, जिससे आपसी सहयोग बढ़ता है।

हालांकि क्षेत्रीय परिषदों की भूमिका परामर्शी है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इन परिषदों ने विभिन्न क्षेत्रों में आपसी समझ और सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पिछले ग्यारह वर्षों में सभी राज्य सरकारों और केंद्रीय मंत्रालयों के सहयोग से कुल 63 बैठकें आयोजित की गई हैं।

उत्तरी क्षेत्रीय परिषद के प्रमुख कार्य और मुद्दे

  • केंद्र और सदस्य राज्य/संघ शासित प्रदेशों के बीच, सदस्य राज्यों/संघ शासित प्रदेशों के बीच और क्षेत्र के भीतर मुद्दों और विवादों का समाधान।

  • महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों की त्वरित जांच और फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (FTSC) का क्रियान्वयन।

  • प्रत्येक गांव में ब्रिक-एंड-मोर्टार बैंकिंग सुविधाओं की उपलब्धता।

  • इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ERSS-112) का कार्यान्वयन।

  • क्षेत्रीय स्तर पर पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य, विद्युत, शहरी नियोजन और सहकारी प्रणाली जैसे सामान्य हित के मुद्दों को सुदृढ़ करना।

उत्तरी क्षेत्रीय परिषद राज्य और केंद्र के बीच सहयोग और आपसी समझ को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित होती रही है।

जनजातीय उद्यमिता और निवेश संवर्धन में छत्तीसगढ़ बना अग्रणी राज्य

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नई दिल्ली में ट्राइबल बिजनेस कॉन्क्लेव-2025 में छत्तीसगढ़ के स्टार्टअप्स ने बढ़ाया राज्य का गौरव

रायपुर- ट्राइबल बिजनेस कॉन्क्लेव 2025 का आयोजन नई दिल्ली स्थित यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में किया गया, जिसमें देशभर से आए उद्यमियों,नीति-निर्माताओं एवं स्टार्टअप प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस कॉन्क्लेव में छत्तीसगढ़ के स्टार्टअप्स ने भी हिस्सा लेकर उनके द्वारा किए जा रहे नवाचारों को प्रदर्शित किया। ये स्टार्टअप्स न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त कर रहे हैं, बल्कि जनजातीय परंपराओं और पारंपरिक ज्ञान को नई पहचान भी दे रहे हैं।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल एवं केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल उरांव ने छत्तीसगढ़ पवेलियन का किया निरीक्षण। इस अवसर पर उन्होंने सभी स्टार्टअप्स के स्टॉलों का अवलोकन किया, उद्यमियों से संवाद किया तथा उनके उत्पादों के बारे में जानकारी प्राप्त की। केन्द्रीय मंत्री गोयल ने छत्तीसगढ़ एग्रोफैब कंपनी के प्रतिनिधि करण चंद्राकर से विशेष चर्चा करते हुए उनके नवाचारों की सराहना की। दोनों मंत्रियों ने छत्तीसगढ़ के स्टार्टअप्स द्वारा प्रदर्शित उत्पादों को जनजातीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करने वाला उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

कार्यक्रम में निवेश आयुक्त, छत्तीसगढ़ ऋतु सेन ने राज्य में उद्यमिता और निवेश को प्रोत्साहित करने वाली विभिन्न पहलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जनजातीय क्षेत्रों में कार्यरत उद्यमों एवं स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन, वित्तीय सहायता, परामर्श तथा विपणन सहयोग जैसी सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक उद्यमिता से जोड़कर जनजातीय समुदायों के लिए सतत आजीविका के अवसर सृजित करना। उन्होंने कॉन्क्लेव में भाग लेने वाले उद्यमियों को उनके उत्पादों के विस्तार एवं बाज़ार पहुँच बढ़ाने के लिए उपयोगी सुझाव दिए। 

छत्तीसगढ़ के अनेक स्टार्टअप्स - सिद्धार्थ एग्रोमार्केटिंग प्रा. लि., अंकुरण सीड्स, कोशल, शांति आनंद वेलनेस, बस्तर से बाज़ार तक, कोईतूर फिश कंपनी, कोया बाज़ार, एग्रोफैब तथा हेमल फूड प्रोडक्ट्स प्रा. लि. ने प्रदर्शनी में भाग लेकर अपने उत्पादों एवं नवाचारों का प्रदर्शन किया। इन स्टार्टअप्स ने कृषि विपणन, बीज उत्पादन, जनजातीय हस्तशिल्प, फूड प्रोसेसिंग, वेलनेस उत्पादों तथा वनोपज आधारित व्यापार से जुड़ी अभिनव पहलें प्रस्तुत कीं।

यह सम्मेलन जनजातीय उद्यमियों, निवेशकों और नीति-निर्माताओं को एक साझा मंच प्रदान करता है, जिससे छत्तीसगढ़ की छवि समावेशी एवं समुदाय-केन्द्रित उद्यमिता को बढ़ावा देने वाले अग्रणी राज्य के रूप में और अधिक सुदृढ़ हुई है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ उद्योग संचालनालय के संयुक्त संचालक संजय गजघाटे तथा निवेश आयुक्त कार्यालय की महाप्रबंधक अंजली पटेल भी उपस्थित थीं।

नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) की 101वीं बैठक में PM गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत सड़क और रेलवे परियोजनाओं का मूल्यांकन

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आज नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) की 101वीं बैठक आयोजित की गई, जिसमें सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग और रेलवे से संबंधित आधारभूत संरचना परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया। बैठक में मल्टीमोडल कनेक्टिविटी को मजबूत करने और लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया, जो PM गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PMGS NMP) के अनुरूप हैं।

बैठक में MoRTH (सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय) की सड़क/राजमार्ग परियोजनाओं और MoR (रेल मंत्रालय) की रेल परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया, ताकि ये परियोजनाएँ समेकित मल्टीमोडल इन्फ्रास्ट्रक्चर, अंतिम मील कनेक्टिविटी, और ‘Whole of Government’ दृष्टिकोण के सिद्धांतों के अनुरूप हों। इन पहलों से लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार, यात्रा समय में कमी, और परियोजना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक लाभ प्राप्त होने की उम्मीद है।

सड़क परियोजनाएं – MoRTH

1. NH-160A का जीर्णोद्धार और उन्नयन (घोटी – पालघर, महाराष्ट्र)

  • लंबाई: 154.635 किलोमीटर

  • उद्देश्य: नासिक और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों (MIDC, Ambad, Satpur) को पश्चिमी तटीय बंदरगाहों से जोड़ने वाला वैकल्पिक फ्रेट कॉरिडोर।

  • लाभ:

    • औद्योगिक और वाणिज्यिक परिवहन के लिए अधिक कुशल पोर्ट पहुंच।

    • शहरी मार्गों में भीड़ कम करना।

    • नासिक, पालघर और दहानू रेलवे हेड्स से इंटरमॉडल कनेक्टिविटी में सुधार।

    • ताजा और नाशपाती जैसी कृषि वस्तुओं का तेज परिवहन।

    • त्रिंबक, जावहर, मैनर और पालघर जैसे क्षेत्रीय केंद्रों में पर्यटन और MSME विकास को बढ़ावा।

2. हिवरखेड़ी – बासिंदा-रोशनी (बेतुल – खंडवा, मध्य प्रदेश) और अशापुर – रूढ़ी (बेतुल – खंडवा)

  • लंबाई: लगभग 300 किलोमीटर

  • उद्देश्य: 2/4 लेन सड़क का विकास और राज्य के महत्वपूर्ण शहरों व औद्योगिक केंद्रों के बीच इंटरस्टेट कनेक्टिविटी में सुधार।

  • लाभ:

    • नागपुर और वडोदरा के बीच वैकल्पिक और छोटा मार्ग।

    • औद्योगिक और आर्थिक क्षेत्रों तक बेहतर पहुंच, जैसे बारवानी, अंजाद, खर्गोन, भिकंगांव, और NTPC सुपर थर्मल पावर स्टेशन।

    • क्षेत्रीय व्यापार और औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन।

    • यात्रा समय में कमी, परिवहन लागत में बचत और प्रमुख आर्थिक/प्रशासनिक केंद्रों तक बेहतर पहुंच।

रेल परियोजनाएं – MoR

1. गमहेरिया – चांडिल (झारखंड) में 3री और 4थी लाइन

  • लंबाई: 56 किलोमीटर

  • उद्देश्य: कंद्रा–चांडिल खंड में भीड़भाड़ कम करना, जो वर्तमान में 130% क्षमता पर संचालित हो रहा है।

  • महत्व:

    • चक्रधरपुर डिवीजन से बर्नपुर और दुर्गापुर स्टील प्लांट्स तथा आसनसोल क्षेत्र के स्पॉन्ज आयरन उद्योग तक कच्चे माल का सुचारू परिवहन।

    • लाइन क्षमता बढ़ाकर फ्रीट और यात्री संचालन में सुधार।

    • पूर्वी भारत में औद्योगिक और खनिज आधारित लॉजिस्टिक्स को सुदृढ़ करना।

2. सैंथिया – पाकुर (पश्चिम बंगाल और झारखंड) में 4थी लाइन

  • लंबाई: लगभग 81.20 किलोमीटर

  • उद्देश्य: व्यस्त रेल मार्ग में क्षमता बढ़ाना और ऊर्जा कॉरिडोर के रूप में औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं और पावर सेक्टर लॉजिस्टिक्स को सुदृढ़ करना।

  • लाभ:

    • रेलवे आधारित माल परिवहन को बढ़ावा, सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करना।

    • फ्रीट गति और ट्रेन समय पालन में सुधार।

    • प्रमुख उद्योगों और संयंत्रों के लिए लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार।

    • बिजली संयंत्र (WBPDCL), सीमेंट प्लांट, और खनन संचालन के लिए लाभकारी।

    • पूर्वी भारत में औद्योगिक विस्तार और आर्थिक विकास को प्रोत्साहन।

बैठक की अध्यक्षता संयुक्त सचिव, लॉजिस्टिक्स, DPIIT श्री पंकज कुमार ने की।

निष्कर्ष:

इन परियोजनाओं के सफल कार्यान्वयन से मल्टीमोडल कनेक्टिविटी में सुधार, लॉजिस्टिक्स दक्षता में वृद्धि, यात्रा समय में कमी, और क्षेत्रीय औद्योगिक एवं आर्थिक विकास को बल मिलेगा। यह PM गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत समेकित और सतत बुनियादी ढांचे के निर्माण में एक महत्वपूर्ण कदम है।


नीति आयोग ने भारत के सेवा क्षेत्र पर प्रारंभिक रिपोर्टें जारी कीं — क्षेत्रीय संतुलन, रोजगार प्रवृत्तियों और विकसित भारत @2047 के लिए रोडमैप पर केंद्रित

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नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी. वी. आर. सुब्रह्मण्यम ने आज सदस्य डॉ. अरविंद विरमानी और भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंथा नागेश्वरन की उपस्थिति में सेवाएं विषयक श्रृंखला (Services Thematic Series) के तहत दो प्रारंभिक रिपोर्टें जारी कीं। इस अवसर पर केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग संघों के प्रतिनिधि तथा शिक्षाविद उपस्थित थे। ये रिपोर्टें सेवाक्षेत्र का व्यापक मूल्यांकन प्रस्तुत करती हैं — उत्पादन और रोजगार के परिप्रेक्ष्य से — जो समग्र प्रवृत्तियों से आगे बढ़कर राज्य-स्तरीय विश्लेषण भी प्रदान करती हैं।

पहली रिपोर्ट, “भारत का सेवाक्षेत्र: सकल मूल्य वर्धन प्रवृत्तियों और राज्य-स्तरीय गतिशीलता से अंतर्दृष्टि”, राष्ट्रीय और राज्य-स्तर की प्रवृत्तियों का अध्ययन करती है ताकि यह समझा जा सके कि सेवाक्षेत्र-आधारित विकास विभिन्न क्षेत्रों में कैसे आगे बढ़ रहा है और क्या अपेक्षाकृत पिछड़े राज्य अग्रणी राज्यों की बराबरी कर रहे हैं — जो संतुलित क्षेत्रीय विकास का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।

सेवाक्षेत्र अब भारत की आर्थिक वृद्धि का आधार बन गया है, जिसने वित्त वर्ष 2024–25 में राष्ट्रीय सकल मूल्य वर्धन (GVA) में लगभग 55 प्रतिशत योगदान दिया। रिपोर्ट के अनुसार, सेवाक्षेत्र आधारित विकास अब अधिक क्षेत्रीय रूप से संतुलित हो रहा है। यद्यपि राज्यों के बीच सेवाक्षेत्र के हिस्से में असमानता में थोड़ी वृद्धि हुई है, फिर भी प्रमाण मिलते हैं कि संरचनात्मक रूप से पिछड़े राज्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। यह प्रवृत्ति इंगित करती है कि भारत का सेवाक्षेत्र रूपांतरण अब व्यापक और समावेशी होता जा रहा है।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि क्षेत्रीय स्तर पर डिजिटल अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स, नवाचार, वित्त और कौशल विकास को प्राथमिकता दी जाए, ताकि विविधीकरण और प्रतिस्पर्धात्मकता को गति दी जा सके। राज्य स्तर पर, रिपोर्ट स्थानीय क्षमताओं पर आधारित सेवाक्षेत्र रणनीतियाँ विकसित करने, संस्थागत क्षमता बढ़ाने, उद्योग-सेवा एकीकरण को प्रोत्साहित करने तथा शहरी और क्षेत्रीय सेवा क्लस्टरों को सशक्त बनाने की सिफारिश करती है।

दूसरी रिपोर्ट, “भारत का सेवाक्षेत्र: रोजगार प्रवृत्तियों और राज्य-स्तरीय गतिशीलता से अंतर्दृष्टि”, सेवाक्षेत्र के रोजगार पैटर्न का विश्लेषण करती है। इसमें उप-क्षेत्र, लिंग, क्षेत्र, शिक्षा और व्यवसाय के आधार पर भारत के सेवा कार्यबल की बहुआयामी तस्वीर प्रस्तुत की गई है। रिपोर्ट बताती है कि सेवाक्षेत्र में एक द्वैत संरचना दिखाई देती है — आधुनिक, उच्च उत्पादकता वाले क्षेत्र जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हैं परंतु रोजगार की दृष्टि से सीमित हैं, और पारंपरिक क्षेत्र जो अधिक श्रमिकों को समाहित करते हैं किंतु अधिकतर अनौपचारिक और कम वेतन वाले हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यद्यपि सेवाक्षेत्र भारत की रोजगार वृद्धि और महामारी के बाद पुनर्प्राप्ति का मुख्य आधार बना हुआ है, फिर भी कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं। रोजगार सृजन सभी उप-क्षेत्रों में समान नहीं है, अनौपचारिकता व्यापक है, और रोजगार की गुणवत्ता उत्पादन वृद्धि के अनुरूप नहीं है। लैंगिक असमानता, ग्रामीण-शहरी अंतर और क्षेत्रीय विषमताएँ यह दर्शाती हैं कि रोजगार नीति में औपचारिकता, समावेशन और उत्पादकता वृद्धि को केंद्र में रखना आवश्यक है।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए रिपोर्ट चार-स्तरीय नीति मार्गदर्शिका सुझाती है —

  1. गिग, स्वरोजगार और एमएसएमई श्रमिकों के लिए औपचारिकता और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देना,

  2. महिलाओं और ग्रामीण युवाओं के लिए लक्षित कौशल प्रशिक्षण और डिजिटल पहुँच का विस्तार,

  3. उभरते और हरित अर्थव्यवस्था क्षेत्रों में कौशल निवेश, और

  4. टियर-2 और टियर-3 शहरों में सेवा हब विकसित कर संतुलित क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करना।

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि सेवाक्षेत्र न केवल उत्पादन और आय का स्रोत है, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले, समावेशी और उत्पादक रोजगार का प्रमुख चालक बन सकता है, जिससे विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने में सहायता मिलेगी।

ये दोनों रिपोर्टें राज्य सरकारों और उद्योग जगत के लिए एक रणनीतिक मार्गदर्शिका प्रस्तुत करती हैं — जो भारत के सेवाक्षेत्र को अगले चरण के विकास की ओर अग्रसर करने के लिए डिजिटल अवसंरचना, कौशल, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और सेवा मूल्य शृंखलाओं के एकीकरण पर बल देती हैं, जिससे भारत को वैश्विक सेवाक्षेत्र में एक विश्वसनीय अग्रणी के रूप में स्थापित किया जा सके।

उत्तर बस्तर और अबूझमाड़ हुए नक्सलमुक्त — बस्तर में शांति और विकास का नया युग : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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हिंसा की राह देती है अंतहीन दर्द, आत्मसमर्पण देता है जीवन को नई दिशा- मुख्यमंत्री साय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सल उन्मूलन अभियान ऐतिहासिक सफलता की ओर

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उत्तर बस्तर और अबूझमाड़ का नक्सलमुक्त होना यह प्रमाण है कि अब बस्तर भय नहीं, बल्कि विश्वास और विकास की नई पहचान बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत आज नक्सलवाद के अंत की दहलीज़ पर खड़ा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बीते दो दिनों में 258 नक्सलियों का आत्मसमर्पण इस बात का प्रतीक है कि बंदूक नहीं, बल्कि विश्वास की शक्ति जीत रही है। उन्होंने कहा कि बीते 22 महीनों में छत्तीसगढ़ में 477 नक्सली मारे गए, 2110 ने आत्मसमर्पण किया और 1785 गिरफ्तार हुए — यह आँकड़े हमारे राज्य को नक्सलमुक्त बनाने के अडिग संकल्प के साक्षी हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को पूरी तरह नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य अब बहुत निकट है। यह परिवर्तन राज्य सरकार की “नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025” तथा “नियद नेल्ला नार योजना” की सफलता का प्रत्यक्ष परिणाम है। डबल इंजन सरकार की संवेदनशील नीतियों, बस्तर में लगातार स्थापित हो रहे सुरक्षा शिविरों और वनांचलों में शासन के प्रति बढ़ते विश्वास ने इस सकारात्मक परिवर्तन को संभव बनाया है। उन्होंने कहा कि अब तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 64 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे न केवल सुरक्षा सुदृढ़ हुई है, बल्कि विकास और विश्वास की किरण भी हर गांव तक पहुँची है। 

मुख्यमंत्री साय ने हमारे वीर सुरक्षाबलों के अदम्य साहस और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि उनके समर्पण से ही आज बस्तर भयमुक्त हुआ है और शांति की राह पर अग्रसर है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर नक्सल आतंक से पूर्णतः मुक्त हो चुके हैं, जबकि दक्षिण बस्तर में यह लड़ाई अपने निर्णायक चरण में है। “नियद नेल्ला नार” जैसी योजनाओं ने बस्तर में संवाद, विकास और संवेदना की नई धरती तैयार की है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार की नीति दो टूक है — हिंसा का कोई स्थान नहीं। जो नक्सली शांति और विकास का मार्ग चुनना चाहते हैं, उनका स्वागत है। लेकिन जो बंदूक उठाकर समाज में आतंक फैलाने की कोशिश करेंगे, उन्हें सुरक्षा बलों की सख़्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने सभी नक्सलियों से अपील की — “हिंसा की राह अंतहीन पीड़ा देती है, जबकि आत्मसमर्पण जीवन को एक नई दिशा देते हुए एक नई शुरुआत का रास्ता खोलता है। अपनी मातृभूमि के भविष्य और अपने परिवारों के उज्जवल कल के लिए हथियार त्यागें और विकास की रोशनी में कदम रखें।”

उल्लेखनीय है कि  देश में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही निर्णायक लड़ाई ने एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर जानकारी  कि छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर जैसे क्षेत्र, जो कभी नक्सल आतंक के गढ़ हुआ करते थे, अब पूरी तरह नक्सलमुक्त घोषित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह न केवल भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी सफलता है, बल्कि विकास, विश्वास और संवेदना की नई कहानी भी है। बीते दो दिनों में देश में कुल 258 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया है। 

केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि बंदूक नहीं, बल्कि संविधान पर विश्वास की शक्ति जीत रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के निरंतर प्रयासों से नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है। 

केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम उनके बेहतर भविष्य और देश की एकता के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने सभी नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटें और देश की प्रगति में सहभागी बनें।

राजिम क्षेत्र के लोगों को मिली सस्ती और सुलभ रेल सेवा, यात्रियों को होगा लाभ : मुख्यमंत्री साय

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छत्तीसगढ़ का प्रयाग राजिम जुड़ा रेल नेटवर्क से,रायपुर एवं राजिम के मध्य आने-जाने के लिए यात्री सुविधा में हुई बढ़ोतरी

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजिम में नई रेल सेवा का शुभारंभ किया। उन्होंने क्षेत्र के लोगों की आवागमन सुविधा में वृद्धि करते हुए राजिम से रायपुर के लिए नई मेमू ट्रेन सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने राजिम-रायपुर-राजिम मेमू नई ट्रेन सेवा तथा रायपुर-अभनपुर 2 मेमू रेल सेवा का राजिम तक विस्तार भी प्रारंभ किया। भारी संख्या में यात्री इस अवसर पर ट्रेन में सवार हुए और उत्साहपूर्वक रायपुर की ओर रवाना हुए। सस्ती एवं सुलभ नई रेल सुविधा मिलने से पूरे क्षेत्र में हर्ष और उल्लास का वातावरण रहा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस नई रेल सेवा से राजिम सहित गरियाबंद एवं देवभोग क्षेत्र के लोगों को भी राजधानी रायपुर तक सस्ती और किफायती यात्रा का विकल्प प्राप्त होगा। विद्यार्थी, नौकरीपेशा वर्ग और व्यापारी वर्ग सहित सभी के लिए यह ट्रेन अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का प्रयाग, राजिम अब रेल नेटवर्क से जुड़ गया है। ग्रामीण अंचलों से राजधानी रायपुर का आवागमन अब और अधिक सुगम, सुविधाजनक और किफायती बन गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद से लगातार 19 महीनों से विकास की गति निरंतर अग्रसर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी से हो रहा निवेश आने वाली पीढ़ियों के लिए नया भविष्य गढ़ेगा। उन्होंने बताया कि लगभग आठ वर्ष पूर्व धमतरी से रायपुर तक नैरोगेज ट्रेन चलती थी और अब आठ वर्षों के अंतराल के बाद यहां ब्रॉडगेज ट्रेन सुविधा उपलब्ध हुई है। इसके लिए उन्होंने पूरे छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ में रेलवे की लगभग 45,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में लगभग 7,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे प्रदेश में रेल सेवाओं का तीव्र विस्तार और विकास सुनिश्चित हो रहा है।

इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, लोकसभा सांसद रायपुर बृजमोहन अग्रवाल, महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी, अभनपुर विधायक इन्द्रकुमार साहू, राजिम विधायक रोहित साहू, छत्तीसगढ़ राज्य भंडार गृह निगम के अध्यक्ष चंदूलाल साहू, नगर पालिका गोबरा नवापारा अध्यक्ष ओमकुमारी संजय साहू, नगर पंचायत राजिम अध्यक्ष महेश यादव सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश, रेलवे अधिकारी-कर्मचारी एवं भारी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

वन मंत्री एवं रायपुर जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि इस नई सेवा से छत्तीसगढ़ के प्रयाग राजिम तक सीधी रेल पहुँच सुनिश्चित हो गई है, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि 22 मई को ‘निर्मल भारत रेलवे स्टेशन’ के नाम से देश के 103 रेलवे स्टेशनों को मॉडिफाई करने के लिए चयनित किया गया, जिनमें से छत्तीसगढ़ के पाँच रेलवे स्टेशन शामिल हैं और 32 स्टेशन भी इस योजना में जोड़े गए हैं। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया और मुख्यमंत्री साय के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग 45,000 करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाएँ चालू हैं, जिनसे रेल कनेक्टिविटी में तेजी आएगी। बस्तर को भी इससे लाभ हो रहा है और रावघाट प्रोजेक्ट के अंतर्गत 140 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन का कार्य प्रगति पर है।

रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के प्रयागराज राजिम में बाहर से साधु-संत एवं पर्यटक भारी संख्या में आते हैं। अब उन्हें सीधे रायपुर से राजिम आने की सुविधा मिलेगी, जिससे पर्यटन एवं क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी और विश्व पटल पर राजिम का नाम और अधिक रोशन होगा। महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी ने नई रेल सेवा के लिए लोगों को बधाई देते हुए कहा कि अब राजिम से रायपुर आना बहुत आसान हो गया है। श्रद्धालु एवं पर्यटक यात्री अब राजिम से सीधे डोंगरगढ़ तक भी यात्रा कर सकेंगे।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर रेल मंडल से प्राप्त जानकारी के अनुसार रायपुर-अभनपुर-रायपुर मेमू पैसेंजर ट्रेन का परिचालन अब राजिम तक किया जाएगा। 19 सितम्बर 2025 से नियमित समय-सारणी के अनुसार गाड़ी संख्या 68766/68767 राजिम-अभनपुर-रायपुर मेमू पैसेंजर प्रतिदिन दोनों छोरों—राजिम और रायपुर—से संचालित होगी। इस ट्रेन में 06 सामान्य श्रेणी के डिब्बे तथा 02 पावरकार सहित कुल 08 कोच होंगे।


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