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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘अविस्मरणीय यात्रा’ पुस्तक का किया विमोचन

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महिला पत्रकारों ने नारी शक्ति वंदन के संकल्प को महिला सशक्तिकरण की ओर बताया ऐतिहासिक कदम

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा स्थित  कार्यालय कक्ष में पत्रकार नीरा साहू द्वारा गुजरात यात्रा पर लिखी गई पुस्तक ‘अविस्मरणीय यात्रा’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने  नीरा साहू को उनकी उत्कृष्ट रचना के लिए बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विधानसभा में आयोजित विशेष सत्र एवं शासकीय संकल्प के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और अधिकारों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेगी।

मुख्यमंत्री साय ने महिला पत्रकारों के अध्ययन भ्रमण की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण पत्रकारों की दृष्टि को व्यापक बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह यात्रा-वृत्तांत पर्यटन प्रेमियों के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शिका सिद्ध होगा।

इस अवसर पर निशा द्विवेदी, चित्रा पटेल, लवलीना शर्मा, जनसंपर्क विभाग की उप संचालक डॉ. दानेश्वरी संभाकर, सहायक संचालक संगीता लकड़ा एवं आमना खातून सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले 2026 का उद्घाटन, “भारतीय सैन्य इतिहास: साहस और बुद्धिमत्ता @75” थीम विशेष आकर्षण

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले (NDWBF) 2026 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर कतर के संस्कृति मंत्री H.E. Abdulrahman Bin Hamad Bin Jassim Bin Al Thani, स्पेन के संस्कृति मंत्री H.E. Ernest Urtasun Domènech, स्पेन के संस्कृति मंत्रालय की निदेशक Ms. Maria Jose Gálvez, उच्च शिक्षा सचिव डॉ.vineet Joshi, NBT के अध्यक्ष मिलिंद सुदाकर मराठे, NBT के निदेशक युवराज मलिक, कतर और स्पेन के गणमान्य अतिथि और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

कार्यक्रम के दौरान, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने “The Saga of Kudopali: The Unsung Story of 1857” नामक पुस्तक का विमोचन किया, जो बंगाली, असमिया, पंजाबी, मलयालम, उर्दू और मराठी भाषाओं में उपलब्ध है। साथ ही Saga of Kudopali पर एक वीडियो भी प्रदर्शित किया गया।

इस अवसर पर प्रधान ने कहा कि NDWBF 2026, जो दुनिया का सबसे बड़ा B2C पुस्तक मेला है, केवल विचारों का संगम ही नहीं बल्कि भारत की सशक्त और जीवंत पाठन संस्कृति का भव्य उत्सव भी है। उन्होंने बताया कि इस साल का थीम “भारतीय सैन्य इतिहास: साहस और बुद्धिमत्ता @75” और कतर एवं स्पेन जैसे देशों की भागीदारी ने इस सांस्कृतिक और साहित्यिक कार्यक्रम का महत्व और बढ़ा दिया है।

मंत्री प्रधान ने कहा कि “The Saga of Kudopali: The Untold Story of 1857” पुस्तक ने संबलपुर की भूमि पर स्वतंत्रता संग्राम के कम ज्ञात अध्यायों को उजागर किया है। यह पुस्तक अब 13 भाषाओं में उपलब्ध है, जिसमें बंगाली, असमिया, पंजाबी, मराठी, मलयालम, उर्दू और स्पेनिश सहित हिंदी, अंग्रेजी और उड़िया शामिल हैं। उन्होंने इसे वीर सुरेंद्र साई और कुदोपाली के शहीदों के बलिदानों को सम्मानित करने का सराहनीय प्रयास बताया। इस पहल ने भारत की बहुभाषी परंपरा और वैश्विक संवाद को भी मजबूत किया है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पढ़ाई की संस्कृति को जन आंदोलन में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण केवल बुनियादी ढांचा या तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि एक सजग, विचारशील और ज्ञान-आधारित पीढ़ी का निर्माण करना है, जो ज्ञान को राष्ट्रनिर्माण की नींव मानती हो।

मंत्री प्रधान ने NBT इंडिया को बधाई दी और पुस्तक मेले के सफल आयोजन की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि यह आयोजन पुस्तकों और संवाद के माध्यम से देश की पाठन संस्कृति में नई ऊर्जा भर रहा है।

स्पेन के संस्कृति मंत्री Ernest Urtasun Domènech ने स्पेन की भागीदारी पर प्रकाश डाला और कहा कि यह मेले स्पेनिश लेखकों को भारत में प्रस्तुत करने का मूल्यवान अवसर प्रदान करता है, जहाँ स्पेनिश भाषा और साहित्य में रुचि बढ़ रही है। उन्होंने जुआन रामोन हिमेनेज़ और रवींद्रनाथ टैगोर के ऐतिहासिक साहित्यिक संबंधों को याद किया।

कतर के संस्कृति मंत्री H.E. Abdulrahman bin Hamad bin Jassim Al Thani ने कहा कि कतर की भागीदारी दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की गहराई को दर्शाती है और संस्कृति और ज्ञान को जनसंपर्क और राष्ट्रनिर्माण की नींव मानने की आवश्यकता पर बल दिया।

दुनिया का सबसे बड़ा B2C पुस्तक मेला नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला (NDWBF) NBT इंडिया द्वारा शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। यह मेला 10–18 जनवरी 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होगा और पहली बार मेले में प्रवेश नि:शुल्क किया गया है। इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गेनाइजेशन (ITPO) NDWBF 2026 का सह-आयोजक है। नौ दिवसीय इस मेले में 35 से अधिक देशों के 1,000+ प्रकाशक, 600+ कार्यक्रम और 1,000+ वक्ता भाग लेंगे और 2 मिलियन से अधिक आगंतुकों की उम्मीद है।

इस वर्ष NDWBF का थीम “भारतीय सैन्य इतिहास: साहस और बुद्धिमत्ता @75” है। इसके अलावा मेले में वंदे मातरम के 150 वर्ष और सदार वल्लभभाई पटेल @150 के जीवन को समर्पित विशेष प्रदर्शनियां भी होंगी।

NDWBF 2026 का केंद्रीय आकर्षण है थीम पवेलियन “भारतीय सैन्य इतिहास: साहस और बुद्धिमत्ता @75”, जो 1,000 वर्ग मीटर में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की स्वतंत्रता के बाद की वीरता, बलिदान और राष्ट्र निर्माण की भूमिका को दर्शाता है। इसे 360 डिग्री अनुभव के रूप में डिज़ाइन किया गया है और इसमें 500+ पुस्तकें, क्यूरेटेड प्रदर्शनी, पोस्टर, डॉक्यूमेंट्री और इंस्टॉलेशन शामिल हैं। प्रमुख आकर्षणों में अर्जुन टैंक, INS विक्रांत और LCA तेजस की प्रतिकृतियां, 21 परम वीर चक्र पुरस्कार विजेताओं को श्रद्धांजलि, और बुड़गांव 1947 से ऑपरेशन सिंदूर तक के प्रमुख युद्ध और सैन्य अभियानों पर सत्र शामिल हैं।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने असम पुस्तक मेले को बताया “ज्ञान का तीर्थ”

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केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री (MoPSW) सर्बानंद सोनोवाल ने आज गुवाहाटी के खानापारा में आयोजित असम पुस्तक मेले का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने पुस्तक मेलों को “ज्ञान के तीर्थ” बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बौद्धिक विकास को बढ़ावा देते हैं और एक विचारशील समाज का निर्माण करते हैं।

पुस्तक मेले में आगंतुकों और प्रकाशकों को संबोधित करते हुए सोनोवाल ने कहा, “पुस्तकें मन को आलोकित करती हैं, विचारों को परिष्कृत करती हैं और पीढ़ियों तक समाज को समृद्ध करती हैं। साहित्य का समग्र संसार किसी समाज की अंतरात्मा, सृजनात्मकता और कल्पनाशीलता को प्रतिबिंबित करता है तथा एक बौद्धिक रूप से प्रगतिशील राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।”

उन्होंने आगे कहा, “पठन-पाठन को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया हर कदम जनता के बौद्धिक उत्थान की दिशा में एक सशक्त कदम है।”सोनोवाल ने युवा पीढ़ी से पढ़ने की आदत विकसित करने का आह्वान किया और कहा कि मेले में पाठकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि असम एक समाज के रूप में सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पुस्तकें ऐसे उपहार हैं जिन्हें बार-बार खोला जा सकता है और हर बार वे नई समझ और दृष्टिकोण प्रदान करती हैं। उन्होंने असम के उन महान सांस्कृतिक और साहित्यिक विभूतियों की विरासत को याद किया, जिन्होंने अपने शब्दों और विचारों के माध्यम से असमिया समाज की पहचान को आकार दिया और असम की आवाज़ को विश्व पटल पर पहुँचाया।

दार्शनिक फ्रांसिस बेकन के कथन “पठन मनुष्य को पूर्ण बनाता है” का उल्लेख करते हुए सोनोवाल ने गहन अध्ययन के स्थान पर क्षणिक डिजिटल उपभोग को अपनाने की प्रवृत्ति के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा, “हम चाहे जितना भी सोशल मीडिया कंटेंट देख लें, लेकिन हमें पूर्णता केवल पुस्तकों से ही मिल सकती है। केवल पठन से ही गहराई, कल्पनाशीलता और आलोचनात्मक चिंतन विकसित होता है।”

साथ ही, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि प्रौद्योगिकी ने पठन की आदतों को बदला है। ई-बुक्स, ऑडियोबुक्स और डिजिटल लाइब्रेरी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पारंपरिक पठन के पूरक बन सकते हैं और ज्ञान को अधिक सुलभ बना सकते हैं। असली चुनौती, उन्होंने कहा, विशेषकर युवाओं के लिए पढ़ने को फिर से आनंददायक बनाना है।

सोनोवाल ने छोटे शहरों में पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर भी बल दिया तथा असमिया साहित्य को समकालीन और पाठक-अनुकूल स्वरूपों में अधिक सुलभ बनाने की बात कही। उन्होंने युवाओं के सामने आधुनिक सफलता की आकांक्षाओं और मातृभाषा से जुड़ाव के बीच चल रहे मौन संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रगति का अर्थ अपनी भाषाई और सांस्कृतिक जड़ों से दूरी बनाना नहीं है।

दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने प्रकाशकों और पाठकों से संवाद किया तथा कई पुस्तकें खरीदीं। इनमें बनलता पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित प्रो. भवानी पेगु की मृतो ईश्वर सहित अनुराधा शर्मा पुजारी की भारत रत्न भूपेन हजारिका, हरेन गोगोई की बोधिद्रुम–2, देबजीत भुइयां की मायाबिनी रातिर बुकुत — जुबीनर जीवन आरु गान और बाबुल कुमार बरुआ की मुर जेल यात्रार कहानी शामिल हैं। इन पुस्तकों की खरीद असमिया साहित्य के पठन और प्रचार के प्रति उनकी गहरी आस्था और प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने तिरुवनंतपुरम में “लाइब्रेरीज़ एम्पावरिंग कम्युनिटीज़ – ग्लोबल परस्पेक्टिव्स” अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित किया

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तिरुवनंतपुरम के कनक्काकुन्नू पैलेस में आज पी. एन. पनिक्कर फाउंडेशन द्वारा आयोजित “लाइब्रेरीज़ एम्पावरिंग कम्युनिटीज़ – ग्लोबल परस्पेक्टिव्स” अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित किया।

यह आयोजन केरल में संगठित पुस्तकालय आंदोलन के 80 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया जा रहा है। यह आंदोलन भारत के पुस्तकालय और साक्षरता आंदोलन के प्रणेता माने जाने वाले पी. एन. पनिक्कर की प्रेरणा से प्रारंभ हुआ था।

अपने संदेश में उपराष्ट्रपति ने पी. एन. पनिक्कर फाउंडेशन के निरंतर योगदान की सराहना की, जिसने पठन संस्कृति, डिजिटल साक्षरता और ज्ञान के प्रसार के माध्यम से समुदाय सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन का आदर्श वाक्य “वायिचु वलरुका” (पढ़ो और बढ़ो) समाज को आज भी ज्ञान और समावेशिता की दिशा में प्रेरित कर रहा है।

राधाकृष्णन ने पुस्तकालयों को “ज्ञान के मंदिर” बताया — ऐसे स्थान जो आलोचनात्मक सोच को पोषित करते हैं और व्यक्तियों व समुदायों को सशक्त बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य ने भारत भ्रमण कर आध्यात्मिक चेतना जगाई और विविध विचारों को एकीकृत किया। अनेक ऋषि-मुनियों और विचारकों ने अपने ज्ञान, करुणा और दूरदृष्टि से हमारी सभ्यता को समृद्ध किया है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा — महाकाव्यों से लेकर आधुनिक पुस्तकालयों तक — देश को निरंतर प्रबुद्धता और सामाजिक प्रगति की दिशा में प्रेरित करती रही है।

डिजिटल युग की चुनौतियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पुस्तकालय आज भी “ज्ञान केंद्र” के रूप में कार्य कर रहे हैं — जो प्रामाणिक जानकारी तक पहुँच सुनिश्चित करते हैं और गलत सूचनाओं का मुकाबला करते हैं। जहाँ तकनीक सूचनाओं की आसान पहुँच देती है, वहीं पुस्तकालय गहराई, चिंतन और सार्थक संवाद को प्रोत्साहित करते हैं।

उन्होंने केरल की शिक्षा और साक्षरता की विशिष्ट परंपरा की भी सराहना की और श्री पी. एन. पनिक्कर को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनकी दृष्टि ने पुस्तकालयों को सक्रिय सामुदायिक केंद्रों के रूप में विकसित किया।

अंत में उपराष्ट्रपति ने कहा कि पुस्तकालय गतिशील ज्ञान, समावेशन और नवाचार के केंद्र हैं। उन्होंने पूरे देश में सार्वजनिक और सामुदायिक पुस्तकालयों के नेटवर्क को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि लोगों को ज्ञान के माध्यम से सशक्त किया जा सके।

सम्मेलन के बारे में:

“लाइब्रेरीज़ एम्पावरिंग कम्युनिटीज़ – ग्लोबल परस्पेक्टिव्स” विषय पर यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन पी. एन. पनिक्कर फाउंडेशन द्वारा 2 से 3 नवम्बर, 2025 तक तिरुवनंतपुरम के कनक्काकुन्नू पैलेस में आयोजित किया जा रहा है। इसमें विशेषज्ञ, नीति-निर्माता, पुस्तकालय पेशेवर, शिक्षाविद और डिजिटल नवाचारक शामिल हो रहे हैं।

सम्मेलन का उद्देश्य केरल के पुस्तकालय आंदोलन की ऐतिहासिक विरासत का उत्सव मनाना और सामुदायिक भागीदारी, डिजिटल पहुँच तथा सतत ज्ञान पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने की रणनीतियों पर विचार करना है।

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