Media24Media.com: #RashtriyaEktaDiwas

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #RashtriyaEktaDiwas. Show all posts
Showing posts with label #RashtriyaEktaDiwas. Show all posts

गुजरात की धरती पर बस्तर का सम्मान — एकता परेड में छत्तीसगढ़ की झांकी ने दिखाया विकास का नया मॉडल

No comments Document Thumbnail

नए छत्तीसगढ़ की झलक देख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हुए प्रभावित

एकता नगर(गुजरात)- गुजरात के एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर आज आयोजित एकता परेड में इस वर्ष छत्तीसगढ़ की झांकी “बस्तर की धरती – संस्कृति, सृजन और प्रगति की गाथा” ने सभी का मन मोह लिया। यह झांकी छत्तीसगढ़ के जनजातीय जीवन, परंपराओं और विकास यात्रा का जीवंत प्रतीक बनकर उभरी।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परेड में सम्मिलित सभी झांकियों का अवलोकन किया और विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झलकियों की सराहना की। प्रधानमंत्री की उपस्थिति में प्रदर्शित छत्तीसगढ़ की झांकी ने अपने सौंदर्य, प्रतीकात्मकता और सशक्त संदेश से सबका ध्यान आकर्षित किया।

झांकी के अग्रभाग में पारंपरिक वेशभूषा में सजे माड़िया जनजाति के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत गौर नृत्य ने बस्तर की आन-बान और सामूहिकता की भावना को सजीव कर दिया। उनके पास रखी पारंपरिक तुरही बस्तर के पर्वों की गूंज और लोक उल्लास की प्रतीक बनी। वहीं, नंदी का चित्रण बस्तर की गहरी लोक आस्था और शिव उपासना की परंपरा को अभिव्यक्त करता नजर आया।

झांकी के मध्य भाग में बस्तर के विकास और परिवर्तन की यात्रा को कलात्मक रूप में दर्शाया गया। कभी नक्सलवाद से प्रभावित यह क्षेत्र अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में बस्तर आज तेजी से बदलते भारत का प्रतीक बन चुका है। अब यहाँ बंदूक की नहीं, विकास की गूंज सुनाई देती है।

झांकी के अंतिम भाग में टोकरी लिए महिला की प्रतिमा बस्तर की स्त्री शक्ति, श्रम और सृजनशीलता का प्रतीक बनी। संपूर्ण झांकी की ढोकरा शिल्पकला से की गई सजावट ने बस्तर के शिल्पकारों की अद्भुत कलात्मकता और परंपरागत कौशल को दर्शाया।

छत्तीसगढ़ की यह झांकी न केवल अपनी संस्कृति और कला में समृद्ध है, बल्कि यह बस्तर में हो रहे सकारात्मक बदलाव की कहानी भी कहती है। झांकी ने दिखाया कि आज का नया बस्तर परंपरा, प्रकृति और विकास का सुंदर संगम बन चुका है। कभी दुर्गम और पहुँच से दूर रहने वाले इलाकों में अब सड़कों का जाल बिछ गया है, जिन पर बच्चों के स्कूल जाने की चहल-पहल सुनाई देती है और स्कूलों में घंटियाँ बजने लगी हैं।

गांवों में बिजली की रौशनी और इंटरनेट की पहुँच ने नई आशाएँ जगाई हैं। युवाओं में कुछ करने, आगे बढ़ने का जोश दिखाई देता है। महिलाएँ आत्मनिर्भर बन रही हैं — हस्तशिल्प, वनोपज और विभिन्न विकासात्मक योजनाओं ने उनके जीवन में नई दिशा दी है। लोग अब विकास पर भरोसा करने लगे हैं।

यह झांकी इस विश्वास का प्रतीक है कि बस्तर अब सिर्फ़ अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे क्षेत्रों में तेज़ी से आगे बढ़ते एक नए युग के लिए भी जाना जा रहा है।


एकता परेड के लिए झांकियों का चयन गृह सचिव की अध्यक्षता में गठित एक उच्चस्तरीय समिति और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने देशभर के राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और केंद्रीय संगठनों के प्रजेंटेशन देखे। हर राज्य ने अपनी थीम, मॉडल और विचार समिति के सामने प्रस्तुत किए। इसी प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ की झांकी को उसकी मौलिकता, सांस्कृतिक समृद्धि और विकास के जीवंत चित्रण के लिए चयनित किया गया।

अंतिम सूची में छत्तीसगढ़ के साथ एनएसजी, एनडीआरएफ, अंडमान-निकोबार द्वीप, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, मणिपुर, पुद्दुचेरी और उत्तराखंड की झांकियाँ शामिल हुईं।

सीआरपीएफ ने किया एकता दौड़ का वृहत् आयोजन, ग्रामीण,विद्यार्थी व शिक्षक हुए एकता दौड़ में शामिल

No comments Document Thumbnail

आरंग- शुक्रवार को सरदार वल्लभ भाई पटेल के 150 वीं जयंती के अवसर पर भारत सरकार के निर्देशानुसार वृहत् रूप से एकता दौड़ का आयोजन हुआ। 

जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण, पूर्व माध्यमिक एवं हायर सेकंडरी स्कूल भिलाई के छात्र छात्राएं व शिक्षक शिक्षिकाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए एकता दौड़ में शामिल हुए।उप कमांडेंट अजय सिंह ने हरी झंडी दिखाकर एकता दौड़ को रवाना किया। इस अवसर पर एकता दौड़ में भाग लेने वाले शिक्षको, विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को सीआरपीएफ कैंप की ओर से "रन फार यूनिटी"  टी-शर्ट का वितरण भी किया गया। वहीं उप कमांडेंट अजय सिंह ने लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के सपनों को साकार करने हेतु कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को शपथ दिलाया और राष्ट्रीय एकता के महत्व पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला। 

एकता दौड़ में बड़ी संख्या में सीआरपीएफ के उच्च व अधिनस्थ अधिकारियों व सैनिकों ने उत्साह से भाग लिया।कार्यक्रम के आयोजन संयोजन में अहम् भूमिका उप कमांडेंट अजय सिंह, सहायक कमांडेंट प्रवीण मोरे, सहायक कमांडेंट लोकनाथन डी, सहायक कमांडेंट राजकुमार चितला सहित अन्य जवानों का रहा।इस दरम्यान जवानों और विद्यार्थियों द्वारा "भारत माता की - जय"  और "सरदार बल्लभ भाई पटेल - अमर रहे" नारों से पूरा वातावरण  गुंजायमान होता रहा l


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एकता नगर में ‘म्यूज़ियम ऑफ रॉयल किंगडम्स ऑफ इंडिया’ की आधारशिला रखी — भारत की शाही विरासत और राष्ट्रीय एकता को समर्पित एक भव्य पहल

No comments Document Thumbnail

परिचय

राष्ट्रीय एकता दिवस की पूर्व संध्या पर, साझा विरासत और एकता के संकल्प के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘म्यूज़ियम ऑफ रॉयल किंगडम्स ऑफ इंडिया’ की आधारशिला रखी। यह संग्रहालय भारत की शाही और राजवंशीय विरासत को सम्मान देने का एक भव्य प्रयास है, जो ₹367 करोड़ की अनुमानित लागत से एकता नगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परिसर में पाँच एकड़ भूमि पर निर्मित किया जाएगा।

संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत स्थापित यह संग्रहालय भारत के शाही राज्यों और राजवंशों की गौरवशाली धरोहर को संरक्षित और प्रदर्शित करेगा। इसमें विभिन्न राजवंशों और रियासतों से संबंधित राजचिह्न, कलाकृतियाँ, वस्त्र, पांडुलिपियाँ, चित्रकला और अभिलेखीय सामग्री प्रदर्शित की जाएगी। चार थीम आधारित गैलरियों के माध्यम से यह संग्रहालय आगंतुकों को एक इंटरैक्टिव अनुभव प्रदान करेगा, जो इतिहास, एकता और त्याग की भावना से प्रेरित करेगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत की स्वतंत्रता के समय, देश ब्रिटिश प्रशासनिक क्षेत्रों और 550 से अधिक रियासतों में विभाजित था। इन रियासतों का भारतीय संघ में एकीकरण स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है।

उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में, रियासतों के शासकों को ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ के माध्यम से भारत में विलय के लिए राज़ी किया गया। 1949 तक लगभग सभी रियासतें भारतीय संघ का हिस्सा बन गईं, जिसने एक एकीकृत और संप्रभु गणराज्य की नींव रखी। यह शांतिपूर्ण एकीकरण भारत की कूटनीतिक कुशलता, समावेशिता और राष्ट्र निर्माण की भावना का प्रतीक है।

मुख्य उद्देश्य

इस संग्रहालय की स्थापना निम्नलिखित उद्देश्यों के साथ की जा रही है:

  • भारत की शाही और रियासती विरासत का दस्तावेजीकरण और प्रदर्शन करना।

  • उन ऐतिहासिक कलाकृतियों और अभिलेखों को संरक्षित करना जो भारत की सांस्कृतिक एकता और पहचान को दर्शाते हैं।

  • जनता को भारत के एकीकरण की ऐतिहासिक प्रक्रिया, रियासतों के योगदान और शासन के विकास के बारे में शिक्षित करना।

  • भारत की शाही और लोकतांत्रिक विरासत पर शोध, संरक्षण और सार्वजनिक अधिगम का एक प्रमुख केंद्र बनना।

मुख्य डिज़ाइन विशेषताएँ

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 से प्रेरित होकर, संग्रहालय में एक इंटरएक्टिव और अनुभवात्मक अधिगम गैलरी होगी, जो इतिहास को जीवंत तरीके से प्रस्तुत करेगी।

  • संग्रहालय की वास्तुकला प्राकृतिक परिदृश्य के साथ सामंजस्य बिठाती है, जिसमें जल निकाय, फव्वारे, आंगन और उद्यान प्रमुख संरचनात्मक तत्व हैं।

  • प्रवेश द्वार शाही बाग़ों से प्रेरित लैंडस्केप के माध्यम से होगा, जो अंदर की भव्यता का अनुभव कराएगा।

  • यात्रा का समापन म्यूज़ियम कैफ़े में होगा, जहाँ पर्यटक राजसी व्यंजन का आनंद लेते हुए अपने अनुभव पर विचार कर सकेंगे।

गैलरी अवलोकन

  1. गैलरी 1: ओरिएंटेशन गैलरी – फिल्मों और ऑडियो-विज़ुअल माध्यमों के ज़रिए शाही इतिहास और संग्रहालय की कहानी का परिचय।

  2. गैलरी 2: “द थ्रोन एंड द स्टेट” – राजपरिवारों, शासन व्यवस्था, जनकल्याण नीतियों और प्रजा के प्रति उनके स्नेह को प्रदर्शित करेगी।

    • व्यूइंग लाउंज और डेक से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और नर्मदा नदी का विहंगम दृश्य देखा जा सकेगा।

  3. गैलरी 3: “द स्टोरी ऑफ़ इंडिया’स इंटीग्रेशन” – भारत के राजनीतिक एकीकरण से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम और दस्तावेज़ों को प्रदर्शित करेगी।

  4. गैलरी 4: “हॉल ऑफ यूनिटी” – सभी रियासतों के प्रतीक और चिन्हों को प्रदर्शित करेगी, जिन्होंने भारत की एकता में योगदान दिया।

निष्कर्ष

रियासतों का एकीकरण स्वतंत्र भारत की असाधारण उपलब्धि है, जो "एकता में विविधता" की भावना का प्रतीक है। प्रस्तावित ‘म्यूज़ियम ऑफ रॉयल किंगडम्स ऑफ इंडिया’ इस ऐतिहासिक प्रक्रिया का उत्सव मनाएगा, भारत की शाही विरासत को संरक्षित करेगा और उनके योगदान को राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रदर्शित करेगा।

यह संग्रहालय अतीत की विरासत और आधुनिक तकनीक का संगम होगा — एक जीवंत प्रतीक के रूप में, जो भारत की सांस्कृतिक एकता और गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाएगा।


केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में ‘रन फॉर यूनिटी’ को हरी झंडी दिखाकर किया शुभारंभ, सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर एकता की शपथ दिलाई

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज राष्ट्रीय एकता दिवस – 2025 के अवसर पर नई दिल्ली में ‘रन फॉर यूनिटी’ को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनसमूह को एकता प्रतिज्ञा भी दिलाई। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, डॉ. मनसुख मांडविया, दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता तथा गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि आज का दिन हम सबके लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि 2014 से हर वर्ष 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की स्मृति में ‘रन फॉर यूनिटी’ का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि आज सरदार पटेल की 150वीं जयंती है और इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह निर्णय लिया है कि इसे पूरे देश में विशेष रूप से मनाया जाए।

अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल ने स्वतंत्रता संग्राम में ही नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत के वर्तमान स्वरूप को गढ़ने में भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी के आह्वान पर सरदार पटेल ने अपने वकालत के पेशे को त्याग दिया और स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। 1928 के बारडोली सत्याग्रह के दौरान उनके नेतृत्व कौशल की सच्ची झलक देखने को मिली, जब किसानों के साथ अन्याय के विरोध में आंदोलन छेड़ा गया। यह आंदोलन जो एक छोटे से कस्बे में शुरू हुआ था, वह देखते ही देखते पूरे देश में फैल गया और ब्रिटिश शासन को किसानों की माँगें मानने पर मजबूर होना पड़ा। इसी आंदोलन के बाद महात्मा गांधी ने उन्हें “सरदार” की उपाधि दी और वे सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम से प्रसिद्ध हुए।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत के 562 रियासतों में विभाजन की चुनौती थी और यह प्रश्न उठता था कि इतनी बिखरी हुई रियासतों वाला देश एकजुट भारत कैसे बनेगा।अमित शाह ने बताया कि सरदार पटेल के अथक प्रयास, दृढ़ निश्चय और राजनीतिक कौशल से इन सभी रियासतों का विलय संभव हुआ और वर्तमान भारत का नक्शा आकार में आया। काठियावाड़, भोपाल, जूनागढ़, जोधपुर, त्रावणकोर और हैदराबाद जैसी रियासतों ने अलग रहने की कोशिश की, लेकिन सरदार पटेल की लौह इच्छाशक्ति ने उन्हें भारत के साथ जोड़ दिया।

अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल का केवल एक अधूरा कार्य शेष रह गया था — कश्मीर का पूर्ण एकीकरण। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अनुच्छेद 370 को हटाकर वह कार्य पूरा किया, जो सरदार पटेल का सपना था, और आज हमारे सामने वास्तविक रूप से एकीकृत भारत है।

अमित शाह ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के दिन जब देश के लोग तिरंगा फहरा रहे थे, तब सरदार पटेल नौसेना के युद्धपोत की निगरानी कर रहे थे। उस समय लक्षद्वीप पर नियंत्रण को लेकर प्रश्न उठा था, और सरदार पटेल ने तत्काल नौसेना को वहाँ भेजकर तिरंगा फहरवाया, जिससे लक्षद्वीप भारत का अभिन्न अंग बन गया।

गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष की सरकारों ने सरदार पटेल को वह सम्मान नहीं दिया, जिसके वे वास्तव में अधिकारी थे। उन्हें भारत रत्न प्राप्त करने में 41 वर्ष लग गए। उन्होंने बताया कि सरदार पटेल के योगदान के अनुरूप कोई भव्य स्मारक भी नहीं बनाया गया था। जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तब उन्होंने केवडिया में एक भव्य स्मारक — स्टैच्यू ऑफ यूनिटी — बनाने का संकल्प लिया। इस स्मारक की आधारशिला 31 अक्टूबर 2013 को रखी गई और केवल 57 महीनों में 182 मीटर ऊँची यह प्रतिमा तैयार हुई, जो आज पूरे देश की एकता का प्रतीक है।

अमित शाह ने बताया कि सरदार पटेल किसानों के नेता थे, और इस प्रतिमा के निर्माण में उपयोग किए गए लगभग 25,000 टन लोहे का संग्रह किसानों के उपकरणों को पिघलाकर किया गया। प्रतिमा के निर्माण में लगभग 90,000 घन मीटर कंक्रीट और 1,700 टन कांसे का प्रयोग हुआ। अब तक लगभग 2.5 करोड़ लोग स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का भ्रमण कर चुके हैं।

अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल ने जिस मार्ग पर चलकर देश की एकता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा की नींव रखी, उसी मार्ग पर आज भारत आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में केवडिया में सभी राज्यों की पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) ने सरदार पटेल को भव्य परेड के माध्यम से श्रद्धांजलि दी। गृह मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि सरदार पटेल की 150वीं जयंती के उपरांत हर वर्ष यह एकता परेड इसी भव्य स्वरूप में आयोजित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष ‘रन फॉर यूनिटी’ और प्रतिज्ञा कार्यक्रम भी विशेष रूप से मनाए जा रहे हैं।अमित शाह ने बताया कि कश्मीर से कन्याकुमारी और द्वारका से कामाख्या तक पूरे देश में सरदार पटेल के विचारों को विशेषकर युवाओं तक पहुँचाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो युवा आज राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा की प्रतिज्ञा ले रहे हैं, वही भारत के उज्ज्वल भविष्य के निर्माता होंगे।

युवा-नेतृत्व वाले भारत की नींव रखना: मेरा युवा भारत (MY Bharat) – राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल

No comments Document Thumbnail

युवा-नेतृत्व वाले भारत की नींव रखना

भारत अपने विकास यात्रा के एक निर्णायक चरण पर खड़ा है — जहाँ 35 वर्ष से कम आयु की जनसंख्या लगभग 65% है और 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य देश के सामने है। इस परिवर्तनकारी दौर में मेरा युवा भारत (MY Bharat) भारत सरकार की एक ऐतिहासिक पहल के रूप में उभरा है — एक राष्ट्रीय मंच जो युवाओं को सशक्त बनाने और उनकी ऊर्जा को राष्ट्र-निर्माण की दिशा में सार्थक कार्रवाई में परिवर्तित करने के लिए समर्पित है।

31 अक्टूबर 2023 को राष्ट्रीय एकता दिवस (सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती) के अवसर पर शुरू किया गया, MY Bharat तकनीक, सुशासन और जनभागीदारी का एक जीवंत संगम है। यह युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय के रूप में कार्य करता है और युवाओं को स्वैच्छिक सेवा, अनुभवात्मक शिक्षा, नेतृत्व और कौशल विकास के अवसरों से जोड़ने के लिए एक प्रौद्योगिकी-संचालित तंत्र प्रदान करता है।

इस मंच के माध्यम से युवा विभिन्न सरकारी विभागों, निजी संगठनों और नागरिक समाज भागीदारों की पहलों से जुड़ सकते हैं, और स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, नवाचार, उद्यमिता और सामाजिक समावेशन जैसे क्षेत्रों में वास्तविक जीवन की चुनौतियों का समाधान करने वाले प्रोजेक्ट्स में भाग ले सकते हैं। राष्ट्रीय युवा नीति के अनुरूप यह पहल मुख्य रूप से 15–29 वर्ष के युवाओं को लक्षित करती है, साथ ही 10–19 वर्ष के किशोरों को भी प्रारंभिक नागरिक भागीदारी और जागरूकता के लिए प्रोत्साहित करती है।

MY Bharat का दृष्टिकोण

2023 में MY Bharat की शुरुआत भारत के बदलते युवा परिदृश्य के अनुरूप की गई थी। पारंपरिक युवा कार्यक्रम अब उस पीढ़ी के लिए पर्याप्त नहीं थे जो तकनीक, गतिशीलता और वैश्विक दृष्टिकोण से प्रेरित है। आज का युवा ऐसे मंच चाहता है जो उसकी आकांक्षाओं को पहचान सके, उसकी आवाज़ को सशक्त बनाए और उसे सीखने व नेतृत्व के अवसरों से सीधे जोड़े।

MY Bharat इस अंतर को पाटते हुए एकीकृत, तकनीक-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) प्रदान करता है, जो ग्रामीण, शहरी और “रूरल-अर्बन” (Rurban) युवाओं को एक ही राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर लाता है। इसका “फिजिटल” (Physical + Digital) दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी युवा पीछे न रह जाए।

डिजिटल इकोसिस्टम

MY Bharat के केंद्र में एक सशक्त डिजिटल तंत्र है जो करोड़ों युवाओं को विकास और सेवा के अवसरों से जोड़ता है। डिजिटल इंडिया ढांचे के तहत निर्मित यह प्लेटफॉर्म समावेशी डिज़ाइन और अत्याधुनिक तकनीक को जोड़ता है, जिससे देश का हर युवा—चाहे वह किसी महानगर में हो या किसी सुदूर गाँव में—स्वैच्छिक सेवा, नेतृत्व और सीखने के अवसरों तक पहुंच सके।

MY Bharat पोर्टल (mybharat.gov.in):

यह एक केंद्रीकृत डिजिटल गेटवे है जो युवाओं को पंजीकरण, डिजिटल आईडी, अवसर मिलान (opportunity matching) और रीयल-टाइम प्रभाव ट्रैकिंग जैसी सुविधाएँ प्रदान करता है। अक्टूबर 2025 तक, इस प्लेटफॉर्म से 2 करोड़ से अधिक युवा और 1.20 लाख संगठन जुड़े हैं, जिससे एक जीवंत सहयोगी इकोसिस्टम तैयार हुआ है।

MY Bharat मोबाइल ऐप (लॉन्च – 1 अक्टूबर 2025):

युवा सहभागिता को मोबाइल-प्रथम और सुलभ बनाने के लिए MY Bharat मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया। इस ऐप में बहुभाषी समर्थन, एआई चैटबॉट, वॉयस असिस्ट नेविगेशन और “स्मार्ट सीवी बिल्डर” जैसे फीचर शामिल हैं। लॉन्च के समय तक 1.81 करोड़ से अधिक युवा और 1.20 लाख संगठन इस प्लेटफॉर्म से जुड़े थे।

MY Bharat 2.0 मॉड्यूल्स:

  • नेशनल करियर सर्विस: युवाओं के लिए रोजगार और करियर लिंकिंग।

  • मेंटरशिप हब: उद्योग विशेषज्ञों और नवप्रवर्तकों से जुड़ाव।

  • अनुभवात्मक शिक्षा कार्यक्रम (ELPs): जिला और राज्य स्तर पर जिम्मेदारी निर्माण के अवसर।

  • फिट इंडिया एकीकरण: स्वास्थ्य और सामुदायिक कल्याण को बढ़ावा देना।

कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) साझेदारी

डिजिटल अंतराल को पाटने के लिए MY Bharat ने इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSC) नेटवर्क के साथ साझेदारी की है। देशभर के पाँच लाख से अधिक वीएलई (Village Level Entrepreneurs) ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में युवाओं की सहायता करते हैं ताकि वे आसानी से पंजीकरण कर सकें और अवसरों का लाभ उठा सकें।

युवा शक्ति की कहानियाँ – परिवर्तन के उदाहरण

  • विकसित भारत रन 2025: 91 देशों के 150 शहरों में आयोजित इस कार्यक्रम ने वैश्विक मंच पर भारतीय युवाओं की एकता और उद्देश्य को प्रदर्शित किया।

  • राष्ट्रीय ध्वज क्विज़: युवाओं को राष्ट्रध्वज के मूल्यों से जोड़ने वाली एक अनोखी पहल, जिसमें श्रेष्ठ प्रतिभागियों ने सियाचिन का दौरा किया।

  • नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत: जुलाई 2025 में वाराणसी से शुरू हुआ यह अभियान युवाओं द्वारा संचालित एक सामाजिक परिवर्तन आंदोलन बन गया।

  • विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (VBYLD): 10 विषयगत क्षेत्रों में युवा नेताओं ने भारत के भविष्य के लिए अभिनव समाधान प्रस्तुत किए।

अब तक की यात्रा और आगे की दिशा

MY Bharat ने दो वर्षों से भी कम समय में भारत का सबसे बड़ा डिजिटल युवा मंच बनने की दिशा में ऐतिहासिक प्रगति की है। यह 2 करोड़ से अधिक युवाओं और 1.20 लाख से अधिक संगठनों को जोड़ते हुए युवाओं को स्वैच्छिक सेवा, कौशल विकास और नेतृत्व के अवसर प्रदान कर रहा है।

30 जून 2025 को युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय और डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (MeitY) के बीच हुए एमओयू ने MY Bharat 2.0 के विकास का मार्ग प्रशस्त किया — एक एआई-सक्षम, बहुभाषी मंच जो स्मार्ट सीवी बिल्डर, वॉयस असिस्ट नेविगेशन, मेंटरशिप नेटवर्क और अनुभवात्मक शिक्षण मॉड्यूल जैसे फीचर्स से लैस है।

आगे चलकर MY Bharat 2.0 करियर काउंसलिंग, एआई-आधारित कौशल मानचित्रण, उद्यमिता समर्थन और डिजिटल प्रमाणन जैसी सुविधाएँ जोड़ेगा। यह प्लेटफॉर्म राष्ट्रीय करियर सेवा (NCS), डिजिलॉकर, UMANG और डिजिटल इंडिया स्टैक से एकीकृत होकर युवाओं को एकीकृत डिजिटल नेटवर्क से जोड़ेगा — जिससे MY Bharat वैश्विक दक्षिण (Global South) का सबसे बड़ा युवा डिजिटल नेटवर्क बन सके।

“युवा शक्ति से जनभागीदारी” — यही MY Bharat की आत्मा है, जो हर भारतीय युवा को परिवर्तन का सहभागी नहीं, बल्कि उसका निर्माता बनाती है।

राष्ट्रीय एकता दिवस 2025: सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर एक भारत, श्रेष्ठ भारत का उत्सव

No comments Document Thumbnail

परिचय

राष्ट्रीय एकता दिवस (Rashtriya Ekta Diwas) हर वर्ष 31 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिन भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के उपलक्ष्य में देश की एकता, अखंडता और विविधता में एकता के मूल्यों को सम्मान देने हेतु मनाया जाता है। सरदार पटेल ने स्वतंत्र भारत के राजनीतिक और राष्ट्रीय एकीकरण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। इस दिवस का उद्देश्य नागरिकों को देश की एकता, संप्रभुता और अखंडता के प्रति संकल्पबद्ध करना है।

राष्ट्रीय एकता दिवस पहली बार वर्ष 2014 में मनाया गया था, जब भारत सरकार ने इसे औपचारिक रूप से घोषित किया। 31 अक्टूबर 2015 को आयोजित समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत (Ek Bharat Shreshtha Bharat)’ पहल की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच आपसी संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और भावनात्मक एकता को सुदृढ़ करना है।

2025 का वर्ष विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती का वर्ष है।

सरदार पटेल की विरासत

भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1947 में स्वतंत्रता के बाद भारत के राजनीतिक एकीकरण में निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने 560 से अधिक रियासतों — जो देश के लगभग 40% क्षेत्र और जनसंख्या को कवर करती थीं — को भारत संघ में विलय कराया।
‘स्टेट्स डिपार्टमेंट’ के प्रमुख के रूप में उन्होंने कूटनीति, संवाद और आवश्यकतानुसार प्रशासनिक दृढ़ता का प्रयोग करते हुए देश के विखंडन को रोका और भारत की भौगोलिक एकता सुनिश्चित की। उनके नेतृत्व में आधुनिक भारत की एकीकृत लोकतांत्रिक संरचना की नींव पड़ी।

पटेल ने अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) की स्थापना की, जिसे उन्होंने देश की “इस्पाती ढांचा (Steel Frame)” कहा — जो आज भी राष्ट्रीय एकता और प्रशासनिक स्थिरता का आधार है।

एक भारत श्रेष्ठ भारत – सरदार पटेल के दृष्टिकोण की निरंतरता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 31 अक्टूबर 2015 को आरंभ की गई ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत (EBSB)’ पहल, सरदार पटेल के एकीकृत भारत के दृष्टिकोण का मूर्त रूप है।
यह कार्यक्रम राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करता है, जिससे “विविधता में एकता” का संदेश सशक्त हो सके।

मुख्य उद्देश्य:

  • नागरिकों के बीच भावनात्मक एकता को सुदृढ़ करना

  • राज्यों के बीच संवाद और साझेदारी बढ़ाना

  • भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करना

  • पारस्परिक समझ और श्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना

EBSB से जुड़े प्रमुख कार्यक्रम:

  • भाषा संगम ऐप – 22 आधिकारिक भाषाओं में 100 से अधिक वाक्यों को सीखने हेतु

  • युवा संगम एवं EBSB क्लब्स – युवाओं के लिए अंतर-राज्यीय संवाद मंच

  • काशी-तमिल संगमम् – उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक बंधन का उत्सव

  • My Bharat डिजिटल पोर्टल – नागरिक सहभागिता, क्विज़ और अभियान

  • Dekho Apna Desh एवं EBSB वॉल जैसी डिजिटल पहलें – देश की विविधता का उत्सव

2025 के आयोजन और कार्यक्रम

इस वर्ष राष्ट्रीय एकता दिवस विशेष रूप से ऐतिहासिक है, क्योंकि यह सरदार पटेल की 150वीं जयंती का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अक्टूबर को एकता नगर (केवड़िया), गुजरात में आयोजित मुख्य समारोह में भाग लेंगे।

मुख्य कार्यक्रमों की झलक:

  • मुख्य परेड स्थल: एकता नगर, नर्मदा जिला

  • विशेष प्रदर्शन: वायुसेना की ‘सूर्य किरण’ टीम द्वारा एयर शो

  • भागीदारी: 9 राज्यों और 1 केंद्रशासित प्रदेश के 16 मार्चिंग दस्ते, 4 CAPF इकाइयाँ, NCC कैडेट्स, महिला अधिकारी द्वारा प्रधानमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर

  • सांस्कृतिक झांकियाँ: “विविधता में एकता” थीम पर आधारित 900 कलाकारों का प्रदर्शन

  • भारत पर्व (1–15 नवंबर): विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक कार्यक्रम, फूड फेस्टिवल और बिरसा मुंडा जयंती विशेष समारोह

  • Run for Unity: दिल्ली में राजघाट से लाल किला तक आयोजित मैराथन, जिसमें छात्र, विकलांगजन, और सुरक्षा बल शामिल होंगे

  • ₹280 करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का शुभारंभ

देशी नस्ल के कुत्तों की परेड

इस वर्ष की परेड में रामपुर हाउंड्स और मुढ़ोल हाउंड्स (BSF के भारतीय नस्ल के कुत्ते) का दल भी शामिल होगा। यह “आत्मनिर्भर भारत” की भावना को प्रदर्शित करेगा।
इन कुत्तों ने राष्ट्रीय सुरक्षा अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ‘रिया’ नामक मुढ़ोल हाउंड, जिसने ‘ऑल इंडिया पुलिस डॉग प्रतियोगिता’ में प्रथम स्थान प्राप्त किया, दल का नेतृत्व करेगी।

Sardar@150 Unity March

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा My Bharat प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से “Sardar@150 Unity March” का आयोजन किया जा रहा है।
यह यात्रा युवाओं में एकता, देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई है।

मुख्य बिंदु:

  • लॉन्च: 6 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया द्वारा

  • प्रतियोगिताएँ: सोशल मीडिया रील्स, निबंध लेखन, Sardar@150 Young Leaders प्रोग्राम

  • पहला चरण (31 अक्टूबर – 25 नवंबर): सभी जिलों में पदयात्राएँ, निबंध-वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, महिला कल्याण शिविर आदि

  • राष्ट्रीय पदयात्रा (26 नवंबर – 6 दिसंबर): करमसद (पटेल का जन्मस्थान) से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (केवड़िया) तक 152 किमी की यात्रा

निष्कर्ष

  • राष्ट्रीय एकता दिवस सरदार पटेल की उस दूरदर्शी नेतृत्व की याद दिलाता है, जिसने विभाजित रियासतों को जोड़कर एक भारत की नींव रखी।
  • आज यह दिवस केवल एक ऐतिहासिक स्मरण नहीं, बल्कि नागरिक एकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रनिर्माण की सतत प्रेरणा बन चुका है।
  • ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के माध्यम से यह उत्सव अब केवल एक दिन नहीं, बल्कि सालभर चलने वाला जन आंदोलन बन गया है — जो भारत की विविधता में एकता के अमर मंत्र को जीवंत रखता है।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.