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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुनी ‘मन की बात’ की 132वीं कड़ी

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जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ बना देश के लिए मिसाल: कोरिया जिले के जल संरक्षण मॉडल की प्रधानमंत्री ने की सराहना

मन की बात में छत्तीसगढ़ के जल संवर्धन प्रयासों को मिली राष्ट्रीय पहचान, अब इसे जन आंदोलन बनाना हमारा संकल्प - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 132वीं कड़ी सुनी और इसे राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम देश के कोने-कोने में हो रहे सकारात्मक नवाचारों और जनभागीदारी को राष्ट्रीय मंच प्रदान कर समाज में नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार करता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोरिया जिले के किसानों के जल संरक्षण प्रयासों की सराहना छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गर्व और प्रेरणा का विषय है। यह दर्शाता है कि प्रदेश में जमीनी स्तर पर हो रहे कार्य अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ‘आवा पानी झोंकी’ जैसे अभिनव मॉडल के माध्यम से किसानों ने अपने खेतों में रिचार्ज तालाब और सोख्ता गड्ढों का निर्माण कर वर्षा जल को सहेजने का सराहनीय कार्य किया है। यह जनभागीदारी आधारित पहल आज भूजल स्तर में सुधार की एक सशक्त मिसाल बन चुकी है और अन्य क्षेत्रों के लिए भी मार्गदर्शक बन रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है और छत्तीसगढ़ में भी इसे जनभागीदारी से जोड़ते हुए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से जल संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने और इसमें सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री द्वारा मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता, फिटनेस को बढ़ावा, शुगर इंटेक में कमी और खेलों के लिए अनुकूल वातावरण निर्माण जैसे विषयों पर दिए गए संदेश अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने, युवाओं को खेलों से जोड़ने और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री साय ने पश्चिमी एशिया में उत्पन्न परिस्थितियों के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि देश हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और केंद्र तथा राज्य सरकारें समन्वय के साथ कार्य कर रही हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि छत्तीसगढ़ में पेट्रोलियम उत्पादों, रसोई गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता है तथा आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सुचारु और सामान्य है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों से दूर रहें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनभागीदारी की शक्ति के साथ जल संरक्षण को और मजबूत कर छत्तीसगढ़ को सुरक्षित, समृद्ध और जल-संपन्न भविष्य की ओर ले जाने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा प्रदेश निरंतर नवाचार, सहभागिता और सुशासन के माध्यम से विकास की नई दिशा तय कर रहा है।

इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार कृष्णा दास सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली में ‘दी लाइट एंड द लोटस: द रिलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन’ अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का किया उद्घाटन

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली स्थित राय पिथोरा सांस्कृतिक परिसर में भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी “दी लाइट एंड द लोटस: द रिलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन” का उद्घाटन किया। संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित यह ऐतिहासिक प्रदर्शनी एक शताब्दी से अधिक समय बाद पहली बार भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों, रत्न-अवशेषों एवं अवशेष पात्रों का अब तक का सबसे व्यापक और दुर्लभ संग्रह एक साथ प्रस्तुत कर रही है, जिनमें हाल ही में भारत को प्रत्यावर्तित किए गए अवशेष भी शामिल हैं।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा,

“125 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भारत की विरासत वापस लौटी है और राष्ट्र की अमूल्य धरोहर अपने घर लौट आई है। आज से भारत की जनता भगवान बुद्ध के इन पावन अवशेषों के दर्शन कर सकेगी और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकेगी।”

इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री की उपस्थिति, जिनमें भारत की आत्मा को शासन की कार्यवाही में रूपांतरित करने की अद्वितीय क्षमता है, सदैव प्रेरणादायी और विशेष महत्व रखती है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री का स्वागत करना सभी के लिए अत्यंत गर्व का विषय है।

यह उद्घाटन भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक यात्रा में एक ऐतिहासिक क्षण है, जो 127 वर्षों के बाद पिपरहवा अवशेषों के पुनः एकीकरण का साक्षी बना है। इस संग्रह में 1898 में कपिलवस्तु में हुए उत्खनन से प्राप्त अवशेष, 1972–75 के उत्खननों से मिली सामग्री, भारतीय संग्रहालय, कोलकाता में संरक्षित धरोहर तथा पेप्पे परिवार का वह संग्रह शामिल है, जिसे जुलाई 2025 में भारत सरकार के निर्णायक हस्तक्षेप के बाद विदेश में नीलामी से रोककर भारत वापस लाया गया।

प्रधानमंत्री के आगमन पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता; केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत; केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू; दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना; संस्कृति राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने उनका स्वागत किया।

अपने भ्रमण के दौरान प्रधानमंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और भगवान बुद्ध की ध्यानमग्न प्रतिमा पर खटक और गुलाब की पंखुड़ियाँ अर्पित कीं। उन्होंने पिपरहवा स्थल से प्राप्त एक प्राचीन मुहर का अभिषेक किया, बोधि वृक्ष का पौधारोपण किया, आगंतुक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए, प्रदर्शनी कैटलॉग का विमोचन किया तथा उपस्थित बौद्ध भिक्षुओं को चिवर दान अर्पित किया।

“दी लाइट एंड द लोटस: द रिलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन” विषयवस्तु के अंतर्गत क्यूरेट की गई इस प्रदर्शनी में 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर वर्तमान काल तक की 80 से अधिक विशिष्ट और दुर्लभ वस्तुएँ प्रदर्शित की गई हैं। इनमें मूर्तियाँ, पांडुलिपियाँ, थंका चित्र, अनुष्ठानिक वस्तुएँ, अवशेष पात्र और रत्नजड़ित धरोहरें शामिल हैं। प्रदर्शनी का केंद्र बिंदु वह विशाल एकाश्म पत्थर का संदूक है, जिसमें मूल रूप से ये पवित्र अवशेष खोजे गए थे।

1898 में विलियम क्लैक्सटन पेप्पे द्वारा कपिलवस्तु से संबद्ध प्राचीन स्तूप स्थल पर खोजे गए पिपरहवा अवशेष भगवान बुद्ध के जीवन से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोजों में से एक हैं। आज इनका पुनः एकत्र होना भारत की सांस्कृतिक धरोहर को पुनः प्राप्त करने, संरक्षित करने और सम्मान देने की अटूट प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक सहभागिता में उसकी सभ्यतागत और आध्यात्मिक विरासत की भूमिका लगातार सशक्त हुई है। अब तक 642 प्राचीन धरोहरें भारत वापस लाई जा चुकी हैं, जिनमें पिपरहवा अवशेषों की वापसी सांस्कृतिक कूटनीति और विरासत संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

इस उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्रीगण, राजनयिक समुदाय के सदस्य, राजदूत, वंदनीय बौद्ध भिक्षु, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, विद्वान, विरासत विशेषज्ञ, कला जगत के प्रतिनिधि, विद्यार्थी तथा देश-विदेश से आए बौद्ध अनुयायी उपस्थित रहे।

यह प्रदर्शनी संस्कृति मंत्रालय की विरासत संरक्षण एवं सांस्कृतिक नेतृत्व के प्रति प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करती है तथा बुद्ध धम्म की जन्मभूमि के रूप में भारत की विशिष्ट पहचान और विश्व के साथ अपनी सभ्यतागत विरासत साझा करने के उसके स्थायी संकल्प का उत्सव है।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने पुनः कहा,

“125 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भारत की विरासत वापस लौटी है और राष्ट्र की अमूल्य धरोहर अपने घर लौट आई है। आज से भारत की जनता भगवान बुद्ध के इन पावन अवशेषों के दर्शन कर सकेगी और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकेगी।”





प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के ‘कैथेड्रल चर्च ऑफ द रिडेम्पशन’ में क्रिसमस प्रार्थना सभा में की शिरकत

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज क्रिसमस के पावन अवसर पर दिल्ली स्थित ‘द कैथेड्रल चर्च ऑफ द रिडेम्पशन’ में आयोजित प्रातःकालीन प्रार्थना सभा में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने देशवासियों को क्रिसमस की शुभकामनाएँ देते हुए प्रेम, शांति और करुणा के संदेश को आत्मसात करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि क्रिसमस प्रार्थना सभा में प्रेम, शांति और करुणा का शाश्वत संदेश परिलक्षित हुआ। उन्होंने कामना की कि क्रिसमस की भावना समाज में सद्भाव, सौहार्द और परस्पर सद्भावना को और अधिक सुदृढ़ करे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर ईसाई समुदाय के धर्मगुरुओं और श्रद्धालुओं से संवाद भी किया और देश की एकता, भाईचारे तथा सांस्कृतिक विविधता को भारत की सबसे बड़ी शक्ति बताया।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर अपने संदेश में कहा:

“आज दिल्ली के ‘द कैथेड्रल चर्च ऑफ द रिडेम्पशन’ में क्रिसमस की प्रातःकालीन प्रार्थना सभा में सम्मिलित हुआ। इस सेवा में प्रेम, शांति और करुणा का शाश्वत संदेश झलका। क्रिसमस की भावना हमारे समाज में सद्भाव और सद्भावना को प्रेरित करे।”

प्रधानमंत्री की इस उपस्थिति को देश की विविध धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान और आपसी सौहार्द को बढ़ावा देने के रूप में देखा जा रहा है।




राष्ट्रपति भवन में ‘परमवीर दीर्घा’ राष्ट्र को समर्पित, प्रधानमंत्री मोदी ने किया वीर शहीदों को नमन

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन में स्थापित ‘परमवीर दीर्घा’ का स्वागत करते हुए इसे देश के अदम्य वीरों के प्रति भारत की कृतज्ञता का जीवंत प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा कि इस दीर्घा में प्रदर्शित परमवीर चक्र विजेताओं के चित्र मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर योद्धाओं को भावभीनी श्रद्धांजलि हैं और यह देश की एकता व अखंडता के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदानों का सम्मान है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दो परमवीर चक्र विजेताओं और अन्य विजेताओं के परिजनों की गरिमामयी उपस्थिति में इस दीर्घा को राष्ट्र को समर्पित किया जाना इस अवसर को और भी विशेष बनाता है। यह दीर्घा न केवल शौर्य और बलिदान की गौरवगाथा को संजोती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लंबे समय तक राष्ट्रपति भवन की गैलरियों में ब्रिटिश काल के सैनिकों के चित्र लगे रहे, लेकिन अब उनकी जगह देश के परमवीर चक्र विजेताओं के चित्रों ने ले ली है। यह कदम भारत के औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलकर स्वदेशी चेतना और राष्ट्रीय गौरव से जुड़ने का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि कुछ वर्ष पहले अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कई द्वीपों का नामकरण भी परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर किया गया था।

युवाओं के लिए इस दीर्घा के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने acknowledging कहा कि यह स्थल भारत की शौर्य परंपरा से जुड़ने का एक सशक्त माध्यम बनेगा। यह युवाओं को यह संदेश देगा कि राष्ट्र निर्माण और राष्ट्रीय उद्देश्यों की प्राप्ति में आत्मबल, साहस और संकल्प का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।

प्रधानमंत्री ने आशा व्यक्त की कि राष्ट्रपति भवन की परमवीर दीर्घा ‘विकसित भारत’ की भावना को साकार करने वाला एक प्रेरणादायी तीर्थ बनेगी, जहां देशवासी अपने वीर सपूतों के बलिदान से ऊर्जा और प्रेरणा प्राप्त करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति महामहिम डोनाल्ड ट्रम्प से बातचीत की।

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दोनों नेताओं ने भारत–अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों में हो रही सतत प्रगति की समीक्षा की और क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प ने पुनः पुष्टि की कि भारत और अमेरिका वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि को आगे बढ़ाने के लिए निकटता से साथ काम करना जारी रखेंगे।

पोस्ट में, मोदी ने लिखा:

“राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ बहुत ही गर्मजोशीपूर्ण और सार्थक बातचीत हुई। हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति की समीक्षा की और क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विकासों पर चर्चा की। भारत और अमेरिका वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए मिलकर कार्य करते रहेंगे।”


प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता में वैश्विक नेतृत्व के लिए आशाजनक बताया

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence/AI) में नेतृत्व क्षमता को लेकर आशावाद व्यक्त किया, यह टिप्पणी उन्होंने Microsoft के अध्यक्ष और CEO, सत्या नडेला के साथ उपयोगी चर्चा के बाद की।

प्रधानमंत्री ने Microsoft के एशिया में अब तक के सबसे बड़े निवेश को भारत में करने की घोषणा का स्वागत किया, जो देश की नवाचार और तकनीक के लिए भरोसेमंद गंतव्य के रूप में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

सत्या नडेला के पोस्ट के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा:

"जहाँ तक AI की बात है, दुनिया भारत के प्रति आशावादी है!

सत्या नडेला के साथ बहुत उपयोगी चर्चा हुई। यह देखकर खुशी हुई कि भारत वह स्थान है, जहाँ Microsoft एशिया में अब तक का सबसे बड़ा निवेश करेगा।

भारत के युवा इस अवसर का उपयोग कर नवाचार करेंगे और बेहतर ग्रह के लिए AI की शक्ति का लाभ उठाएंगे।"

19 वर्षीय वेदमूर्ति देवव्रत रेखे ने रचा इतिहास: 50 दिनों में पूरा किया शुक्ल यजुर्वेद का दंडक्रम पारायणम, PM मोदी ने दी बधाई

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 वर्षीय वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे को शुक्ल यजुर्वेद की माध्यंदिनी शाखा के 2000 मंत्रों वाले दंडक्रम पारायणम को 50 दिनों तक बिना किसी बाधा के पूरा करने पर बधाई दी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देवव्रत महेश रेखे द्वारा किया गया यह अद्भुत कार्य आने वाली पीढ़ियों द्वारा याद रखा जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा:

"19 वर्षीय वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे ने जो किया है, उसे आने वाली पीढ़ियाँ याद रखेंगी!
भारतीय संस्कृति से प्रेम करने वाला हर व्यक्ति उनके इस कठोर साधना-कार्य पर गर्व महसूस करता है। उन्होंने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यंदिनी शाखा के 2000 मंत्रों के दंडक्रम पारायणम को 50 दिनों में बिना किसी व्यवधान के पूरा किया है। इसमें कई वैदिक ऋचाएँ और पवित्र मंत्र शामिल हैं, जिन्हें उन्होंने त्रुटिहीन उच्चारण के साथ पूरा किया। वे हमारी गुरु-परंपरा के सर्वोत्तम गुणों को साकार करते हैं।

काशी के सांसद के रूप में, मुझे बेहद प्रसन्नता है कि यह अद्भुत साधना इसी पावन नगरी में संपन्न हुई। उनके परिवार, संतों, ऋषियों, विद्वानों और देशभर के उन सभी संगठनों को मेरा प्रणाम, जिन्होंने उन्हें सहयोग दिया।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि देवव्रत रेखे की यह उपलब्धि भारतीय वैदिक परंपरा की शक्ति और युवा पीढ़ी में उसकी निरंतरता का प्रेरक उदाहरण है।

प्रधानमंत्री मोदी का संविधान दिवस पर राष्ट्र को संबोधन

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प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने संविधान दिवस, 26 नवंबर, के अवसर पर भारत के नागरिकों को पत्र लिखते हुए 1949 में संविधान के ऐतिहासिक अंगीकरण को स्मरण किया और राष्ट्र की प्रगति में इसकी निरंतर मार्गदर्शक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 2015 में सरकार ने इस पवित्र दस्तावेज़ के सम्मान में 26 नवंबर को संविधान दिवस घोषित किया था।

मोदी ने बताया कि कैसे संविधान ने साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले व्यक्तियों को राष्ट्र की सर्वोच्च सेवाओं में योगदान देने का अधिकार और अवसर दिया है। उन्होंने संसद और संविधान के प्रति अपनी श्रद्धा से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने 2014 में संसद की सीढ़ियों पर माथा टेकने और 2019 में संविधान को अपने मस्तक पर रखने की स्मृति दोहराई, जो उनके सम्मान का प्रतीक था। उन्होंने कहा कि संविधान ने करोड़ों नागरिकों को सपने देखने की शक्ति और उन्हें साकार करने का सामर्थ्य दिया है।

संविधान सभा के सदस्यों को श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और कई प्रतिष्ठित महिला सदस्यों को याद किया, जिनकी दूरदर्शिता ने संविधान को समृद्ध बनाया। उन्होंने गुजरात में संविधान की 60वीं वर्षगांठ पर आयोजित संविधान गौरव यात्रा जैसे महत्वपूर्ण पड़ावों और संसद के विशेष सत्र व देशभर में आयोजित कार्यक्रमों का उल्लेख किया, जिन्हें संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर अभूतपूर्व जनभागीदारी प्राप्त हुई।

प्रधानमंत्री ने इस वर्ष के संविधान दिवस को विशेष महत्व का बताया क्योंकि यह सरदार वल्लभभाई पटेल और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, वंदे मातरम् के 150 वर्ष और श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत वर्षगांठ के साथ मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये महान विभूतियाँ और ऐतिहासिक अवसर हमें संविधान के अनुच्छेद 51A में उल्लिखित हमारे मूल कर्तव्यों की याद दिलाते हैं। उन्होंने महात्मा गांधी के इस विचार को दोहराया कि अधिकार कर्तव्यों के पालन से प्राप्त होते हैं, और कर्तव्यों का निर्वहन सामाजिक एवं आर्थिक प्रगति की नींव है।

भविष्य की ओर दृष्टि डालते हुए मोदी ने कहा कि इस सदी का एक चौथाई समय बीत चुका है और मात्र दो दशक से थोड़ा अधिक समय बाद भारत आज़ादी के 100 वर्ष पूरे करेगा। वर्ष 2049 में संविधान को अपनाए हुए भी 100 वर्ष हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि आज लिए जा रहे निर्णय और बन रही नीतियाँ आने वाली पीढ़ियों के जीवन को आकार देंगी, और इसलिए नागरिकों को कर्तव्यों को सर्वोपरि रखने की आवश्यकता है, ताकि भारत विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर हो सके।

प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र को मजबूत बनाने की ज़िम्मेदारी का उल्लेख करते हुए मतदान के अधिकार का प्रयोग करने पर बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूलों और कॉलेजों में संविधान दिवस पर 18 वर्ष के होने वाले प्रथम मतदाताओं को सम्मानित किया जाए। उनका मानना है कि युवाओं में जिम्मेदारी और गर्व की भावना जगाने से लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्र के भविष्य दोनों को मजबूती मिलेगी।

अपने पत्र के अंत में, प्रधानमंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे इस महान राष्ट्र के नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों को पूरा करने की प्रतिज्ञा को दोहराएँ, ताकि एक विकसित और सशक्त भारत के निर्माण में सार्थक योगदान दे सकें।


प्रधानमंत्री मोदी 8 नवंबर को ‘कानूनी सहायता वितरण तंत्र सुदृढ़ करने’ पर राष्ट्रीय सम्मेलन का करेंगे उद्घाटन

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 नवंबर 2025 को लगभग 5 बजे भारत के सर्वोच्च न्यायालय में “कानूनी सहायता वितरण तंत्र सुदृढ़ करने” पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा तैयार समुदाय मध्यस्थता प्रशिक्षण मॉड्यूल का भी शुभारंभ करेंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री सम्मेलन में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को संबोधित भी करेंगे।

दो दिवसीय सम्मेलन, जिसे NALSA द्वारा आयोजित किया गया है, में कानूनी सेवाओं के ढांचे के मुख्य पहलुओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इनमें कानूनी सहायता बचाव वकील प्रणाली, पैनल वकील, पैरा-लीगल स्वयंसेवक, स्थायी लोक अदालतें, और कानूनी सेवा संस्थानों का वित्तीय प्रबंधन शामिल हैं।

सम्मेलन का उद्देश्य कानूनी सहायता वितरण प्रणाली को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सुलभ बनाना है, ताकि देश के हर नागरिक को न्याय की समुचित सुविधा मिल सके।


प्रधानमंत्री मोदी 7 नवंबर को ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्षों के समारोह का करेंगे उद्घाटन

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 नवंबर 2025 को सुबह लगभग 9:30 बजे इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम, नई दिल्ली में राष्ट्रीय गीत “वन्दे मातरम्” के साल भर चलने वाले समारोह का उद्घाटन करेंगे।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी करेंगे। यह कार्यक्रम 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक पूरे देश में आयोजित होने वाले समारोह की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है, जो इस कालजयी रचना के 150 वर्षों का उत्सव मनाएगा। “वन्दे मातरम्” ने भारत की स्वतंत्रता संग्राम में प्रेरणा दी और आज भी राष्ट्रीय गर्व और एकता की भावना को उजागर करता है।

इस समारोह में सुबह लगभग 9:50 बजे पूरे देश के सार्वजनिक स्थलों पर “वन्दे मातरम्” के पूर्ण संस्करण का सामूहिक गायन आयोजित किया जाएगा, जिसमें समाज के सभी वर्गों के नागरिक भाग लेंगे।

वर्ष 2025 में “वन्दे मातरम्” की 150वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। यह गीत बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखा गया था और यह अक्षय नवमी, 7 नवंबर 1875 के अवसर पर रचित हुआ। “वन्दे मातरम्” पहली बार उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में साहित्यिक पत्रिका बंगादर्शन में प्रकाशित हुआ। इस गीत में मातृभूमि को शक्ति, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक बताया गया है और इसने भारत के जागृत राष्ट्रभाव और आत्म-सम्मान की भावना को काव्यात्मक रूप में व्यक्त किया। जल्दी ही यह गीत देशभक्ति का एक स्थायी प्रतीक बन गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 नवंबर को नई दिल्ली में “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष स्मरण समारोह में मुख्य अतिथि होंगे

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नई दिल्ली-संस्कृति मंत्रालय 7 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” के 150 वर्षों के स्मरण समारोह का उद्घाटन करेगा। इस अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। यह आयोजन 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक पूरे देश में 150 वर्षों की इस अमर रचना के सम्मान में चलने वाले वर्ष-भर के कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ होगा।

वर्ष 2025 में “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यह राष्ट्रीय गीत बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित माना जाता है और इसे 7 नवंबर 1875 के अक्षय नवमी के अवसर पर लिखा गया था। “वंदे मातरम्” सर्वप्रथम साहित्यिक पत्रिका बंगादर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ में धारावाहिक रूप में प्रकाशित हुआ और बाद में 1882 में एक स्वतंत्र पुस्तक के रूप में सामने आया। उस समय भारत सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा था, और राष्ट्रीय पहचान व औपनिवेशिक शोषण के खिलाफ जागरूकता बढ़ रही थी।

इस गीत ने मातृभूमि को शक्ति, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक मानते हुए भारत के जाग्रत आत्म-सम्मान और एकता की भावना को काव्यात्मक रूप में प्रस्तुत किया। स्वतंत्रता संग्राम में इसका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा और 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में “जन गण मन” के समान सम्मान प्रदान किया।

समारोह की मुख्य विशेषताएँ:

  • मुख्य अतिथि के आगमन से पहले सांस्कृतिक कार्यक्रम।

  • “वंदे मातरम्” के 150 वर्षों के इतिहास पर प्रदर्शनी।

  • भारत माता को पुष्प अर्पण।

  • Vande Mataram: Naad Ekam, Roopam Anekam: सांस्कृतिक मंच पर लगभग 75 संगीतकारों द्वारा प्रस्तुत संगीत समारोह, जिसका संचालन अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वायोलिन मास्ट्रो डॉ. मंजुनाथ मैसूर करेंगे।

  • “150 Years of Vande Mataram” लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन।

  • स्मारक स्टैम्प और सिक्का का विमोचन।

  • गणमान्य व्यक्तियों और अतिथियों के संबोधन।

  • मुख्य अतिथि का मुख्य भाषण।

  • सभी नागरिकों, विद्यार्थियों, सरकारी कर्मियों, पुलिस, डॉक्टर, शिक्षक, दुकानदार और अन्य समुदायों के लोगों के साथ सामूहिक गायन।

देशभर में सामूहिक गायन:

सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश, केंद्रीय मंत्रालय/विभाग और उनके अधीनस्थ कार्यालय 7 नवंबर 2025 को सुबह 10 बजे अपने कार्यालय परिसर में सामूहिक “वंदे मातरम्” का आयोजन करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री के संबोधन का लाइव प्रसारण भी आयोजित किया जाएगा।

सक्रिय सहभागिता के लिए डिजिटल पहल:

संस्कृति मंत्रालय ने एक समर्पित अभियान वेबसाइट https://vandemataram150.in/ लॉन्च की है, जिसमें निम्नलिखित सुविधाएँ उपलब्ध होंगी:

  • अनुमोदित ब्रांडिंग सामग्री (बैनर, होर्डिंग, वेब क्रिएटिव)।

  • लघु फिल्म और curated exhibition।

  • सामूहिक गायन के लिए पूरे गीत का ऑडियो और शब्द।

  • “Vande Mataram Karaoke”: नागरिक अपने स्वर में गीत रिकॉर्ड और अपलोड कर सकेंगे।

सभी नागरिकों से आह्वान किया गया है कि वे इस अवसर पर बड़े पैमाने पर भाग लें और अपने राष्ट्रीय गीत के प्रति देशभक्ति, सम्मान और गर्व व्यक्त करें।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अक्टूबर को नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय आर्यन शिखर सम्मेलन 2025 में होंगे शामिल

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अक्टूबर को दोपहर लगभग 2:45 बजे रोहिणी, नई दिल्ली में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय आर्यन शिखर सम्मेलन 2025 (International Aryan Summit 2025) में भाग लेंगे। यह कार्यक्रम “ज्ञान ज्योति महोत्सव” का एक प्रमुख हिस्सा है, जो महर्षि दयानंद सरस्वती जी की 200वीं जयंती तथा आर्य समाज की समाज सेवा के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री सभा को संबोधित भी करेंगे।

यह शिखर सम्मेलन भारत और विदेशों में स्थित आर्य समाज की विभिन्न इकाइयों के प्रतिनिधियों को एक साथ लाएगा, जिससे महर्षि दयानंद सरस्वती के सुधारवादी विचारों की सार्वभौमिक प्रासंगिकता और आर्य समाज की वैश्विक पहुंच का प्रतीक प्रस्तुत होगा।

कार्यक्रम में “150 स्वर्णिम वर्ष सेवा के” शीर्षक से एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसमें आर्य समाज की शिक्षा, सामाजिक सुधार और आध्यात्मिक उत्थान के क्षेत्र में किए गए ऐतिहासिक योगदान को प्रदर्शित किया जाएगा।

इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य महर्षि दयानंद सरस्वती की सुधारवादी एवं शैक्षिक विरासत का सम्मान करना, शिक्षा, सामाजिक सुधार और राष्ट्रनिर्माण में आर्य समाज की 150 वर्षों की सेवा का उत्सव मनाना, तथा वैदिक सिद्धांतों और स्वदेशी मूल्यों के प्रति वैश्विक जागरूकता को प्रेरित करना है — जो विकसित भारत 2047 की दृष्टि के अनुरूप है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोजगार मेला में युवाओं को संबोधित किया, 51,000 युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से रोजगार मेला को संबोधित किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष का दीपावली उत्सव सभी के जीवन में नई रोशनी लेकर आया है। त्योहार की खुशी के साथ स्थायी नौकरियों के नियुक्ति पत्र प्राप्त करना युवाओं के लिए डबल खुशी है। आज देशभर में 51,000 से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए, जिससे उनके परिवारों में भी अत्यधिक खुशी है। प्रधानमंत्री ने सभी नए नियुक्त कर्मचारियों और उनके परिवारजनों को बधाई दी और उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि नियुक्त युवा अपने उत्साह, मेहनत और सपनों को पूरा करने की आत्म-विश्वास की भावना के साथ जब देश सेवा का जज़्बा जोड़ते हैं, तो उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि राष्ट्र के लिए जीत बन जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज की नियुक्तियाँ केवल सरकारी नौकरियाँ नहीं हैं, बल्कि देश के निर्माण में सक्रिय योगदान करने के अवसर हैं। उन्होंने नए नियुक्त कर्मचारियों से अपील की कि वे ‘नागरिक देवो भव’ के मंत्र को ध्यान में रखते हुए सेवा और समर्पण की भावना से कार्य करें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में देश विकसित भारत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने बताया कि रोजगार मेले युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने का एक सशक्त माध्यम बन गए हैं, जिसमें हाल के समय में 11 लाख से अधिक नियुक्ति पत्र वितरित किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रयास केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं हैं। सरकार ने ‘पीएम विकसित भारत रोजगार योजना’ शुरू की है, जिसका लक्ष्य 3.5 करोड़ युवाओं को रोजगार प्रदान करना है।

प्रधानमंत्री ने युवाओं के लिए एक नया पहल ‘प्रतिभा सेतु पोर्टल’ की घोषणा की, जो उन उम्मीदवारों के लिए अवसर प्रदान करता है जो UPSC की अंतिम सूची में पहुँच चुके हैं लेकिन चयनित नहीं हुए। उन्होंने कहा कि अब ये प्रतिभाशाली युवा सार्वजनिक और निजी संस्थानों के साथ जुड़कर अपने कौशल का उपयोग कर सकेंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि GST बचत उत्सव ने भी उत्सव के मौसम को और समृद्ध किया है। उन्होंने बताया कि GST में दरों में सुधार ने न केवल उपभोक्ताओं को लाभ दिया, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ाए हैं। इससे उत्पादन, आपूर्ति श्रृंखला और नई नौकरियों के सृजन में वृद्धि हुई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत वर्तमान में विश्व का सबसे युवा देश है और युवाओं की शक्ति देश की सबसे बड़ी संपत्ति है। उन्होंने बताया कि विदेश नीति और वैश्विक निवेश समझौतों में भी अब युवाओं के प्रशिक्षण, कौशल विकास और रोजगार सृजन पर ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के दौरे में दोनों देशों ने AI, फिनटेक और क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर सहमति जताई। इसी तरह, ब्राज़ील, सिंगापुर, कोरिया और कनाडा जैसे देशों के साथ निवेश साझेदारियाँ नई नौकरियाँ पैदा करेंगी और युवाओं को वैश्विक परियोजनाओं में काम करने के अवसर प्रदान करेंगी।

प्रधानमंत्री ने नए नियुक्त युवाओं से कहा कि वे विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में लगातार प्रयास करें और अपने योगदान से देश का भविष्य आकार दें। उन्होंने i-Got कर्मयोगी भारत प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करने की सलाह दी, जो लगभग 1.5 करोड़ सरकारी कर्मचारियों को प्रशिक्षण और सीखने का अवसर प्रदान करता है।

प्रधानमंत्री ने अंत में सभी नए नियुक्त कर्मचारियों को शुभकामनाएँ दी और कहा कि उनके प्रयासों के माध्यम से ही भारत का भविष्य और नागरिकों के सपनों की प्राप्ति सुनिश्चित होगी।

https://youtu.be/C6wn1JY-T7Y

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