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नई स्टडी में खुलासा: नदी जल में धातु प्रदूषण से बच्चों को वयस्कों से अधिक खतरा

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नई दिल्ली/लखनऊ- उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में बेतवा-यमुना संगम से लिए गए जल नमूनों पर आधारित एक नई स्टडी में सामने आया है कि नदी जल में मौजूद सूक्ष्म धातु (ट्रेस मेटल) प्रदूषण से बच्चों को वयस्कों की तुलना में अधिक स्वास्थ्य जोखिम है।

यह अध्ययन बिरबल साहनी पुराजीव विज्ञान संस्थान (BSIP), लखनऊ के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया, जिसमें नदी के पानी की गुणवत्ता और मानव स्वास्थ्य पर उसके प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण किया गया।

वैज्ञानिकों ने बताया कि पारंपरिक तरीके में पानी की औसत प्रदूषण स्तर को मापा जाता है, लेकिन इससे वास्तविक जोखिम का पूरा आकलन नहीं हो पाता, क्योंकि यह लोगों की उम्र, शरीर और संपर्क के स्तर पर निर्भर करता है।

अध्ययन के दौरान बेतवा-यमुना संगम क्षेत्र से अलग-अलग स्थानों और मौसमों में पानी के नमूने लिए गए और उनमें आर्सेनिक, सीसा (लेड) और कैडमियम जैसे धातुओं की मात्रा का परीक्षण किया गया।

इसके बाद वैज्ञानिकों ने ‘मोंटे कार्लो सिमुलेशन’ तकनीक का उपयोग करते हुए 10,000 संभावित परिस्थितियों का विश्लेषण किया, जिसमें पानी के सेवन, शरीर के वजन और प्रदूषण स्तर जैसे कारकों को शामिल किया गया।

स्टडी में पाया गया कि बच्चों में गैर-कैंसरजन्य जोखिम (नॉन-कार्सिनोजेनिक रिस्क) काफी अधिक है। लगभग 67% मामलों में ‘हैज़र्ड इंडेक्स’ सुरक्षित सीमा से ऊपर पाया गया। वहीं आर्सेनिक के संपर्क से कैंसर का खतरा भी गंभीर स्तर पर पाया गया।

शोध में यह भी सामने आया कि प्रदूषण के स्रोत प्राकृतिक और मानव-जनित दोनों हैं, जिनमें कृषि अपशिष्ट, औद्योगिक उत्सर्जन, शहरी सीवेज और थर्मल पावर प्लांट शामिल हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, नदियों के संगम क्षेत्रों में दो अलग-अलग जल धाराओं के मिलने से प्रदूषण का स्तर और अधिक बढ़ जाता है, जिससे धातुओं का संचरण और जोखिम दोनों बढ़ जाते हैं।

यह अध्ययन नदी स्वास्थ्य आकलन के लिए एक नया और प्रभावी तरीका प्रस्तुत करता है और जल सुरक्षा नीति, प्रदूषण नियंत्रण तथा जोखिम प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है। वैज्ञानिकों ने बेतवा-यमुना संगम क्षेत्र में भारी धातुओं के नियंत्रण के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

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केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज दिल्ली-एनसीआर में गंभीर वायु प्रदूषण की स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली (एनसीटी), हरियाणा और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों तथा संबंधित नगर निकायों की कार्ययोजनाओं की विस्तृत समीक्षा हेतु एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। यह इस श्रृंखला की चौथी समीक्षा बैठक थी, जो 03.12.2025 को हुई पिछली बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुसार निर्धारित मापदंडों पर आयोजित की गई। बैठक में केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह भी उपस्थित रहे।

दिल्ली-एनसीआर में लगातार खराब वायु गुणवत्ता पर चिंता व्यक्त करते हुए यादव ने घोषणा की कि जनवरी 2026 से कार्ययोजनाओं की समीक्षा मंत्री स्तर पर हर माह की जाएगी। उन्होंने राज्यों को निर्देश दिया कि भविष्य की प्रस्तुतियों में अपने-अपने एनसीआर शहरों की कार्ययोजनाओं का एकीकृत प्रस्तुतीकरण करें। साथ ही, कार्यान्वयन से जुड़ी अड़चनों को दूर करने के लिए उच्चस्तरीय अंतर-राज्य समन्वय बैठकों का आश्वासन दिया।

मंत्री ने राज्यों और नगर निकायों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण हेतु उठाए गए कदमों की समीक्षा करते हुए कहा कि वायु गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार दिखने तक इन प्रयासों की गति बनी रहनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, लेकिन आम जनता को अनावश्यक असुविधा न हो। चिन्हित समस्याओं पर सुधारात्मक कार्रवाई करते हुए 15 दिनों में पुनः समीक्षा की जाएगी।

बैठक में 62 चिन्हित ट्रैफिक जाम स्थलों पर सुचारू यातायात प्रबंधन, कॉरपोरेट्स और औद्योगिक इकाइयों द्वारा ईवी/सीएनजी बसों के उपयोग को बढ़ावा, तथा कार्यालयों, मॉल और व्यावसायिक परिसरों के लिए चरणबद्ध समय व्यवस्था पर जोर दिया गया। गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा को इंटीग्रेटेड स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के त्वरित क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए।

मंत्री ने मेट्रो की अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुधारने, 10 दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाने, गड्ढामुक्त सड़कों के लिए वार्षिक रखरखाव अनुबंध सुनिश्चित करने और मानसून से होने वाले नुकसान को रोकने हेतु उचित जलनिकासी के निर्देश दिए। निर्माण एवं ध्वस्तीकरण (C&D) कचरे, धूल नियंत्रण, जैव-ईंधन जलाने पर रोक और उच्च प्रदूषण अवधि में निर्माण प्रतिबंध के सख्त पालन पर भी बल दिया गया।

हरियाणा को पराली प्रबंधन मशीनों के उपयोग, धान के अवशेषों के निपटान, तथा पेलेटाइजेशन, सीबीजी और इथेनॉल संयंत्रों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। अवैध टायर जलाने वाली इकाइयों और प्रदूषणकारी उद्योगों को सील करने, सभी प्रदूषणकारी इकाइयों में ऑनलाइन निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) लगाने और 31 दिसंबर की समयसीमा सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए गए।

इसके अलावा, दिल्ली वन विभाग के साथ मिलकर विश्व पर्यावरण दिवस 2026 पर 11 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया। एनएचएआई को टोल प्लाजा पर जाम कम करने और एएनपीआर प्रणालियों को मजबूत करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में मंत्रालयों, राज्य सरकारों, सीएक्यूएम, डीएमआरसी, नगर निगमों, पुलिस, एनएचएआई, सीपीसीबी, एसपीसीबी और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

दिल्ली में CAQM का सड़क निरीक्षण अभियान: 136 सड़क खंडों में धूल, कचरा और खुले में जलाने की खामियां उजागर

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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उससे सटे क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 12.12.2025 को सड़क निरीक्षण अभियान के तहत 19 टीमों को तैनात किया। इस अभियान के दौरान दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के अधिकार क्षेत्र में आने वाले दिल्ली के कुल 136 सड़क खंडों का निरीक्षण किया गया। यह कार्रवाई लागू GRAP (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) के अंतर्गत आयोग की सतत निगरानी और प्रवर्तन प्रयासों का हिस्सा थी।

इस विशेष अभियान का उद्देश्य सड़कों पर दिखाई देने वाली धूल, नगर निगम ठोस कचरा (MSW) तथा निर्माण एवं विध्वंस (C&D) अपशिष्ट के जमाव का आकलन करना था। साथ ही, इन सड़क खंडों पर MSW/बायोमास के खुले में जलाने की घटनाओं की भी जांच की गई। तैनात टीमों में CAQM की फ्लाइंग स्क्वॉड्स और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के अधिकारी शामिल थे।

निरीक्षण के दौरान जियो-टैग्ड और समय-स्टैम्प की गई तस्वीरें एकत्र कर समेकित निरीक्षण रिपोर्ट के रूप में आयोग को प्रस्तुत की गईं। संकलित आंकड़ों के अनुसार, 15 सड़क खंडों पर उच्च स्तर की दिखाई देने वाली धूल पाई गई, 38 पर मध्यम स्तर की धूल, 61 पर कम धूल और 22 सड़क खंडों पर कोई दृश्य धूल नहीं पाई गई। MSW और C&D अपशिष्ट के जमाव की सूचना क्रमशः 55 और 53 सड़क खंडों पर मिली। वहीं, 6 सड़क खंडों पर MSW/बायोमास जलाने के प्रमाण पाए गए।

इन अवलोकनों से संबंधित सड़क खंडों के रखरखाव में स्पष्ट कमियां और बार-बार की जा रही लापरवाही सामने आई है। इससे यह आवश्यकता रेखांकित हुई कि DDA को अपनी परिचालन दक्षता बढ़ानी होगी और निरंतर एवं समयबद्ध धूल नियंत्रण उपायों के माध्यम से त्वरित सुधारात्मक कदम उठाने होंगे। साथ ही, MSW/बायोमास के खुले में जलाने की रोकथाम के लिए सभी सड़क खंडों पर बेहतर अनुपालन सुनिश्चित करना भी आवश्यक बताया गया।

आयोग ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं दिल्ली में कणीय पदार्थ (पार्टिकुलेट मैटर) के स्तर को प्रभावित करती हैं। इसलिए जमीनी स्तर पर मजबूत कार्रवाई की आवश्यकता है, जिसमें नियमित यांत्रिक सफाई, एकत्रित धूल का समय पर निपटान, सड़क किनारों और मध्य विभाजकों का रखरखाव, जल छिड़काव/धूल-दमन प्रणालियों की तैनाती तथा खुले में जलाने की घटनाओं की रोकथाम के लिए लक्षित कार्रवाई शामिल है, विशेषकर DDA द्वारा अनुरक्षित सभी सड़क खंडों पर।

आयोग ने दोहराया कि ‘ऑपरेशन क्लीन एयर’ के तहत इस प्रकार के लक्षित निरीक्षण अभियान आगे भी जारी रहेंगे, ताकि धूल नियंत्रण और MSW/बायोमास के खुले में जलाने की रोकथाम संबंधी इसके वैधानिक निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके। इसका उद्देश्य दिल्ली भर की सड़कें साफ, धूल और खुले में जलाने से मुक्त तथा नियामक प्रावधानों के अनुरूप बनाए रखना है।

एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए जीआरएपी में संशोधन: सीएक्यूएम ने किए महत्वपूर्ण बदलाव

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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 21.11.2025 को पूरे एनसीआर के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) में संशोधन किया है।

GRAP पूरे एनसीआर के लिए एक आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली है, जो दिल्ली में औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) स्तर और मौसम/मौसमी परिस्थितियों के पूर्वानुमान पर आधारित है। यह एनसीआर में कई हितधारकों, कार्यान्वयन एजेंसियों और प्राधिकरणों को क्षेत्र में वायु गुणवत्ता के बिगड़ने की स्थिति से निपटने के लिए एक साथ लाता है। एनसीआर के लिए GRAP वैज्ञानिक आंकड़ों, हितधारकों से परामर्श, विशेषज्ञ सिफारिशों, और पिछले वर्षों के मैदानी अनुभवों एवं सीखों के आधार पर तैयार किया गया है।

आयोग ने 20.11.2025 को अपनी GRAP उप-समिति के माध्यम से संबंधित हितधारकों के साथ प्रस्तावित संशोधनों पर विस्तृत चर्चा की और GRAP अनुसूची में निम्नलिखित प्रमुख संशोधन करने पर सहमति व्यक्त की:

A. GRAP स्टेज-II में शामिल निम्नलिखित प्रावधान अब स्टेज-I में शामिल किए जाएंगे:

स्टेज-I – ‘खराब’ वायु गुणवत्ता

(दिल्ली AQI: 201–300)

  • निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करें ताकि वैकल्पिक बिजली उत्पादन सेट/उपकरण (जैसे DG सेट आदि) के उपयोग को हतोत्साहित किया जा सके।

  • ट्रैफिक मूवमेंट को सिंक्रोनाइज़ करें और ट्रैफिक जाम बिंदुओं पर पर्याप्त कर्मियों की तैनाती करें ताकि यातायात सुचारू रहे।

  • लोगों को वायु प्रदूषण के स्तर और प्रदूषण कम करने के लिए अपनाए जाने वाले उपायों (Do’s & Don’ts) के बारे में जागरूक करने हेतु अखबारों, टीवी, रेडियो आदि पर अलर्ट जारी करें।

  • सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को CNG/इलेक्ट्रिक बसों और मेट्रो सेवाओं की अतिरिक्त फ्लीट एवं बढ़ी हुई फ्रीक्वेंसी के साथ बढ़ाया जाए। ऑफ-पीक यात्रा को प्रोत्साहित करने हेतु किरायों में अंतर लाया जाए।

B. GRAP स्टेज-III में मौजूद निम्न प्रावधान अब स्टेज-II में शामिल किए जाएंगे:

स्टेज-II – ‘बहुत खराब’ वायु गुणवत्ता

(दिल्ली AQI: 301–400)

  1. दिल्ली सरकार (GNCTD) और एनसीआर की राज्य सरकारें—दिल्ली तथा गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर जिलों में—सार्वजनिक कार्यालयों और नगरपालिकाओं के समय में बदलाव (staggering of timings) लागू करें।

  2. एनसीआर के अन्य क्षेत्रों में राज्य सरकारें अपने अनुसार निर्णय ले सकती हैं।

  • केंद्र सरकार दिल्ली-एनसीआर में अपने कार्यालयों के समय में बदलाव के संबंध में निर्णय ले सकती है।

C. GRAP स्टेज-IV के निम्नलिखित प्रावधान अब स्टेज-III में शामिल किए जाएंगे:

स्टेज-III – ‘गंभीर’ वायु गुणवत्ता

(दिल्ली AQI: 401–450)

  • एनसीआर राज्य सरकारें/दिल्ली सरकार निर्णय लें कि सार्वजनिक, नगरपालिका एवं निजी कार्यालय 50% क्षमता के साथ कार्य करें, जबकि शेष कर्मचारी घर से कार्य करें।

  • केंद्र सरकार भी अपने कर्मचारियों के लिए "वर्क फ्रॉम होम" की अनुमति के संबंध में उपयुक्त निर्णय ले सकती है।

उपरोक्त संशोधन GRAP (नवंबर 2025) में किए गए मुख्य परिवर्तन हैं। GRAP का पूरा विवरण आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है: caqm.nic.in

इसके अतिरिक्त, एनसीआर में GRAP लागू करने के लिए जिम्मेदार सभी एजेंसियों को संशोधित GRAP अनुसूची में किए गए परिवर्तनों पर ध्यान देने और तुरंत प्रभाव से इन्हें लागू करने का निर्देश दिया गया है।


स्वच्छ गंगा मिशन को गति: राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की 67वीं कार्यकारी समिति में बड़े शोध व प्रदूषण नियंत्रक प्रोजेक्ट्स को मंजूरी

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राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) की 67वीं कार्यकारी समिति (EC) की बैठक का आयोजन महानिदेशक राजीव कुमार मितल की अध्यक्षता में किया गया। बैठक में गंगा नदी के पुनर्जीवन, प्रदूषण नियंत्रण, वैज्ञानिक शोध, यमुना नदी के संरक्षण और दिल्ली के स्कूलों में जन-जागरूकता को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

बैठक में डब्ल्यूआर मंत्रालय, एनएमसीजी और विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

वैज्ञानिक शोध आधारित नदी संरक्षण पर जोर

EC ने कई बड़े शोध परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिनका उद्देश्य गंगा बेसिन में वैज्ञानिक समझ को मजबूत कर डेटा-आधारित योजना को बढ़ावा देना है। मंजूर परियोजनाओं में शामिल हैं—

  • हिमालयी गंगा हेडस्ट्रीम ग्लेशियरों की मॉनिटरिंग

  • गंगा का डिजिटल ट्विन विकसित करना

  • 1,100 किमी में SONAR आधारित नदी तल सर्वे (बिजनौर से बलिया तक)

  • पुरातन पेलियो-चैनल्स के जरिए ग्राउंडवॉटर रिचार्ज

  • ऐतिहासिक मानचित्रों का डिजिटाइजेशन और जियोस्पेशल डेटाबेस

ये परियोजनाएँ AI, रिमोट सेंसिंग और हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग को river basin प्रबंधन में जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

पश्चिम बंगाल में बड़ा शहरी प्रदूषण नियंत्रण प्रोजेक्ट मंजूर

सिलीगुड़ी में महाआनंदा नदी के प्रदूषण नियंत्रण के लिए ₹361.86 करोड़ की परियोजना को मंजूरी:

  • 25 इंटरसेप्शन एवं डायवर्ज़न संरचनाएँ

  • 4 लिफ्टिंग स्टेशन

  • 27 MLD और 22 MLD क्षमता के दो STP

  • HAM आधारित PPP मॉडल पर क्रियान्वयन

इससे शहरी स्वच्छता में व्यापक सुधार होगा और नदी में प्रदूषण भार कम होगा।


यमुना के लिए कोरोनेशन पिलर STP से सुरक्षित निस्तारण

EC ने दिल्ली के कोरोनेशन पिलर STP से उपचारित अपशिष्ट जल को सुरक्षित रूप से यमुना नदी तक ले जाने की परियोजना को मंजूरी दी। परियोजना में शामिल होंगे—

  • जहांगिरपुरी ड्रेन से अवैध सीवेज टैपिंग

  • नए पंपिंग स्टेशन

  • राइजिंग मेन और RCC चैनल

  • ट्रस ब्रिज

  • ट्रिटेड वाटर की सुरक्षित डिलीवरी

यह यमुना एक्शन प्लान को मजबूत करेगा।

 "यूथ फॉर गंगा–यमुना" पहल को मंजूरी

₹39.37 लाख की इस परियोजना के तहत—

  • दिल्ली–NCR के 200+ स्कूलों में 2.5 लाख से अधिक बच्चों को जागरूक किया जाएगा

  • "रिवर यूथ क्लब" बनाए जाएंगे

  • जल संरक्षण पर व्यवहारिक परिवर्तन को बढ़ावा दिया जाएगा



निष्कर्ष

इन सभी अनुमोदनों के साथ, EC ने—

  • नदी संरक्षण को वैज्ञानिक शोध आधारित दिशा

  • प्रदूषण नियंत्रण को मजबूत आधार

  • जल प्रबंधन प्रणाली में सुधार

  • युवा जागरूकता को नया आयाम

प्रदान किया है।
यह गंगा और यमुना दोनों की पुनर्जीवन पहलों को गति देने वाला महत्वपूर्ण कदम है।

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक

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आज नई दिल्ली में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण की समीक्षा के लिए आयोजित उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सभी संबंधित राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की प्राधिकरणों को अपने-अपने क्षेत्रों में वायु प्रदूषण प्रबंधन से संबंधित किए गए ठोस कार्यों की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। यह दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण के उपायों की समीक्षा के लिए आयोजित चौथी बैठक थी। इस बैठक में दिल्ली सरकार के पर्यावरण, वन और वन्यजीव मंत्री सरदार मंजींदर सिंह सिरसा भी उपस्थित थे।

बैठक के दौरान  भूपेंद्र यादव ने फसल अवशेष प्रबंधन (Crop Residue Management) के लिए जिला-वार योजना तैयार करने और पराली जलाने के मामलों की सालभर निगरानी करने का निर्देश दिया। उन्होंने जिला अधिकारियों से कहा कि वे किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के संचालन के लिए प्रशिक्षित करें और इन मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करें।

 भूपेंद्र यादव ने नगर ठोस अपशिष्ट (Municipal Solid Waste – MSW) के खुले में जलाने के खिलाफ शून्य-सहनशीलता (Zero-Tolerance) अपनाने पर बल दिया और एनसीआर के नगर निकायों से कहा कि वे लेगेसी वेस्ट मैनेजमेंट (Legacy Waste Management) में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए ठोस समयसीमा तय करें और इसके शीघ्र निपटान को सुनिश्चित करें। उन्होंने विभिन्न नगर निगमों से अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने की अपील की।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि दिल्ली-एनसीआर की “रेड कैटेगरी” उद्योगों में ऑनलाइन कंटीन्यूस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) और एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइसेस (APCD) की स्थापना मिशन मोड में की जानी चाहिए। सड़कों की धूल को कम करने के लिए उन्होंने शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में सड़कों के पुनर्विकास योजनाओं की समीक्षा की और गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निर्माण कार्य सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

 भूपेंद्र यादव ने निर्माण और ध्वंस (Construction & Demolition – C&D) अपशिष्ट के प्रभावी प्रबंधन पर बल देते हुए सरकारी एवं निजी क्षेत्र दोनों को सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने सड़क किनारे हरियाली (Roadside Greening) के कार्यों को मिशन मोड में संचालित करने और नगर निगमों को वन विभागों के सहयोग से नर्सरी विकसित करने का सुझाव दिया, ताकि अधिकाधिक पौधरोपण कर क्षेत्र के हरित आवरण को बढ़ाया जा सके।

इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली ट्रैफिक पुलिस से यातायात जाम के हॉटस्पॉट्स के लिए ट्रैफिक प्रबंधन योजना तैयार करने और इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) को शीघ्र लागू करने का आग्रह किया, जिससे वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके।

भूपेंद्र  यादव ने सभी हितधारकों, जिनमें नागरिक भी शामिल हैं, के साथ समन्वित प्रयासों के माध्यम से क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। इस बैठक में सीएक्यूएम (CAQM), सीपीसीबी (CPCB), दिल्ली, हरियाणा, पंजाब की राज्य सरकारों, एनसीआर नगर निगमों के आयुक्तों और अन्य संबंधित एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

दिल्ली में वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में, GRAP Stage-II लागू — नागरिकों और एजेंसियों को सख्त निर्देश

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आज, दिल्ली में औसत दैनिक वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 296, यानी ‘खराब’ श्रेणी दर्ज की गई, जैसा कि सेंट्रल पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) द्वारा जारी दैनिक AQI बुलेटिन में बताया गया। शाम 6 बजे दिल्ली का घंटा औसत AQI 300 और 7 बजे 302 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। इसके बाद, ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) की उप-समिति ने मौजूदा वायु गुणवत्ता स्थिति और मौसम/मौसमी हालात की समीक्षा के लिए तुरंत बैठक बुलाई।

GRAP Stage-II लागू करने का निर्णय:

CAQM की उप-समिति ने IMD और IITM से उपलब्ध वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान और मौसम संबंधी जानकारी के आधार पर निर्णय लिया कि NCR में Stage-II के 12-बिंदु कार्य योजना को तुरंत लागू किया जाए, ताकि वायु गुणवत्ता में और गिरावट को रोका जा सके।

Stage-II के तहत लागू किए जाने वाले मुख्य उपाय:

नागरिकों के लिए निर्देश:

  • सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें और निजी वाहनों का उपयोग कम करें।

  • ट्रैफिक कम congested मार्ग चुनें, भले ही रास्ता लंबा हो।

  • अपने वाहनों के एयर फिल्टर नियमित अंतराल पर बदलें।

  • अक्टूबर से जनवरी तक धूल उत्पन्न करने वाले निर्माण कार्यों से बचें।

  • ठोस कचरा और बायोमास का खुले में जलाना न करें।

Stage-II के 12-बिंदु उपाय (एजेंसियों के लिए):

  1. चिन्हित सड़कों पर मैकेनिकल/वै큼 स्वीपिंग और जल छिड़काव दैनिक रूप से करें। मशीनों के शिफ्ट/घंटों को बढ़ाएँ।

  2. प्रमुख ट्रैफिक हॉटस्पॉट्स पर धूल नियंत्रण और जल छिड़काव सुनिश्चित करें।

  3. C&D साइटों पर धूल नियंत्रण उपायों की कड़ी निगरानी।

  4. NCR के सभी हॉटस्पॉट्स में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए लक्षित कार्रवाई।

  5. अविरत विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कर DG सेट्स के प्रयोग को कम करना।

  6. DG सेट्स के नियमन का पालन, जिसमें आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर विशेष दिशा-निर्देश लागू।

  7. ट्रैफिक संचालन समन्वय और जाम वाले पॉइंट्स पर पर्याप्त कर्मियों की तैनाती।

  8. समाचार, टीवी, रेडियो में जनजागरूकता अभियान।

  9. पार्किंग शुल्क बढ़ाकर निजी वाहन कम करें।

  10. सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में वृद्धि (CNG/इलेक्ट्रिक बसें, मेट्रो) और समयावधि बढ़ाएँ।

  11. Resident Welfare Associations अपने कर्मचारियों को इलेक्ट्रिक हीटर उपलब्ध कराएँ ताकि बायोमास/एमएसडब्ल्यू जलाने से बचा जा सके।

  12. NCR राज्यों से डिज़ल/EV/ CNG बसों को ही दिल्ली प्रवेश की अनुमति, अन्य बसों पर रोक।

CAQM स्थिति की निगरानी लगातार कर रहा है और आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता पर नियमित समीक्षा करेगा।



केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) का 51वां स्थापना दिवस नई दिल्ली में आयोजित

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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने 22 सितंबर, 2025 को नई दिल्ली स्थित पर्यवेश भवन में अपना 51वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में मंत्री यादव ने CPCB की पिछले पाँच दशकों की उपलब्धियों की सराहना की और कहा कि CPCB ने देश में अपनी विश्वसनीय पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि भारत जब 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर है, तब पर्यावरणीय नियम और मानक भी ऐसे होने चाहिए जो अर्थव्यवस्था और पर्यावरण में संतुलन स्थापित करें। इसके लिए उन्होंने स्वच्छ और कम प्रदूषणकारी तकनीक विकसित करने, IITs और अनुसंधान संस्थानों से सहयोग बढ़ाने तथा क्षमता निर्माण पर जोर दिया।

इस अवसर पर:

  • CPCB की नई इमारत की आधारशिला रखी गई।

  • पुणे व शिलांग में दो नई अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का उद्घाटन किया गया।

  • SAMEER ऐप 2.0 लॉन्च किया गया, जिसमें नागरिकों के लिए नई डिजिटल सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

  • CPCB में 13 नए कर्मियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए।

  • तकनीकी रिपोर्ट ‘प्रदूषित नदी खंडों का वर्गीकरण, 2025’ और एक मैनुअल जारी किया गया।

कार्यक्रम में मंत्रालय और CPCB के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के प्रतिनिधि, उद्योग संगठनों, शिक्षाविदों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, मीडिया और नागरिक समाज से जुड़े लोग शामिल हुए।



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