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नवा रायपुर में PGTI गोल्फ का रोमांच, खलीन जोशी ने जीता पहला Nava Raipur Open 2026

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नवा रायपुर- छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में आयोजित SECL Presents Nava Raipur Open 2026 ने प्रदेश में प्रोफेशनल गोल्फ की बढ़ती पहचान को एक बार फिर सामने रखा। DP World Professional Golf Tour of India (PGTI) के इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का आयोजन 15 से 18 सितंबर तक Fairway Golf & Lake Resort में किया गया। टूर्नामेंट में कुल 1 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि रखी गई थी। 

खलीन जोशी ने जीता खिताब

टूर्नामेंट का खिताब बेंगलुरु के 34 वर्षीय गोल्फर खलीन जोशी ने अपने नाम किया। उन्होंने चार राउंड में कुल 13-अंडर 123 का स्कोर दर्ज किया और एक स्ट्रोक के अंतर से जीत हासिल की। PGTI के अनुसार, यह 2026 सीजन में जोशी का तीसरा खिताब और उनके करियर का नौवां PGTI खिताब रहा। 

जोशी ने चार राउंड में क्रमशः 29, 30, 33 और 31 का स्कोर बनाया। अंतिम राउंड में उन्होंने बोगी-फ्री प्रदर्शन करते हुए तीन अंडर 31 का स्कोर किया। इस जीत के साथ उन्हें 15 लाख रुपये की पुरस्कार राशि मिली और DP World India Championship की रेस में उनकी रैंकिंग भी 12वें से बढ़कर सातवें स्थान पर पहुंच गई। 

बारिश ने बदला टूर्नामेंट का फॉर्मेट

इस टूर्नामेंट की सबसे खास बात इसका बदला हुआ फॉर्मेट रहा। लगातार बारिश और जलभराव के कारण गोल्फ कोर्स पर सामान्य 18-होल राउंड कराना संभव नहीं था। इसके चलते टूर्नामेंट कमेटी ने सभी चार राउंड को 9-9 होल तक सीमित कर दिया और मुकाबले बैक नाइन पर कराए गए।

इसके बावजूद खिलाड़ियों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में शानदार प्रदर्शन किया। खलीन जोशी ने परिस्थितियों के अनुरूप अपने खेल को संभालते हुए लगातार बेहतर प्रदर्शन किया और अंततः खिताब अपने नाम किया।

एक स्ट्रोक के अंतर से रहा रोमांचक मुकाबला

फाइनल परिणाम में खलीन जोशी 13-अंडर 123 के साथ पहले स्थान पर रहे। उनके पीछे अनशुल पटेल, रौनिल कुकर और ओम प्रकाश चौहान 12-अंडर के स्कोर के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रहे। इससे मुकाबले की कड़ी प्रतिस्पर्धा का अंदाजा लगाया जा सकता है।

नवा रायपुर में दूसरी बार PGTI आयोजन

नवा रायपुर में वर्ष 2026 में यह PGTI का दूसरा आयोजन था। टूर्नामेंट में 132 प्रोफेशनल गोल्फर, जिनमें 18 विदेशी खिलाड़ी भी शामिल थे, हिस्सा लेने वाले थे। आयोजन को छत्तीसगढ़ सरकार का समर्थन मिला और इसका उद्देश्य प्रदेश में गोल्फ के साथ-साथ खेल पर्यटन तथा स्थानीय पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी और कारोबार की संभावनाओं को बढ़ावा देना भी रहा।

CM विष्णु देव साय और कपिल देव ने किया था उद्घाटन

Nava Raipur Open 2026 का उद्घाटन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और DP World PGTI के अध्यक्ष एवं पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान कपिल देव ने किया था। उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा था कि नवा रायपुर में ऐसे प्रोफेशनल गोल्फ टूर्नामेंट आयोजित होने से बाहरी खिलाड़ियों और दर्शकों का आगमन बढ़ सकता है तथा युवाओं को गोल्फ के प्रति प्रोत्साहित करने के साथ पर्यटन और स्थानीय व्यवसायों के लिए भी अवसर बन सकते हैं। 

खेल पर्यटन के लिहाज से नवा रायपुर के लिए महत्वपूर्ण आयोजन

नवा रायपुर में PGTI जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रोफेशनल टूर्नामेंट का आयोजन छत्तीसगढ़ के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर और गोल्फ कोर्स को राष्ट्रीय गोल्फ सर्किट के मंच पर प्रदर्शित करता है। टूर्नामेंट के जरिए नवा रायपुर को एक संभावित स्पोर्ट्स और गोल्फ टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में भी प्रस्तुत किया गया है। 

कुल मिलाकर, Nava Raipur Open 2026 का समापन खलीन जोशी की जीत के साथ हुआ। लगातार बारिश के कारण टूर्नामेंट का फॉर्मेट भले ही असामान्य रहा, लेकिन खिलाड़ियों के प्रदर्शन और रोमांच ने प्रतियोगिता को खास बना दिया। नवा रायपुर में PGTI आयोजन की निरंतरता छत्तीसगढ़ में प्रोफेशनल गोल्फ और खेल पर्यटन को लेकर बढ़ती गतिविधियों को भी रेखांकित करती है।


नवा रायपुर में राज्य निर्वाचन आयुक्तों के 32वें अखिल भारतीय सम्मेलन का राज्यपाल रामेन डेका ने किया शुभारंभ

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Chhattisgarh Local Body Election Year Book- 2026 का किया विमोचन

रायपुर- छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने बताया कि हर वर्ष अलग-अलग राज्यों में होने वाले राज्य निर्वाचन आयुक्तगणों के सम्मेलन के क्रम में 32वां सम्मेलन इस वर्ष 16-17 सितम्बर को छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर अटल नगर में हो रहा है। इस सम्मेलन का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा किया जा रहा है।

सम्मेलन का शुभारंभ आज माननीय राज्यपाल द्वारा किया गया। सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर मेजबान छत्तीसगढ़ के निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह, राज्य निर्वाचन आयुक्तगण की स्थाई समिति के अध्यक्ष विजय देव एवं संयोजक सुधांशु पांडे तथा प्रदेश के मुख्य सचिव विकासशील उपस्थित रहे। शुभारंभ सहारोह के इस विशेष अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने छत्तीसगढ़ स्थानीय निकाय निर्वाचन वार्षिकी 2026 Year Book के प्रथम संस्करण का विमोचन भी किया।

उद्घाटन उपरांत आज सम्मेलन में देशभर से विभिन्न राज्यों के पधारे राज्य निर्वाचन आयुक्तगण ने स्थानीय लोकतंत्र विशेषकर त्रिस्तरीय पंचायतों व नगरीय निकायों को और अधिक सशक्त, पारदर्शी, समावेशी, विश्वसनीय एवं सहभागी बनाने हेतु निर्वाचन के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया एवं कॉन्फ्रेंस में अलग-अलग राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्तगण और विषय-विशेषज्ञों के द्वारा प्रस्तुतीकरण दिया ।

सम्मेलन के दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्तगण द्वारा स्थानीय निकाय निर्वाचन के संचालन में सामने आने वाली चुनौतियों, अनुभवों और नवाचारों को साझा करने के क्रम में छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा "राज्य गठन उपरांत नक्सल प्रभावित बस्तर में पिछले 25 वर्षों में स्थानीय लोकतंत्र की प्रगति" विषय पर छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह के निर्देशन में तैयार प्रस्तुति आयोग की सचिव  शिखा राजपूत तिवारी द्वारा प्रस्तुत की गई।

बस्तर में स्थानीय लोकतंत्र की यात्रा को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। भौगोलिक दुर्गमता, विस्तृत वन क्षेत्र, सीमित संचार सुविधाओं तथा लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित बस्तर संभाग की परिस्थितियों के बीच स्थानीय निर्वाचन कराना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं लोकतांत्रिक चुनौती रहा है। छत्तीसगढ़ में स्थानीय निकायों के निर्वाचन के अनुभवों को साझा करते हुए बताया गया कि प्रशासन, पुलिस, सुरक्षा बल, निर्वाचन कर्मियों तथा स्थानीय समुदाय के समन्वित प्रयासों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को निरंतर सुदृढ़ किया गया है। वर्ष 2025 में नगरीय निकायों एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के निर्वाचन एक साथ राज्यभर में, बस्तर संभाग सहित, शांतिपूर्वक एवं सफलतापूर्वक संपन्न कराने तथा पुनर्मतदान की आवश्यकता न पड़ने का उल्लेख किया गया।

मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान एवं केरलम की ओर से सूचना प्रोद्योगिकी के उपयोग के संबंध में 'EVM sharing tracking policy and it's challenges and EMS SOFTWARE' 'Panchayat Delimitation 2026: Transforming Delimitation through Technology A New Era of Paperless Delimitation', 'Digitalising Elections in India', 'Re-engineering elections in the Digital Era: The Kerala Story' विषयों पर प्रस्तुतियां दी गई।

सम्मेलन में लोकतांत्रिक निर्वाचन विषय से जुड़े प्रिंसटन यूनिवर्सिटी न्यू जर्सी अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विषय विशेषज्ञ ने भी हिस्सा लिया और उन्होंने भारत के राज्यों में होने वाले स्थानीय निर्वाचनों का तुलनात्मक एवं समेकित अध्ययन का सार प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रस्तुत किया। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, हैदराबाद एवं भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड, बेंगलूरु के ईलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन के विषय विशेषज्ञ ने भी सम्मेलन में अपने संस्थानों की अद्यतन जानकारी प्रस्तुत करते हुए बताया कि निर्वाचन में उपयोग होने वाली इलेक्ट्रानिक वोति वोटिंग मशीन हर प्रकार से सुरक्षित है और इसमें लगातार नवाचार करते हुए राज्य निर्वाचन आयोगों के अनुकूल इसका विकास एवं उत्पादन किया जा रहा है।

नवा रायपुर में सजेगा गोल्फ का बड़ा मंच, 15 सितंबर से शुरू होगा Nava Raipur Open 2026

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नवा रायपुर- छत्तीसगढ़ में गोल्फ प्रेमियों के लिए सितंबर का महीना खास होने जा रहा है। नवा रायपुर में 15 से 18 सितंबर 2026 तक प्रतिष्ठित Nava Raipur Open 2026 गोल्फ टूर्नामेंट का आयोजन किया जाएगा। चार दिवसीय इस प्रतियोगिता में देशभर के 132 प्रोफेशनल गोल्फर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

टूर्नामेंट की कुल पुरस्कार राशि ₹1 करोड़ रखी गई है, जिससे प्रतियोगिता को लेकर खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में खासा उत्साह है। नवा रायपुर में आयोजित होने वाला यह टूर्नामेंट प्रदेश में गोल्फ को नई पहचान देने और राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ को खेल के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

कपिल देव होंगे खास आकर्षण

टूर्नामेंट के लॉन्च कार्यक्रम में भारतीय क्रिकेट के दिग्गज कपिल देव भी शामिल होंगे। उनके जुड़ने से आयोजन को लेकर उत्साह और बढ़ गया है। खेल जगत की बड़ी हस्ती की मौजूदगी नवा रायपुर में होने वाले इस आयोजन को खास आकर्षण देगी।

चार दिन तक चलेगा रोमांच

15 से 18 सितंबर तक चलने वाले Nava Raipur Open 2026 में देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रोफेशनल गोल्फर खिताब और बड़ी पुरस्कार राशि के लिए मुकाबला करेंगे। प्रतियोगिता के दौरान दर्शकों को उच्च स्तर के गोल्फ मुकाबले देखने का अवसर मिलेगा।

नवा रायपुर में इस बड़े आयोजन से प्रदेश में स्पोर्ट्स टूरिज्म, गोल्फ संस्कृति और खेल अधोसंरचना को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आयोजन को लेकर खेल जगत की नजरें अब नवा रायपुर पर टिक गई हैं।

नवा रायपुर में खुलेगा NMIMS का नया कैंपस, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को मिलेगी नई पहचान

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ने जा रही है। देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल नरसी मोनजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (NMIMS) नवा रायपुर अटल नगर में अपना नया कैंपस स्थापित करने जा रहा है। इसके लिए जमीन का पंजीयन पूरा हो चुका है, जिससे प्रदेश में संस्थान की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है।

NMIMS के नए कैंपस के शुरू होने से नवा रायपुर को शिक्षा और प्रबंधन अध्ययन के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा के लिए दूसरे बड़े शहरों का रुख करने की जरूरत कम होगी और उन्हें प्रदेश में ही प्रतिष्ठित संस्थान में अध्ययन के अवसर मिल सकेंगे।

शिक्षा के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे

नवा रायपुर में NMIMS कैंपस की स्थापना से उच्च शिक्षा के साथ-साथ रोजगार और कौशल विकास के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। संस्थान के आने से विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों की गतिविधियां बढ़ेंगी। इससे नवा रायपुर की शैक्षणिक और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

नवा रायपुर के विकास को मिलेगा नया आयाम

नवा रायपुर अटल नगर को आधुनिक सुविधाओं और संस्थागत विकास के साथ एक प्रमुख शैक्षणिक एवं व्यावसायिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। NMIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की मौजूदगी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

कैंपस के संचालन के बाद प्रबंधन, व्यवसाय और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर मिलने की उम्मीद है। साथ ही, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग को भी बढ़ावा मिल सकता है।

NMIMS का नवा रायपुर कैंपस छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के नए रास्ते खोलने के साथ ही राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर एक उभरते हुए शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

सेना के सम्मान में राखी का धागा, नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर विद्यार्थियों ने लिखे भावपूर्ण संदेश

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रायपुर- रक्षाबंधन के पावन अवसर पर नवा रायपुर अटल नगर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, राखी में भारतीय सेना के जवानों के सम्मान और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए भावनात्मक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। COSA Army के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय सेना के अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों एवं अन्य रैंक सहित कुल 72 सैन्यकर्मियों ने सहभागिता की।

बहनों ने बांधी राखी, जवानों को दिया सम्मान और विश्वास का संदेश

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की छात्राओं ने सैन्यकर्मियों की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। छात्राओं ने देश की सीमाओं की रक्षा में दिन-रात समर्पित जवानों के प्रति सम्मान, स्नेह और आभार व्यक्त किया। राखी के इस पवित्र धागे ने सैनिकों और विद्यार्थियों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को और मजबूत किया।

नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर देश के रक्षकों के नाम लिखी भावनाएं

कार्यक्रम की विशेष पहल के रूप में विद्यार्थियों ने नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर भारतीय सेना के जवानों के लिए अपने हाथों से व्यक्तिगत पत्र एवं संदेश लिखे। इन संदेशों में विद्यार्थियों ने सैनिकों के साहस, त्याग और देशसेवा के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए उनके सुरक्षित रहने और देश की रक्षा में सदैव सफल होने की कामना की। बच्चों के इन भावपूर्ण संदेशों ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।

जवानों ने साझा किए अनुभव, विद्यार्थियों को दिया देशसेवा का संदेश

इस अवसर पर सैन्यकर्मियों ने विद्यार्थियों से संवाद किया और भारतीय सेना के जीवन, अनुशासन एवं कार्यप्रणाली से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाने, जिम्मेदार नागरिक बनने और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया। संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को सेना के जीवन को करीब से समझने और सैनिकों के समर्पण एवं चुनौतियों को जानने का अवसर मिला।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में स्टेशन मुख्यालय, रायपुर के प्रशासनिक कमांडेंट कर्नल अभिषेक उनियाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम के समन्वय एवं संचालन में सूबेदार राज किशोर ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस अवसर पर कर्नल अरिंदम मजूमदार, विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों ने अपने संदेशों और भावनाओं के माध्यम से देश के वीर जवानों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और राष्ट्रभक्ति का भाव प्रकट किया। नवा रायपुर के पोस्टकार्ड पर लिखे बच्चों के संदेशों में देश की सुरक्षा में तैनात सैनिकों के प्रति पूरे समाज की श्रद्धा और विश्वास की झलक दिखाई दी।


नवा रायपुर अटल नगर: विकास, निवेश और आधुनिक भारत का उभरता स्मार्ट शहर

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नवा रायपुर अटल नगर: उपलब्धियों से नई ऊँचाइयों की ओर

रायपुर- छत्तीसगढ़ की आधुनिक और योजनाबद्ध राजधानी नवा रायपुर अटल नगर आज देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे स्मार्ट शहरों में शामिल है। सुव्यवस्थित अधोसंरचना, हरित विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी, पर्यटन और महिला सशक्तिकरण जैसे विविध क्षेत्रों में हुई उल्लेखनीय प्रगति ने नवा रायपुर को भविष्य के भारत का आदर्श शहरी मॉडल बना दिया है। यह केवल प्रशासनिक राजधानी नहीं, बल्कि निवेश, नवाचार और समावेशी विकास का उभरता हुआ केंद्र है।

स्मार्ट अधोसंरचना और शहरी सेवाओं में बड़ी उपलब्धियाँ

नवा रायपुर अटल नगर में 52 एमएलडी क्षमता की पाइपलाइन और अत्याधुनिक जल शोधन संयंत्र के माध्यम से पूरे शहर में दीर्घकालिक पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। इससे वर्तमान आबादी के साथ-साथ नए विकसित हो रहे सेक्टरों की आवश्यकताओं की भी पूर्ति हो सकेगी।

वर्षाजल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने के लिए 10.66 किलोमीटर लंबी बायोस्वेल्स, रिचार्ज पिट्स और प्राकृतिक जल निकासी तंत्र विकसित किए गए हैं। इन पहलों ने न केवल जल संरक्षण को मजबूत किया है, बल्कि शहर के पर्यावरणीय संतुलन को भी सुदृढ़ किया है।

परिवहन और कनेक्टिविटी को मिला नया आयाम

रायपुर-राजिम रेल सेवा का नवा रायपुर के सीबीडी स्टेशन तक विस्तार शहर की कनेक्टिविटी को नई गति प्रदान कर रहा है।

महिलाओं की सुरक्षित आवाजाही और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए पिंक ई-रिक्शा सेवा शुरू की गई है। साथ ही, ई-बस संचालन के लिए आवश्यक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो चुका है और सेवा प्रारंभ होने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यह पहल हरित और टिकाऊ शहरी परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

शिक्षा के क्षेत्र में विकसित हो रहा एडूसिटी

नवा रायपुर के 13 सहकारी विद्यालयों का उन्नयन किया गया है और दो उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित किया गया है।

लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में एडूसिटी का विकास किया जा रहा है, जहाँ राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों जैसे National Institute of Fashion Technology (NIFT), National Institute of Electronics and Information Technology (NIELIT) और National Forensic Sciences University (NFSU), Narsee Monjee को भूमि आवंटित की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त सेक्टर-7 में 17 एकड़ भूमि पर आवासीय विद्यालय की स्थापना प्रस्तावित है।

मेडिसिटी: स्वास्थ्य सेवाओं का नया केंद्र

मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगभग 500 एकड़ क्षेत्र में विश्वस्तरीय मेडिसिटी विकसित की जा रही है। यहाँ सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, डायग्नोस्टिक सेंटर, धर्मशाला, होटल और आवासीय सुविधाएँ विकसित की जाएँगी।

इस परियोजना के तहत Bombay Hospital को 300 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए भूमि आवंटित की जा चुकी है। साथ ही, लगभग 50 एकड़ भूमि पर आवासीय विकास हेतु निजी निवेशकों को भूखंड आवंटित किए गए हैं, जिनमें लगभग 350 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है।

महिला सशक्तिकरण और श्रमिक कल्याण

कार्यरत महिलाओं के लिए 1,000 क्षमता वाले वर्किंग वुमन हॉस्टल का निर्माण 109 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। यह परियोजना महिला सुरक्षा, सुविधा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी।

इसके अतिरिक्त, प्रवासी श्रमिकों के लिए 1,100 क्षमता वाला सर्वसुविधायुक्त श्रमिक आवास भवन 40 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है।

पर्यटन, संस्कृति और MICE गंतव्य के रूप में उभार

नवा रायपुर में 77 एकड़ भूमि पर सेवाग्राम तथा सेक्टर-39 में Art of Living Foundation को 40 एकड़ भूमि आवंटित की गई है, जहाँ सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों के बड़े केंद्र विकसित हो रहे हैं।

सेक्टर-4 और 10 में लगभग 120 एकड़ क्षेत्र में निजी निवेश के माध्यम से कन्वेंशन सेंटर कम स्पोर्ट्स सिटी विकसित की जा रही है। लगभग 800 करोड़ रुपये की इस परियोजना में विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर और टेनिस, तैराकी, कुश्ती, तीरंदाजी तथा स्क्वैश जैसी खेल सुविधाएँ शामिल होंगी।

सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी का उभरता हब

नवा रायपुर में राज्य का पहला SEZ आधारित एआई डेटा सेंटर पार्क स्थापित किया जा रहा है, जिसमें लगभग 4,000 करोड़ रुपये का निजी निवेश अपेक्षित है।

यहाँ भारत का पहला GaN तकनीक आधारित सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित करने के लिए भी भूमि आवंटित की गई है। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) हेतु भारत सरकार से स्वीकृति प्राप्त हुई है, जहाँ PCB प्रोटोटाइपिंग, 3D प्रिंटिंग और EMC टेस्टिंग जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।

सीबीडी क्षेत्र में प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर आईटी कंपनियों को सुसज्जित कार्यालय स्थान उपलब्ध कराए गए हैं। वर्तमान में लगभग 1,000 युवा कार्यरत हैं और 2,000 अतिरिक्त रोजगार सृजन की संभावना है।

सतत विकास और हरित पहल

“पीपल फॉर पीपल” अभियान के अंतर्गत 1 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं, जिससे शहर के 26 प्रतिशत हरित क्षेत्र को संरक्षित और विस्तारित करने में मदद मिली है।

बायोस्वेल्स, रिचार्ज सिस्टम और हरित कॉरिडोर जैसे उपाय नवा रायपुर को पर्यावरण-अनुकूल और जल-संवेदनशील शहर के रूप में स्थापित कर रहे हैं।

प्राधिकरण की आगामी कार्ययोजना

नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण आने वाले वर्षों में शहर को और अधिक आधुनिक एवं निवेश-आकर्षक बनाने हेतु कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है:

सेरीखेड़ी और मंदिरहसौद क्षेत्र में लगभग 1,100 एकड़ पर 800 करोड़ रुपये की लागत से अधोसंरचना विकास।
  • राज्य राजधानी क्षेत्र (SCR) के एकीकृत विकास हेतु विशेष प्राधिकरण गठन।
  • 500 एकड़ में मेडिसिटी और 200 एकड़ में एडूसिटी का विस्तार।
  • नवा रायपुर को IT, ITeS और AI हब के रूप में स्थापित करना।
  • वार्षिक पूंजीगत व्यय क्षमता को 1,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाना।
  • वेलनेस सेंटर, वेडिंग डेस्टिनेशन, MICE कैपिटल और पर्यटन परियोजनाओं में निजी निवेश को प्रोत्साहन।
  • प्रभावित ग्राम पंचायतों में ग्राम विकास योजना के आधार पर आधुनिक अधोसंरचना विकास।
  • इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) का तकनीकी उन्नयन।
  • सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने हेतु 40 नई ई-बसों का संचालन।
नई राजधानी, नए भारत की पहचान

नवा रायपुर अटल नगर आज योजनाबद्ध विकास, आधुनिक सुविधाओं और सतत शहरीकरण का सशक्त उदाहरण बन चुका है। शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी, पर्यटन और हरित विकास के क्षेत्रों में निरंतर प्रगति इसे न केवल छत्तीसगढ़ की नई पहचान बना रही है, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरक मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है।

आने वाले वर्षों में नवा रायपुर अटल नगर निश्चित ही भारत के सबसे आधुनिक, निवेश-अनुकूल और जीवन गुणवत्ता से परिपूर्ण शहरों में अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा।

नवा रायपुर में परम्परा से पहचान तक ‘आदि परब-2026’ का भव्य आयोजन

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राज्य के चिन्हांकित 43 जनजातियों और उपजातियों की संस्कृति, परिधान और चित्रकला का प्रदर्शन

छत्तीसगढ़ सहित मध्यप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के जनजातीय कलाकार होंगे शामिल,सजेगा आदि रंग, परिधान और हाट

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की परिकल्पना और निर्देश पर 13 और 14 मार्च 2026 को नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में ’परम्परा से पहचान तक’ - आदि परब - 2026 का भव्य आयोजन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को राष्ट्रीय मंच देने के उद्देश्य से ‘आदि परब-2026’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। 


भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से आदिम जाति विकास विभाग के अंतर्गत आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। उक्त आशय की जानकारी आज टीआरटीआई में आयोजित पत्रकारवार्ता के दौरान आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा और प्रशिक्षण संस्थान के संचालक श्रीमती हिना अनिमेष नेताम ने दी।

आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा और आदिवासी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के संचालक हिना अनिमेष नेताम ने प्रेसवार्ता में बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की परिकल्पना और निर्देश पर ‘आदि परब-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में विभाग इस आयोजन को सफल बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

प्रमुख सचिव बोरा ने बताया कि दो दिवसीय इस आयोजन में छत्तीसगढ़ की 43 जनजातियों के साथ-साथ मध्यप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के जनजातीय समुदाय भी शामिल होंगे l आयोजन का उद्देश्य जनजातीय पहचान, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा पारंपरिक ज्ञान के संवर्धन को बढ़ावा देना है।

पहली बार एक मंच पर दिखेंगी 43 जनजातियों की वेशभूषाएँ

प्रमुख सचिव बोरा ने बताया कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत “आदि-परिधान जनजातीय अटायर शो” का आयोजन 13 मार्च को सुबह 10.30 बजे से शाम 8 बजे तक और 14 मार्च को शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक किया जाएगा। इस आयोजन में राज्य की 43 जनजातीय समुदायों की पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक विशेषताओं को पहली बार एक ही मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा। प्राकृतिक रंगों, स्थानीय संसाधनों और हाथों से बने वस्त्रों से तैयार ये परिधान जनजातीय जीवन शैली और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का संदेश देंगे। इसमें भाग लेने के लिए 120 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन पंजीयन कराया है। 

‘आदि रंग’ में चित्रकला के माध्यम से जल-जंगल-जमीन का संदेश

प्रमुख सचिव बोरा ने प्रेसवार्ता में बताया कि आदि परब के तहत “आदि रंग - जनजातीय चित्रकला महोत्सव” भी आयोजित होगा। इस महोत्सव में जनजातीय कलाकार अपनी पारंपरिक चित्रकला के माध्यम से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण, जनजातीय जीवन दर्शन और पर्यावरणीय चुनौतियों को प्रस्तुत करेंगे। इस कार्यक्रम में 155 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन पंजीयन कराया है। चित्रकला प्रतियोगिता 18-30 वर्ष और 30 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की दो श्रेणियों में होगी।

दोनों श्रेणी में प्रथम पुरस्कार 20 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार 15 हजार रुपये और तृतीय पुरस्कार 10 हजार रुपये दिए जाएंगे। साथ ही दोनों आयु वर्गों के 10-10 प्रतिभागियों को 2000 रुपये का सांत्वना पुरस्कार भी दिया जाएगा।

आदि-हाट में मिलेगा जनजातीय हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद

प्रमुख सचिव बोरा ने बताया कि आयोजन के दौरान “आदि-हाट जनजातीय शिल्प मेला” भी लगाया जाएगा, जिसमें छत्तीसगढ़ के जनजातीय हस्तशिल्प, वनोपज और पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय किया जाएगा। यहां 14 समूहों द्वारा हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां आगंतुक प्रदेश के पारंपरिक स्वाद का आनंद ले सकेंगे।

यूपीएससी में चयनित जनजातीय युवाओं का होगा सम्मान

प्रमुख सचिव बोरा ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा 2025 में छत्तीसगढ़ से आदिम जाति विकास विभाग की योजनाओं के सहयोग से चयनित अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थी डायमंड सिंह ध्रुव औरअंकित साकनी का सम्मान किया जाएगा। साथ ही इस मौके पर ‘प्रयास’ संस्थान के विद्यार्थियों को विभागीय योजनाओं के तहत लैपटॉप भी वितरित किए जाएंगे।

रायपुर साहित्य उत्सव–2026 के लिए आम जनता हेतु सुगम यातायात व्यवस्था : 23 से 25 जनवरी तक पुरखौती मुक्तांगन, नवा रायपुर में होगा साहित्य, संस्कृति और विचारों का संगम

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रायपुर- छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा को राष्ट्रीय पटल पर सशक्त रूप से प्रस्तुत करने के उद्देश्य से रायपुर साहित्य उत्सव–2026 का भव्य आयोजन 23 से 25 जनवरी 2026 तक नवा रायपुर अटल नगर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में किया जा रहा है। आम नागरिकों, साहित्य प्रेमियों, विद्यार्थियों एवं युवाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शासन द्वारा उत्सव स्थल तक सुगम एवं निःशुल्क यातायात की विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि अधिक से अधिक लोग बिना किसी बाधा के इस तीन दिवसीय साहित्यिक महोत्सव में सहभागिता कर सकें।

इस व्यवस्था के अंतर्गत रायपुर शहर के विभिन्न क्षेत्रों से पुरखौती मुक्तांगन, नवा रायपुर तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कुल 6 विशेष बस रूट निर्धारित किए गए हैं। ये बसें तीनों दिन सुबह 9 बजे, 10.30 बजे, दोपहर 12 बजे, 1.30 बजे, 3 बजे तथा शाम 4.30 बजे निर्धारित समय-सारणी के अनुसार संचालित होंगी। 

रूट क्रमांक 1 टाटीबंध से प्रारंभ होकर सरोना, रायपुरा चौक, कुशालपुर, भाठागांव चौक, संतोषी नगर चौक, पचपेड़ी नाका, एमएमआई, देवपुरी, डूमरतराई, माना मोड़, टेमरी, माना कैंप और नवा रायपुर होते हुए पुरखौती मुक्तांगन पहुंचेगा। 

रूट क्रमांक 2 रेलवे स्टेशन से फाफाडीह चौक, डी. नगर, मेकाहारा, शास्त्री चौक, कालीबाड़ी, सिद्धार्थ चौक, पचपेड़ी नाका, एमएमआई, देवपुरी, डूमरतराई, माना मोड़, टेमरी, माना कैंप और नवा रायपुर होते हुए उत्सव स्थल तक जाएगा। 

रूट क्रमांक 3 रेलवे स्टेशन से फाफाडीह चौक, मेकाहारा, घड़ी चौक, गांधी उद्यान, भगत सिंह चौक, तेलीबांधा, अवंतीबाई चौक, पं. दीनदयाल चौक, वीआईपी चौक, कृषि विश्वविद्यालय, लाभांडी, जोरा, नवा रायपुर एवं कैपिटल कॉम्प्लेक्स के मार्ग से पुरखौती मुक्तांगन पहुंचेगा।

इसी प्रकार रूट क्रमांक 4 यूनिवर्सिटी गेट से साइंस कॉलेज, आयुर्वेदिक कॉलेज, आश्रम, आमापारा, आज़ाद चौक, कालीबाड़ी, सिद्धार्थ चौक, पचपेड़ी नाका, एमएमआई, देवपुरी, डूमरतराई, माना मोड़, टेमरी, माना कैंप और नवा रायपुर होते हुए उत्सव स्थल तक संचालित होगा। 

रूट क्रमांक 5 कचना से मोवा, लोधीपारा, पंडरी, शास्त्री चौक, कालीबाड़ी चौक, सिद्धार्थ चौक, पचपेड़ी नाका, महावीर नगर, तेलीबांधा, अवंतीबाई चौक, पं. दीनदयाल चौक, वीआईपी चौक, कृषि विश्वविद्यालय, लाभांडी, जोरा, नवा रायपुर एवं कैपिटल कॉम्प्लेक्स के रास्ते पुरखौती मुक्तांगन पहुंचेगा।

रूट क्रमांक 6 भाठागांव से पचपेड़ी नाका, एमएमआई, देवपुरी, डूमरतराई, माना मोड़, टेमरी, माना कैंप और नवा रायपुर होते हुए उत्सव स्थल तक संचालित किया जाएगा।

तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव–2026 छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा, लोक परंपराओं और साहित्यिक चेतना को नई पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा। इस अवसर पर देशभर से प्रतिष्ठित साहित्यकार, कवि, कथाकार, विचारक, कलाकार, पत्रकार, रंगकर्मी एवं साहित्य प्रेमी सहभागिता करेंगे। उत्सव के दौरान साहित्यिक संवाद, विचार-मंथन, समकालीन विषयों पर परिचर्चाएँ, कविता पाठ, कथा सत्र, पुस्तक विमोचन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ एवं कला-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे, जो साहित्यिक और वैचारिक विमर्श को नई दिशा देंगे।

उत्सव के अंतर्गत ओपन माइक सत्र का भी आयोजन किया जाएगा, जिसके माध्यम से आम नागरिकों, युवाओं एवं नवोदित रचनाकारों को कविता, कहानी, गीत, विचार अथवा नाट्य अंश के रूप में अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, राज्य के विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में उत्सव की जानकारी व्यापक रूप से साझा की जा रही है, ताकि विद्यार्थियों और युवाओं में साहित्य, भाषा और संस्कृति के प्रति रुचि विकसित हो सके। 

आयोजन के दौरान देश के ख्यातिनाम प्रकाशन समूहों की पुस्तक स्टॉल भी लगाई जाएंगी, जहां पाठकों को विविध विषयों, भाषाओं और विधाओं की पुस्तकों से रूबरू होने और उन्हें खरीदने का अवसर मिलेगा।

रायपुर साहित्य उत्सव–2026 में सहभागिता के लिए इच्छुक नागरिक, विद्यार्थी एवं साहित्य प्रेमी आधिकारिक वेबसाइट www.raipursahityautsav.org के माध्यम से पंजीयन कर सकते हैं।

SECL और श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के बीच एमओयू, नवा रायपुर में बनेगा हेल्थकेयर स्किल डेवलपमेंट सेंटर

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नवा रायपुर/बिलासपुर- छत्तीसगढ़ स्थित कोल सार्वजनिक उपक्रम साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने अपनी कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) योजना के तहत श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस एमओयू के तहत नवा रायपुर, छत्तीसगढ़ में एक हेल्थकेयर स्किल डेवलपमेंट सेंटर की स्थापना की जाएगी। इस परियोजना के लिए SECL द्वारा ₹35.04 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

कोलफील्ड क्षेत्रों के युवाओं को मिलेगा निःशुल्क रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण

प्रस्तावित संस्थान में सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित युवाओं को निःशुल्क कौशल आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के प्रमुख क्षेत्र होंगे—

  • नर्सिंग असिस्टेंट

  • मेडिकल टेक्नीशियन

  • एलाइड हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स

इस पहल का उद्देश्य युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाना और विशेष रूप से पिछड़े एवं वंचित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना है।

संस्थान परिसर में शैक्षणिक भवन, छात्रावास, स्टाफ आवास और अन्य सहायक बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा। SECL के परिचालन जिलों के उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, अगले 25 वर्षों तक प्रति वर्ष कम से कम 20 प्रतिशत सीटें SECL के कोलफील्ड जिलों के लिए आरक्षित रहेंगी, जिसे प्रदर्शन के आधार पर आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

एमओयू पर हस्ताक्षर

यह एमओयू SECL के निदेशक (मानव संसाधन) बिरांची दास की उपस्थिति में संपन्न हुआ। समझौते पर SECL के महाप्रबंधक (CSR) सी. एम. वर्मा और सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के ट्रस्टी विवेक नारायण गौर ने हस्ताक्षर किए।

SECL–श्री सत्य साईं साझेदारी से स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा विस्तार

SECL और श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट पहले से ही SECL की प्रमुख स्वास्थ्य पहल ‘SECL की धड़कन’ के अंतर्गत साझेदारी कर रहे हैं। इस कार्यक्रम के तहत जन्मजात हृदय रोग (CHD) से पीड़ित बच्चों को निःशुल्क जीवनरक्षक हृदय शल्य चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाती है। अब तक इस योजना के अंतर्गत 180 से अधिक सफल सर्जरी की जा चुकी हैं, जिससे कोलफील्ड क्षेत्रों के गरीब और वंचित परिवारों को उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच मिली है।

कोल बेल्ट क्षेत्र में सामाजिक विकास का प्रमुख आधार SECL

SECL अपने कार्यक्षेत्रों में सामाजिक विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा है। कंपनी ने अब तक छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, बुनियादी ढांचे और सामुदायिक कल्याण से जुड़े CSR कार्यों पर ₹850 करोड़ से अधिक खर्च किए हैं।

इस नई पहल के माध्यम से SECL ने समावेशी विकास, क्षमता निर्माण और सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है, साथ ही यह परियोजना स्वास्थ्य और मानव संसाधन विकास से जुड़ी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप भी है।


छत्तीसगढ़ में आवास एवं पर्यावरण विभाग की दो वर्षों की उपलब्धियां और विकास पहल

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रायपुर- प्रदेश के आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ संवाद ऑडिटोरियम में प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी के नेतृत्व में आवास एवं पर्यावरण विभाग ने विगत दो वर्षों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। लोगों को किफायती आवास की उपलब्धता, बेहतर रहवासी सुविधा, आजीविका के साधनों के विकास के साथ ही पर्यावरण अनुकूल ईज आफ लिविंग का ध्यान रखते हुए इन दो सालों में काम किया गया है। विभाग द्वारा किये गये दो सालों से नागरिक जीवन बेहतर हुआ है और राज्य की उज्ज्वल भविष्य की ठोस नींव रख दी गई है।

मंत्री चौधरी ने बताया कि दो साल पहले छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा था। 3200 से अधिक आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों का विक्रय नहीं हो सका था। 735 करोड रूपए का बकाया था। मंडल को ऋण मुक्त करने के लिए यह राशि राज्य शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई। वर्तमान में मंडल पर कोई ऋण नहीं है। जिन संपत्तियों का विक्रय लंबे समय से नहीं हुआ था, उनके विक्रय के लिए सरकार द्वारा एकमुश्त निपटान योजना ओटीएस-2 आरंभ की गई। इसके माध्यम से इन संपत्तियों पर 30 प्रतिशत तक की छूट उपलब्ध करायी गई। इस योजना को सफलता मिली और 9 महीनों में ही 1251 संपत्तियों का विक्रय हुआ और इस योजना के माध्यम से 190 करोड रुपए का राजस्व अर्जित किया गया। यह राशि आगामी परियोजनाओं में व्यय की जाएगी, ताकि अधिकतम हितग्राहियों को किफायती आवास एवं व्यावसायिक संपत्ति का लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि भविष्य में अविक्रित स्टॉक से बचने के लिए नई निर्माण नीति लागू की गई है। अब मांग आधारित निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी। बाजार की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार परियोजनाएं शुरू होंगी। इससे वित्तीय जोखिम कम होगा। 

नई नीति के अनुसार 60 प्रतिशत या प्रथम 3 माह में 30 प्रतिशत पंजीयन अनिवार्य किया गया है। इसके पश्चात ही निर्माण कार्य प्रारंभ होगा। यह व्यवस्था परियोजनाओं की व्यवहार्यता सुनिश्चित करेगी। नागरिकों की मांग को प्रत्यक्ष रूप से महत्व मिलेगा।

चौधरी ने कहा कि आवंटियों की सुविधा के लिए ऑनलाइन पोर्टल को और सुदृढ किया गया है। प्रक्रियाएं सरल और समयबद्ध हुई हैं। नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। एआई आधारित चैटबॉट के माध्यम से 24×7 जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। मानव हस्तक्षेप की आवश्यकता कम हुई है। पारदर्शिता और सुविधा दोनों में वृद्धि हुई है।

मंत्री चौधरी ने रायपुर विकास प्राधिकरण की उपलब्धियों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 193 करोड रूपए की लागत से प्राधिकरण द्वारा पीएम यूनिटी मॉल का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही टिकरापारा में 168 फ्लैट का निर्माण प्रस्तावित है। जिसके लिए निविदा आमंत्रित की गई है। जनवरी से प्राधिकरण द्वारा ऑनलाईन प्रणाली की शुरूआत की गई है।

उन्होंने कहा कि नवा रायपुर अटल नगर के विकास के लिए बीते 2 सालों में ऐतिहासिक निर्णय हुए हैं। नवा रायपुर अटल नगर देश का पहला ऋण मुक्त ग्रीनफील्ड शहर बना है। यह उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय मानी जा रही है। प्राधिकरण द्वारा 1,345 करोड़ के संपूर्ण ऋण का भुगतान किया गया। यह ऋण पूर्ववर्ती विकास परियोजनाओं से संबंधित था। अनुशासित वित्तीय प्रबंधन से यह संभव हो सका। किसी नए ऋण का बोझ नहीं डाला गया। ऋण चुकता होने के साथ 5,030 करोड मूल्य की भूमि और संपत्ति गिरवी-मुक्त हुई। अब ये परिसंपत्तियां पूरी तरह स्वतंत्र हैं। इससे निवेश और विकास प्रस्तावों को गति मिलेगी।

नवा रायपुर में औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधि बढ़ाने के लिए भी उल्लेखनीय पहल की गई है। 132 एकड क्षेत्र में टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है। टेक्सटाइल पार्क में लगभग 2,000 करोड के निवेश का अनुमान है। यह निवेश राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगा। एमएसएमई और बड़े उद्योगों को अवसर मिलेंगे। निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी। इस परियोजना से 12,000 से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार दोनों शामिल होंगे। स्थानीय युवाओं को अवसर मिलेंगे तथा क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

सेमीकंडक्टर और आईटी क्षेत्र में 1,800 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। यह पहल उन्नत 5जी और 6 जी तकनीक को ध्यान में रखकर की गई है। इससे राज्य को तकनीकी मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। डिजिटल इकोसिस्टम मजबूत होगा। आईटी क्षेत्र से लगभग 10,000 नए रोजगार सृजित होने की संभावना है। उच्च कौशल आधारित रोजगार उपलब्ध होंगे। स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा।

चौधरी ने कहा कि नवा रायपुर टेक-हब के रूप में उभरेगा। नवा रायपुर को कॉन्फ्रेंस कैपिटल के रूप में विकसित किया जा रहा है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों को आकर्षित करने की योजना है। एमआईसीई टूरिज्म को बढावा मिलेगा। सेवा और पर्यटन क्षेत्र को नई गति मिलेगी।

चौधरी ने बताया कि शहर को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और खुले स्थल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इवेंट आधारित अर्थव्यवस्था को बढावा मिलेगा। स्थानीय सेवाओं में रोजगार बढ़ेगा। 400 करोड की लागत से इनलैंड मरीना परियोजना विकसित की जा रही है। यह पर्यटन और शहरी सौंदर्य दोनों को बढ़ाएगी। मनोरंजन के नए अवसर सृजित होंगे। ग्रीन और ब्लू इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़ा गया है।

120 करोड की लागत से आर्ट ऑफ लिविंग सेंटर विकसित किया जाएगा। यह आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा। वेलनेस टूरिज्म को प्रोत्साहन मिलेगा। शहर की सामाजिक पहचान मजबूत होगी। 230 करोड की लागत से साइंस सिटी विकसित की जा रही है। इससे शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। छात्रों और युवाओं को विज्ञान से जोड़ने का उद्देश्य है। भविष्य उन्मुख सोच को प्रोत्साहन मिलेगा।

नवा रायपुर को मेडिकल हब बनाने के उद्देश्य से मेडी सिटी विकसित की जा रही है। यहां उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। क्षेत्रीय स्वास्थ्य सुविधाओं पर दबाव कम होगा। मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। मेडी सिटी में 300 बिस्तरों वाला हॉस्पिटलबॉम्बे हॉस्पिटल ट्रस्ट द्वारा विकसित किया जा रहा है। एजु सिटी के अंतर्गत NIFT और NIELIT को भूमि आवंटन की प्रक्रिया प्रगति पर है। डिजाइन और आईटी शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। उच्च शिक्षा संस्थानों का क्लस्टर विकसित होगा। देश विदेश के नामी शैक्षणिक संस्थानों के आने से नवा रायपुर ज्ञान केंद्र के रूप में उभरेगा।

मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग द्वारा भी बीते दो साल में उल्लेखनीय कार्य किये गये हैं। नियमों को अधिक सरल, व्यावहारिक और किफायती बनाने के उद्देशेय से राज्य में पहली बार किफायती जन आवास नियम, 2025 लागू किया गया है। इससे आवास निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा। नागरिकों और डेवलपर्स दोनों को लाभ होगा। अब कृषि भूमि में भी किफायती आवास स्वीकार किया गया है। प्रक्रिया सरल और समयबद्ध हुई है। कालोनाइजर्स द्वारा सामुदायिक खुले स्थान की अनिवार्यता 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत की गई है। इससे परियोजनाओं की लागत में कमी आएगी। किफायती आवास अधिक व्यवहार्य बनेंगे। फिर भी आवश्यक खुले स्थान सुरक्षित रहेंगे।

इसके अतिरिक्त केंद्रीय रिफार्म के अंतर्गत छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 में भी संशोधन किये गये है। औद्योगिक क्षेत्रों में न्यूनतम पहुँच मार्ग की चौड़ाई कम की गई है। अब 7.5 से 9 मीटर चौड़ाई स्वीकार्य है। पहले यह 12 मीटर होनी अनिवार्य थी। इससे भूमि का बेहतर उपयोग संभव होगा। औद्योगिक क्षेत्रों में ग्राउंड कवरेज 60 प्रतिशत से बढाकर 70 प्रतिशत किया गया है। उद्योगों को अधिक निर्माण क्षेत्र मिलेगा। उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। इससे औद्योगिक विस्तार आसान होगा।

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा उद्योगों द्वारा पर्यावरणीय उत्सर्जनों के निगरानी हेतुरियल टाइम सिस्टम लागू किया गया है। ऑनलाइन के माध्यम से निरंतर निगरानी हो रही है, जिससे पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ी है। उत्सर्जन सीमा से अधिक होने पर तुरंत अलर्ट जारी होता है। तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई संभव होती है। नियमों के पालन में सख्ती आई है। स्वचालित नोटिस प्रणाली लागू की गई है। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया तेज हुई है तथा मानव हस्तक्षेप पर निर्भरता कम हुई है। कॉमन हज़ार्डस, अपशिष्ट उपचार, भंडारण और निपटान सुविधा विकसित की गई है, यह औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन का वैज्ञानिक समाधान है। नियामक व्यवस्था अधिक प्रभावी बनी है। इससे पर्यावरणीय जोखिम कम होंगेतथा उद्योगों को सुरक्षित विकल्प मिलेगा। कॉमन हजारडस वेस्ट अप्रैल 2025 से पूर्णतः क्रियाशील हो जाएगी। इसकी लैंडफिल क्षमता 60,000 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है। जिससे दीर्घकालिक अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण मानकों का पालन सुनिश्चित होगा।

उन्होंने बताया कि आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा किए गए सुधार वित्तीय अनुशासन को दर्शाते हैं। ऋण मुक्त संस्थान इसकी स्पष्ट मिसाल हैं। विकास को जिम्मेदारी से जोड़ा गया है। संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग हुआ है। नागरिक केंद्रित सुधारों को सभी योजनाओं में प्राथमिकता दी गई है। डिजिटल सेवाओं से सुविधा और पारदर्शिता बढ़ी है। सेवा वितरण में समय और लागत दोनों की बचत हुई है। नागरिकों का भरोसा मजबूत हुआ है। औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन पर समान रूप से ध्यान दिया गया है। युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर अवसर बढ़े हैं। राज्य की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो रही है। नवा रायपुर विकास का केंद्र बन रहा है। पर्यावरण संरक्षण को विकास का अभिन्न अंग बनाया गया है। तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली लागू की गई है। सतत विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। प्राकृ तिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है। नवा रायपुर अटल नगर इन सभी प्रयासों का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है। ऋण मुक्त, निवेश अनुकूल और भविष्य तैयार शहर के रूप में इसकी पहचान बनी है।

आवास एवं पर्यावरण विभाग की उपलब्धियाँ छत्तीसगढ़ को वित्तीय रूप से सक्षम, निवेश-अनुकूल, पर्यावरण-संवेदनशील और नागरिक केंद्रित राज्य के रूप में स्थापित करती हैं। विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में विभाग द्वारा की गई पहल अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इसके लिए दीर्घकालीन विकास की ठोस नींव तैयार हुई है। इस अवसर पर अनुराग सिंह देव, अध्यक्ष, छत्तीसगढ गृह निर्माण मंडल, नन्द कुमार साहू, अध्यक्ष, रायपुर विकास प्राधिकरण, विधायक रायमुनी भगत, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

छत्तीसगढ़ विधानसभा का 25 साल का इंतजार खत्म, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नए विधानसभा भवन को राज्य को किया समर्पित

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रजत जयंती वर्ष में छत्तीसगढ़ को मिला अपना भव्य और आधुनिक विधानसभा भवन

परंपरा और आधुनिकता का संगम छत्तीसगढ़ विधानसभा का नया भवन

रायपुर-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आज नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा के नए भवन के लोकार्पण के साथ ही विधानसभा के खुद के भवन का 25 साल का इंतजार खत्म हो गया। राज्य निर्माण के रजत जयंती वर्ष में राज्योत्सव के मौके पर छत्तीसगढ़ को अपना भव्य और आधुनिक विधानसभा भवन मिला। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुख्य आतिथ्य में नए विधानसभा परिसर में आयोजित लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि यह हम सबके लिए बहुत गौरव का क्षण है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सदैव लोकतांत्रिक परंपराओं पर गहरा विश्वास रहा है। राज्य की समृद्धि और खुशहाली के फैसले अब इस भवन में होंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि यहां राज्य के हित से जुड़े विधेयकों व मुद्दों पर सार्थक चर्चा से जनता की आकांक्षाएं और अपेक्षाएं पूर्ण होंगी। यह नया भवन छत्तीसगढ़ विधानसभा की परंपरा तथा लोकतंत्र की भावनाओं को और मजबूत करेगी एवं इनका गौरव बढ़ाएंगी। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि आज का दिन भगवान श्रीराम के ननिहाल और माता कौशल्या की धरती छत्तीसगढ़ के लिए स्वर्णिम है। छत्तीसगढ़ विधानसभा का पिछले 25 वर्षों में गौरवशाली इतिहास रहा है। राज्य सरकार पिछले 21-22 महीनों से मोदी की गारंटी को पूरा करने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को अटलजी ने बनाया है और मोदी जी इसे संवारने का काम कर रहे हैं। 

छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज प्रदेश के लिए ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण है। आज यह भवन, भूमि और मंच अभूतपूर्व समय का साक्षी बन रहा है। छत्तीसगढ़ के इतिहास में आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेगा। आज के दिन ही 25 वर्ष पहले स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी ने राज्य का निर्माण किया था और आज ही यह अपने निर्माण से विधान तक का सफर पूरा कर रहा है। उन्होंने बताया कि नया विधानसभा भवन 80 प्रतिशत स्वदेशी मटेरियल से बना है। सदन में बस्तर के सागौन से निर्मित फर्नीचर और दरवाजे हैं, सीलिंग में धान की बालियों की कलाकारी है। छत्तीसगढ़ को यहां समाहित किया गया है। राज्यपाल रमेन डेका, केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्रीद्वय अरुण साव और विजय शर्मा, संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और सांसद बृजमोहन अग्रवाल भी विधानसभा भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल हुए।   

खूबसूरत इमारत ही नहीं, छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक

छत्तीसगढ़ के इतिहास में आज 1 नवम्बर के दिन एक नया अध्याय जुड़ा। वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद रायपुर के राजकुमार कॉलेज से शुरू हुई छत्तीसगढ़ विधानसभा को 25 वर्षों के बाद रजत जयंती वर्ष में अपना भव्य, आधुनिक और पूर्ण सुविधायुक्त स्थायी भवन मिल गया है। यह भवन केवल एक खूबसूरत इमारत ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक भी है।

कृषि-प्रधान संस्कृति और बस्तर के काष्ठ शिल्प की झलक

‘धान का कटोरा’ कहलाने वाले छत्तीसगढ़ की पहचान को इस भवन की वास्तुकला में बखूबी पिरोया गया है। विधानसभा के सदन की सीलिंग पर धान की बालियों और पत्तियों को उकेरा गया है, जो प्रदेश की कृषि-प्रधान संस्कृति का प्रतीक है। भवन के ज्यादातर दरवाजे और फर्नीचर बस्तर के पारंपरिक काष्ठ शिल्पियों द्वारा बनाए गए हैं। इस तरह नया विधानसभा भवन आधुनिकता और परंपरा का एक जीवंत संगम बन गया है।

भविष्य की जरूरतों के अनुरूप अत्याधुनिक भवन

नए विधानसभा भवन को वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। यह पूरी तरह सर्वसुविधायुक्त और सुसज्जित भवन है, जिसके सदन को 200 सदस्यों तक के बैठने के लिए विस्तारित किया जा सकता है। पेपरलेस विधानसभा संचालन के लिए आवश्यक तकनीकी सुविधाओं का समावेश भी किया गया है, जिससे यह भवन ‘स्मार्ट विधानसभा’ के रूप में विकसित होगा।

324 करोड़ की लागत से बना 51 एकड़ में फैला परिसर

कुल 51 एकड़ में फैले इस परिसर का निर्माण 324 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है। भवन को तीन मुख्य हिस्सों—विंग-ए, विंग-बी और विंग-सी—में विभाजित किया गया है। विंग-ए में विधानसभा का सचिवालय, विंग-बी में सदन, सेंट्रल हॉल, मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय, तथा विंग-सी में मंत्रियों के कार्यालय स्थित हैं।

हरित तकनीक से निर्मित पर्यावरण अनुकूल भवन

यह भवन पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल और हरित निर्माण तकनीक से बनाया गया है। परिसर में सोलर प्लांट की स्थापना के साथ वर्षा जल संचयन हेतु दो सरोवर भी बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा, भवन में पर्यावरण-संरक्षण के सभी मानकों का पालन किया गया है।

500 सीटर ऑडिटोरियम और 200 सीटर सेंट्रल हॉल

विधानसभा भवन में 500 दर्शक क्षमता वाला अत्याधुनिक ऑडिटोरियम और 200 सीटर सेंट्रल हॉल बनाया गया है। भवन की वास्तुकला आधुनिकता और पारंपरिक शैलियों का उत्कृष्ट मेल है।

तीन करोड़ जनता की आकांक्षाओं का प्रतीक

छत्तीसगढ़ की संस्कृति और शिल्प से सजे-संवरे इस नए विधानसभा भवन में राज्य के तीन करोड़ नागरिकों की उम्मीदें, आकांक्षाएं और आत्मगौरव साकार होता दिखेगा। यह भवन न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था का, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान, प्रगति और परंपरा का प्रतीक भी बनेगा।

शांति शिखर रिट्रीट सेंटर: नवा रायपुर में शांति और आध्यात्मिकता का प्रतीक

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नवा रायपुर के सेक्टर-20 में स्थित ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान का “शांति शिखर रिट्रीट सेंटर – एकेडमी फॉर ए पीसफुल वर्ल्ड” आज छत्तीसगढ़ में शांति और आध्यात्मिकता का नया प्रतीक बनकर खड़ा है। यह भव्य केंद्र राजयोगी ओम प्रकाश भाईजी और राजयोगिनी कमला दीदी के पवित्र संकल्पों से साकार हुआ है। इस भवन का निर्माण 15 जनवरी 2018 को प्रारंभ हुआ और सात वर्षों की निष्ठापूर्ण साधना के बाद यह स्वप्न हकीकत में बदला। 105 फीट ऊँचा, 150 फीट चौड़ा और 225 फीट लंबा यह पाँच मंजिला शांति-धाम राजस्थानी महल की शैली में जोधपुर के कारीगरों ने विशिष्ट पिंक स्टोन से तैयार किया। निर्माण हेतु 150 से अधिक ट्रकों में यह गुलाबी पत्थर विशेष रूप से जोधपुर से लाया गया था। यह न केवल ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की पहली पिंक स्टोन इमारत है, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहली ऐसी संरचना भी है जो प्रेसटेंसाइल बीम तकनीक से निर्मित हुई है—जो आमतौर पर बड़े पुलों में प्रयुक्त होती है।

भवन की प्रमुख विशेषताएँ 

  1. 2000 लोगों की क्षमता वाला आधुनिक एलईडी स्क्रीनयुक्त एसी ऑडिटोरियम
  2. 400 लोगों हेतु दो उन्नत सेमिनार हॉल
  3. 100 साधकों के लिए विशाल ध्यान कक्ष
  4. 25 व्यक्तियों की क्षमता वाली आध्यात्मिक व नैतिक साहित्य से समृद्ध लाइब्रेरी
  5. 100 अतिथियों के लिए आरामदायक विश्राम कक्ष
  6. 300 लोगों का डायनिंग हॉल
  7. 200 से अधिक लोगों का वीडियो थिएटर, जहाँ संस्था की प्रेरक फिल्में प्रदर्शित होंगी

दो एकड़ में बना है शांति शिखर 

लगभग दो एकड़ भूमि में फैले इस केंद्र को ब्रह्माकुमारीज़ के देश-विदेश के रिट्रीट केंद्रों में अद्वितीय माना जा रहा है। रायपुर क्षेत्र की संचालिका राजयोगिनी बीके सविता दीदी के अनुसार, “शांति शिखर” में समाज के प्रत्येक वर्ग को ध्यान में रखकर विविध आध्यात्मिक कार्यक्रम संचालित होंगे। यहाँ आने वाला हर व्यक्ति आत्मशांति, पवित्रता और सकारात्मकता का अनुभव करेगा।

11 हजार लोगों का योगदान 

इस केंद्र के निर्माण में ब्रह्माकुमारीज़ के 50 सेवाकेंद्रों और 500 उपसेवाकेंद्रों से जुड़े लगभग 11 हजार सदस्यों का सहयोग रहा। वर्ष 2018 से प्रत्येक सदस्य ने प्रतिदिन एक रुपया देकर इस दिव्य धरोहर को साकार किया। यह सामूहिक सेवाभाव आने वाले समय में न जाने कितने जीवनों में शांति, एकता और सद्भाव की ज्योति प्रज्वलित करेगा।“शांति शिखर” केवल एक इमारत नहीं, बल्कि मानवता में शांति और सकारात्मकता का जीवंत मंदिर है—जो आने वाली पीढ़ियों को ‘आत्मबल से विश्व-कल्याण’ का संदेश देगा।

नवा रायपुर में आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित देश का पहला पूर्णतः डिजिटल संग्रहालय तैयार, प्रधानमंत्री द्वारा राज्योत्सव पर उद्घाटन

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रायपुर- अंग्रेजी हुकूमत के काल में छत्तीसगढ़ के आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के शौर्य और बलिदान की स्मृति में नवा रायपुर, अटल नगर में निर्मित हो रहे भव्य संग्रहालय-सह-स्मारक को अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री राज्योत्सव के अवसर पर इस संग्रहालय का उद्घाटन करेंगे।


मुख्य सचिव विकास शील ने निर्माण स्थल पर पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया। संग्रहालय देश का पहला पूर्णतः डिजिटल आदिवासी संग्रहालय होगा और इसमें स्वतंत्रता आंदोलन के समय छत्तीसगढ़ में हुए 14 प्रमुख आदिवासी विद्रोहों के साथ-साथ जंगल सत्याग्रह और झंडा सत्याग्रह पर अलग-अलग गैलरियाँ बनाई जा रही हैं। आगंतुकों को इन जनजातीय आंदोलनों की जीवंत झलक देखने और सुनने को मिलेगी।

निर्माण स्थल का निरीक्षण करते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि संग्रहालय में प्रदर्शित सभी वस्तुएं और सामग्री उनके मूल स्वरूप में प्रस्तुत की जाएँ। ओरिएंटेशन रूम में डाक्यूड्रामा को हल्बी-गोंडी और अन्य जनजातीय बोलियों में तैयार करने के निर्देश दिए गए, ताकि यह स्थानीय संस्कृति से जुड़ाव का सशक्त माध्यम बने।

प्रमुख सचिव आदिम जाति विकास विभाग ने संग्रहालय में प्रदर्शित आदिवासी विद्रोहों का संक्षिप्त परिचय देते हुए पूरे रूट चार्ट और उद्घाटन की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरवपूर्ण अवसर है कि देश का पहला पूर्णतः डिजिटल आदिवासी संग्रहालय प्रधानमंत्री के कर-कमलों से लोकार्पित होगा।

संग्रहालय क्षेत्र में अनिवार्य सुरक्षा, स्ट्रीट लाइट, रंग-रोगन, सौंदर्यीकरण, विद्युत आपूर्ति, गार्डनिंग और वृक्षारोपण की सभी तैयारियाँ समय पर पूरी करने के निर्देश दिए गए।

शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय में हल्बा विद्रोह, सरगुजा विद्रोह, भोपालपट्टनम विद्रोह, परलकोट विद्रोह, तारापुर विद्रोह, लिंगागिरी विद्रोह, कोई विद्रोह, मेरिया विद्रोह, मुरिया विद्रोह, रानी चौरिस विद्रोह, भूमकाल विद्रोह, सोनाखान विद्रोह, झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह के वीर नायकों के संघर्ष और शौर्य को 14 गैलरियों में जीवंत रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।

निर्माण और तैयारियों की समीक्षा बैठक में संभागायुक्त, आयुक्त आदिम जाति विकास विभाग, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के आयुक्त, कलेक्टर, नगर निगम रायपुर के आयुक्त, संचालक टीआरटीआई, संचालक अंत्यावसायी विकास निगम, अतिरिक्त कलेक्टर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, डीआईजी अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं, एनआरडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, विद्युत मंडल के मुख्य अभियंता और लोक निर्माण विभाग के मुख्य एवं कार्यपालन अभियंता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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