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29 जून को होगी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद की 16वीं बैठक, स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रमुख नीतियों पर होगा मंथन

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नई दिल्ली- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय 29 जून 2026 (सोमवार) को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (Central Council of Health and Family Welfare - CCHFW) की 16वीं बैठक आयोजित करेगा। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा करेंगे।

इस सम्मेलन में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और प्रतापराव जाधव भी शामिल होंगे। इसके अलावा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, गैर-सरकारी सदस्य तथा स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ भी भाग लेंगे।

स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रमुख प्राथमिकताओं पर होगी चर्चा

बैठक में केंद्र और राज्यों के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को मजबूत बनाने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण नीतिगत विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इस वर्ष सम्मेलन के प्रमुख विषय होंगे—

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM): सतत विकास लक्ष्य (SDGs) एवं प्राथमिकताएं

  • खाद्य एवं औषधि सुधार (Food & Drug Reforms)

  • सहायक स्वास्थ्य सेवाएं (Allied Health Services)

इन विषयों पर चल रही योजनाओं की समीक्षा, राज्यों के सफल अनुभवों का आदान-प्रदान, नई चुनौतियों की पहचान और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए साझा रणनीति तैयार की जाएगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र में सर्वोच्च सलाहकार निकाय

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत गठित केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का सर्वोच्च सलाहकार निकाय है। यह परिषद चिकित्सा एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित नीतियों और कार्यक्रमों की समीक्षा करती है तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्र और राज्यों को आवश्यक सुझाव देती है।

सहकारी संघवाद को मिलेगा और बल

यह सम्मेलन स्वास्थ्य क्षेत्र में सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। इसके माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारें राष्ट्रीय महत्व के स्वास्थ्य मुद्दों पर विचार-विमर्श कर सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बेहतर नियोजन और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए साझा रणनीति तैयार करती हैं।

सरकार का मानना है कि इस बैठक से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार, नीति निर्माण में बेहतर समन्वय और देशभर में जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन को नई दिशा मिलेगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), PM-ABHIM और अन्य प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की।

बैठक में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने, टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीबी उन्मूलन, वेक्टर जनित बीमारियों की रोकथाम, गैर-संचारी रोगों (NCDs) की शुरुआती जांच और सरकारी अस्पतालों में दवाइयों व जांच सुविधाओं की उपलब्धता पर विशेष जोर दिया गया।

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत पश्चिम बंगाल को 3505.59 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, जिसमें से पहली किस्त के रूप में 527.58 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं। साथ ही PM-ABHIM और 15वें वित्त आयोग के स्वास्थ्य अनुदान का शीघ्र उपयोग करने का निर्देश दिया गया।

बैठक में “टीबी मुक्त भारत अभियान” को तेज करने, HPV वैक्सीनेशन शुरू करने और खसरा-रूबेला उन्मूलन अभियान को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मातृ मृत्यु दर (MMR), नवजात मृत्यु दर (NMR) और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (U5MR) में सुधार के लिए लगातार प्रयास जरूरी हैं।

उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के विस्तार, गांव स्तर पर स्वास्थ्य जांच बढ़ाने और आयुष्मान भारत PM-JAY योजना को जल्द लागू करने पर जोर दिया। इस योजना से राज्य के लगभग 1.45 करोड़ परिवारों और वरिष्ठ नागरिकों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

बैठक में कालाजार, डेंगू, मलेरिया और लिम्फेटिक फाइलेरिया जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए सतर्क निगरानी और समय पर कार्रवाई पर भी चर्चा हुई।

सुवेंदु अधिकारी ने केंद्र सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया तथा राज्य में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने पश्चिम बंगाल के उत्तर क्षेत्र में एक नए AIIMS संस्थान और मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए केंद्र से सहयोग की मांग भी की।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर: भारत में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण

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राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा एएएम पोर्टल पर रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 31.10.2025 तक उप-स्वास्थ्य केन्द्रों (SHCs) और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों (PHCs) को सुदृढ़ करते हुए कुल 1,80,906 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAMs) [पूर्व में आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (AB-HWCs)] बनाए जा चुके हैं।

एएएम चरणबद्ध तरीके से प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की 12 सेवा पैकेज प्रदान करते हैं, जिनमें प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य सेवाएँ, संचारी रोग, गैर-संचारी रोग (NCDs), पेलिएटिव केयर एवं वृद्धजन देखभाल, सामान्य मानसिक विकारों की देखभाल, तंत्रिका संबंधी स्थितियाँ (मिर्गी, डिमेंशिया) और नशा-उपयोग विकार (तंबाकू, शराब, ड्रग्स) प्रबंधन, दंत स्वास्थ्य, ईएनटी देखभाल तथा बुनियादी आपातकालीन देखभाल शामिल हैं। इन सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए आवश्यक दवाओं एवं जांचों की सूची को विस्तृत किया गया है—PHC-AAMs पर 172 दवाएँ एवं 63 डायग्नॉस्टिक्स, तथा SHC-AAMs पर 106 दवाएँ एवं 14 डायग्नॉस्टिक्स उपलब्ध कराए गए हैं।

मुख्य सेवाओं में पाँच सामान्य एनसीडी—हाइपरटेंशन, डायबिटीज, मुख कैंसर, स्तन कैंसर और गर्भाशय ग्रीवा कैंसर—की व्यापक स्क्रीनिंग शामिल है। NP-NCD पोर्टल के अनुसार, 31.10.2025 तक SHCs एवं PHCs (ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र सहित AAMs) में कुल:

  • 38.79 करोड़ हाइपरटेंशन स्क्रीनिंग,

  • 36.05 करोड़ डायबिटीज स्क्रीनिंग,

  • 31.88 करोड़ मुख कैंसर स्क्रीनिंग,

  • 14.98 करोड़ स्तन कैंसर स्क्रीनिंग,

  • 8.15 करोड़ गर्भाशय ग्रीवा कैंसर स्क्रीनिंग की गई हैं।

इसके अतिरिक्त, सभी ऑपरेशनल एएएम में उपलब्ध टेली-कंसल्टेशन सेवाएँ लोगों को घर के नजदीक विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुँचने में सक्षम बनाती हैं, जिससे भौतिक दूरी, सेवा प्रदाताओं की कमी तथा निरंतर देखभाल से जुड़ी चुनौतियों का समाधान होता है। 31.10.2025 तक AAMs में कुल 41.14 करोड़ टेली-कंसल्टेशन किए जा चुके हैं।

फंड और अनुमोदन:

पिछले 3 वर्षों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत AAMs के लिए राज्यों के कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना (SPIP) अनुमोदन और व्यय का विवरण इस प्रकार है (रु. करोड़ में):

  • वित्त वर्ष
  • SPIP अनुमोदन
  • व्यय
  • 2022-23
  • 4,346.60
  • 2,233.53
  • 2023-24
  • 3,909.67
  • 1,590.70
  • 2024-25
  • 3,051.15
  • 1,211.02

हेल्थ डायनेमिक्स ऑफ इंडिया (HDI) — यह एक वार्षिक प्रकाशन है, जो राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा रिपोर्ट किए गए स्वास्थ्य प्रशासनिक डेटा पर आधारित है। SHCs एवं PHCs (AAMs सहित) में उपलब्ध मानव संसाधन और आधारभूत संरचना का राज्यवार विवरण HDI 2022-23 के निम्न लिंक पर उपलब्ध है:

जुलाई 2024 में, नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) ने AAM कार्यक्रम के प्रभाव और कार्यान्वयन का मूल्यांकन करने हेतु एक अध्ययन कराया। अध्ययन में कई प्रोत्साहनकारी परिणाम सामने आए, जैसे—इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार, एनसीडी प्रबंधन, ओपीडी सेवाएँ, मुफ्त दवाएँ और डायग्नॉस्टिक्स उपलब्ध होने के कारण सामुदायिक फुटफॉल में वृद्धि। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की नियुक्ति से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ मजबूत हुई हैं तथा ई-संजीवनी जैसे डिजिटल टूल्स से विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुँच आसान हुई है।

हालाँकि, रिपोर्ट में मानव संसाधन उपलब्धता, कौशल आधारित प्रशिक्षण, दवाओं एवं जांचों की निरंतर उपलब्धता, डिजिटल इंटरऑपरेबिलिटी, डेटा-आधारित योजना, अंतर-विभागीय समन्वय तथा समुदाय सहभागिता को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई गई है।

NHM के तहत, सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रदर्शन की नियमित रूप से समीक्षा बैठकें, मध्यावधि समीक्षा, वरिष्ठ अधिकारियों के फील्ड दौरे, सेवा वितरण मानक निर्धारण एवं उपलब्धियों को पुरस्कृत करने जैसी गतिविधियों के माध्यम से निगरानी की जाती है। साथ ही, योजना की प्रगति और स्थिति के आकलन हेतु कॉमन रिव्यू मिशन (CRM) का वार्षिक आयोजन भी किया जाता है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री,  प्रतापराव जाधव ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।


नॉर्वे-भारत साझेदारी पहल (NIPI) की वार्षिक बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार और सहयोग पर जोर

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केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुन्या सलीला श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आज नॉर्वे-भारत साझेदारी पहल (NIPI) की वार्षिक बैठक आयोजित की गई। नॉर्वे की भारत में राजदूत ह.ई. मे-एलिन स्टेनर ने बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस बैठक का उद्देश्य NIPI प्रगति रिपोर्ट 2025 की समीक्षा करना और 2025–26 के बजट सहित कार्य योजनाओं को मंजूरी देना था, जो इस पहल के चौथे चरण के तहत है।

बैठक को संबोधित करते हुए, पुन्या सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि “NIPI यह दर्शाता है कि समन्वित प्रयास कैसे परिणाम दे सकते हैं।” उन्होंने बताया कि भारत सरकार भी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ ‘संपूर्ण शासन दृष्टिकोण’ (Whole-of-Government Approach) के माध्यम से बेहतर परिणामों के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि भारत नवाचारों के लिए एक उत्कृष्ट प्रयोगशाला के रूप में कार्य कर रहा है और इस पहल के अंतर्गत विकसित सर्वोत्तम प्रथाओं को अन्य देशों में साझा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने IPHS ODK (Indian Public Health Standards – Open Data Kit) टूल के महत्व पर प्रकाश डाला, जो राज्यों को सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों का आकलन करने, अंतराल पहचानने और लक्षित सहायता प्राप्त करने में मदद करता है। उन्होंने साझेदारी के प्रति स्वास्थ्य मंत्रालय की सराहना और इस सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

इस अवसर पर नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने कहा कि अगले वर्ष इस साझेदारी के 20 वर्ष पूरे होंगे। उन्होंने कहा कि इस सहयोग के माध्यम से कई नवोन्मेषी और उत्प्रेरक हस्तक्षेपों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिणाम दिए हैं।

उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने इस पहल के तहत नॉर्वे द्वारा किए गए निवेश से 26 गुना अधिक निवेश किया है, जो इस सहयोग को दी जा रही प्राथमिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “भारत के विकसित राष्ट्र बनने का स्पष्ट लक्ष्य है और यह लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं में हो रहे ठोस सुधारों में झलकता है।”

बैठक में पहल की प्रमुख उपलब्धियों पर चर्चा की गई, जिनमें शामिल हैं:

  • IPHS ODK टूलकिट का विकास

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत इनोवेशन हब की स्थापना

  • आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM) के तहत सेवाओं के विस्तार के लिए Decision Support System (DSS) एल्गोरिद्म का विकास

  • पूर्व-गर्भावस्था देखभाल मॉडल

  • स्व-देखभाल आधारित गर्भाशय ग्रीवा कैंसर स्क्रीनिंग मॉडल

  • नवजात शिशुओं और बच्चों की एकीकृत घरेलू देखभाल (HBNCC) दिशानिर्देशों का निर्माण

नॉर्वे-भारत साझेदारी पहल (NIPI) भारत और नॉर्वे सरकारों के बीच एक सहयोगी समझौते पर आधारित है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में सहयोग देना है। इसका लक्ष्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) को रणनीतिक, नवोन्मेषी और उत्प्रेरक सहयोग प्रदान करना है, विशेष रूप से बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में।

इस पहल के तीन चरण पूरे हो चुके हैं और वर्तमान में इसका चौथा चरण चल रहा है, जिसमें केंद्र और राज्य स्तर पर स्वास्थ्य प्रणालियों को सशक्त बनाने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है।

बैठक में स्मिता अराधना पात्रनायक (अतिरिक्त सचिव, स्वास्थ्य मंत्रालय), मीरा श्रीवास्तव (संयुक्त सचिव, स्वास्थ्य मंत्रालय), डॉ. अशफाक भट (कार्यक्रम निदेशक, NIPI), नॉर्वे दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी, और NIPI समर्थित राज्यों के स्वास्थ्य सचिव/मिशन निदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

NHM कर्मचारियों की हड़ताल पर बोले स्वास्थ्य मंत्री - सरकार साथ है, सेवाएँ प्रभावित नहीं

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 रायपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मचारियों की हड़ताल पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सभी कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त करने की अपील की।


मंत्री जायसवाल ने कहा कि सरकार ने 27% वेतन वृद्धि का वादा किया था, जिसमें 22% लागू हो चुका है। इसके अलावा कैशलेस इलाज की सीमा 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है।

नियमितीकरण की मांग पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि कुछ विषय केंद्र सरकार से जुड़े हैं और इसके लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। उन्होंने दावा किया कि हड़ताल के बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं बाधित नहीं हुई हैं और सभी व्यवस्थाएं संचालित हो रही हैं।

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