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IGI Airport पर भारत की पहली SkyCast प्रणाली का उद्घाटन, विमानन सुरक्षा और मौसम पूर्वानुमान में नई क्रांति

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) पर भारत की पहली “SkyCast System” का उद्घाटन किया और इसे भारतीय विमानन क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत बताया।

मंत्री ने बताया कि इस तरह की केवल 18 उन्नत प्रणालियाँ अभी तक विश्वभर में स्थापित हैं, और भारत अब 19वाँ देश बन गया है जिसने विमानन मौसम निगरानी के लिए इस एकीकृत एटमॉस्फेरिक रिमोट सेंसिंग सिस्टम को अपनाया है। IGI एयरपोर्ट के बाद ऐसी दूसरी सुविधा जेवर एयरपोर्ट पर स्थापित की जाएगी और इसके बाद इसे देश के अन्य हवाई अड्डों पर भी विस्तारित किया जाएगा।

उद्घाटन समारोह में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन, IMD, IITM, GMR और विमानन क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्काईकास्ट सिस्टम और फॉग ऑब्जर्वेटरी सुविधा का उद्घाटन किया, जिसके बाद IITM के वैज्ञानिकों द्वारा तकनीकी प्रस्तुति और डेमो दिया गया।

डॉ. सिंह ने कहा कि “मिशन मौसम” के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच ने इस प्रकार की उन्नत मौसम अवसंरचना को संभव बनाया है। उन्होंने कहा कि स्काईकास्ट विमानन सुरक्षा में बड़ा बदलाव लाएगा और गंभीर मौसम स्थितियों में रीयल-टाइम जानकारी प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि यह प्रणाली यात्रियों के लिए उड़ानों में देरी, डायवर्जन और रद्दीकरण को काफी हद तक कम करने में मदद करेगी, क्योंकि यह पायलटों को लगभग तीन घंटे पहले तक सटीक चेतावनी दे सकेगी।

स्काईकास्ट प्रणाली में अत्याधुनिक एटमॉस्फेरिक तकनीकें शामिल हैं, जैसे रडार विंड प्रोफाइलर, SODAR, माइक्रोवेव रेडियोमीटर, ग्राउंड-बेस्ड फॉग एरोसोल स्पेक्ट्रोमीटर (GFAS) और CL61 LiDAR आधारित सीलामीटर। यह सिस्टम धुंध, टर्बुलेंस, दृश्यता और मौसम संबंधी रीयल-टाइम डेटा प्रदान करता है।

मंत्री ने बताया कि इसका मुख्य घटक रडार विंड प्रोफाइलर है, जो लगभग 3 किलोमीटर ऊंचाई तक हवा की गति, दिशा और टर्बुलेंस की निगरानी करता है, जिससे लैंडिंग और टेकऑफ अधिक सुरक्षित हो सकें।

फॉग मॉनिटरिंग सिस्टम विशेष रूप से दिल्ली जैसे शहरों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां प्रदूषण और धुंध की परस्पर क्रिया दृश्यता को प्रभावित करती है।

उन्होंने कहा कि यह प्रणाली विमानन सुरक्षा, मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन को नई मजबूती प्रदान करेगी।

डॉ. रविचंद्रन ने कहा कि इस प्रकार की तकनीकें भारत की मौसम पूर्वानुमान क्षमता को और अधिक सटीक बनाएंगी और मिशन मौसम के तहत देशभर में ऐसी प्रणालियाँ विस्तारित की जाएंगी।

स्काईकास्ट प्रणाली भारत की “वेदर-स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर” दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सुरक्षित, भरोसेमंद और तकनीक-संचालित विमानन सेवाओं की ओर देश को आगे ले जाएगी।

IITM पुणे में WISE-2026 के तहत मौसम और जलवायु स्टार्टअप्स के लिए इन्क्यूबेशन सेंटर का शुभारंभ

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भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे, जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के अंतर्गत आता है, ने आज मौसम और जलवायु से संबंधित स्टार्टअप्स के लिए अपना समर्पित इन्क्यूबेशन सेंटर औपचारिक रूप से शुरू किया। इस ऐतिहासिक अवसर को एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “Weather and Climate Innovation Meet for Startups and Entrepreneurs (WISE-2026)” के साथ मनाया गया, जो भारत में मौसम सेवाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी के एक नए युग की शुरुआत का संकेत देता है।

इस केंद्र का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन ने किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. शैलेश नाइक (निदेशक, NIAS एवं पूर्व सचिव, MoES), डॉ. सूर्यचंद्र राव (निदेशक, IITM) तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। यह इन्क्यूबेशन सेंटर “नेशनल एंटरप्राइज फॉर एटमॉस्फेरिक टेक्नोलॉजी (NEAT)” का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो “मिशन मौसम” के अंतर्गत एक महत्वाकांक्षी पहल है और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है।

मौसम और जलवायु चुनौतियों से निपटने में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर देते हुए डॉ. एम. रविचंद्रन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की जटिलता बढ़ रही है, इसलिए पारंपरिक शोध से आगे बढ़कर एक समावेशी और बहु-हितधारक प्रणाली विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि “मिशन मौसम” एक मौसम-स्मार्ट और जलवायु-स्मार्ट राष्ट्र बनाने की दिशा में एक आधारभूत कदम है, जिसमें उन्नत अवलोकन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मॉडलिंग और स्थानीय स्तर पर जानकारी के प्रसार को शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा—

“विभिन्न क्षेत्रों के युवा उद्यमियों को अन्य हितधारकों की जरूरतों की बेहतर समझ होती है, इसलिए हमें मिलकर काम करना होगा। यह सहयोग न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि जीवन और आजीविका बचाने के लिए भी आवश्यक है।”

प्रगति के चार स्तंभ: सचिव ने मौसम विज्ञान प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए चार मुख्य आधार बताए—

  1. अवलोकन (Observations)

  2. मॉडलिंग (Modeling)

  3. उपयोगकर्ता-विशिष्ट अनुप्रयोग (User-specific Applications)

  4. सूचना प्रसार (Dissemination)

मिशन मौसम: इसे पाँच वर्षों की एक योजना के रूप में लागू किया जाएगा, जिसका उद्देश्य मौसम पूर्वानुमान और जलवायु विश्लेषण को विभिन्न मंत्रालयों और स्टार्टअप्स के सहयोग से एक “स्वास्थ्य प्रणाली दृष्टिकोण” के रूप में विकसित करना है।

उन्होंने नवाचारकर्ताओं को मंत्रालय के मुक्त डेटा संसाधनों—जैसे रिमोट सेंसिंग और रिऐनालिसिस डेटा—का उपयोग करने के लिए आमंत्रित किया, ताकि कृषि, विमानन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सटीक और स्थानीय समाधान विकसित किए जा सकें।

कार्यक्रम के दौरान एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा भी हुई, जिसमें यह बताया गया कि मौसम और जलवायु विज्ञान अब शोध से आगे बढ़कर स्टार्टअप-आधारित व्यावहारिक समाधानों की ओर बढ़ रहा है। इसमें कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया।

इस अवसर पर यह भी कहा गया कि “मौसम की जानकारी ही आर्थिक जानकारी है”, और वैज्ञानिक डेटा को वास्तविक जीवन के उपयोगी उपकरणों में बदलना आवश्यक है।

WISE 2026 कार्यक्रम में लगभग 400 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 100 स्टार्टअप संस्थापक शामिल थे। इस कार्यक्रम में NCMRWF, IMD, NCPOR, ICRISAT, IISER पुणे तथा IIT दिल्ली, IIT बॉम्बे और IIT गांधीनगर सहित कई प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञ और शोधकर्ता शामिल हुए।

यह पहल भारत में जलवायु तकनीक (Climate Tech) को बढ़ावा देने और एक मजबूत, स्मार्ट एवं लचीली मौसम प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मिशन मौसम: उन्नत प्रौद्योगिकी के माध्यम से सटीक मौसम पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली की दिशा में भारत का कदम

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 केंद्रीय क्षेत्र की योजना “मिशन मौसम (Mission Mausam)” का उद्देश्य देश में मौसम और जलवायु से जुड़े अवलोकन, समझ, मॉडलिंग और पूर्वानुमान क्षमताओं को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ करना है, ताकि अधिक उपयोगी, सटीक और समयबद्ध सेवाएं प्रदान की जा सकें। इस मिशन का लक्ष्य पृथ्वी प्रणाली (Earth System) दृष्टिकोण को अपनाते हुए पृथ्वी प्रणाली अवलोकन के विभिन्न घटकों को मजबूत करना है, जिससे निर्बाध मौसम और जलवायु सेवाओं के लिए सटीक पूर्वानुमान और प्रभावी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित की जा सके।

मिशन मौसम के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं:

  • अत्याधुनिक मौसम निगरानी प्रौद्योगिकियों और प्रणालियों का विकास

  • उच्च स्थानिक एवं कालिक रेज़ोल्यूशन के साथ वायुमंडलीय अवलोकनों का विस्तार और सुदृढ़ीकरण

  • अगली पीढ़ी के डॉप्लर रडार, विंड प्रोफाइलर और उन्नत उपकरणों से युक्त उपग्रहों की तैनाती

  • उन्नत उच्च-प्रदर्शन संगणना (HPC) प्रणालियों का कार्यान्वयन

  • मौसम और जलवायु प्रक्रियाओं की समझ को बढ़ाना तथा पूर्वानुमान क्षमताओं में सुधार

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) सहित उन्नत पृथ्वी प्रणाली मॉडल और डेटा-आधारित विधियों का विकास

  • प्रभावी मौसम प्रबंधन के लिए प्रौद्योगिकियों और प्रोटोकॉल का निर्माण

  • अंतिम छोर तक सूचना पहुंच सुनिश्चित करने हेतु अत्याधुनिक निर्णय सहायता प्रणाली (DSS) और प्रसारण प्रणाली की स्थापना

  • क्षमता निर्माण और अनुसंधान सहयोग को मजबूत करना

मिशन मौसम के कार्यान्वयन से उच्च स्थानिक और कालिक रेज़ोल्यूशन पर मौसम पूर्वानुमान की क्षमता में वृद्धि होगी, चरम मौसम घटनाओं के पूर्वानुमान में सुधार होगा तथा ‘सभी के लिए प्रारंभिक चेतावनी (Early Warning for All)’ पहल को समर्थन देने के लिए अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी सुदृढ़ होगी।

मिशन मौसम के अंतर्गत भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) और राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (NCMRWF) में अत्याधुनिक उच्च-प्रदर्शन संगणना प्रणालियां स्थापित की गई हैं। इसके साथ ही कई डॉप्लर मौसम रडार और अन्य इन-सीटू अवलोकन नेटवर्क भी लगाए गए हैं। इन प्रगतियों से देश के मौसम निगरानी अवसंरचना को मजबूती मिली है और पूर्वानुमान मॉडलों में सुधार हुआ है, जिससे लगभग 6 किलोमीटर के स्थानिक रेज़ोल्यूशन पर मौसम पूर्वानुमान संभव हो सका है। परिणामस्वरूप, मौसम पूर्वानुमानों की सटीकता और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने IMD के दो Doppler Weather Radars, सौर ऊर्जा प्रणाली और मौसम विज्ञान संग्रहालय का उद्घाटन किया

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 डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के तीन प्रमुख कार्यक्रमों का उद्घाटन किया। इनमें शामिल हैं: रायपुर और मंगलूरु में दो अत्याधुनिक डॉपलर वेदर राडार (DWRs), Mausam Bhawan में नई सौर ऊर्जा प्रणाली, और छात्रों एवं युवाओं के लिए मौसम विज्ञान संग्रहालय।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में IMD ‘मिशन मौसम’ परियोजना को तेजी से लागू कर रहा है, जिसे 14 जनवरी 2025 को IMD के 150 वर्षीय उत्सव पर देश को समर्पित किया गया था। उन्होंने बताया कि देश के राडार नेटवर्क को लगभग तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया था। अब कुछ ही महीनों में 126 राडार स्थापित हो चुके हैं, जबकि लक्ष्य 2027 तक 47 से लगभग तीन गुना बढ़ाने का था।

रायपुर में ड्यूल पोलराइज्ड, सॉलिड-स्टेट पावर एम्पलीफायर आधारित C-बैंड डॉपलर वेदर राडार स्थापित किया गया है, जो 250 किमी की कवरेज क्षमता के साथ मानसून डिप्रेशन, निम्न दबाव प्रणाली, भारी वर्षा, तूफान, बिजली, ओले, हवाओं और उथल-पुथल का पता लगा सकता है। यह राडार छत्तीसगढ़, आंतरिक ओड़िशा, पूर्व मध्य प्रदेश, दक्षिण पश्चिम झारखंड और पूर्व उत्तर प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में IMD की भविष्यवाणी क्षमताओं को मजबूत करेगा।

मंगलूरु में दूसरा C-बैंड डॉपलर वेदर राडार स्थापित किया गया है, जो कर्नाटक, गोवा, दक्षिण कोंकण, उत्तरी लक्षद्वीप और कर्नाटक, केरल, गोवा और दक्षिण महाराष्ट्र के क्षेत्रीय तूफानों और गंभीर मौसम की निगरानी करेगा। यह कर्नाटक का पहला IMD राडार है और पश्चिमी तट पर आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दोनों राडार ‘Make in India’ पहल के तहत विकसित किए गए हैं।

डॉ. सिंह ने मौसम विज्ञान संग्रहालय का भी उद्घाटन किया, जो छात्रों, शोधकर्ताओं और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। संग्रहालय में ऐतिहासिक मौसम उपकरण, ऊपरी वायु अवलोकन प्रणाली, संचार उपकरण, राडार और उपग्रह घटक प्रदर्शित किए गए हैं।

इसके अलावा, Mausam Bhawan परिसर में 771 kWp सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित की गई है, जिसमें 1,315 सौर पैनल शामिल हैं। इस पहल से IMD की ऊर्जा खपत पूरी तरह से पूरी होने के बाद अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दी जा सकेगी, जिससे पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ दोनों होंगे।

डॉ. सिंह ने कहा कि ये लॉन्च IMD की भूमिका को मजबूत करते हैं और देश के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान देंगे। उन्होंने IMD को “विश्व बंधु” करार दिया क्योंकि यह पड़ोसी देशों को मौसम सेवाएँ और आपदा सलाह प्रणालियाँ उपलब्ध कराता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने ‘मिशन मौसम’ की प्रगति की उच्च-स्तरीय समीक्षा की

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मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का उद्देश्य महत्वाकांक्षी ‘मिशन मौसम’ पहल के अंतर्गत चल रही खरीद और स्थापना से संबंधित प्रगति की समीक्षा करना था।

मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे समयसीमा में तेजी लाएँ, विशेषकर इसलिए क्योंकि यह एक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम है जिसकी घोषणा स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की है।

बैठक में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रवीचंद्रन सहित मंत्रालय और IMD के वरिष्ठ अधिकारी एवं वैज्ञानिक उपस्थित थे। अधिकारियों ने देश भर में लगाए जा रहे विभिन्न प्रेक्षण एवं रडार प्रणालियों की खरीद, बुनियादी ढाँचे की उपलब्धता और तेज की गई स्थापना समयसीमा की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जोर देते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को समर्पित मिशन मौसम, भारत की मौसम पूर्वानुमान और जलवायु निगरानी क्षमताओं में एक बड़ा सुधार है। उन्होंने कहा कि खरीद और स्थापना गतिविधियों का समय पर निष्पादन प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने, आपदा तैयारी को बढ़ाने और अधिक सटीक, स्थान-विशिष्ट मौसम पूर्वानुमान प्रदान करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मंत्री ने IMD और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश दिया कि खरीद प्रक्रियाएँ पारदर्शी, कुशल और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप हों। उन्होंने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में स्थापना कार्यों को तेज करने और फील्ड-स्तर की प्रगति पर नज़र रखने के लिए उन्नत ट्रैकिंग प्रणालियाँ अपनाने पर भी बल दिया।

डॉ. सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि IMD और मंत्रालय के बीच समन्वित प्रयासों से मिशन मौसम के तहत निर्धारित लक्ष्य निर्धारित समयसीमा के भीतर ही प्राप्त कर लिए जाएंगे।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का दौरा किया, बहु-आकस्मिक प्रारंभिक चेतावनी निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS) की समीक्षा की

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का दौरा किया और विभाग द्वारा विकसित वेब-जीआईएस आधारित बहु-आकस्मिक प्रारंभिक चेतावनी निर्णय समर्थन प्रणाली (Multi-Hazard Early Warning Decision Support System – DSS) की समीक्षा की।

मंत्री ने विभाग द्वारा स्वदेशी, तकनीक-आधारित और नागरिक-केंद्रित मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों के विकास में हुई उल्लेखनीय प्रगति की सराहना की, जिससे आपदा प्रबंधन की तैयारी और जनसुरक्षा को मजबूती मिली है। उन्होंने बताया कि इस DSS प्रणाली के माध्यम से विदेशी विक्रेताओं पर निर्भरता समाप्त होने और ₹5.5 करोड़ के वार्षिक रखरखाव व्यय से बचाव के कारण लगभग ₹250 करोड़ की लागत बचत हुई है, जो “आत्मनिर्भर भारत” पहल को सशक्त बनाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने “मौसमग्राम” (हर हर मौसम, हर घर मौसम) नामक नागरिक-केंद्रित प्लेटफ़ॉर्म की भी समीक्षा की, जो गाँव स्तर तक हाइपर-लोकल और स्थान-विशिष्ट मौसम पूर्वानुमान प्रदान करता है। यह प्रणाली अगले 36 घंटे तक प्रति घंटे का पूर्वानुमान, अगले 5 दिनों तक हर 3 घंटे का पूर्वानुमान और अगले 10 दिनों तक हर 6 घंटे का पूर्वानुमान देती है। नागरिक अपने क्षेत्र का मौसम विवरण पिन कोड, स्थान नाम या राज्य, ज़िला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। यह सभी भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे देश के प्रत्येक हिस्से में नागरिकों को सटीक और समय पर मौसम जानकारी मिल सके।

IMD ने अपने पूर्वानुमान और चेतावनी निर्माण प्रक्रिया को पूरी तरह से पुनर्गठित किया है, जिससे वास्तविक समय में अलर्ट जारी किए जा सकें। अब पूर्वानुमान की सटीकता में 15–20% की वृद्धि हुई है, तैयारी समय 3 घंटे घटा है, और लीड अवधि 5 से बढ़कर 7 दिन तक हो गई है।

IMD अधिकारियों के साथ बातचीत के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने “मौसमग्राम” को और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने के लिए इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तंत्र शामिल करने का सुझाव दिया। उन्होंने यह भी कहा कि बहु-आकस्मिक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को और विकसित किया जाए ताकि नागरिकों को स्पष्ट, क्रियाशील और समय पर अलर्ट मिल सकें, जिससे आपदाओं को रोका जा सके और पर्याप्त तैयारी की जा सके।

मंत्री ने IMD टीम को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2025 जीतने पर बधाई दी, जो विशाखापट्टनम में आयोजित 28वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के दौरान DSS के माध्यम से सार्वजनिक सेवा में डिजिटल तकनीक के उत्कृष्ट उपयोग के लिए प्रदान किया गया। उन्होंने विशेष स्वच्छता कार्यक्रम के तहत पुराने फ़ाइलों और ई-वेस्ट के निपटान से ₹30 लाख की आय और 600 वर्ग मीटर कार्यालय क्षेत्र खाली करने के लिए भी विभाग की सराहना की।

इससे पहले, मंत्री ने नई दिल्ली स्थित IMD मुख्यालय “मौसम भवन” में आयोजित विशेष स्वच्छता कार्यक्रम 5.0 में भाग लिया।

“एक पेड़ मां के नाम” पहल के तहत, डॉ. जितेंद्र सिंह ने IMD परिसर में पौधारोपण किया और स्वच्छता कार्यों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 50 सफाई मित्रों को सम्मानित किया।

मिशन मौसम के अंतर्गत आधुनिक मौसम उपकरणों की स्थापना और कमीशनिंग जारी है, जो 2030 तक IMD की पूर्वानुमान क्षमता को सशक्त बनाएगा। इससे 5x5 किलोमीटर स्तर तक गंभीर मौसम पूर्वानुमान, डायनेमिक इम्पैक्ट-आधारित फोरकास्टिंग और जोखिम-आधारित प्रारंभिक चेतावनियां संभव होंगी। इसका उद्देश्य है कि 2030 तक हर घर तक समय पर मौसम अलर्ट पहुँचे, जिससे “हर हर मौसम, हर घर मौसम” का विज़न साकार हो सके।

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