Media24Media.com: #MentalHealth

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #MentalHealth. Show all posts
Showing posts with label #MentalHealth. Show all posts

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी: लगातार मानसिक प्रताड़ना और शादी का दबाव आत्महत्या के लिए उकसाने के समान हो सकता है

No comments Document Thumbnail

बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाए और उस पर लगातार शादी करने का दबाव बनाया जाए, तो ऐसी परिस्थितियां आत्महत्या के लिए उकसाने (Abetment of Suicide) के दायरे में आ सकती हैं।

अदालत ने अपने अवलोकन में कहा कि किसी व्यक्ति पर लगातार मानसिक दबाव, उत्पीड़न और भावनात्मक प्रताड़ना उसके मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। यदि इस तरह की परिस्थितियां किसी व्यक्ति को आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर करती हैं, तो मामले के तथ्यों के आधार पर इसे आत्महत्या के लिए उकसाने के रूप में देखा जा सकता है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में प्रत्येक घटना के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों का सावधानीपूर्वक परीक्षण किया जाना आवश्यक है। अदालत की यह टिप्पणी मानसिक उत्पीड़न और सामाजिक दबाव से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी दृष्टिकोण के रूप में देखी जा रही है।

इस फैसले ने यह संदेश भी दिया है कि किसी भी व्यक्ति पर लगातार मानसिक दबाव या अनावश्यक सामाजिक एवं वैवाहिक दबाव बनाना गंभीर कानूनी परिणामों का कारण बन सकता है।

AIIA की आयुर्वेदिक पहल से पुलिस कर्मियों में तनाव प्रबंधन को मिली नई दिशा, 35,000 से अधिक कर्मियों को लाभ

No comments Document Thumbnail

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली ने महामारी के दौरान “पुलिस कर्मियों के लिए आयुर्वेदिक हस्तक्षेप द्वारा तनाव प्रबंधन” शीर्षक से एक जनस्वास्थ्य पहल (PHI) परियोजना शुरू की, जिसने उल्लेखनीय प्रभाव डाला है। अब तक इस परियोजना के माध्यम से 35,704 पुलिस कर्मियों में जागरूकता पैदा की जा चुकी है और इसे संस्थान की एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

AIIA के निदेशक प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मानसिक स्वास्थ्य की परिभाषा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपनी क्षमताओं को पहचानता है, जीवन के सामान्य तनावों से निपट सकता है, उत्पादक रूप से कार्य कर सकता है और समाज में योगदान देने में सक्षम होता है। इस दृष्टि से मानसिक स्वास्थ्य व्यक्तिगत कल्याण और समाज के प्रभावी संचालन की नींव है।

यह परियोजना प्रो. (डॉ.) मेधा कुलकर्णी (प्रधान अन्वेषक) और प्रो. (डॉ.) मीना देओगड़े (सह-प्रधान अन्वेषक) के नेतृत्व में संचालित हो रही है। इस पहल के अंतर्गत एक विशेष तनाव प्रबंधन मोबाइल एप्लिकेशन भी विकसित किया गया है। दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त (कल्याण प्रभाग) अतुल कटियार, IPS ने आयुर्वेद की भूमिका और महत्व की सराहना करते हुए इसकी शाश्वत ज्ञान परंपरा और समग्र उपचार क्षमता को रेखांकित किया तथा इस परियोजना के लिए संस्थान का आभार व्यक्त किया।

परियोजना के बारे में बताते हुए प्रो. (डॉ.) मीना देओगड़े ने कहा कि पुलिस कर्मी अक्सर अत्यधिक शारीरिक और मानसिक दबाव में कार्य करते हैं, जिससे वे तनाव से संबंधित विकारों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य आयुर्वेद पर आधारित समग्र, निवारक और उपचारात्मक दृष्टिकोण के माध्यम से उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का संरक्षण करना है। इस पहल को मिले सकारात्मक प्रतिसाद और ठोस परिणाम इसकी प्रभावशीलता को दर्शाते हैं।

परियोजना के तहत 206 शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 7,752 पुलिस कर्मियों की तनाव, उच्च रक्तचाप और अन्य संबंधित समस्याओं के लिए जांच की गई। इनमें से 1,843 कर्मियों को आयुर्वेदिक उपचार प्रदान किया गया, जिसमें आंतरिक औषधियों के साथ शिरोधारा जैसी चिकित्सा पद्धतियां शामिल थीं। दिल्ली पुलिस के कल्याण विभाग ने दो इकाइयों में स्थल उपलब्ध कराकर इस पहल को सहयोग दिया।

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली ने 24 मार्च 2026 को इस PHI परियोजना का एक दिवसीय प्रसार कार्यशाला भी आयोजित की। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अतुल कटियार, IPS (विशेष पुलिस आयुक्त, कल्याण प्रभाग, दिल्ली पुलिस) उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के सलाहकार डॉ. कौस्तुभ उपाध्याय शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता AIIA के निदेशक प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने की। साथ ही, आयुष मंत्रालय की PHI परियोजना की जनस्वास्थ्य सलाहकार डॉ. सुनीला गर्ग भी उपस्थित रहीं।

कार्यशाला में विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए। पूर्वोत्तर आयुर्वेद एवं लोक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (NEIAFMR), पासीघाट, अरुणाचल प्रदेश की सहायक प्रोफेसर डॉ. सजीना ए. ने “स्मृति मेडिटेशन के माध्यम से तनाव प्रबंधन” विषय पर व्याख्यान दिया। वहीं केरल के कोट्टक्कल स्थित VPSV आयुर्वेद कॉलेज की डॉ. अनुपमा कृष्णन ने “जब काम मन को प्रभावित करता है: व्यावसायिक तनाव और उसका आयुर्वेदिक प्रबंधन” विषय पर चर्चा की, जिसमें आयुर्वेद आधारित समग्र और निवारक उपायों पर जोर दिया गया।

यह कार्यशाला अनुसंधान निष्कर्षों के प्रसार और विशेष रूप से पुलिस कर्मियों जैसे उच्च जोखिम वाले पेशों में व्यावसायिक तनाव से निपटने में आयुर्वेद की भूमिका को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई।

मानसिक स्वास्थ्य: एक समग्र दृष्टिकोण – भारत में पहल, चुनौतियाँ और प्रगति

No comments Document Thumbnail

मानसिक स्वास्थ्य केवल खुश या अच्छे मूड में रहने का नाम नहीं है — यह हमारे मानसिक-भावनात्मक, सामाजिक, संज्ञानात्मक और शारीरिक क्षमताओं का सम्मिलन है। जीवन की चुनौतियों का सामना करना और उसे पूरी तरह जी पाना तभी संभव है जब हम अपने मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य मानव अधिकारों का एक बुनियादी हिस्सा है और यह व्यक्तिगत, सामुदायिक और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। कोविड-19 महामारी ने वैश्विक स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को और अधिक उजागर किया है।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य

WHO के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ दुनिया भर में विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक हैं। 2021 में अनुमानित 1.1 अरब लोग किसी न किसी मानसिक विकार से ग्रसित थे। भारत में लगभग हर 100 में से 11 लोग मानसिक स्वास्थ्य विकारों से प्रभावित हैं।

‘सतत विकास लक्ष्यों (SDGs)’ के लक्ष्य 3 में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और मानसिक स्वास्थ्य के संवर्धन का विशेष उल्लेख है। अवसाद और चिंता विकार विशेष रूप से युवाओं (15-29 वर्ष) में प्रमुख रूप से देखे जाते हैं।

भारत में मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2015–16) के अनुसार:

  • 10.6% भारतीय वयस्क किसी न किसी मानसिक विकार से पीड़ित हैं।

  • 15% आबादी को मानसिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

  • मानसिक विकार शहरी क्षेत्रों (13.5%) में ग्रामीण क्षेत्रों (6.9%) की तुलना में अधिक हैं।

  • महिलाएँ (20%) पुरुषों (10%) की तुलना में अधिक प्रभावित होती हैं।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB, 2023) के अनुसार, भारत में 2023 में 1,71,418 आत्महत्याएँ दर्ज की गईं, जिनमें 72.8% पुरुष और 27.2% महिलाएँ थीं।

उपचार अंतर (Treatment Gap)

2015–16 के NIMHANS सर्वेक्षण ने दिखाया कि 70% से 92% मानसिक रोगियों को उचित उपचार नहीं मिल पाता — इसका मुख्य कारण है जागरूकता की कमी, सामाजिक कलंक और विशेषज्ञों की कमी।
WHO के अनुसार, प्रति 1 लाख जनसंख्या पर कम से कम 3 मनोचिकित्सक होने चाहिए, जबकि भारत में केवल 0.75 मनोचिकित्सक प्रति 1 लाख हैं।

मानसिक स्वास्थ्य का प्रभाव

शारीरिक प्रभाव: अवसाद से ग्रसित लोगों में हृदय रोग का जोखिम 72% तक बढ़ जाता है (Lancet Psychiatry, 2025)।
आर्थिक प्रभाव: अवसाद और चिंता वैश्विक अर्थव्यवस्था को हर साल लगभग 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की उत्पादकता हानि पहुँचाते हैं।
सामाजिक प्रभाव: सामाजिक अलगाव, संबंधों में तनाव, और भेदभाव के कारण मानसिक स्वास्थ्य और अधिक बिगड़ता है।

सामाजिक कलंक और आत्महत्या जोखिम

मानसिक रोगों से जुड़ा कलंक (stigma) इलाज में सबसे बड़ी बाधा है। WHO (2025) के अनुसार, हर साल 7 लाख से अधिक लोग आत्महत्या करते हैं। मानसिक रोगियों में आत्महत्या का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में 16 गुना अधिक होता है।

युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य संकट

WHO के अनुसार, आधे से अधिक मानसिक विकार 14 वर्ष की आयु तक और 75% 24 वर्ष की आयु तक शुरू हो जाते हैं। किशोरावस्था में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ शैक्षणिक प्रदर्शन, नशे की प्रवृत्ति और आत्म-हानि से जुड़ी होती हैं।

कोविड-19 और मानसिक स्वास्थ्य

महामारी के दौरान चिंता, अवसाद, और अकेलेपन के मामलों में तेजी आई। WHO ने पाया कि महामारी के बाद चिंता विकारों में 25% वृद्धि हुई।

भारत सरकार की पहलें

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP) – 1982

  • उद्देश्य: मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली में एकीकृत करना।

  • 1996 में जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (DMHP) के रूप में विस्तारित किया गया — अब यह 767 जिलों को कवर करता है।

राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम रणनीति (NSPS) – 2022

  • लक्ष्य: 2030 तक आत्महत्या दर में 10% की कमी लाना।

  • प्रमुख उपाय: स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य जांच, हेल्पलाइन, और जागरूकता अभियान।

आयुष्मान भारत और मानसिक स्वास्थ्य

  • 1.75 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई गई हैं।

  • PM-JAY योजना के तहत मानसिक रोगों के लिए प्रति परिवार ₹5 लाख तक का बीमा कवरेज।

  • टेली-मानस (Tele-MANAS) के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की टेलीफोनिक पहुँच।

टेली-मानस हेल्पलाइन: 14416 / 1800-891-4416

  • अक्टूबर 2025 तक 28 लाख से अधिक कॉल्स हैंडल की गईं।

  • WHO ने इसे एक नवोन्मेषी और प्रभावी मॉडल के रूप में मान्यता दी है।

वैश्विक नीतिगत पहलें

WHO की "Comprehensive Mental Health Action Plan 2013–2030" का उद्देश्य है —

  • समुदाय-आधारित देखभाल को बढ़ावा देना

  • मानसिक स्वास्थ्य को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) में एकीकृत करना

  • सामाजिक परिवेश में सुधार और डिजिटल समाधान का उपयोग

आर्थिक सर्वेक्षण 2024–25 की सिफारिशें

  • विद्यालयों में मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा को सशक्त बनाना

  • कार्यस्थलों पर तनाव और थकान से निपटने के लिए नीतियाँ लागू करना

  • Tele-MANAS और AI-आधारित समाधान को बढ़ावा देना

निष्कर्ष

मानसिक स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास का मुद्दा है। भारत ने Tele-MANAS, NMHP, और Ayushman Bharat जैसी पहलों के माध्यम से उल्लेखनीय प्रगति की है।
फिर भी, जागरूकता बढ़ाना, विशेषज्ञों का प्रशिक्षण, और सामाजिक कलंक को समाप्त करना जरूरी है ताकि हर भारतीय को सुलभ, समावेशी और गरिमामय मानसिक स्वास्थ्य सेवा मिल सके।


28 पन्नों के सुसाइड नोट ने खोली पोल — ओला इलेक्ट्रिक के सीईओ पर लगा गंभीर आरोप

No comments Document Thumbnail

बेंगलुरु- ओला इलेक्ट्रिक में कार्यरत एक 38 वर्षीय इंजीनियर ने आत्महत्या कर ली। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस को 28 पन्नों का सुसाइड नोट मिला है, जिसमें इंजीनियर ने अपमान और मानसिक तनाव का ज़िक्र किया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इंजीनियर ने कार्यस्थल पर अत्यधिक दबाव, अपमानजनक व्यवहार और तनावपूर्ण माहौल का सामना करने की बात कही है।इस मामले में पुलिस ने ओला इलेक्ट्रिक के सीईओ भाविश अग्रवाल और कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने (abetment to suicide) का मामला दर्ज किया है।

फिलहाल जांच जारी है, और पुलिस कंपनी के आंतरिक कार्य माहौल से जुड़ी जानकारियां इकट्ठा कर रही है।यह घटना एक बार फिर से कॉर्पोरेट जगत में मानसिक स्वास्थ्य और कार्यस्थल की संस्कृति को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

मुख्य बिंदु:

  • मृतक: 38 वर्षीय इंजीनियर, ओला इलेक्ट्रिक कर्मचारी

  • सुसाइड नोट: 28 पन्नों का, जिसमें अपमान और तनाव का ज़िक्र

  • आरोपी: सीईओ भाविश अग्रवाल और एक शीर्ष अधिकारी

  • मामला: आत्महत्या के लिए उकसाने का (FIR दर्ज)

  • जांच: पुलिस कर रही है गहराई से पड़ताल


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.