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भारतीय तटरक्षक बल ने समुद्र में फंसे छह मछुआरों का सुरक्षित किया रेस्क्यू

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नई दिल्ली/मंगलुरु- भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) ने 29 जून 2026 को मंगलुरु तट के पास समुद्र में संकटग्रस्त भारतीय मछली पकड़ने वाली नाव आईएफबी ‘मंजू माथा’ (IFB Manju Matha) से छह मछुआरों को सफलतापूर्वक बचाया। यह चुनौतीपूर्ण समुद्री खोज एवं बचाव (Search and Rescue - SAR) अभियान भारतीय तटरक्षक पोत आईसीजीएस सचेत (ICGS Sachet) द्वारा अंजाम दिया गया।

तटरक्षक बल को शाम लगभग 4 बजे वीएचएफ रेडियो के माध्यम से संकट संदेश प्राप्त हुआ। संदेश में बताया गया कि सूरतकल तट से लगभग 33 समुद्री मील दूर स्थित मछली पकड़ने वाली नाव में समुद्र की ऊंची लहरों और खराब मौसम के कारण गंभीर जलभराव और नाव के ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जिससे उसमें सवार सभी छह मछुआरों की जान खतरे में पड़ गई है।

संदेश मिलते ही भारतीय तटरक्षक बल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आईसीजीएस सचेत को घटनास्थल की ओर रवाना किया और संकटग्रस्त नौका तक पहुंचकर राहत अभियान शुरू किया।

अत्यंत खराब मौसम, ऊंची लहरों, तेज हवाओं और कम दृश्यता जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद तटरक्षक दल ने उच्च स्तर की दक्षता और साहस का परिचय दिया। अभियान के दौरान विशेष रूप से खराब समुद्री परिस्थितियों के लिए विकसित रिमोट-ऑपरेटेड लाइफबॉय का उपयोग कर सभी मछुआरों तक सुरक्षित पहुंच बनाई गई और उन्हें एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकाला गया।

शाम 6 बजे तक सभी छह मछुआरों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया गया। इसके बाद आईसीजीएस सचेत बचाए गए मछुआरों को सुरक्षित उतारने के लिए न्यू मंगलुरु बंदरगाह की ओर रवाना हो गया।

यह अभियान समुद्र में मानव जीवन की सुरक्षा के प्रति भारतीय तटरक्षक बल की अटूट प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। साथ ही यह आधुनिक तकनीक, उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, साहस और पेशेवर दक्षता के प्रभावी समन्वय को भी दर्शाता है, जिसके बल पर तटरक्षक बल सबसे कठिन समुद्री आपात स्थितियों का भी सफलतापूर्वक सामना कर रहा है।

ओमान तट के पास मिसाइल हमले का शिकार हुआ टैंकर, सभी 24 भारतीय चालक दल के सदस्य सुरक्षित बचाए गए

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नई दिल्ली- भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) के समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (MRCC) मुंबई को 8 जून 2026 को दोपहर लगभग 2:20 बजे सूचना मिली कि पलाऊ ध्वजवाहक तेल टैंकर एमटी मैरिवेक्स (MT Marivex), जो ओमान के मसिराह तट के निकट लंगर डाले हुए था, मिसाइल हमले का शिकार हो गया है। जहाज पर 24 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे।

सूचना मिलते ही एमआरसीसी मुंबई ने ओमान समुद्री खोज एवं बचाव केंद्र (OMSC) से संपर्क स्थापित किया और स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए ओमान की संबंधित एजेंसियों तथा अन्य हितधारकों के साथ समन्वय बनाए रखा।

शाम लगभग 5:00 बजे ओमान के ओएमएससी ने पुष्टि की कि ओमान नौसेना के हेलीकॉप्टरों द्वारा सभी 24 भारतीय चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया है। बचाए गए सभी भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं तथा किसी के हताहत या घायल होने की सूचना नहीं है।

घटना के बाद भी टैंकर एमटी मैरिवेक्स ओमान के मसिराह तट के निकट लंगर डाले हुए है।

यह सफल बचाव अभियान क्षेत्रीय समुद्री बचाव एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग की प्रभावशीलता को दर्शाता है। साथ ही यह भारतीय तटरक्षक बल की भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा समुद्री आपात स्थितियों में त्वरित सहायता उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।

पश्चिम एशिया की स्थिति के बीच भारत सरकार सतर्क, ऊर्जा आपूर्ति और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित

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पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारत सरकार लगातार निगरानी रखते हुए ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री संचालन और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कदम उठा रही है। 29 मार्च 2026 तक की स्थिति के अनुसार सरकार ने कई महत्वपूर्ण उपाय किए हैं।

ऊर्जा आपूर्ति बनी स्थिर

हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के बावजूद देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है। सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और भंडार पर्याप्त है। सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर ₹10 प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाई है और निर्यात पर शुल्क लगाकर घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित की है।

कुछ राज्यों में अफवाहों के कारण घबराहट में खरीदारी देखी गई, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है।

गैस और एलपीजी आपूर्ति पर विशेष ध्यान

सीएनजी और घरेलू पाइप्ड गैस (PNG) को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि औद्योगिक आपूर्ति सीमित रूप से जारी है। एलपीजी की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है और एक दिन में 55 लाख से अधिक सिलेंडर वितरित किए गए।

सरकार ने वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन को बढ़ाकर 70% तक कर दिया है, जिससे होटल, ढाबा, उद्योग और अन्य क्षेत्रों को राहत मिलेगी।

राज्यों को सख्त निर्देश

राज्य सरकारों को जमाखोरी और कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई करने, दैनिक प्रेस ब्रीफिंग जारी करने और अफवाहों पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। देशभर में हजारों छापेमारी कर कई सिलेंडर जब्त किए गए हैं।

समुद्री सुरक्षा और संचालन सामान्य

सरकार के अनुसार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और बंदरगाह संचालन सामान्य रूप से जारी है। दो एलपीजी जहाज सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ रहे हैं। अब तक 900 से अधिक भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।

विदेशों में भारतीयों की सुरक्षा

विदेश मंत्रालय पश्चिम एशिया की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। भारतीय दूतावास 24×7 हेल्पलाइन के माध्यम से सहायता प्रदान कर रहे हैं। 28 फरवरी से अब तक करीब 5.24 लाख भारतीय स्वदेश लौट चुके हैं।

सरकार विभिन्न देशों से वैकल्पिक मार्गों के जरिए नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कर रही है।

सरकार की अपील

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराहट में खरीदारी न करें, ऊर्जा की बचत करें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।


बे ऑफ बंगाल क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग पर चौथी BIMSTEC विशेषज्ञ समूह बैठक सम्पन्न

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नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सचिवालय (NSCS) द्वारा 24-25 नवंबर 2025 को समुद्री सुरक्षा सहयोग पर BIMSTEC विशेषज्ञ समूह की चौथी बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक, वाइस एडमिरल बिस्वजीत दासगुप्ता (सेवानिवृत्त) ने की। बैठक में सभी BIMSTEC सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी, नीति निर्माता और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल थे।

यह आयोजन समुद्री सुरक्षा क्षेत्र में पाँच प्रमुख फोकस क्षेत्रों के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्यों पर सार्थक विचार-विमर्श की एक और सफल कड़ी रहा। प्रतिभागियों ने समुद्री सुरक्षा एवं आपदा राहत (HADR) से संबंधित दिशानिर्देशों को अपनाने पर विस्तार से चर्चा की। प्रतिनिधियों ने अपने पेशेवर सुझाव साझा करते हुए इन दिशा-निर्देशों के मसौदे पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए, जो बे ऑफ बंगाल क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए सामूहिक दृष्टिकोण की आवश्यकता को प्रबल रूप से दर्शाते हैं।

बैठक में BIMSTEC सदस्य देशों ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए एक एक्शन प्लान पर भी विचार-विमर्श किया। इसके साथ ही निकट भविष्य में समुद्री अभ्यास आयोजित करने की संभावनाओं, सूचना साझा करने की व्यवस्था को मजबूत बनाने, समुद्री खतरों के प्रति सामूहिक प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करने, क्षमतावृद्धि और संसाधन निर्माण जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई।

समुद्री सुरक्षा पर चौथी BIMSTEC विशेषज्ञ समूह बैठक का सफल आयोजन एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि समुद्री क्षेत्र बे ऑफ बंगाल क्षेत्र के देशों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण तत्व है। यह बैठक क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुई।

गुरुग्राम में होगा वैश्विक समुद्री सुरक्षा सम्मेलन—सूचना संलयन केंद्र (IFC-IOR) द्वारा आयोजित किया जाएगा ‘Maritime Information Sharing Workshop (MISW) 2025

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गुरुग्राम, भारत में एक बार फिर वैश्विक समुद्री सुरक्षा समुदाय एकजुट होने जा रहा है, जब सूचना संलयन केंद्र – हिंद महासागर क्षेत्र (Information Fusion Centre – Indian Ocean Region, IFC-IOR) अपने प्रमुख कार्यक्रम ‘Maritime Information Sharing Workshop (MISW 2025)’ का तीसरा संस्करण 3 से 5 नवम्बर 2025 तक आयोजित करेगा।

इस वर्ष का विषय है — “Enhancing Real-Time Coordination and Information Sharing Across the Indian Ocean Region” (हिंद महासागर क्षेत्र में वास्तविक समय समन्वय और सूचना साझाकरण को सुदृढ़ बनाना) — जो समुद्री सुरक्षा सहयोग के लिए सामूहिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

क्षेत्रीय सहयोग को सशक्त बनाता MISW

भारत की दृष्टि ‘MAHASAGAR’ — Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions के अनुरूप, IFC-IOR समुद्री सूचना साझा करने के लिए कई कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करता है, जिनमें MISW इसका प्रमुख आयोजन है।
2019 में शुरू हुई यह कार्यशाला अब एक प्रमुख परिचालन मंच के रूप में विकसित हो चुकी है, जहाँ विश्वभर के समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करते हैं, पारस्परिक विश्वास को प्रोत्साहित करते हैं और समुद्री सुरक्षा में सहयोग की भावना को सुदृढ़ करते हैं।

यह मंच केवल संवाद तक सीमित नहीं है — बल्कि समुद्री डकैती, नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और अन्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री खतरों से निपटने में समन्वित कार्रवाई को प्रोत्साहित करता है।
MISW ने हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित, स्थिर और टिकाऊ समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में अग्रसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

संवाद से क्रियान्वयन तक: MISW 2025 का नया अध्याय

MISW 2025, जो 3–5 नवम्बर 2025 को आयोजित होगी, भारत के साझेदार देशों और क्षेत्रीय मंचों के साथ सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
कार्यशाला का उद्घाटन उप नौसेना प्रमुख वाइस एडमिरल तरुण सोबती करेंगे और मुख्य संबोधन श्री सुशील मंसिंग खोपड़े, आईपीएस, अतिरिक्त महानिदेशक, डीजी शिपिंग द्वारा दिया जाएगा।

इस आयोजन में हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA), Djibouti Code of Conduct/Jeddah Amendment (DCoC/JA) और BIMSTEC देशों के 30 से अधिक प्रतिनिधि भाग लेंगे।
कार्यशाला के अंत में एक टेबल टॉप एक्सरसाइज (TTX) आयोजित की जाएगी, जिसमें वास्तविक समुद्री परिदृश्यों का अनुकरण करते हुए सामूहिक प्रतिक्रिया योजनाओं का अभ्यास किया जाएगा।

विचार, नवाचार और कार्रवाई का समागम

MISW 2025 में UNODC, ReCAAP ISC, RMIFC, IFC Singapore, RCoC और प्रमुख शिपिंग कंपनियों के विशेषज्ञों की भागीदारी होगी।
भारत की National Maritime Information Sharing Centres (NMISCs) की पहल को भी इस अवसर पर प्रदर्शित किया जाएगा।
चर्चा सत्रों में एक लचीले और समन्वित समुद्री सूचना पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भविष्य की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

हिंद महासागर — वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा

हिंद महासागर विश्व व्यापार का केंद्र है — जहां से विश्व के अधिकांश तेल और कंटेनर यातायात गुजरता है।
यह क्षेत्र केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आर्थिक और सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
22 दिसम्बर 2018 को स्थापित IFC-IOR, जिसका नेतृत्व वर्तमान में कैप्टन सचिन कुमार सिंह कर रहे हैं, आज 15 देशों के अंतरराष्ट्रीय संपर्क अधिकारियों (ILOs) की मेजबानी करता है और 57 समुद्री सुरक्षा संगठनों तथा 25 साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करता है।

सुरक्षित और समृद्ध महासागरों की दिशा में भारत की पहल

MISW 2025 IFC-IOR की उस निरंतर प्रतिबद्धता का प्रतीक है जो एक सहयोगी, पारदर्शी और मजबूत समुद्री सूचना नेटवर्क की स्थापना के लिए की जा रही है।
इस कार्यशाला के परिणाम हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करने वाले भविष्य के सहयोगी ढांचे को दिशा प्रदान करेंगे।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 42वें भारतीय तटरक्षक (ICG) कमांडर्स सम्मेलन का किया उद्घाटन

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नई दिल्ली– रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज नई दिल्ली स्थित भारतीय तटरक्षक मुख्यालय में आयोजित 42वें भारतीय तटरक्षक कमांडर्स सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने बल के पेशेवराना कौशल एवं मानवीय सेवा की सराहना करते हुए 7,500 किलोमीटर लंबी तटीय सीमा एवं द्वीपीय क्षेत्रों की सुरक्षा में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। 28 से 30 सितम्बर 2025 तक चलने वाला यह तीन दिवसीय सम्मेलन सेवा की वरिष्ठ नेतृत्व टीम को एक साथ लाकर विकसित होती समुद्री सुरक्षा चुनौतियों और हिंद महासागर क्षेत्र के बढ़ते सामरिक महत्व की पृष्ठभूमि में रणनीतिक, परिचालन एवं प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान कर रहा है।

राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्त्वपूर्ण स्तंभ

रक्षा मंत्री ने भारतीय तटरक्षक को राष्ट्रीय सुरक्षा का एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए कहा कि यह बल अपनी स्थापना के समय के छोटे बेड़े से विकसित होकर आज 152 पोतों और 78 विमानों के साथ एक सशक्त शक्ति के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि तटरक्षक ने हमेशा नागरिकों का विश्वास जीता है और अपने पेशेवराना एवं मानवीय सेवा भाव के लिए वैश्विक स्तर पर सम्मान अर्जित किया है।

आंतरिक और बाह्य सुरक्षा में भूमिका

राजनाथ सिंह ने बल के अद्वितीय दायित्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह बाहरी और आंतरिक सुरक्षा के बीच सेतु का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि जहाँ सशस्त्र बल बाहरी खतरों से निपटते हैं और अन्य एजेंसियां आंतरिक सुरक्षा संभालती हैं, वहीं तटरक्षक दोनों क्षेत्रों में समान रूप से कार्य करता है। विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की गश्त कर यह न केवल बाहरी खतरों को रोकता है बल्कि अवैध मछली पकड़ने, मादक पदार्थ एवं हथियारों की तस्करी, स्मगलिंग, मानव तस्करी, समुद्री प्रदूषण और अनियमित समुद्री गतिविधियों से भी निपटता है।

आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण

रक्षा मंत्री ने सरकार की तटरक्षक के आधुनिकीकरण की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि इसके लगभग 90% पूंजीगत बजट को स्वदेशी संसाधनों पर खर्च किया जा रहा है। जहाजों एवं विमानों के निर्माण, मरम्मत और सेवाओं में देश के भीतर हुई प्रगति को उन्होंने आत्मनिर्भर भारत का महत्त्वपूर्ण पड़ाव बताया।

समुद्री सुरक्षा की जटिलता

उन्होंने कहा कि भूमि सीमाएँ स्थायी एवं स्पष्ट रूप से चिह्नित होती हैं, जबकि समुद्री सीमाएँ ज्वार-भाटा, लहरों और मौसम के कारण बदलती रहती हैं। समुद्री सुरक्षा भूमि सीमाओं से कहीं अधिक जटिल और अप्रत्याशित है, जिसके लिए सतत चौकसी आवश्यक है।

मानवीय और आपदा प्रबंधन में योगदान

रक्षा मंत्री ने आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में तटरक्षक की मानवीय भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि चक्रवात, तेल रिसाव, औद्योगिक दुर्घटनाओं और विदेशी जहाजों की आपात स्थिति में बल ने हमेशा त्वरित कार्रवाई कर जन एवं संपत्ति की रक्षा की है।

महिला सशक्तिकरण

राजनाथ सिंह ने तटरक्षक में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं केवल सहायक भूमिकाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पायलट, ऑब्जर्वर, हवरक्राफ्ट ऑपरेटर, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर, लॉजिस्टिक अधिकारी एवं विधि अधिकारी जैसी जिम्मेदारियों में भी योगदान दे रही हैं।

उभरती तकनीकी चुनौतियाँ

उन्होंने कहा कि समुद्री खतरे अब प्रौद्योगिकी-आधारित और बहुआयामी होते जा रहे हैं। अपराधी और आतंकी संगठन जीपीएस स्पूफिंग, ड्रोन, एन्क्रिप्टेड संचार, डार्क वेब नेटवर्क जैसे आधुनिक साधनों का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, साइबर डिफेंस और स्वचालित निगरानी प्रणालियों का उपयोग आवश्यक है।

भविष्य के लिए रोडमैप 2047

रक्षा मंत्री ने तटरक्षक से आग्रह किया कि वह वर्ष 2047 के लिए एक भविष्यवादी रोडमैप तैयार करे, जिसमें अत्याधुनिक तकनीकों का समावेश हो और बदलते हालात के अनुरूप रणनीतियाँ अपनाई जाएँ। उन्होंने बल के आदर्श वाक्य “वयम् रक्षामः” (हम रक्षा करते हैं) का उल्लेख करते हुए कहा कि यही संकल्प भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारत सौंपने में सहायक होगा।

सम्मेलन की रूपरेखा

इस सम्मेलन का उद्देश्य अंतर-सेवा समन्वय को बढ़ाना, समुद्री क्षेत्र की निगरानी को सुदृढ़ करना और भविष्य की क्षमताओं को राष्ट्रीय समुद्री प्राथमिकताओं के अनुरूप सुनिश्चित करना है। सम्मेलन में नौसेना प्रमुख और इंजीनियर-इन-चीफ सहित वरिष्ठ अधिकारी भाग ले रहे हैं।

भारतीय तटरक्षक की उपलब्धियाँ

स्थापना के बाद से भारतीय तटरक्षक ने 1,638 विदेशी पोतों और 13,775 विदेशी मछुआरों को अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर गिरफ्तार किया है। बल ने 6,430 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए हैं, जिनकी कीमत लगभग 37,833 करोड़ रुपये है। इस वर्ष जुलाई तक 76 खोज एवं बचाव अभियान चलाकर 74 जीवन बचाए गए, जबकि अब तक 14,500 से अधिक लोगों को आपदा राहत अभियानों में बचाया गया है।

उपस्थित गणमान्यजन

इस अवसर पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार तथा रक्षा मंत्रालय एवं भारतीय तटरक्षक के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।



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