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केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नागालैंड में हथकरघा एवं हस्तशिल्प पर उच्चस्तरीय कार्यबल की बैठक में भाग लिया

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केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज नागालैंड के माननीय मुख्यमंत्री नेफियू रियो द्वारा बुलाई गई हथकरघा एवं हस्तशिल्प पर उच्चस्तरीय कार्यबल की बैठक में भाग लिया। बैठक में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार, असम की खेल एवं युवा कल्याण मंत्री नंदिता गारलोसा, मिज़ोरम के वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री एफ. रोडिंगलियाना, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के सचिव, मणिपुर सरकार तथा वस्त्र मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में हथकरघा और हस्तशिल्प के लिए क्लस्टर-आधारित विकास दृष्टिकोण पर चर्चा की गई, जिसका उद्देश्य संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को सशक्त बनाते हुए कारीगरों के लिए टिकाऊ और लाभकारी आजीविका सुनिश्चित करना है। इस दृष्टिकोण में मास्टर कारीगर प्रशिक्षण के माध्यम से कौशल उन्नयन, गुणवत्ता परीक्षण एवं प्रमाणन, टिकाऊ प्राकृतिक रेशों और प्राकृतिक रंगों को बढ़ावा देना तथा घरेलू व निर्यात बाजारों के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से एकीकरण शामिल है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस बात पर जोर दिया कि वस्त्र मंत्रालय को हथकरघा और हस्तशिल्प के परिप्रेक्ष्य से नेतृत्व करते हुए एक स्पष्ट संरचना विकसित करनी चाहिए—शुरुआत में एक हथकरघा और एक हस्तशिल्प उत्पाद को चुनकर सफलता का मॉडल प्रस्तुत किया जाए। चर्चा में आगे बढ़ने की रणनीति पर विचार किया गया, जिसकी शुरुआत क्लस्टरों में कारीगरों की पहचान से होगी।

यह भी रेखांकित किया गया कि मूल्य श्रृंखला का विकास बाजार की मांग को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए और उत्पादन श्रृंखला उसी के अनुरूप स्थापित हो—उल्टा नहीं। उत्पादों के अंतिम स्तर पर भिन्नता (डिफरेंशिएशन) भी रणनीति का हिस्सा होनी चाहिए, जो बाजार और खरीदारों को मूल्य श्रृंखला से जोड़कर संभव है। एमडीओएनईआर, वस्त्र मंत्रालय, राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र सहित सभी हितधारकों की आवश्यक हस्तक्षेपों की पहचान पर भी जोर दिया गया।

चर्चा में मैदानी स्तर पर हैंडहोल्डिंग के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रत्येक क्लस्टर में एक हथकरघा/हस्तशिल्प संसाधन व्यक्ति की तैनाती तथा बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूपता सुनिश्चित करने के लिए खरीदार प्रतिनिधि की उपस्थिति का प्रस्ताव रखा गया।

दीर्घकालिक प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए सिंधिया ने कहा, “सभी हितधारकों को मूल्य श्रृंखला में लाने से अगले 2–3 वर्षों में कारीगरों की आय में वृद्धि दिखाई देगी। हमारा अंतिम उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यह परियोजना बुनकरों और कारीगरों को दीर्घकालिक लाभ दे। हथकरघा और हस्तशिल्प हमारी कला और भारत की संपदा हैं—हस्तनिर्मित उत्पादों का मूल्य आज बहुमूल्य रत्नों के समान बढ़ रहा है। भारत को इस विरासत का संरक्षण ही नहीं, बल्कि इसे कारीगरों के लिए वास्तव में लाभकारी भी बनाना चाहिए।”

त्रिपुरा में माताबाड़ी पर्यटन सर्किट को मॉडल गंतव्य के रूप में विकसित करने पर हुई समीक्षा बैठक

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केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज त्रिपुरा के मुख्यमंत्री प्रो. (डॉ.) माणिक साहा की उपस्थिति में त्रिपुरा के माताबाड़ी पर्यटन सर्किट के विकास को लेकर एक समीक्षा बैठक की। बैठक में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) के राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार, मंत्रालय के सचिव तथा केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

बैठक में माताबाड़ी सर्किट को एक आदर्श पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की समग्र रणनीति की समीक्षा की गई। इस दौरान क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया गया, ताकि पर्यटन से उत्पन्न अवसरों के माध्यम से स्थानीय लोगों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित हो और उन्हें स्थायी आजीविका के साधन प्राप्त हों।

सिंधिया ने कहा कि त्रिपुरा के इतिहासकारों को भी पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र में सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए। उन्हें पर्यटक गाइड और सहायकों के प्रशिक्षण में भागीदार बनाया जाए, ताकि राज्य के इतिहास की प्रामाणिक जानकारी पर्यटकों तक पहुंच सके। इस प्रक्रिया को संस्थागत स्वरूप देते हुए पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों का समन्वय किया जाना चाहिए।

चर्चा के दौरान इस बात पर बल दिया गया कि त्रिपुरा की सुंदरता उसकी प्राचीन ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक परिवेश में जीवंत बनाए रखने में निहित है। माताबाड़ी सर्किट के विकास में राज्य के इतिहास की स्पष्ट झलक दिखनी चाहिए और सौम्य सौंदर्यशास्त्र (सॉफ्ट एस्थेटिक्स) को बनाए रखा जाना चाहिए। साथ ही, स्थानीय त्रिपुरा व्यंजनों को पर्यटक अनुभव का अभिन्न हिस्सा बनाने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि पर्यटन सर्किट में एक उच्चस्तरीय और विशिष्ट (निच) घटक भी शामिल होना चाहिए, जिससे प्रमुख आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) क्षेत्र के खिलाड़ियों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। निच और हाई-एंड पर्यटन को जन-आधारित पर्यटन सर्किट के साथ समन्वयित कर अधिकतम लाभ प्राप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। त्रिपुरा के पर्यटन मंत्री को इस मॉडल को मार्गदर्शक उदाहरण के रूप में आगे बढ़ाने की सलाह दी गई, ताकि माताबाड़ी सर्किट न केवल पूर्वोत्तर क्षेत्र बल्कि पूरे देश के लिए पर्यटन विकास का मानक बन सके।

बैठक के अंत में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री के नेतृत्व की सराहना की गई, जिनके मार्गदर्शन में राज्य में पर्यटन विकास के लिए संतुलित और दूरदर्शी दृष्टिकोण आकार ले रहा है।

मणिपुर के विकास रोडमैप पर तीसरी समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने पर बल — ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया

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पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज मणिपुर के विकास रोडमैप पर तीसरी समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) और मणिपुर राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक का उद्देश्य चल रही परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना, समावेशी विकास के नए अवसरों की पहचान करना और राज्य की विकास प्राथमिकताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित “आत्मनिर्भर भारत” के दृष्टिकोण के साथ संरेखित करना था।

मणिपुर पोलो का पुनरुद्धार और खेल-पर्यटन को बढ़ावा

बैठक में विशेष रूप से मणिपुर पोलो के पुनरुद्धार पर चर्चा की गई, जिसे राज्य की सांस्कृतिक धरोहर और आर्थिक अवसर दोनों के प्रतीक के रूप में देखा गया। सिंधिया ने कहा कि मणिपुर को एक बार फिर “भारत की पोलो राजधानी” के रूप में स्थापित करने के लिए विश्व-स्तरीय प्रशिक्षण संस्थानों और सुविधाओं का विकास किया जाएगा। यह पहल खेल-आधारित पर्यटन को प्रोत्साहित करेगी, स्थानीय युवाओं को सशक्त बनाएगी और मणिपुर की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगी।

शिल्पकारों और बुनकर समुदायों का सशक्तिकरण

मंत्री ने राज्य की पारंपरिक हस्तशिल्प और हैंडलूम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने 250 मिनी और 200 मेगा उत्पादन इकाइयों की स्थापना और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को समर्थन देने की घोषणा की। सिंधिया ने कहा कि इससे न केवल पारंपरिक शिल्प को संरक्षित किया जाएगा, बल्कि नए रोजगार और उद्यमिता के अवसर भी पैदा होंगे।

अवसंरचना, कनेक्टिविटी और कृषि आधारित आजीविका

बैठक में एक इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल पार्क की स्थापना की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई, जिसमें प्रौद्योगिकी और डिजाइन संस्थान शामिल होगा। मंत्री ने “वाइब्रेंट विलेजेज” को पीएम गति शक्ति ढांचे से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि ग्रामीण पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और अंतिम छोर तक पहुंच को सुदृढ़ किया जा सके।

कृषि क्षेत्र में, उन्होंने अगले चार वर्षों में 10,000 हेक्टेयर में पाम ऑयल की खेती का लक्ष्य तय किया ताकि आत्मनिर्भर कृषि-आधारित आजीविका को बढ़ावा मिल सके।

तेज क्रियान्वयन और परिणामोन्मुख विकास

सिंधिया ने सभी परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रत्येक क्षेत्र में तेज क्रियान्वयन और परिणाम-आधारित प्रगति सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि MDoNER एक “सक्रिय सुगमकर्ता” की भूमिका निभाता रहेगा, ताकि मणिपुर का विकास समावेशी और सतत बना रहे।

निरंतरता और प्रतिबद्धता

यह तीसरी समीक्षा बैठक इस वर्ष पहले आयोजित दो बैठकों की श्रृंखला को आगे बढ़ाती है, जिनमें पर्यटन, खेल, पोलो सर्किट, लोकतक झील पुनर्जीवन, बुनाई क्लस्टर और वाइब्रेंट विलेजेज पर केंद्रित चर्चा हुई थी।

इन निरंतर प्रयासों के माध्यम से सिंधिया ने यह स्पष्ट किया कि अपनी समृद्ध संस्कृति, उद्यमशीलता भावना और सामुदायिक शक्ति के बल पर मणिपुर आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के तहत आत्मनिर्भरता और विकास का प्रतीक बन रहा है।

उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र में विकास की नई ऊँचाइयाँ: MDoNER ने एक वर्ष में निवेश, कनेक्टिविटी और रोजगार में हासिल की उल्लेखनीय प्रगति

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नई दिल्ली- संचार और उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER), डाक विभाग (DoP) और टेलीकॉम विभाग (DoT) की एक वर्ष (अगस्त 2024 – सितंबर 2025) की उपलब्धियों पर संयुक्त मीडिया ब्रिफिंग की अध्यक्षता की। इस अवसर पर संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी, शिक्षा एवं DoNER राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार, और MDoNER सचिव चंचल कुमार भी उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र ने पिछले वर्ष में सर्वांगीण प्रगति देखी है। मीडिया से बात करते हुए ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कहा कि मंत्रालय ने सुधार, पहुँच और परिणाम के तीन स्तंभों पर काम करते हुए इन्फ्रास्ट्रक्चर, निवेश, शासन और युवा सशक्तिकरण में रिकॉर्ड वृद्धि हासिल की है। उन्होंने कहा, “उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र आज नए भारत की भावना का प्रतिनिधित्व करता है—सशक्त, जुड़े हुए और भविष्य के लिए तैयार। प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के तहत, यह क्षेत्र अब सीमांत से अग्रणी बन चुका है, जो आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धात्मकता का प्रतीक है।”

ऐतिहासिक विकास और आर्थिक संभावनाएँ

ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने क्षेत्र की उच्च विकास संभावनाओं पर प्रकाश डाला और कहा कि उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र की दशकीय GDP वृद्धि देश के औसत से अधिक रही है। उन्होंने उच्च साक्षरता दर और युवा जनसंख्या (70% आबादी 28 वर्ष से कम) का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी कारक इस क्षेत्र को भारत का असली विकास इंजन बनाते हैं।

मंत्री ने बताया कि मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2024–25 में ₹3,447.71 करोड़ का उच्चतम व्यय दर्ज किया, जो पिछले वर्ष से 74.4% अधिक है और तीन वर्षों में 200% से अधिक वृद्धि को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन MDoNER की वित्तीय अनुशासन, डिजिटल निगरानी और समय पर वितरण की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साप्ताहिक समीक्षा, चार किस्तों में फंड रिलीज़ और Poorvottar Vikas Setu पोर्टल के डिजिटल ट्रैकिंग से 97% परियोजना निरीक्षण कवरेज और 91% पूर्ण परियोजनाओं के संचालन को सुनिश्चित किया गया।

सुधार, शासन और संस्थागत सशक्तिकरण

मंत्री ने कहा कि मंत्रालय ने मुख्यमंत्री-नेतृत्व वाले क्षेत्रीय उच्च-स्तरीय कार्यबलों को आठ क्षेत्रों में संस्थागत रूप दिया है—पर्यटन, निवेश, हस्तशिल्प, कृषि, अवसंरचना, खेल, उत्तर-पूर्वी आर्थिक कॉरिडोर और प्रोटीन आत्मनिर्भरता। ये कार्यबल राज्यों के बीच सहयोग, नीति संरेखण और क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित कर रहे हैं।

अंतर-मंत्रालयी समन्वय प्रणाली के माध्यम से MDoNER ने शिलॉन्ग एयरपोर्ट विस्तार, सिक्किम में NH-10 का वैकल्पिक मार्ग, त्रिपुरा में कैलाशाहर एयरपोर्ट विकास जैसी प्रमुख परियोजनाओं के अनुमोदन को तेज किया, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत हुई।

निवेश और आर्थिक एकीकरण

ज्योतिरादित्य एम.सिंधिया ने बताया कि Rising North East Investors Summit 2025 में आठ मुख्यमंत्री, आठ केंद्रीय मंत्री, 100 से अधिक राजदूत और 108 PSU ने भाग लिया, जिससे ₹4.48 लाख करोड़ निवेश प्रतिबद्धताएँ हुईं—यह क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है।

अष्टलक्ष्मी महोत्सव (6-8 दिसंबर 2024) और नॉर्थ ईस्ट बैंकरस कॉन्क्लेव, अगस्तराल (दिसंबर 2024) ने क्रमशः ₹2,326 करोड़ निवेश लीड और 51 नई बैंक शाखाओं, ATM नेटवर्क विस्तार और MSME क्रेडिट सुविधा बढ़ाई। NEDFi के माध्यम से 5,300 से अधिक MSMEs का समर्थन किया गया और ₹766 करोड़ स्टार्टअप एवं उद्यमों के लिए जुटाए गए।

पर्यटन, कनेक्टिविटी और वैश्विक पहचान

मंत्री ने बताया कि MDoNER ने Brand Northeast रणनीति के माध्यम से क्षेत्र को वैश्विक पर्यटन और सांस्कृतिक गंतव्य के रूप में स्थापित किया है। प्रत्येक राज्य ने अपनी विशिष्ट पहचान और उत्पादों—जैसे असम की मुगा सिल्क, मेघालय का लाकाडोंग हल्दी, मणिपुर का पोलो, सिक्किम की ऑर्गेनिक खेती और त्रिपुरा का क्वीन पाइनएप्पल—को बढ़ावा दिया।

8 प्रमुख पर्यटन स्थल—काजीरंगा, ज़िरो, सोहरा, थेंजावल, मताबारी, किसामा, नामची और मोइरांग—पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत विकसित किए जा रहे हैं। होमस्टे और ईको-टूरिज्म मॉडल ने ग्रामीण आय में 45% वृद्धि की और सतत आजीविका सृजित की।

मंत्री ने कनेक्टिविटी में हुए उल्लेखनीय सुधारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में एयरपोर्ट संख्या 9 से बढ़कर 17 हो गई, जिसमें अरुणाचल प्रदेश में 4 एयरपोर्ट शामिल हैं। सभी NE राज्य 2029 तक रेल से जुड़े होंगे। कलादान और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय हाइवे परियोजनाओं के माध्यम से क्षेत्र को विश्व से जोड़ा जा रहा है।
कृषि, उद्योग और उद्यमिता

ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कृषि-हॉर्टी मूल्य श्रृंखला विकास के माध्यम से अर्थव्यवस्था के विविधीकरण पर जोर दिया। राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – तेल पाम के तहत 68,000 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती हुई, 47 नर्सरी और 5 बीज उद्यान स्थापित किए गए।

अगरवुड सेक्टर में निर्यात कोटा में छह गुना वृद्धि हुई और DGFT सहयोग से निर्यात सुविधा पोर्टल चालू हुआ। बांस सेक्टर में 22 परियोजनाओं (₹126.7 करोड़) से 2,587 कारीगरों को प्रशिक्षण मिला और Amazon से जुड़े बाज़ार मॉडल लॉन्च किए गए। इन पहलों से रोजगार, निर्यात और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा मिला।

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