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नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) की 108वीं बैठक

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नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) की 108वीं बैठक उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) में आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PMGS NMP) के अनुरूप बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का मूल्यांकन करना था।

बैठक में बहु-मॉडल कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स दक्षता, अंतिम छोर तक संपर्क (Last-mile connectivity) और “Whole of Government” दृष्टिकोण पर विशेष ध्यान दिया गया। NPG ने सड़क क्षेत्र की 7 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया।

इन पहलों से लॉजिस्टिक्स दक्षता में वृद्धि, यात्रा समय में कमी और परियोजना क्षेत्रों में उल्लेखनीय सामाजिक-आर्थिक लाभ मिलने की अपेक्षा है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की परियोजनाएँ

1. सलेम–कुमारपालयम (NH-544) का 6-लेन विस्तार – तमिलनाडु

102.035 किमी लंबा यह उच्च यातायात गलियारा कोच्चि–कोयंबटूर–बेंगलुरु फ्रेट व यात्री कॉरिडोर का हिस्सा है।
परियोजना में:

  • सर्विस रोड

  • जंक्शन व इंटरचेंज का उन्नयन

  • फ्लाईओवर, ROB, पुल और कलवर्ट का निर्माण/चौड़ीकरण

यह परियोजना औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स हब, SEZ, ICD और लॉजिस्टिक्स पार्क से बेहतर संपर्क सुनिश्चित करेगी तथा वस्त्र, कृषि-प्रसंस्करण और विनिर्माण क्षेत्रों को लाभ पहुंचाएगी।

2. अमरावती आउटर रिंग रोड (ORR) – आंध्र प्रदेश

189.93 किमी लंबी ग्रीनफील्ड ORR परियोजना अमरावती, विजयवाड़ा, गुंटूर और तेनाली क्षेत्रों में शहरी भीड़ कम करेगी।

  • विजयवाड़ा एयरपोर्ट से सीधा संपर्क

  • नेशनल वाटरवे-4 व मछलीपट्टनम/कृष्णपट्टनम बंदरगाहों से एकीकरण

इससे यात्रा समय में 30–40% की कमी, ईंधन बचत और उत्सर्जन में कमी की उम्मीद है।

3. रफियाबाद–कुपवाड़ा–चौकीबल–तंगधार सड़क – जम्मू एवं कश्मीर

62.10 किमी लंबी दो-लेन सड़क परियोजना:

  • सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक कनेक्टिविटी

  • LoC के निकट गांवों तक बेहतर पहुंच

  • रक्षा लॉजिस्टिक्स को मजबूती

इसके साथ-साथ यह परियोजना पर्यटन, बागवानी, स्वास्थ्य और शिक्षा तक पहुंच में सुधार लाएगी।

4. लेह बाईपास (फ्यांग से लेह-मनाली हाईवे) – लद्दाख

48.108 किमी लंबा ग्रीनफील्ड बाईपास:

  • लेह शहर की भीड़ कम करेगा

  • NH-01, NH-03 और लेह एयरपोर्ट को जोड़ेगा

इससे औद्योगिक क्षेत्रों, पर्यटन और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

5. चित्रकूट–मझगवां–सतना (MP-UP) 4-लेन विस्तार

77.102 किमी का दो-लेन से चार-लेन उन्नयन:

  • अंतर-राज्यीय कनेक्टिविटी मजबूत

  • सतना के सीमेंट उद्योग को लॉजिस्टिक्स लाभ

  • चित्रकूट के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा

6. राउरकेला–सिथियो 4-लेन ग्रीनफील्ड हाईवे – ओडिशा एवं झारखंड

156.10 किमी लंबा हाईवे:

  • PM गतिशक्ति आर्थिक नोड्स, SEZ और सीफूड क्लस्टर से जुड़ाव

  • एशियन हाईवे, NH-53, NH-19 और गोल्डन क्वाड्रिलेटरल से संपर्क

यह परियोजना क्षेत्रीय और अंतर-राज्यीय कनेक्टिविटी को नई गति देगी।

7. पटना रिंग रोड (NH-131G) – बिहार

9.98 किमी लंबा 6-लेन ग्रीनफील्ड हाईवे:

  • पटना शहर की यातायात भीड़ कम करेगा

  • NH-30, NH-922 से कनेक्टिविटी

  • बिहटा एयरपोर्ट और औद्योगिक क्षेत्रों तक बेहतर पहुंच

निष्कर्ष

NPG की 108वीं बैठक में मूल्यांकित ये परियोजनाएँ पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान के लक्ष्यों के अनुरूप हैं और

  • बहु-मॉडल कनेक्टिविटी

  • लॉजिस्टिक्स दक्षता

  • क्षेत्रीय विकास और रोज़गार सृजन

को मजबूती प्रदान करेंगी।


रेलवे ने इचापुरि-गुरुग्राम से मुंद्रा पोर्ट तक डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेन के रूप में ‘निर्यात कार्गो एक्सप्रेस’ शुरू किया

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 रेलवे ने माल परिवहन में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इचापुरि कंटेनर टर्मिनल, गुरुग्राम से मुंद्रा पोर्ट तक डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेन के रूप में निर्यात-केंद्रित, सुनिश्चित ट्रांज़िट सेवा निर्यात कार्गो एक्सप्रेस का संचालन किया गया। इससे पहले, गढ़ी, गुरुग्राम से 20 ट्रिप्स सुनिश्चित ट्रांज़िट सेवा के तहत चलाई जा चुकी हैं। इचापुरि, गुरुग्राम से इस तरह की समयबद्ध ट्रेन पहली बार चलाई जा रही है।

यह सुनिश्चित, समयबद्ध साप्ताहिक सेवा निर्यातकों के लिए तेज़, भरोसेमंद और पूर्वानुमान योग्य माल ढुलाई सुनिश्चित करेगी, जिससे देरी और लॉजिस्टिक लागत कम होगी।

दिल्ली डिवीजन, उत्तरी रेलवे ने निर्यातकों के लिए सुनिश्चित माल ढुलाई को मजबूत किया है। ट्रेन को क्रैक ट्रेन के रूप में चलाया गया, जिसका मतलब है न्यूनतम ठहराव और निर्बाध गति, जिससे तेज़ ट्रांज़िट और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित होती है—विशेष रूप से उच्च-मूल्य वाले निर्यात कार्गो के लिए उपयोगी।

नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) की 105वीं बैठक में 8 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का मूल्यांकन

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आज नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) की 105वीं बैठक आयोजित की गई, जिसमें पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PMGS NMP) के अनुरूप मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ाने के उद्देश्य से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया।

बैठक में रेल मंत्रालय की 7 परियोजनाओं और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की 1 परियोजना की समीक्षा की गई। इन सभी परियोजनाओं को एकीकृत मल्टीमॉडल अवसंरचना, अंतिम मील कनेक्टिविटी और “सम्पूर्ण सरकार दृष्टिकोण (Whole of Government Approach)” के सिद्धांतों के अनुरूप परखा गया। इन पहलों से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, यात्रा समय में सुधार और परियोजना क्षेत्रों में उल्लेखनीय सामाजिक-आर्थिक लाभ मिलने की अपेक्षा है।

रेल मंत्रालय (MoR) की प्रमुख परियोजनाएं

  1. अरक्कोणम–रेणिगुंटा तीसरी व चौथी रेल लाइन (76.559 किमी)

    तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश को जोड़ने वाली इस परियोजना से भीड़भाड़ कम होगी, लाइन क्षमता बढ़ेगी और माल परिवहन को गति मिलेगी। यह “मिशन 3000 MT” और हाई डेंसिटी ट्रैफिक रूट (अमृत चतुर्भुज) का अहम हिस्सा है।

  2. एरोड–करूर सेक्शन में दोहरीकरण (66.67 किमी)

    इस परियोजना से यात्री और माल ढुलाई दोनों में परिचालन दक्षता बढ़ेगी तथा कोयला, सीमेंट, स्टील और ग्रेनाइट जैसी प्रमुख वस्तुओं की आवाजाही सुगम होगी।

  3. गुंतकल–बेल्लारी तीसरी व चौथी लाइन (45.92 किमी)

    आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के बीच स्थित यह खंड प्रमुख औद्योगिक इकाइयों को सेवा देता है। क्षमता वृद्धि से खनिज-समृद्ध क्षेत्र में माल ढुलाई को बड़ा लाभ मिलेगा।

  4. गुंतकल–वाडी तीसरी व चौथी लाइन (230 किमी)

    कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से गुजरने वाली यह परियोजना कोयला और सीमेंट उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और बड़े स्तर पर रेल भीड़भाड़ कम करेगी।

  5. सेलम–करूर–दिंडीगुल दोहरीकरण (159.26 किमी)

    तमिलनाडु के औद्योगिक और ऊर्जा गलियारों को मजबूत करने वाली यह परियोजना लॉजिस्टिक्स लागत घटाने और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देगी।

  6. यादाद्री–काज़ीपेट तीसरी व चौथी लाइन तथा घाटकेसर–यादाद्री चौथी लाइन

    तेलंगाना का यह उच्च यातायात घनत्व गलियारा है, जो हैदराबाद सहित प्रमुख महानगरों को जोड़ता है। इससे यात्री और माल परिवहन दोनों में सुधार होगा।

  7. तालेगांव–उरुली तीसरी व चौथी विद्युतीकृत मल्टी-ट्रैक लाइन (महाराष्ट्र)

    पुणे क्षेत्र में औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब को सुदृढ़ करने वाली यह परियोजना प्रमुख बंदरगाहों, ड्राई पोर्ट्स और ऑटोमोबाइल उद्योगों को जोड़ेगी।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की परियोजना

  1. एनएच-544D (विनुकोण्डा–गुंटूर–अमरावती आउटर रिंग रोड) का उन्नयन
    आंध्र प्रदेश में लगभग 85.9 किमी लंबी इस परियोजना के तहत दो लेन सड़क को चार लेन में बदला जाएगा। इससे यात्रा समय में लगभग 52% की कमी, लॉजिस्टिक्स लागत में गिरावट और अमरावती सहित प्रमुख शहरों की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा।

बैठक का नेतृत्व

यह बैठक डीपीआईआईटी (Department for Promotion of Industry and Internal Trade) के संयुक्त सचिव (लॉजिस्टिक्स) की अध्यक्षता में आयोजित की गई।

इन सभी परियोजनाओं के माध्यम से पीएम गतिशक्ति के तहत देश में एकीकृत, कुशल और भविष्य-उन्मुख बुनियादी ढांचा नेटवर्क को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

छत्तीसगढ़, ओड़िशा और आंध्र प्रदेश को जोड़ेगा नया आर्थिक गलियारा, व्यापार और लॉजिस्टिक्स को मिलेगी मजबूती

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आगामी रायपुर–विशाखापत्तनम आर्थिक गलियारा उन लोगों के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित अवसर की तरह महसूस हो रहा है जिनकी आजीविका इन दोनों शहरों के बीच इस मार्ग पर निर्भर करती है। यह आर्थिक गलियारा, जिसे सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा विकसित किया जा रहा है, छत्तीसगढ़ के जंगलों, ओड़िशा के खनिज-समृद्ध क्षेत्रों और आंध्र प्रदेश की पहाड़ियों से होकर गुजरता है।

इस गलियारे का निर्माण कुल ₹16,482 करोड़ की लागत से किया जा रहा है और इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने की उम्मीद है। यह वर्तमान NH-26 के 597 किमी की दूरी को घटाकर 465 किमी कर देगा — यानी 132 किमी की दूरी और लगभग 7 घंटे की यात्रा समय की बचत। इससे ईंधन की बचत होगी और सार्वजनिक एवं मालवाहक परिवहन के लिए परिवहन लागत कम होगी।

जो यात्रा पहले 12 घंटे लेती थी, वह अब मात्र 5 घंटे में पूरी हो जाएगी और यह PM गती शक्ति के तहत तेज़ लॉजिस्टिक्स और निर्बाध कनेक्टिविटी के द्वार खोलेगा। छत्तीसगढ़ और ओड़िशा की उद्योग गतिविधियों को भी बड़ा लाभ मिलेगा क्योंकि ये सीधे विशाखापत्तनम पोर्ट और चेन्नई-कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ेंगे। इसका मतलब होगा पोर्ट और औद्योगिक हब तक बेहतर कनेक्टिविटी, तेज़ निर्यात, सुचारू सप्लाई चेन और व्यापार को बढ़ावा — जिससे लॉजिस्टिक्स दक्षता में भारी सुधार होगा। यह गलियारा पर्यटन को भी बढ़ावा देगा और रोजगार सृजन एवं रियल एस्टेट विकास के माध्यम से आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहित करेगा।

त्वरित तथ्य

  • 6-लेन ग्रीनफील्ड गलियारा जो छत्तीसगढ़, ओड़िशा और आंध्र प्रदेश को जोड़ता है

  • 465 किमी लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग

  • 7 घंटे और 132 किमी की दूरी बचाने में मदद करेगा

  • FY 2026-27 में जनता के लिए खोला जाएगा

  • आदिवासी और दूरदराज के क्षेत्रों के लिए तेज़ पहुँच

स्थानीय और आर्थिक लाभ

ट्रक चालक, किसान और परिवार, जो बेहतर अवसर की तलाश में हैं, इस गलियारे को आशाजनक भविष्य की दिशा में एक मार्ग के रूप में देख रहे हैं।

विशाल, एक लॉरी मालिक जो नियमित रूप से रायपुर से विशाखापत्तनम माल भेजते हैं, कहते हैं, “पहले यात्रा डेढ़ दिन लेती थी। अब मैं दिन में रवाना होकर रात तक गंतव्य पहुंच सकता हूँ। दूरी में कमी से सीधे तौर पर डीज़ल की बचत और ट्रकों पर कम दबाव पड़ेगा, जिससे वित्तीय राहत मिलेगी।”

किसानों को भी आर्थिक दृष्टिकोण में स्पष्ट बदलाव दिखाई दे रहा है। एक किसान बताते हैं कि ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना शुरू होने के बाद जमीन की कीमतें बढ़ गई हैं। “पहले हमारी जमीन का मूल्य ₹15 लाख प्रति एकड़ था, अब यह लगभग ₹1.5 करोड़ है। किसान वास्तव में खुश हैं।”

विशाखापत्तनम के स्थानीय निवासी ने साझा किया कि परियोजना से उनकी समुदाय पर असर पड़ा है। “हम किसान हैं। पहले, हमारी जमीन ग्रीनफील्ड हाईवे के लिए देना मुश्किल था। लेकिन अब, जैसे ही गलियारा तैयार हो रहा है, हमें आशा दिख रही है। हमारी जमीन का मूल्य दोगुना हो गया है और हमें पता है कि यह विकास हमारे परिवारों के लिए अधिक अवसर लाएगा।”

दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों के लिए लाभ

रायपुर–विशाखापत्तनम गलियारा छत्तीसगढ़ के धमतरी, केशकल, कांकेर, ओड़िशा के बोरीगुमा, नबरंगपुर, कोरापुट और आंध्र प्रदेश के रामभद्रपुरम, अरकू जैसे आदिवासी और दूरदराज़ जिलों में मोबिलिटी में सुधार लाएगा। इन क्षेत्रों को मुख्य बाजारों और आवश्यक सेवाओं के करीब लाकर ये गलियारा उन्हें मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में अधिक प्रभावी ढंग से शामिल करेगा।

प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ

  • 6-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड राजमार्ग

  • पुराने 2-लेन NH-26 पर भीड़ कम करेगा, यात्रा की सुविधा और सड़क सुरक्षा बढ़ाएगा

  • 100 किमी/घंटा की गति के लिए डिज़ाइन किया गया

  • यात्रियों और मालवाहकों के लिए विश्वसनीयता, लागत-कुशलता और समय की भविष्यवाणी में सुधार

निर्माण और राज्य-स्तरीय सहयोग

इस परियोजना का निर्माण तीन राज्यों में 15 पैकेज के माध्यम से किया जा रहा है। यह परियोजना MoRTH की प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि वह ऐसा इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करना चाहता है जो केवल जगहों को जोड़ने के लिए नहीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए अवसरों को जोड़ने के लिए हो।

जैसे-जैसे परियोजना पूर्ण होने के करीब आ रही है, यह मंत्रालय की सड़कों के माध्यम से जीवन बदलने की दृष्टि को प्रतिबिंबित करती है।


राष्ट्रीय नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) की 102वीं बैठक में सड़क, परिवहन और राजमार्ग परियोजनाओं का मूल्यांकन

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राष्ट्रीय नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) की 102वीं बैठक आज आयोजित की गई, जिसमें सड़क, परिवहन और राजमार्ग विभाग (MoRTH) की परियोजनाओं के साथ-साथ रेलवे परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया। बैठक का मुख्य उद्देश्य पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PMGS NMP) के अनुरूप मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ाना था।

बैठक में तीन परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया, जिनमें एक सड़क/हाईवे परियोजना और दो रेलवे परियोजनाएं शामिल थीं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य इंटीग्रेटेड मल्टीमॉडल इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्थिक एवं सामाजिक नोड्स तक अंतिम मील कनेक्टिविटी और ‘Whole of Government’ दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है। ये परियोजनाएं लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने, यात्रा समय घटाने और परियोजना क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देने की संभावना रखती हैं।

परियोजनाओं का संक्षिप्त विवरण:

रेल मंत्रालय (MoR):

  1. पुनरख – कीउल स्टेशन के बीच तीसरी और चौथी लाइन (बिहार)

    • लंबाई: लगभग 49.57 किमी

    • क्षेत्र: पटना और लखीसराय जिले

    • महत्व: राज्य के प्रमुख औद्योगिक और कृषि गलियारों में रेलवे क्षमता और लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाना

    • लाभार्थी: Ultratech Cement Plant, ACC Cement, NTPC Barauni, NTPC Super Thermal Power Plant, Carriage Repair Workshop, SJVN Power Plant और अन्य छोटे और मध्यम उद्योग

    • अतिरिक्त लाभ: पर्यटन स्थलों (बापू टॉवर, महावीर मंदिर, गांधी संग्रहालय, खुदा बक्स़ लाइब्रेरी, कुम्हार पार्क, तख़त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब, गोल घर, बिहार संग्रहालय) की पहुंच में सुधार

  2. सिलघाट – डेकर्गाओं नई BG लाइन (असम)

    • लंबाई: लगभग 27.50 किमी

    • महत्व: ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ना

    • लाभ: राष्ट्रीय राजमार्ग NH-15 और NH-715 के साथ मजबूत मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी

    • उद्देश्य: क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाना, औद्योगिक गतिविधियों, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देना

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH):

  1. ओल्ड पुणे नाका से बोरमानी नाका तक 4-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर (NH-65, महाराष्ट्र)

    • लंबाई: लगभग 9.66 किमी

    • परियोजना: भरतमाला परियोजना (चरण-I) के तहत

    • उद्देश्य: शहरी ट्रैफिक कम करना, यात्रा समय घटाना, सड़क सुरक्षा बढ़ाना और वाहनों के उत्सर्जन को कम करना

    • लाभ: क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत करना, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन को प्रोत्साहित करना

बैठक की अध्यक्षता संयुक्त सचिव, लॉजिस्टिक्स, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने की। बैठक में परियोजनाओं की संभावित सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और कनेक्टिविटी में सुधार पर विशेष चर्चा हुई।

ये पहलें पीएम गति शक्ति के तहत भारत में एकीकृत और दक्ष लॉजिस्टिक्स नेटवर्क बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) की 101वीं बैठक में PM गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत सड़क और रेलवे परियोजनाओं का मूल्यांकन

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आज नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) की 101वीं बैठक आयोजित की गई, जिसमें सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग और रेलवे से संबंधित आधारभूत संरचना परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया। बैठक में मल्टीमोडल कनेक्टिविटी को मजबूत करने और लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया, जो PM गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PMGS NMP) के अनुरूप हैं।

बैठक में MoRTH (सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय) की सड़क/राजमार्ग परियोजनाओं और MoR (रेल मंत्रालय) की रेल परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया, ताकि ये परियोजनाएँ समेकित मल्टीमोडल इन्फ्रास्ट्रक्चर, अंतिम मील कनेक्टिविटी, और ‘Whole of Government’ दृष्टिकोण के सिद्धांतों के अनुरूप हों। इन पहलों से लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार, यात्रा समय में कमी, और परियोजना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक लाभ प्राप्त होने की उम्मीद है।

सड़क परियोजनाएं – MoRTH

1. NH-160A का जीर्णोद्धार और उन्नयन (घोटी – पालघर, महाराष्ट्र)

  • लंबाई: 154.635 किलोमीटर

  • उद्देश्य: नासिक और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों (MIDC, Ambad, Satpur) को पश्चिमी तटीय बंदरगाहों से जोड़ने वाला वैकल्पिक फ्रेट कॉरिडोर।

  • लाभ:

    • औद्योगिक और वाणिज्यिक परिवहन के लिए अधिक कुशल पोर्ट पहुंच।

    • शहरी मार्गों में भीड़ कम करना।

    • नासिक, पालघर और दहानू रेलवे हेड्स से इंटरमॉडल कनेक्टिविटी में सुधार।

    • ताजा और नाशपाती जैसी कृषि वस्तुओं का तेज परिवहन।

    • त्रिंबक, जावहर, मैनर और पालघर जैसे क्षेत्रीय केंद्रों में पर्यटन और MSME विकास को बढ़ावा।

2. हिवरखेड़ी – बासिंदा-रोशनी (बेतुल – खंडवा, मध्य प्रदेश) और अशापुर – रूढ़ी (बेतुल – खंडवा)

  • लंबाई: लगभग 300 किलोमीटर

  • उद्देश्य: 2/4 लेन सड़क का विकास और राज्य के महत्वपूर्ण शहरों व औद्योगिक केंद्रों के बीच इंटरस्टेट कनेक्टिविटी में सुधार।

  • लाभ:

    • नागपुर और वडोदरा के बीच वैकल्पिक और छोटा मार्ग।

    • औद्योगिक और आर्थिक क्षेत्रों तक बेहतर पहुंच, जैसे बारवानी, अंजाद, खर्गोन, भिकंगांव, और NTPC सुपर थर्मल पावर स्टेशन।

    • क्षेत्रीय व्यापार और औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन।

    • यात्रा समय में कमी, परिवहन लागत में बचत और प्रमुख आर्थिक/प्रशासनिक केंद्रों तक बेहतर पहुंच।

रेल परियोजनाएं – MoR

1. गमहेरिया – चांडिल (झारखंड) में 3री और 4थी लाइन

  • लंबाई: 56 किलोमीटर

  • उद्देश्य: कंद्रा–चांडिल खंड में भीड़भाड़ कम करना, जो वर्तमान में 130% क्षमता पर संचालित हो रहा है।

  • महत्व:

    • चक्रधरपुर डिवीजन से बर्नपुर और दुर्गापुर स्टील प्लांट्स तथा आसनसोल क्षेत्र के स्पॉन्ज आयरन उद्योग तक कच्चे माल का सुचारू परिवहन।

    • लाइन क्षमता बढ़ाकर फ्रीट और यात्री संचालन में सुधार।

    • पूर्वी भारत में औद्योगिक और खनिज आधारित लॉजिस्टिक्स को सुदृढ़ करना।

2. सैंथिया – पाकुर (पश्चिम बंगाल और झारखंड) में 4थी लाइन

  • लंबाई: लगभग 81.20 किलोमीटर

  • उद्देश्य: व्यस्त रेल मार्ग में क्षमता बढ़ाना और ऊर्जा कॉरिडोर के रूप में औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं और पावर सेक्टर लॉजिस्टिक्स को सुदृढ़ करना।

  • लाभ:

    • रेलवे आधारित माल परिवहन को बढ़ावा, सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करना।

    • फ्रीट गति और ट्रेन समय पालन में सुधार।

    • प्रमुख उद्योगों और संयंत्रों के लिए लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार।

    • बिजली संयंत्र (WBPDCL), सीमेंट प्लांट, और खनन संचालन के लिए लाभकारी।

    • पूर्वी भारत में औद्योगिक विस्तार और आर्थिक विकास को प्रोत्साहन।

बैठक की अध्यक्षता संयुक्त सचिव, लॉजिस्टिक्स, DPIIT श्री पंकज कुमार ने की।

निष्कर्ष:

इन परियोजनाओं के सफल कार्यान्वयन से मल्टीमोडल कनेक्टिविटी में सुधार, लॉजिस्टिक्स दक्षता में वृद्धि, यात्रा समय में कमी, और क्षेत्रीय औद्योगिक एवं आर्थिक विकास को बल मिलेगा। यह PM गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत समेकित और सतत बुनियादी ढांचे के निर्माण में एक महत्वपूर्ण कदम है।


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