Media24Media.com: #JusticeForAll

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #JusticeForAll. Show all posts
Showing posts with label #JusticeForAll. Show all posts

संविधान के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प: समरसता भोज में शामिल हुए मुख्यमंत्री साय

No comments Document Thumbnail

संविधान हमारे लोकतंत्र की आत्मा है और समरसता उसकी सबसे बड़ी शक्ति - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के शंकरनगर स्थित दुर्गा मैदान में डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर   आयोजित समरसता भोज कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने जनप्रतिनिधियों और आमजन के साथ बैठकर भोजन किया तथा स्वयं लोगों को भोजन परोसकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसके संविधान का निर्माण करने का गौरव बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को प्राप्त है। उन्होंने कहा कि यह संविधान देश के 140 करोड़ नागरिकों को समानता, अधिकार और गरिमा के साथ जीवन जीने का आधार प्रदान करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने दृढ़ संकल्प और अदम्य इच्छाशक्ति के बल पर उच्चतम स्थान प्राप्त किया और समाज के वंचित, शोषित एवं कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने नारी शिक्षा और सम्मान के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य किए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले और माता सावित्रीबाई फुले द्वारा प्रारंभ किए गए नारी शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के अभियान को बाबा साहेब ने आगे बढ़ाया और उसे नई दिशा दी।


उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बाबा साहेब के जन्म, शिक्षा, दीक्षा, कार्य और समाधि स्थलों को “पंच तीर्थ” के रूप में विकसित कर उन्हें सच्चा और स्थायी सम्मान दिया जा रहा है। 

इस अवसर पर मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि बाबा साहेब का जीवन संघर्ष, शिक्षा और समरसता का प्रेरक उदाहरण है। उनके विचार आज भी समाज को समानता और न्याय की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। समरसता भोज जैसे आयोजन सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक किरण सिंह देव ने कहा कि बाबा साहेब ने संविधान के माध्यम से समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ाने की मजबूत व्यवस्था दी। आज मुख्यमंत्री साय और के नेतृत्व में अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का कार्य निरंतर किया जा रहा है।

समरसता भोज कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा,  छत्तीसगढ़ खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित  थे।

श्रीनगर में 17 फरवरी को टेली-लॉ और DISHA योजना पर क्षेत्रीय कार्यक्रम एवं कार्यशाला का आयोजन

No comments Document Thumbnail

श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर):- न्याय तक समग्र पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से टेली-लॉ (Tele-Law) पहल के तहत DISHA योजना के अंतर्गत एक क्षेत्रीय कार्यक्रम सह कार्यशाला का आयोजन 17 फरवरी 2026 को श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में किया जाएगा। यह कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से शुरू होगा।

यह कार्यशाला भारत सरकार के कानून और न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग (Department of Justice) द्वारा “न्याय तक पहुंच” प्रभाग के तहत आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य तकनीक आधारित कानूनी सेवाओं के माध्यम से न्याय तक पहुंच को मजबूत करना है।

150 वर्ष पूरे होने पर ‘वंदे मातरम्’ से होगी शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत भारत के राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” के सामूहिक गायन से होगी, जो राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है।

DISHA योजना के विभिन्न आयामों पर चर्चा

कार्यक्रम के दौरान “DISHA योजना के आयाम: सुगम एवं सुलभ न्याय तक पहुंच” सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें कानूनी साक्षरता बढ़ाने के लिए सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रमों, डिजिटल अभियानों और शैक्षणिक संस्थानों व नागरिक समाज संगठनों के साथ साझेदारी जैसे प्रयासों को प्रस्तुत किया जाएगा। खास तौर पर वंचित और कमजोर वर्गों तक सरल और तकनीक आधारित प्लेटफॉर्म के माध्यम से पहुंच बनाने पर जोर दिया जाएगा।

जम्मू-कश्मीर में DISHA योजना की झलक

कार्यक्रम में “DISHA in J&K: एक झलक” सत्र भी होगा, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में कानूनी जागरूकता बढ़ाने और न्याय तक पहुंच सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयासों को प्रदर्शित किया जाएगा।

उपलब्धि हासिल करने वालों का सम्मान और ई-कैलेंडर का विमोचन

कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में DISHA योजना से जुड़े उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थानों को सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा न्याय विभाग का वार्षिक ई-कैलेंडर भी जारी किया जाएगा, जिसमें वर्ष भर की गतिविधियों और जागरूकता अभियानों का रोडमैप होगा।

केंद्रीय मंत्री और शीर्ष न्यायिक अधिकारियों की उपस्थिति

कार्यक्रम में कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, तथा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री अरुण पाली की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।

करीब 800 प्रतिभागियों की भागीदारी

इस कार्यशाला में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश, हाईकोर्ट रजिस्ट्री के अधिकारी, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी, बार एसोसिएशन के अधिवक्ता, सरकारी वकील, न्यायिक अधिकारी, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के वीएलई, विश्वविद्यालयों और विधि महाविद्यालयों के फैकल्टी व छात्र, तथा केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा कई नागरिक और हितधारक वर्चुअल माध्यम से भी जुड़ेंगे।

न्याय तक पहुंच को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

यह क्षेत्रीय कार्यशाला देशभर में आयोजित की जा रही श्रृंखला का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य टेली-लॉ और न्याय तक पहुंच कार्यक्रमों की प्रभावशीलता बढ़ाना, राज्य प्रशासन के साथ सहयोग मजबूत करना और अंतिम व्यक्ति तक न्याय सेवा पहुंचाना है। श्रीनगर में यह कार्यक्रम क्षेत्र में न्याय वितरण प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा।


राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस: न्याय और कानूनी सहायता को हर नागरिक तक पहुँचाने का प्रयास

No comments Document Thumbnail

राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस

9 नवंबर को राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की याद में उन संगठनों की स्थापना को सम्मानित किया जा सके, जो जरूरतमंदों को मुफ़्त कानूनी सहायता प्रदान करते हैं।

भारत के विधिक सहायता प्रणाली ने 2022-25 के बीच 44.22 लाख लोगों तक पहुँच बनाई और लोक अदालतों के माध्यम से 23.58 करोड़ मामले सुलझाए। इसी अवधि में राज्य, स्थायी और राष्ट्रीय लोक अदालतों के माध्यम से 23.58 करोड़ से अधिक मामले निपटाए गए।

इसके अलावा DISHA योजना के तहत 28 फरवरी, 2025 तक लगभग 2.10 करोड़ लोगों को मुकदमे से पहले सलाह, प्रो बोनो सेवाएँ, कानूनी प्रतिनिधित्व और जागरूकता प्रदान की गई।

परिचय

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार और कानून के तहत समान संरक्षण की गारंटी देता है। फिर भी, कई लोग निरक्षरता, गरीबी, प्राकृतिक आपदाओं, अपराध या वित्तीय कठिनाइयों के कारण कानूनी सेवाओं तक पहुँच नहीं पा पाते।

विधिक सेवा प्राधिकरण को विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत स्थापित किया गया ताकि समाज के हाशिए पर रहने वाले और वंचित वर्गों को मुफ़्त और योग्य कानूनी सेवाएँ प्रदान की जा सकें। अधिनियम के लागू होने के दिन 9 नवंबर 1995 से यह दिवस हर साल मनाया जाता है।

इस दिन, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण देशभर में कानूनी जागरूकता शिविर आयोजित करते हैं, जिसमें मुफ्त कानूनी सहायता और अन्य सेवाओं की उपलब्धता के बारे में जानकारी दी जाती है।

विधिक सेवा प्राधिकरण

विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 ने देशभर में कानूनी सहायता संगठनों की स्थापना की ताकि आर्थिक या अन्य बाधाओं के कारण किसी नागरिक को न्याय पाने का समान अवसर न छिन सके।

अधिनियम ने तीन-स्तरीय व्यवस्था बनाई:

  1. राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) – भारत के मुख्य न्यायाधीश के अध्यक्षता में

  2. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण – उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के अध्यक्षता में

  3. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण – जिला न्यायाधीश के अध्यक्षता में

वित्तीय संरचना:

  • केंद्रीय निधि: राष्ट्रीय विधिक सहायता कोष के माध्यम से

  • राज्य निधि: राज्य विधिक सहायता कोष के माध्यम से

  • जिला निधि: जिला विधिक सहायता कोष के माध्यम से

पिछले तीन वर्षों में 44.22 लाख लोगों ने मुफ्त कानूनी सहायता और परामर्श का लाभ उठाया है।

आवेदन प्रक्रिया

किसी भी पात्र व्यक्ति को संबंधित विधिक सेवा प्राधिकरण या समिति में आवेदन कर सकता है।

  • आवेदन लिखित रूप में या निर्धारित फॉर्म भरकर किया जा सकता है।

  • मौखिक आवेदन पर एक अधिकारी या पैरालीगल स्वयंसेवक मदद करता है।

  • ऑनलाइन आवेदन भी NALSA या राज्य/जिला प्राधिकरण की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

आवेदन मिलने के बाद, प्राधिकरण मामले की समीक्षा करता है और आवश्यक कानूनी सहायता प्रदान करता है, जिसमें कानूनी परामर्श, काउंसलिंग या वकील नियुक्त करना शामिल हो सकता है।

संपर्क और समयसीमा:

  • आवेदन स्वीकार होने पर वकील और आवेदक को नियुक्ति पत्र भेजा जाता है।

  • आवेदन पर निर्णय तुरंत या अधिकतम सात दिन में लिया जाता है।

  • आवेदन की स्थिति:

    • भौतिक आवेदन: डाक या ईमेल द्वारा सूचना

    • ऑनलाइन आवेदन: आवेदन संख्या और ऑनलाइन ट्रैकिंग

    • सरकारी विभाग/CPGRAMS: ईमेल और वेबसाइट पर अपडेट

लोक अदालतें

अधिनियम ने लोक अदालतों और स्थायी लोक अदालतों की स्थापना की, जो वैकल्पिक विवाद समाधान मंच हैं। ये मंच लंबित या मुकदमे से पहले के विवादों को सुलझाने का कार्य करते हैं।
2022-23 से 2024-25 तक 23.58 करोड़ मामले राज्य, स्थायी और राष्ट्रीय लोक अदालतों के माध्यम से निपटाए गए।


LADCS योजना (Legal Aid Defense Counsel System)

NALSA की LADCS योजना पात्र लाभार्थियों को आपराधिक मामलों में मुफ्त कानूनी रक्षा प्रदान करती है।

  • 30 सितंबर, 2025 तक 668 जिलों में कार्यरत कार्यालय हैं।

  • 7.86 लाख मामलों को 2023-24 से 2025-26 (सितंबर 2025 तक) निपटाया गया।

  • इस योजना के लिए Rs. 998.43 करोड़ का वित्तीय प्रावधान है।

DISHA योजना

  • 2.10 करोड़ लोग प्री-लिटिगेशन सलाह, प्रो बोनो सेवा और कानूनी जागरूकता से लाभान्वित हुए।

  • योजना अवधि: 2021-2026, Rs. 250 करोड़ का बजट।

कानूनी जागरूकता कार्यक्रम

  • NALSA ने 13.83 लाख कार्यक्रम आयोजित किए, जिसमें 14.97 करोड़ लोग उपस्थित हुए।

  • कार्यक्रम बच्चों, श्रमिकों, आपदा पीड़ितों और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के लिए थे।

  • सामग्री 22 भाषाओं और भाषाई रूपों में विकसित की गई।

  • दूरदर्शन ने 56 कानूनी जागरूकता कार्यक्रम प्रसारित किए, 70.70 लाख लोगों तक पहुँचा।

त्वरित न्यायालय और अन्य न्यायालय

  • Fast Track Courts (FTC): महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और पुराने मामलों की तेजी से सुनवाई।

  • Fast Track Special Courts (FTSCs): गंभीर यौन अपराध मामलों के लिए, 725 कोर्ट्स कार्यरत।

  • Gram Nyayalayas: ग्रामीण क्षेत्रों में न्याय की पहुँच।

  • Nari Adalats: महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के लिए पंचायत स्तर पर समाधान।

  • SC/ST अधिनियम: 211 विशेष अदालतें स्थापित।

प्रशिक्षण कार्यक्रम

  • National Judicial Academy: न्यायाधीशों और कानूनी कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण।

  • Para-Legal Volunteers Scheme: स्वयंसेवकों को कानूनी प्रशिक्षण और लोगों तथा प्राधिकरणों के बीच सेतु का कार्य।

  • 2023-24 से मई 2024 तक: 2,315 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित।

निष्कर्ष

भारत का कानूनी तंत्र न्याय को सभी के लिए सुलभ बनाने का प्रयास करता है।

  • लोक अदालतें, त्वरित न्यायालय, कानूनी जागरूकता कार्यक्रम और कानूनी सहायता योजनाएं न्याय को तेज़ और आसान बनाती हैं।

  • कानूनी सहायता और जागरूकता अभियानों ने करोड़ों लोगों तक पहुँच बनाई, जिससे समाज के सबसे कमजोर वर्गों को भी न्याय का मूल अधिकार प्राप्त हो सके।


प्रधानमंत्री मोदी 8 नवंबर को ‘कानूनी सहायता वितरण तंत्र सुदृढ़ करने’ पर राष्ट्रीय सम्मेलन का करेंगे उद्घाटन

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 नवंबर 2025 को लगभग 5 बजे भारत के सर्वोच्च न्यायालय में “कानूनी सहायता वितरण तंत्र सुदृढ़ करने” पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा तैयार समुदाय मध्यस्थता प्रशिक्षण मॉड्यूल का भी शुभारंभ करेंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री सम्मेलन में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को संबोधित भी करेंगे।

दो दिवसीय सम्मेलन, जिसे NALSA द्वारा आयोजित किया गया है, में कानूनी सेवाओं के ढांचे के मुख्य पहलुओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इनमें कानूनी सहायता बचाव वकील प्रणाली, पैनल वकील, पैरा-लीगल स्वयंसेवक, स्थायी लोक अदालतें, और कानूनी सेवा संस्थानों का वित्तीय प्रबंधन शामिल हैं।

सम्मेलन का उद्देश्य कानूनी सहायता वितरण प्रणाली को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सुलभ बनाना है, ताकि देश के हर नागरिक को न्याय की समुचित सुविधा मिल सके।


राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), भारत का 32वां स्थापना दिवस समारोह और कैदियों के मानवाधिकार पर राष्ट्रीय सम्मेलन

No comments Document Thumbnail

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), भारत अपने 32वें स्थापना दिवस का समारोह 16 अक्टूबर 2025 को विज्ञान भवन में आयोजित कर रहा है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि, भारत के पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, उद्घाटन भाषण देंगे। इस कार्यक्रम में NHRC, भारत के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यम, सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) विद्युत रंजन सारंगी,विजया भारती सायनी, प्रियांक कानूंगो, महासचिव भरत लाल और आयोग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित होंगे। स्थापना दिवस समारोह आयोग की यात्रा पर विचार करने और मानवाधिकारों की सुरक्षा और संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करने का अवसर प्रदान करता है।

इसके साथ ही आयोग ‘कैदियों के मानवाधिकार’ पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करेगा। विभिन्न सत्रों में कैदियों के मानवाधिकार और कल्याण से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसमें संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, राजदूतों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, कानूनी विशेषज्ञों, नागरिक समाज और मानवाधिकार रक्षकों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।

32 वर्षों की यात्रा (12 अक्टूबर 1993 से) के दौरान, NHRC ने नीति सुधार, जन-केंद्रित शासन और कानून प्रवर्तन, जांच और कल्याण योजनाओं/कार्यक्रमों में नियमित निगरानी के माध्यम से न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का काम किया है। आयोग पुलिस जवाबदेही, जेल सुधार और आरोपियों एवं पीड़ितों के अधिकारों की सुरक्षा को बढ़ावा देता है। यह केंद्रीय और राज्य सरकारों, पैरास्टेटल संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, एनजीओ और मानवाधिकार रक्षकों के साथ मिलकर मानवाधिकारों की सुरक्षा और संवर्धन में योगदान देता है।

अब तक आयोग ने 31 सलाहकार निर्देश (Advisories) जारी किए हैं, जिनमें बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), विधवाओं के अधिकार, भिखारी वर्ग के अधिकार, भोजन का अधिकार, स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य के अधिकार, अनौपचारिक श्रमिकों के अधिकार, मृतकों की गरिमा का सम्मान, ट्रक चालकों के अधिकार, पर्यावरण प्रदूषण और गिरावट, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण, कैदियों द्वारा आत्म-हानि और आत्महत्या के प्रयास को कम करने के उपाय, नेत्र संबंधी चोटों को रोकने के उपाय शामिल हैं। इसके अलावा, आयोग ने हान्सन रोग से पीड़ित व्यक्तियों के खिलाफ भेदभाव करने वाले 97 कानूनों में संशोधन की सिफारिश भी की।

पिछले 32 वर्षों में, आयोग ने 23,79,043 मामले देखे, जिनमें से 2,981 सुओ मोटु (suo motu) मामले थे। इस दौरान, आयोग ने 8,924 मामलों में ₹263 करोड़ से अधिक का मौद्रिक राहत प्रदान करने की सिफारिश की। पिछले एक वर्ष (1 अक्टूबर 2024 से 30 सितंबर 2025) के दौरान, आयोग ने 73,849 शिकायतें और 108 सुो मोटु मामले निपटाए, 63 साइट जांचें कीं, 38,063 मामले निपटाए और 210 मामलों में पीड़ितों को ₹9 करोड़ से अधिक की राहत की सिफारिश की।

विशेष प्रतिनिधि और विशेष पर्यवेक्षक (Special Rapporteurs & Monitors) आयोग को विभिन्न क्षेत्रों में मानवाधिकार स्थिति का मूल्यांकन करने में मदद करते हैं। वे आश्रय गृहों, जेलों और पर्यवेक्षण गृहों का दौरा करते हैं और आयोग को अपनी रिपोर्ट प्रदान करते हैं।

आयोग ने राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थानों (NHRIs) के लिए क्षमता निर्माण, शोध अध्ययन, सहयोगात्मक कार्यशालाओं, ओपन हाउस चर्चा, इंटर्नशिप कार्यक्रम, संवेदीकरण और प्रशिक्षण जैसे अनेक कार्यक्रम आयोजित किए हैं। पिछले वर्ष आयोग ने 33 सहयोगात्मक कार्यशालाएं, 4 मूट कोर्ट प्रतियोगिताएं, 6 ऑनलाइन शॉर्ट टर्म इंटर्नशिप (OSTIs) और कॉलेज/विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए ऑन-साइट इंटर्नशिप आयोजित की। OSTIs ने दूरदराज के क्षेत्रों के छात्रों को मानवाधिकार के दूत बनने का प्रशिक्षण दिया।

आयोग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय रूप से मानवाधिकारों की रक्षा और संवर्धन में योगदान दे रहा है, जिसमें एशिया पैसिफिक फोरम, GANHRI, और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद शामिल हैं।

आयोग ने मानवाधिकारों की जागरूकता बढ़ाने के लिए फोटोग्राफी और लघु फिल्म प्रतियोगिताएं, सार्वजनिक प्रकाशन, और HRCNet पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत प्रणाली जैसी पहलें की हैं। पिछले वर्ष, मानवाधिकारों पर लघु फिल्म प्रतियोगिता में 303 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं। आयोग ने चार नए प्रकाशन भी जारी किए।

स्थापना दिवस समारोह और राष्ट्रीय सम्मेलन का लाइव प्रसारण YouTube और Webcast पर उपलब्ध होगा।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.