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आयुष को सशक्त बनाने वाला बजट, समग्र स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में ऐतिहासिक कदम : प्रतापराव जाधव

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माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं माननीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आयुष पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने वाले परिवर्तनकारी बजट घोषणाओं के लिए हृदय से आभार व्यक्त करते हुए, केंद्रीय आयुष एवं स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)प्रतापराव जाधव ने इन घोषणाओं को भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन बताया।

आयुष मंत्री ने बजट को “दूरदर्शी और भविष्य उन्मुख” बताते हुए कहा कि ये उपाय एक समग्र, समावेशी और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण के लिए सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जिसमें आयुष एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभर रहा है।

अपने बजट भाषण में माननीय वित्त मंत्री ने आयुष क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान, गुणवत्ता आश्वासन, वैश्विक नेतृत्व, मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म तथा कुशल मानव संसाधन विकास को विस्तार देने हेतु कई ऐतिहासिक पहलों की घोषणा की। ये कदम पारंपरिक चिकित्सा को निवारक स्वास्थ्य सेवा, आर्थिक विकास और वैश्विक वेलनेस नेतृत्व का प्रमुख चालक बनाने की भारत की आकांक्षा को सुदृढ़ करते हैं।

बजट का एक ऐतिहासिक पहलू तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों (AIIA) की स्थापना का प्रस्ताव है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाली स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा, उन्नत अनुसंधान और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा। मौजूदा राष्ट्रीय संस्थानों की सफलता के आधार पर, ये संस्थान शैक्षणिक मानकों को ऊंचा उठाने और साक्ष्य-आधारित एकीकृत चिकित्सा को सुदृढ़ करने में सहायक होंगे।

बजट में आयुष फार्मेसियों एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं को उच्च प्रमाणन मानकों के अनुरूप उन्नत करने का भी प्रस्ताव है। इससे उत्पाद गुणवत्ता, उपभोक्ता विश्वास और निर्यात क्षमता को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों और प्रसंस्करण एवं विनिर्माण से जुड़े एमएसएमई को समर्थन मिलेगा।

भारत के वैश्विक नेतृत्व को और मजबूत करते हुए, जामनगर स्थित डब्ल्यूएचओ वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र को उन्नत किया जाएगा, जिससे अनुसंधान सहयोग, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण और नीति संवाद को गहराई मिलेगी। इससे भारत पारंपरिक चिकित्सा के लिए वैश्विक ज्ञान केंद्र के रूप में स्थापित होगा।

आर्थिक एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, प्रस्तावित पाँच क्षेत्रीय मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म हब में आयुष केंद्रों को शामिल किया जाएगा। ये केंद्र उन्नत चिकित्सा उपचार के साथ पारंपरिक उपचार, वेलनेस सेवाओं और पुनर्वास सहायता को जोड़ते हुए एकीकृत स्वास्थ्य गंतव्य के रूप में विकसित होंगे। इससे आयुष चिकित्सकों, थैरेपिस्टों, योग प्रशिक्षकों और संबद्ध पेशेवरों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

इसके अतिरिक्त, एनएसक्यूएफ से संरेखित केयरगिवर प्रशिक्षण कार्यक्रमों में योग और वेलनेस कौशल को शामिल किया गया है, जिसके तहत आगामी वर्ष में 1.5 लाख केयरगिवरों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे आयुष से जुड़े कौशल केयर इकॉनमी में मुख्यधारा में आएंगे और निवारक तथा जेरियाट्रिक देखभाल सेवाएं सशक्त होंगी।

प्रतापराव जाधव ने कहा कि पिछले एक दशक में माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आयुष क्षेत्र ने अभूतपूर्व संस्थागत विस्तार, वैश्विक मान्यता, डिजिटल विस्तार और अनुसंधान प्रगति देखी है। उन्होंने कहा, “यह बजट उसी मजबूत आधार पर आगे बढ़ते हुए विस्तार से समेकन, गुणवत्ता संवर्धन और वैश्विक एकीकरण की ओर ले जाता है। यह एक निर्णायक क्षण है, जहां पारंपरिक चिकित्सा को पूरक नहीं, बल्कि भारत के स्वास्थ्य भविष्य का अभिन्न अंग माना जा रहा है।”

आर्थिक प्रभाव पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि ये घोषणाएं स्वास्थ्य नीति को ग्रामीण आजीविका, निर्यात वृद्धि, युवा रोजगार और उद्यमिता से जोड़ती हैं, जिससे भारत के साक्ष्य-आधारित समग्र स्वास्थ्य देखभाल के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने को बल मिलता है।

उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री और माननीय वित्त मंत्री के प्रति उनके निरंतर समर्थन और दूरदर्शी दृष्टिकोण के लिए पुनः आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट एक स्वस्थ, आत्मनिर्भर और वैश्विक रूप से सम्मानित भारत के लिए एकीकृत स्वास्थ्य सेवा को संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में निर्णायक कदम है।


मेडिकल वैल्यू ट्रैवल में भारत की वैश्विक उड़ान: आयुष आधारित समग्र स्वास्थ्य से बढ़ता अंतरराष्ट्रीय विश्वास

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भारत मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (MVT) के क्षेत्र में तेजी से उभरते हुए वैश्विक गंतव्यों में शामिल हो रहा है। विश्वस्तरीय चिकित्सा अवसंरचना, अत्यधिक कुशल स्वास्थ्य पेशेवरों, किफायती उपचार लागत और आयुष आधारित पारंपरिक व समग्र स्वास्थ्य प्रणालियों की विशिष्ट शक्ति के साथ भारत आज अंतरराष्ट्रीय रोगियों के लिए एक भरोसेमंद और आकर्षक स्वास्थ्य केंद्र बनता जा रहा है।

जटिल शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं से लेकर दीर्घकालिक वेलनेस थैरेपी तक, भारत एक एकीकृत स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करता है। यहां वैश्विक मानकों के अनुरूप अस्पतालों में अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा उपचार किया जाता है, वहीं आयुष प्रणालियां—आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी—रोकथाम, पुनर्वास और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाती हैं।

वन अर्थ, वन हेल्थ – एडवांटेज हेल्थकेयर इंडिया 2023 में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेडिकल वैल्यू ट्रैवल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा था कि “भारत मेडिकल वैल्यू ट्रैवल और हेल्थ वर्कफोर्स मोबिलिटी को स्वस्थ ग्रह के लिए महत्वपूर्ण मानता है।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत की प्राचीन परंपराएं—योग, ध्यान, आयुर्वेद और मोटे अनाज आधारित पारंपरिक आहार—आज की जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों और तनाव से निपटने में दुनिया को समाधान प्रदान करती हैं।

वैश्विक विश्वास और गुणवत्ता आश्वासन को और सुदृढ़ करने के लिए प्रधानमंत्री ने 19 दिसंबर 2025 को भारत मंडपम में आयोजित द्वितीय WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन के दौरान ‘आयुष क्वालिटी मार्क’ का शुभारंभ किया। यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रमाणन ढांचा आयुष उत्पादों और सेवाओं में विश्वसनीयता और मानकीकरण को बढ़ाता है।

केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने कहा कि भारत की ताकत उसकी एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली में है। “मेडिकल वैल्यू ट्रैवल केवल किफायत नहीं, बल्कि विश्वास, गुणवत्ता और परिणामों से जुड़ा है। आयुष प्रणालियां पारंपरिक चिकित्सा के साथ मिलकर समग्र स्वास्थ्य समाधान प्रदान करती हैं,” उन्होंने कहा।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वृद्धि के लिए मानकीकरण और विश्वसनीयता को अहम बताया। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता आश्वासन, डिजिटल सुविधा और वैश्विक मानकों के माध्यम से भारत एक भरोसेमंद वैश्विक स्वास्थ्य गंतव्य के रूप में स्थापित हो रहा है।

आंकड़े इस बढ़ती प्रवृत्ति की पुष्टि करते हैं। 2020 में 1.82 लाख अंतरराष्ट्रीय मरीजों की तुलना में 2024 में 6.44 लाख विदेशी मरीज भारत आए। योग, आयुर्वेद और वेलनेस आधारित उपचार इस वृद्धि के प्रमुख आधार बने हैं।

भारत की मेडिकल वैल्यू ट्रैवल नीति में सार्वजनिक–निजी भागीदारी, चिकित्सा अवसंरचना में 100% एफडीआई, चिकित्सा सेवाओं के निर्यात को प्रोत्साहन और वैश्विक आउटरीच की अहम भूमिका रही है। आयुष आधारित मेडिकल वैल्यू ट्रैवल को बढ़ावा देने के लिए 27 जुलाई 2023 को आयुष वीज़ा की शुरुआत की गई, जिससे विदेशी रोगियों और उनके परिजनों को उपचार के लिए सुविधा मिली।

मानकीकरण की दिशा में, भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने मेडिकल वैल्यू ट्रैवल के लिए ISO 22525 को अपनाया है। साथ ही, लगभग 27 बीमा कंपनियां अब आयुष उपचारों को कवर कर रही हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय मरीजों का भरोसा और बढ़ा है।

आयुष मंत्रालय ने मुंबई (2024) और चेन्नई (2025) में आयोजित वैश्विक सम्मेलनों के माध्यम से मेडिकल वैल्यू ट्रैवल को प्रमुख विषय के रूप में आगे बढ़ाया है। कौशल विकास के लिए हेल्थ सेक्टर स्किल काउंसिल के तहत आयुष उप-परिषद की स्थापना की गई, जिसके अंतर्गत अब तक 37,000 से अधिक लोगों को प्रमाणित किया जा चुका है।

नीतिगत समर्थन, वीज़ा सुविधा, बीमा कवरेज और गुणवत्ता मानकों के समन्वय के साथ, भारत की मेडिकल वैल्यू ट्रैवल यात्रा अब केवल लागत लाभ तक सीमित नहीं रही, बल्कि एकीकृत, समग्र और प्रमाण-आधारित वैश्विक स्वास्थ्य विश्वास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है।

नेशनल वन हेल्थ मिशन असेम्बली 2025 का दो दिवसीय आयोजन सफलतापूर्वक समाप्त

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नेशनल वन हेल्थ मिशन असेम्बली 2025 का दो दिवसीय आयोजन आज भारत मंडपम में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। दूसरे दिन में विशेष तकनीकी विचार-विमर्श हुए, जिन्होंने मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य के समेकित और लचीले वन हेल्थ इकोसिस्टम के निर्माण के लिए राष्ट्रीय प्रयासों को और मजबूत किया। इस असेंबली में प्रमुख मंत्रालयों, वैज्ञानिक संस्थाओं, विकास सहयोगियों और कार्यान्वयन एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में समन्वित कार्रवाई का महत्व उजागर हुआ।

पहले दिन की मजबूत शुरुआत के बाद, जिसमें सरकार के वरिष्ठ नेतृत्व ने संयुक्त निगरानी और ‘होल-ऑफ-गवर्नमेंट’ सहयोग की प्रतिबद्धता दोहराई, आज के सत्रों ने वैज्ञानिक, संचालनात्मक और कार्यक्रमगत चर्चाओं के माध्यम से उस गति को बनाए रखा। इन संवादों ने साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाया और विभिन्न क्षेत्रों में वन हेल्थ एकीकरण, तत्परता और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं के लिए आधार तैयार किया।

दिन की कार्यवाही का नेतृत्व वरिष्ठ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने किया। डॉ. वी. के. पॉल, सदस्य (स्वास्थ्य), नीति आयोग ने सहयोग, प्रणालीगत तत्परता और मजबूत राष्ट्रीय क्षमताओं के लिए सतत प्रयासों का आह्वान किया। उनके साथ डॉ. राजीव बहल, सचिव, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग और महानिदेशक, ICMR तथा डॉ. राजेश एस. गोखले, सचिव, जैव प्रौद्योगिकी विभाग भी उपस्थित थे, जिन्होंने नवाचार, अनुवादक विज्ञान और एकीकृत निगरानी के महत्व पर जोर दिया। FAO के स्कॉट न्यूमैन और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की संयुक्त सचिव वंदना जैन ने भी बहु-क्षेत्रीय जुड़ाव और वैश्विक सहयोग के महत्व को रेखांकित किया। DRDO, ICAR, THSTI, CEPI, FIND, AYUSH और International Vaccine Institute जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों ने भी विविध वैज्ञानिक और कार्यान्वयन दृष्टिकोण साझा किए।

डॉ. वी. के. पॉल ने असेंबली में कहा, “भारत की वन हेल्थ प्रगति एक मजबूत होल-ऑफ-गवर्नमेंट दृष्टिकोण पर निर्भर करती है, जो स्वस्थ और लचीले भविष्य की दिशा में काम करता है। सामुदायिक भागीदारी इस प्रयास की आधारशिला है। मीडिया का महत्वपूर्ण योगदान है, जो जनता की समझ को आकार देता है और गलत सूचना को दूर करता है, जबकि हमारी कानून व्यवस्था प्रणाली आपात स्थितियों में महत्वपूर्ण बल-गुणक के रूप में कार्य करती है। इन साझेदारियों को मजबूत करना यह सुनिश्चित करेगा कि समय पर, भरोसेमंद और समन्वित कार्रवाई हो।”

उन्होंने सामुदायिक सहभागिता को रोग का शीघ्र पता लगाने, निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया का आधार बताया और कहा कि ग्रामीण स्तर पर वन हेल्थ तैयारियों का विस्तार होना चाहिए, जहां फ्रंटलाइन कर्मचारी, स्थानीय सरकारें और समुदाय पहली सुरक्षा पंक्ति बनाते हैं। उन्होंने COVID-19 महामारी के दौरान सामुदायिक सक्रियता को भारत की प्रमुख ताकत के रूप में उद्धृत किया और कहा कि यह असेंबली विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाकर क्षेत्रों में एकीकृत कार्रवाई को आगे बढ़ाने में सफल रही।

डॉ. राजीव बहल ने कहा, “हमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी और विकास को एकसाथ काम करने की आवश्यकता है। लक्ष्य केवल भविष्य की महामारी के लिए निदान, उपचार और टीकों का निर्माण नहीं है, बल्कि इसे तेजी से करना है। राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन प्लेटफॉर्म विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक साथ लाकर वर्तमान और भविष्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए एक अधिक चुस्त, तैयार और उत्तरदायी इकोसिस्टम बनाने में मदद कर रहा है।”

डॉ. राजेश एस. गोखले ने कहा, “COVID-19 ने हमारे तकनीकी भविष्य की नाजुकता और वैश्विक परस्पर निर्भरता को उजागर किया। अब स्पष्ट है कि जैविक, कृत्रिम और प्राकृतिक बुद्धिमत्ता का त्रिकोण सभी भविष्य की तकनीकों को पुनर्परिभाषित करेगा। इनका संगम एक ऐसा नवाचार और गति उत्पन्न करेगा जिसकी कल्पना आज करना कठिन है। इस क्षमता का लाभ उठाना भारत के वन हेल्थ और जैव विज्ञान क्षमताओं को मजबूत करने में केंद्रीय होगा।”

चिकित्सा प्रतिक्रियाओं पर चर्चा के दौरान, प्रमुख राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञों ने भविष्य के खतरे के प्रति तेजी से प्रतिक्रिया देने वाले टीकों, निदान और उपचार के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने चुस्त अनुसंधान प्लेटफार्मों के निर्माण, आपातकालीन उपयोग के लिए नियामक प्रणालियों को मजबूत करने और वैज्ञानिक एजेंसियों, उद्योग और वैश्विक साझेदारों के बीच सहयोग बढ़ाने पर बल दिया। राज्य सरकारों ने निगरानी प्रणाली, अंतर-विभागीय समन्वय और क्षेत्र स्तर पर संचालन की तैयारियों के कार्यान्वयन अनुभव साझा किए।

क्षमता निर्माण और सामुदायिक भागीदारी पर विचार-विमर्श में यह भी रेखांकित किया गया कि एक मजबूत वन हेल्थ सिस्टम कुशल मानव संसाधन, भरोसेमंद संस्थान और सशक्त समुदायों पर निर्भर करता है। वन्यजीव स्वास्थ्य, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण, सामुदायिक आधारित अनुसंधान और स्वास्थ्य प्रणाली विकास के विशेषज्ञों ने बहु-स्तरीय प्रशिक्षण संरचनाओं, पेशेवर शिक्षा में वन हेल्थ का समावेश और सतत सामुदायिक साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। राज्य सरकारों ने स्थानीय सामुदायिक भागीदारी रणनीतियों और अनुकूलित समाधानों का महत्व भी साझा किया।

दिन का आयोजन भारत की बढ़ती वन हेल्थ क्षमताओं को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनी के साथ समाप्त हुआ। संस्थानों ने निगरानी, जैव सुरक्षा, डिजिटल प्लेटफार्म, प्रयोगशाला नेटवर्क और सहयोगात्मक अनुसंधान प्रयासों में नवाचारों को दिखाया। नेशनल वन हेल्थ हैकथॉन के लिए एक सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया, जिसमें तकनीक-आधारित और सामुदायिक-केंद्रित समाधान प्रस्तुत किए गए।

विचार-विमर्श का समापन इस साझा समझ के साथ हुआ कि वन हेल्थ भारत के विकासशील भविष्य की दृष्टि को साकार करने के लिए आवश्यक है। वैज्ञानिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने, विभिन्न क्षेत्रों के सहयोग को सक्षम करने और प्रणाली के सभी स्तरों पर तैयारियों को मजबूत करने के माध्यम से, भारत एक सुरक्षित और लचीले भविष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है।


रजोनिवृत्ति देखभाल में एकीकृत स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा: सफदरजंग अस्पताल और सीएआरआई के बीच एमओयू हस्ताक्षर

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महिलाओं के लिए एकीकृत स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (VMMC) और सफदरजंग अस्पताल ने आज केन्द्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (CARI), जो केन्द्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS), आयुष मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है, के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस सहयोग का उद्देश्य रजोनिवृत्ति (Menopause) देखभाल में सुधार के लिए वैज्ञानिक और प्रमाण-आधारित आयुर्वेद अनुसंधान को बढ़ावा देना है।

रजोनिवृत्ति से गुजर रहीं महिलाओं में सामान्यतः गर्माहट के दौरे (Hot Flushes), अनिद्रा, थकान, योनि शुष्कता, मूड में उतार-चढ़ाव, चिंता और स्मरण शक्ति संबंधी समस्याएँ देखी जाती हैं। सुरक्षित और सहयोगी उपचार विकल्पों में बढ़ती रुचि के चलते कई महिलाएँ समग्र (Holistic) चिकित्सा पद्धतियों, विशेषकर आयुर्वेद, की ओर रुख कर रही हैं। यह MoU पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा को एकीकृत करने वाले प्रमाणित प्रोटोकॉल विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

समारोह के दौरान VMMC एवं सफदरजंग अस्पताल के निदेशक डॉ. संदीप बंसल ने कहा कि आयुर्वेद आधारित उपचार, जब एलोपैथिक तरीकों के साथ सावधानीपूर्वक उपयोग किए जाते हैं, तो रजोनिवृत्ति से गुजर रही महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि धातु युक्त आयुर्वेदिक दवाइयों का सेवन केवल विशेषज्ञ की निगरानी में ही किया जाना चाहिए, ताकि उनकी सुरक्षा और प्रभाव सुनिश्चित हो सके।

CARI के प्रभारी डॉ. हेमंता पाणिग्रही ने बताया कि CCRAS आयुर्वेद के वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए दशकों से कार्यरत है। उन्होंने बताया कि सफदरजंग अस्पताल में आयुर्वेद इकाई वर्ष 1996 से सक्रिय है और मरीजों की देखभाल तथा सहयोगात्मक अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने कहा, “प्रमाण-आधारित आयुर्वेद को वैश्विक स्वीकृति मिल रही है, और यह साझेदारी एकीकृत अनुसंधान पद्धतियों को और मजबूत करेगी तथा जनसामान्य की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाएगी।”

यह सहयोग रजोनिवृत्ति देखभाल को बेहतर बनाने हेतु वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित, सुरक्षित और प्रभावी आयुर्वेदिक हस्तक्षेप विकसित करने पर केंद्रित है, ताकि आधुनिक चिकित्सा को पूरक समर्थन मिल सके। इस पहल से मरीजों के परिणामों में सुधार, अनुसंधान क्षमता में वृद्धि और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित होने की उम्मीद है।

कार्यक्रम के दौरान प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. शिवशंकर राजपूत और प्रो. उपमा सक्सेना ने परियोजना के विवरण प्रस्तुत किए। इस अवसर पर डॉ. चारु बाम्बा (मेडिकल सुपरिटेंडेंट), डॉ. श्वेता माता और डॉ. असीमा जैन भी उपस्थित रहीं।

यह MoU VMMC–सफदरजंग अस्पताल और आयुष मंत्रालय की ओर से सहयोगात्मक, मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को आगे बढ़ाने और महिलाओं के स्वास्थ्य के क्षेत्र में एकीकृत अनुसंधान के नए मानक स्थापित करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


आयुष मंत्रालय ने गोवा में 'प्रयास', एकीकृत न्यूरो-रिहैबिलिटेशन सेंटर का उद्घाटन किया

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आयुष मंत्रालय ने ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA), गोवा में “प्रयास”, एकीकृत न्यूरो-रिहैबिलिटेशन सेंटर का अनावरण किया, जो आयुष क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस केंद्र का उद्घाटन 10वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर किया गया, जिसमें केंद्रीय राज्य मंत्री, आयुष मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार) और केंद्रीय राज्य मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, प्रतापराव जाधव ने श्रीपाद येसो नाइक, बिजली एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और AIIA गोवा के संकाय सदस्यों की उपस्थिति में किया।

“प्रयास” देश के पहले-प्रकार के बहुविषयक केंद्रों में से एक है, जो आयुर्वेद, फिजियोथेरेपी, योग, स्पीच थेरेपी, ऑक्युपेशनल थेरेपी और आधुनिक बाल रोग विज्ञान को एक ही छत के नीचे लाता है। यह केंद्र विशेष रूप से न्यूरोलॉजिकल और विकास संबंधी समस्याओं वाले बच्चों पर केंद्रित है और समग्र, रोगी-केंद्रित न्यूरो-रिहैबिलिटेशन प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

उद्घाटन समारोह में प्रतापराव जाधव ने कहा:“आयुष मंत्रालय ऐसे उत्कृष्ट केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है जो पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक चिकित्सा के साथ जोड़ते हैं। ‘प्रयास’ एकीकृत पुनर्वास का आदर्श मॉडल है, जो केवल उपचार ही नहीं बल्कि रोगियों और उनके परिवारों के लिए जीवन की नई गुणवत्ता और आशा भी प्रदान करता है।”

श्रीपाद येसो नाइक ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि न्यूरोलॉजिकल और विकास संबंधी विकारों से निपटने में पुनर्वास सेवाओं का महत्व अत्यंत है। उन्होंने कहा कि AIIA गोवा में अपनाया गया यह अभिनव मॉडल "जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों से जूझ रहे कई परिवारों के लिए नई आशा प्रदान करेगा।"

AIIA के निदेशक प्रो. पी.के. प्रजापति ने कहा, “'प्रयास' का शुभारंभ AIIA की उस दृष्टि को दर्शाता है, जो जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों को संबोधित करने के लिए अभिनव एकीकृत मॉडल विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। आयुर्वेद, योग और आधुनिक रिहैबिलिटेशन विज्ञान के संयोजन से हम साक्ष्य-आधारित समाधान तैयार करने का लक्ष्य रखते हैं, जो बाल न्यूरो केयर को बेहतर बनाए और समग्र चिकित्सा में नए मानक स्थापित करे।”

AIIA गोवा की डीन प्रो. सुजाता कदम ने इस पहल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “‘प्रयास’ के साथ, AIIA गोवा एकीकृत, रोगी-केंद्रित न्यूरो रिहैबिलिटेशन प्रदान करने में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। हमारा ध्यान विकासात्मक और न्यूरोलॉजिकल चुनौतियों वाले बच्चों के लिए समग्र देखभाल प्रदान करने पर है, साथ ही शोध और प्रशिक्षण में योगदान देने पर भी, जो आयुष आधारित नवाचारों के भविष्य को आकार देगा।”

उद्घाटन समारोह में वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों, आयुष मंत्रालय के सचिव, AIIA निदेशक, AIIA गोवा की डीन और एसोसिएट डीन, तथा कौमारभ्रित्य (बालरोग) विभाग के संकाय सदस्य – डॉ. सुमीत गोयल, डॉ. राहुल घुसे, डॉ. समृद्धि, डॉ. दीक्षा, डॉ. शालिनी, मिस नेलीशा, मिस शेफाली और मिस जेनिस – उपस्थित थे।

इस महत्वाकांक्षी कदम के साथ, आयुष मंत्रालय उस एकीकृत स्वास्थ्य सेवा की अपनी दृष्टि को सुदृढ़ करता है, जो पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक प्रथाओं का सर्वोत्तम संयोजन है, और जो भारत की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है।

“प्रयास” केवल एक केंद्र नहीं है—यह देखभाल, सहानुभूति और समग्र चिकित्सा का वचन है।


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