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भारत-जापान के बीच टोक्यो में 8वीं रक्षा नीति वार्ता आयोजित, रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति

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भारत और जापान के बीच 13 जुलाई 2026 को जापान की राजधानी टोक्यो में 8वीं रक्षा नीति वार्ता (Defence Policy Dialogue) आयोजित हुई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने किया, जबकि जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप रक्षा मंत्री  कानो कोजी ने किया।

बैठक में दोनों पक्षों ने पिछली रक्षा नीति वार्ता के बाद से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में हुई उल्लेखनीय प्रगति की समीक्षा की और भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी (Special Strategic and Global Partnership) को और मजबूत बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

वार्ता के दौरान दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य पर व्यापक चर्चा की तथा साझा हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। बैठक में सैन्य-से-सैन्य सहयोग, संयुक्त मुख्यालयों के बीच समन्वय, समुद्री सहयोग, रक्षा अभ्यास, क्षमता निर्माण, रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी सहयोग (विशेष रूप से समुद्री प्रौद्योगिकी) तथा संस्थागत सहयोग सहित रक्षा संबंधों के सभी प्रमुख पहलुओं की समीक्षा की गई।

दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग के लगातार विस्तार का स्वागत किया और नियमित उच्च-स्तरीय संवाद एवं आदान-प्रदान की आवश्यकता पर बल दिया। इस वर्ष प्रस्तावित मंत्रिस्तरीय यात्राओं और 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता के संभावित परिणामों पर भी चर्चा हुई।

बैठक में रक्षा औद्योगिक सहयोग, तकनीकी नवाचार, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तथा अन्य उभरते रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर बढ़ती समानता पर संतोष व्यक्त किया और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में मिलकर कार्य जारी रखने पर सहमति जताई। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर आधारित स्वतंत्र, मुक्त और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने भारत के रक्षा क्षेत्र में जापान के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी के तहत व्यावहारिक सहयोग को और मजबूत करना महत्वपूर्ण है। वहीं, कानो कोजी ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में भारत के साथ रक्षा संबंधों के और विस्तार के प्रति जापान की प्रतिबद्धता दोहराई।

इससे पहले रक्षा सचिव ने जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी से मुलाकात कर उन्हें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने जापानी रक्षा मंत्री को भारत आने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का औपचारिक निमंत्रण भी सौंपा। दोनों पक्षों ने भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी में लगातार आ रही मजबूती पर संतोष व्यक्त किया।

अपने दौरे की शुरुआत में रक्षा सचिव ने टोक्यो स्थित सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज मेमोरियल स्टोन पर पुष्पांजलि अर्पित कर जापान सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज के उन जवानों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया।

यह यात्रा भारत और जापान के बीच लगातार मजबूत होते रक्षा संबंधों, पारस्परिक सम्मान तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक रही।

भारत-मलेशिया सैन्य सहयोग उप-समिति (SCMC) की 12वीं बैठक नई दिल्ली में आयोजित

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भारत-मलेशिया सैन्य सहयोग उप-समिति (Sub Committee Meeting on Military Cooperation - SCMC) की 12वीं बैठक 1 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुई। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद और मलेशियाई सशस्त्र बलों के सहायक चीफ ऑफ स्टाफ (रक्षा संचालन एवं प्रशिक्षण) मेजर जनरल अमेर महमूद बिन अब्दुल रहमान ने की।

प्रमुख बिंदु

  • दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सैन्य सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की और अब तक हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

  • बैठक में सैन्य आदान-प्रदान, संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण, स्टाफ वार्ता, क्षमता निर्माण, समुद्री सहयोग तथा उभरते क्षेत्रों में सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

रक्षा सहयोग को मिलेगा और बल

  • दोनों देशों ने नियमित द्विपक्षीय गतिविधियों की सफलता की सराहना की।

  • सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों में अधिक भागीदारी, पेशेवर संवाद और सैन्य आदान-प्रदान बढ़ाने पर सहमति बनी।

  • रक्षा उद्योग, रक्षा प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग

  • दोनों पक्षों ने आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) में एक-दूसरे की सक्रिय भागीदारी की सराहना की।

  • आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्य समूह (Experts' Working Group on Counter-Terrorism) के तहत व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

  • क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की।

रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया आयाम

  • बैठक में भारत-मलेशिया उन्नत रणनीतिक साझेदारी (Enhanced Strategic Partnership) में रक्षा सहयोग को एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया गया।

  • दोनों देशों ने आपसी विश्वास, साझा हितों और सुरक्षित, स्थिर एवं समृद्ध इंडो-पैसिफिक की साझा दृष्टि के आधार पर रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

अन्य प्रमुख गतिविधियां

  • मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल ने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से मुलाकात की।

  • प्रतिनिधिमंडल ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, नई दिल्ली स्थित डीपीएसयू भवन का भी दौरा किया।

  • बैठक से पहले मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख ने राष्ट्रीय समर स्मारक (National War Memorial) पर पुष्पचक्र अर्पित कर भारत के शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।

भारतीय नौसेना के युद्धपोत थाईलैंड पहुंचे, भारत-थाईलैंड समुद्री सहयोग को मिलेगा नया आयाम

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े (Eastern Fleet) के युद्धपोत आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में अपने परिचालन तैनाती कार्यक्रम के तहत थाईलैंड के सत्ताहीप (Sattahip) बंदरगाह पहुंच गए हैं।

इस बेड़े का नेतृत्व रियर एडमिरल आलोक आनंद, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग ईस्टर्न फ्लीट, कर रहे हैं। थाईलैंड पहुंचने पर रॉयल थाई नेवी ने भारतीय नौसैनिक दल का गर्मजोशी से स्वागत किया।

यह पोर्ट कॉल भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ बढ़ते समुद्री सहयोग का हिस्सा है तथा भारत और थाईलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत समुद्री संबंधों को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कई संयुक्त गतिविधियों का होगा आयोजन

इस दौरे के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच कई पेशेवर और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें—

  • पेशेवर विचार-विमर्श (Professional Exchanges)

  • क्रॉस-डेक विजिट

  • संयुक्त परिचालन गतिविधियां

  • खेल प्रतियोगिताएं

  • सामुदायिक संपर्क कार्यक्रम (Community Outreach)

शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी सहयोग, समन्वय (Interoperability) और विश्वास को और मजबूत करना है।

भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता का प्रदर्शन

यह यात्रा भारतीय नौसेना के स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित अत्याधुनिक युद्धपोतों की क्षमता को भी प्रदर्शित करती है। आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति आधुनिक तकनीक, मॉड्यूलर निर्माण और उन्नत रक्षा प्रणालियों से लैस हैं, जो भारत की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं।

इस पोर्ट कॉल के माध्यम से भारत ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि वह रक्षा प्रौद्योगिकी और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को लगातार मजबूत कर रहा है।

10वां भारत-थाईलैंड रक्षा संवाद: इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर

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10वां भारत-थाईलैंड रक्षा संवाद 16 जून 2026 को बैंकॉक में आयोजित किया गया। इस संवाद में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की गई तथा क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा से जुड़े पारस्परिक हितों के मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक की सह-अध्यक्षता थाईलैंड के रक्षा मंत्रालय के उप-स्थायी सचिव एडमिरल नुट्टापोल डियावानिच और भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव सत्यजीत मोहंती ने की।

दोनों पक्षों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के बदलते सुरक्षा परिदृश्य पर चर्चा की और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रतिनिधिमंडलों ने पिछले रक्षा संवाद के बाद से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की। चर्चा के प्रमुख विषयों में सैन्य-से-सैन्य संपर्क, क्षमता निर्माण पहल, प्रशिक्षण आदान-प्रदान, समुद्री सहयोग तथा अन्य साझा हितों के क्षेत्र शामिल रहे।

बैठक में दोनों देशों के बीच चल रहे रक्षा उद्योग सहयोग की भी समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने रक्षा विनिर्माण, अनुसंधान, नवाचार और सैन्य क्षमताओं के विकास में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की, ताकि दोनों देशों के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी को प्रोत्साहन मिल सके।

इसके अतिरिक्त, प्रतिनिधिमंडलों ने Association of Southeast Asian Nations (आसियान) के नेतृत्व वाले तंत्रों सहित क्षेत्रीय और बहुपक्षीय रक्षा मंचों के अंतर्गत सहयोग पर भी विचार-विमर्श किया। दोनों देशों ने संवाद और सहयोग के माध्यम से साझा सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने तथा व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक का समापन भविष्य की गतिविधियों और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग की आगामी दिशा पर चर्चा के साथ हुआ। उल्लेखनीय है कि भारत और थाईलैंड ने वर्ष 2025 में अपने द्विपक्षीय संबंधों को औपचारिक रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) के स्तर तक उन्नत किया था।

भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्रियों की वार्ता: रक्षा और समुद्री सहयोग को मिलेगा नया आयाम

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने 1 जून 2026 को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्रियों की वार्ता के दूसरे संस्करण की सह-अध्यक्षता की।

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में हुई उल्लेखनीय प्रगति का स्वागत किया और क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा तथा साझा सामरिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों देशों ने रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग संबंधी संयुक्त घोषणा को और मजबूत बनाने की दिशा में प्रगति का स्वागत किया।

प्रमुख बिंदु:

  • समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने और संयुक्त समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप को अंतिम रूप देने पर चर्चा।

  • समुद्री गश्ती विमानों के माध्यम से समुद्री क्षेत्र जागरूकता बढ़ाने और समुद्र के भीतर निगरानी क्षमता विकसित करने पर सहमति।

  • हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में स्वतंत्र, खुला, शांतिपूर्ण और समृद्ध वातावरण बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

  • नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता तथा अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेषकर UNCLOS 1982, के समर्थन पर जोर।

  • जून 2026 में चेन्नई स्थित  समुद्री बचाव समन्वय केंद्र में संयुक्त खोज एवं बचाव अभियान और  टेबलटॉप अभ्यास आयोजित करने की घोषणा।

  • रक्षा औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए रक्षा सामग्री, रक्षा सेवाएँ संबंधी समझौता ज्ञापन (MoU) विकसित करने पर सहमति।

  • रक्षा विज्ञान एवं नई तकनीकों, विशेष रूप से सेंसर तकनीक, में अनुसंधान सहयोग बढ़ाने का निर्णय।

  • भारत की Exercise Talisman Sabre 2027 में बढ़ी हुई भागीदारी तथा ऑस्ट्रेलिया की Exercise Milan 2026 और भारत की Exercise Kakadu 2026 में भागीदारी का स्वागत।

  • Quad Indo-Pacific Maritime Surveillance Collaboration पहल को मजबूत समर्थन।

  • गुरुग्राम स्थित Information Fusion Centre – Indian Ocean Region (IFC-IOR) के माध्यम से समुद्री निगरानी सहयोग बढ़ाने पर सहमति।

दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, तकनीकी अनुसंधान, सैन्य अभ्यास और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।


आईएनएस सुनयना सिंगापुर पहुंची, समुद्री सहयोग और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता को मिली मजबूती

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भारतीय महासागर जहाज (IOS) सागर के तहत संचालित  आईएनएस सुनयना 26 अप्रैल 2026 को चांगी नेवल बेस (सिंगापुर)पहुंचा। यह इस चल रहे मिशन का चौथा पोर्ट कॉल है, जो MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) के विजन के तहत संचालित किया जा रहा है।

इस जहाज में 16 मित्र देशों के नौसैनिक शामिल हैं, और इसे पहले माले, फुकेत और जकार्ता में भी पोर्ट कॉल मिल चुका है।

सिंगापुर पहुंचने पर जहाज का गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जिससे भारत और सिंगापुर के बीच मजबूत समुद्री संबंधों की पुष्टि हुई। भारत के उच्चायुक्त शिल्पक अंबुले ने जहाज पर क्रू से मुलाकात कर उनके कार्य की सराहना की।

जहाज के कमांडिंग ऑफिसर सिद्धार्थ चौधरी ने क्रांजी वॉर मेमोरियल पर श्रद्धांजलि अर्पित की और सिंगापुर नौसेना के 9वें फ्लोटिला कमांडर से समुद्री सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

इस दौरान जहाज को आम जनता, छात्रों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए भी खोला गया, जिससे उन्हें समुद्री जीवन का अनुभव मिला। “One Ocean, One Mission” थीम पर भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ रन का आयोजन भी किया गया।

जहाज पर सिंगापुर नौसेना के साथ पेशेवर आदान-प्रदान, योग सत्र, थिंक टैंक इंटरैक्शन और डेक रिसेप्शन जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

आईएनएस सुनयना 29 अप्रैल 2026 को सिंगापुर से रवाना होकर हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सहयोग और सुरक्षा को मजबूत करने के अपने मिशन को आगे बढ़ाएगा।

आईएनएस सुनयना जकार्ता पहुँचा, आईओएस सागर पहल के तहत तीसरा पोर्ट कॉल

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भारतीय नौसेना का आईएनएस सुनयना, जो  आईओएस सागर  पहल के तहत तैनात है, 21 अप्रैल 2026 को जकार्ता पहुँचा। यह उसके हिंद महासागर क्षेत्र में चल रहे ऑपरेशनल तैनाती का तीसरा पोर्ट कॉल है।

यह पोत, जिसमें 16 मित्र देशों के बहुराष्ट्रीय दल के सदस्य सवार हैं, आगमन से पहले मलक्का और सिंगापुर जलडमरूमध्य जैसे संकरे मार्गों से होकर गुजरा, जिससे उसकी उच्च स्तरीय समन्वय क्षमता और नौवहन दक्षता का प्रदर्शन हुआ।

 आईओएस सागर , भारत की MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) की दृष्टि का व्यावहारिक रूप है। यह “साझेदारी के माध्यम से नेतृत्व, एकता के माध्यम से शक्ति और शांति के माध्यम से प्रगति” की भावना को दर्शाता है। इस मिशन का हार्बर चरण 16 से 29 मार्च 2026 के बीच भारत में पूरा हुआ, और वर्तमान में यह समुद्री चरण (अप्रैल–मई 2026) में है, जिसमें हिंद महासागर क्षेत्र के कई मित्र देशों में पोर्ट कॉल शामिल हैं।

जकार्ता में ठहराव के दौरान, जहाज इंडोनेशियाई नौसेना (TNI AL) के साथ पेशेवर, सामाजिक और खेल गतिविधियों में भाग लेगा। आईएनएस सुनयना के कमांडिंग ऑफिसर ने कोडारेल III (नौसैनिक क्षेत्रीय कमान III) के वरिष्ठ नेतृत्व से मुलाकात की।

निर्धारित कार्यक्रमों में पेशेवर आदान-प्रदान, संयुक्त योग सत्र, खेल प्रतियोगिताएं, हितधारकों के लिए जहाज का दौरा और डेक रिसेप्शन शामिल हैं। प्रस्थान के समय इंडोनेशियाई नौसेना के साथ एक पासेज एक्सरसाइज (PASSEX) भी आयोजित की जाएगी।

यह पहल भारत की “Neighbourhood First” नीति और MAHASAGAR की सोच को मजबूत करती है, तथा यह संदेश देती है कि “स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक सभी देशों के हित में है।”

आईएनएस सुनयना ने थाईलैंड से रवाना होकर समुद्री सहयोग को दिया नया आयाम

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फुकेट: INS Sunayna (आईओएस सागर) ने 17 अप्रैल 2026 को फुकेट, थाईलैंड से तीन दिवसीय ऑपरेशनल टर्नअराउंड (OTR) सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद प्रस्थान किया। यह मौजूदा तैनाती के दौरान उसका दूसरा पोर्ट कॉल था।

इस दौरान जहाज ने रॉयल थाई नौसेना के साथ कई पेशेवर, रणनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लिया, जिससे भारत और थाईलैंड के बीच नौसैनिक सहयोग और मजबूत हुआ।

जहाज के कमांडिंग ऑफिसर सिद्धार्थ चौधरी ने रियर एडमिरल सथापोर्न वाजरत से मुलाकात कर समुद्री सहयोग के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

दोनों नौसेनाओं के बीच मैत्रीपूर्ण फुटबॉल मैच और संयुक्त योग सत्र का आयोजन किया गया, जिससे आपसी संबंध और मजबूत हुए। साथ ही, जहाज पर आयोजित डेक रिसेप्शन में वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारियों ने भाग लिया, जहां समुद्री सुरक्षा और सहयोग पर चर्चा हुई।

पैसेज एक्सरसाइज (PASSEX) के दौरान एचटीएमएस क्लोंगयाई के साथ संयुक्त अभ्यास किया गया, जिसमें संचार ड्रिल और फॉर्मेशन संचालन के जरिए दोनों नौसेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और क्षमता का प्रदर्शन हुआ।

यह दौरा भारत और थाईलैंड के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी को दर्शाता है, जो ‘MAHASAGAR’ दृष्टिकोण के अनुरूप है।

अब आईओएस सागर जकार्ता, इंडोनेशिया की ओर रवाना हो चुका है, जहां वह अपने अगले पोर्ट कॉल के तहत क्षेत्रीय समुद्री सहयोग को और सशक्त करेगा।


विशाखापट्टनम में आईएनएस तरागिरी नौसेना में शामिल, भारत की समुद्री ताकत को मिली नई मजबूती

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विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश में 3 अप्रैल 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक युद्धपोत आईएनएस तरागिरी को औपचारिक रूप से शामिल किया गया। यह प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित चौथा स्टेल्थ फ्रिगेट है, जिसे भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है।

करीब 6,670 टन वजन वाला यह युद्धपोत वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया है और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा एमएसएमई के सहयोग से निर्मित किया गया है। इसमें उन्नत स्टेल्थ तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे इसकी रडार पकड़ काफी कम हो जाती है और यह दुश्मन के लिए अधिक घातक बन जाता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आईएनएस तरागिरी केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और मजबूत नौसैनिक शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि यह जहाज लंबी अवधि तक समुद्र में तैनात रह सकता है और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखते हुए तुरंत जवाब देने में सक्षम है।

इस युद्धपोत में ब्रह्मोस मिसाइल, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, आधुनिक रडार और सोनार सिस्टम लगाए गए हैं, जो इसकी युद्ध क्षमता को और मजबूत बनाते हैं। यह युद्धपोत समुद्री सुरक्षा, एंटी-पायरेसी ऑपरेशन, तटीय निगरानी और मानवीय सहायता जैसे विभिन्न अभियानों में अहम भूमिका निभा सकता है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की 11,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा और 95 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्गों पर निर्भर होने के कारण एक मजबूत नौसेना की आवश्यकता बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में लगातार अपनी उपस्थिति बनाए रखती है और वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

उन्होंने आधुनिक समय में समुद्री सुरक्षा के बदलते स्वरूप पर जोर देते हुए कहा कि अब केवल तटों की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि समुद्री मार्गों, महत्वपूर्ण chokepoints और समुद्र के नीचे बिछे इंटरनेट केबल्स की सुरक्षा भी जरूरी हो गई है।

रक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि भारत रक्षा निर्माण के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पहले लगभग 1,200 करोड़ रुपये था।

इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने आईएनएस तरागिरी की विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय नौसेना बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप खुद को एक मजबूत और भविष्य के लिए तैयार बल के रूप में विकसित कर रही है।

आईएनएस तरागिरी में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है और इसके निर्माण में 200 से अधिक एमएसएमई ने योगदान दिया है। यह जहाज आधुनिक तकनीकों से लैस है और किसी भी परिस्थिति में, किसी भी मिशन को अंजाम देने में सक्षम है।

आईएनएस तरागिरी के नौसेना में शामिल होने के साथ ही भारत ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि देश अब उन्नत युद्धपोतों के निर्माण में आत्मनिर्भर बन चुका है और वैश्विक स्तर पर एक मजबूत समुद्री शक्ति के रूप में उभर रहा है।


MILAN 2026 नौसैनिक अभ्यास के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ASEAN नौसेना प्रमुखों से मुलाकात

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MILAN 2026 नौसैनिक अभ्यास के मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 19 फरवरी 2026 को विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश में ASEAN के नौ सदस्य देशों के नौसेना प्रमुखों और प्रतिनिधिमंडलों के साथ संवाद किया। इस बैठक में भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और महासागर क्षेत्र में सुरक्षा व विकास के लिए परस्पर और समग्र प्रगति (MAHASAGAR) के विज़न के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया गया।

MILAN अभ्यास में ASEAN की बड़ी भागीदारी

रक्षा मंत्री ने MILAN 2026 में ASEAN नौसेनाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि यह अभ्यास 1995 में केवल चार विदेशी नौसेनाओं से शुरू होकर फरवरी 2026 में 74 देशों की भागीदारी वाला सबसे बड़ा संस्करण बन गया है।

उन्होंने Indian Ocean Naval Symposium (IONS) – Conclave of Chiefs और International Fleet Review 2026 की भूमिका को इंडो-पैसिफिक साझेदारों के बीच विश्वास और ऑपरेशनल समझ बढ़ाने में महत्वपूर्ण बताया।

MILAN 2026 के समुद्री चरण (Sea Phase) में जटिल समुद्री अभ्यास जैसे:

  • पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW)

  • वायु रक्षा

  • खोज और बचाव (Search & Rescue)
    पर भी चर्चा हुई।

भारत-ASEAN रणनीतिक दृष्टिकोण

राजनाथ सिंह ने ASEAN को भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति का केंद्रीय स्तंभ बताया और कहा कि साझा सुरक्षा ही क्षेत्रीय समृद्धि का आधार है।

उन्होंने ASEAN साझेदारों को भारत के रक्षा प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम से लाभ उठाने का आमंत्रण दिया, जो आत्मनिर्भर भारत पहल के कारण विकसित हुआ है।
उन्होंने INS विक्रांत और विशाखापट्टनम श्रेणी के विध्वंसक युद्धपोतों को भारत के ‘बिल्डर नेवी’ में परिवर्तन का प्रतीक बताया।

संयुक्त गतिविधियों का प्रस्ताव

ASEAN प्रतिनिधियों ने भारत की क्षेत्र में प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता (First Responder) की भूमिका की सराहना की।
रक्षा मंत्री ने संयुक्त गतिविधियों को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया, विशेष रूप से:

  • ASEAN-India Defence Think-Tank Interaction

  • युवा नौसैनिक अधिकारियों के बीच सहयोग पहल
    ताकि दीर्घकालिक समुद्री स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।

इंडो-पैसिफिक के लिए साझा प्रतिबद्धता

बैठक का समापन स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक के लिए साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ, जो “Camaraderie, Cooperation, and Collaboration” (सौहार्द, सहयोग और समन्वय)—MILAN 2026 का आधिकारिक विषय—पर आधारित है।

वाइस एडमिरल के.के. नय्यर स्मृति व्याख्यान 2026 का आयोजन, भारत की समुद्री सोच पर जोर

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16 फरवरी 2026 को नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन (NMF), नई दिल्ली के 21वें स्थापना दिवस के अवसर पर वाइस एडमिरल के.के. नय्यर स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह वार्षिक व्याख्यान भारत में समुद्री रणनीतिक सोच को बढ़ावा देने वाले वाइस एडमिरल नय्यर की विरासत को सम्मानित करता है।

कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल करंबीर सिंह के उद्घाटन संबोधन से हुई। इसके बाद वर्तमान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने मुख्य भाषण दिया, जिसमें उन्होंने भारत की समुद्री जागरूकता और राष्ट्रीय विकास में नौसेना की भूमिका पर प्रकाश डाला।

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय नौसेना की दोहरी जिम्मेदारी है—

  • गार्डियनशिप: वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों से निपटना

  • स्टूवर्डशिप: भविष्य की रणनीतिक जरूरतों के लिए तैयारी

उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका, अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू (IFR), MILAN अभ्यास और IONS सम्मेलन का भी उल्लेख किया।

इस वर्ष का स्मृति व्याख्यान इन्फोसिस के संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति ने ‘A Salute to a Life of Service’ विषय पर दिया। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य समुद्रों से जुड़ा है और भारतीय नौसेना देश की सुरक्षा, समुद्री व्यापार और वैश्विक महत्वाकांक्षाओं की रक्षा करती है। उन्होंने AI, स्वायत्त प्रणालियों और साइबर क्षमताओं जैसी उभरती तकनीकों के महत्व पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, राजनयिक, रणनीतिक विशेषज्ञ, शिक्षाविद और वाइस एडमिरल नय्यर के परिवारजन उपस्थित रहे। NMF भारत में समुद्री जागरूकता और नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।


भारतीय नौसेना ने MILAN 2026 के तहत MILAN Village का किया उद्घाटन

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विशाखापट्टनम:-भारतीय नौसेना ने 15 फरवरी 2026 को पूर्वी नौसेना कमान में MILAN 2026 अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास के तहत MILAN Village का उद्घाटन किया। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय भल्ला ने की। उन्होंने औपचारिक रूप से इस गांव का उद्घाटन किया और विभिन्न देशों से आए नौसैनिक प्रतिनिधियों के लिए बनाए गए सुविधाओं का निरीक्षण किया।

70 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के लिए अनुभव क्षेत्र

MILAN Village को एक विशेष अनुभव क्षेत्र के रूप में तैयार किया गया है, जहां 70 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और नौसैनिक कर्मी दोस्ती और सहयोग के माहौल में एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। यह गांव सामाजिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का केंद्र बनेगा, जिससे पेशेवर सहयोग से आगे बढ़कर आपसी संबंध मजबूत होंगे।

भारतीय संस्कृति की झलक और सांस्कृतिक कार्यक्रम

MILAN Village में भारत की विविध संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। यहां लाइव संगीत, पारंपरिक लोक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जो भारत की समृद्ध कलात्मक विरासत को दर्शाएंगे।

हस्तशिल्प, स्मृति चिन्ह और भारतीय व्यंजन

गांव में नौसेना से जुड़े स्मृति चिन्ह, हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं, जो देशभर की कारीगरी को प्रदर्शित करते हैं। इसके अलावा, आगंतुकों को भारत के विभिन्न क्षेत्रों के स्वादिष्ट व्यंजनों का स्वाद लेने का अवसर भी मिलेगा।

नौसैनिक सहयोग और समुद्री सुरक्षा पर जोर

अपने संबोधन में वाइस एडमिरल संजय भल्ला ने कहा कि MILAN Village नौसैनिक सहयोग के साथ-साथ सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि विशाखापट्टनम में IFR, MILAN और IONS जैसे बड़े आयोजन एक साथ होना भारत की समुद्री कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण अवसर है।

MILAN 2026: हिंद-प्रशांत क्षेत्र का प्रमुख नौसैनिक अभ्यास

MILAN 2026 अभ्यास 15 से 25 फरवरी 2026 तक विशाखापट्टनम में आयोजित किया जाएगा। यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सबसे बड़े बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों में से एक है, जिसमें दुनिया भर की नौसेनाएं भाग लेंगी। इस अभ्यास के दौरान पनडुब्बी रोधी युद्ध, वायु रक्षा, खोज एवं बचाव, और सुरक्षा मिशनों जैसे जटिल समुद्री अभियानों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

यह अभ्यास प्रधानमंत्री के MAHASAGAR विज़न का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो भारत को वैश्विक समुद्री सुरक्षा में एक प्रमुख और जिम्मेदार भागीदार के रूप में स्थापित करता है।

“मैत्री, सहयोग और समन्वय” की थीम

MILAN Village का मुख्य विषय “Camaraderie, Cooperation, Collaboration” है, जो विभिन्न देशों की नौसेनाओं के बीच मित्रता, सहयोग और साझेदारी के मजबूत संबंधों का प्रतीक है।


भारतीय नौसेना का प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए दीर्घ दूरी प्रशिक्षण तैनाती पर रवाना

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भारतीय नौसेना के प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (First Training Squadron – 1TS) के जहाज — आईएनएस तिर, शार्दुल, सुजाता और आईसीजीएस सारथी — 110वें एकीकृत अधिकारी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम (Integrated Officers’ Training Course – IOTC) के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के अंतर्गत दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए दीर्घ दूरी प्रशिक्षण तैनाती (Long Range Training Deployment – LRTD) पर प्रस्थान करेंगे।

इस तैनाती के तहत स्क्वाड्रन सिंगापुर, इंडोनेशिया और थाईलैंड में बंदरगाह यात्राएं करेगा। इस तैनाती का उद्देश्य अधिकारी प्रशिक्षुओं को व्यापक परिचालन और अंतर-सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करना है, साथ ही भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ तथा मुक्त, खुले और समावेशी हिंद महासागर क्षेत्र की परिकल्पना के अनुरूप दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ भारत की सतत समुद्री सहभागिता को सुदृढ़ करना है।

इन बंदरगाह यात्राओं के दौरान मेजबान नौसेनाओं और समुद्री एजेंसियों के साथ विभिन्न पेशेवर संवाद, प्रशिक्षण अभ्यास और सहयोगात्मक गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इनमें संरचित प्रशिक्षण आदान-प्रदान, क्रॉस-डेक विज़िट, विषय विशेषज्ञों के साथ संवाद और संयुक्त समुद्री साझेदारी अभ्यास शामिल होंगे।

इन गतिविधियों का उद्देश्य आपसी संचालनात्मक समन्वय (इंटरऑपरेबिलिटी), पारस्परिक विश्वास और समझ को और अधिक मजबूत करना है, साथ ही समुद्र में श्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।

110वें एकीकृत अधिकारी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में छह अंतरराष्ट्रीय अधिकारी प्रशिक्षु भी शामिल हैं, जो मित्र देशों के कार्मिकों के क्षमता निर्माण और व्यावसायिक प्रशिक्षण के प्रति भारतीय नौसेना की सतत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इसके अतिरिक्त, इस तैनाती के लिए भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना के कार्मिक भी जहाजों पर सवार हैं, जिससे तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता और आपसी समन्वय को और अधिक मजबूती मिलेगी।

यह दीर्घ दूरी प्रशिक्षण तैनाती प्रशिक्षण उत्कृष्टता पर भारतीय नौसेना के विशेष जोर को रेखांकित करती है, साथ ही क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए समुद्री कूटनीति, सद्भावना और सहयोगात्मक दृष्टिकोण में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।



भारत-ब्रुनेई रक्षा सहयोग की नई शुरुआत: संयुक्त कार्य समूह की पहली बैठक नई दिल्ली में सम्पन्न

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भारत-ब्रुनेई संयुक्त कार्यकारी समूह (JWG) की पहली बैठक 09 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित हुई। यह बैठक दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई। बैठक में जिन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई, उनमें सैन्य-से-सैन्य आदान-प्रदान एवं संयुक्त प्रशिक्षण का विस्तार, समुद्री सुरक्षा सहयोग—विशेषकर समुद्री मार्गों की सुरक्षा तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR)—क्षमता निर्माण, रक्षा उद्योग सहयोग एवं तकनीकी साझेदारी के अवसर शामिल थे।

बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद और ब्रुनेई के रक्षा मंत्रालय की उप स्थायी सचिव पो कुई चून ने की। बैठक से पूर्व, सह-अध्यक्षों ने रक्षा सहयोग पर JWG की स्थापना हेतु संदर्भ की शर्तों (Terms of Reference – ToR) पर हस्ताक्षर किए।

ToR पर हस्ताक्षर दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। JWG एक रचनात्मक मंच के रूप में कार्य करेगा, जिसके माध्यम से वर्तमान रक्षा संबंधी गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी और भविष्य के सहयोग के नए क्षेत्रों का पता लगाया जाएगा।

दोनों पक्षों ने रक्षा साझेदारी में बढ़ते गति को स्वागत योग्य बताया और JWG तंत्र के अंतर्गत एक संरचित रोडमैप लागू करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान, ब्रुनेई की उप स्थायी सचिव पो कुई चून ने नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से भी मुलाकात की। उन्होंने DPSU भवन का भी दौरा किया, जो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा हाल ही में उद्घाटित अत्याधुनिक परिसर है। यह भवन सभी 16 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के लिए एक केंद्रीय केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जहां सहयोग, नवाचार और भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा।

हिंद-प्रशांत में तैनात आईएनएस सह्याद्री ने फिलीपीन नौसेना संग समुद्री अभ्यास किया

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भारतीय नौसेना के स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस सह्याद्री ने मनीला, फिलीपींस में बंदरगाह चरण की तैनाती से पहले फिलीपीन नौसेना के साथ एक अभ्यास किया।

यह पोत वर्तमान में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में परिचालन तैनाती पर है और मित्र देशों के साथ विभिन्न बहुपक्षीय और द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों में भाग ले रहा है, जिनमें मालाबार-2025, ऑसइंडेक्स-2025, जेमेक्स-25 तथा रिपब्लिक ऑफ कोरिया नेवी के साथ पहला द्विपक्षीय अभ्यास शामिल हैं।

अभ्यास के दौरान दोनों नौसेनाओं ने सामरिक संचार अभ्यास, नेविगेशन संचालन, विज़िट बोर्ड सर्च एंड सीज़र (VBSS) अभ्यास तथा उड़ान संचालन किए, जिससे पेशेवर तालमेल और पारस्परिक समझ को और मजबूत किया गया।

बंदरगाह चरण के दौरान कई पेशेवर आदान-प्रदान, क्रॉस-डेक विज़िट और विषय विशेषज्ञों के बीच चर्चा आयोजित की जाएगी। इसके अतिरिक्त मैत्रीपूर्ण खेल प्रतियोगिताएँ, संयुक्त योग सत्र और अनाथालय सहायता जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

आईएनएस सह्याद्री की यह यात्रा भारत की फिलीपींस के साथ बढ़ते संबंधों की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है और समुद्री क्षेत्र में दोनों नौसेनाओं के बीच बढ़ते सहयोग को उजागर करती है। यह भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी तथा सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) के दृष्टिकोण के अनुरूप हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।



भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी की अमेरिका यात्रा से भारत-अमेरिका समुद्री साझेदारी को मिलेगा नया आयाम

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भारतीय नौसेना प्रमुख (Chief of the Naval Staff) एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी 12 से 17 नवंबर 2025 तक संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर गए हैं। इस यात्रा का उद्देश्य भारतीय नौसेना और अमेरिकी नौसेना के बीच लंबे समय से चले आ रहे और मजबूत समुद्री साझेदारी को और प्रगाढ़ बनाना है, जो भारत–अमेरिका रक्षा साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।


यात्रा के दौरान, एडमिरल त्रिपाठी अमेरिकी रक्षा विभाग (U.S. Department of War) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा करेंगे। इसके अलावा, वे एडमिरल सैमुअल जे. पापारो, कमांडर, यूनाइटेड स्टेट्स इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM), और एडमिरल स्टीफन टी. कोहलर, कमांडर, यूनाइटेड स्टेट्स पैसिफिक फ्लीट (USPACFLT) सहित अमेरिकी नौसेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों से भी मुलाकात करेंगे।

इन बैठकों का उद्देश्य चल रहे समुद्री सहयोग की समीक्षा, संचालन-स्तर के संबंधों को मजबूत करना, और दोनों नौसेनाओं के बीच सूचना साझा करने और समुद्री क्षेत्रीय जागरूकता (Maritime Domain Awareness) के लिए तंत्रों को सुदृढ़ करना है।

यात्रा के दौरान एडमिरल त्रिपाठी अमेरिकी नौसेना की प्रमुख संस्थाओं और संचालन कमांडों का भी दौरा करेंगे। इन बैठकों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा समुद्री प्राथमिकताओं, बहुपक्षीय ढांचे जैसे MILAN और Combined Maritime Forces (CMF) जैसी पहलों में सहयोग पर चर्चा होने की संभावना है।

भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच पारस्परिक विश्वास और साझा मूल्यों पर आधारित एक दीर्घकालिक समुद्री साझेदारी है। नौसेना प्रमुख की यह यात्रा दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच सहयोग को और गहरा करने की भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है — जिससे एक मुक्त, खुले, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की साझा दृष्टि को साकार किया जा सके।

भारत-वियतनाम रक्षा नीति वार्ता के 15वें संस्करण का हनोई में आयोजन

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भारत-वियतनाम रक्षा नीति वार्ता (डीपीडी) का 15वां संस्करण आज, 10 नवंबर 2025 को हनोई में आयोजित हुआ। इस वार्ता की सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा उपमंत्री वरिष्ठ लेफ्टिनेंट जनरल होआंग ज़ुआन चिएन ने की। दोनों पक्षों ने हाइड्रोग्राफी सहयोग, क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण, संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों, बंदरगाह यात्राओं, जहाज दौरों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और शिपयार्ड उन्नयन जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा, वास्तविक समय सूचना आदान-प्रदान, सैन्य चिकित्सा तथा विशेषज्ञों के आदान-प्रदान जैसे नए उभरते क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देने का निर्णय लिया। इसके साथ ही, दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर विचार-विमर्श भी किया।

वार्ता के दौरान, पनडुब्बी खोज, बचाव सहायता और सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए गए, जो इस क्षेत्र में आपसी सहयोग के लिए एक ढांचा प्रदान करेगा।

इसके अतिरिक्त, रक्षा उद्योग सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए एक आशय पत्र (Letter of Intent) पर भी हस्ताक्षर किए गए। इसमें तकनीकी हस्तांतरण, उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग, संयुक्त अनुसंधान, संयुक्त उद्यम, रक्षा उत्पादन के लिए उपकरणों की खरीद, विशेषज्ञों का आदान-प्रदान तथा उपकरणों की डिजाइन और निर्माण को प्राथमिकता देने पर बल दिया गया।

भारत के रक्षा उत्पादन विभाग और वियतनाम के रक्षा उद्योग के महा विभाग के बीच चल रहे रक्षा उद्योग सहयोग के कार्यान्वयन व्यवस्था के अंतर्गत, दोनों पक्षों ने दिसंबर 2025 में अगली बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया।

वार्ता के बाद रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग से मुलाकात की और डीपीडी से संबंधित प्रमुख निर्णयों की जानकारी दी। डीपीडी का 16वां संस्करण 2026 में भारत में आयोजित किया जाएगा।

रक्षा नीति वार्ता भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी की समीक्षा और उसे दिशा देने का प्रमुख तंत्र है तथा यह भारत-वियतनाम संयुक्त दृष्टि वक्तव्य 2030 के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वियतनाम, भारत की एक्ट ईस्ट नीति और इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। रक्षा सचिव की वियतनाम यात्रा ने दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और सुदृढ़ किया है।

भारतीय महासागर क्षेत्र में सहयोग और सूचना साझाकरण को सुदृढ़ करने हेतु ‘समुद्री सुरक्षा संगोष्ठी’ का सफल समापन

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समुद्री सूचना साझाकरण कार्यशाला (Maritime Information Sharing Workshop – MISW 25) के अंतर्गत आयोजित समुद्री सुरक्षा संगोष्ठी का समापन 4 नवम्बर 2025 को हुआ। “भारतीय महासागर क्षेत्र में रीयल-टाइम समन्वय और सूचना साझाकरण को सुदृढ़ करना” विषय पर आधारित यह तीन दिवसीय कार्यशाला (3 से 5 नवम्बर 2025) IFC–IOR द्वारा आयोजित की जा रही है, जिसमें 30 देशों के 57 से अधिक प्रतिनिधि, तथा IORA, DCoC/JA और BIMSTEC संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

कार्यक्रम का शुभारंभ उप नौसेनाध्यक्ष वाइस एडमिरल तरुण सोबती के उद्घाटन संबोधन से हुआ, जिसमें उन्होंने भारतीय महासागर क्षेत्र में उभरती समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग, पारस्परिकता और विश्वास-आधारित साझेदारी की आवश्यकता पर बल दिया। इसके बाद सुशील मंसिंग खोपड़े, आईपीएस, अतिरिक्त महानिदेशक (नौवहन महानिदेशालय) ने मुख्य वक्ता के रूप में भारत की समुद्री पहलों और सहयोगात्मक सहभागिता व नियामक समन्वय के माध्यम से क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला।

दो दिवसीय संगोष्ठी के दौरान प्रतिभागियों ने समुद्री सुरक्षा परिदृश्य को आकार देने वाले विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया, जिनमें क्षेत्रीय सुरक्षा गतिशीलता, सूचना नेटवर्क की भूमिका, संचालनात्मक समन्वय, समुद्री कानून, उद्योग दृष्टिकोण, और अंतरराष्ट्रीय समुद्री अपराध जैसे मुद्दे शामिल थे। सत्रों में तकनीकी एकीकरण, डेटा पारस्परिकता और सामूहिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता पर बल दिया गया ताकि एक मजबूत और संवेदनशील समुद्री सुरक्षा ढांचा तैयार किया जा सके।

कार्यक्रम का समापन रियर एडमिरल निर्भय बापना (CS NCO) के संबोधन से हुआ, जिन्होंने क्षेत्रीय सूचना साझाकरण ढांचों के बीच तालमेल की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि सहयोग और निरंतर संवाद सुरक्षित और स्थिर समुद्री क्षेत्र सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

5 नवम्बर 2025 को IFC–IOR में एक टेबल टॉप एक्सरसाइज (TTX) आयोजित की जाएगी, जिसमें सूचना साझाकरण, पारस्परिकता और समन्वित प्रतिक्रिया के सिद्धांतों का अभ्यास किया जाएगा। यह अभ्यास भारत में विकसित Maritime Analytical Tool for Regional Awareness (MANTRA) सॉफ्टवेयर पर आधारित होगा। प्रतिभागियों को समुद्री डकैती, नशीले पदार्थों की तस्करी, अनियमित मानव प्रवास और समुद्र में आपात स्थितियों जैसे काल्पनिक परिदृश्यों से निपटने का कार्य सौंपा जाएगा। इस अभ्यास का उद्देश्य बहु-एजेंसी समन्वय, त्वरित सूचना साझाकरण, और संगठित प्रतिक्रिया योजना को सुदृढ़ करना है ताकि रीयल-टाइम सूचना साझाकरण के माध्यम से प्रभावी समुद्री सुरक्षा परिणाम प्राप्त किए जा सकें।

गुरुग्राम में होगा वैश्विक समुद्री सुरक्षा सम्मेलन—सूचना संलयन केंद्र (IFC-IOR) द्वारा आयोजित किया जाएगा ‘Maritime Information Sharing Workshop (MISW) 2025

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गुरुग्राम, भारत में एक बार फिर वैश्विक समुद्री सुरक्षा समुदाय एकजुट होने जा रहा है, जब सूचना संलयन केंद्र – हिंद महासागर क्षेत्र (Information Fusion Centre – Indian Ocean Region, IFC-IOR) अपने प्रमुख कार्यक्रम ‘Maritime Information Sharing Workshop (MISW 2025)’ का तीसरा संस्करण 3 से 5 नवम्बर 2025 तक आयोजित करेगा।

इस वर्ष का विषय है — “Enhancing Real-Time Coordination and Information Sharing Across the Indian Ocean Region” (हिंद महासागर क्षेत्र में वास्तविक समय समन्वय और सूचना साझाकरण को सुदृढ़ बनाना) — जो समुद्री सुरक्षा सहयोग के लिए सामूहिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

क्षेत्रीय सहयोग को सशक्त बनाता MISW

भारत की दृष्टि ‘MAHASAGAR’ — Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions के अनुरूप, IFC-IOR समुद्री सूचना साझा करने के लिए कई कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करता है, जिनमें MISW इसका प्रमुख आयोजन है।
2019 में शुरू हुई यह कार्यशाला अब एक प्रमुख परिचालन मंच के रूप में विकसित हो चुकी है, जहाँ विश्वभर के समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करते हैं, पारस्परिक विश्वास को प्रोत्साहित करते हैं और समुद्री सुरक्षा में सहयोग की भावना को सुदृढ़ करते हैं।

यह मंच केवल संवाद तक सीमित नहीं है — बल्कि समुद्री डकैती, नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और अन्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री खतरों से निपटने में समन्वित कार्रवाई को प्रोत्साहित करता है।
MISW ने हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित, स्थिर और टिकाऊ समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में अग्रसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

संवाद से क्रियान्वयन तक: MISW 2025 का नया अध्याय

MISW 2025, जो 3–5 नवम्बर 2025 को आयोजित होगी, भारत के साझेदार देशों और क्षेत्रीय मंचों के साथ सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
कार्यशाला का उद्घाटन उप नौसेना प्रमुख वाइस एडमिरल तरुण सोबती करेंगे और मुख्य संबोधन श्री सुशील मंसिंग खोपड़े, आईपीएस, अतिरिक्त महानिदेशक, डीजी शिपिंग द्वारा दिया जाएगा।

इस आयोजन में हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA), Djibouti Code of Conduct/Jeddah Amendment (DCoC/JA) और BIMSTEC देशों के 30 से अधिक प्रतिनिधि भाग लेंगे।
कार्यशाला के अंत में एक टेबल टॉप एक्सरसाइज (TTX) आयोजित की जाएगी, जिसमें वास्तविक समुद्री परिदृश्यों का अनुकरण करते हुए सामूहिक प्रतिक्रिया योजनाओं का अभ्यास किया जाएगा।

विचार, नवाचार और कार्रवाई का समागम

MISW 2025 में UNODC, ReCAAP ISC, RMIFC, IFC Singapore, RCoC और प्रमुख शिपिंग कंपनियों के विशेषज्ञों की भागीदारी होगी।
भारत की National Maritime Information Sharing Centres (NMISCs) की पहल को भी इस अवसर पर प्रदर्शित किया जाएगा।
चर्चा सत्रों में एक लचीले और समन्वित समुद्री सूचना पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भविष्य की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

हिंद महासागर — वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा

हिंद महासागर विश्व व्यापार का केंद्र है — जहां से विश्व के अधिकांश तेल और कंटेनर यातायात गुजरता है।
यह क्षेत्र केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आर्थिक और सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
22 दिसम्बर 2018 को स्थापित IFC-IOR, जिसका नेतृत्व वर्तमान में कैप्टन सचिन कुमार सिंह कर रहे हैं, आज 15 देशों के अंतरराष्ट्रीय संपर्क अधिकारियों (ILOs) की मेजबानी करता है और 57 समुद्री सुरक्षा संगठनों तथा 25 साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करता है।

सुरक्षित और समृद्ध महासागरों की दिशा में भारत की पहल

MISW 2025 IFC-IOR की उस निरंतर प्रतिबद्धता का प्रतीक है जो एक सहयोगी, पारदर्शी और मजबूत समुद्री सूचना नेटवर्क की स्थापना के लिए की जा रही है।
इस कार्यशाला के परिणाम हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करने वाले भविष्य के सहयोगी ढांचे को दिशा प्रदान करेंगे।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कुआलालंपुर में भारत-आसियान द्वितीय अनौपचारिक रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लिया

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कुआलालंपुर (मलेशिया)-रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत-आसियान द्वितीय अनौपचारिक रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लिया, जो कुआलालंपुर, मलेशिया में आयोजित हुई। बैठक के दौरान आसियान देशों के रक्षा मंत्रियों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में भारत की प्रमुख भूमिका की सराहना की और नई दिल्ली के साथ रक्षा सहयोग को और सुदृढ़ करने की इच्छा व्यक्त की।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह बैठक भारत और आसियान के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है, विशेषकर आसियान-भारत कार्ययोजना 2026–2030 के रक्षा एवं सुरक्षा घटकों के संदर्भ में। उन्होंने दो भविष्यमुखी पहलें घोषित कीं —

  1. आसियान-भारत पहल: संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में महिलाओं की भागीदारी, तथा

  2. आसियान-भारत रक्षा थिंक-टैंक संवाद (Defence Think-Tank Interaction)।

मलेशिया के रक्षा मंत्री (ADMM के अध्यक्ष) ने राजनाथ सिंह का स्वागत करते हुए भारत को एक “सुपरपावर” बताया। उन्होंने कहा कि आसियान समुदाय भारत के साथ साइबर एवं डिजिटल रक्षा, रक्षा उद्योग और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग गहरा करके लाभान्वित होगा। उन्होंने भारत की आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग और तकनीकी अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र की सराहना की, जिससे आसियान सदस्य देशों को भी लाभ मिल सकता है।

फिलीपींस के रक्षा मंत्री ने भी भारत की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षवाद के प्रति सम्मान का उदाहरण है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र समुद्र कानून (UNCLOS) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की सराहना की और कहा कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में “फर्स्ट रिस्पॉन्डर” की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने आगामी भारत-आसियान समुद्री अभ्यास (Maritime Exercise) में पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की और फिलीपींस के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में होने वाली संयुक्त गतिविधियों का उल्लेख किया।

कंबोडिया के रक्षा मंत्री ने भी भारत के उदय की सराहना की और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों, मानवीय सहायता (HMA) और सैन्य चिकित्सा के क्षेत्र में भारत के योगदान के लिए धन्यवाद दिया।

सिंगापुर के रक्षा मंत्री ने कहा कि आसियान को भारत की क्षमता और विश्वसनीयता पर पूर्ण विश्वास है। उन्होंने भारत और आसियान के बीच संयुक्त अभ्यास, नीति संवाद, और युवा पीढ़ी के स्तर पर अधिक सहभागिता का सुझाव दिया, ताकि भविष्य के सहयोग के लिए मजबूत आधार तैयार किया जा सके।

थाईलैंड के रक्षा मंत्री ने भी भारत की रक्षा तकनीक और उद्योग पारिस्थितिकी की प्रशंसा की और “क्षेत्रीय आत्मनिर्भरता” की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक के अंत में आसियान रक्षा मंत्रियों ने भारत की पहलों का स्वागत किया और भारत-आसियान रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।



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