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बशीर बद्र साहब की यादें और महासमुंद से जुड़ा आत्मीय साहित्यिक सफर: एक भावपूर्ण संस्मरण

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उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,

न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए।

--बशीर बद्र

महासमुंद से बशीर बद्र साहब की बहुत सी यादें जुड़ी हुई है। एक कार्यक्रम  के सिलसिले में वे रायपुर आए हुए थे और रायपुर में शायर शौक जालंधरी के मेहमान थे। मैं प्रसिद्ध  व्यंग्यकार लतीफ़ घोंघी के साथ  आकाशवाणी की एक रिकार्डिंग में  गया हुआ था तब बशीर बद्र साहब के रायपुर में होने की खबर मिली  तो हमने तय किया कि किसी भी हालत में उन्हें महासमुंद लेकर चलना है।शौक जालंधरी साहब ने बहुत सी अड़चनें लगाईं लेकिन हम बशीर बद्र साहब से मिलने और उन्हें महासमुंद लाने में कामयाब रहे। दूसरे दिन जनपद पंचायत  के सभागार में एक आत्मीय गोष्ठी में बद्र साहब ने अपनी बहुत सी रचनाएं सुनाई। उनके साथ शौक जालंधरी और शाद भंडारवी भी आए थे। महासमुंद का प्रतिनिधित्व करते हुए उनके सामने शरद श्रीवास्तव और मुझे भी अपनी  रचनाएं पढ़ने का मौका मिला। महासमुंद  के आत्मीय वातावरण से वे बहुत प्रभावित हुए थे। मेरे एक शे'र कल शहर जब बंद था तो बाप से परिचय हुआ , वर्ना सोए में गया और जागते लौटा नहीं  पर उन्होंने खुलकर  मेरी सराहना की थी इसके 34साल बाद जब 2021-22 मेरा पहला स्वतंत्र ग़ज़ल संग्रह प्रकाशित हुआ तो उनकी सराहना के कारण ही मैंने  संग्रह का शीर्षक बाप से परिचय हुआ रखा जिसका जिक्र मैंने संग्रह की भूमिका में भी किया है।

दूसरे सत्र में एक संगीत गोष्ठी ग़ज़ल गायिका साधना रहाटगांवकर के निवास में हुई जिसमें उन्होंने बशीर बद्र साहब की ही रचनाओं को स्वरबद्ध किया हुआ था। अपनी रचनाओं की सांगितिक  प्रस्तुति सुनते हुए बशीर बद्र साहब भावुक होकर रो पड़े थे। विदा होते  हुए उन्होंने वादा किया कि अब वे जब भी छत्तीसगढ़ आयेंगे तो महासमुंद ज़रूर आयेंगे,यह मेरे लिए घर जैसा ही हो गया है। दरअसल उन दिनों वे मेरठ में अपने घर जला दिए जाने की घटना से काफी विचलित थे तथा कुछ समय पहले ही भोपाल शिफ्ट हुए थे। महासमुंद में लतीफ़ घोंघी,ईश्वर शर्मा,साधना रहाटगांवकर,हुकुम शर्मा ,मनोहर शर्मा,व्ही जी रहाटगांवकर,एनबी लोणारे देवी चंद श्रीश्रीमाल  ,शरद श्रीवास्तव  जैसे साहित्य,संगीत और पत्रकारिता के बड़े-बड़े  लोगों को महासमुंद  कला संगम के बैनर तले अनेक उत्कृष्ट आयोजन की जानकारी और घरेलू माहौल में लगातार कार्यक्रम की सूचना ने उन्हें चकित भी किया और भावुक भी। सौभाग्य से दो-तीन साल बाद मेरी उनसे मुलाकात भोपाल में उनके निवास में भी हुई। महासमुंद से अपने रिश्तों को उन्होंने याद रखा हुआ था। मेरे जैसे छोटे साहित्यकार को भी उन्होंने पूरा सम्मान देते हुए स्वयं शरबत बनाकर पिलाया। अपना एक संग्रह उपहार स्वरूप दिया और मिडिल ईस्ट में एक मुशायरे में मिली हुई एक शाल भी लाकर दिखाई जिसमें सोने के तारों से उनका ही एक शे'र बहुत सफाई से काढ़ा गया था। दो -तीन साल बाद एक बार फिर  वे डॉ  रमेश के बुलावे पर नीरज जी के साथ महासमुंद आए। इस समय भी उन्होंने महासमुंद से जुड़ी अपनी यादों को हमारे साथ साझा किया। कुछ वर्षों बाद दुर्भाग्य हूं वे स्मृति लोप के शिकार हो गए जिससे बहुत चाहने के बाद भी हम उन्हें महासमुंद नहीं ला पाए लेकिन अपनी शानदार ग़ज़लों, यादगार अश'आर और अनूठी प्रस्तुति के कारण बद्र साहब हमारी यादों में हमेशा बने रहेंगे। उनका ही एक शे'र है-

मुसाफ़िर  हैं हम भी, मुसाफ़िर हो तुम भी,

किसी मोड़ पर फिर मुलाकात  होगी।

अपनी ग़ज़लों और यादगार अश'आर में बशीर बद्र साहब हमेशा जिन्दा रहेंगे और निश्चित ही हर मोड़ पर और बार-बार उनकी रचनाओं के कारण उनसे मुलाकात होती रहेगी। उनकी स्मृतियों को नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि।

अशोक शर्मा

शायर, साहित्यकार महासमुंद

साहित्य उत्सव से छत्तीसगढ़ को मिलेगी नई पहचान

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रायपुर- बसंत पंचमी 23 जनवरी से नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें देश भर के 100 से अधिक प्रतिष्ठित साहित्यकार शामिल होने जा रहे हैं। इस तीन दिवसीय उत्सव से छत्तीसगढ़ को एक नई पहचान मिलेगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है कि छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर पूरा प्रदेश रजत महोत्सव मना रहा है। रायपुर साहित्य उत्सव उसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह उत्सव न केवल छत्तीसगढ़ को बल्कि पूरे देश के सुप्रसिद्ध साहित्यकारों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ को साहित्यिक जगत में एक नई पहचान प्रदान करेगा तथा जनसमुदाय को साहित्य, लेखन और पठन-पाठन की ओर प्रेरित करेगा। साहित्य महोत्सव के दौरान साहित्य विमर्श खुले संवाद, समकालीन विषयों पर विचार-विमर्श होगा। साहित्य महोत्सव को लेकर आम-लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। 

आज जब सोशल मीडिया के कोलाहल मंे ज्ञान की धारा अक्सर सूचनाओं के शोर में दब जाती है। ऐसे समय में साहित्य उत्सव एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। जहां विचार-विमर्श के बीच संवाद की संस्कृति जीवित रहती है। सृजन वही जन्म लेता है, जहां मन खुला हो और कथा वही आकार लेती हैं जहां मनुष्य अपने सत्य से संवाद करने का साहस रखता है। साहित्य महोत्सव के लोगो (डिजाइन) में अंकित ‘‘आदि से अनादि’’ तक वाक्य साहित्य के उस अटूट यात्रा को दर्शाता है, जिसमें आदिकालीन रचनाओं से लेकर निरंतर विकसित हो रहे आधुनिक साहित्य तक सभी रूप समाहित हैं। साहित्य कालातीत है, वह समय, समाज भाषा और पीढ़ियों को जोड़कर चलने वाली निरंतर धारा हैै। तीन दिनों तक पुरखौती मुक्तांगन में साहित्यिक संवाद, पुस्तक विमोचन, विचार-मंथन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और कला-प्रदर्शनियों का जीवंत केंद्र बनेगा। यह आयोजन छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय साहित्यिक मानचित्र पर एक सशक्त पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

रायपुर साहित्य उत्सव पूरे छत्तीसगढ़ के लिए सांस्कृतिक गर्व का विषय है क्योंकि इसमें राज्य की हजारों साल पुरानी साहित्यिक जड़े, जनजातीय परंपराएं, सामाजिक समरसता और आधुनिक रचनात्मक दृष्टि सभी का सुंदर सार्थक और कलात्मक संगम दिखाई देगा। छत्तीसगढ़ की साहित्यिक यात्रा आदि से अनादि तक अविचल, जीवंत और समृद्ध रही है, और आगे भी इसी धारा में निरंतर विकास की नई कहानियां लिखती रहेंगी। साहित्य उत्सव में कुल 11 सत्र शामिल होंगे, इनमें 5 समानांतर सत्र, 4 सामूहिक सत्र और 3 संवाद सत्र आयोजित किये जाएंगे जिनमें साहित्यकारों एवं प्रतिभागियों के बीच सीधा संवाद और विचार-विमर्श होगा। रायपुर साहित्य उत्सव साहित्य, विचार और संस्कृति के संगम का उत्सव है, इसमें युवाओं, शिक्षकों, लेखकों और आम पाठकों की सहभागिता रहेगी। नई पीढ़ी को साहित्य विचार और संस्कृति से जोड़ना इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य है।

उत्सव के दौरान पुस्तक मेला का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें लगभग 40 स्टॉल लगाएं जाएंगे जिसमें देशभर के प्रतिष्ठित प्रकाशकों की पुस्तकें प्रदर्शित की जाएगी एवं विक्रय के लिए उपलब्ध रहेगी। रायपुर साहित्य उत्सव में विशेष रूप से चाणक्य नाटक का मंचन किया जाएगा जो भारतीय बौद्धिक परंपरा और नाट्य कला का प्रभावशाली उदाहरण होगा। इसके साथ ही लोकनृत्य, लोकगीत और छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शको को राज्य की जीवंत लोक संस्कृति से रू-ब-रू कराया जाएगा। विख्यात कवियों की उपस्थिति में कवि सम्मेलन आयोजित होगी, जहाँ उनकी सशक्त रचनाएँ श्रोताओं को साहित्यिक रसास्वादन कराएँगी। साथ ही पत्रकारों, विचारकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ खुले संवाद सत्र आयोजित किए जाएँगे, जिनमें समकालीन सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों पर सार्थक चर्चा होगी। 

यह आयोजन छत्तीसगढ़ की साहित्यिक चेतना, विचार परंपरा और सांस्कृतिक आत्मा को राष्ट्रीय संवाद से जोड़ने की एक सशक्त पहल के रूप में उभर रहा है। रायपुर साहित्य उत्सव 2026 न केवल लेखकों और पाठकों के बीच सेतु बनेगा, बल्कि नई पीढ़ी को साहित्य, संस्कृति और विचार के प्रति संवेदनशील बनाने का भी माध्यम बनेगा। साहित्यिक विमर्श, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक विविधता से समृद्ध यह तीन दिवसीय उत्सव नवा रायपुर को देश के प्रमुख साहित्यिक केंद्रों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और यादगार अध्याय सिद्ध होगा। 

छत्तीसगढ़ की साहित्यिक आत्मा और लोक स्मृति में बसे भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल की एक रचना - 

हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था,
मैं व्यक्ति को नहीं,
हताशा को जानता था,
हम दोनों साथ चले,
साथ चलने को जानते थें

यही वह साहित्य है जो मनुष्य को धैर्य देता और साथ चलने की सभ्यता सिखाता है।

रायपुर साहित्य उत्सव–2026: छत्तीसगढ़ की साहित्यिक चेतना का राष्ट्रीय उत्सव

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23 से 25 जनवरी तक नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में तीन दिवसीय भव्य आयोजन

रायपुर- छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से रायपुर साहित्य उत्सव–2026 का भव्य आयोजन 23, 24 एवं 25 जनवरी 2026 को नवा रायपुर अटल नगर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में किया जा रहा है। तीन दिवसीय यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और विचार विमर्श का एक सशक्त मंच बनेगा, जिसमें देश-प्रदेश के साहित्य प्रेमी, लेखक, विचारक और पाठक बड़ी संख्या में सहभागिता करेंगे।

इस तीन दिवसीय साहित्य उत्सव में देश एवं प्रदेश के लगभग 120 ख्याति प्राप्त साहित्यकारों का आगमन होगा। आयोजन के दौरान कुल 42 साहित्यिक सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और बौद्धिक विषयों पर गहन विमर्श किया जाएगा।

साहित्य उत्सव के सत्रों में बौद्धिक विमर्श, भारतीय ज्ञान परम्परा, संविधान, सिनेमा और समाज, देश में नव जागरण, छत्तीसगढ़ में साहित्य, इतिहास के झरौखे में साहित्य, शैक्षणिक संस्थानों में भाषा और साहित्य का स्तर जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा, जो वर्तमान समय की बौद्धिक आवश्यकताओं को संबोधित करेंगे।

इसके अतिरिक्त नाट्य शास्त्र एवं कला परम्परा, साहित्य और राजनीति, समकालीन महिला लेखन, जनजातीय साहित्य, छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, पर्यटन, पत्रकारिता और शासन जैसे विषयों पर भी विशद परिचर्चाएं आयोजित की जाएंगी। साथ ही प्रकाशकों की चुनौतियां, डिजिटल युग में लेखन और पाठक जैसे समसामयिक विषय भी विमर्श के केंद्र में रहेंगे।

आयोजन की तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं और प्रशासन द्वारा 21 जनवरी 2026 तक सभी व्यवस्थाएं पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। आयोजन स्थल पर मंच, पंडाल, तकनीकी व्यवस्थाएं, साज-सज्जा और अन्य आवश्यक सुविधाएं तेजी से अंतिम रूप ले रही हैं।

साहित्य उत्सव का शुभारंभ 23 जनवरी 2026 को राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश द्वारा किया जाएगा। उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा वर्धा अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. कुमुद शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।

साहित्य उत्सव का समापन 25 जनवरी 2026 को होगा, जिसमें राज्य सरकार के मंत्रिगणों के साथ-साथ डॉ. सच्चिदानंद जोशी एवं डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी जैसी प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विभूतियां विशेष रूप से शामिल होंगी।

साहित्य उत्सव के दौरान 23 जनवरी को सायंकाल 7 बजे से प्रख्यात साहित्यकार एवं रंगमंच कलाकार मनोज जोशी द्वारा चर्चित ‘चाणक्य’ नाटक का विशेष मंचन किया जाएगा, जो आयोजन का प्रमुख आकर्षण होगा।

इसके साथ ही महाभारत धारावाहिक में भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका निभाने वाले नीतीश भारद्वाज तथा सिनेमा जगत के जाने-माने निर्माता-निर्देशक अनुराग बसु भी साहित्य उत्सव में सहभागिता करेंगे।

24 जनवरी 2026 को देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में विशेष काव्य-पाठ का आयोजन किया जाएगा।

साहित्यकारों की परिचर्चाओं एवं सत्रों के लिए आयोजन स्थल पर चार मंडप बनाए गए हैं। मुख्य मंडप का नामकरण ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित छत्तीसगढ़ के एकमात्र साहित्यकार स्व. विनोद कुमार शुक्ल के नाम पर किया गया है।

दूसरे मंडप का नामकरण पं. श्यामलाल चतुर्वेदी, तीसरे मंडप का नामकरण बस्तर के गौरव साहित्यकार लाला जगदलपुरी तथा चौथे मंडप का नामकरण साहित्यकार अनिरुद्ध नीरव के नाम पर किया गया है।

आयोजन स्थल पर विशाल पुस्तक मेला भी लगाया जाएगा, जहां प्रभात प्रकाशन, राजकमल प्रकाशन, सरस्वती बुक, यशस्वी प्रकाशन, हिन्द युग्म प्रकाशन, राजपाल प्रकाशन सहित लगभग 15 राष्ट्रीय स्तर के प्रकाशक अपनी पुस्तकों का प्रदर्शन एवं विक्रय करेंगे।

इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों एवं स्कूली विद्यार्थियों द्वारा लिखी गई पुस्तकों को भी प्रदर्शित किया जाएगा तथा साहित्यकारों द्वारा लिखी गई नई पुस्तकों के विमोचन की भी समुचित व्यवस्था की गई है।

आयोजन स्थल पर छत्तीसगढ़ के 25 वर्षों में हुए विकास को प्रदर्शित करने वाली आकर्षक प्रदर्शनी लगाई जाएगी। स्थानीय युवाओं एवं लोक कलाकारों के लिए टेलेंट ज़ोन बनाया गया है, जहां काव्य-पाठ, कहानी-पाठ, लोकनृत्य एवं गीत-संगीत की प्रस्तुतियां होंगी। साथ ही प्रतिदिन क्विज प्रतियोगिताएं आयोजित कर विजेताओं को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।

पुरखौती मुक्तांगन तक पुराने रायपुर से आने-जाने के लिए प्रशासन द्वारा लगभग 20 निःशुल्क बसों का संचालन रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, टाटीबंध, तेलीबांधा सहित छह मार्गों पर किया जाएगा। साहित्य उत्सव के सफल आयोजन हेतु लगभग 500 अधिकारी-कर्मचारी व्यवस्थाओं में जुटे हैं। आयोजन स्थल पर छत्तीसगढ़ी व्यंजनों सहित स्थानीय खान-पान के लिए लगभग 15 फूड स्टॉल लगाए जा रहे हैं। कार्यक्रम स्थल में पेयजल, स्वच्छता एवं शौचालय जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

रायपुर साहित्य उत्सव–2026  छत्तीसगढ़ की बौद्धिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और समकालीन विचारधारा का राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त प्रदर्शन है। यह उत्सव साहित्य, संवाद और संस्कृति के माध्यम से समाज को जोड़ने का कार्य करेगा तथा नई पीढ़ी में अध्ययन, अभिव्यक्ति और सृजनशीलता के प्रति रुचि को और सुदृढ़ करेगा।

छत्तीसगढ़ की साहित्यिक चेतना को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में निर्णायक कदम

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‘रायपुर साहित्य उत्सव–2026’ की तैयारियों का कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने किया निरीक्षण

23 से 25 जनवरी तक नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में होगा तीन दिवसीय भव्य आयोजन

रायपुर- छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर सशक्त पहचान दिलाने के उद्देश्य से 23 से 25 जनवरी 2026 तक नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित होने वाले ‘रायपुर साहित्य उत्सव–2026’ की तैयारियों का जायज़ा लेने कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह एवं आयुक्त जनसंपर्क डॉ. रवि मित्तल ने आज आयोजन स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्टॉल, मुख्य मंच, साहित्यिक सत्रों के स्थल, फूड ज़ोन, पेयजल, पार्किंग, सुरक्षा एवं दर्शक सुविधाओं सहित समस्त व्यवस्थाओं को समयबद्ध और सुव्यवस्थित रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा, संस्कृति विभाग के संचालक विवेक आचार्य, जिला पंचायत रायपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुमार बिश्वरंजन, नगर निगम आयुक्त विश्वदीप सहित आयोजन समिति के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

‘आदि से अनादि तक’—भारतीय साहित्य की जीवंत परंपरा का उत्सव

'रायपुर साहित्य उत्सव' के प्रतिष्ठित साहित्यिक आयोजन का केंद्रीय विचार ‘आदि से अनादि तक’ है, जो भारतीय साहित्य की निरंतर, जीवंत और विकसित होती परंपरा को रेखांकित करता है। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव साहित्य, विचार और संस्कृति के संगम का उत्सव है। उन्होंने निर्देशित किया कि आगंतुकों को सहज, सुरक्षित और यादगार अनुभव मिले, इसके लिए सभी व्यवस्थाएँ उच्च गुणवत्ता की हों।

कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा  कि रायपुर साहित्य उत्सव के आयोजन में बच्चों, युवाओं, शिक्षकों, लेखकों और आम पाठकों की व्यापक सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को साहित्य, विचार और संस्कृति से जोड़ना इस उत्सव का प्रमुख उद्देश्य है।

नवा रायपुर बनेगा साहित्य, विचार और कला का केंद्र

तीन दिनों तक पुरखौती मुक्तांगन साहित्यिक संवाद, पुस्तक विमोचन, विचार-मंथन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और कला-प्रदर्शनियों का जीवंत केंद्र बनेगा। यह आयोजन छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय साहित्यिक मानचित्र पर एक सशक्त पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

देशभर के साहित्यकार, विचारक और रचनाकार होंगे शामिल

रायपुर साहित्य उत्सव–2026 में देश के विभिन्न हिस्सों से आए ख्यातिप्राप्त साहित्यकार, कवि, लेखक, पत्रकार, विचारक और युवा रचनाकार एक मंच पर संवाद करते नज़र आएँगे। कार्यक्रम के दौरान साहित्यिक सत्रों के साथ-साथ खुले संवाद, समकालीन विषयों पर विचार-विमर्श और रचनात्मक प्रस्तुतियाँ आयोजित की जाएँगी।

युवाओं और बच्चों को मिलेगा सशक्त मंच

उत्सव की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें नई पीढ़ी को विशेष रूप से केंद्र में रखा गया है। रायपुर जिले के स्कूली बच्चों द्वारा स्वलिखित कविताओं, कहानियों एवं अन्य रचनाओं पर आधारित पुस्तकों का विमोचन किया जाएगा। साथ ही बच्चों और युवाओं के लिए ओपन माइक जैसे मंच उपलब्ध कराए जाएँगे, जहाँ वे अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत कर सकेंगे। 

युवाओं में आयोजन को लेकर खासा उत्साह है—अब तक 4,000 से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं और यह प्रक्रिया निरंतर जारी है।

भव्य पुस्तक मेला और लेखक–पाठक संवाद

उत्सव के दौरान लगभग 40 स्टॉल्स के साथ एक भव्य पुस्तक मेले का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभर के प्रतिष्ठित प्रकाशकों की पुस्तकें प्रदर्शित की जायेंगी एवं विक्रय के लिए उपलब्ध रहेंगी। यह मंच लेखकों और पाठकों के बीच सीधे संवाद को प्रोत्साहित करेगा।

‘चाणक्य’ नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ रहेंगी विशेष आकर्षण

रायपुर साहित्य उत्सव में विशेष रूप से ‘चाणक्य’ नाटक का मंचन किया जाएगा, जो भारतीय बौद्धिक परंपरा और नाट्यकला का प्रभावशाली उदाहरण होगा। इसके साथ ही लोकनृत्य, लोकगीत और छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को राज्य की जीवंत लोकसंस्कृति से रूबरू कराया जाएगा।

कवि सम्मेलन और संवाद सत्र

विख्यात कवियों की उपस्थिति में कवि सम्मेलन आयोजित होगा, जहाँ उनकी सशक्त रचनाएँ श्रोताओं को साहित्यिक रसास्वादन कराएँगी। साथ ही पत्रकारों, विचारकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ खुले संवाद सत्र आयोजित किए जाएँगे, जिनमें समकालीन सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों पर सार्थक चर्चा होगी।

निरीक्षण के दौरान सभी उपस्थित अधिकारियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों ने आयोजन को सुव्यवस्थित, प्रभावी और यादगार बनाने के लिए अपने सुझाव साझा किए। 

यह आयोजन छत्तीसगढ़ की साहित्यिक चेतना, विचार परंपरा और सांस्कृतिक आत्मा को राष्ट्रीय संवाद से जोड़ने की एक सशक्त पहल के रूप में उभर रहा है। रायपुर साहित्य उत्सव–2026 न केवल लेखकों और पाठकों के बीच सेतु बनेगा, बल्कि नई पीढ़ी को साहित्य, संस्कृति और विचार के प्रति संवेदनशील बनाने का भी माध्यम बनेगा। साहित्यिक विमर्श, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक विविधता से समृद्ध यह तीन दिवसीय उत्सव नवा रायपुर को देश के प्रमुख साहित्यिक केंद्रों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और यादगार अध्याय सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायपुर साहित्य उत्सव की वेबसाइट का किया लोकार्पण

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23 से 25 जनवरी तक आयोजित होगा रायपुर साहित्य उत्सव

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में  रायपुर साहित्य उत्सव की वेबसाइट का लोकार्पण किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, कौशल विकास मंत्री खुशवंत साहेब तथा छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा उपस्थित थे।

उल्लखेनीय है कि रायपुर साहित्य उत्सव 23 से 25 जनवरी तक आयोजित किया जाएगा। साहित्य उत्सव में देशभर के प्रख्यात साहित्यकारों, लेखकों, कवियों, पत्रकारों, समीक्षकों एवं पाठकों की सहभागिता होगी। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति, सृजनात्मक लेखन, प्रकाशन जगत, युवा साहित्य तथा नई पीढ़ी के रचनाकारों से जुड़े विषयों पर विविध सत्र आयोजित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री साय ने वेबसाइट लॉन्च करते हुए कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव छत्तीसगढ़ की साहित्यिक और सांस्कृतिक पहचान को नई ऊँचाई प्रदान करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह उत्सव लेखक और पाठक के बीच नए संवाद का सशक्त मंच बनेगा तथा युवा पीढ़ी में पढ़ने और लिखने की प्रेरणा जागृत करेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती लोकसाहित्य, लोककथाओं और समृद्ध मौखिक परंपराओं की धरोहर रही है। ऐसे में रायपुर साहित्य उत्सव राज्य की इस सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने का सुअवसर बनेगा।

राजधानी दिल्ली में साहित्यिक परिचर्चा, विनोद कुमार शुक्ल को किया याद

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साहित्यकारों से साहित्य उत्सवों की प्रासंगिकता पर भी संवाद

रायपुर में साहित्य उत्सव 2026 का आयोजन 23 से 25 जनवरी तक

नई दिल्ली- राजधानी दिल्ली में आयोजित साहित्यिक परिचर्चा में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल के रचना-कर्म और साहित्यिक अवदान को याद किया गया। इस अवसर पर  साहित्य उत्सवों की प्रासंगिकता पर भी गहन संवाद स्थापित किया गया।

रायपुर में 23- 25 जनवरी को आयोजित होने वाले साहित्य उत्सव 2026 के परिप्रेक्ष्य में राजधानी दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में साहित्यिक परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रायपुर साहित्य उत्सव की वैचारिक दिशा को विस्तार देने के साथ साथ साहित्य से जुड़े ज्वलंत प्रश्नों पर सार्थक चर्चा की। 

कार्यक्रम में डॉ सच्चिदानंद जोशी ने विनोद कुमार शुक्ल से अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए कहा कि इतने बड़े साहित्यिक व्यक्तित्व से मिलने की अपेक्षा कुछ और थी, लेकिन जब वे उनसे मिले तो अत्यंत आश्चर्य हुआ कि वे कितने सरल और सहज हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी बातचीत आत्मीयता से भरी होती थी, जिसमें कहीं भी कोई अतिरेक नहीं होता। बिना लाग-लपेट के वे सीधे और स्पष्ट शब्दों में अपनी बात कहते यही उनकी व्यक्तित्व और लेखन की सबसे बड़ी विशेषता थी।

छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने विनोद कुमार शुक्ल को याद करते हुए कहा कि युवा उनसे गहराई से आकर्षित रहते थे और उनके यहाँ हमेशा युवाओं की भीड़ लगी रहती थी। 

शर्मा ने कहा कि अपनी एक मुलाकात के दौरान उन्होंने उनसे पूछा कि आपने युवावस्था में अत्यंत गंभीर लेखन किया और अब बाल साहित्य की ओर क्यों आए। इस पर विनोद कुमार शुक्ल ने उत्तर दिया कि उन्हें लगता है वे बहुत गंभीर लेखन कर चुके हैं, लेकिन नई पीढ़ी के साथ शायद न्याय नहीं कर पाए। अब उन्हें लगता है कि नई पीढ़ी के साथ न्याय करने का अवसर उन्हें बाल साहित्य के माध्यम से मिला है।

साहित्यकार अलका जोशी ने विनोद कुमार शुक्ल के रचना-कर्म पर बात करते हुए कहा कि उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि वे मामूली और साधारण स्थितियों में भी सौंदर्य खोज लेते थे।

उन्होंने कहा कि नौकर की कमीज में विनोद कुमार शुक्ल ने अत्यंत सहजता के साथ सत्ता के प्रति रोष को व्यक्त किया है, बिना किसी आडंबर के। उनकी रचनाओं में वह अदृश्य व्यक्ति दिखाई देता है, जो अपने गुम हो जाने से बचने की कोशिश करता है।

अलका जोशी ने कहा कि चाहे नौकर की कमीज हो या एक दीवार में खिड़की रहती है, उनकी रचनाओं में ऐसे दृश्य आते हैं जहाँ पात्र अपनी सीमित परिस्थितियों के भीतर भी हाथी पर सवारी करने जैसा सपना देखता है। उनकी लेखन-खूबसूरती यह थी कि रचनाओं में दृश्य और परिस्थितियाँ इतनी जीवंत होती थीं कि पाठक धीरे-धीरे उनसे जुड़ता चला जाता था। पाठक की यह इन्वॉल्वमेंट ही उनकी रचनात्मक सफलता का मूल आधार रही।

इसके पहले के सत्र में साहित्य उत्सवों में कितना साहित्य विषय पर अपनी बात रखते हुए लेखक अनंत विजय ने कहा कि साहित्य में गहराई अनिवार्य है। गहराई होगी तभी साहित्य को उसके पाठक मिलेंगे और वही साहित्य समय के साथ अपनी स्थायी छाप छोड़ पाएगा।

उन्होंने साहित्य उत्सवों की संरचना पर जोर देते हुए कहा कि सत्रों की संरचना में ठोस कंटेंट होना चाहिए, तभी श्रोता और पाठक उनसे जुड़ पाएंगे।

अनंत विजय ने यह भी स्पष्ट किया कि रायपुर साहित्य उत्सव पूरी तरह व्यावसायिकता से दूर रहेगा। यदि किसी सत्र में फिल्म जगत से कोई व्यक्ति आमंत्रित किया जाता है, तो उसके साथ मंच पर एक साहित्यकार की उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि साहित्य केंद्र में बना रहे।

उन्होंने कहा कि सेल्फी संस्कृति साहित्य की दुश्मन है। कई बार साहित्य उत्सवों में फिल्मी हस्तियों को केवल इसलिए बुलाया जाता है ताकि लोग उनके साथ सेल्फी लेने आएं, जबकि इससे साहित्य का मूल उद्देश्य पीछे छूट जाता है।

वहीं, साहित्यकार अनिल जोशी ने भी इस विषय पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी एक बार फिर किताबों और साहित्य से जुड़ रही है, जो एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि साहित्य उत्सवों की उपयोगिता अत्यधिक हो सकती है, बशर्ते उनके उद्देश्य स्पष्ट हों।

अनिल जोशी ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी साहित्य सम्मेलन की शुरुआत से पहले उसकी प्रासंगिकता पर गंभीर विचार किया जाना चाहिए। साथ ही आयोजन के दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि साहित्य केंद्र में रहे और आवश्यक सावधानियों व मूल्यों का पालन हो, ताकि ऐसे उत्सव वास्तव में साहित्य-संवाद को समृद्ध कर सकें।

विनोद कुमार शुक्ल पर बोलते हुए अनिल जोशी ने कहा उनकी लेखनी एब्स्ट्रैक्ट पेंटिंग की तरह है, जिसे समझने के लिए पाठक को ठहरकर देखना और महसूस करना पड़ता है।

कार्यक्रम में नई शैली के लेखन पर टिप्पणी करते हुए पूर्व संपादक एवं लेखक प्रताप सोमवंशी ने कहा कि समय के साथ लेखन के स्वरूप में बदलाव आया है और आज नई शैली में साहित्य रचा जा रहा है। लेकिन इसके साथ ही पारंपरिक शैली में लेखन भी निरंतर हो रहा है, जिसे पाठक आज भी पसंद कर रहे हैं और वह समान रूप से पढ़ा जा रहा है।

इस अवसर पर रायपुर साहित्य उत्सव समिति के सदस्य एवं मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, रायपुर साहित्य उत्सव समिति के सदस्य संजीव सिन्हा सहित देशभर के प्रतिष्ठित साहित्यकार और विचारक शामिल हुए।

प्रधानमंत्री मोदी ने महाकवि सुब्रमणिय भारती को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज महाकवि सुब्रमणिय भारती की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
मोदी ने कहा कि उनके पद्य लोगों में साहस और उत्साह जगाते थे, और उनके विचारों में अनगिनत लोगों के मन पर स्थायी प्रभाव डालने की शक्ति थी। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना को प्रकाशित किया। प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि श्री भारती ने एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज बनाने के लिए काम किया, और तमिल साहित्य को समृद्ध करने में उनके योगदान अतुलनीय हैं।

मोदी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर अलग-अलग पोस्ट में कहा:

“महाकवि सुब्रमणिय भारती को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। उनके पद्य लोगों में साहस जगाते थे और उनके विचारों में अनगिनत लोगों के मन पर स्थायी प्रभाव डालने की शक्ति थी। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना को प्रकाशित किया। उन्होंने एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज बनाने के लिए काम किया। तमिल साहित्य को समृद्ध करने में उनके योगदान भी अतुलनीय हैं।”

“मகாகவி சுப்ரமணிய பாரதியின் பிறந்தநாளில் அவருக்கு மரியாதை செலுத்துகிறேன். அவரது கவிதைகள் துணிவைத் தூண்டின, அவரது சிந்தனைகள் எண்ணற்ற மக்களின் மனதில் நீடித்த தாக்கத்தை ஏற்படுத்தும் ஆற்றலைக் கொண்டிருந்தன. இந்தியாவின் கலாச்சார, தேசிய உணர்வை அவர் ஒளிரச் செய்தார். நீதியான, அனைவரையும் உள்ளடக்கிய ஒரு சமூகத்தை உருவாக்க அவர் பாடுபட்டார். தமிழ் இலக்கியத்தை செழுமைப்படுத்துவதில் அவர் ஆற்றிய பங்களிப்புகளும் ஒப்பிலாதவை.”


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ला के स्वास्थ्य लाभ की कामना की

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज शाम राजधानी रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पहुँचे और वहां उपचाररत भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ला से मुलाकात कर  उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने चिकित्सकों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी प्राप्त की और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं। उनकी सृजनशीलता, संवेदना और सरल भाषा में गहन अनुभूतियों की अभिव्यक्ति देश और प्रदेश—दोनों को गौरवान्वित करती है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा एवं छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ के प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ से सम्मानित किए जाने पर मुख्यमंत्री साय ने दी बधाई

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को साहित्य जगत के प्रतिष्ठित ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ से सम्मानित किए जाने पर बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल हिंदी साहित्य की उस विराट परंपरा के प्रतिनिधि हैं, जिसने अपनी सादगी, संवेदना और अद्भुत लेखन-शक्ति से साहित्य की दुनिया में एक विशिष्ट स्थान बनाया है। उनकी लेखनी ने न केवल हिंदी भाषा को समृद्ध किया है, बल्कि पाठकों की अनेक पीढ़ियों को गहराई से प्रभावित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हम सभी प्रदेशवासियों के लिए गर्व का क्षण है कि विनोद कुमार शुक्ल को यह सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान साहित्य जगत में उनके अद्वितीय योगदान को प्रदर्शित करता है।

मुख्यमंत्री  साय ने  विनोद कुमार शुक्ल के सुदीर्घ, स्वस्थ और सक्रिय जीवन की कामना करते हुए कहा कि उनका रचनात्मक योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

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