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नुआखाई समृद्ध कृषि परंपरा, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और अन्नदाता के परिश्रम का उत्सव : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री ने नुआखाई पर्व की दी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई फसल के स्वागत और प्रकृति के अनुपम उपहार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाले पावन पर्व नुआखाई के अवसर पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अन्नदाता किसानों की सुख-समृद्धि, अच्छी फसल और सभी परिवारों की खुशहाली की मंगलकामना की है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नुआखाई समृद्ध कृषि संस्कृति और लोक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। नई फसल के आगमन की खुशी में मनाया जाने वाला यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, अन्न के सम्मान और किसान के अथक परिश्रम के प्रति आदर का भाव प्रकट करता है। खेतों में उपजी नई फसल केवल किसान की मेहनत का प्रतिफल नहीं, बल्कि प्रकृति की कृपा और हमारी कृषि प्रधान संस्कृति की समृद्धि का भी प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में खेती-किसानी केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। हमारे अनेक पर्व और परंपराएं कृषि चक्र, प्रकृति और लोकजीवन से गहराई से जुड़ी हुई हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नुआखाई अपनी मिट्टी, अपनी जड़ों और अपनी गौरवशाली परंपराओं से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है। यह पर्व सामाजिक आत्मीयता, पारिवारिक एकजुटता और आपसी सद्भाव को भी मजबूत करता है। नई फसल की खुशियां जब परिवार और समाज मिलकर साझा करते हैं, तब लोकसंस्कृति और अधिक जीवंत तथा समृद्ध होती है।

मुख्यमंत्री साय ने नुआखाई के पावन अवसर पर कामना करते हुए कहा कि प्रकृति की कृपा छत्तीसगढ़ पर सदैव बनी रहे। हमारे किसान साथियों के खेत हरे-भरे और फसलों से लहलहाते रहें, अन्न के भंडार भरें तथा अन्नदाताओं के घर-आंगन में समृद्धि आए। प्रदेश के प्रत्येक परिवार के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली का संचार हो तथा आपसी प्रेम, भाईचारा और सद्भाव निरंतर मजबूत होता रहे।

मन की बात में पीएम मोदी ने देश की प्रतिभाओं और जनभागीदारी को किया सलाम, नशामुक्त भारत से लेकर ‘वोकल फॉर लोकल’ तक कई मुद्दों पर रखी बात

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के नए एपिसोड में देशभर में अलग-अलग क्षेत्रों में अपने छोटे-छोटे प्रयासों से बड़ा बदलाव ला रहे नागरिकों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने इतिहास को रोचक बनाने की पहल, नशामुक्त भारत अभियान, महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता, फूलों की खेती, वन संरक्षण, अंतरिक्ष विज्ञान, किसानों की नवाचारपूर्ण खेती और भारतीय सिनेमा के महानायक उत्तम कुमार समेत कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की।

पीएम मोदी ने कहा कि ‘मन की बात’ ऐसा मंच है, जहां देश के सामान्य नागरिकों की असाधारण पहल और उनके नए विचारों को सामने लाने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि देश के नागरिक अपनी ऊर्जा और रचनात्मकता से समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।

इतिहास को रोचक बनाने की पहल की पीएम मोदी ने सराहना

प्रधानमंत्री ने मुंबई के कृष्ण शेषाद्रि की पहल का विशेष उल्लेख किया, जिन्होंने भारतीय इतिहास को रोचक और आसानी से समझने योग्य बनाने के उद्देश्य से bharatrajya.com वेबसाइट तैयार की है।

कृष्ण शेषाद्रि इंजीनियरिंग और MBA की पढ़ाई के बाद मार्केटिंग के क्षेत्र में आए, लेकिन इतिहास में उनकी रुचि बचपन से ही रही। उन्होंने तकनीक और इतिहास को जोड़कर ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया, जहां लोग अलग-अलग वर्षों का चयन करके यह जान सकते हैं कि उस समय भारत के विभिन्न हिस्सों में कौन-से राजा और साम्राज्य शासन कर रहे थे।

प्रधानमंत्री के साथ बातचीत में कृष्ण शेषाद्रि ने बताया कि भारतीय इतिहास को अक्सर कुछ चुनिंदा साम्राज्यों के नजरिए से पढ़ाया जाता है। ऐसे में चोल, पल्लव, कश्मीर के कर्कोट वंश और असम के अहोम जैसे कई महत्वपूर्ण साम्राज्यों के योगदान की जानकारी लोगों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पाती।

उन्होंने बताया कि वेबसाइट को लगातार बेहतर बनाने के लिए लोगों को Correction और Suggestion का विकल्प दिया गया है। इससे इतिहास से जुड़ी जानकारियों को बेहतर करने और नए फीचर जोड़ने में लोगों की भागीदारी हो रही है।

पीएम मोदी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इतिहास को कहानी की तरह प्रस्तुत करने से युवा और बच्चे इससे ज्यादा आसानी से जुड़ सकते हैं।

‘नशामुक्त युवा, विकसित भारत’ अभियान को जनआंदोलन बनाने की अपील

प्रधानमंत्री ने ‘नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ अभियान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसका लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है—नशामुक्त युवा और नशामुक्त भारत।

पीएम मोदी ने कहा कि नशे की समस्या केवल एक व्यक्ति को प्रभावित नहीं करती, बल्कि उसका असर पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। उन्होंने युवाओं, संगीतकारों, छात्रों, थिएटर कलाकारों और कंटेंट क्रिएटर्स से अपील की कि वे अपनी रचनात्मकता का इस्तेमाल नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने में करें।

उन्होंने कहा कि युवा कलाकार नशामुक्त जीवन का संदेश देने वाले गीत बनाएं, विद्यार्थी और थिएटर समूह छोटे नाटक तैयार करें और सोशल मीडिया क्रिएटर्स अलग-अलग भारतीय भाषाओं में प्रभावशाली कंटेंट बनाएं।

प्रधानमंत्री ने लोगों से अपने प्रयासों को सोशल मीडिया पर #NashaMuktYuva के साथ साझा करने की अपील की।

 ‘हर घर तिरंगा’ और ‘सूर्यपथ तिरंगा’ का किया उल्लेख

पीएम मोदी ने अगस्त महीने को देशभक्ति की भावना से जुड़ा महीना बताते हुए राष्ट्रीय हथकरघा दिवस, भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ, विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस, स्वतंत्रता दिवस और राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस का उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत 8 करोड़ से ज्यादा तिरंगा सेल्फी अपलोड की गईं।

प्रधानमंत्री ने ‘सूर्यपथ तिरंगा’ पहल का भी उल्लेख किया। इसके तहत फिजी के सुवा से लेकर एशिया, अफ्रीका और यूरोप के विभिन्न देशों में स्थित भारतीय मिशनों और पोस्टों तक तिरंगा फहराया गया और अंत में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को तक यह यात्रा पहुंची।

पीएम मोदी ने कहा कि सूर्य की गति के साथ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तिरंगे का फहराया जाना देशवासियों के लिए गौरव और एकता का अद्भुत संदेश है।

 PM SVANidhi से मजबूत हो रहीं देश की लाखों महिलाएं

प्रधानमंत्री ने PM SVANidhi योजना के जरिए महिला सशक्तिकरण की दिशा में हो रहे बदलावों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि इस योजना के लाभार्थियों में करीब 46 प्रतिशत महिलाएं हैं और लगभग 35 लाख महिलाएं इस योजना से जुड़कर अपने छोटे व्यवसाय को आगे बढ़ा रही हैं।

पीएम मोदी ने गाजियाबाद की बबीता शर्मा का उदाहरण दिया। बबीता पहले सड़क किनारे पूजा सामग्री, फूल, दीये, अगरबत्ती और नारियल बेचती थीं। योजना के माध्यम से आर्थिक सहायता मिलने के बाद उन्होंने अपना स्टॉक बढ़ाया और धीरे-धीरे उनका छोटा सा ठेला एक दुकान में बदल गया।

इसी तरह बेंगलुरु की टी.एस. निंगम्मा की कहानी भी प्रधानमंत्री ने साझा की। निंगम्मा और उनके पति इडली, डोसा और सांभर बेचने का छोटा व्यवसाय करते थे। PM SVANidhi से सहायता मिलने के बाद उन्होंने अपनी गाड़ी को बेहतर बनाया, थोक में सामान खरीदना शुरू किया और मेन्यू में नए व्यंजन जोड़े। इससे उनकी आमदनी बढ़ी और वे अपने तीन बच्चों को बेहतर शिक्षा देने में सक्षम हुईं।

पीएम मोदी ने कहा कि जब किसी महिला का व्यवसाय आगे बढ़ता है तो उसके साथ पूरे परिवार का भविष्य आगे बढ़ता है।

स्वच्छता के लिए युवाओं की पहल की सराहना

प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के पटवाई गांव के युवाओं की स्वच्छता पहल का भी जिक्र किया।

उन्होंने बताया कि आकाश और रोहन नाम के दो युवाओं ने अपने इलाके में गंदगी देखकर सफाई अभियान शुरू किया। धीरे-धीरे दूसरे युवा भी उनके साथ जुड़ते गए और ‘Clean-up Patwai’ नाम की टीम तैयार हुई।

इस टीम ने अब तक चार गंगा घाटों की सफाई की है और एक टन से अधिक प्लास्टिक कचरा हटाया है। इसके अलावा कई तालाबों और सार्वजनिक स्थानों की भी सफाई की गई है।

अमरनाथ यात्रा में स्वच्छता और सेवा का उदाहरण

पीएम मोदी ने हाल ही में हुई श्री अमरनाथ यात्रा के दौरान स्वच्छता के लिए किए गए प्रयासों की भी सराहना की।

उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान 400 मीट्रिक टन से अधिक कचरा एकत्र कर उसका निपटारा किया गया। करीब 16 हजार श्रद्धालुओं ने स्वच्छता की शपथ ली, जबकि 10 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं को ‘Responsible Yatri’ प्रमाणपत्र दिया गया।

एक अनूठी पहल का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि यात्रा में इस्तेमाल होने वाले घोड़ों और खच्चरों के गोबर से बायोगैस तैयार की गई और इसी स्वच्छ ऊर्जा से ‘स्वच्छ ज्योति’ को रोशन किया गया।

नागालैंड की वेसालु पुरो ने फूलों की खेती से बनाई नई पहचान

प्रधानमंत्री ने नागालैंड के फेक जिले की वेसालु पुरो की प्रेरणादायक कहानी भी साझा की।

कृषि परिवार में पली-बढ़ीं वेसालु को बचपन से ही फूलों से विशेष लगाव था। वर्ष 2021 में उन्होंने छोटे स्तर पर फूलों की खेती शुरू की। बाद में उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से वैज्ञानिक तरीके से फूलों की खेती का प्रशिक्षण लिया।

उन्होंने सिर्फ एक चौथाई एकड़ जमीन पर हजारों ग्लेडियोलस बल्ब लगाए और पहली ही कोशिश में 5 हजार से अधिक फूल प्राप्त किए।

आज उनके फूल केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नागालैंड से दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों तक पहुंच रहे हैं।

ओडिशा में महिलाओं ने जंगल संरक्षण को बनाया आजीविका का माध्यम

प्रधानमंत्री ने ओडिशा के देब्रीगढ़ क्षेत्र के धोड़्रोकुसुम गांव की मैथिली भुए की कहानी भी सुनाई।

मैथिली भुए पहले जंगल से जलावन, महुआ, केंदू पत्ते, बांस की कोपलें और अन्य वन उपज एकत्र करती थीं। बाद में वे देब्रीगढ़ इको-टूरिज्म से जुड़ीं और जंगल संरक्षण की दिशा में काम करने लगीं।

उनकी पहल से प्रेरित होकर आज 60 से ज्यादा महिलाएं वन संरक्षण से जुड़ी हैं। कुछ महिलाएं वन्यजीवों की सुरक्षा कर रही हैं, कुछ घास के मैदान विकसित करने में योगदान दे रही हैं और कई महिलाएं इको-टूरिज्म से जुड़ी गतिविधियों में भाग ले रही हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि इन महिलाओं ने दिखाया है कि प्रकृति की रक्षा करते हुए आजीविका और समृद्धि का रास्ता भी बनाया जा सकता है।

‘Mission ShaktiSAT’ से हजारों बेटियों को अंतरिक्ष विज्ञान का अवसर

प्रधानमंत्री ने Mission ShaktiSAT को भी विशेष उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से 108 देशों की 12 हजार छात्राओं को सैटेलाइट तकनीक और नवाचार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर ग्रेटर नोएडा की गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी में मिशन के दूसरे चरण की शुरुआत की गई। इसमें भारत सहित कई देशों की छात्राओं ने हिस्सा लिया। भारत के दूरदराज क्षेत्रों से चयनित छात्राएं भी इस कार्यक्रम का हिस्सा हैं।

इस मिशन का लक्ष्य छात्राओं की भागीदारी से विकसित एक सैटेलाइट को चंद्रमा की कक्षा में भेजने की दिशा में काम करना है।

पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि इस पहल से जुड़ी कई बेटियां भविष्य में विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में देश और दुनिया में अपनी पहचान बनाएंगी।

एवोकाडो की खेती से किसानों की बढ़ रही आमदनी

प्रधानमंत्री ने किसानों के नवाचार का उदाहरण देते हुए एवोकाडो की खेती का भी उल्लेख किया।

आंध्र प्रदेश के कडप्पा के किसान वरदराज ने पारंपरिक फसलों के साथ एवोकाडो की खेती शुरू की। उन्होंने YouTube के माध्यम से इसके बारे में जानकारी जुटाई और अब तक करीब 4 टन एवोकाडो का उत्पादन कर चुके हैं।

तमिलनाडु के कोडाइकनाल के किसान चंद्रशेखरन ने आधे हेक्टेयर में एवोकाडो की खेती शुरू की और इससे अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहे हैं।

वहीं कर्नाटक के चिक्कमगलुरु में कुछ किसानों ने कॉफी के बागानों के बीच एवोकाडो के पौधे लगाए हैं। इससे उन्हें कॉफी और काली मिर्च के साथ अतिरिक्त आय का स्रोत मिल रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि शहरों में लोग एवोकाडो टोस्ट खाते हैं, वहीं देश के किसान इसी एवोकाडो को अपनी आमदनी बढ़ाने का जरिया बना रहे हैं।

महानायक उत्तम कुमार को पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री ने भारतीय सिनेमा के महान अभिनेता उत्तम कुमार की जन्मशती का उल्लेख करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।

उन्होंने कहा कि उत्तम कुमार ने अपने अभिनय से लोगों के दिलों में खास जगह बनाई। सत्यजीत रे की फिल्म ‘नायक’ को लेकर भी उन्होंने कहा कि फिल्म की पटकथा उत्तम कुमार को ध्यान में रखकर लिखी गई थी।

पीएम मोदी ने उनके अभिनय के साथ-साथ उनके परोपकारी स्वभाव की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तम कुमार का जीवन यह सीख देता है कि शुरुआती असफलताओं से निराश होकर कभी हार नहीं माननी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने बंगाली में श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि महानायक उत्तम कुमार हमेशा लोगों के दिलों में राज करते रहेंगे।

त्योहारों में ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश

आने वाले त्योहारों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने देशवासियों को जन्माष्टमी, विश्वकर्मा पूजा और दीपावली की शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने एक बार फिर ‘वोकल फॉर लोकल’ का आह्वान करते हुए कहा कि इसका मतलब केवल मिट्टी के दीये खरीदना नहीं है, बल्कि घर में खरीदी जाने वाली ज्यादा से ज्यादा वस्तुओं में यह देखना भी है कि वे भारत में बनी हों।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए देश में बने उत्पादों पर गर्व करना और उन्हें बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने क्रिएटर्स, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और सेलिब्रिटीज से भी ‘वोकल फॉर लोकल’ को आगे बढ़ाने में योगदान देने की अपील की।

पीएम मोदी का संदेश

‘मन की बात’ के इस एपिसोड में प्रधानमंत्री का मुख्य संदेश जनभागीदारी, आत्मनिर्भरता, नवाचार और सामाजिक जिम्मेदारी के इर्द-गिर्द रहा। इतिहास से लेकर अंतरिक्ष तक, महिला उद्यमिता से लेकर किसान नवाचार तक और स्वच्छता से लेकर नशामुक्त भारत तक—पीएम मोदी ने देश के नागरिकों के छोटे प्रयासों को बड़े सामाजिक बदलाव की ताकत बताया।

उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे अपने आसपास सकारात्मक बदलाव लाने वाले लोगों और पहलों की जानकारी ‘मन की बात’ के साथ साझा करें, ताकि उनकी कहानियां देश के दूसरे लोगों के लिए भी प्रेरणा बन सकें।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन का कमाल-उन्नत मक्का बीज और कृषि सहायता से संवरी कृषक शुभम दुबे की राह

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत राज्य के कृषकों को उन्नत कृषि तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और आवश्यक कृषि आदान (उर्वरक व दवाएं) उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर नजर आने लगे हैं।

मक्का की खेती से शुभम दुबे की जिंदगी में नया उत्साह 

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ अधिक उत्पादन देने वाली फसलों की ओर प्रेरित किया जा रहा है, जिससे प्रदेश में कृषि उत्पादन और किसानों की खुशहाली को नई गति मिल रही है। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम कृष्णापुर निवासी कृषक शुभम दुबे की जिंदगी में नया उत्साह देखने को मिल रहा है। शुभम दुबे ने अपनी लगभग दो एकड़ भूमि पर मक्का की खेती की है। कृषि विभाग की ओर से उन्हें उन्नत किस्म के मक्का बीज, खाद और खरपतवार नियंत्रण के लिए आवश्यक दवाएं प्रदान की गई थीं।

सब्जियों से मक्का की ओर रुख, बढ़ी उत्पादन और आय की उम्मीद

कृषक शुभम दुबे ने बताया कि पहले वे अपने खेत में पारंपरिक रूप से सब्जियों की खेती किया करते थे, लेकिन उससे अपेक्षित उत्पादन और लाभ नहीं मिल पाता था। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन से जुड़कर जब उन्होंने उन्नत किस्म के बीज और पोषण प्रबंधन के साथ मक्का लगाया, तो पौधों का विकास काफी तेजी से हुआ। खरपतवार नियंत्रण के लिए सुझाई गई दवाओं के इस्तेमाल से फसल को पनपने का पूरा अवसर मिला। शुभम दुबे का कहना है कि फसल समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ तैयार हो रही है, जिससे उन्हें बाजार में सही समय पर उपज बेचकर अच्छा दाम मिलने की पूरी उम्मीद है। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

मुख्यमंत्री एवं शासन का जताया आभार

कृषि विभाग से मिले तकनीकी मार्गदर्शन और समय पर प्राप्त सहायता से उत्साहित होकर शुभम दुबे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं छत्तीसगढ़ शासन का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन की इस पहल से छोटे और पारंपरिक किसानों को खेती की नई दिशा मिल रही है और उनका कृषि के प्रति भरोसा बढ़ा है।

प्रदेश में मानसून के दस्तक के साथ ही खेती-किसानी में तेजी

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राज्य में 4.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लक्ष्य का 10 प्रतिशत बोनी पूर्ण

इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का है लक्ष्य

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश: किसानों को उनकी मांग के अनुरूप सुगमता से मिले खाद-बीज

किसानों को 7.28 लाख मीट्रिक टन खाद और 3.09 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित

प्रदेश में अब तक 96.4 मि.मी. औसत वर्षा दर्जः राज्य की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिमी

रायपुर- प्रदेश में मानसून के दस्तक के साथ ही खेती किसानी का कार्य तेजी के साथ शुरू हो गया है। राज्य में अब तक 4.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्रों में लक्ष्य का 10 प्रतिशत बोनी हो चुकी है। इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों को खेती-किसानी में सहुलियतें प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक सहयोग करने संबंधित अधिकारियों निर्देशित किए गए हैं। उन्होंने किसानों को उनकी मांग के अनुसार सुगमता के साथ प्रमाणित खाद-बीज का वितरण करने को कहा हैं। खाद-बीज वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही सोसायटियों में पर्याप्त खाद-बीज का भण्डारण कर सतत निगरानी करने को कहा है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा इन पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। 

प्रदेश के किसानों को अब तक 7.28 लाख मीट्रिक टन खाद और 3.09 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया जा चुका है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में मानसून की बौछारों के साथ शुरू हुए खेती-किसानी में बोनी का रकबा भी निरंतर बढ़ते जा रहा है। राज्य में अब तक 7.28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों जैसे धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली, रामतिल आदि की बोनी हो चुकी है, जो लक्ष्य का 10 प्रतिशत है। इस खरीफ सीजन में राज्य सरकार ने 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 02 जुलाई 2026 की स्थिति में प्रदेश में अब तक 96.4 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिमी है।  

अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष खरीफ 2026 के लिए बीज निगम द्वारा प्रदेश में 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 4.30 लाख क्विंटल बीज का भंडारण कर अब तक 3.09 लाख क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो मांग का 62 प्रतिशत है। गत वर्ष इसी अवधि में 2.67 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया गया था। इसी प्रकार प्रदेश में इस खरीफ सीजन में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उक्त लक्ष्य के विरूद्ध 13.16 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में भंडारण किया गया है। उक्त भंडारण के विरूद्ध 7.28 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 47 प्रतिशत है।   

अधिकारियों बताया कि राज्य सरकार किसानों को खेती-किसानी में सहूलियते हो इस उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अल्प कालीन कृषि ऋण उपलब्ध करा रहे है। खरीफ सीजन 2026 के लिए 30 जून की स्थिति में 5525 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया है, जबकि गत वर्ष इसी अवधि में 4517 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया गया था। इस वर्ष किसानों को 8800 करोड़ रूपए ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है।

जशपुर की नाशपाती से बढ़ रही किसानों की आमदनी, 3,500 से अधिक कृषक जुड़े फल उत्पादन से

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3500 हेक्टेयर में हो रही नाशपाती की खेती, देश के कई राज्यों में है जशपुर की नाशपाती की मांग

एक एकड़ से किसानों को हो रही 1 लाख से 1.50 लाख रुपए तक की वार्षिक आय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। जशपुर जिले के किसान नाशपाती की खेती के माध्यम से उल्लेखनीय आय अर्जित कर आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। प्राकृतिक रूप से अनुकूल जलवायु और उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन के कारण जशपुर आज राज्य के प्रमुख नाशपाती उत्पादक जिलों में शामिल हो चुका है।

जशपुर जिले में लगभग 3,500 से अधिक किसान करीब 3,500 हेक्टेयर क्षेत्र में नाशपाती की खेती कर रहे हैं। जिले में प्रतिवर्ष लगभग 1 लाख 75 हजार क्विंटल नाशपाती का उत्पादन हो रहा है। इससे हजारों कृषक परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और जिले की पहचान फल उत्पादन के क्षेत्र में लगातार मजबूत हो रही है।

जशपुर की नाशपाती स्वाद, गुणवत्ता और आकर्षक आकार के कारण देश के विभिन्न राज्यों में विशेष रूप से पसंद की जाती है। जिले के सन्ना, पंडरापाठ, कंवई, महुआ, सोनक्यारी, मनोरा, धवईपाई और गीधा जैसे क्षेत्रों से नाशपाती की खेप दिल्ली, उत्तर प्रदेश, ओडिशा सहित अन्य राज्यों में भेजी जाती है। फल को सावधानीपूर्वक कैरेट में पैक कर बाजारों तक पहुंचाया जाता है।

नाशपाती की खेती किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। एक एकड़ क्षेत्र से किसानों को औसतन 1 लाख से 1.50 लाख रुपए तक की वार्षिक आय प्राप्त हो रही है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और किसान आधुनिक उद्यानिकी की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।

उद्यानिकी विभाग तथा नाबार्ड के सहयोग से किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण, पौधरोपण, बागवानी प्रबंधन और विपणन संबंधी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत नाशपाती क्षेत्र विस्तार योजना संचालित की जा रही है, जिसके माध्यम से किसानों को अनुदान एवं तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से जशपुर जिले में उद्यानिकी आधारित कृषि को नई दिशा मिली है। नाशपाती की खेती न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि जशपुर को राज्य के एक उभरते हुए फल उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित कर रही है।

सफलता की कहानी-धान छोड़ फूलों की खेती ने बदली आनंदराम की तकदीर

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22 हजार के बदले कमाए 3 लाख रुपए

गेंदा उत्पादन से कोड़केल के किसान ने पेश की सफलता की मिसाल

रायपुर- छत्तीसगढ़ में किसान अब पारंपरिक धान की खेती छोड़कर फूलों की खेती अपनाकर अपनी तकदीर बदल रहे हैं। उद्यानिकी विभाग और सरकारी योजनाओं की मदद से गेंदा, गुलाब जैसे फूलों की वैज्ञानिक खेती कर किसान कम लागत में लाखों रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आया है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन और उद्यानिकी विभाग से मार्गदर्शन मिलने के कारण किसान वैज्ञानिक पद्धति से अधिक उत्पादन ले रहे हैं। एक किसान आनंदराम सिदार की सफलता देखकर अब अन्य ग्रामीण भी परंपरागत खेती से आगे बढ़कर उद्यानिकी फसलों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

परंपरागत खेती के दौर में जहाँ किसान अक्सर कम मुनाफे से परेशान रहते हैं, वहीं रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखण्ड के एक छोटे से गाँव कोड़केल के किसान आनंदराम सिदार ने नवाचार से समृद्धि की नई इबारत लिखी है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन की श्गेंदा क्षेत्र विस्तार योजनाश् का लाभ उठाकर आनंदराम ने अपनी आय में कई गुना वृद्धि की है।

धान बनाम गेंदा- मुनाफे का बड़ा अंतर

आनंदराम सिदार पहले पारंपरिक धान की खेती पर निर्भर थे। वे 10 क्विंटल धान का उत्पादन कर मुश्किल से 31 हजार रुपए की कुल आय प्राप्त कर पाते थे, जिसमें से लागत काटकर उनके हाथ मात्र 22 हजार रुपए का लाभ आता था। लेकिन उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में गेंदा फूल की खेती शुरू की, जिससे उनकी आय का ग्राफ अचानक बदल गया।

तकनीकी सहयोग और बंपर उत्पादन

वर्ष 2025-26 के दौरान उद्यानिकी विभाग ने उन्हें उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। आनंदराम की मेहनत और विभागीय सहयोग का नतीजा यह रहा कि उन्होंने कुल उत्पादन लगभग 44 क्विंटल गेंदा फूल बेचकर 

 3 लाख रुपए से अधिक की कुल आमदनी हासिल की। धान की तुलना में बेहतर रिटर्न और कम समय में अधिक आय प्राप्त किया।

क्षेत्र के किसानों के लिए बने रोल मॉडल

आनंदराम सिदार की इस सफलता ने पूरे रायगढ़ जिले में गेंदा जैसी नगदी फसलों के प्रति अन्य किसानों का रुझान बढ़ा दिया है। अब क्षेत्र के कई किसान धान के स्थान पर फूलों की खेती को एक लाभकारी विकल्प के रूप में अपना रहे हैं। आनंदराम सिदार का कहना है कि शुरुआत में जोखिम लग रहा था, लेकिन उद्यानिकी विभाग के तकनीकी सहयोग और सही समय पर की गई देखरेख ने मेरी तकदीर बदल दी। आज मैं आत्मनिर्भर हूँ और अपने परिवार को बेहतर जीवन दे पा रहा हूँ।

विभाग की सक्रिय पहल

रायगढ़ जिले में राष्ट्रीय बागवानी मिशन की गेंदा क्षेत्र विस्तार योजना से जुड़ने के बाद आनंदराम सिदार का जीवन की दिशा ही बदल गई। उद्यानिकी विभाग की सक्रियता से फूलों की खेती अब एक टिकाऊ और मुनाफे वाले व्यवसाय के रूप में उभर रही है। विभाग द्वारा लगातार किसानों को प्रशिक्षण और प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।

पारसनाथ बने किसान-मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष,किसानो में हर्ष की लहर

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आरंग- राष्ट्रीय किसान नेता और समाजसेवी पारसनाथ साहू को किसान मजदूर महासंघ मध्यप्रदेश की संस्था द्वारा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया है। उन्होंने बताया यह  संस्था किसान मजदूर महासंघ मध्यप्रदेश द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर संचालित  है।जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार  कक्का ने उनकी सक्रियता और कार्य प्रणाली को देखते हुए नियुक्ति पत्र भेजकर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोनीत किये है। ज्ञात हो कि पारसनाथ साहू काफी लंबे समय से मजदूरों और किसानों की समस्याओं, अनाज का उचित लाभकारी समर्थन मूल्य पर खरीदी की कानूनी गारंटी दिलाने, प्रदेश मे धान खरीदी में होने वाली अव्यवस्थाओं और समस्याओं सहित सिंचाई,बिजली,पानी, खाद बीज इत्यादि की उपलब्धता सुनिश्चित कराने लगातार प्रयासरत हैं।

वहीं पारसनाथ को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाये जाने पर क्षेत्र व प्रदेश के किसानों में हर्ष की लहर है। उन्होंने कहा है अब किसानों और मजदूरों की मांग व समस्यायों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से रखते हुए उसके समाधान का प्रयास किया जाएगा। वहीं उनके राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनने पर अंचल के किसान नेता गोविन्द चन्द्राकर, श्रवण चन्द्राकर, झनकराम आवडे, घनाराम साहू, तेजराम विद्रोही, लक्ष्मी पटेल, दीपक चौहान,लल्लू सिंह,जुगनू चन्द्राकर, दूजेराम धीवर, योगेश, ईश्वरी साहू सहित सामाजिक संगठन पीपला वेलफेयर फाउंडेशन ने हर्ष व्यक्त करते हुए बधाई दिए हैं।

होली से पहले किसानों को बड़ी सौगात, 10 हजार करोड़ का होगा भुगतान

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में मंत्रिपरिषद की बैठक हुई।

बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

छत्तीसगढ़ विधानसभा के षष्ठम् विधानसभा के अष्टम् सत्र (फरवरी-मार्च 2026) के लिए राज्यपाल के अभिभाषण को मंजूरी दी गई।

विधानसभा में प्रस्तुत किए जाने वाले बजट अनुमान 2026-27 के लिए छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक-2026 के प्रारूप को भी स्वीकृति दी गई।

कैबिनेट ने किसानों के हित में बड़ा निर्णय लिया।

समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल के मान से अंतर की राशि का भुगतान होली से पहले एकमुश्त किया जाएगा।

खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25 लाख 24 हजार 339 किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई।

कृषक उन्नति योजना के तहत लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा।

सरकार प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कर रही है। यह देश में सर्वाधिक है।

बीते दो वर्षों में किसानों को 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है।

इस वर्ष के भुगतान के बाद यह राशि बढ़कर 35 हजार करोड़ रुपये हो जाएगी।

धान की खुशहाली से सजी खुशियाँ:-किसान प्रेमचंद लहरे 9.61 लाख की धान बिक्री से करेंगे भतीजी का विवाह

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रायपुर- खरीफ विपणन वर्ष 2025- 26 में जिले में धान खरीदी का कार्य तेजी और पारदर्शिता के साथ जारी है। 15 नवंबर से प्रारंभ हुई धान खरीदी के अंतर्गत सारंगढ़- बिलाईगढ जिले में कुल 89 हजार 181 कृषक पंजीकृत हैं, जिनमें से अब तक 72 हजार 258 किसानों से 3 लाख 71 हजार 291 टन धान की खरीदी समितियों द्वारा की जा चुकी है। इस प्रकार जिले में लगभग 76 प्रतिशत धान खरीदी का लक्ष्य पूर्ण हो चुका है।

विकासखंड सारंगढ़ के धान उपार्जन केंद्र कोसीर में पंजीकृत ग्राम भाठागांव निवासी किसान प्रेमचंद लहरे ने बिना किसी परेशानी के मात्र दो टोकन के माध्यम से 310 क्विंटल धान का विक्रय किया। धान विक्रय के एवज में उन्हें 9 लाख 61 हजार रुपये की राशि का त्वरित भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त हुआ।

धान बिक्री से मिली इस राशि ने किसान प्रेमचंद लहरे के परिवार में खुशियों का माहौल बना दिया है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि उनकी भतीजी का विवाह तय हो चुका है और धान बिक्री से प्राप्त राशि का उपयोग वे इसी शुभ अवसर में करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों के कारण आज किसानों को समय पर भुगतान मिल रहा है और कार्य सुचारु रूप से हो रहा है।

किसान प्रेमचंद लहरे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में धान खरीदी व्यवस्था सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बनी है। उल्लेखनीय है कि शासन के निर्देशानुसार जिले में धान खरीदी का कार्य जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में सभी उपार्जन केंद्रों पर किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। समयबद्ध भुगतान और सुव्यवस्थित व्यवस्था से किसान संतुष्ट हैं और राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त कर रहे हैं।

भारत की कॉफी उद्योग: वैश्विक मंच पर नई पहचान गढ़ती एक सशक्त कहानी

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भारत की कॉफी यात्रा का आरंभ 1600 ईस्वी के आसपास माना जाता है, जब सूफी संत बाबा बूदान यमन के मोचा बंदरगाह से सात कॉफी के बीज लाकर कर्नाटक के चिक्कमंगलूर स्थित बाबा बूदान गिरी पहाड़ियों में रोपित किए थे। घरेलू बागानों से शुरू हुआ यह सफर समय के साथ वाणिज्यिक खेती में बदल गया और आज भारतीय कॉफी अपनी विशिष्ट पहचान के साथ वैश्विक बाजार में अहम स्थान रखती है।

भारत में कॉफी की खेती लगभग 4.91 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पश्चिमी व पूर्वी घाटों तथा पूर्वोत्तर राज्यों में होती है। दो-स्तरीय छायादार कृषि प्रणाली, विविध वनस्पतियों और सतत खेती पद्धतियों के कारण भारतीय कॉफी पर्यावरण के लिए भी लाभकारी मानी जाती है। करीब दो मिलियन लोगों की आजीविका इस क्षेत्र से जुड़ी हुई है, जिनमें से अधिकांश छोटे किसान हैं—जो 99% खेतों और 70% उत्पादन के भागीदार हैं।

भारत का कॉफी परिदृश्य

देश की कुल कॉफी उत्पादन का 96% हिस्सा कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु से आता है। कर्नाटक 2,80,275 मीट्रिक टन के साथ सबसे बड़ा उत्पादक है। भारत के 13 विशिष्ट कॉफी क्षेत्र अपनी अनूठी जलवायु, ऊंचाई और स्वाद के कारण विश्व बाजार में अलग पहचान बनाए हुए हैं।

GI टैग से बढ़ी विश्वसनीयता

भारत के पाँच क्षेत्रीय और दो विशेष कॉफी प्रकारों को भौगोलिक संकेतक (GI) मान्यता प्राप्त है—

  • कूर्ग अरेबिका, वायनाड रोबस्टा, चिकमगलूर अरेबिका, अराकू वैली अरेबिका, बाबा बूदानगिरी अरेबिका

  • विशेष श्रेणी: मॉन्सून्ड मालाबार रोबस्टा

स्पेशलिटी कॉफी—जैसे मॉन्सून्ड मालाबार AA, मैसूर नगेट्स, रोबस्टा कापी रॉयल—बड़ी मात्रा में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लोकप्रिय हो रही हैं।

कॉफी बोर्ड की भूमिका

द्वितीय विश्वयुद्ध के समय आई संकट की स्थिति से निपटने के लिए 1942 में “कॉफी एक्ट” के तहत कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया की स्थापना हुई। यह बोर्ड अनुसंधान, गुणवत्ता सुधार, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, निर्यात और किसानों को तकनीकी–वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का काम करता है।

भारत के कॉफी निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि

भारत दुनिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा कॉफी निर्यातक देश है।

  • FY 2024–25 में निर्यात 1.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।

  • प्रमुख निर्यात बाजार: इटली, जर्मनी, बेल्जियम, रूस, यूएई।

  • भारत इंस्टेंट कॉफी का वैश्विक केंद्र बनता जा रहा है, जिसकी हिस्सेदारी कुल निर्यात में 38% है।

सरकारी नीतियों से मिली रफ्तार

  • GST में कमी: इंस्टेंट कॉफी पर टैक्स 18% से घटाकर 5% किया गया, जिससे बाजार में 11–12% तक कीमत कम होने और खपत बढ़ने की उम्मीद है।

  • भारत–UK CETA: भारतीय रोस्टेड व इंस्टेंट कॉफी को ब्रिटेन में अब ड्यूटी-फ्री प्रवेश मिलेगा।

  • भारत–EFTA TEPA: स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और आइसलैंड द्वारा भारतीय कॉफी पर 0% शुल्क—प्रीमियम बाजारों में बड़ी अवसर वृद्धि।

फाइन कप अवॉर्ड्स में ओडिशा की चमक

कॉफी बोर्ड द्वारा आयोजित “फ्लेवर ऑफ इंडिया – फाइन कप” प्रतियोगिता में 2024 में कोरापुट कॉफी ने दो पुरस्कार जीते—धोई हुई (washed) और नैचुरल दोनों श्रेणियों में। इससे ओडिशा की ऊंचाई वाली आदिवासी कॉफी को राष्ट्रीय पहचान मिली।

TDCCOL का आदिवासी किसानों के लिए योगदान

ओडिशा की प्रमुख सहकारी संस्था TDCCOL ने 2019 से कोरापुट में घर-घर जाकर कॉफी खरीदना शुरू किया।
मुख्य उपलब्धियां—

  • किसानों को ICTA आधारित उचित मूल्य

  • सीधे बैंक खातों में भुगतान

  • मूल्य संवर्धन के साथ "Koraput Coffee" ब्रांड का शुभारंभ

  • भुवनेश्वर, पुरी, कोरापुट और नई दिल्ली में कुल 8 “कोरापुट कॉफी कैफ़े”

कॉफी बोर्ड ने TDCCOL को ड्राइंग यार्ड, पल्पर जैसी सुविधाओं के लिए वित्तीय सहायता भी दी है।

भविष्य की दिशा

भारत में कॉफी बाजार 2028 तक 8.9% CAGR की रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है। आउट-ऑफ-होम कॉफी सेगमेंट 15–20% CAGR के साथ 3.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। कॉफी बोर्ड का लक्ष्य है कि वर्ष 2047 तक उत्पादन को 9 लाख टन तक पहुंचाया जाए।

निष्कर्ष

भारत की कॉफी गाथा दृढ़ता, नवाचार और समावेशी विकास की कहानी है। परंपरा और आधुनिक तकनीक के मेल ने भारतीय कॉफी को वैश्विक मंच पर नई पहचान दी है। GI टैग, स्पेशलिटी कॉफी, आदिवासी समुदायों की भूमिका और तेजी से बढ़ते निर्यात के साथ भारत विश्व कॉफी उद्योग में अपनी मजबूत जगह बना रहा है। आने वाले वर्षों में गुणवत्ता, स्थिरता और मूल्यवर्धन पर ध्यान केंद्रित कर भारत की कॉफी उद्योग नए आयाम छूने को तैयार है।


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