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भारत-चिली CEPA वार्ता में तेजी, इस साल समझौता पूरा करने की भारत की प्रतिबद्धता

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सैंटियागो- भारत और चिली के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement-CEPA) को लेकर वार्ता आगे बढ़ाने के प्रयास तेज हो गए हैं। भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने 26 अगस्त 2026 को चिली की राजधानी सैंटियागो में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों की उप-मंत्री पाउला एस्तेवेज वीनस्टीन से मुलाकात की। बैठक में भारत-चिली CEPA वार्ता को आगे बढ़ाने और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने पर चर्चा हुई।

संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते पर जोर

बैठक के दौरान भारत ने आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए खुलेपन, निरंतर संवाद और संतुलित दृष्टिकोण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। भारत का जोर ऐसे समझौते पर है, जिससे दोनों देशों के व्यवसायों के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी वास्तविक और ठोस अवसर पैदा हो सकें।

दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और चिली के बीच पहले से मजबूत होते संबंधों को CEPA के जरिए और व्यापक बनाया जाए। दोनों पक्ष चाहते हैं कि समझौते में तय किए जाने वाले साझा लक्ष्य केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका सीधा लाभ दोनों देशों के कारोबार और उद्योगों को मिले।

ग्लोबल साउथ के साझा दृष्टिकोण को बताया महत्वपूर्ण

भारत और चिली दोनों Global South का हिस्सा हैं। दोनों देशों के बीच साझा रणनीतिक दृष्टिकोण और वैश्विक मुद्दों पर कई समान विचार आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि दोनों देश अपनी समान प्राथमिकताओं का लाभ उठाते हुए व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई तक ले जा सकते हैं। CEPA को इसी व्यापक आर्थिक साझेदारी का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है।

हेल्थकेयर से लेकर ऊर्जा और कृषि तक कई क्षेत्रों में संभावनाएं

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भारत और चिली के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित किया।

उन्होंने विशेष रूप से इन क्षेत्रों का उल्लेख किया—

  • हेल्थकेयर और चिकित्सा क्षेत्र

  • फार्मास्यूटिकल्स

  • ऊर्जा

  • खनिज एवं महत्वपूर्ण खनिज संसाधन

  • कृषि

  • मशीनरी

  • इंजीनियरिंग और औद्योगिक क्षेत्र

भारत का मानना है कि इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से दोनों देशों के उद्योगों को नए बाजार मिल सकते हैं और द्विपक्षीय व्यापार में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

CEPA से व्यापार और निवेश को मिलेगी नई गति

भारत और चिली के बीच व्यापारिक संबंध लगातार बढ़ रहे हैं। प्रस्तावित CEPA के सफल निष्कर्ष से दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।

समझौते से कंपनियों को बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने के साथ-साथ व्यापारिक प्रक्रियाओं को अधिक सुगम बनाने में मदद मिल सकती है। इससे दोनों देशों के व्यवसायों के लिए नए अवसर पैदा होंगे और आर्थिक साझेदारी को दीर्घकालिक आधार मिलेगा।

तकनीक, प्रतिभा और सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाने की उम्मीद

CEPA केवल वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। इसके जरिए तकनीक, प्रतिभा और मजबूत एवं भरोसेमंद सप्लाई चेन के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की उम्मीद है।

बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में लचीली और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाएं महत्वपूर्ण हो गई हैं। ऐसे में भारत और चिली के बीच सहयोग दोनों देशों की कंपनियों को नए अवसर देने के साथ-साथ वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद कर सकता है।

इसी साल CEPA पूरा करने का भारत का लक्ष्य

भारत ने स्पष्ट किया है कि वह भारत-चिली CEPA वार्ता को इसी वर्ष पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत का लक्ष्य ऐसा समझौता तैयार करना है, जो दोनों देशों के लिए संतुलित, पारस्परिक रूप से लाभकारी और व्यावसायिक रूप से सार्थक हो। भारत चाहता है कि समझौते के परिणाम दोनों देशों के कारोबारियों और उद्योगों के लिए समान और वास्तविक अवसर पैदा करें।

भारत-चिली संबंधों के लिए अहम कदम

भारत-चिली CEPA को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे व्यापार और निवेश के साथ-साथ तकनीक, ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और खनिज जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिल सकती है।

भारत का कहना है कि CEPA दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग की मजबूत नींव तैयार करेगा और साझा समृद्धि की दिशा में नए अवसर पैदा करेगा।

भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता: व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे

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भारत और न्यूज़ीलैंड ने आज नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वैश्विक आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस समझौते पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूज़ीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने हस्ताक्षर किए।

न्यूज़ीलैंड के मंत्री टॉड मैक्ले ने इसे “एक पीढ़ी में एक बार मिलने वाला अवसर” बताते हुए कहा कि यह समझौता निर्यात को बढ़ावा देगा, रोजगार सृजित करेगा और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा। उन्होंने भारतीय प्रवासी समुदाय और दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक एवं खेल संबंधों का भी उल्लेख किया।

वहीं, पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता विकसित देशों के साथ भारत की आर्थिक साझेदारी में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। उन्होंने बताया कि यह समझौता किसानों, महिलाओं, युवाओं, कारीगरों और उद्यमियों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इस समझौते के तहत न्यूज़ीलैंड की ओर से भारत में लगभग 20 अरब डॉलर के निवेश की संभावना जताई गई है।

यह FTA भारत के “विकसित भारत 2047” विजन के अनुरूप है और पिछले कुछ वर्षों में भारत द्वारा किए गए प्रमुख व्यापार समझौतों में शामिल है। इस समझौते के लागू होने के बाद भारत को न्यूज़ीलैंड के बाजार में 100% ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा, जिससे MSME सेक्टर और श्रम-प्रधान उद्योगों को बड़ा लाभ होगा।

समझौते के तहत भारत ने लगभग 70% टैरिफ लाइनों पर रियायत दी है, जबकि संवेदनशील क्षेत्रों जैसे डेयरी, कृषि उत्पाद और कुछ औद्योगिक वस्तुओं को संरक्षण दिया गया है। इससे घरेलू उद्योगों और किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे।

कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा। सेब, कीवी और मनुका शहद जैसे उत्पादों के आयात के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिससे संतुलन बना रहे।

सेवा क्षेत्र में भारत को 118 सेक्टरों में बाजार पहुंच मिलेगी, जिसमें आईटी, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और वित्तीय सेवाएं शामिल हैं। साथ ही, भारतीय पेशेवरों के लिए 5000 विशेष वीज़ा का प्रावधान किया गया है, जिससे रोजगार और अंतरराष्ट्रीय अनुभव के अवसर बढ़ेंगे।

छात्रों के लिए भी यह समझौता लाभकारी है। अब भारतीय छात्रों को न्यूज़ीलैंड में पढ़ाई के दौरान काम करने और पढ़ाई के बाद नौकरी के अधिक अवसर मिलेंगे। युवाओं के लिए वर्किंग हॉलिडे वीज़ा की सुविधा भी दी गई है।

यह समझौता MSME, स्टार्टअप, महिला उद्यमियों और नवाचार को बढ़ावा देगा। साथ ही, भारत के फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइस सेक्टर को न्यूज़ीलैंड के बाजार में आसान प्रवेश मिलेगा।

बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) के तहत भारतीय भौगोलिक संकेत (GI) उत्पादों को भी न्यूज़ीलैंड में मान्यता मिलने का रास्ता साफ होगा।

यह समझौता व्यापार प्रक्रियाओं को आसान बनाने, लागत कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने पर भी जोर देता है। सीमा शुल्क निकासी को तेज किया जाएगा और डिजिटल सिस्टम को बढ़ावा मिलेगा।

सांस्कृतिक और पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्र में भी यह समझौता ऐतिहासिक है। AYUSH और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक पहचान दिलाने में यह अहम भूमिका निभाएगा।

कुल मिलाकर, यह समझौता भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच व्यापार, निवेश, रोजगार और सांस्कृतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी को मजबूत करेगा।

CBIC की EMI स्कीम से आयातकों को राहत, बिना अग्रिम शुल्क भुगतान के होगा क्लीयरेंस

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नई दिल्ली- केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने यूनियन बजट 2026-27 में घोषित व्यापार सुविधा पहल के तहत Eligible Manufacturer Importers (EMI) के लिए ड्यूटी डिफरमेंट स्कीम पर एक हाइब्रिड आउटरीच कार्यक्रम का आयोजन किया।

इस कार्यक्रम में योगेंद्र गर्ग (सदस्य, कस्टम्स, CBIC), मनीष कुमार (मुख्य आयुक्त, दिल्ली कस्टम्स),  संजय गुप्ता और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उद्योग एवं व्यापार जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में स्कीम के लाभ और प्रक्रिया पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई तथा प्रतिभागियों के सवालों के जवाब भी दिए गए।

योगेंद्र गर्ग ने कहा कि यह योजना विश्वास-आधारित (Trust-based) प्रणाली पर आधारित है, जिसका उद्देश्य कस्टम क्लीयरेंस को तेज करना और समय (dwell time) कम करना है। वहीं, मनीष कुमार ने बताया कि यह योजना निर्माताओं की वित्तीय स्थिति (working capital) को मजबूत बनाकर उनके व्यवसाय को अधिक व्यवहार्य बनाएगी।

EMI स्कीम क्या है?

EMI (Eligible Manufacturer Importers) स्कीम के तहत पात्र आयातक बिना अग्रिम शुल्क (import duty) भुगतान किए माल को क्लीयर कर सकते हैं, और शुल्क का भुगतान मासिक आधार पर किया जाएगा।

 यह योजना MSME सेक्टर के लिए भी लागू है और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देती है।

 मुख्य लाभ

  • निर्माताओं के लिए बेहतर लिक्विडिटी (नकदी प्रवाह)

  • तेज क्लीयरेंस और कम समय

  • बेहतर इंपोर्ट प्लानिंग

  • सप्लाई चेन में सुधार

  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा में वृद्धि

पात्रता (Eligibility)

  • वैध IEC (Import Export Code)

  • पिछले वर्ष में कम से कम 25 EXIM दस्तावेज (MSME के लिए 10)

  • GST अनुपालन

  • अच्छी वित्तीय स्थिति

  • साफ कंप्लायंस रिकॉर्ड

आवेदन प्रक्रिया

  • आवेदन ऑनलाइन AEO पोर्टल (www.aeoindia.gov.in) पर

  • पूरी प्रक्रिया डिजिटल, कोई फिजिकल इंटरफेस नहीं

  • 1 अप्रैल 2026 से सभी कस्टम्स में लागू

  • वैधता: 31 मार्च 2028 तक (2 वर्ष)

यह योजना भारत में व्यापार को आसान बनाने, लागत कम करने और घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


निति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने “ट्रेड वॉच क्वार्टरली” Q2 FY 25-26 का नवीनतम संस्करण जारी किया

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निति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने 13 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2025) के लिए “Trade Watch Quarterly” का नवीनतम संस्करण जारी किया। इस अवसर पर निति आयोग के सदस्य अरविंद वर्मानी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

इस प्रकाशन में वैश्विक और घरेलू व्यापार रुझानों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। जबकि वैश्विक व्यापार वृद्धि धीमी रही, सेवाओं का प्रदर्शन माल से बेहतर रहा और विकासशील क्षेत्रों ने प्रमुख भूमिका निभाई। इस तिमाही के विशेष अनुभाग में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापार पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसमें मोबाइल फोन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स और कंपोनेंट्स में भारत के निर्यात और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य श्रृंखलाओं में भागीदारी का अध्ययन किया गया है।

विश्लेषण में यह पाया गया कि Q2 FY26 में भारत के व्यापार का प्रदर्शन निर्यात-प्रेरित रहा, जिससे वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद व्यापार विस्तार बना रहा। सेवाओं और वस्तुओं के निर्यात में ~8.5% की वृद्धि हुई। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार में वृद्धि, ई-कॉमर्स के बढ़ते महत्व और भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में तेज़ी विशेष रूप से उजागर हुई।

इलेक्ट्रॉनिक्स अब भारत के निर्यात कार्ट में दूसरा सबसे बड़ा उत्पाद बन गया है। मोबाइल फोन निर्यात में तेज़ वृद्धि और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स व संचार उपकरणों में मजबूती के कारण भारत ने वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मांग में उल्लेखनीय हिस्सेदारी बनाई है। अब भारत घटक निर्माण और उच्च मूल्य संवर्धन की ओर अग्रसर है, जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स निर्माण योजना के तहत ₹40,000 करोड़ के आवंटन से मजबूती दी जा रही है।

सुमन बेरी ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स आधुनिक विनिर्माण मूल्य श्रृंखलाओं का केंद्र है और इसका निर्यात संतुलन और तकनीकी संप्रभुता पर महत्वपूर्ण प्रभाव है। जबकि भारत ने अंतिम असेंबली में पैमाना हासिल कर लिया है, स्थायी प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए संरचनात्मक लागत कम करना, घरेलू घटक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और वैश्विक उत्पादन नेटवर्क में भारतीय फर्मों को शामिल करना आवश्यक है।

अरविंद वर्मानी ने भी टीम की तारीफ़ करते हुए कहा कि वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में गहन एकीकरण, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स में, भारत के निर्यात गति को बनाए रखने, उत्पादकता बढ़ाने और गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजित करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

यह प्रकाशन नीति निर्माताओं, उद्योग, शोधकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों के लिए डेटा-आधारित विश्लेषण और नीति अंतर्दृष्टि प्रदान करता है, जिससे वैश्विक परिदृश्य में भारत की व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ किया जा सके।

APEDA द्वारा छत्तीसगढ़ से कोस्टा रिका के लिए 12 मीट्रिक टन फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) की पहली खेप का सफल निर्यात

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वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्यरत कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने छत्तीसगढ़ से कोस्टा रिका के लिए 12 मीट्रिक टन फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) की पहली खेप के निर्यात को संभव बनाया है।

यह पहल माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी कार्यक्रम “कुपोषण मुक्त भारत” के अनुरूप है, जिसे पोषण अभियान के तहत कार्यान्वित किया जा रहा है। इसके माध्यम से भारतीय खाद्य निगम (FCI) देशभर में फोर्टिफाइड चावल का वितरण कर रहा है। फोर्टिफाइड राइस कर्नेल का यह निर्यात भारत के घरेलू पोषण मिशन को वैश्विक स्तर से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

छत्तीसगढ़ राज्य ने चावल और फोर्टिफाइड चावल उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं, जिससे राज्य के किसानों, मिलर्स और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान मिल रही है। कोस्टा रिका को FRK के सफल निर्यात ने पोषण-संवर्धित खाद्य उत्पादों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में छत्तीसगढ़ की बढ़ती भूमिका को उजागर किया है।

इस अवसर पर APEDA के अध्यक्ष अभिषेक देव ने इस उपलब्धि से जुड़े सभी निर्यातकों और हितधारकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत से फोर्टिफाइड चावल का निर्यात न केवल देश के कृषि निर्यात पोर्टफोलियो को मजबूत करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत विज्ञान-आधारित और विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त खाद्य समाधानों के माध्यम से कुपोषण के समाधान के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वासन दिया कि APEDA निर्यातकों को फोर्टिफाइड और वैल्यू-ऐडेड खाद्य उत्पादों के बाजार विस्तार में निरंतर सहयोग प्रदान करेगा।

छत्तीसगढ़ राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (TREA-CG) के अध्यक्ष मुकेश जैन ने इस निर्यात कार्य में सहयोग देने के लिए APEDA का आभार व्यक्त किया और बताया कि आने वाले दिनों में FRK के नए गंतव्यों के लिए निर्यात की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने छत्तीसगढ़ से कृषि निर्यात बढ़ाने में APEDA के निरंतर सहयोग का भी अनुरोध किया।

फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) चावल के आटे को लोहा, फोलिक एसिड और विटामिन B12 जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों के साथ मिश्रित करके तैयार किया जाता है। इन पोषक तत्वों को एक्सट्रूड कर चावल के समान आकार दिया जाता है, जिसे बाद में सामान्य चावल के साथ एक निश्चित अनुपात में मिलाया जाता है ताकि मुख्य खाद्य पदार्थ के पोषण मूल्य में वृद्धि की जा सके। FRK का निर्यात भारत की खाद्य फोर्टिफिकेशन में तकनीकी क्षमता और वैश्विक खाद्य सुरक्षा एवं पोषण सुधार के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

छत्तीसगढ़ से फोर्टिफाइड राइस कर्नेल की पहली खेप के सफल प्रेषण ने भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया है। यह APEDA, छत्तीसगढ़ सरकार और निजी क्षेत्र के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है, जो भारत को पोषण-संवर्धित और उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य उत्पादों का विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता बनाने की दिशा में अग्रसर हैं।

भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर प्रगति: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की ब्रुसेल्स में सार्थक वार्ताएं

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 26 से 28 अक्टूबर 2025 तक ब्रुसेल्स का दौरा किया और यूरोपीय संघ के व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोश शेफचोविच (Mr. Maroš Šefčovič) और उनकी टीम के साथ भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से संबंधित लंबित मुद्दों पर सार्थक और उत्पादक वार्ताएं कीं।

दोनों पक्षों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन द्वारा फरवरी 2025 में नई दिल्ली में आयोजित कॉलेज ऑफ कमिश्नर्स की यात्रा के दौरान दिए गए स्पष्ट निर्देशों के अनुरूप, वर्ष 2025 के अंत तक भारत-ईयू एफटीए को संपन्न करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया। इस वार्ता का उद्देश्य एक ऐसा पारस्परिक रूप से लाभकारी, संतुलित और न्यायसंगत व्यापार समझौता करना था, जो भारत और यूरोपीय संघ के बीच गहरे राजनीतिक विश्वास और रणनीतिक संबंधों को दर्शाता हो, साथ ही एक-दूसरे की प्राथमिकताओं और संवेदनशीलताओं का सम्मान करता हो।

भारत ने यह स्वीकार किया कि एफटीए में टैरिफ और गैर-टैरिफ दोनों प्रकार की बाधाओं को संतुलित रूप से संबोधित करना आवश्यक है, ताकि आने वाले वर्षों में दोनों भागीदारों के बीच व्यापार को गति देने वाले पारदर्शी और पूर्वानुमेय विनियामक ढांचे तैयार किए जा सकें।

दोनों पक्षों के बीच लंबित मुद्दों पर संभावित समाधान क्षेत्रों की पहचान के लिए गहन चर्चा हुई। भारत की गैर-टैरिफ उपायों और नई यूरोपीय संघ की विनियमों से संबंधित चिंताओं पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। वार्ता के दौरान, केंद्रीय मंत्री ने भारत के प्रमुख मांग वाले क्षेत्रों, विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों में, वरीयतापूर्ण व्यवहार (preferential treatment) की आवश्यकता पर जोर दिया।

दोनों पक्षों ने यह सहमति व्यक्त की कि गैर-संवेदनशील औद्योगिक टैरिफ श्रेणियों को अंतिम रूप देने के लिए मिलकर काम करेंगे। साथ ही यह भी माना गया कि इस्पात, ऑटोमोबाइल, CBAM और अन्य ईयू विनियमों से संबंधित विषय अधिक संवेदनशील हैं और उन पर आगे चर्चा की आवश्यकता है।

भारत यूरोपीय संघ के साथ घनिष्ठ सहयोग के माध्यम से इस साझा दृष्टिकोण को साकार करने की आशा रखता है — ऐसा सहयोग जो नवाचार, संतुलित और सार्थक व्यापार, तथा शांति और समृद्धि के सामूहिक संकल्प पर आधारित हो। इन चर्चाओं को आगे बढ़ाने के लिए, यूरोपीय संघ की तकनीकी टीम, व्यापार महानिदेशक (Director General for Trade) के नेतृत्व में, अगले सप्ताह भारत का दौरा करेगी ताकि बीते दो दिनों में पहचाने गए संभावित समाधानों के आधार पर रचनात्मक निष्कर्ष तक पहुँचा जा सके।

NITI आयोग ने जारी किया Trade Watch Quarterly Q4 FY 2024-25 का नवीनतम संस्करण

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नई दिल्ली-NITI आयोग के CEO बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम ने आज नई दिल्ली में वित्तीय वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही (जनवरी से मार्च) के लिए Trade Watch Quarterly का नवीनतम संस्करण जारी किया।

सुब्रह्मण्यम ने कहा कि यह रिपोर्ट भारत के व्यापार प्रदर्शन का गहन मूल्यांकन प्रस्तुत करती है, जिसमें वस्त्र और सेवाओं के रुझान, वैश्विक मांग में बदलाव और निर्यात विविधीकरण की संभावनाओं को रेखांकित किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत को उच्च मांग वाले वैश्विक बाजारों में विविधता लाने की आवश्यकता है।

इस संस्करण में विशेष रूप से लेदर और फुटवियर सेक्टर पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसमें इसके रोजगार सृजन क्षमता, निर्यात संभावनाएँ और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की जरूरत को उजागर किया गया है।

Q4 FY’25 में भारत का व्यापार प्रदर्शन:

  • कुल व्यापार: $441 बिलियन, वर्ष-दर-वर्ष 2.2% की वृद्धि।

  • मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स में हल्की गिरावट, मुख्य रूप से मिनरल फ्यूल और ऑर्गेनिक केमिकल्स में कमी के कारण।

  • सिक्टर में वृद्धि: इलेक्ट्रिकल मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स और अनाज में स्वस्थ वृद्धि।

  • इंपोर्ट्स: मामूली वृद्धि, मुख्य रूप से न्यूक्लियर रिएक्टर, इलेक्ट्रिकल मशीनरी और इनऑर्गेनिक केमिकल्स की मांग बढ़ने के कारण।

  • क्षेत्रीय रुझान: उत्तर अमेरिका सबसे मजबूत निर्यात बाजार, 25% की वृद्धि, भारत के कुल निर्यात का एक चौथाई; EU, GCC और ASEAN की निर्यात वृद्धि सामान्य रही।

  • आयात: UAE रूस को पीछे छोड़कर भारत का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना, मुख्य रूप से CEPA के तहत सोने के आयात के कारण; चीन से इलेक्ट्रॉनिक्स की मजबूत मांग के कारण आयात बढ़ा।

लेदर और फुटवियर सेक्टर का आकलन:

  • रोजगार: 44 लाख लोग।

  • वैश्विक निर्यात में योगदान: महत्वपूर्ण।

  • वैश्विक बाजार हिस्सेदारी: केवल 1.8% ($296 बिलियन बाजार में)।

  • रुझान: गैर-लेदर और टिकाऊ उत्पादों की मांग बढ़ रही है।

  • अवसर: MSMEs को सशक्त करना, R&D में निवेश, हरित और डिज़ाइन-ड्रिवेन वैल्यू चेन में तालमेल।

सुब्रह्मण्यम ने कहा कि सेवाओं का निर्यात, एयरोस्पेस और उच्च-मूल्य वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भारत की व्यापार लचीलापन को बढ़ा रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि भारत को बदलती मांग के अनुरूप तेजी से अनुकूलित, निर्यात आधार में विविधता लाना और वैश्विक वैल्यू चेन में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना आवश्यक है, साथ ही भू-राजनीतिक बदलावों पर भी सतर्क रहना होगा।

रिपोर्ट डाउनलोड लिंक: Trade Watch Quarterly Q4 FY25


भारतीय विदेश व्यापार संस्थान ने वाणिज्य विभाग के अधिकारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ता कार्यक्रम का किया उद्घाटन

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भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (IIFT) ने आज वाणिज्य विभाग (DOC) के अधिकारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ता कार्यक्रम का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम IIFT के सेंटर फॉर इंटरनेशनल नेगोशिएशंस (CIN) द्वारा आयोजित किया गया है और इसका उद्देश्य सरकारी अधिकारियों के वार्ता कौशल को मजबूत करना और भारत की वैश्विक व्यापार भागीदारी को सशक्त बनाना है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वाणिज्य सचिव, सुनील बार्थवाल उपस्थित थे। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने संस्थागत क्षमता निर्माण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “यह कार्यक्रम सभी प्रासंगिक विषयों को विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में प्रस्तुत करता है। IIFT ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वार्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और हम सभी प्रतिभागियों को इस अनोखे शैक्षणिक अनुभव के लिए शुभकामनाएँ देते हैं।”

IIFT के कुलपति प्रो. राकेश मोहन जोशी ने संस्थान की उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “आज IIFT लिंक्डइन और NIRF में शीर्ष रैंकिंग प्राप्त करता है, और संस्थान में प्लेसमेंट ₹1.23 करोड़ तक पहुँच चुके हैं। हाल ही में हमने काकिनाडा और GIFT सिटी में नए कैंपस खोले हैं। हमारे दुबई कैंपस को वाणिज्य, शिक्षा और गृह मंत्रालय, UGC और दुबई सरकार से मंजूरी मिल चुकी है और यह शीघ्र शुरू होगा। हम द्विपक्षीय व्यापार और FTA पर 30 केस स्टडी विकसित कर रहे हैं। भारत–यूके FTA और CETA जैसी दो प्रमुख FTAs यह दर्शाती हैं कि कठिन परिस्थितियों में भी भारत जटिल व्यापार परिदृश्यों में कैसे सफलतापूर्वक बातचीत कर सकता है।”

CIN और MDP के प्रमुख तथा कार्यक्रम निदेशक, रोहित मेहतानी ने कहा कि यह कार्यक्रम वाणिज्य सचिव की दृष्टि को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा, “यह कार्यक्रम सरकारी अधिकारियों की अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ता के जटिल क्षेत्र में क्षमता निर्माण के लिए IIFT की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रतिभागी बहुपक्षीय और द्विपक्षीय मंचों पर अधिक प्रभावी ढंग से बातचीत करने के लिए व्यावहारिक अंतर्दृष्टि और उपकरण प्राप्त करेंगे।”

यह पहल भारत के प्रमुख व्यापार-संबंधी प्रशिक्षण, अनुसंधान और नीति समर्थन संस्थान के रूप में IIFT की निरंतर भूमिका को रेखांकित करती है।

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