Media24Media.com: #HealthcareExcellence

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #HealthcareExcellence. Show all posts
Showing posts with label #HealthcareExcellence. Show all posts

सिम्स में पहली बार 78 वर्षीय महिला के अंडाशय कैंसर की सफल सर्जरी

No comments Document Thumbnail

एक किलो का ट्यूमर निकाल महिला को दिया नया जीवन

रायपुर- छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एक अत्यंत जटिल और उच्च जोखिम वाली सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। सिम्स के डॉक्टरों ने दर्रीघाट (बिलासपुर) निवासी 78 वर्षीय बुजुर्ग महिला के बाएं अंडाशय से लगभग 1 किलोग्राम वजन का कैंसरयुक्त ट्यूमर सुरक्षित बाहर निकालकर उन्हें नया जीवन प्रदान किया है।

आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरा इलाज और जटिल ऑपरेशन हुआ बिल्कुल मुफ्त 

निजी अस्पताल ने बताया था 3 लाख का खर्च, आयुष्मान योजना से मुफ्त हुआ इलाज, मरीज पिछले 5-6 महीनों से पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द और तेजी से बढ़ रही गांठ से पीड़ित थीं। परिजन पहले उन्हें एक निजी अस्पताल ले गए थे, जहां जांच के बाद ऑपरेशन व इलाज के लिए 2 से 3 लाख रुपये का खर्च बताया गया। आर्थिक तंगी के कारण परिवार चिंतित था। इसके बाद मरीज को सिम्स, बिलासपुर में भर्ती कराया गया, जहां आयुष्मान भारत योजना के तहत उनका पूरा इलाज और जटिल ऑपरेशन बिल्कुल मुफ्त किया गया।

15×12×10 सेमी का विशाल ट्यूमर और 3 अगस्त को सफल सर्जरी

सोनोग्राफी जांच में रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने पाया कि मरीज के बाएं अंडाशय में 15×12×10 सेंटीमीटर आकार का विशाल ट्यूमर था, जो आसपास के अंगों पर भारी दबाव डाल रहा था। इसके बाद बहुविषयक विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने 3 अगस्त 2026 को कैंसर की चरण निर्धारण शल्य चिकित्सा, ट्यूमर भार कम करने, गर्भाशय एवं दोनों अंडाशयों को निकालने, बाईं मूत्रवाहिनी की मरम्मत और उसमें श्डबल-जे स्टेंटश् प्रत्यारोपण जैसी बेहद जटिल प्रक्रियाओं को सफलता पूर्वक पूरा किया।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने हासिल की सफलता

इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में विभिन्न विभागों की टीमों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। गायनेकोलॉजिकल सर्जरी टीम के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. संगीता रमन जोगी, डॉ. दीपिका, डॉ. सौम्या और डॉ. वर्षा, जनरल सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. रघुराज सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. बी. डी. तिवारी और डॉ. गरिमा और एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. बी. रायजादा, डॉ. एस. कुजूर और डॉ. एम. देववर्मा का इस सफल आपरेशन में का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

डॉक्टरों ने बताया अत्यंत दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण मामला

सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बताया कि रजोनिवृत्ति के बाद इस आकार का कैंसर ट्यूमर होना बेहद दुर्लभ और जोखिम भरा होता है। ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव और आंत व मूत्राशय जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। हालांकि, डॉक्टरों के सटीक संज्ञाहरण प्रबंधन और उच्च स्तरीय कौशल से मरीज का सुरक्षित ऑपरेशन संपन्न हुआ। मरीज की हालत संतोषजनक है और वे डॉक्टरों की निगरानी में स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं। मरीज के परिजनों ने जीवनरक्षक मुफ्त इलाज के लिए सिम्स प्रबंधन और डॉक्टरों का आभार जताया है।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने तिरुवनंतपुरम स्थित चित्रा तिरुनाल चिकित्सा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (SCTIMST) का दौरा किया

No comments Document Thumbnail

भारत के उपराष्ट्रपति,सी. पी. राधाकृष्णन ने आज तिरुवनंतपुरम स्थित प्रतिष्ठित चित्रा तिरुनाल चिकित्सा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (SCTIMST) का दौरा किया। यह संस्थान भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन एक राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है, जो चिकित्सा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं के एकीकृत दृष्टिकोण में अपने अग्रणी योगदानों के लिए प्रसिद्ध है।

अपने दौरे के दौरान, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने चित्रा तिरुनाल चिकित्सा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (SCTIMST) और उसके स्टार्ट-अप्स द्वारा विकसित चिकित्सा उपकरणों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। यह प्रदर्शनी अच्युत मेनन स्वास्थ्य विज्ञान अध्ययन केंद्र (AMCHSS), तिरुवनंतपुरम में आयोजित की गई थी।

संस्थान में अपने संबोधन के दौरान, उपराष्ट्रपति ने संस्थान की चिकित्सा विज्ञान और बायोमेडिकल प्रौद्योगिकी के समन्वय से राष्ट्र की सेवा के 40 वर्षों से अधिक की विरासत की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह संस्थान एक आदर्श मॉडल है, जिसकी सफलता को देश के अन्य संस्थान अपनाने की आकांक्षा रखते हैं। उन्होंने संस्थान की स्वदेशी चिकित्सा उपकरण विकास में उपलब्धियों की प्रशंसा की — जैसे कम लागत वाली चित्रा हृदय वाल्व, चित्रा ब्लड बैग, और क्षय रोग की त्वरित निदान जांच (spot diagnostic tests for TB), जिन्हें वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त हुई है।

राधाकृष्णन ने संस्थान की पेटेंट आवेदन, डिजाइन पंजीकरण और सफल तकनीकी हस्तांतरण (technology transfer) की सराहना करते हुए कहा कि अनुसंधान और नवाचार (Research & Innovation) भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक प्रमुख स्तंभ हैं, जैसा कि “विकसित भारत @2047” की परिकल्पना में अभिव्यक्त है। उन्होंने शोधकर्ताओं से आग्रह किया कि वे अपने अनुसंधान का दायरा बढ़ाएँ, ताकि समाज के वंचित वर्गों तक भी इसका लाभ पहुँचे और सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न हो।

सी. पी. राधाकृष्णन ने हाल ही में उद्घाटित प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) के तहत निर्मित नौ-मंजिला अस्पताल ब्लॉक का भी निरीक्षण किया। उन्होंने इस नए अस्पताल भवन की सराहना की, जिसमें उच्च स्तरीय चिकित्सा अवसंरचना जैसे आधुनिक ऑपरेशन थियेटर, कैथ लैब, सीटी स्कैनर और विस्तारित आईसीयू सुविधाएँ सम्मिलित हैं।

इस अवसर पर केरल के राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस एवं पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी , केरल सरकार के वित्त मंत्री के. एन. बालगोपाल, SCTIMST के निदेशक डॉ. संजय बिहारी, तथा संस्थान के कुलपति, निदेशकगण और वैधानिक निकायों के सदस्य उपस्थित रहे।


लेफ्टिनेंट जनरल अविनाश दास ने संभाला सेना अस्पताल (अनुसंधान एवं संदर्भ), नई दिल्ली के कमांडेंट का पदभार

No comments Document Thumbnail

लेफ्टिनेंट जनरल अविनाश दास, जो लगभग चार दशकों के अनुभव वाले एक कुशल ईएनटी सर्जन हैं, ने 1 नवंबर 2025 को सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं (AFMS) के प्रतिष्ठित संस्थान सेना अस्पताल (अनुसंधान एवं संदर्भ), नई दिल्ली के कमांडेंट के रूप में कार्यभार ग्रहण किया।

लेफ्टिनेंट जनरल दास आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज (AFMC), पुणे के पूर्व छात्र हैं और उनके पास चिकित्सा विशेषज्ञता, प्रशासनिक दक्षता और नेतृत्व का व्यापक अनुभव है। अपने शानदार करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है, जिनमें बेस हॉस्पिटल, दिल्ली कैंट और कमांड हॉस्पिटल, लखनऊ में वरिष्ठ सलाहकार (Senior Advisor) के रूप में सेवाएँ शामिल हैं।

उत्कृष्ट सेवा और समर्पण के लिए उन्हें सेनाध्यक्ष (COAS), मुख्य समन्वित रक्षा स्टाफ प्रमुख (CISC) तथा सैन्य क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (GOC-in-C) द्वारा प्रशस्ति पत्रों से सम्मानित किया जा चुका है।

कमांड हॉस्पिटल (नॉर्दर्न कमांड), उधमपुर के कमांडेंट के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने पूरे अस्पताल को अत्याधुनिक भवन में स्थानांतरित करने का सफल नेतृत्व किया, जिससे चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता और दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

सेना अस्पताल (अनुसंधान एवं संदर्भ) के कमांडेंट के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल अविनाश दास अब इस संस्थान को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका लक्ष्य मरीजों की देखभाल में उत्कृष्टता, चिकित्सा अनुसंधान में नवाचार और चिकित्सा शिक्षा को और सशक्त बनाना है, ताकि यह अस्पताल सशस्त्र बलों और देश दोनों के लिए चिकित्सा उत्कृष्टता का प्रतीक बना रहे।

स्वास्थ्य मंत्री के गृह ग्राम की ऐतिहासिक उपलब्धि : जिले के खड़गवां सीएचसी को मिला ISO प्रमाणपत्र

No comments Document Thumbnail

रायपुर-छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई उपलब्धि दर्ज करते हुए सरगुजा संभाग का पहला ISO प्रमाणित कोल्ड चेन प्वाइंट बनने का गौरव मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खड़गवां ने हासिल किया है। यह उपलब्धि स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के गृह ग्राम खड़गवां में उनके सतत प्रयासों और दिशा-निर्देशों के परिणाम स्वरूप संभव हुई है। वहीं इस सफलता के पीछे सीएमएचओ डॉ. अविनाश खरे के कुशल मार्गदर्शन और स्वास्थ्य विभाग की समर्पित टीम की निरंतर मेहनत का अहम योगदान रहा।

कोल्ड चेन प्वाइंट खड़गवां को गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली की आवश्यकताओं के पूर्ण अनुपालन में पाया गया है, जिसके चलते इसे ISO सर्टिफिकेशन प्रदान किया गया है। यह प्रमाणपत्र स्वास्थ्य सेवाओं में उत्कृष्ट प्रबंधन, पारदर्शिता और दक्षता का प्रतीक माना जा रहा है। इस प्रमाणन के साथ खड़गवां सीएचसी ने टीकों और रसद के सुरक्षित, वैज्ञानिक और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुरूप भंडारण की नई मिसाल कायम की है। यहां सभी टीके CFC मुक्त और WHO प्रमाणित CCE तिथि वाले उपकरणों में अनुशंसित तापमान पर सुरक्षित रखे जाते हैं। आरआई टीकों और रसद की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावी बनाने के लिए ईवीआईएन (eVIN) के माध्यम से ऑनलाइन वास्तविक समय में स्टॉक अपडेट किया जाता है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में वृद्धि हुई है। 

दिन में दो बार तापमान दर्ज कर टीकों की प्रभावकारिता सुनिश्चित की जाती है, वहीं वेब-आधारित डेटा लॉगर प्रणाली से उच्चस्तरीय सतत निगरानी भी की जाती है।

टीकों की आपूर्ति में FIFO (First In First Out) ) और  EEFO (Earliest Expiry First Out) दिशानिर्देशों का पालन किया जाता है, जिससे शून्य अपव्यय (Zero Wastage) सुनिश्चित हो रहा है। इसके अलावा, आवश्यकतानुसार VVM  (Vaccine Vial Monitor) आधारित आपूर्ति प्रणाली भी लागू की गई है।

टीकों के भंडारण हेतु एक अलग ICE Pack Conditioning Area,  निर्बाध बिजली आपूर्ति व्यवस्था, उचित रैंकिंग सिस्टम वाला सूखा भंडारण क्षेत्र, और प्रशिक्षित व दक्ष मानव संसाधन की उपलब्धता से यह केंद्र सरगुजा संभाग का मॉडल स्वास्थ्य संस्थान बन गया है। कोल्ड चेन प्वाइंट में  NCCMIS सॉफ्टवेयर के माध्यम से उपकरणों का सटीक प्रबंधन किया जा रहा है, साथ ही टीकाकरण अपशिष्ट निपटान प्रणाली को भी वैज्ञानिक और पर्यावरण हितैषी तरीके से अपनाया गया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने एम्स नई दिल्ली के 50वें दीक्षांत समारोह में युवा चिकित्सकों को सेवा, नैतिकता और नवाचार के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा ने आज नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के 50वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।

अपने संबोधन में मंत्री नड्डा ने सभी स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि AIIMS ने चिकित्सा विज्ञान, शिक्षा और रोगी देखभाल के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान दिया है। उन्होंने युवा डॉक्टरों से आग्रह किया कि वे सहानुभूति के साथ सेवा करें, उच्चतम नैतिक मानकों को बनाए रखें और नवाचार के माध्यम से देश की बदलती स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करें।

AIIMS, नई दिल्ली की सराहना करते हुए मंत्री नड्डा ने कहा, “चिकित्सा विज्ञान, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में AIIMS ने न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है।” उन्होंने संस्थान की चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और रोगी सेवा में उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता की प्रशंसा की।

मंत्री नड्डा ने पिछले एक दशक में भारत के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां पिछली सदी के अंत तक भारत में केवल एक AIIMS था, वहीं आज देशभर में 23 AIIMS संस्थान कार्यरत हैं, जो गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा प्रशिक्षण को हर क्षेत्र तक पहुँचाने के सरकार के संकल्प को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 819 हो गई है। इसी तरह, एमबीबीएस सीटें 51,000 से बढ़कर 1,29,000 और पीजी सीटें 31,000 से बढ़कर 78,000 हो गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगले पांच वर्षों में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर अतिरिक्त 75,000 सीटें जोड़ी जाएंगी।

स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी बताया कि भारत ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार किया है — मातृ मृत्यु दर (MMR) 130 से घटकर 88, शिशु मृत्यु दर (IMR) 39 से घटकर 27 हो गई है। 5 वर्ष से कम आयु मृत्यु दर (U5MR) और नवजात मृत्यु दर (NMR) में भी क्रमशः 42% और 39% की कमी आई है, जो वैश्विक औसत से बेहतर है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत में टीबी के मामलों में 17.7% की कमी आई है, जो वैश्विक दर 8.3% से दोगुनी है — जैसा कि द लैंसेट रिपोर्ट में बताया गया है।

अपने समापन भाषण में मंत्री नड्डा ने छात्रों से आग्रह किया कि वे शिक्षा और अनुसंधान में सक्रिय योगदान दें और AIIMS की गौरवशाली परंपरा और प्रतिष्ठा को बनाए रखें। उन्होंने उन्हें आजीवन सीखने वाले और नवोन्मेषी बनने की प्रेरणा दी, ताकि वे चिकित्सा विज्ञान को आगे बढ़ाते हुए समाज की सेवा कर सकें।

इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. वी. के. पॉल ने कहा, “हम पर समाज के प्रति गहरी जिम्मेदारी है, जिसने हमें संवारने का अवसर दिया। जैसे-जैसे आप आगे बढ़ें, उत्कृष्टता को अपनी आदत बनाएं और नवाचार को अपना मार्गदर्शक सिद्धांत।”

उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अकादमिक क्षेत्र में आएं, ताकि वे अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य पेशेवरों को शिक्षित, मार्गदर्शन और प्रेरित कर सकें, जिससे ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में योगदान हो सके।

इस समारोह में कुल 326 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें 50 पीएच.डी. विद्वान, 95 डीएम/एम.सी.एच. विशेषज्ञ, 69 एम.डी., 15 एम.एस., 4 एम.डी.एस., 45 एम.एससी., 30 एम.एससी. (नर्सिंग) और 18 एम.बायोटेक स्नातक शामिल थे। इसके अलावा, AIIMS में उत्कृष्ट सेवा और योगदान के लिए सात डॉक्टरों को आजीवन उपलब्धि पुरस्कार (Lifetime Achievement Award) से सम्मानित किया गया।


आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय सम्मान

No comments Document Thumbnail

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के क्रियान्वयन उत्कृष्ट कार्य हुआ है। पिछले जनवरी 2025 छत्तीसगढ़ इस योजना के क्रियान्वयन में देश में सबसे पिछले पायदान पर था, लेकिन मुख्यमंत्री साय की सतत मॉनीटरिंग के बाद पिछले नौ माह में छत्तीसगढ़ आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के क्रियान्वयन में देश में पहले पायदान पर आ गया है। भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण कॉन्क्लेव में छत्तीसगढ़ को श्रेष्ठ प्रदर्शन राज्य का सम्मान प्रदान किया गया है।

यह सम्मान राज्य के अथक प्रयासों और स्वास्थ्य क्षेत्र में अनुकरणीय कार्यशैली का प्रमाण है। सम्मान देने के मुख्य कारण पहचान किए गए सभी मुद्दों पर गहन फील्ड ऑडिट का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। आयुष्मान योजना के दावा प्रक्रिया में टर्नअराउंड टाइम को उल्लेखनीय रूप से घटाया गया, जिससे लाभार्थियों को त्वरित सेवाएं मिलीं। सभी संबंधित हितधारकों की विस्तृत संवेदनशीलता और जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन कर उन्हें जागरूक बनाया गया। एनएचए की पैनल्ड स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के साथ प्रभावी संचार तंत्र स्थापित कर समन्वय को बेहतर किया गया। छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास राज्य के नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मील का पत्थर साबित हुआ है। मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की इस उपलब्धि के लिए स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को बधाई दी है। 

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना भारत सरकार की एक स्वास्थ्य बीमा योजना है, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करती है। यह योजना सार्वजनिक और निजी अस्पतालों में द्वितीयक और तृतीयक देखभाल के लिए है और इसका उद्देश्य परिवारों पर स्वास्थ्य खर्च के बोझ को कम करना है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने AIIMS बिलासपुर के 3वें स्थापना दिवस समारोह में की अध्यक्षता

No comments Document Thumbnail

बिलासपुर- केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज हिमाचल प्रदेश में AIIMS बिलासपुर के तीसरे स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस अवसर पर अनुराग ठाकुर (लोकसभा सांसद), हर्ष महाजन (राज्यसभा सांसद), जय राम ठाकुर (पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्षी नेता हिमाचल प्रदेश) और कोल. डॉ. धनी राम शांदिल (स्वास्थ्य मंत्री, हिमाचल प्रदेश) भी उपस्थित थे।

जगत प्रकाश नड्डा ने कहा, “उन्नत MRI, CT स्कैनर, PET-CT, एंडोस्कोपी और ब्रोंकोस्कोपी जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ, केवल तीन वर्षों में AIIMS बिलासपुर ने उल्लेखनीय प्रगति की है। आसपास के राज्यों के लोग भी यहां इलाज के लिए आ रहे हैं, जो इस संस्थान में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।”

उन्होंने सरकार की गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं प्रदान करने की प्रतिबद्धता को दोहराया और न्यूक्लियर मेडिसिन, कैंसर केयर और रीनल ट्रांसप्लांट्स में महत्वपूर्ण उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले लोग PGI चंडीगढ़ तक यात्रा करते थे, लेकिन अब AIIMS बिलासपुर क्षेत्र की उच्च स्तरीय चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करता है।

चिकित्सा शिक्षा पर ध्यान देते हुए मंत्री ने बताया कि AIIMS बिलासपुर के लिए हाल ही में 127 पदों को मंजूरी दी गई है, जिनमें 29 फैकल्टी और 98 नॉन-फैकल्टी पद शामिल हैं। चयन समिति एक वर्ष तक सक्रिय रहेगी और कम से कम चार साक्षात्कार दौर आयोजित कर इन पदों को शीघ्र भरने के लिए प्रतिबद्ध है।

मंत्री ने 500-बेड विश्राम सदन की योजना की घोषणा की ताकि दूरदराज से आने वाले मरीजों के लिए आवास सुनिश्चित किया जा सके। इसके अतिरिक्त, ₹165 करोड़ आवासीय क्वार्टर और छात्रावास निर्माण के लिए तथा ₹5 करोड़ इनडोर स्टेडियम के निर्माण के लिए स्वीकृत किए गए हैं।

AIIMS ब्रांड की प्रतिष्ठा बनाए रखने पर जोर देते हुए उन्होंने अन्य AIIMS संस्थानों की सफलताओं को दोहराने और नई नवाचार पहलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने NITI आयोग और भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के सहयोग से एक टीम के गठन की भी घोषणा की, जो सभी AIIMS संस्थानों का दौरा करेगी और भविष्य की विकास योजना बनाएगी।

जगत प्रकाश नड्डा ने पिछले 11 वर्षों में चिकित्सा शिक्षा में वृद्धि पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश में अब 808 मेडिकल कॉलेज हैं और वार्षिक UG सीटें 35,000 से बढ़कर 1.25 लाख हो गई हैं। पिछले कैबिनेट में प्रधानमंत्री ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 5,000 नई UG और PG सीटों को मंजूरी दी थी। अगले पांच वर्षों में अतिरिक्त 75,000 मेडिकल सीटें सरकारी संस्थानों में उपलब्ध कराई जाएंगी।

कार्यक्रम के दौरान AIIMS बिलासपुर का कुलगीत जारी किया गया, जो संस्थान की भावना और मूल्यों का प्रतीक है। इसके अलावा, उपलब्धियों के लिए विशेष पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया, जिसमें उत्कृष्ट छात्रों को सम्मानित किया गया।

AIIMS बिलासपुर की प्रमुख विशेषताएँ:

  • अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक्स: 1.5 टेस्ला MRI, 128-SLICE CT स्कैनर, PET-CT, SPECT-CT और रेडियोन्यूक्लाइड थेरेपी।

  • विशेषीकृत देखभाल: कैंसर ट्रीटमेंट, रेडियोथेरेपी, ऑनकोलॉजी यूनिट और फंक्शनल कैथ लैब।

  • आपातकालीन सेवाएँ: 64 ICU बिस्तर, ब्रोंकोस्कोपी सुइट, LMO प्लांट से निरंतर ऑक्सीजन।

  • ट्रांसप्लांट और सर्जरी: 8 सफल किडनी ट्रांसप्लांट, शीघ्र ही कॉर्नियल ट्रांसप्लांट यूनिट।

  • शोध और प्रयोगशालाएँ: एंडोक्राइनोलॉजी और इम्यूनोलॉजी लैब, क्षेत्रीय वायरल रिसर्च और डायग्नोस्टिक लैब (₹19.83 करोड़)।

  • मरीज सहायता: 3 अमृत/जन औषधि फार्मेसियाँ, 250-बेड विश्राम सदन निर्माणाधीन।

  • शिक्षा और प्रशिक्षण: आधुनिक लेक्चर हॉल, सिमुलेशन और स्किल लैब।

  • इन्फ्रास्ट्रक्चर: छात्रावास (540+ क्षमता), आवासीय क्वार्टर, रूफटॉप सोलर, इनडोर स्टेडियम।

भविष्य की योजनाओं में बोन मैरो ट्रांसप्लांट ब्लॉक, ऑटोप्सी ब्लॉक, ट्रॉमा एवं क्रिटिकल केयर सेंटर, रोबोटिक सर्जरी यूनिट और ड्रोन-आधारित हेल्थकेयर लॉजिस्टिक्स शामिल हैं।

इस अवसर पर अंकिता मिश्रा बुंदेला (संयुक्त सचिव PMSSY), प्रो. नरेंद्र कुमार अरोड़ा (अध्यक्ष AIIMS बिलासपुर), प्रो. दयानंद शर्मा (कार्यकारी निदेशक AIIMS बिलासपुर) और ले. कर्नल परांजपे (रजिस्ट्रार) सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.