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पेशेवर सेवाओं के वैश्विक विस्तार के लिए सुधार और समन्वय जरूरी: वाणिज्य सचिव

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वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भारतीय पेशेवर सेवाओं के लिए वैश्विक बाजारों को खोलने हेतु हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय, घरेलू इकोसिस्टम में सुधार और विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) के तहत पेशेवर सेवाओं पर कानूनी रूप से बाध्यकारी प्रतिबद्धताओं के महत्व पर जोर दिया। वे पेशेवर सेवाओं पर आयोजित एक चिंतन शिविर का उद्घाटन कर रहे थे।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत वाणिज्य विभाग (DoC) ने भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) और सेवा निर्यात संवर्धन परिषद (SEPC) के सहयोग से “वैश्विक क्षितिज का विस्तार: भारतीय पेशेवरों के लिए अवसर” विषय पर यह चिंतन शिविर 23 दिसंबर 2025 को वाणिज्य भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया। इस अवसर पर वाणिज्य सचिव ने भारत की आर्थिक वृद्धि में सेवा व्यापार के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वस्तु निर्यात की तुलना में घरेलू मूल्य संवर्धन में सेवाओं का योगदान कहीं अधिक है।

अग्रवाल ने कहा कि भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश वैश्विक स्तर पर पेशेवर सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने की अपार क्षमता रखता है। इस क्षमता को साकार करने के लिए वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना और पेशेवरों को बदलती वैश्विक बाजार आवश्यकताओं तथा तकनीकी विकास के अनुरूप उन्नत कौशल से सुसज्जित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में पेशेवर सेवाओं के लिए अधिक खुलापन भारत की अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा। उन्होंने पेशेवर निकायों से अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के आयोजन और उनमें भागीदारी के माध्यम से ज्ञान साझा करने तथा सहयोग के नए मंच विकसित करने का आह्वान किया।

वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव दर्पण जैन ने चिंतन शिविर की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की। क्षेत्रीय दृष्टिकोण ICAI के अध्यक्ष सीए चरणजोत सिंह नंदा, भारतीय नर्सिंग परिषद (INC) के अध्यक्ष डॉ. टी. दिलीप कुमार तथा काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर (CoA) के अध्यक्ष प्रो. अभय विनायक पुरोहित द्वारा रखे गए। ICAI के उपाध्यक्ष सीए प्रसन्न कुमार डी और SEPC की अध्यक्ष डॉ. उपासना अरोड़ा ने भी उद्घाटन सत्र में प्रतिभागियों को संबोधित किया।

चिंतन शिविर को चार सत्रों में विभाजित किया गया:

(क) वैश्विक स्तर पर सक्षम पेशेवरों का निर्माण,
(ख) एमआरए और एमओयू के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता को सुदृढ़ करना,
(ग) नेटवर्क का विकास – विदेशों में पेशेवर अध्यायों का गठन और विस्तार,
(घ) पेशेवर सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने हेतु एफटीए का उपयोग।

इस चिंतन शिविर ने पेशेवर निकायों को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं और भारत में अपनाई जा रही प्रक्रियाओं पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान किया। उन क्षेत्रों की पहचान की गई जहां पेशेवर निकायों द्वारा पेशेवर अभ्यास से जुड़े मौजूदा नियमों और विनियमों की पुनः समीक्षा कर प्रशिक्षण और कौशल उन्नयन कार्यक्रमों में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं, ताकि वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीक में हो रहे बदलावों के अनुरूप हों।

इस संदर्भ में ICAI के प्लेबुक की व्यापक सराहना की गई, जिसमें अध्यायों, अंतरराष्ट्रीय निदेशालय और प्रौद्योगिकी व एआई पर केंद्रित प्रमाणन पाठ्यक्रमों सहित मजबूत और बाजारोन्मुख बुनियादी ढांचे का उल्लेख किया गया। अन्य पेशेवर निकायों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में इस मॉडल को अपनाने की संभावनाओं पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। भारतीय नर्सिंग परिषद द्वारा भारतीय नर्सों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच दिलाने के प्रयासों की सराहना की गई, विशेषकर स्वास्थ्य क्षेत्र में विकसित देशों की नियामक चुनौतियों को देखते हुए। उच्च गुणवत्ता वाले सिमुलेशन लैब, उत्कृष्टता केंद्र और भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसी अच्छी प्रथाओं की भी प्रशंसा की गई।

म्यूचुअल रिकग्निशन एग्रीमेंट्स (MRAs) पर चर्चा के दौरान एमआरए में प्रवेश से जुड़ी चुनौतियों और मौजूदा एमआरए के प्रभावी उपयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। एमआरए की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए स्पष्ट परिणाम आधारित मानकों की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इसके साथ ही, भारत के क्षेत्रीय नियामक ढांचे को ‘रिकग्निशन-रेडी’ बनाने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। डिजिटल सेवाओं और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के तेजी से विस्तार के संदर्भ में भारत की भविष्य की पेशेवर सेवा निर्यात रणनीति में एमआरए की भूमिका पर भी विचार किया गया।

एफटीए के उपयोग पर चर्चा में पेशेवर सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी को भविष्य के अनुरूप बनाने, पेशेवरों की गतिशीलता से जुड़े प्रावधानों तथा योग्यता आवश्यकताओं और प्रक्रियाओं से संबंधित घरेलू नियमों पर ध्यान केंद्रित किया गया। भारत में विदेशी पेशेवरों के लिए अधिक खुलापन अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया ताकि सभी के लिए लाभकारी परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें। डेटा गोपनीयता और संरक्षण से जुड़े मुद्दों तथा भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों की शाखाएं स्थापित होने से उत्पन्न अवसरों पर भी चर्चा हुई।

चिंतन शिविर में हुई चर्चाओं के आधार पर, वाणिज्य विभाग संबंधित हितधारकों के सहयोग से चिन्हित कार्य बिंदुओं को आगे बढ़ाएगा, ताकि भारतीय पेशेवर सेवाओं को वैश्विक स्तर पर विस्तार के लिए आवश्यक प्रोत्साहन मिल सके।

खाद्य खुराक 2025, गांधीनगर में जी20 सफलताओं का प्रदर्शन कर रहा है एपीडा

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भारत की लॉजिस्टिक्स लागत GDP के 7.97% तक घटी

IPRS 3.0, जिसे एशियाई विकास बैंक के साथ विकसित किया गया है, औद्योगिक पार्कों को स्थिरता, हरित बुनियादी ढाँचा, कनेक्टिविटी, डिजिटल तत्परता और कौशल विकास के आधार पर रेटिंग देता है।
SMILE कार्यक्रम के तहत 8 राज्यों के 8 पायलट शहरों में लॉजिस्टिक्स योजनाएँ शुरू की गई हैं, ताकि मौजूदा लॉजिस्टिक्स अवसंरचना का आकलन किया जा सके और दक्षता बढ़ाते हुए लागत कम की जा सके।

भारत की लॉजिस्टिक्स कहानी का नया अध्याय

भारत का लॉजिस्टिक्स क्षेत्र एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है और खुद को तेज, स्मार्ट और वैश्विक प्रतिस्पर्धी प्रणाली में बदल रहा है। एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म जो माल ढुलाई को सरल बनाते हैं, आधुनिक अवसंरचना जो देश के हर हिस्से को जोड़ती है — इन सबके माध्यम से अगली पीढ़ी का लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम तेजी से आकार ले रहा है। लक्षित नीति सुधारों, संस्थागत पुनर्गठन और तकनीक-आधारित समाधानों के साथ सरकार लॉजिस्टिक्स को भारत की आर्थिक वृद्धि और वैश्विक व्यापार स्थिति का प्रमुख इंजन बना रही है।

संरचनात्मक बदलावों की श्रृंखला इस बात को बदल रही है कि देशभर में लॉजिस्टिक्स की योजना कैसे बनाई जाती है, उसे कैसे लागू किया जाता है और कैसे बढ़ाया जाता है।
ULIP (Unified Logistics Interface Platform) जैसे प्लेटफ़ॉर्म विभागों के बीच डेटा को एकीकृत कर रहे हैं, जबकि LDB (Logistics Data Bank) 2.0 लाखों कंटेनरों की वास्तविक समय निगरानी प्रदान करता है।
हर HSN कोड को उसकी संबंधित लाइन मंत्रालय से जोड़ा गया है, जिससे जवाबदेही और नीति निर्माण दोनों मजबूत हुए हैं।

SMILE कार्यक्रम के तहत शहर एवं राज्य स्तर की लॉजिस्टिक्स योजनाएँ राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप लाई जा रही हैं।
पिछले वर्ष अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से 145.84 मिलियन टन कार्गो का रिकॉर्ड परिवहन हुआ। रेल जाम को समर्पित मालवाहक गलियारों से कम किया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में NICDC के प्लग-एंड-प्ले पार्क निवेशकों को तैयार अवसंरचना प्रदान कर रहे हैं।

जमीनी स्तर पर, GST और ई-वे बिल जैसी सुधारों ने अंतरराज्यीय परिवहन से दशकों पुरानी रुकावटों को दूर किया है।
इन हस्तक्षेपों का उद्देश्य स्पष्ट है— लॉजिस्टिक्स लागत कम करना, दक्षता बढ़ाना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करना।

गंगा के मैदान में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स

भारत गंगा के मैदान में एकीकृत मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित कर रहा है, जो सड़क, रेल और जलमार्गों को जोड़कर परिवहन को तेज, सस्ता और हरित बना रहा है।

ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC), एक उच्च गति रेल माल लाइन, ने वैगन टर्नअराउंड समय को 15–16 दिनों से घटाकर 2–3 दिन कर दिया है और ट्रांजिट समय को 60+ घंटे से घटाकर 35–38 घंटे कर दिया है।
प्रयागराज में केंद्रीय नियंत्रण केंद्र के माध्यम से माल संचालन संचालित किए जा रहे हैं।
EDFC का वाराणसी में गंगा जलमार्ग से जुड़ना निर्माताओं को हल्दिया जैसे पूर्वी बंदरगाहों तक कार्गो पहुंचाने में अधिक सुविधा दे रहा है।

वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं का तेजी से विकास रोजगार सृजन, बेहतर इनवेंटरी प्रबंधन और समयबद्ध उत्पादन एवं निर्यात में सहायता कर रहा है।
इन परियोजनाओं में विश्व बैंक द्वारा $1.96 बिलियन (EDFC और रेल लॉजिस्टिक्स) और $375 मिलियन (गंगा जलमार्ग) का निवेश शामिल है।

लॉजिस्टिक्स पहले से अधिक क्यों महत्वपूर्ण

भारत की विकास यात्रा अब कुशल लॉजिस्टिक्स पर अधिक निर्भर है।
नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी और पीएम गतिशक्ति ने इस परिवर्तन को तेज किया है। परंतु रणनीति को सटीकता की आवश्यकता होती है — और वह शुरू होती है लॉजिस्टिक्स लागत के वास्तविक आंकड़ों से।

पहली बार—
DPIIT और NCAER की व्यापक वैज्ञानिक रिपोर्ट ने भारत की लॉजिस्टिक्स लागत को GDP के 7.97% पर रखा है।

यह अध्ययन 3,500+ उद्योग हितधारकों के प्राथमिक डेटा और MOSPI, RBI, GSTN जैसे स्रोतों के द्वितीयक डेटा पर आधारित है।
रिपोर्ट का निष्कर्ष:

  • लॉजिस्टिक्स लागत: ₹24.01 लाख करोड़

  • नॉन-सर्विसेज आउटपुट के मुकाबले: 9.09%

रिपोर्ट दर्शाती है कि छोटी कंपनियों पर लॉजिस्टिक्स लागत का बोझ अधिक है।
अध्ययन विभिन्न परिवहन मोड्स के लिए प्रति टन-किमी लागत भी प्रदान करता है।

यह स्पष्ट करता है कि लगभग 600 किमी की यात्रा में पहले और अंतिम 50 किमी में सुधार से कुल लागत काफी घट सकती है।
इससे अंतिम-मील संपर्क और मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन का महत्व बढ़ जाता है।

नया इंटरैक्टिव डैशबोर्ड नीति-निर्माताओं और उद्योग दोनों को वास्तविक समय विश्लेषण और बेहतर निर्णय लेने में सक्षम बनाएगा।

2025: भारत की सप्लाई चेन को सुपरचार्ज करना

2025 में कई नई पहलें शुरू की गईं—
मापांकन, स्थानीय योजना, अवसंरचना और डेटा एकीकरण को मजबूत करने के लिए।

1. PM GatiShakti — एकीकृत योजना को गति

इस वर्ष निम्न प्रमुख लॉन्च किए गए:

  • सभी 112 आकांक्षी जिलों के लिए जिला मास्टर प्लान

  • PM GatiShakti – Offshore (समुद्री परियोजनाओं के लिए भू-स्थानिक डेटा एकीकरण)

  • PM GatiShakti Public: 230 datasets का सार्वजनिक उपयोग

  • National Master Plan Dashboard और Data Uploading System

  • Compendium Volume-3

  • LEAPS 2025 — लॉजिस्टिक्स नवाचार और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए DPIIT पहल

2. SMILE — शहर स्तर पर लॉजिस्टिक्स योजना

ADB के सहयोग से विकसित SMILE कार्यक्रम
राज्य और शहर स्तर पर लॉजिस्टिक्स को सुव्यवस्थित करता है।

8 राज्यों के 8 पायलट शहरों में—

  • ट्रंक रूट्स

  • आर्थिक गलियारे

  • लॉजिस्टिक्स गेटवे

  • शहरी माल ढुलाई

  • वेयरहाउस क्लस्टर

  • लास्ट-माइल कॉरिडोर

को एकीकृत ढंग से योजना में शामिल किया जा रहा है।

उद्देश्य:
तेज, सस्ता, स्वच्छ और संगठित शहरी लॉजिस्टिक्स प्रणाली।

3. LEADS 2025 — राज्यों की लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस रैंकिंग

LEADS अब धारणा-आधारित और वस्तुनिष्ठ दोनों प्रकार के डेटा को जोड़कर राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों का मूल्यांकन करता है।
API-आधारित टूल्स वास्तविक समय में सड़क गति, यात्रा समय और प्रतीक्षा समय को ट्रैक करते हैं।

4. LDB 2.0 — बाजारों को गति देने वाली दृश्यता

ULIP के साथ एकीकृत LDB 2.0:

  • वास्तविक समय कंटेनर ट्रैकिंग

  • रोड, रेल, समुद्र और हाई-सीज ट्रैकिंग

  • लाइव कंटेनर देरी हीटमैप

  • कंटेनर नंबर, वाहन नंबर, रेलवे FNR से ट्रैकिंग

5. IPRS 3.0 — औद्योगिक पार्कों की रैंकिंग

IPRS 3.0 पार्कों को तीन श्रेणियों में रैंक करता है:
Leader, Challenger, Aspirer

20 प्लग-एंड-प्ले पार्क NICDC के तहत विकसित हो रहे हैं।

6. HSN कोड गाइडबुक

12,167 HSN कोड्स को 31 मंत्रालयों से मैप किया गया है, जिससे उद्योग और सरकार दोनों के लिए स्पष्टता बढ़ी है।

निष्कर्ष

लॉजिस्टिक्स अब परदे के पीछे का तंत्र नहीं है —
भारत इसे अपनी प्रतिस्पर्धात्मक ताकत में बदल रहा है।

PM GatiShakti Public/Offshore, SMILE, LEAPS 2025, LEADS 2025, IPRS 3.0, LDB 2.0 जैसी पहलों के साथ भारत अपने लॉजिस्टिक्स को लागत केंद्र से वैश्विक प्रतिस्पर्धा की शक्ति में बदल रहा है।

विकास इंजन से वैश्विक नेतृत्व की ओर यात्रा शुरू हो चुकी है।


NITI आयोग ने जारी किया Trade Watch Quarterly Q4 FY 2024-25 का नवीनतम संस्करण

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नई दिल्ली-NITI आयोग के CEO बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम ने आज नई दिल्ली में वित्तीय वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही (जनवरी से मार्च) के लिए Trade Watch Quarterly का नवीनतम संस्करण जारी किया।

सुब्रह्मण्यम ने कहा कि यह रिपोर्ट भारत के व्यापार प्रदर्शन का गहन मूल्यांकन प्रस्तुत करती है, जिसमें वस्त्र और सेवाओं के रुझान, वैश्विक मांग में बदलाव और निर्यात विविधीकरण की संभावनाओं को रेखांकित किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत को उच्च मांग वाले वैश्विक बाजारों में विविधता लाने की आवश्यकता है।

इस संस्करण में विशेष रूप से लेदर और फुटवियर सेक्टर पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसमें इसके रोजगार सृजन क्षमता, निर्यात संभावनाएँ और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की जरूरत को उजागर किया गया है।

Q4 FY’25 में भारत का व्यापार प्रदर्शन:

  • कुल व्यापार: $441 बिलियन, वर्ष-दर-वर्ष 2.2% की वृद्धि।

  • मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स में हल्की गिरावट, मुख्य रूप से मिनरल फ्यूल और ऑर्गेनिक केमिकल्स में कमी के कारण।

  • सिक्टर में वृद्धि: इलेक्ट्रिकल मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स और अनाज में स्वस्थ वृद्धि।

  • इंपोर्ट्स: मामूली वृद्धि, मुख्य रूप से न्यूक्लियर रिएक्टर, इलेक्ट्रिकल मशीनरी और इनऑर्गेनिक केमिकल्स की मांग बढ़ने के कारण।

  • क्षेत्रीय रुझान: उत्तर अमेरिका सबसे मजबूत निर्यात बाजार, 25% की वृद्धि, भारत के कुल निर्यात का एक चौथाई; EU, GCC और ASEAN की निर्यात वृद्धि सामान्य रही।

  • आयात: UAE रूस को पीछे छोड़कर भारत का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना, मुख्य रूप से CEPA के तहत सोने के आयात के कारण; चीन से इलेक्ट्रॉनिक्स की मजबूत मांग के कारण आयात बढ़ा।

लेदर और फुटवियर सेक्टर का आकलन:

  • रोजगार: 44 लाख लोग।

  • वैश्विक निर्यात में योगदान: महत्वपूर्ण।

  • वैश्विक बाजार हिस्सेदारी: केवल 1.8% ($296 बिलियन बाजार में)।

  • रुझान: गैर-लेदर और टिकाऊ उत्पादों की मांग बढ़ रही है।

  • अवसर: MSMEs को सशक्त करना, R&D में निवेश, हरित और डिज़ाइन-ड्रिवेन वैल्यू चेन में तालमेल।

सुब्रह्मण्यम ने कहा कि सेवाओं का निर्यात, एयरोस्पेस और उच्च-मूल्य वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भारत की व्यापार लचीलापन को बढ़ा रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि भारत को बदलती मांग के अनुरूप तेजी से अनुकूलित, निर्यात आधार में विविधता लाना और वैश्विक वैल्यू चेन में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना आवश्यक है, साथ ही भू-राजनीतिक बदलावों पर भी सतर्क रहना होगा।

रिपोर्ट डाउनलोड लिंक: Trade Watch Quarterly Q4 FY25


यूरोप और मध्य पूर्व में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

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नई दिल्ली- अंतरराष्ट्रीय तेल बाज़ार में एक बार फिर उथल-पुथल देखने को मिल रही है। यूरोप और मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें सोमवार को तेज़ी के साथ चढ़ गईं। विश्लेषकों का कहना है कि यदि हालात लंबे समय तक बने रहे तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर पड़ सकता है।

📈 बाज़ार की स्थिति

ब्रेंट क्रूड के दाम में शुरुआती कारोबार के दौरान लगभग 2% की बढ़ोतरी हुई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड में भी तेजी देखी गई। तेल व्यापारियों का मानना है कि तनावपूर्ण माहौल में सप्लाई बाधित होने का जोखिम सबसे बड़ा कारण है।

🌍 भू-राजनीतिक पृष्ठभूमि

  • यूरोप में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, खासकर गैस और तेल की आपूर्ति को प्रभावित करने वाली राजनीतिक खींचतान की वजह से।

  • मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष और बढ़ते सुरक्षा संकट ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। क्षेत्र में स्थिरता की कमी से तेल उत्पादन और निर्यात मार्गों पर खतरा मंडरा रहा है।

🏦 आर्थिक असर

तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकती हैं।

  • ऊर्जा आयातक देशों के लिए महंगाई और चालू खाते का घाटा बढ़ने का खतरा है।

  • परिवहन, लॉजिस्टिक्स और रोज़मर्रा की ज़रूरतों की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है।

  • भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है क्योंकि आयात बिल और भी भारी हो जाएगा।

🔎 विशेषज्ञों की राय

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि फिलहाल बाज़ार में अस्थिरता बनी रहेगी। अगर हालात और बिगड़े तो तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक भी पहुंच सकता है। ऐसे में तेल उत्पादक देशों पर दबाव है कि वे उत्पादन और आपूर्ति को संतुलित बनाए रखें।

🔮 आगे का परिदृश्य

तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक महंगाई को और भड़का सकती हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि यूरोप और मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले महीनों में वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर गंभीर असर पड़ सकता है।


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