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MoSPI द्वारा गृह सर्वेक्षणों और शिक्षा सर्वेक्षणों में निष्पक्ष और डिजिटल कवरेज सुनिश्चित

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गृह सर्वेक्षणों में निष्पक्ष कवरेज सुनिश्चित करने के लिए, जो सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा किए जा रहे हैं, नमूना चयन संभाव्यता-आधारित वैज्ञानिक चयन विधियों के माध्यम से किया जाता है। यह नमूना सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में फैला होता है और इसमें ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र दोनों शामिल होते हैं, जिससे कवरेज की समानता और पूर्णता सुनिश्चित होती है।

MoSPI ने लगातार दो गृह उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES) आयोजित किए—2022-23 (अगस्त 2022–जुलाई 2023) और 2023-24 (अगस्त 2023–जुलाई 2024)। इन सर्वेक्षणों के विस्तृत निष्कर्ष क्रमशः जुलाई 2024 और जनवरी 2025 में जारी किए गए।

MoSPI ने अप्रैल–जून 2025 के दौरान शिक्षा पर व्यापक मॉड्यूलर सर्वेक्षण (CMS) आयोजित किया, जो स्कूल शिक्षा विभाग (DoSEL), शिक्षा मंत्रालय के अनुरोध पर किया गया था। इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य गृहस्थी द्वारा स्कूल शिक्षा पर किए गए व्यय का अनुमान तैयार करना है। इसके अलावा, यह सर्वेक्षण उन छात्रों के लिए निजी कोचिंग या ट्यूशन पर किए गए व्यय का अनुमान भी तैयार करता है, जो वर्तमान में स्कूल शिक्षा में नामांकित हैं। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट अगस्त 2025 में जारी की गई।

MoSPI विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करता है, जिसमें नई तकनीकों का समेकन और मौजूदा तकनीकों का उन्नयन शामिल है, ताकि यह आकलन किया जा सके कि ये तकनीकें सर्वेक्षणों में कितनी प्रासंगिक और उपयोगी हैं। इसके अलावा, MoSPI शहरी फ्रेम सर्वेक्षण (UFS) पाँच वर्षीय चरणों में करता है, ताकि संघनित शहरी भौगोलिक इकाइयों का फ्रेम तैयार और बनाए रखा जा सके, जो शहरी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षणों के लिए सैंपलिंग फ्रेम के रूप में काम करता है।

2017-22 चरण से, UFS डिजिटल मोड में किया जा रहा है, जिसमें Geo ICT उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। इसमें मोबाइल, डेस्कटॉप और वेब आधारित GIS समाधान शामिल हैं, जिन्हें Bhuvan प्लेटफ़ॉर्म पर विकसित किया गया है, और यह राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र (NRSC) के सहयोग से तैयार किया गया है।

यह जानकारी आज राज्यसभा में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री, योजना मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री और संस्कृति मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री राव इंदरजीत सिंह द्वारा दी गई।

राष्ट्रीय NAKSHA और LandStack संगोष्ठी: शहरी भूमि रिकॉर्ड और डिजिटल संपत्ति अधिकारों में तकनीकी क्रांति

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भूमि संसाधन विभाग (DoLR), ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार 3 दिसंबर 2025 को भारत मंडप, नई दिल्ली में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन करने जा रहा है। यह संगोष्ठी GeoSmart India 2025 सम्मेलन एवं प्रदर्शनी के अंतर्गत आयोजित की जा रही है और इसका उद्देश्य शहरी भूमि रिकॉर्ड में भू-स्थानिक (Geospatial) प्रौद्योगिकियों के अपनाने को तेज करना और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाना है।

संगोष्ठी के प्रमुख आकर्षण:

  1. NAKSHA पायलट समीक्षा और विस्तार:

    157 से अधिक शहरों में सटीक भूमि मानचित्रण के लिए आधुनिक हवाई सर्वेक्षण और फीचर एक्सट्रैक्शन तकनीकों का उपयोग करने वाले NAKSHA पायलट कार्यक्रम की समीक्षा की जाएगी। इसमें तकनीकी चुनौतियों, घनी आबादी वाले क्षेत्रों में डेटा सटीकता और मौजूदा कैडस्ट्रल मैप्स के साथ संरेखण पर चर्चा होगी।

  2. भविष्य का डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र – LandStack:

    LandStack को भारत की एकीकृत डिजिटल भूमि प्रणाली के रूप में विकसित करने पर विशेष सत्र होंगे। इसमें आधारभूत परतों, कैडस्ट्रल मैप्स, भू-स्थानिक डेटा और प्रशासनिक रिकॉर्ड के एकीकरण की चुनौतियों पर विचार-विमर्श होगा।

  3. UrPro कार्ड और कानूनी ढांचा:

    UrPro कार्ड, एक भरोसेमंद डिजिटल संपत्ति दस्तावेज़, को एकीकृत करने के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कानूनी और संस्थागत संरेखण पर चर्चा होगी। इसका उद्देश्य पंजीकरण, म्यूटेशन, संपत्ति कर और भवन अनुमति प्रणाली में नागरिकों को सुरक्षित और हस्तांतरणीय डिजिटल संपत्ति अधिकार प्रदान करना है।

  4. प्रौद्योगिकी प्रदर्शन और इंटरऑपरेबिलिटी:

    WebGIS प्लेटफ़ॉर्म और क्लाउड सेवाओं का पूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें AI/ML विश्लेषण, 3D मानचित्रण और क्लाउड भू-स्थानिक सेवाओं का उपयोग कर शहरी भूमि प्रशासन में पारदर्शिता, सटीकता और जवाबदेही बढ़ाने पर चर्चा होगी।

यह संगोष्ठी सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है जिसमें पुरानी प्रणालियों को पारदर्शी, नागरिक-केंद्रित डिजिटल भूमि प्रशासन में बदलने के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है, जो विकसित भारत के विज़न को साकार करने के लिए महत्वपूर्ण है।

DDWS और BISAG-N के बीच समझौता: जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन के लिए बनेगा GIS-आधारित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म

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नई दिल्ली- जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग (DDWS) ने आज नई दिल्ली स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लिकेशंस एंड जियो-इन्फॉर्मेटिक्स (BISAG-N) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए। BISAG-N, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत एक स्वायत्त वैज्ञानिक संस्था है।

यह साझेदारी देश में जल जीवन मिशन (JJM) और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) [SBM(G)] के लिए एक GIS-एकीकृत निर्णय सहायता प्लेटफ़ॉर्म (Decision Support Platform) विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह प्लेटफ़ॉर्म ग्रामीण जल आपूर्ति और स्वच्छता कार्यक्रमों में डेटा-आधारित निर्णय, पारदर्शिता और कुशल निगरानी को सशक्त बनाएगा।

समारोह की अध्यक्षता अशोक के. के. मीना, सचिव, DDWS ने की। इस अवसर पर स्वाति मीना नाइक, संयुक्त सचिव (JJM) और विनय ठाकुर, विशेष महानिदेशक, BISAG-N ने दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समझौते का आदान-प्रदान किया।कमल किशोर सोन, अतिरिक्त सचिव एवं प्रबंध निदेशक (NJJM) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

सचिव अशोक के. के. मीना ने इस अवसर पर कहा कि,

“पेयजल और स्वच्छता मिशनों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ाने के लिए जियोस्पेशियल तकनीकें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। BISAG-N के साथ यह सहयोग JJM और SBM(G) को अत्याधुनिक GIS क्षमताओं से लैस करेगा, जिससे रियल-टाइम डेटा विश्लेषण और बेहतर नीति-निर्णय संभव होंगे।”

नए प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से ग्रामीण पाइप जल आपूर्ति योजनाओं (RPWSS) का डिजिटल मैप तैयार किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक योजना को यूनिक स्कीम आईडी प्रदान की जाएगी। यह प्रणाली घर-घर जल आपूर्ति की सूक्ष्म निगरानी और अन्य ग्रामीण अवसंरचना योजनाओं के साथ समन्वय (convergence) को मजबूत करेगी।

समझौते के तहत BISAG-N प्लेटफ़ॉर्म के डेटाबेस डिज़ाइन, मानचित्र निर्माण, डेटा माइग्रेशन, सॉफ़्टवेयर विकास और सिस्टम इंटीग्रेशन जैसी सभी तकनीकी सेवाएं प्रदान करेगा। इसमें डिजिटल फोटोग्रामेट्री, वेक्टर डेटा कैप्चर, थीमैटिक मैपिंग और ग्राउंड कंट्रोल सर्वेक्षण जैसी उन्नत तकनीकें भी शामिल होंगी।

यह पहल प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप होगी, जिससे जल एवं स्वच्छता अवसंरचना का अन्य क्षेत्रों की परिसंपत्तियों के साथ एकीकरण सुनिश्चित किया जा सकेगा। इससे संसाधनों का इष्टतम उपयोग, सेवा वितरण में सुधार और ग्रामीण विकास की गति को बढ़ावा मिलेगा।

यह सहयोग भारत सरकार के डिजिटल इंडिया विज़न से भी जुड़ा है, जिसका उद्देश्य समावेशी और सतत विकास के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना है। DDWS और BISAG-N का यह संयुक्त प्रयास ग्रामीण जल और स्वच्छता सेवाओं की प्रभावी योजना, निगरानी और मूल्यांकन के लिए एक मजबूत डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करेगा।


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