Media24Media.com: #FarmersFirst

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #FarmersFirst. Show all posts
Showing posts with label #FarmersFirst. Show all posts

झारखंड से ताज़े आमों की पहली वाणिज्यिक खेप यूनाइटेड किंगडम रवाना, कृषि निर्यात को मिला नया आयाम

No comments Document Thumbnail

कृषि निर्यात के क्षेत्र में झारखंड के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority (एपीडा) ने राज्य से ताज़े आमों की पहली वाणिज्यिक खेप को यूनाइटेड किंगडम के लिए रवाना किया। इस अवसर पर 4 जून 2026 को कोलकाता में फ्लैग-ऑफ समारोह आयोजित किया गया।

यह खेप 1.5 मीट्रिक टन ताज़े अमरपाली आमों की है, जिन्हें झारखंड के सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड स्थित महिला संचालित किसान उत्पादक कंपनी (एफपीसी) बेउरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से प्राप्त किया गया है। इस खेप का निर्यात कोलकाता स्थित एम/एस जेजीबी एग्रोफ्रेश प्राइवेट लिमिटेड द्वारा लंदन, यूनाइटेड किंगडम भेजा जा रहा है।

इस निर्यात की पृष्ठभूमि में एपीडा द्वारा 5 मई 2026 को सिमडेगा जिले के किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) तथा प्रगतिशील किसानों के लिए आयोजित एक निर्यातोन्मुखी क्षमता निर्माण कार्यक्रम रहा। कार्यक्रम में निर्यात संबंधी आवश्यकताओं, गुणवत्ता मानकों और वैश्विक बाजार अवसरों की जानकारी प्रदान की गई।

इसके बाद एपीडा ने बेउरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और एम/एस जेजीबी एग्रोफ्रेश प्राइवेट लिमिटेड के बीच समन्वय स्थापित कर जिले से निर्यात गुणवत्ता वाले आमों की खरीद सुनिश्चित कराई। वर्तमान खेप इसी पहल का परिणाम है।

इस पहल से किसान उत्पादक कंपनी की निर्यात मूल्य श्रृंखला में प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित हुई है तथा इसके सदस्य किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच प्राप्त हुई है। एफपीसी से जुड़े किसानों को अपने उत्पाद के लिए घरेलू बाजार की तुलना में बेहतर मूल्य प्राप्त हुआ।

यह पहल क्षेत्र के किसान समूहों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन पद्धतियों को अपनाने, फसल कटाई के बाद बेहतर प्रबंधन तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन के लिए प्रोत्साहित करेगी।

झारखंड की अनुकूल कृषि-जलवायु परिस्थितियां बागवानी फसलों के उत्पादन के लिए उपयुक्त हैं। राज्य में उत्पादित अमरपाली आम अपनी गुणवत्ता और बाजार में स्वीकृति के लिए प्रसिद्ध हैं। इस खेप के साथ झारखंड भी उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है जो ताज़े फलों का निर्यात अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कर रहे हैं।

एपीडा कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बाजार विकास, क्षमता निर्माण, गुणवत्ता सुधार, ट्रेसबिलिटी प्रणाली तथा निर्यात प्रोत्साहन गतिविधियों के माध्यम से सहयोग प्रदान करता है। साथ ही, यह महिला एवं जनजातीय किसान उत्पादक संगठनों सहित विभिन्न किसान समूहों की कृषि निर्यात में भागीदारी को भी प्रोत्साहित करता है।

झारखंड से ताज़े आमों की पहली वाणिज्यिक निर्यात खेप राज्य के किसान उत्पादक संगठनों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

किसानों को खाद-बीज की कोई कमी न हो, छोटे किसानों को मिले प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

No comments Document Thumbnail

सुपेबेड़ा की पेयजल समस्या के स्थायी समाधान हेतु तेल नदी पर एनीकट निर्माण के लिए 7 करोड़ रुपये स्वीकृत

अवैध रेत उत्खनन पर कड़ी कार्रवाई, नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि किसानों को खाद और बीज की उपलब्धता में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता के आधार पर खाद-बीज उपलब्ध कराया जाए तथा इसकी जवाबदेही संबंधित कलेक्टरों की होगी। मुख्यमंत्री ने कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के लाभों की जानकारी दें ताकि आधुनिक कृषि तकनीकों का अधिकतम उपयोग हो सके। उन्होंने अवैध रेत उत्खनन के विरुद्ध तत्काल और प्रभावी कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय आज गरियाबंद जिला पंचायत कार्यालय के सभाकक्ष में रायपुर संभाग के जिलों की संभागीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। लगभग साढ़े तीन घंटे तक चली इस मैराथन समीक्षा बैठक में रायपुर, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद और बलौदाबाजार जिलों के कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों तथा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विकास योजनाओं, कानून-व्यवस्था, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने गरियाबंद जिले के सुपेबेड़ा क्षेत्र में पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए तेल नदी पर एनीकट निर्माण हेतु 7 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने कहा कि लोगों की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और पेयजल जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आम नागरिकों को योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होनी चाहिए तथा प्रशासन के प्रति जनता की शिकायतों को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य किया जाए।

मुख्यमंत्री साय ने राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में तेजी लाने, टीबी मुक्त पंचायतों के निर्माण, आयुष्मान कार्डों का शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने, जल जीवन मिशन के कार्यों को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने तथा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के पात्र हितग्राहियों को लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार केवल शिकायतों के निराकरण का अभियान नहीं बल्कि शासन की योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने और जनता से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करने का माध्यम है। इसी उद्देश्य से वे स्वयं विभिन्न जिलों का दौरा कर योजनाओं के क्रियान्वयन का फीडबैक प्राप्त कर रहे हैं। 

समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, आयुष्मान भारत योजना, जल जीवन मिशन, बिहान, तेंदूपत्ता संग्रहण, महतारी वंदन योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि तथा धान उपार्जन एवं उठाव की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष्मान कार्ड बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पात्र नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण उपचार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

शिक्षा की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने स्कूलों में सीखने के स्तर में सुधार, नियमित मॉनिटरिंग तथा नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी है, वहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीकों का उपयोग कर शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था, सड़क सुरक्षा और देश में लागू नए तीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए तथा सड़क सुरक्षा नियमों के पालन और नशा मुक्ति अभियान को भी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल, रायपुर संभागायुक्त श्याम धावड़े, आईजी अमरेश मिश्रा सहित संबंधित जिलों के जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

किसानों से किया हर एक वादा पूरा कर रही है हमारी सरकार : मुख्यमंत्री साय

No comments Document Thumbnail

मुख्यमंत्री ने दो दिवसीय राज्य स्तरीय तिलहन किसान मेले का किया शुभारंभ

आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने और तिलहन उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर विशेष जोर

"एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत मुख्यमंत्री ने लगाया साल का पौधा

दलहन-तिलहन के उत्पादन को बढ़ावा देने वाले प्रयासों से किसानों को मिल रहा है लाभ

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र में दो दिवसीय राज्य स्तरीय तिलहन किसान मेले का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण कर किसानों को दी जा रही आधुनिक कृषि तकनीकों और तिलहन उत्पादन बढ़ाने के उपायों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर महाविद्यालय परिसर में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत साल का पौधा रोपित किया और पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण करने की अपील की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, जहां लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों से धान की खरीदी 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से 3100 रुपये में कर रही है तथा अंतर की राशि का भुगतान भी एकमुश्त किया जा रहा है। साय ने कहा कि पिछले 2 वर्षों से हमारी सरकार किसानों से किया हर एक वादा पूरा कर रही है। उन्होंने किसानों से संवाद कर होली के पूर्व धान के अंतर की राशि का भुगतान तथा योजनाओं का लाभ मिलने की जानकारी भी ली। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हो चुका है, लेकिन तिलहन उत्पादन में अभी भी कमी है। वर्तमान में देश अपनी आवश्यकता का लगभग 57 प्रतिशत ही तिलहन उत्पादन कर पा रहा है, शेष 43 प्रतिशत आयात करना पड़ता है। इस कमी को दूर करने के लिए तिलहन विकास परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे वैज्ञानिकों के सुझावों को अपनाकर तिलहन उत्पादन बढ़ाएं। उन्होंने जानकारी दी कि कृषक उन्नति योजना की तर्ज पर तिलहन फसलों के लिए प्रति एकड़ 11 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन जैसे सहायक व्यवसायों को अपनाकर आय बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि जीएसटी में सुधार के बाद कृषि यंत्रों की कीमतों में कमी आई है, जिससे किसानों को लाभ मिल रहा है।

कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक है। उन्होंने किसानों से दलहन एवं तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया। 

कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने तिलहन विकास कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि किसानों को विश्वविद्यालय के माध्यम से उन्नत बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। राज्य में संचालित 28 कृषि महाविद्यालयों, 27 कृषि विज्ञान केंद्रों एवं अनुसंधान संस्थानों के जरिए हर वर्ष लगभग 50 हजार किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इस अवसर पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद चिंतामणि महाराज, विधायक प्रबोध मिंज, विधायक रामकुमार टोप्पो, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, महापौर मंजूषा भगत, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष राम किशुन सिंह, सभापति हरविंदर सिंह, राम लखन पैंकरा, संभाग आयुक्त नरेंद्र कुमार दुग्गा, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

Kisaan School : देश के पहले किसान स्कूल बहेराडीह में गणतंत्र दिवस 26 जनवरी के अवसर पर ध्वजारोहण करेंगे सीताराम वैष्णव

No comments Document Thumbnail

जांजगीर-चाम्पा- बहेराडीह में स्थित वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल में 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर सीताराम वैष्णव के द्वारा ध्वजारोहण किया जाएगा. वे कोटमीसोनार गांव में स्थित छग के एकमात्र क्रोकोडायल पार्क के केयरटेकर हैं. 

देश के पहले किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि गणतंत्र दिवस 26 जनवरी के अवसर पर हर साल की तरह ध्वज वंदन किया जाएगा. इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सीताराम वैष्णव होंगे, जो कोटमीसोनार क्रोकोडायल पार्क के केयरटेकर हैं और मगरमच्छों से अपने याराना को लेकर वे छग ही नहीं, देश-दुनिया में प्रसिद्ध हैं और उनकी एक आवाज पर क्रोकोडायल पार्क में मगरमच्छ दौड़े चले आते हैं.

चावल निर्यातकों को दी बड़ी सौगात, मंडी शुल्क में छूट की अवधि एक साल बढ़ाई गई

No comments Document Thumbnail

इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में मुख्यमंत्री साय ने की घोषणा 

ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है- मुख्यमंत्री साय 

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के नीजि  रिसॉर्ट में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने  चावल निर्यातकों को बड़ी सौगात दी है। मंडी शुल्क में छूट की अवधि एक साल बढ़ाई है। इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के दौरान सीएम साय ने की घोषणा से चावल निर्यातकों और किसान दोनों के लिए बड़ी सौगात है। साथ ही कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के क्षेत्रीय कार्यालय का भी शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है और दंतेवाड़ा में ऑर्गेनिक चावल की खेती हो रही है, जिसे और प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है।

छतीसगढ़ से चावल के एक्सपोर्ट को मिलेगा बढ़ावा 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट का यह दूसरा संस्करण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस आयोजन में 12 देशों के बायर्स तथा 6 देशों के एम्बेसी प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति से छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने में मदद मिलेगी। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर सभी विदेशी मेहमानों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने छत्तीसगढ़ को सोच-समझकर “धान का कटोरा” कहा था और आज प्रदेश इस नाम की सार्थकता सिद्ध कर रहा है। चावल छत्तीसगढ़ के खानपान का अभिन्न हिस्सा रहा है और यहां हजारों किस्मों की धान की प्रजातियां उगाई जाती हैं। सरगुजा अंचल के सुगंधित जीराफूल और दुबराज जैसे चावलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनकी खुशबू दूर से ही पहचान में आ जाती है।  छतीसगढ़ से चावल के एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा। चावल निर्यातक लंबे समय से मंडी शुल्क में छूट की मांग कर रहे थे। पिछले साल भी सरकार ने दी थी, छूट दिसंबर 2025 में मंडी शुल्क में छूट की अवधि खत्म हो रही थी।

छत्तीसगढ़ से 90 देशों को करीब एक लाख टन चावल का किया जा रहा है निर्यात 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति के अंतर्गत लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे चावल के प्रसंस्करण और निर्यात को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से वर्तमान में लगभग 90 देशों को करीब एक लाख टन चावल का निर्यात किया जा रहा है। सरकार निर्यातकों के सहयोग के लिए सदैव तत्पर है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में किसानों से 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। पिछले वर्ष 149 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी और इस वर्ष भी खरीदी में वृद्धि की संभावना है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र व राज्य शासन द्वारा किसानों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी भी साझा की। 

मुख्यमंत्री ने चावल पर केन्द्रित प्रदर्शनी का किया अवलोकन

इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के दौरान मुख्यमंत्री साय ने चावल पर केन्द्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न किस्मों के चावल, क्षेत्र विशेष में उत्पादित प्रजातियों, चावल उत्पादन में हो रहे नवाचारों तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने शासकीय स्टालों का भी निरीक्षण कर चावल के उत्पादन और विपणन को बढ़ावा देने से जुड़े कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे नवाचारों से चावल की पैदावार में वृद्धि होगी, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, एपिडा के चेयरमेन अभिषेक देव, छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कांति लाल, राम गर्ग, देश भर से आये मिलर्स, चावल व्यवसायी एवं स्टेक होल्डर्स उपस्थित रहे।


किसानों से दलहन-तिलहन उपार्जन की केन्द्र ने दी स्वीकृति

No comments Document Thumbnail

मार्कफेड सहकारी समितियों के माध्यम से करेगा उपार्जन

खरीफ में उपार्जन के लिए 425 करोड़ रूपए मंजूर

रायपुर- प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम आशा) के तहत प्राइस सपोर्ट स्कीम में छत्तीसगढ़ को दलहन और तिलहन फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन की अनुमति मिल गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विशेष पहल पर आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के कृषि मंत्री  रामविचार नेताम के बीच हुई चर्चा के बाद केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन में दलहन-तिलहन उपार्जन के लिए 425 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी है।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से खरीफ और रबी सीजन के लिए कुल 1 लाख 22 हजार मीट्रिक टन दलहन-तिलहन उपार्जन का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया था। इसमें खरीफ के लिए 50 हजार मीट्रिक टन और रबी के लिए 72 हजार मीट्रिक टन शामिल हैं। फिलहाल केंद्र से खरीफ की फसलों के उपार्जन की अनुमति मिली है। इसके तहत अरहर 21 हजार 330 मीट्रिक टन, उड़द 25 हजार 530 मीट्रिक टन, मूंग 240 मीट्रिक टन, सोयाबीन 4 हजार 210 मीट्रिक टन और मूंगफली 4 हजार 210 मीट्रिक टन का उपार्जन किया जाएगा। इन फसलों के उपार्जन पर कुल 425 करोड़ रुपए खर्च होंगे। केंद्र सरकार ने मांग आने पर सोयाबीन और मूंगफली के लिए अतिरिक्त स्वीकृति देने का आश्वासन भी दिया है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए अरहर का समर्थन मूल्य 8000 रूपए प्रति क्विंटल, मूंग का 8768 रूपए, उड़द का 7800 रूपए, मूंगफली का 7800 रूपए, सोयबीन का प्रति क्विंटल 5328 रूपए घोषित किया गया है।  

छत्तीसगढ़ सरकार ने समर्थन मूल्य पर दलहन-तिलहन उपार्जन के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की हैं। उपार्जन का कार्य राज्य में मार्कफेड के माध्यम से सहकारी समितियों द्वारा किया जाएगा। इसके लिए 22 जिलों में 222 उपार्जन केंद्र पहले ही अधिसूचित कर दिए गए हैं। किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया कृषि विभाग के एकीकृत किसान पोर्टल पर लगातार जारी है। जिन किसानों का पंजीयन अब तक नहीं हो पाया है, वे नजदीकी सहकारी समिति के माध्यम से पंजीयन कराकर योजना का लाभ उठा सकते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दलहन-तिलहन का उपार्जन किसानों के हित में राज्य सरकार का बड़ा निर्णय है। इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और आय में वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से प्रदेश में फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और छत्तीसगढ़ दाल एवं खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। राज्य सरकार किसानों के हित में केन्द्र सरकार के साथ समन्वय कर लगातार काम कर रही है।

2026 सीज़न के लिए कोपरा का MSP बढ़ा: किसानों को मिलेगा अधिक लाभकारी मूल्य

No comments Document Thumbnail

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक कार्यों पर मंत्रिमंडल समिति (CCEA) ने 2026 सीज़न के लिए नारियल कोपरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मंज़ूर कर लिया है।

किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार ने 2018-19 के केंद्रीय बजट में घोषित किया था कि सभी अधिदेशित फसलों का MSP, उनकी ऑल-इंडिया वेटेड औसत उत्पादन लागत का कम से कम 1.5 गुना निर्धारित किया जाएगा।

2026 सीज़न के लिए नया MSP

  • मिलिंग कोपरा (FA Q): ₹12,027 प्रति क्विंटल

  • बॉल कोपरा: ₹12,500 प्रति क्विंटल

MSP में बढ़ोतरी

पिछले सीज़न की तुलना में:

  • मिलिंग कोपरा: ₹445 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी

  • बॉल कोपरा: ₹400 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी

2014 के मार्केटिंग सीज़न से अब तक MSP में भारी वृद्धि हुई है:

  • मिलिंग कोपरा: ₹5,250 → ₹12,027 (129% वृद्धि)

  • बॉल कोपरा: ₹5,500 → ₹12,500 (127% वृद्धि)

लाभ

  • किसानों को बेहतर और लाभकारी मूल्य मिलेगा।

  • कोपरा उत्पादन बढ़ाने का प्रोत्साहन मिलेगा।

  • घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नारियल उत्पादों की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।

खरीद एजेंसियाँ

  • NAFED

  • NCCF
    ये दोनों ही प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत कोपरा खरीदने वाली केंद्रीय नोडल एजेंसियाँ बनी रहेंगी।

किसान स्कूल बहेराडीह में 10 दिसंबर को राज्य स्तरीय भाजी महोत्सव

No comments Document Thumbnail

जांजगीर-चाम्पा- कृषि विज्ञान केंद्र भारत सरकार के प्राकृतिक क़ृषि गोद ग्राम बहेराडीह में स्थित देश के पहले किसान स्कूल में द्वितीय वर्ष 10 दिसंबर बुधवार को दोपहर 2 बजे राज्य स्तरीय भाजी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. इस आयोजन को लेकर प्रदेश की महिलाओं में जबरदस्त उत्साह का माहौल है. महोत्सव में जिले के कलेक्टर जन्मेजय महोबे समेत पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय, जिला पंचायत की अध्यक्ष इंजी. सत्यलता मिरी, सक्ती जिला पंचायत की अध्यक्ष द्रौपदी चंद्रा, छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य आयोग की सदस्य ज्योति कश्यप, पामगढ की पूर्व विधायक इंदु बंजारे, जिला पंचायत के सीईओ गोकुल रावटे शामिल होंगे.

वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि किसान स्कूल में द्वितीय वर्ष बुधवार 10 दिसंबर को दोपहर 2 बजे राज्य स्तरीय भाजी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव के दौरान विविध प्रकार की भाजियों की जीवंत प्रदर्शनी लगाई जाएगी. महोत्सव को लेकर प्रदेश की महिलाओं और बिहान की दीदियों में जबरदस्त उत्साह का माहौल है.

भाजी दीदियों की होगा सम्मान

किसान स्कूल के संचालक ने बताया कि राज्य स्तरीय भाजी महोत्सव में विविध प्रकार की भाजियों की जीवंत प्रदर्शन करने वाली अर्थात भाजी प्रतियोगिता में भाग लेने वाली महिलाओं, युवतियों को 'भाजी दीदी' के रूप में सम्मानित किया जाएगा, वहीं प्रतियोगिता में पहला, दूसरा, तीसरा स्थान प्राप्त करने वाली महिलाओं को पुरस्कार प्रदान किया जाएगा. साथ ही, 7 महिलाओं को सांत्वना पुरस्कार दिया जाएगा. महोत्सव में शामिल होने वाली प्रदेश की महिलाओं ने विविध प्रकार भाजियों के साथ शामिल होने की तैयारी में हैं. पिछले साल भाजी महोत्सव में जिले के अलावा छः जिले की महिलाएं शामिल हुई थीं.

भाजियों की माला और गुलदस्ता से होगा अतिथियों का स्वागत

किसान स्कूल के सदस्यों ने बताया कि इस बार की भाजी महोत्सव में शामिल होने वाले अतिथियों का स्वागत फूल माला या फूल से बने गुलदस्ता ने नहीं, बल्कि विविध प्रकार की भाजियों के बीजों, पत्तियों तथा तने से निर्मित माला और गुलदस्ता से स्वागत किया जाएगा, वहीं भाजियों से बनाए गए अनेक प्रकार की व्यंजन के स्वाद का आनंद भी महोत्सव में शामिल होने वाले अतिथि लेंगे. इसके साथ ही चेच भाजी और अमारी भाजी के रेशे से तैयार रंग बिरंगी राखियां और कपड़ा मुख्य आकर्षण का केंद्र होगा. महोत्सव में स्कूली छात्र-छात्राएं भी शामिल होंगे.

छत्तीसगढ़ की 36 प्रमुख भाजियों की दिखेगी झलक

1, मेथी भाजी,

2, गोंदली भाजी,

3, मुराई भाजी,

4, चरौटा भाजी,

5, मुढ़ी भाजी,

6, अमारी भाजी,

7, नोनिया भाजी,

8, पीपर भाजी,

9, पोई भाजी,

10, कांदा भाजी,

11, गोभी भाजी,

12, पालक भाजी,

13, रोपा भाजी,

14, चना भाजी,

15, गाँव भाजी,

16, करेला भाजी,

17,करमता भाजी,

18, लाल भाजी,

19, कोइलार भाजी,

20, केना भाजी,

21, अकरी भाजी,

22, सुनसुनिया भाजी,

23, मखना भाजी,

24, भथुआ भाजी,

25, मुस्केनी भाजी,

26, बोहार भाजी,

27, चौलाई भाजी,

28, खेढ़ा भाजी,

29, कुरमा भाजी,

30, कोचाई भाजी,

31, गुर्रु भाजी,

32, सरसों भाजी,

33, तिवरा भाजी,

34, बर्रे भाजी,

35, चेच भाजी,

36, मुनगा भाजी

भाजियों के पेटेंट के लिए प्रयासरत हैं संचालक दीनदयाल यादव

पिछले दिसम्बर 2016 से किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने छत्तीसगढ़ की 36 भाजियों के साथ ही अन्य फल, फूल पौधों की पेटेंट कराने के लिए स्थानीय प्रशासन व राज्य सरकार के सहयोग से भारत सरकार के केंद्रीय क़ृषि कल्याण मंत्रालय दिल्ली को प्रस्तुत किया है, जिसमें जंगली पीला गेंदा समेत बेल और जामुन का वर्ष 2047 तक पेंटेंट मिल चुका है. शेष अन्य फल, फूल और पौधों के पेंटेंट प्रदान की प्रक्रिया निरंतर देश के अलग-अलग राज्यों के वैज्ञानिकों द्वारा की जा रही है.

छग ही नहीं, देश भर में किसान स्कूल ने बनाई बड़ी पहचान 

वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह के नवाचार को सराहना मिल रही है. छग के अलावा देश के अलग-अलग राज्यों से भ्रमण के लिए यहां पहुंच चुके हैं, वहीं 6 देशों से किसान यहां के नवाचार को देख चुके हैं. देश के पहले किसान स्कूल को अनोखे तरीके से किसानों द्वारा संचालित किया जा रहा है, जहां 18 विषयों में किसानों को निःशुल्क जानकारी व ट्रेनिंग दी जाती है. किसान स्कूल में 'धरोहर' बनाया गया है, जो आकर्षण का केंद्र है, जहां पुरानी चीजों को संग्रहित कर संग्रहालय का रूप दिया जा रहा है. किसान स्कूल के इस अनोखे प्रयास को देखकर अब तक सभी लोगों ने तारीफ की है और स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक भ्रमण के लिए किसान स्कूल ने बड़ी पहचान बना ली है.

मृणाल मंडल ने धान विक्रय का सही मूल्य मिला,ऑनलाइन टोकन से आसान हुआ धान खरीदी

No comments Document Thumbnail

रायपुर- ऑनलाइन टोकन  प्रणाली ने धान खरीदी प्रक्रिया को सरल और सहज बनाया है l किसान स्वयं ऑनलाइन टोकन के माध्यम से  घर बैठे ही टोकन प्राप्त कर सकते हैं।  समिति में पहुंचते ही  उन्हें बिना किसी परेशानी के धान बेचना आसानी हुआ ।

जिला बलरामपुर- रामानुजगंज के बलरामपुर विकासखंड के धान उपार्जन केंद्र बरदर में ग्राम रामनगरकला रहने वाले किसान मृणाल मंडल ने अपनी मेहनत से उपजे लगभग 166 बोरी धान का विक्रय किया। समिति में मिली बेहतर व्यवस्था, सहज प्रक्रिया और त्वरित खरीदी ने उन्हें संतुष्ट किया,  मृणाल मंडल बताते हैं कि धान का सर्वाधिक मूल्य ने उनकी मेहनत को सही मूल्य दिलाया है। 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से धान खरीदी का प्रावधान किसानों के लिए  बड़ी राहत साबित हो रहा है।

मंडल ने बताया कि समय पर समिति पहुंचना और तुरंत धान की खरीदी होना उनके लिए अत्यंत सुखद अनुभव रहा। बिना लंबी प्रतीक्षा और बिना किसी भागदौड़ और सुव्यवस्थित खरीदी व्यवस्था से धान विक्रय हो गया। उन्होंने बताया की इस बार की उपज के मिले राशि से परिवार की जरूरत, अगली फसल की तैयारी में उपयोग करेंगे।मंडल ने धान खरीदी व्यवस्था को सरल एवं सुगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त भी किया।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का पंजाब दौरा: पराली प्रबंधन के रंसीह कलां मॉडल की सराहना

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री, शिवराज सिंह चौहान, आज एक दिवसीय पंजाब दौरे पर हैं। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने मोगा के रंसीह कलां गांव में किसानों, ग्रामीणों और अन्य हितधारकों से मुलाकात की और पिछले छह वर्षों से पराली न जलाने तथा उत्कृष्ट पराली प्रबंधन के लिए उनकी सराहना की। इस उपलब्धि पर उन्होंने सभी को बधाई भी दी।

मुख्य कार्यक्रम से पहले मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पराली जलाने की घटनाओं ने पूरे देश को चिंतित किया हुआ था। उन्होंने कहा कि भले ही पराली जलाने से खेत साफ हो जाते हैं, लेकिन इससे लाभदायक कीट नष्ट हो जाते हैं और गंभीर प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होती है।

उन्होंने कहा, “मैं आज पंजाब को बधाई देने और यहां के पराली प्रबंधन के मॉडल को पूरे देश तक ले जाने आया हूं। पंजाब में इस वर्ष पराली जलाने की घटनाओं में 83 प्रतिशत की कमी आई है। पहले लगभग 83,000 घटनाएँ होती थीं जो अब घटकर करीब 5,000 रह गई हैं।”

केंद्रीय कृषि मंत्री ने आगे कहा, “किसान भाई-बहन पूछते हैं कि अगर पराली न जलाएं तो विकल्प क्या है? गेहूं और अन्य फसलों की बुवाई के लिए खेत कैसे तैयार हों? रंसीह कलां ने इसका जवाब प्रस्तुत किया है। पिछले छह वर्षों से यहां पराली नहीं जलाई गई। किसान पराली को सीधे खेत में मिलाते हैं और डाइरेक्ट सीडिंग करते हैं।”

मुख्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री चौहान ने कहा कि कुछ दिन पहले उन्होंने रंसीह कलां गांव के बारे में पढ़ा था। यहां पराली को बोझ नहीं, बल्कि वरदान बनाया गया है। यह गांव लेने के बजाय देने में विश्वास रखने वाला आदर्श गांव है। उन्होंने कहा कि कृषि मंत्री होने के नाते किसान और खेतों में जाकर सीधे संवाद करना आवश्यक है, तभी किसान हित में सही कार्य किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पराली जलाने के बाद खेतों में पानी लगाना पड़ता है और फिर बुवाई के लिए भूमि तैयार करनी पड़ती है। लेकिन रंसीह कलां की पद्धति के अनुसार, हैप्पी सीडर से कटाई कर पराली को मिट्टी में मिलाकर बिना पानी लगाए ही डाइरेक्ट सीडिंग की जा सकती है। इससे पानी और डीज़ल दोनों की बचत होती है। पराली में मौजूद पोटाश मिट्टी को पोषक बनाता है, नमी बची रहती है और खरपतवार भी कम होते हैं। इससे मिट्टी का ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ता है और खाद की आवश्यकता भी कम होती है। सरपंच ने उन्हें बताया कि पहले डेढ़ बोरी डीएपी लगती थी, अब एक बोरी से काम चल जाता है। इसी तरह तीन बोरी यूरिया की जगह दो बोरी पर्याप्त है — यह लागत बचत का स्पष्ट प्रमाण है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्होंने खेतों का निरीक्षण भी किया और पाया कि पराली को मिट्टी में मिलाने से फसल की गुणवत्ता या उपज पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उपज लगभग 20–22 क्विंटल प्रति एकड़ रहती है।

उन्होंने बताया कि यह पद्धति सिर्फ गेहूं ही नहीं, बल्कि आलू की खेती में भी लाभकारी है। किसानों ने बताया कि पहले आलू के खेतों में पोटाश डालना पड़ता था, परंतु अब पराली में मौजूद जिंक और पोटाश से ही जरूरत पूरी हो जाती है। इससे आलू आकार में बड़े, बेहतर गुणवत्ता वाले और कम लागत में तैयार हो रहे हैं।

उन्होंने सरसों के खेत का भी निरीक्षण किया और वहां भी लाभ देखे। कम खाद और कम पानी में अधिक उत्पादन की संभावना है।

रंसीह कलां को उन्होंने एक ‘स्कूल’ बताया जहाँ से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। सरपंच के नेतृत्व में पराली प्रबंधन के अलावा पानी की बचत, वर्षा जल संचयन, प्लास्टिक प्रबंधन, झील, पार्क और पुस्तकालय जैसे कई कार्य उत्कृष्ट रूप से किए गए हैं। नशा विरोधी अभियान भी प्रशंसनीय है। भूमिगत नालियों के कारण डेंगू और मलेरिया की समस्या नहीं है। केंद्रीय मंत्री ने सरपंच प्रीत इंदरपाल सिंह मिंटू की सराहना करते हुए कहा कि उनका कार्य गर्व करने योग्य है।

उन्होंने कहा कि वे रंसीह कलां की धरती से देश के किसानों को संदेश देना चाहते हैं कि इस मॉडल को अपनाकर पराली प्रबंधन किया जाए। इससे प्रदूषण कम होगा और भूमि अधिक उपजाऊ बनेगी।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वे चुनिंदा किसानों से मिलकर सुझाव लेंगे और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि परिवर्तन के लिए पाँच वर्षीय योजनाएँ तैयार करेंगे। इसके लिए 22–23 दिसंबर को एक विचार-विमर्श बैठक प्रस्तावित है। ग्रामीण विकास पर भी ऐसे प्रयास होंगे।

उन्होंने छोटे किसानों के लिए मशीनरी उपलब्ध कराने के प्रस्तावों पर भी चर्चा की और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट को निर्देश दिया कि कस्टम हायरिंग सेंटर को आधुनिक मशीनीकरण केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। हर किसान मशीन खरीद नहीं सकता, इसलिए समूह आधारित किराये पर मशीन उपलब्ध कराने की व्यवस्था बनाई जाएगी।

चौहान ने ‘दालों में आत्मनिर्भरता मिशन’ पर भी चर्चा की और कहा कि जहां दालें उगाई जाएँगी वहां दाल मिलों के लिए सब्सिडी दी जाएगी। सरकार गेहूं और धान की तरह मसूर, अरहर, उड़द और चना भी एमएसपी पर खरीदेगी और किसानों को उनके परिश्रम का हर पैसा मिलेगा।

अंत में उन्होंने कहा कि पंजाब ज्ञान की धरती है। यहाँ आकर सीखने का मन करता है। पंजाब ने देश को कृषि में बहुत कुछ सिखाया है। वे यहाँ आकर प्रसन्न हैं और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पंजाब के विकास के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।

राष्ट्रीय दुग्ध दिवस 2025: पशुपालन व डेयरी क्षेत्र में प्रगति, नवाचार और सम्मान का राष्ट्रीय उत्सव

No comments Document Thumbnail

मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) ने 26 नवंबर, 2025 को नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में राष्ट्रीय दुग्ध दिवस 2025 का आयोजन किया।

कार्यक्रम में प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, माननीय राज्य मंत्री, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय; जॉर्ज कुरियन, माननीय राज्य मंत्री, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय; तथा नरेश पाल गंगवार, सचिव, DAHD सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने शिरकत की। इस कार्यक्रम में देशभर के पशुपालकों, मिल्क फेडरेशनों, डेयरी सहकारी समितियों और विशेषज्ञों ने भी व्यापक भागीदारी की।

DAHD की अतिरिक्त सचिव, वर्षा जोशी ने स्वागत भाषण दिया और सभी विशिष्ट अतिथियों तथा प्रतिभागियों की उपस्थिति के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

DAHD के सचिव, नरेश पाल गंगवार ने राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के अवसर पर सभी प्रतिभागियों और पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और पशुधन क्षेत्र में दीर्घकालीन विकास के लिए आनुवंशिक सुधार और उन्नत प्रजनन तकनीकों जैसी वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने डेयरी किसानों को सेक्स-सॉर्टेड सीमेन, इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) जैसी उन्नत तकनीकों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया। उन्होंने डेयरी सहकारिताओं की किसानों के आर्थिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया।

समारोह के दौरान, प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, माननीय राज्य मंत्री, ने तीन श्रेणियों में राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार प्रदान किए—श्रेष्ठ दुग्ध किसान (देशी नस्ल की गाय/भैंस पालने वाले), श्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन, तथा श्रेष्ठ डेयरी सहकारी समिति/मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी/डेयरी किसान उत्पादक संगठन।

अपने संबोधन में माननीय राज्य मंत्री ने भारतीय अर्थव्यवस्था में डेयरी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत सरकार के प्रयासों से देश में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो बढ़कर 485 ग्राम प्रति दिन हो गई है, जो वैश्विक औसत 329 ग्राम प्रति दिन से अधिक है। उन्होंने डेयरी किसानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि राष्ट्र की शक्ति गांवों में है। उन्होंने राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार विजेताओं की सराहना की और डेयरी क्षेत्र की संभावनाओं को रेखांकित किया।

माननीय राज्य मंत्री ने “भारत में पशु चिकित्सा अवसंरचना के न्यूनतम मानकों के दिशानिर्देश” भी जारी किए। ये दिशानिर्देश पशु चिकित्सा सेवाओं के लिए एक समान चार-स्तरीय ढांचा प्रस्तुत करते हैं—प्राथमिक पशु चिकित्सा सेवा केंद्र (PVCCs), ब्लॉक-स्तरीय पशु चिकित्सा अस्पताल, जिला-स्तरीय पशु चिकित्सा अस्पताल, तथा राज्य-स्तरीय पॉलीक्लिनिक/रेफरल केंद्र। इससे राज्यों को पशु चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।

माननीय राज्य मंत्री द्वारा बेसिक एनिमल हस्बेंड्री स्टैटिस्टिक्स (BAHS) 2025 का भी विमोचन किया गया, जो नीतिगत योजना के लिए अद्यतन और व्यापक आंकड़े प्रदान करता है।

इसके अलावा, प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने रोपड़ मिल्क यूनियन द्वारा राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD) के तहत, एवं JICA द्वारा समर्थित परियोजना—घटक B: डेयरिंग थ्रू कोऑपरेटिव्स के अंतर्गत कमीशन किए गए 20 आधुनिक इंसुलेटेड मिल्क टैंकरों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों में 9 ब्रीड मल्टीप्लिकेशन फार्म का उद्घाटन भी किया गया।

कार्यक्रम के दौरान, माननीय राज्य मंत्री ने सभी प्रतिभागियों के साथ भारत के संविधान की प्रस्तावना का वाचन किया और न्याय, स्वतंत्रता, समानता तथा बंधुत्व के मूल्यों को बनाए रखने का संकल्प लिया।

जॉर्ज कुरियन, माननीय राज्य मंत्री, ने भी राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार 2025 के सभी विजेताओं को बधाई दी और डेयरी उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृत्रिम गर्भाधान और भ्रूण प्रत्यारोपण जैसी उन्नत तकनीकों के उपयोग की सराहना की। उन्होंने पशु चिकित्सा सेवाओं के और अधिक सुदृढ़ीकरण तथा नवीन वैज्ञानिक तकनीकों के व्यापक उपयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम के दौरान “पशु उत्पादकता में वृद्धि—तकनीकी विशेषज्ञों और प्रगतिशील किसानों के अनुभव साझा करने” विषय पर पैनल चर्चाएँ भी आयोजित की गईं, जिसमें विशेषज्ञों और प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव, नवाचारों, वैज्ञानिक तरीकों और जमीनी रणनीतियों को साझा किया, जिनसे पशु उत्पादन में मापनीय सुधार प्राप्त हुए हैं।

यह कार्यक्रम पशुपालन और डेयरी क्षेत्र से जुड़े किसानों की उपलब्धियों को सम्मानित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में सिद्ध हुआ।


धान खरीदी के लिए किसानों को टोकन जारी, 31 जनवरी तक चलेगी खरीदी प्रक्रिया

No comments Document Thumbnail

रायपुर- खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में प्रदेश में धान उपार्जन प्रक्रिया को सुचारू एवं पारदर्शी रूप से संचालित करने के लिए राज्य शासन द्वारा धान खरीदी 15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक निर्धारित की गई है। लगभग 50 कार्य दिवसों में खरीदी कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों की सुविधा के लिए पूर्व की भांति इस वर्ष भी टोकन जारी कर धान खरीदी की जा रही है।

टोकन तुहर हाथ मोबाइल ऐप के माध्यम से टोकन उपलब्ध

राज्य शासन के निर्देशों के अनुसार किसानों की भूमि धारिता के आधार पर टोकन जारी किए जा रहे हैं। 2 एकड़ तक भूमि वाले किसानों को एक टोकन, 2 से 10 एकड़ तक भूमि वाले किसानों को अधिकतम  2 टोकन और 10 एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों को अधिकतम 3 टोकन जारी किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि किसान टोकन उपार्जन केंद्र से सीधे प्राप्त कर सकते हैं अथवा टोकन तुहर हाथ मोबाइल ऐप के माध्यम से स्वयं भी टोकन ले सकते हैं। यह मोबाइल ऐप गूगल प्ले स्टोर में उपलब्ध है।

शिकायतें एवं सुझाव खाद्य विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-233-3663 पर

इसके अलावा धान खरीदी से संबंधित शिकायतें एवं सुझाव खाद्य विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-233-3663 पर दर्ज कराए जा सकते हैं। इसके साथ ही जिले में अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर तथा कॉल सेंटर का गठन किया गया है, जो धान की रीसाइक्लिंग पर रोक, कोचियों/बिचौलियों की गतिविधियों की निगरानी और धान के उठाव एवं परिवहन की सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित कर रहा है। 

प्रशासन ने अपील की है कि उपार्जन केंद्र में धान लाते समय किसान-धान को अच्छी तरह सुखाकर लाएं, जिसमें नमी 17 प्रतिशत से अधिक न हो, धान साफ-सुथरा एवं अशुद्धियों से मुक्त हो। साथ में टोकन, ऋण पुस्तिका एवं आधार कार्ड अवश्य रखें। जिला प्रशासन ने किसानों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि निर्धारित निर्देशों का पालन करते हुए समय पर धान विक्रय करें, जिससे खरीदी कार्य सुचारू एवं बाधारहित पूर्ण किया जा सके।

धान खरीदी तिहार सुचारू और पारदर्शी, भिट्ठी कला के किसानों ने जताया विश्वास

No comments Document Thumbnail

3100 रुपए प्रति क्विंटल मूल्य से किसानों को सीधा लाभ

रायपुर- प्रदेश में इस वर्ष धान खरीदी तिहार पूरी तरह सुगमता, पारदर्शिता और सुव्यवस्था के साथ संचालित हो रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशन में राज्य के सभी धान उपार्जन केंद्रों में आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित किए जाने से किसानों में उत्साह और विश्वास का माहौल है।

सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत भिट्ठी कला स्थित आदिमजाति सहकारी मर्यादित समिति मेंड्राकला में धान विक्रय करने पहुँचे किसान इस वर्ष की खरीदी व्यवस्था से पूरी तरह संतुष्ट दिखाई दिए। किसानों ने बताया कि खरीदी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुचारू, सुविधाजनक और पारदर्शी है।

किसान बनकेश्वर राम ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार द्वारा निर्धारित 3100 रुपये प्रति क्विंटल धान मूल्य से किसानों को सीधा आर्थिक लाभ हो रहा है। उन्होंने बताया कि उपार्जन केंद्र में तुलाई, नमी परीक्षण और अन्य प्रक्रियाएँ बिना किसी कठिनाई के पूरी हुईं, जिससे खरीदी का अनुभव सहज रहा।

उपार्जन केंद्र में उपलब्ध सुव्यवस्थित व्यवस्था देखकर किसान बनकेश्वर राम ने राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि शासन की किसान हितैषी योजनाएँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही हैं।

जिला प्रशासन द्वारा की गई तैयारियों—बारदाना उपलब्धता, पारदर्शी तुलाई, त्वरित भुगतान प्रणाली और लगातार निगरानी—ने किसानों के बीच प्रक्रिया के प्रति विश्वास को और अधिक मजबूत किया है।

जिले में धान खरीदी ने पकड़ी रफ्तार

No comments Document Thumbnail

अब 123 उपार्जन केंद्रों में धान खरीदी शुरू, 01 लाख 44 हजार 506 क्विंटल धान खरीदा गया

महासमुंद- राज्य शासन के मंशानुरूप खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 अंतर्गत कृषक उन्नति योजना के तहत जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी बिना किसी रुकावट के तेजी से जारी है। जिले में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का आज 7वां दिन हैं। जिले के 130 समितियों के 182 उपार्जन केन्द्रों में से 123 केन्द्रों में आज दिनांक तक एक लाख 44 हजार 506.80 क्विंटल धान की खरीदी की गई है। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के मार्गदर्शन में जिन केन्द्रों में धान खरीदी की शुरुआत नहीं हुई है लगभग उन सभी उपार्जन केंद्रों में किसानों से निर्बाध रूप से धान खरीदने की पूरी तैयारी की गई है।

जिले में किसान उत्साह से धान खरीदी केंद्रों में धान लेकर पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में आज प्राथमिक सहकारी समिति बेमचा में धान बेचने आए कृषक प्रहलाद चंद्राकर एवं देवेन्द्र साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में किसानों के हित में उठाए गए कदमों से हमें भरोसा मिल रहा है कि हमारा धान उचित मूल्य पर सुरक्षित तरीके से खरीदी जाएगा। उन्होंने बताया कि खरीदी केन्द्र में व्यवस्था बेहतर और खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी है। वे बताते है कि बिना किसी परेशानी के उन्होंने धान का विक्रय किया। उन्होंने सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं और सहयोग के लिए शासन एवं प्रशासन का धन्यवाद ज्ञापित किया।

उत्साह पूर्वक धान बेचने पहुंच रहे हैं किसान

टोकन तुहर हाथ मोबाइल एप से आसानी से कट रहा है टोकन- किसान प्रहलाद एवं देवेन्द्र

ग्राम कौंदकेरा के किसान प्रह्लाद चंद्राकर ने कहा कि सरकार धान खरीदी में किसानों का पूरा ध्यान रख रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जारी मोबाइल ऐप द्वारा घर में टोकन काटा गया।  उन्होंने बताया कि आज 550 कट्टा धान बेमचा मंडी में लाया हूं। धान की तौलाई अच्छे से हो रही है। उन्होंने कहा कि बारदाना भी आसानी से मिल रहा है। हम सरकार की व्यवस्था से खुश है। इसी तरह किसान देवेंद्र साहू ने भी बताया कि उनका 25 एकड़ खेत है और आज लगभग 60 क्विंटल धान बेचने आए है। मुस्कुराते हुए कहा कि धान खरीदी हम लोगों का त्यौहार है। आसानी से धान बिक जाए तो ये हमारे लिए बहुत बड़ी खुशी की बात है। बेमचा सहकारी समिति में अब तक 34 किसानों का टोकन काटा गया है। यहां 5 पंचायत के 12 गांव के किसान धान बेचने आते हैं।


कृषि विभाग के समन्वित प्रयासों से किसानों के समृद्धि के द्वार खुले

No comments Document Thumbnail

विभिन्न नवाचारी योजनाओं से आर्थिक उन्नति की दिशा में कारगर पहल

महासमुंद- महासमुंद जिले में कृषि विकास को गतिशील एवं लाभकारी बनाने के लिए केन्द्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। आधुनिक सिंचाई तकनीकों के विस्तार से लेकर किसानों को प्रत्यक्ष लाभ पहुँचाने वाली योजनाओं तक, जिले ने लक्ष्य प्राप्ति में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि तथा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के सफल क्रियान्वयन ने कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के साथ जल संरक्षण, फसल उत्पादकता वृद्धि और किसानों की आर्थिक उन्नति की दिशा में विशेष योगदान दिया है।

जिले में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। निर्धारित 151 हेक्टेयर सिंचाई लक्ष्य के विरुद्ध 84 कृषकों के खेतों में 149.66 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर के माध्यम से सिंचाई व्यवस्था स्थापित की गई। लक्ष्य के लगभग पूर्ण होने से किसानों को आधुनिक सिंचाई सुविधाओं का महत्वाकांक्षी लाभ मिला है। वर्ष 2025-26 के लिए कृषि विभाग ने कुल 264 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली विस्तार का लक्ष्य रखा है, जिसमें 235 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप सिंचाई तथा 29 हेक्टेयर क्षेत्र में स्प्रिंकलर सिंचाई स्थापित की जाएगी। इस योजना से जल संरक्षण, फसलों की उत्पादकता वृद्धि और कृषि लागत में कमी की दिशा में प्रगति होगी।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना अंतर्गत जिले में 1,26,234 किसानों को योजना का लाभ प्रदान किया जा रहा है और पात्र किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया निरंतर जारी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त के तहत जिले में 25.25 करोड़ रूपए की राशि किसानों को उनके खाते में प्राप्त हुई है। जिले में 1,39,063 किसानों का लैंड सीडिंग का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इसी प्रकार 1,37,835 किसानों की आधार सीडिंग तथा 1,40,733 किसानों का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है। जिले में 1,461 पात्र पीव्हीटीजी हितग्राही इस योजना के अंतर्गत पंजीकृत हैं।

इसी तरह राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत वर्ष 2025-26 में 1,920 हेक्टेयर क्षेत्र में मिलेट्स रागी फसल प्रदर्शन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अलावा 1,320 हेक्टेयर में मक्का, 260 हेक्टेयर में उड़द एवं मूंग, 50 हेक्टेयर में मूंगफली तथा 20-20 हेक्टेयर में सूरजमुखी एवं तिल फसल प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही 250 हेक्टेयर क्षेत्र में शैलो ट्यूबवेल सब्सिडी प्रदान करने का लक्ष्य भी रखा गया है।

राजकुमार भगत ने नारायणपुर धान खरीदी केंद्र में बेचा धान

No comments Document Thumbnail

ऑनलाइन टोकन जारी होने से किसानों को मिल रही बड़ी सुविधा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार राज्यभर के सभी धान खरीदी केंद्रों में खरीदी प्रक्रिया सुचारू और व्यवस्थित रूप से जारी है। इसी क्रम में आज जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड के ग्राम नारायणपुर धान खरीदी केंद्र में किसान राजकुमार भगत अपने धान की बिक्री के लिए पहुँचे। उन्होंने बताया कि उनका ऑनलाइन टोकन आसानी से कट गया और उन्हें किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ा।

राजकुमार भगत ने कहा कि वे हर वर्ष इसी केंद्र में धान बेचते हैं और इस बार भी सभी व्यवस्थाएँ बेहद सुव्यवस्थित हैं। उन्होंने खरीदी केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं जैसे—ऑनलाइन टोकन जारी व्यवस्था, माइक्रो एटीएम, पर्याप्त बारदाना, पेयजल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर संतोष प्रकट किया।

प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुरूप सभी प्रबंध किसानों की सुविधा को ध्यान में रखकर किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रत्येक किसान को धान खरीदी की प्रक्रिया सहज, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध हो। इसके लिए प्रशासनिक टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।

क्या है माइक्रो एटीएम सुविधा?

धान उपार्जन केंद्रों में किसानों की त्वरित जरूरतों को पूरा करने हेतु छत्तीसगढ़ सरकार ने माइक्रो एटीएम सुविधा उपलब्ध कराई है। इस सुविधा के माध्यम से किसान 2,000 रुपये से 10,000 रुपये तक की राशि तुरंत प्राप्त कर सकते हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की इस पहल से किसानों को बैंक की शाखाओं में लंबी कतारों में लगने की आवश्यकता नहीं पड़ती, और धान बेचने के तुरंत बाद आवश्यक राशि आसानी से मिल जाती है।

यह सुविधा किसानों की तत्काल आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में अत्यंत मददगार साबित हो रही है और संपूर्ण धान खरीदी प्रक्रिया को और अधिक सुविधाजनक, सुगम एवं किसान-फ्रेंडली बना रही है।

धान विक्रय में हुई सुगमता से प्रसन्नचित है बुजुर्ग किसान कोल्हु राम साहू

No comments Document Thumbnail

  • मोबाईल एप्प से मिला टोकन और उपार्जन केन्द्र
  • निपानी में आसानी से किया धान का विक्रय

रायपुर- बालोद जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का कार्य सुगमता और पारदर्शिता के साथ जारी है। जिले के ग्राम निपानी के बुजुर्ग किसान कोल्हु राम साहू ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि शासन-प्रशासन की व्यवस्था बहुत अच्छी है, इसका परिणाम है कि उनका लगभग 80 क्विंटल धान आसानी से विक्रय हो गया है। उन्होंने बताया कि धान खरीदी का कार्य शुरू होने के पूर्व ही उन्होंने अपने फसल की कटाई, मिंटाई आदि कार्य पूरा कर लिया था। धान खरीदी के एक दिन पूर्व ही उन्होंने अपने नाती के सहयोग से मोबाईल में तुंहर टोकन एप्प के माध्यम से अपने धान के विक्रय हेतु टोकन प्राप्त किया था। उन्होंने बताया कि पहले सोसायटी में टोकन के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी, लेकिन अब मोबाईल के माध्यम से ही घर बैठे ऑनलाईन टोकन प्राप्त करने की बड़ी सुविधा मिली है, जो कि उनके जैसे बुजुर्गों के लिए काफी सुविधाजनक साबित हुआ है। 

बुजुर्ग किसान साहू ने बताया कि उन्होंने 17 नवम्बर को 80 क्विंटल धान विक्रय के लिए टोकन लिया था, उस दिन वे धान खरीदी केन्द्र खुलते ही अपना धान लेकर आ गए थे। जिसके पश्चात् समय पर ही उनके धान की आदर््ता माप कर, पर्याप्त मात्रा में बारदाना उपलब्ध कराया गया। बारदाना में धान भरने, तौलाई, सिलाई तथा स्टेक में रखने हेतु खरीदी केन्द्र में पर्याप्त मात्रा में कर्मचारी उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से समय पर ही उनका धान विक्रय हुआ है। उन्होंने बताया कि शासन प्रशासन की इस व्यवस्था से ही उनके धान का विक्रय आसानी से समय पर सुनिश्चित हुआ है, जिससे वे बहुत ही संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि धान खरीदी केन्द्र में पहुॅचने वाले किसानों के लिए बैठक, पेयजल, शौचालय आदि की भी व्यवस्था है, जो उन्हें धान खरीदी के कार्य में काफी सुविधाजनक लगा। उन्होंने किसान हितैषी योजनाओं एवं निर्णयों की सराहना करते हुए कहा कि 3100 रूपये प्रति क्विंटल में धान की खरीदी तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल की खरीदी से सभी किसानों के लिए खेती का कार्य काफी लाभदायक बन चुका है। उन्होंने किसान हितैषी योजनाओं के बेहतर संचालन के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को विशेष रूप से धन्यवाद देते हुए शासन प्रशासन का आभार जताया।

Kisaan School : रायगढ़ जिले के किसानों को जिंदल ने कराया किसान स्कूल का भ्रमण, छत्तीसगढ़ की 36 भाजियों को देख गदगद हुए किसान

No comments Document Thumbnail

जांजगीर-चाम्पा- रायगढ़ जिले के अलग-अलग एफपीओ के 35 प्रगतिशील किसानों को जिंन्दल पॉवर प्लांट ने बहेराडीह में स्थित देश के पहले किसान स्कूल का भ्रमण कराया, जहां किसानों ने यहां पर वर्ष 2012 से छत्तीसगढ़ की 36 भाजियों पर किए जा रहे अनुसन्धान को देखकर खूब प्रभावित हुए, वहीं घर की छत पर विकसित किए गए टेरिस गार्डन को देख किसान स्कूल के क़ृषि क्षेत्र में किए जा रहे नवाचार की खूब सराहना की.

जिंदल फाउंडेशन तमनार रायगढ़ के सुरेश कुमार डड़सेना ने बताया कि जिंदल द्वारा रायगढ़ जिले में किसानों का एफपीओ बनाया गया है और एफपीओ से जुड़े किसानों को क़ृषि क्षेत्र सहायता, प्रशिक्षण और भ्रमण कराया जाता है. इसी कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह का भ्रमण कराया गया, जहां पर किसानों ने पहली बार छत्तीसगढ़ की 36 भाजियों के देशी बीजों, भाजियों और उसके अवशेष से बनी रंग बिरंगी राखी, कपड़ा को देख खूब प्रभावित हुए. भ्रमण के दौरान यहां के किसानों के द्वारा उगाई गई 6 फीट ऊंचाई की धनिया को देख खूब प्रभावित हुए. किसानों ने पशुपालन, गोमूत्र इकाई, गोबर गैस प्लांट, वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, केंचुआ पालन इकाई, अंजोला इकाई, नाडेप इकाई, वर्मी कम्पोस्ट इकाई, अक्षय चक्र क़ृषि बाड़ी मॉडल, केले समेत भिंडी, चेच भाजी, अमारी भाजी व अलसी के रेशे से निर्मित कपड़ा तथा विलुप्त चीजों को बड़े पैमाने पर सहेजकर रखे गए संग्रहालय एवं देशी बीजों के संरक्षण केंद्र का अवलोकन किया. यहां पशु सखी पुष्पा यादव ने डेयरी पशुपालन और वर्मीवाश के बारे में एफपीओ के किसानों को जानकारी दी.

भ्रमण में सुरेन्द्र कुमार साहू, गोपी पटेल, प्रहलाद सिदार, लक्ष्मी राठिया, गनपति राठिया, गुड्डी राठिया, सुकमती राठिया, मालती राठिया, दुर्गेश राठिया, कृष्णा निषाद, संतु राम सिदार, रविशंकर पटेल, सारंगधर राठिया, घुराऊ राम राठिया, कार्तिक राम, भोजराम साहू, सालिराम राठिया, गुरु कुमार राठिया राकेश कुमार,विद्यावती केरकेटा, तमा यादव और अन्य किसान प्रमुख रूप से शामिल रहे.

प्राकृतिक खेती का मॉडल है किसान स्कूल

सरकार ने भले ही राष्ट्रीय प्राकृतिक मिशन की शुरुआत अभी की है, लेकिन वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह में सालों से प्राकृतिक खेती के मॉडल को विकसित किया जा चुका है. किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने अब तक प्राकृतिक खेती को लेकर भारत के विभिन्न राज्यों और जिले के हजारों किसानों तथा बिहान की क़ृषि सखी, पशु सखी, महिला स्व सहायता समूहों के महिलाओं तथा क़ृषि विभाग के आत्मा अंतर्गत प्रत्येक पंचायतों में कार्यरत कृषक मित्रो को सरकार की ओर से विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रशिक्षण दे चुके हैं. इस समय छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में अलग-अलग बैंको द्वारा संचालित ग्रामीण स्व रोजगार प्रशिक्षण संस्थान तथा लाईवलीहुड कॉलेज में प्रशिक्षण दिया जा रहा है



सतत् और आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में कदम – शिवराज सिंह चौहान का ओडिशा दौरा कल

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान आगामी 10 नवम्बर, 2025 (सोमवार) को ओडिशा के एक दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे राज्य में किसानों की आय बढ़ाने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने से जुड़ी प्रमुख गतिविधियों में भाग लेंगे।

कार्यक्रम के अनुसार, मंत्री चौहान प्रातः पटना से रवाना होकर लगभग पूर्वाह्न 11:00 बजे भुवनेश्वर पहुँचेंगे। वहाँ वे ‘मंडिया दिवस (Millet Day)’ के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होंगे। यह आयोजन लोक सेवा भवन स्थित कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर वे ओडिशा सहित देशभर में मिलेट्स (श्री अन्न/मोटे अनाज) के उत्पादन, प्रसंस्करण और उपभोग को बढ़ावा देने हेतु केंद्र सरकार की विभिन्न पहलों पर प्रकाश डालेंगे। कार्यक्रम में मिलेट्स को किसानों की आय वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के एक सशक्त माध्यम के रूप में रेखांकित किया जाएगा।

उद्घाटन समारोह के बाद, केंद्रीय मंत्री कटक जिले के सदर क्षेत्र का दौरा करेंगे, जहाँ वे किसानों से सीधे संवाद करेंगे। इस दौरान वे किसानों के अनुभव जानेंगे, उनकी चुनौतियाँ सुनेंगे और कृषि नीतियों से जुड़ी उनके सुझाव प्राप्त करेंगे। साथ ही, वे केंद्र सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि कार्यक्रमों की मैदान स्तर पर स्थिति और प्रभाव का भी आकलन करेंगे।

दोपहर में, मंत्री चौहान आईसीएआर – केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (CRRI), विद्याधरपुर, कटक में आयोजित संयुक्त रणनीतिक बैठक में भाग लेंगे। इस बैठक में प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना, दलहन आत्मनिर्भरता मिशन, तथा राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन जैसे प्रमुख राष्ट्रीय कृषि अभियानों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा।

इस बैठक में कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, आईसीएआर के वैज्ञानिक तथा ओडिशा सरकार के प्रतिनिधि भाग लेंगे। बैठक का उद्देश्य भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक, सतत् और आत्मनिर्भर बनाने हेतु व्यवहारिक रणनीतियाँ तैयार करना होगा।

 मंत्री चौहान का यह दौरा ओडिशा में सतत् एवं आत्मनिर्भर कृषि को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। वे बार-बार यह बात दोहराते रहे हैं कि —

“भारत का भविष्य उसके किसानों के खेतों में बसता है, और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम खेती को लाभकारी, पर्यावरण हितैषी और प्रौद्योगिकी-संचालित बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

केंद्रीय मंत्री लगातार विभिन्न राज्यों का दौरा कर किसानों से सीधे संवाद कर रहे हैं ताकि नीति निर्माण और कार्यक्रमों का क्रियान्वयन जमीनी वास्तविकताओं के अनुरूप किया जा सके। उनका मानना है कि कृषि की सफलता दिल्ली के कार्यालयों में नहीं, बल्कि खेतों में किसानों के साथ बातचीत से तय होती है।

मंत्री चौहान के इस दौरे का एक और प्रमुख उद्देश्य क्षेत्र विशेष की कृषि चुनौतियों जैसे मिट्टी की सेहत, फसल विविधीकरण, जल दक्षता और सतत् खेती पद्धतियों को समझना है। इसके साथ ही, वे आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत बीजों, कृषि यंत्रीकरण और मूल्य संवर्धन से संबंधित सरकारी योजनाओं के प्रति किसानों में जागरूकता भी बढ़ाएँगे।

‘मंडिया दिवस’ का यह आयोजन ओडिशा द्वारा मिलेट्स को बढ़ावा देने में निभाई जा रही अग्रणी भूमिका को रेखांकित करता है। वर्ष 2023 को ‘अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष’ घोषित किए जाने के बाद से ओडिशा ने कोरापुट, रायगड़ा और कंधमाल जैसे जिलों में सामुदायिक स्तर पर मिलेट आधारित कृषि प्रणालियों को सफलतापूर्वक विकसित किया है।

केंद्र सरकार द्वारा लागू योजनाओं — जैसे प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना (उत्पादकता वृद्धि हेतु), दलहन आत्मनिर्भरता मिशन (आयात निर्भरता कम करने हेतु), और राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (रासायनिक-मुक्त खेती को बढ़ावा देने हेतु) — के एकीकरण के माध्यम से सतत् कृषि अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव रखी जा रही है।

दिनभर की गतिविधियों के उपरांत, मंत्री चौहान भुवनेश्वर से विजयवाड़ा के लिए रवाना होंगे, जहाँ वे अगले दिन विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे।


भारत में कृषि शिक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास के माध्यम से “एक राष्ट्र – एक कृषि – एक टीम” के विजन को साकार करने की दिशा में प्रगति

No comments Document Thumbnail

कृषि: भारत की अर्थव्यवस्था और विकास का आधार

भारत की लगभग आधी आबादी की आजीविका का मुख्य स्रोत कृषि है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 18 प्रतिशत का योगदान देती है। उत्पादकता बढ़ाने, लागत घटाने और राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए उच्च शिक्षा, अनुसंधान और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से मानव क्षमता का निर्माण अत्यंत आवश्यक है।

कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार को इस क्षेत्र के तीन प्रमुख स्तंभ माना गया है। ये तीनों स्तंभ मिलकर उस संस्थागत और वैज्ञानिक ढांचे को बनाते हैं जो 5 प्रतिशत कृषि विकास दर को बनाए रखने और “विकसित कृषि एवं समृद्ध किसान” — अर्थात “विकसित भारत” की मूल अवधारणा — को साकार करने के लिए आवश्यक है। इस दृष्टि को प्राप्त करने के लिए इन तीनों स्तंभों को “वन नेशन – वन एग्रीकल्चर – वन टीम” की भावना के तहत समन्वयित रूप से कार्य करना होगा।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)

स्थापना और भूमिका:

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की स्थापना वर्ष 1929 में की गई थी। यह कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन एक शीर्ष संस्था है, जो भारत में कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य और पशु विज्ञान के अनुसंधान और उच्च शिक्षा का समन्वय करती है।

विस्तृत नेटवर्क:

ICAR का नेटवर्क विश्व के सबसे बड़े कृषि अनुसंधान नेटवर्क में से एक है, जिसमें 113 राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान और 74 कृषि विश्वविद्यालय शामिल हैं। इसने हरित क्रांति में अहम भूमिका निभाई और अब जलवायु-सहिष्णु, उच्च उत्पादक किस्मों एवं तकनीकों के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

प्रसार और गुणवत्ता:

ICAR देशभर में 731 कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) संचालित करता है, जो किसानों तक नवीन तकनीक पहुंचाने का कार्य करते हैं। यह संस्थान ICAR मॉडल एक्ट (संशोधित 2023) और कृषि महाविद्यालयों की स्थापना हेतु न्यूनतम आवश्यकताओं के मानक जारी करता है तथा राष्ट्रीय कृषि शिक्षा प्रत्यायन बोर्ड के माध्यम से संस्थानों का मान्यता प्रदान करता है।

कृषि शिक्षा संस्थान

सरकारी संस्थान:

भारत में वर्तमान में 63 राज्य कृषि विश्वविद्यालय (SAUs), 3 केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (CAUs) — (पूस, इंफाल, झांसी), 4 डीम्ड विश्वविद्यालय (IARI-नई दिल्ली, NDRI-कर्नाल, IVRI-इज़तनगर, CIFE-मुंबई), और 4 केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं जिनमें कृषि संकाय शामिल हैं। इसके अलावा, 11 एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी एप्लिकेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट्स (ATARI) केंद्र भी ICAR नेटवर्क का हिस्सा हैं।

निजी क्षेत्र की भूमिका:

राज्य सरकारों की अपनी नीतियों के तहत निजी कृषि संस्थानों की स्थापना और प्रोत्साहन किया जाता है। ICAR इन संस्थानों को मान्यता प्रदान करता है। पिछले पाँच वर्षों में ICAR द्वारा मान्यता प्राप्त निजी कृषि कॉलेजों की संख्या 2020–21 में 5 से बढ़कर 2024–25 में 22 हो गई है।

केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (CAUs)

  1. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा (बिहार):

    • अक्टूबर 2016 में राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय (1970 में स्थापित) को CAU में परिवर्तित किया गया।

    • इसमें 8 घटक कॉलेज हैं — कृषि, कृषि अभियांत्रिकी, सामुदायिक विज्ञान, मत्स्य, उद्यानिकी, वानिकी, जैव प्रौद्योगिकी, और खाद्य प्रौद्योगिकी।

    • विश्वविद्यालय के तीन परिसर पूसा (समस्तीपुर), ढोली (मुजफ्फरपुर) और पिपराकोठी (पूर्वी चंपारण) में हैं।

    • यह 18 कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) संचालित करता है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप लघु अवधि के प्रमाणपत्र एवं डिप्लोमा कार्यक्रम चलाता है।

  2. केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इंफाल (मणिपुर):

    • 1993 में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम, 1992 के तहत स्थापित।

    • यह पूर्वोत्तर भारत के 7 राज्यों — अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, सिक्किम, नागालैंड और त्रिपुरा — को सेवाएं प्रदान करता है।

    • इसके 13 घटक कॉलेज हैं और यह कृषि एवं संबद्ध विषयों में 10 स्नातक, 48 परास्नातक और 34 पीएच.डी. कार्यक्रम संचालित करता है।

  3. रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी (उत्तर प्रदेश):

    • कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (DARE) के अधीन संसद के अधिनियम (संख्या 10, 2014) द्वारा स्थापित।

    • विश्वविद्यालय कृषि, उद्यानिकी, पशु विज्ञान और कृषि अभियांत्रिकी में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में कार्य करता है।

    • इसके कॉलेज झांसी (UP) और दतिया (MP) में स्थित हैं।

कृषि में इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)

तकनीकी नवाचार:

सरकार IoT और AI तकनीकों को अपनाकर कृषि के आधुनिकीकरण को बढ़ावा दे रही है। इनका उपयोग सटीक कृषि (precision farming), ड्रोन तकनीक, जलवायु-स्मार्ट ग्रीनहाउस, कीट निगरानी, और रिमोट सेंसिंग में किया जा रहा है।

इनोवेशन हब्स:

डीएसटी के राष्ट्रीय मिशन ऑन इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स (NM-ICPS) के तहत 25 टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब्स (TIHs) स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 3 कृषि में IoT और AI अनुप्रयोगों पर केंद्रित हैं।
उदाहरण के लिए —

  • IIT रोपड़ का एग्री/वॉटर TIH केसर उत्पादन हेतु IoT सेंसर पर कार्य कर रहा है।

  • IIT मुंबई “Internet of Everything” TIH चला रहा है।

  • IIT खड़गपुर का AI4ICPS हब AI/ML समाधानों पर केंद्रित है।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर:

इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय ने IoT उत्कृष्टता केंद्र बेंगलुरु, गुरुग्राम, गांधीनगर और विशाखापट्टनम में स्थापित किए हैं। विशाखापट्टनम का CoE कृषि-तकनीक को बढ़ावा देने के लिए उद्योग, निवेशक और अकादमिक जगत को जोड़ता है।

स्टार्टअप इकोसिस्टम:

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत “इनोवेशन एंड एग्री-एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम” के माध्यम से कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप्स को आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये स्टार्टअप AI, IoT, ब्लॉकचेन, फूड टेक्नोलॉजी, और वैल्यू एडिशन जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं।

किसानों का कौशल विकास और प्रशिक्षण

सरकार ने किसानों को नई तकनीकों और बाजार की मांगों के अनुरूप ढालने के लिए कौशल विकास को प्राथमिकता दी है।

मुख्य कार्यक्रम:

  • स्किल ट्रेनिंग ऑफ रूरल यूथ (STRY) — 2021–24 के बीच 51,000 से अधिक ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित किया गया।

  • कृषि यांत्रिकीकरण उप-मिशन (SMAM) — 2021–25 के दौरान 57,000 किसानों को आधुनिक कृषि मशीनरी के उपयोग में प्रशिक्षित किया गया।

  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना (Soil Health Card) — जुलाई 2025 तक 25.17 करोड़ कार्ड जारी किए गए, 93,000+ प्रशिक्षण और 6.8 लाख प्रदर्शन आयोजित हुए।

  • कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) — 2021–25 के बीच 76 लाख से अधिक किसानों को प्रशिक्षित किया गया।

  • कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (ATMA) — 2021–25 के दौरान 1.27 करोड़ किसानों को प्रशिक्षण मिला।

  • किसान उत्पादक संगठन (FPOs) — 10,000 से अधिक पंजीकृत, जो किसानों को व्यवसाय और विपणन कौशल में प्रशिक्षित कर रहे हैं।

निष्कर्ष

भारत का कृषि शिक्षा और प्रशिक्षण तंत्र आज शिक्षा, अनुसंधान, तकनीक और कौशल विकास को एकीकृत रूप में जोड़ता है। ICAR, केंद्रीय और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों तथा कृषि विज्ञान केंद्रों ने एक मजबूत आधार बनाया है जिससे खेती अधिक उत्पादक, टिकाऊ और ज्ञान-आधारित बन रही है।

IoT, AI, और सटीक कृषि तकनीकों के उपयोग ने कृषि को आधुनिक और डेटा-आधारित दिशा में अग्रसर किया है। ATMA, STRY, और SMAM जैसी योजनाओं ने किसानों और ग्रामीण युवाओं को तकनीकी एवं उद्यमशीलता कौशल से सशक्त बनाया है।

इन पहलों के माध्यम से भारत न केवल आत्मनिर्भर खाद्य उत्पादन की दिशा में अग्रसर है, बल्कि एक मजबूत, समृद्ध और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण की ओर भी बढ़ रहा है।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.