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डिफॉल्ट सर्विस चार्ज वसूलने पर सीसीपीए का बड़ा एक्शन, देशभर के 41 रेस्तरां के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेकर की कार्रवाई

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केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन तथा अनुचित व्यापारिक गतिविधियों के तहत ग्राहकों के बिल में डिफॉल्ट रूप से सर्विस चार्ज जोड़ने के मामले में देशभर के 41 रेस्तरां के खिलाफ स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए कार्रवाई शुरू की है।

यह कार्रवाई राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline-NCH) पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर की गई। शिकायतों के साथ प्रस्तुत बिलों से यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित रेस्तरां उपभोक्ताओं की स्पष्ट सहमति के बिना उनके बिल में स्वतः सर्विस चार्ज जोड़ रहे थे।

जांच के दौरान सीसीपीए ने पाया कि यह प्रथा 4 जुलाई 2022 को जारी होटलों एवं रेस्तरां में सर्विस चार्ज वसूली संबंधी अनुचित व्यापारिक गतिविधियों की रोकथाम और उपभोक्ता हित संरक्षण दिशानिर्देशों का उल्लंघन है। साथ ही यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(47) के तहत अनुचित व्यापारिक गतिविधि (Unfair Trade Practice) की श्रेणी में आती है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखी गाइडलाइन की वैधता

28 मार्च 2025 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया बनाम भारत संघ मामले में सीसीपीए की सर्विस चार्ज संबंधी गाइडलाइन को वैध ठहराते हुए कहा कि अनिवार्य रूप से सर्विस चार्ज वसूलना कानून के विरुद्ध है।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी होटल एवं रेस्तरां इन दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य हैं तथा सीसीपीए कानून के अनुसार इनके अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।

सीसीपीए की गाइडलाइन के प्रमुख प्रावधान

  • कोई भी होटल या रेस्तरां भोजन के बिल में स्वतः या डिफॉल्ट रूप से सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकता।

  • किसी अन्य नाम से भी सर्विस चार्ज की वसूली नहीं की जा सकती।

  • उपभोक्ता को सर्विस चार्ज देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यह पूरी तरह स्वैच्छिक एवं वैकल्पिक है।

  • सर्विस चार्ज नहीं देने पर किसी भी उपभोक्ता को सेवा देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • भोजन के बिल में सर्विस चार्ज जोड़कर उस पर जीएसटी नहीं लगाया जा सकता।

सीसीपीए की कार्रवाई

एक मामले में चायोस (Sunshine Teahouse Pvt. Ltd.) पर उपभोक्ता के बिल में डिफॉल्ट सर्विस चार्ज जोड़ने के लिए 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही कंपनी को उपभोक्ता से वसूला गया सर्विस चार्ज वापस करने का निर्देश दिया गया है।

प्राधिकरण ने कंपनी को अपने सभी आउटलेट्स के सॉफ्टवेयर आधारित बिलिंग सिस्टम में संशोधन करने का भी निर्देश दिया है, ताकि भविष्य में किसी भी उपभोक्ता के बिल में स्वतः सर्विस चार्ज या इसी प्रकार का कोई शुल्क न जोड़ा जाए।

सीसीपीए ने निम्नलिखित रेस्तरां के खिलाफ भी अंतिम आदेश जारी किए हैं—

  • कैफे ब्लू बॉटल, पटना

  • चाइना गेट रेस्टोरेंट प्राइवेट लिमिटेड

  • फिएस्टा बारबेक्यू नेशन

  • फू अहमदाबाद रेस्टोरेंट

  • एल'ओपेरा फ्रेंच बेकरी प्राइवेट लिमिटेड

  • ज़ोरो – द लग्जरी नाइट क्लब

  • चायोस (Sunshine Teahouse Pvt. Ltd.)

अन्य रेस्तरां के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की जांच एवं कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

उपभोक्ता कहां करें शिकायत?

यदि किसी रेस्तरां द्वारा आपकी सहमति के बिना बिल में सर्विस चार्ज जोड़ा जाता है, तो इसकी शिकायत राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) पर टोल-फ्री नंबर 1915 या एनसीएच प्लेटफॉर्म के माध्यम से दर्ज कराई जा सकती है।

सीसीपीए ने कहा है कि वह सर्विस चार्ज से संबंधित शिकायतों पर लगातार नजर रखे हुए है और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 तथा संबंधित दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। प्राधिकरण का उद्देश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना तथा आतिथ्य क्षेत्र में पारदर्शी, निष्पक्ष और उपभोक्ता हितैषी व्यावसायिक व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

WTO MC14 में भारत की मजबूत पैरवी, समानता और सर्वसम्मति आधारित व्यापार प्रणाली पर जोर

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याउंडे (कैमरून)- विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) के दूसरे दिन WTO सुधार से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदस्य देशों के व्यापार मंत्रियों ने चर्चा की। भारत की ओर से केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।

बैठक में गोयल ने कहा कि सर्वसम्मति (consensus) आधारित निर्णय प्रक्रिया WTO की विश्वसनीयता की आधारशिला है और किसी भी सदस्य देश को उसकी सहमति के बिना नियमों में बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने पारदर्शी, समावेशी और सदस्य-आधारित चर्चा पर जोर देते हुए कहा कि WTO को वर्तमान चुनौतियों का गंभीरता से आकलन करना चाहिए।

भारत के प्रमुख मुद्दे

  • खाद्य सुरक्षा (Food Security)

  • पब्लिक स्टॉकहोल्डिंग (PSH)

  • विशेष सुरक्षा तंत्र (SSM)

  • कॉटन से जुड़े मुद्दे

भारत ने कहा कि इन लंबित मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और वैश्विक व्यापार प्रणाली में मौजूद असमानताओं (asymmetries) को दूर करना आवश्यक है।

अन्य महत्वपूर्ण बिंदु

  • डिस्प्यूट सेटलमेंट सिस्टम की कमजोरी पर चिंता

  • छोटे देशों के हितों की रक्षा की आवश्यकता

  • पारदर्शिता का दुरुपयोग कर व्यापारिक दबाव बनाने के खिलाफ चेतावनी

  • सभी देशों को समान अवसर देने पर जोर

भारत का रुख

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने WTO सुधार प्रक्रिया को समयबद्ध और ठोस आधार पर आगे बढ़ाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सुधार प्रक्रिया:

  • पारदर्शी

  • समावेशी

  • सदस्य-प्रेरित (member-driven) होनी चाहिए

द्विपक्षीय बैठकें

सम्मेलन के दौरान पीयूष गोयल ने:

  • अमेरिका, चीन, कोरिया, स्विट्जरलैंड, न्यूजीलैंड, कनाडा, मोरक्को और ओमान के प्रतिनिधियों से मुलाकात की

  • व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की

WTO MC14 में भारत ने वैश्विक व्यापार में संतुलन, समान अवसर और विकासशील देशों के हितों की रक्षा पर जोर दिया।


CCPA की सख्त कार्रवाई — Dikshant IAS और Abhimanu IAS पर ₹8 लाख का जुर्माना, भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ बड़ा कदम

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केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने Dikshant IAS और Abhimanu IAS को भ्रामक विज्ञापन, अनुचित व्यापार प्रथाओं और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन के लिए दोषी पाया है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत दोनों संस्थानों पर ₹8,00,000-₹8,00,000 का जुर्माना लगाया गया है।


यह निर्णय उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और यह सुनिश्चित करने के लिए लिया गया कि किसी भी वस्तु या सेवा के संबंध में गलत या भ्रामक विज्ञापन जारी न किए जाएँ, जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 का उल्लंघन करते हों।

Dikshant IAS का मामला

CCPA को मिनी शुक्ला (AIR 96, UPSC CSE 2021) की शिकायत प्राप्त हुई थी, जिन्होंने बताया कि उनके नाम और फोटो का उपयोग संस्था ने उनकी सहमति के बिना अपने विज्ञापनों में किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे Dikshant IAS से कभी जुड़ी नहीं थीं और केवल एक मॉक इंटरव्यू में शामिल हुई थीं, जो बाद में उन्हें पता चला कि Chahal Academy के साथ संयुक्त रूप से आयोजित हुआ था।

जाँच में पाया गया कि Dikshant IAS ने “200+ Results in UPSC CSE 2021” का दावा किया था, परंतु संस्था इसे प्रमाणित करने में असमर्थ रही। केवल 116 नामांकन फॉर्म प्रस्तुत किए जा सके। साथ ही, चहल एकेडमी के साथ किसी औपचारिक समझौते या विद्यार्थियों की जानकारी साझा करने के प्रमाण नहीं मिले।
प्राधिकरण ने पाया कि संस्था ने संभावित छात्रों को भ्रमित करने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई, जिससे ऐसा प्रतीत हुआ मानो सभी सफल उम्मीदवार उनकी पूर्ण तैयारी का हिस्सा थे।

Abhimanu IAS का मामला

नताशा गोयल (AIR 175, UPSC CSE 2022) ने शिकायत की कि उनके नाम और फोटो का उपयोग Abhimanu IAS ने बिना अनुमति के किया। संस्थान ने झूठा दावा किया कि वे उसकी छात्रा थीं, जबकि उन्होंने केवल एक प्रश्न बैंक साझा किया था और मॉक इंटरव्यू कभी हुआ ही नहीं।

CCPA की जांच में पाया गया कि संस्था ने “2200+ Selections since Inception”, “10+ Selections in IAS Top 10” और “1st Rank in HCS/PCS/HAS” जैसे दावे किए, परंतु इन दावों को साबित करने के लिए कोई विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।
कई चयन 2001–2012 के बीच हुए थे, परंतु विज्ञापनों में इस अवधि का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे यह झूठा प्रभाव उत्पन्न हुआ कि संस्था हाल ही में भी शीर्ष परिणाम दे रही है।

CCPA का रुख

CCPA ने पाया कि इन दोनों संस्थानों ने धारा 2(28) और धारा 2(47) का उल्लंघन किया है — यानी भ्रामक विज्ञापन जारी करना और उपभोक्ताओं से महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना।
शिक्षा क्षेत्र में इस प्रकार की गलत जानकारी छात्रों को भ्रमित करती है, जो अपनी मेहनत, समय और धन निवेश करते हैं।

अब तक CCPA ने 57 कोचिंग संस्थानों को ऐसे भ्रामक विज्ञापनों के लिए नोटिस जारी किए हैं और 27 संस्थानों पर ₹98.6 लाख से अधिक का जुर्माना लगाया है।
CCPA ने सभी सफल उम्मीदवारों से आग्रह किया है कि यदि किसी कोचिंग संस्थान ने उनके नाम या फोटो का गलत उपयोग किया हो तो वे तत्काल शिकायत दर्ज कराएं।


उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने लीगल मेट्रोलॉजी (सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्र) नियम, 2013 में महत्वपूर्ण संशोधन किए

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उपभोक्ता मामले विभाग, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने लीगल मेट्रोलॉजी (सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्र) नियम, 2013 में महत्वपूर्ण संशोधनों की अधिसूचना जारी की है। ये संशोधन भारत की भार एवं माप सत्यापन अवसंरचना को विस्तार देने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं, जिससे व्यापार में पारदर्शिता, सटीकता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। संशोधित नियम उपभोक्ता संरक्षण को सशक्त करने, Ease of Doing Business को बढ़ावा देने और भारत की सत्यापन प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम मानकों के अनुरूप लाने का उद्देश्य रखते हैं।

संशोधित नियमों के तहत सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्रों (GATCs) के दायरे को काफी बढ़ाया गया है, जिसमें अब 18 प्रकार के भार और माप यंत्र शामिल किए गए हैं, जैसे — जल मीटर, ऊर्जा मीटर, गैस मीटर, नमी मापी (Moisture Meter), फ्लो मीटर, स्फिग्मोमैनोमीटर (रक्तचाप मापक यंत्र) और नॉन-ऑटोमैटिक वज़न मापक उपकरण आदि। ये 18 श्रेणियाँ हैं:

  1. जल मीटर

  2. स्फिग्मोमैनोमीटर

  3. नैदानिक थर्मामीटर

  4. स्वचालित रेल वेब्रिज

  5. टेप माप

  6. नॉन-ऑटोमैटिक वज़न मापक (क्लास III) (150 किग्रा तक)

  7. नॉन-ऑटोमैटिक वज़न मापक (क्लास IIII)

  8. लोड सेल

  9. बीम स्केल

  10. काउंटर मशीन

  11. सभी श्रेणियों के वज़न

  12. गैस मीटर

  13. ऊर्जा मीटर

  14. नमी मापक यंत्र (Moisture Meter)

  15. वाहनों के लिए गति मापक (Speed Meter)

  16. ब्रेथ एनालाइज़र

  17. बहुआयामी मापन यंत्र

  18. फ्लो मीटर

नए यंत्रों जैसे फ्लो मीटर, ब्रेथ एनालाइज़र, बहुआयामी मापन यंत्र और स्पीड गन को शामिल किया जाना यह दर्शाता है कि सरकार बदलती प्रौद्योगिकियों और औद्योगिक आवश्यकताओं के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। ये उपकरण स्वास्थ्य सेवा, परिवहन, ऊर्जा और बुनियादी ढाँचे जैसे क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जहाँ सटीक माप सुरक्षा, गुणवत्ता और उपभोक्ता विश्वास से सीधे जुड़ा होता है।

Radar equipment  

निजी प्रयोगशालाओं और उद्योगों की भागीदारी को सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्र (GATC) के रूप में मान्यता देना सत्यापन क्षमता को बढ़ाएगा, उपलब्धता में सुधार करेगा और उद्योगों के लिए प्रतीक्षा समय को कम करेगा।

Gas Meter

यह पहल आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण का समर्थन करती है, क्योंकि इससे देश में स्वदेशी परीक्षण सुविधाओं को बढ़ावा मिलेगा और सार्वजनिक–निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से राष्ट्रीय सत्यापन नेटवर्क का विस्तार होगा। साथ ही, रीजनल रेफरेंस स्टैंडर्ड लेबोरेटरी (RRSL) और नेशनल टेस्ट हाउस (NTH) को deemed GATC के रूप में मान्यता देने से उपभोक्ता-संबंधी यंत्रों के सत्यापन के लिए देशव्यापी नेटवर्क सुनिश्चित होगा।

  Moisture Meter  

\नियमित और विकेन्द्रित सत्यापन से वज़न मापक, जल मीटर, ऊर्जा मीटर आदि की सटीकता बनी रहेगी, जिससे उपभोक्ताओं को उनके पैसे का पूरा मूल्य मिलेगा। इन संशोधनों से राज्य विधिक मापविज्ञान विभागों (State Legal Metrology Departments) की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी, क्योंकि GATCs के सत्यापन कार्य संभालने से राज्य अधिकारी निरीक्षण, प्रवर्तन और उपभोक्ता शिकायत निवारण पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।

संशोधनों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि GATCs को जिला स्तर और राज्य भर में सत्यापन करने की अनुमति होगी। साथ ही, एक नया पंचम अनुसूची (Fifth Schedule) जोड़ा गया है, जिससे सत्यापन शुल्कों का एकरूपीकरण किया गया है। अब GATC मान्यता के लिए आवेदन उपभोक्ता मामले विभाग के संयुक्त सचिव को निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत करना होगा। इसमें निरीक्षण, कर्मचारियों की योग्यता, तकनीकी आवश्यकताओं और शुल्क भुगतान के लिए डिजिटल माध्यम जैसी स्पष्ट प्रक्रियाएँ तय की गई हैं। यह पारदर्शी और संरचित व्यवस्था अनुपालन बोझ को कम करेगी, सेवा वितरण में तेजी लाएगी और उद्योग जगत में विश्वास बढ़ाएगी।

Breath Analyzer

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 25 अक्टूबर 2025 को गोवा में आयोजित राष्ट्रीय नियंत्रक सम्मेलन (National Controller’s Conference) में कहा —

“लीगल मेट्रोलॉजी (सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्र) नियमों में संशोधन भारत की विधिक मापन प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह उद्योग भागीदारी को सशक्त बनाता है, उपभोक्ताओं के लिए सटीक माप सुनिश्चित करता है और हमारे प्रवर्तन अधिकारियों को मज़बूत बनाता है। इस सुधार से भारत एक पारदर्शी, तकनीक-संचालित और आत्मनिर्भर सत्यापन प्रणाली की ओर अग्रसर है, जो व्यापार में निष्पक्षता को बढ़ावा देगी और उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा करेगी।”

इन सुधारों के माध्यम से भारत ने यह दिखाया है कि वह एक वैज्ञानिक और पारदर्शी मापन प्रणाली के प्रति प्रतिबद्ध है, जो अंतरराष्ट्रीय विधिक माप संगठन (OIML) की अनुशंसाओं के अनुरूप है। ये संशोधन न केवल मापन-आधारित लेनदेन में सटीकता और जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे, बल्कि वैश्विक व्यापार में भारत की साख और मानक अनुपालन को भी मज़बूत करेंगे।

एक OIML प्रमाणन प्राधिकरण (Certification Authority) के रूप में, अब भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य OIML प्रमाणपत्र जारी करने में सक्षम है। इससे भारतीय निर्माता अब देश में ही वैश्विक स्तर पर मान्य प्रमाणन प्राप्त कर सकेंगे, जिन्हें पहले विदेशी प्राधिकरणों पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे लागत और समय दोनों की बचत होगी तथा भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता वैश्विक मापन उपकरण बाज़ार में बढ़ेगी।

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