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समाज में न्याय और समानता की प्रेरणा देता रहेगा बाबा साहेब का जीवन : मुख्यमंत्री

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रायपुर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की 21 फीट ऊंची प्रतिमा का भव्य अनावरण

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर कलेक्ट्रेट परिसर के सामने स्थित डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर चौक में उनकी 21 फीट ऊंची पंचधातु से निर्मित भव्य प्रतिमा का अनावरण किया।

इस अवसर पर आयोजित गरिमामय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बाबा साहेब का जीवन संघर्ष, शिक्षा और समानता की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के नेतृत्व और उनके द्वारा निर्मित भारतीय संविधान ने वंचित, शोषित और पिछड़े वर्गों को समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाया है। उनके विचार आज भी समाज को न्याय और समानता की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग दिखाते हैं।

मुख्यमंत्री ने आयोजन समिति की मांग पर मंगल भवन, सामुदायिक भवन सहित विभिन्न निर्माण एवं जीर्णोद्धार कार्यों के लिए 60 लाख रुपये की राशि स्वीकृत करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह राशि स्थानीय स्तर पर सामाजिक गतिविधियों और जनसुविधाओं को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार प्रदान किया है। इसी कारण आज समाज के सभी वर्गों को अपने जीवन में आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए कहा कि बाबा साहेब ने विपरीत परिस्थितियों में भी कोलंबिया विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त कर यह सिद्ध किया कि शिक्षा ही समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम है।

उन्होंने कहा कि आज देश के प्रत्येक कोने में बाबा साहेब की प्रतिमाएं स्थापित हैं, जो उनके प्रति लोगों के अटूट सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक हैं। रायपुर सहित पूरे प्रदेश में उनकी जयंती हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है, जिससे नई पीढ़ी निरंतर प्रेरणा प्राप्त कर रही है।

मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण पर बाबा साहेब के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी समाज की प्रगति वहां की महिलाओं की स्थिति से आंकी जाती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए निरंतर ठोस कदम उठा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार बाबा साहेब के सपनों को साकार करने की दिशा में कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जनधन योजना और जल जीवन मिशन जैसी योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का माध्यम बन रही हैं। उन्होंने कहा कि “विकसित भारत” के लक्ष्य के साथ छत्तीसगढ़ सरकार भी “विकसित छत्तीसगढ़” के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है, जिसमें बाबा साहेब के आदर्श मार्गदर्शक हैं।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने नागरिकों से आह्वान किया कि वे बाबा साहेब के विचारों को आत्मसात करते हुए सामाजिक समरसता, समानता और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

इस अवसर पर कौशल विकास मंत्री खुशवंत साहेब, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक किरण सिंह देव, महापौर नगर पालिक निगम रायपुर मीनल चौबे, विधायक पुरंदर मिश्रा,  अनुज शर्मा, छत्तीसगढ़ खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा, छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

संविधान के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प: समरसता भोज में शामिल हुए मुख्यमंत्री साय

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संविधान हमारे लोकतंत्र की आत्मा है और समरसता उसकी सबसे बड़ी शक्ति - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के शंकरनगर स्थित दुर्गा मैदान में डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर   आयोजित समरसता भोज कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने जनप्रतिनिधियों और आमजन के साथ बैठकर भोजन किया तथा स्वयं लोगों को भोजन परोसकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसके संविधान का निर्माण करने का गौरव बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को प्राप्त है। उन्होंने कहा कि यह संविधान देश के 140 करोड़ नागरिकों को समानता, अधिकार और गरिमा के साथ जीवन जीने का आधार प्रदान करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने दृढ़ संकल्प और अदम्य इच्छाशक्ति के बल पर उच्चतम स्थान प्राप्त किया और समाज के वंचित, शोषित एवं कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने नारी शिक्षा और सम्मान के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य किए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले और माता सावित्रीबाई फुले द्वारा प्रारंभ किए गए नारी शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के अभियान को बाबा साहेब ने आगे बढ़ाया और उसे नई दिशा दी।


उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बाबा साहेब के जन्म, शिक्षा, दीक्षा, कार्य और समाधि स्थलों को “पंच तीर्थ” के रूप में विकसित कर उन्हें सच्चा और स्थायी सम्मान दिया जा रहा है। 

इस अवसर पर मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि बाबा साहेब का जीवन संघर्ष, शिक्षा और समरसता का प्रेरक उदाहरण है। उनके विचार आज भी समाज को समानता और न्याय की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। समरसता भोज जैसे आयोजन सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक किरण सिंह देव ने कहा कि बाबा साहेब ने संविधान के माध्यम से समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ाने की मजबूत व्यवस्था दी। आज मुख्यमंत्री साय और के नेतृत्व में अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का कार्य निरंतर किया जा रहा है।

समरसता भोज कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा,  छत्तीसगढ़ खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित  थे।

आंबेडकर जयंती पर संसद परिसर में श्रद्धांजलि, नेताओं ने बाबासाहेब के विचारों को बताया प्रेरणास्रोत

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नई दिल्ली- सी. पी. राधाकृष्णन,नरेंद्र मोदीऔर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज संसद भवन परिसर स्थित प्रेरणा स्थल में डॉ. बी. आर. आंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

इस अवसर पर कई केंद्रीय मंत्री, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्षमल्लिकार्जुन खड़गे, राज्यसभा के उपसभापति  हरिवंश, सांसद, पूर्व सांसद तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे और उन्होंने बाबासाहेब को नमन किया।

इसके बाद संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में भी डॉ. आंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर लोकसभा सचिवालय के महासचिव उत्पल कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

 “Know Your Leader” कार्यक्रम में युवाओं को संदेश

संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित “Know Your Leader” कार्यक्रम के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर ने अपने जीवन की हर चुनौती को अवसर में बदल दिया। उनका जीवन, विचार और राष्ट्र निर्माण में योगदान हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।

उन्होंने कहा कि संविधान में समानता का अधिकार और बिना भेदभाव के मतदान का अधिकार जैसे प्रावधानों ने एक मजबूत और प्रगतिशील भारत की नींव रखी है, जो आज विश्व के लोकतंत्रों को भी प्रेरित कर रहा है।

 युवाओं को “Nation First” का संदेश

लोकसभा अध्यक्ष ने युवाओं को देश के भविष्य का सच्चा प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि उन्हें हमेशा “Nation First” की भावना के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं की प्रतिभा, कौशल और नवाचार भारत को एक मजबूत और विकसित राष्ट्र बनाएंगे।

सोशल मीडिया पर भी साझा किया संदेश

ओम बिरला ने सोशल मीडिया मंच X पर अपने संदेश में कहा कि डॉ. आंबेडकर का जीवन संघर्ष, साहस और समर्पण की प्रेरणादायक गाथा है। उन्होंने विषम परिस्थितियों में भी शिक्षा और कड़ी मेहनत के बल पर सफलता हासिल की और करोड़ों वंचितों के लिए आशा की किरण बने।

उन्होंने कहा कि बाबासाहेब ने समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व के मूल्यों को अपने जीवन का आधार बनाया और इन्हें संविधान में शामिल कर देश को एक मजबूत दिशा दी।

निष्कर्ष

आंबेडकर जयंती के अवसर पर संसद परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने बाबासाहेब के विचारों और उनके योगदान को पुनः स्मरण कराया। नेताओं ने एक स्वर में कहा कि डॉ. आंबेडकर के आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और एक समावेशी, न्यायपूर्ण और सशक्त भारत के निर्माण में मार्गदर्शक बने रहेंगे।

आंबेडकर जयंती पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संदेश: सामाजिक समरसता और शिक्षा पर दिया जोर

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गांधीनगर- द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को गुजरात के गांधीनगर स्थित लोक भवनमें आयोजित ‘सामाजिक समरसता महोत्सव’ में भाग लिया। यह कार्यक्रम डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकरकी जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रपति ने बाबासाहेब को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने देश के विकास और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में बहुआयामी योगदान दिए हैं। उन्होंने संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देश को एक मजबूत लोकतांत्रिक ढांचा प्रदान किया। राष्ट्रपति ने कहा कि आंबेडकर केवल एक महान विधिवेत्ता ही नहीं, बल्कि एक कुशल अर्थशास्त्री और समाज सुधारक भी थे, जिन्होंने बैंकिंग, सिंचाई, बिजली, श्रम प्रबंधन और केंद्र-राज्य संबंधों जैसे क्षेत्रों में भी अहम योगदान दिया।

उन्होंने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि बाबासाहेब ने हमेशा शिक्षा को सशक्त समाज की नींव माना। संविधान में शिक्षा को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया गया है और वंचित वर्गों के हितों की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। राष्ट्रपति ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे समाज के कमजोर वर्गों को शिक्षा के प्रति जागरूक करें और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।

सामाजिक समरसता पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि करुणा और समानता समाज की एकता के मूल आधार हैं। उन्होंने कहा कि जब लोग जाति, वर्ग, भाषा और क्षेत्र के भेदभाव से ऊपर उठकर एकता और भाईचारे की भावना अपनाते हैं, तभी सच्ची सामाजिक समरसता स्थापित होती है। उन्होंने कहा कि भारत के सभी नागरिक एक हैं और देश की प्रगति के लिए एकजुट रहना आवश्यक है।

राष्ट्रपति ने गुजरात में सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों—जैसे वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, पशुपालन और कृषि विकास—की सराहना भी की।

अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने डॉ. आंबेडकर के उस संदेश को याद किया, जिसमें उन्होंने सामाजिक लोकतंत्र को जीवन का आधार बताते हुए स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को उसके मूल तत्व बताया था।

निष्कर्ष

राष्ट्रपति के इस संबोधन ने डॉ. आंबेडकर के विचारों और उनके आदर्शों को पुनः जीवंत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा, समानता और सामाजिक समरसता के मार्ग पर चलकर ही एक सशक्त, समावेशी और विकसित भारत का निर्माण संभव है।

मानव अधिकार दिवस 2025: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विकास और समानता के दृष्टिकोण से मानव अधिकारों पर जोर दिया

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भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मू, ने आज नई दिल्ली में आयोजित मानव अधिकार दिवस समारोह में संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि मानव अधिकार अविच्छेद्य हैं और एक न्यायपूर्ण, समान और सहानुभूतिपूर्ण समाज की आधारशिला हैं। राष्ट्रपति ने मानव अधिकारों को अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित करने और ‘अंत्योदय’ की भावना में विकसित भारत 2047 के निर्माण में हर नागरिक की भागीदारी पर जोर दिया।

उन्होंने संविधान में निहित मानव अधिकारों का महत्व बताते हुए कहा कि ये अधिकार सामाजिक लोकतंत्र, भयमुक्त जीवन, शिक्षा, काम करने का अधिकार और गरिमा के साथ बुढ़ापा सुनिश्चित करते हैं। राष्ट्रपति ने महिलाओं के सशक्तिकरण और उनकी सुरक्षा को मानव अधिकारों के मुख्य स्तंभों में बताया।

राष्ट्रपति ने एनएचआरसी, राज्य मानव अधिकार आयोग, न्यायपालिका और नागरिक समाज की भूमिका की सराहना की और कहा कि सरकार ने पिछले दशक में अधिकारों के संरक्षण और सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से मानव अधिकारों की सुरक्षा को साझा जिम्मेदारी मानने का आह्वान किया।



अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस हमें यह सिखाता है कि सक्षम समाज वही है जो सबको साथ लेकर चलता है — मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के अवसर पर कहा कि दिव्यांगजन  हमारे समाज का अभिन्न हिस्सा है। छत्तीसगढ़ सरकार दिव्यांगजनो के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस समाज को यह समझने का अवसर देता है कि दिव्यांगजन किसी भी दृष्टि से कमतर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एक सशक्त और प्रगतिशील समाज वही है जो सभी को बराबरी के अवसर प्रदान करे और किसी भी व्यक्ति को उसकी शारीरिक सीमाओं के कारण पीछे नहीं रहने दे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों के अधिकार, सम्मान और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। छत्तीसगढ़ में शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएँ, सहायता उपकरण, कौशल-विकास, रोजगार अवसर, सामाजिक सुरक्षा और अनुकूल वातावरण निर्माण के लिए अनेक योजनाएँ सुदृढ़ रूप से लागू की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य दिव्यांगजनों को मुख्यधारा में समान और सशक्त भागीदारी दिलाने का है, ताकि वे अपनी पूर्ण क्षमता के साथ राज्य के विकास में सक्रिय योगदान दे सकें।

मुख्यमंत्री ने समाज के सभी वर्गों से आह्वान किया कि दिव्यांगजनों के प्रति दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन लाएँ और उनके साथ सम्मानजनक, सहयोगपूर्ण और संवेदनशील व्यवहार अपनाएँ। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन तभी वास्तविक रूप से सशक्त होंगे जब समाज और शासन मिलकर ऐसी परिस्थितियाँ तैयार करें, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमताओं के अनुरूप आगे बढ़ सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस हमें समावेशी विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करने का संदेश देता है।

ज्योतिबा फुले के विचार आज भी प्रासंगिक

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 पुण्यतिथि पर संगोष्ठी आयोजित,जीवनी को पाठ्यक्रम में शामिल करने की उठी मांग 

अभनपुर- मरार पटेल समाज अभनपुर राज एवं छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन रायपुर संभाग के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को अभनपुर स्थित शाकंभरी भवन में महात्मा ज्योतिबा फुले की पुण्यतिथि पर एक गरिमामय संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों, चिंतकों और विशिष्ट वक्ताओं ने भाग लेकर महात्मा फुले के जीवन, संघर्ष और विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में अंतर्राष्ट्रीय कलाकार डॉ. कृष्ण कुमार पाटिल, वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. मनीष श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार एवं पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के संरक्षक आनंदराम पत्रकारश्री, सांसद प्रतिनिधि रायपुर अनिल अग्रवाल, सेवानिवृत्त अपर संचालक राजेंद्र पटेल, प्रदेश संयोजक सर्व समाज ब्रह्मदेव पटेल, जिलाध्यक्ष रायपुर एवं संभाग अध्यक्ष छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन ईश्वर पटेल, महामंत्री रायपुर संभाग वेदव्यास धीवर, पूर्व उपाध्यक्ष मरार पटेल समाज त्रिपुरारी पटेल, सर्व समाज उपाध्यक्ष फतीश साहू, महामंत्री सर्व समाज वेदव्यास देवांगन, कोषाध्यक्ष सर्व समाज भरत देवांगन, समाजसेवी नारायण सोनी और महेन्द्र पटेल उपस्थित रहे।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके जीवनकाल में थे। सामाजिक विषमताओं, अशिक्षा, कुरीतियों, स्त्री शिक्षा तथा विधवा पुनर्विवाह जैसे मुद्दों पर फुले दंपत्ति—ज्योतिबा फुले और माता सावित्रीबाई—ने जिस साहस और दृढ़ता के साथ कार्य किया, वह वर्तमान समाज के लिए प्रेरणादायक है। वक्ताओं ने कहा कि फुले ने प्रतिकूल परिस्थितियों में समाज सुधार का जो मार्ग प्रशस्त किया, वह आज भी सामाजिक जागरूकता की दिशा में प्रकाशस्तंभ की तरह है।

संगोष्ठी में सर्वसम्मति से यह आग्रह किया गया कि महात्मा ज्योतिबा फुले की जीवनी और योगदान को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, ताकि बच्चे प्रारंभिक स्तर से ही समानता, शिक्षा और सामाजिक न्याय के मूल्यों से परिचित हो सकें। साथ ही यह भी प्रस्ताव रखा गया कि चौराहों, सार्वजनिक स्थलों और विद्यालयों में महात्मा फुले एवं भारत की प्रथम शिक्षिका माता सावित्रीबाई फुले की प्रतिमाएं एवं छायाचित्र स्थापित किए जाएं। वक्ताओं ने कहा कि शासन को प्रदेश के सभी स्कूलों में फुले दंपत्ति के छायाचित्र उपलब्ध कराने चाहिए, ताकि नई पीढ़ी उनके योगदान को जान सके।

आभार प्रदर्शन करते हुए ईश्वर पटेल ने कहा कि आने वाले वर्षों में महात्मा फुले की जयंती एवं पुण्यतिथि पर और भी बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाया जा सके। कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं को माता सावित्रीबाई और ज्योतिबा फुले की छायाचित्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर धर्मेंद्र पटेल, अवध राम पटेल, मधुसूदन पटेल, कोमल पटेल, व्यास नारायण पटेल, झड़ीराम पटेल, मिलन पटेल, नोहर पटेल, संजय पटेल, तिहारु राम पटेल, रिखीराम पटेल, लक्ष्मण पटेल, पंचूराम पटेल, बंसीलाल पटेल, संतोष पटेल, कमलेश पटेल, गोपाल पटेल, दौलत राम पटेल सहित सर्व समाज के बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही।

केरल राज्य में ओबीसी आरक्षण की समीक्षा — धर्म के आधार पर दिए गए आरक्षण पर आयोग ने माँगा स्पष्टीकरण

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नई दिल्ली- राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (National Commission for Backward Classes – NCBC) द्वारा 09 सितम्बर, 2025 को केरल राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण की स्थिति पर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता माननीय हंसराज अहीर, अध्यक्ष, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने की।

बैठक में यह तथ्य सामने आया कि केरल राज्य में धर्म के आधार पर मुसलमानों को 10 प्रतिशत तथा ईसाइयों को 6 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। आयोग ने इसे मूल ओबीसी समुदायों के अधिकारों का उल्लंघन मानते हुए गंभीर आपत्ति व्यक्त की।

आयोग के अनुसार, इस प्रकार का धार्मिक वर्गीकरण संवैधानिक और विधिक दृष्टि से अनुचित है तथा इससे मूल ओबीसी जातियों के अधिकारों और हिस्से पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

आयोग द्वारा राज्य सरकार से माँगा गया स्पष्टीकरण

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने राज्य सरकार के सचिव, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा कि —

  • क्या मुसलमानों और ईसाइयों को धर्म के आधार पर ओबीसी आरक्षण प्रदान किया गया है?

  • क्या यह आरक्षण किसी सर्वेक्षण रिपोर्ट, जाँच प्रतिवेदन या न्यायालय के आदेश पर आधारित है?

  • यदि ऐसा है, तो इन आरक्षणों के लिए ठोस प्रमाण, रिपोर्ट और नीतिगत आधार प्रस्तुत किए जाएँ।

आयोग ने पाया कि राज्य सरकार के अधिकारी इस संबंध में कोई साक्ष्य या ठोस आधार प्रस्तुत करने में असमर्थ रहे।

आयोग की टिप्पणियाँ और निर्देश

आयोग ने यह भी प्रश्न किया कि क्या राज्य सरकार, सामाजिक न्याय मंत्रालय अथवा राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने कभी इस आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की है और क्या सुधार की कोई प्रक्रिया चल रही है। इस पर भी राज्य सरकार के अधिकारियों ने स्पष्ट उत्तर देने में असमर्थता जताई।

इस स्थिति को देखते हुए आयोग ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि —

“धर्म आधारित ओबीसी आरक्षण के संबंध में समस्त दस्तावेज़, रिपोर्ट और नीतिगत आधार 15 दिनों के भीतर आयोग को प्रस्तुत किए जाएँ।”

आयोग ने यह भी पाया कि केरल राज्य में भर्ती प्रक्रियाओं में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत से कम है तथा शिक्षा और चिकित्सा शिक्षा में भी आरक्षण का अनुपात असमान है। इस पर आयोग ने असंतोष व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से सम्पूर्ण आरक्षण नीति, उसके आधार, और धार्मिक समुदायों के नाम पर दिए गए आरक्षणों की सूची प्रस्तुत करने को कहा।

आयोग की टिप्पणी

आयोग ने 26 सितम्बर, 2025 को प्रस्तुत किए गए केरल सरकार के दस्तावेजों की समीक्षा के बाद कहा कि —

“राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ अस्पष्ट हैं और उनमें आरक्षण के लिए निर्धारित मानकों एवं दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया है।”

आयोग ने माना कि मूल ओबीसी जातियों के आरक्षण का हिस्सा मुसलमानों और ईसाइयों को स्थानांतरित किया गया है, जो संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है।

संवैधानिक प्रावधान और आयोग की भूमिका

इस गंभीर विषय पर आयोग ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि संवैधानिक आरक्षण और अन्य लाभ मूल ओबीसी जातियों के अधिकारों को प्रभावित न करें, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338(बी) के तहत समीक्षा बैठक आयोजित की।

आयोग ने स्पष्ट किया कि —

“बिना रिपोर्ट और आधार के दिया गया आरक्षण मूल ओबीसी समुदायों के अधिकारों का हनन है। आयोग का दायित्व है कि वह देशभर में ओबीसी वर्गों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करे।”

निष्कर्ष

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने केरल राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि —

  • धर्म आधारित आरक्षण की नीति पर पूर्ण स्पष्टीकरण 15 दिनों के भीतर प्रस्तुत किया जाए।

  • मूल ओबीसी समुदायों के अधिकारों और हिस्से की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

  • आरक्षण नीति को संविधान और आयोग द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप संशोधित किया जाए।

आयोग ने पुनः यह दोहराया कि —

“अन्य पिछड़ा वर्गों (OBCs) का आरक्षण केवल सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर दिया जा सकता है, न कि धर्म के आधार पर।”


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