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स्वच्छता पखवाड़ा 2026: देशभर में स्वच्छता और जनजागरूकता की नई मिसाल, DBT के अभियान को मिली बड़ी सफलता

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नई दिल्ली- स्वच्छ भारत मिशन को नई गति देते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) ने 1 मई से 15 मई 2026 तक देशव्यापी स्वच्छता पखवाड़ा 2026 का सफल आयोजन किया। इस दौरान नई दिल्ली स्थित विभागीय मुख्यालय के साथ-साथ सभी स्वायत्त संस्थानों और सार्वजनिक उपक्रमों में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया।

पखवाड़े की शुरुआत 1 मई को नई दिल्ली के सीजीओ कॉम्प्लेक्स में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह से हुई, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्वच्छ, स्वस्थ और जिम्मेदार भारत के निर्माण का संकल्प लिया। इस अवसर पर स्वच्छता को केवल एक अभियान नहीं बल्कि जन आंदोलन बनाने का संदेश दिया गया।

स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण पर विशेष फोकस

पंद्रह दिनों तक चले इस अभियान में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्वास्थ्य जांच शिविर, पर्यावरण जागरूकता व्याख्यान, हस्ताक्षर अभियान, वृक्षारोपण कार्यक्रम, सिंगल-यूज प्लास्टिक के खिलाफ जागरूकता अभियान, तनाव प्रबंधन कार्यशालाएं और विभिन्न सेमिनारों के माध्यम से लोगों को स्वच्छ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

इसके अलावा "वेस्ट टू वेल्थ" प्रतियोगिता ने लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया, जिसमें बेकार वस्तुओं को उपयोगी उत्पादों में बदलने की कला को बढ़ावा दिया गया। जूट बैग वितरण और लकड़ी के पैकिंग मटेरियल से आकर्षक गमले तैयार करने जैसी गतिविधियों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

स्कूलों और समुदायों तक पहुंचा अभियान

स्वच्छता पखवाड़ा केवल संस्थानों तक सीमित नहीं रहा। आसपास के सरकारी स्कूलों में शौचालयों और कक्षाओं के नवीनीकरण का कार्य किया गया। विद्यार्थियों के बीच निबंध, कविता और स्लोगन लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित कर स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाई गई।

साथ ही प्रयोगशाला अपशिष्ट प्रबंधन (Laboratory Waste Management) पर विशेष व्याख्यान आयोजित कर वैज्ञानिक संस्थानों में सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल कार्यप्रणालियों को बढ़ावा दिया गया।

जनभागीदारी और श्रमदान को मिला बढ़ावा

अभियान के दौरान जल संरक्षण, स्वच्छता और श्रमदान को बढ़ावा देने वाली कई गतिविधियां आयोजित की गईं। बड़ी संख्या में कर्मचारियों, वैज्ञानिकों, छात्रों और स्थानीय लोगों ने भाग लेकर स्वच्छ भारत मिशन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।

सर्वश्रेष्ठ संस्थानों को मिला सम्मान

पखवाड़े के दौरान किए गए कार्यों की समीक्षा वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लगातार की गई। विभिन्न गतिविधियों और नवाचारों के आधार पर तीन संस्थानों को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए चुना गया।

स्वच्छता पखवाड़ा 2026 के विजेता संस्थान:

🥇 BRIC - National Institute of Animal Biotechnology (NIAB)

🥈 BRIC - National Agri-Food Biotechnology Institute (NABI)

🥉 BRIC - Institute of Bioresources and Sustainable Development (IBSD)

इन संस्थानों को 2 जून 2026 को आयोजित एक विशेष समारोह में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव द्वारा सम्मानित किया गया।

देश को दिया स्वच्छता और जिम्मेदारी का संदेश

DBT के इस अभियान ने यह साबित किया कि स्वच्छता केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी से सफल होने वाला राष्ट्रीय आंदोलन है। स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने में यह पखवाड़ा एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ है।

मुख्य बिंदु:

✅ 1 से 15 मई तक चला स्वच्छता पखवाड़ा 2026
✅ देशभर के DBT संस्थानों में व्यापक आयोजन
✅ वृक्षारोपण, स्वास्थ्य शिविर और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
✅ स्कूलों में स्वच्छता और शिक्षा सुधार की पहल
✅ वेस्ट टू वेल्थ और प्लास्टिक मुक्त भारत पर विशेष जोर
✅ NIAB, NABI और IBSD बने सर्वश्रेष्ठ संस्थान

किसान स्कूल बहेराडीह में विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘सीड बॉल अभियान’ का शुभारंभ

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जांजगीर-चांपा- पौधरोपण और हरित आवरण बढ़ाने के लिए सीड बॉल एक सरल, सस्ता और प्रभावी माध्यम है। केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहकर सीड बॉल निर्माण और वितरण के माध्यम से अधिक से अधिक हरित क्षेत्र विकसित करने का प्रयास किया जाना चाहिए। यह बात चांपा एसडीएम पवन कोसमा ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल, बहेराडीह में आयोजित ‘सीड बॉल अभियान’ के शुभारंभ कार्यक्रम में कही।

उन्होंने कहा कि सीड बॉल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अभिनव पहल है, जो कम लागत और कम श्रम में अधिक पौधारोपण को संभव बनाती है। इस अवसर पर तहसीलदार प्रशांत पटेल ने कहा कि वर्ष 1973 से विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है और बहेराडीह स्थित देश के पहले किसान स्कूल में इसे ‘सीड बॉल अभियान’ से जोड़कर अनोखे तरीके से मनाया गया है।

बलौदा जनपद पंचायत के संचार एवं संकर्म सभापति चूड़ामणि राठौर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। बढ़ती जनसंख्या, वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के कारण प्रकृति का संतुलन लगातार बिगड़ रहा है। वहीं, सिवनी संकुल के शैक्षिक समन्वयक एवं शिक्षक अशोक तिवारी ने 100 से अधिक पौधों के रोपण का अपना अनुभव साझा करते हुए लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित किया।

सीड बॉल लेकर किसान स्कूल पहुंचे प्रकृति प्रेमी

अभियान में सिवनी की रुखमणि पाण्डेय, शर्मीला गोस्वामी, धुरकोट की धनबाई राजन, आरसेटी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही बिहान की कृषि सखियां एवं पशु सखियां, स्व-सहायता समूह की महिलाएं और बड़ी संख्या में प्रकृति प्रेमी सीड बॉल लेकर किसान स्कूल पहुंचे।

किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव एवं रामाधार देवांगन ने बताया कि जिले में पहली बार विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर किसान स्कूल के माध्यम से लोगों को सीड बॉल वितरित किए गए। साथ ही पर्यावरण संरक्षण एवं हरियाली बढ़ाने की शपथ भी दिलाई गई।

आरसेटी के अरुण पाण्डेय ने सीड बॉल की उपयोगिता बताते हुए कहा कि यह मिट्टी, गोबर अथवा कम्पोस्ट और बीजों से तैयार की गई छोटी गोल गेंद होती है। इन्हें बंजर भूमि, पहाड़ी क्षेत्रों, जंगलों के किनारों और खाली स्थानों पर फेंका जा सकता है। वर्षा होने पर इनमें मौजूद बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप ले लेते हैं। इस प्रक्रिया में गड्ढा खोदने या विशेष देखभाल की आवश्यकता बहुत कम होती है।

कार्यक्रम के दौरान वुशू खिलाड़ी संघ सिवनी की टीम ने किसान स्कूल को ब्रह्म कमल का पौधा भेंट किया। इस टीम में महासचिव गुलाबचंद यादव, अध्यक्ष प्रीतम दास महंत, व्यवस्थापक अविनाश मांझी, संस्थापक रीता धीवर, उपाध्यक्ष रितिका सिंह, सह सचिव ममता देवांगन सहित अन्य खिलाड़ी शामिल थे।

इस अवसर पर मितानिन रामबाई यादव, लक्ष्मीन यादव, भगवती यादव, सक्रिय महिला ललिता यादव, पशु सखी पुष्पा यादव, आरबीके साधना यादव, कृषि सखी अंजू साहू, बीना यादव, धनबाई राजन, रुखमणि पाण्डेय, शर्मीला गोस्वामी सहित सक्ती एवं जांजगीर-चांपा जिले की कृषि सखियां, पशु सखियां, मितानिन, क्रेडर्स तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

खारंग नदी क्षेत्र में हादसे पर प्रशासन सख्त, अवैध उत्खनन पर लगातार कार्रवाई

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ट्रैक्टर पलटने की घटना की जांच पूरी, अवैध रेत उत्खनन पर कड़ी निगरानी

रायपुर- बिलासपुर जिले के खारंग नदी क्षेत्र में हुई दुर्घटना की जांच के बाद खनिज विभाग और जिला प्रशासन ने अवैध रेत उत्खनन पर सख्त रुख अपनाया है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर संबंधित वाहन मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है, वहीं छत्तीसगढ राज्य में अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है।

बिलासपुर जिले के खनिज अमले द्वारा खारंग नदी क्षेत्र में हुई दुर्घटना की विस्तृत जांच की गई। जांच के दौरान ग्राम गढ़वट में सरपंच, पंचगण एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में घटना स्थल का निरीक्षण किया गया। जांच में सामने आया कि 8-9 अप्रैल की मध्य रात्रि में दो युवक नदी क्षेत्र में गए थे, जहां ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने की घटना हुई। इस घटना में एक युवक की मृत्यु हो गई, जबकि दूसरा घायल हुआ। मौके पर प्रत्यक्षदर्शी नहीं मिले, बल्कि ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर घटना की पुष्टि हुई।

प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित ट्रैक्टर-ट्रॉली ग्राम गढ़वट निवासी तोषण कुमार कश्यप के नाम से जुड़ी है। इस आधार पर पुलिस थाना रतनपुर में वाहन मालिक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 105 एवं 238(बी) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि दोनों युवक नदी क्षेत्र में रेत उत्खनन के उद्देश्य से गए थे। हालांकि घटना स्थल पर अवैध उत्खनन के प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिले, लेकिन क्षेत्र में बनाए गए कच्चे मार्ग और ट्रैक्टर के आवागमन के संकेत पाए गए।

खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। वर्ष 2024-25 में  गढ़वट और आसपास के इलाके में कुल 47 प्रकरण दर्ज कर लगभग 6.95 लाख रुपये की वसूली की गई, जबकि वर्ष 2025-26 में अब तक 22 प्रकरण दर्ज कर 3.19 लाख रुपये से अधिक की कार्रवाई की जा चुकी है। पूर्व में भी गढ़वट क्षेत्र में अवैध परिवहन के मामलों में ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर प्रकरण दर्ज किए गए थे। विभाग द्वारा पंचायत स्तर पर भी अवैध उत्खनन रोकने के लिए समय-समय पर निर्णय और जागरूकता प्रयास किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संबंधित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है और दोषियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई जारी रहेगी।

वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल: वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) का 10वां प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

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देहरादून- वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) ने आम नागरिकों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए आयोजित 10वां वन्यजीव संरक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह 10 दिवसीय कार्यक्रम 2 से 11 मार्च 2026 तक आयोजित हुआ, जिसमें देशभर से 15 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अंतर्गत संचालित इस संस्थान द्वारा शुरू की गई इस पहल के तहत वर्ष 2012 से अब तक कुल 148 लोग प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।

यह विशेष कोर्स उन लोगों के लिए तैयार किया गया है, जिन्हें वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में औपचारिक प्रशिक्षण नहीं है, लेकिन इस विषय में गहरी रुचि रखते हैं। कार्यक्रम में विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों—जैसे सशस्त्र बल, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, आईटी, कॉर्पोरेट, मीडिया, शिक्षा और छात्र समुदाय—से प्रतिभागियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को चार दिनों तक विशेषज्ञों द्वारा सैद्धांतिक प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें भारतीय जैव-भूगोल, वन्यजीव संरक्षण की रणनीतियां, बड़े स्तनधारियों का प्रबंधन, वन्यजीवों की अवैध तस्करी, फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका, संकटग्रस्त वन्यजीवों का संरक्षण और नागरिक विज्ञान जैसे विषय शामिल रहे।

इसके अलावा, प्रतिभागियों को लैंसडाउन वन प्रभाग (उत्तराखंड) में पांच दिवसीय फील्ड विजिट पर ले जाया गया, जहां उन्होंने जंगल और वन्यजीवों का प्रत्यक्ष अध्ययन किया। इस दौरान उन्हें जंगल प्रबंधन, संरक्षण की चुनौतियों और स्थानीय समुदायों की वन संसाधनों पर निर्भरता के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का समापन 11 मार्च को हुआ, जिसमें रमेश कुमार पांडे, अतिरिक्त महानिदेशक (वन्यजीव), ने प्रतिभागियों से संवाद किया और भारत में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य आम नागरिकों में जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है।

यह पहल इस बात को रेखांकित करती है कि वन्यजीव संरक्षण केवल विशेषज्ञों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की जिम्मेदारी है।

प्रधानमंत्री ने दो नए रामसर स्थलों को लेकर जताई खुशी

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के एटा जिले स्थित पटना पक्षी विहार और गुजरात के कच्छ क्षेत्र के छारी-ढांड को रामसर स्थल के रूप में मान्यता मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की है।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि देश की जैव विविधता के संरक्षण और महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री ने इन क्षेत्रों की स्थानीय जनता और आर्द्रभूमि संरक्षण से जुड़े सभी लोगों को बधाई देते हुए कहा कि यह मान्यता उनके प्रयासों का सम्मान है। उन्होंने आशा जताई कि ये आर्द्रभूमियां भविष्य में भी प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के लिए सुरक्षित आवास बनी रहेंगी।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “यह जानकर प्रसन्नता हुई कि एटा का पटना पक्षी विहार और कच्छ का छारी-ढांड अब रामसर स्थल घोषित किए गए हैं। स्थानीय लोगों और आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए कार्य करने वालों को बधाई। यह मान्यता जैव विविधता संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।”




आंध्र प्रदेश में MISHTI पर राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला का सफल आयोजन

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आंध्र प्रदेश में 8 एवं 9 जनवरी 2026 को MISHTI (Mangrove Initiative for Shoreline Habitats and Tangible Incomes) पर एक राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।

कार्यशाला का उद्घाटन आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को MISHTI योजना के माध्यम से मैंग्रोव संरक्षण में राज्यों को सहयोग देने के लिए धन्यवाद दिया। इस कार्यशाला में वन विभाग के अधिकारी, विशेषज्ञ और विभिन्न हितधारक शामिल हुए, जिन्होंने मैंग्रोव संरक्षण एवं पुनर्स्थापन के सतत उपायों पर विचार-विमर्श किया।

कार्यशाला के दौरान राष्ट्रीय कैम्पा (National CAMPA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आनंद मोहन द्वारा एक महत्वपूर्ण प्रस्तुति दी गई, जिसमें MISHTI पहल के उद्देश्यों और कार्यान्वयन ढांचे पर प्रकाश डाला गया। MISHTI का उद्देश्य मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र का विकास एवं संरक्षण करना है, जिसमें मैंग्रोव पुनर्स्थापन, तटरेखा संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण तथा तटीय समुदायों के लिए ठोस आजीविका अवसरों के सृजन पर विशेष बल दिया गया है। यह मिशन ‘मैंग्रोव एलायंस फॉर क्लाइमेट’ (MAC) के उद्देश्यों में भी योगदान देता है, जिसका भारत COP-27 के दौरान सक्रिय सदस्य बना था।

प्रस्तुति के दौरान राष्ट्रीय कैम्पा के सीईओ ने जलवायु सहनशीलता, तटीय संरक्षण और सतत आर्थिक लाभों में मैंग्रोव की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्यों और संस्थानों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

यह कार्यशाला ज्ञान साझा करने, सर्वोत्तम प्रथाओं और नीति संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुई, जिसने MISHTI ढांचे के अंतर्गत मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने और सतत तटीय आजीविका सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।

छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट बना कोपरा जलाशय

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वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने प्रदेशवासियों को दी बधाई

रायपुर- बिलासपुर जिले का कोपरा जलाशय अब छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट बन गया है। इसकी घोषणा के बाद पूरे प्रदेश में प्रसन्नता का माहौल है। यह दर्जा उन आर्द्रभूमियों को दिया जाता है जो जैवविविधता, जल संरक्षण और पर्यावरणीय महत्व के लिए वैश्विक स्तर पर अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि कोपरा जलाशय की यह सफलता छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि जलाशय की विशिष्ट पारिस्थितिकी, स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की विविधता तथा जल परितंत्र की समृद्धि ने इसे रामसर मान्यता के योग्य बनाया है।

वन मंत्री कश्यप ने राज्य वेटलैंड प्राधिकरण, पर्यावरणविदों, वन विभाग के अधिकारियों, शोधकर्ताओं और स्थानीय समुदायों को भी धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि सभी की संयुक्त मेहनत और संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता से यह उपलब्धि संभव हो सकी है।

मंत्री कश्यप ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के अंतर्गत वर्ष 2030 तक 20 वेटलैंड्स को रामसर साइट का दर्जा दिलाने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि कोपरा जलाशय के रामसर साइट घोषित होने से प्रदेश में वेटलैंड संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और इको-टूरिज्म के नए अवसर भी विकसित होंगे। इससे स्थानीय समुदायों को रोजगार मिलेगा और सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा।

वन मंत्री केदार कश्यप ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे इस महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर की सुरक्षा और संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि वेटलैंड्स का संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक मजबूत प्राकृतिक विरासत छोड़ने का संकल्प भी।

रेड सैंडर्स संरक्षण के लिए NBA ने 6.2 करोड़ रुपये जारी किए

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राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत प्रवेश और लाभ साझा करने (ABS) तंत्र के तहत 11.12.2025 को लाभार्थियों को 6.2 करोड़ रुपये जारी किए। यह धनराशि लुप्तप्राय रेड सैंडर्स (Pterocarpus santalinus) के संरक्षण का समर्थन करेगी और पाँच राज्यों में किसानों तथा वन-निर्भर समुदायों की आजीविका को सशक्त बनाएगी।

ABS निधि राज्य वन विभागों, राज्य जैव विविधता बोर्डों तथा रेड सैंडर्स उगाने वाले किसानों को जारी की गई है, जो इस स्थानिक और वैश्विक रूप से महत्वपूर्ण प्रजाति की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह नवीनतम वितरण रेड सैंडर्स के सतत संरक्षण और जिम्मेदार उपयोग को आगे बढ़ाएगा।

जारी किए गए 6.2 करोड़ रुपये में से:

  • तेलंगाना के किसानों को 17.8 लाख रुपये

  • आंध्र प्रदेश के किसानों को 1.1 करोड़ रुपये

  • तमिलनाडु वन विभाग को 2.98 करोड़ रुपये

  • कर्नाटक वन विभाग को 1.05 करोड़ रुपये

  • महाराष्ट्र वन विभाग को 69.2 लाख रुपये

  • तेलंगाना वन विभाग को 5.8 लाख रुपये
    इसके अतिरिक्त, संबंधित राज्य जैव विविधता बोर्डों के बीच 16 लाख रुपये साझा किए गए हैं।

इस नई किश्त के साथ, रेड सैंडर्स संरक्षण के लिए ABS के तहत कुल वितरण 101 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। अब तक, 216 किसान— जिनमें 198 आंध्र प्रदेश और 18 तमिलनाडु के हैं— रेड सैंडर्स ABS तंत्र से लाभान्वित हुए हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और ओडिशा के वन विभाग और राज्य जैव विविधता बोर्ड भी लाभान्वित हुए हैं।

यह धनराशि निम्न कार्यों के लिए उपयोग की जाएगी:

  • अग्रिम पंक्ति संरक्षण

  • गश्त और निगरानी अवसंरचना सुदृढ़ीकरण

  • शोध-आधारित वानिकी पद्धतियाँ

  • समुदाय-आधारित आजीविका कार्यक्रमों का विस्तार

  • रेड सैंडर्स उत्पादकों की सामाजिक-आर्थिक क्षमता में सुधार

इस रिलीज़ के साथ, NBA की कुल ABS वितरण राशि 127 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है, जो जैव संसाधनों से जुड़े न्यायपूर्ण और समान लाभ-साझाकरण के क्रियान्वयन में भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना 2024–2030 तथा कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा के तहत लक्ष्य-13 तथा लक्ष्य-19 प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

यह वितरण इस बात का प्रमाण है कि जैविक विविधता अधिनियम के ABS प्रावधान संरक्षण को एक सतत आजीविका अवसर में कैसे बदल सकते हैं। ये प्रयास भारत की इस नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित करते हैं कि वह ABS सिद्धांतों को व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी तरीके से लागू कर रहा है—जो पर्यावरणीय सुरक्षा और सतत आजीविका दोनों को सुदृढ़ करता है।

राष्ट्रीय प्राणी उद्यान 8 नवम्बर से फिर खुलेगा, सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया जाएगा

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राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (एनज़ेडपी) 08 नवम्बर 2025 से आगंतुकों के लिए पुनः खोला जाएगा। दिल्ली ज़ू प्रशासन ने सूचित किया है कि चिड़ियाघर खुलने के बाद सभी आवश्यक सुरक्षा और एहतियाती उपायों का पालन किया जाएगा।

राष्ट्रीय प्राणी उद्यान को 28.08.2025 को जल पक्षी एवियरी में एवियन इन्फ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) के पॉजिटिव केस की रिपोर्ट आने के बाद 30.08.2025 से आगंतुकों के लिए बंद कर दिया गया था। इसके बाद सक्षम प्राधिकारियों द्वारा जारी सभी जैव सुरक्षा (बायोसेफ्टी) और निगरानी (सर्विलांस) दिशानिर्देशों का पूर्ण रूप से पालन किया गया।

केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय द्वारा जारी ‘एवियन इन्फ्लुएंजा की तैयारी, नियंत्रण और रोकथाम हेतु कार्यवाही (संशोधित 2021)’ के अध्याय 6 के तहत निर्धारित सभी दिशानिर्देशों का सख्ती से अनुपालन किया गया। बंदी अवधि के दौरान हर 15 दिन के अंतराल पर चार बार सैंपलिंग की गई, और एनआईएचएसएडी, भोपाल की रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम पॉजिटिव केस के बाद सभी नमूने नकारात्मक पाए गए।

राष्ट्रीय प्राणी उद्यान अपने वन्यजीवों के स्वास्थ्य और कल्याण के साथ-साथ आगंतुकों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।


उत्तर प्रदेश और सिक्किम की जैव विविधता प्रबंधन समितियों को राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा ₹18.3 लाख की राशि जारी

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राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने उत्तर प्रदेश और सिक्किम के जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी) को ₹18.3 लाख की राशि जारी की है। यह राशि जैव विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत प्रवेश और लाभ-साझेदारी (Access and Benefit Sharing) व्यवस्था के तहत प्रदान की गई है।

यह धनराशि संबंधित राज्य जैव विविधता बोर्डों के माध्यम से सीधे दो बीएमसी को हस्तांतरित की गई —

  1. नर्राऊ ग्राम जैव विविधता प्रबंधन समिति, आक्राबाद कौल तहसील, अलीगढ़ जिला, उत्तर प्रदेश, और

  2. लामपोखरी झील क्षेत्र जैव विविधता प्रबंधन समिति, अरितार, सिक्किम।

उत्तर प्रदेश में एक कंपनी ने नर्राऊ गांव से लिग्नोसेल्यूलोसिक बायोमास से किण्वनीय यौगिक (fermentable compounds) बनाने के लिए फसल सामग्री का उपयोग किया। वहीं सिक्किम में एक अन्य कंपनी ने लामपोखरी झील क्षेत्र की मिट्टी और जल नमूनों से सूक्ष्मजीवों (microorganisms) तक पहुंच प्राप्त की, जिन्हें अनुसंधान उद्देश्य के लिए प्रयोग किया गया।

इन निधियों के माध्यम से, एनबीए स्थानीय समुदायों को जैव विविधता संरक्षण और अपने प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए सशक्त बना रहा है।

अबू धाबी में ‘गार्डियंस ऑफ द वाइल्ड’ रिपोर्ट जारी; केंद्रीय मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने वन रक्षकों के योगदान को सराहा

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वन एवं वन्यजीव संरक्षण में समर्पित हमारे बहादुर पुरुषों और महिलाओं के प्रयासों को सम्मानित करना गौरव की बात है — केंद्रीय मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह

"वनों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए अपने जीवन को समर्पित करने वाले हमारे बहादुर पुरुषों और महिलाओं के प्रयासों को सम्मानित करने वाले पुरस्कार समारोह में उपस्थित होना मेरे लिए सम्मान की बात है," यह बात केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने 11 अक्टूबर, 2025 को अबू धाबी में कही।
वे आईयूसीएन वर्ल्ड कंज़र्वेशन कांग्रेस 2025 के दौरान आयोजित ‘फॉरेस्ट रेंजर्स के सम्मान समारोह’ में भाग ले रहे थे।

इस अवसर पर मंत्री महोदय ने कहा कि “ये वही लोग हैं जो यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारे देश की समृद्ध वन्यजीव विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रहे।” इस दौरान उन्होंने ‘गार्डियंस ऑफ द वाइल्ड’ शीर्षक से एक रिपोर्ट भी जारी की।

सभा को संबोधित करते हुए कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि दुनिया भर के देशों ने वनों और वन्यजीवों की रक्षा के लिए व्यापक कानून और नीतिगत ढाँचे तैयार किए हैं, परंतु इन्हें वास्तविक रूप से धरातल पर लागू करने का कार्य हमारे वन रेंजर और सहयोगी कर्मचारी करते हैं। उनका कार्य गश्त करना, वन्यजीवों की गणना करना, जंगल की आग से लड़ना आदि अनेक प्रकार की गतिविधियों को शामिल करता है।
उन्होंने कहा कि वन रक्षक अपने जीवन को जोखिम में डालकर शिकारी और अवैध लकड़ी तस्करों से जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा करते हैं, और कई ने इस कर्तव्य-पालन में अपने प्राणों की आहुति दी है।

मंत्री ने वन रक्षकों और सहयोगी स्टाफ की निष्ठा और समर्पण को सलाम किया तथा आईयूसीएन और डब्ल्यूटीआई को उनके इस सम्मान और सराहना के लिए बधाई दी। कीर्ति वर्धन  सिंह ने अपने बचपन से लेकर अब तक वन कर्मचारियों के साथ हुई अनेक मुलाकातों का उल्लेख किया और वनों तथा वन्यजीवों के बारे में उनके पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय बुद्धिमत्ता की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकारों को इस अमूल्य ज्ञान को मान्यता देनी चाहिए और इसका दस्तावेज़ीकरण करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि भारत में वनों की रक्षा करने वाले पुरुषों और महिलाओं को क्रमशः ‘वनरक्षक’ और ‘वनरक्षिका’ के रूप में सम्मानित किया जाता है।

कीर्ति वर्धन सिंह ने इस अवसर पर यह आश्वासन दिया कि सरकार अग्रिम पंक्ति के वन कर्मचारियों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हरसंभव सहायता प्रदान करती रहेगी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार नियमित रूप से क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाती है तथा आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रही है — जैसे कि ड्रोन निगरानी, सैटेलाइट ट्रैकिंग और वन्यजीवों की रेडियो कॉलरिंग।
इन कदमों से यह सुनिश्चित होता है कि जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मचारी आधुनिक तकनीक से सुसज्जित हों और अवैध गतिविधियों से वनों और वन्यजीवों की रक्षा के साथ-साथ मानव-वन्यजीव संघर्षों की रोकथाम भी कर सकें।


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