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नशे में पहुंचे दूल्हे से शादी करने से किया इनकार, छत्तीसगढ़ की मुस्कान प्रधान बनीं नशामुक्ति अभियान की मिसाल

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रायपुर- छत्तीसगढ़ की 22 वर्षीय मुस्कान प्रधान ने सामाजिक साहस और आत्मसम्मान की मिसाल पेश करते हुए नशे की हालत में विवाह स्थल पर पहुंचे दूल्हे से शादी करने से साफ इनकार कर दिया। उनके इस फैसले की पूरे प्रदेश में सराहना हो रही है और प्रशासन ने भी उनके साहस की प्रशंसा की है।

जानकारी के अनुसार, विवाह समारोह के दौरान जब दूल्हा शराब के नशे में पहुंचा, तो मुस्कान ने स्थिति को देखते हुए विवाह करने से इंकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे ऐसे व्यक्ति के साथ अपना जीवन नहीं बिताना चाहतीं, जो नशे की हालत में विवाह जैसे महत्वपूर्ण संस्कार में शामिल हो।

मुस्कान के इस साहसिक निर्णय को परिवार और समाज के कई लोगों का समर्थन मिला। बाद में जिला प्रशासन ने भी उनके फैसले की सराहना करते हुए उन्हें नशामुक्ति अभियान का प्रेरणास्रोत बताया। उनके कदम को युवाओं में नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने और सामाजिक जिम्मेदारी का मजबूत संदेश माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस और नशा मुक्त भारत अभियान के दौरान मुस्कान की यह पहल पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि उनका निर्णय यह संदेश देता है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाना केवल व्यक्तिगत अधिकार नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी भी है।

मुस्कान प्रधान का यह साहसिक कदम अब कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है और नशामुक्त समाज के निर्माण की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

महिलाओं के लिए विधायी आरक्षण: लोकतंत्र को अधिक सशक्त और सहभागी बनाने की दिशा में आवश्यक कदम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि विधायी संस्थाओं (जैसे संसद और विधानसभाओं) में महिलाओं के लिए आरक्षण समय की मांग है, जिससे भारतीय लोकतंत्र और अधिक जीवंत तथा सहभागी बनेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि इस आरक्षण को लागू करने में किसी भी प्रकार की देरी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण होगी। इस विषय पर उन्होंने अपने विचार एक हाल ही में प्रकाशित ओप-एड लेख के माध्यम से विस्तार से साझा किए हैं।

प्रधानमंत्री ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:

“महिलाओं के लिए विधायी संस्थाओं में आरक्षण समय की मांग है! इससे हमारा लोकतंत्र और अधिक जीवंत एवं सहभागी बनेगा। इस आरक्षण को लागू करने में किसी भी तरह की देरी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण होगी। इसी को लेकर मैंने अपने विचार इस आलेख में साझा किए हैं।”

प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएँ दीं और भारत की नारी शक्ति की शक्ति, संकल्प और उपलब्धियों को नमन किया।

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प्रधानमंत्री ने देशभर की महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि आज महिलाएँ हर क्षेत्र में अपनी दृढ़ता, रचनात्मकता और अद्भुत ऊर्जा के साथ भारत की प्रगति को दिशा दे रही हैं। उनकी उपलब्धियाँ पूरे राष्ट्र को प्रेरित करती हैं और विकसित भारत (Viksit Bharat) के निर्माण के संकल्प को और मजबूत करती हैं।

उन्होंने कहा कि महिला-नेतृत्व वाले विकास (Women-Led Development) को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। महिलाओं के सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कई योजनाएँ और पहल शुरू की हैं। प्रधानमंत्री ने दोहराया कि सरकार हर महिला को अपनी पूरी क्षमता हासिल करने और भारत के विकास में योगदान देने के लिए अधिक अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत की नारी शक्ति की उपलब्धियाँ देश के लिए गर्व का विषय हैं और यह राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की परिवर्तनकारी भूमिका की मजबूत याद दिलाती हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत आगे बढ़ेगा, महिलाओं की आकांक्षाएँ और योगदान देश को एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र बनाने की दिशा में मार्गदर्शन करते रहेंगे।

प्रधानमंत्री ने यह भी साझा किया कि पिछले एक दशक में जमीनी स्तर पर महिलाओं के जीवन में किस तरह सकारात्मक बदलाव आए हैं और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी पहलों का कितना व्यापक प्रभाव पड़ा है।

प्रधानमंत्री अपने X (Twitter) पोस्ट में कहा

“अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मैं हमारी सभी नारी शक्ति को शुभकामनाएँ देता हूँ।

हर क्षेत्र में महिलाएँ दृढ़ संकल्प, रचनात्मकता और अद्वितीय उत्साह के साथ भारत की प्रगति को आकार दे रही हैं। उनकी उपलब्धियाँ हमारे राष्ट्र को प्रेरित करती हैं और विकसित भारत के निर्माण के हमारे संकल्प को मजबूत करती हैं।

महिलाओं का सशक्तिकरण हमारी विभिन्न योजनाओं और पहलों के केंद्र में है। हम ऐसे अवसर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो हर महिला को अपनी पूरी क्षमता प्राप्त करने और भारत के विकास की यात्रा में योगदान देने में सक्षम बनाएँ।

#नएभारतकीनारीशक्ति”

“भारत की नारी शक्ति की उपलब्धियाँ गर्व का विषय हैं और राष्ट्र निर्माण में उनकी परिवर्तनकारी भूमिका की शक्तिशाली याद दिलाती हैं।

जैसे-जैसे भारत आगे बढ़ेगा, महिलाओं की आकांक्षाएँ और योगदान हमें एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र की ओर ले जाते रहेंगे।

#नएभारतकीनारीशक्ति”

“पिछले एक दशक में जमीनी स्तर पर महिलाओं के जीवन में आए बदलाव की एक झलक…

#नएभारतकीनारीशक्ति”

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026: अधिकार, न्याय और कार्रवाई के साथ महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की दिशा में भारत

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नई दिल्ली- हर वर्ष International Women’s Day 8 मार्च को विश्वभर में मनाया जाता है। वर्ष 2026 के लिए इसका वैश्विक विषय “Rights. Justice. Action. For ALL Women and Girls” निर्धारित किया गया है, जो महिलाओं के अधिकारों को सुदृढ़ करने, न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने और लैंगिक समानता के लिए ठोस कार्रवाई पर बल देता है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की उपलब्धियों, नेतृत्व और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान को सम्मान देने का अवसर है। यह दिन लैंगिक समानता, सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता को भी पुनः स्थापित करता है।

महिला अधिकारों की ऐतिहासिक यात्रा

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत 20वीं सदी की शुरुआत में उत्तरी अमेरिका और यूरोप के श्रमिक आंदोलनों से हुई। वर्ष 1917 में रूस में महिलाओं ने “रोटी और शांति” की मांग को लेकर हड़ताल की थी, जिसके बाद 8 मार्च की तिथि को प्रतीकात्मक रूप से अपनाया गया। बाद में United Nations ने 1977 में इस दिवस को औपचारिक मान्यता दी।

आज यह दिवस दुनिया के अनेक देशों में महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक उपलब्धियों को सम्मान देने और उनके अधिकारों को मजबूत करने के लिए मनाया जाता है।

“Give to Gain” वैश्विक अभियान

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर “Give to Gain” वैश्विक अभियान भी चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह संदेश देना है कि जब व्यक्ति, संगठन और समाज मिलकर महिलाओं को अवसर, संसाधन और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, तो उससे समाज अधिक समावेशी और सशक्त बनता है।

भारत में महिला-नेतृत्व वाला विकास

भारत में विकास की अवधारणा समय के साथ “महिलाओं के लिए विकास” से आगे बढ़कर “महिला-नेतृत्व वाले विकास” तक पहुंच गई है। अब महिलाओं को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक प्रगति के प्रमुख प्रेरक के रूप में देखा जा रहा है।

देश में शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन, सुरक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में कई पहलें महिलाओं के सशक्तिकरण को मजबूत कर रही हैं। स्वयं सहायता समूह, उद्यमिता योजनाएँ और कौशल विकास कार्यक्रम महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और उद्यम निर्माण को बढ़ावा दे रहे हैं।

संविधान में लैंगिक समानता की गारंटी

भारत का संविधान महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करता है और लैंगिक भेदभाव को निषिद्ध करता है।

  • अनुच्छेद 15 – धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है।

  • अनुच्छेद 16 – सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर सुनिश्चित करता है।

  • अनुच्छेद 39 – पुरुषों और महिलाओं के लिए समान आजीविका के अवसर सुनिश्चित करने का निर्देश देता है।

  • अनुच्छेद 42 – मातृत्व राहत और मानवीय कार्य परिस्थितियों का प्रावधान करता है।

भारत ने स्वतंत्रता के समय से ही सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार लागू किया, जिससे महिलाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में समान भागीदारी का अधिकार मिला।

शिक्षा और अवसरों का विस्तार

महिलाओं के सशक्तिकरण की नींव शिक्षा से जुड़ी है। समग्र शिक्षा अभियान, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, और उच्च शिक्षा में विशेष सीटों जैसी पहलों ने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा दिया है।

उच्च शिक्षा में महिला नामांकन 2014-15 के 1.57 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 2.18 करोड़ हो गया है। इसी अवधि में महिला सकल नामांकन अनुपात 22.9 से बढ़कर 30.2 हो गया।

Sukanya Samriddhi Yojana, जो Beti Bachao Beti Padhao अभियान के अंतर्गत 2015 में शुरू की गई, बालिकाओं की शिक्षा और भविष्य के लिए बचत को प्रोत्साहित करती है। दिसंबर 2025 तक इस योजना के तहत 4.53 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं।

स्वास्थ्य, पोषण और गरिमा

महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण के लिए कई योजनाएँ लागू की गई हैं।

  • Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana के तहत मातृत्व सहायता प्रदान की जाती है।

  • Pradhan Mantri Ujjwala Yojana के माध्यम से 10.56 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शन महिलाओं को दिए गए हैं।

  • Jal Jeevan Mission के तहत ग्रामीण घरों में नल से जल की उपलब्धता 16.72% से बढ़कर 81% से अधिक हो गई है।

  • Swachh Bharat Mission के अंतर्गत 12 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए हैं।

इन प्रयासों से भारत में मातृ मृत्यु अनुपात 130 (2014-16) से घटकर 88 (2021-23) हो गया है।

सुरक्षा और न्याय

महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए Mission Shakti के तहत वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन और SHe-Box पोर्टल जैसी व्यवस्थाएँ स्थापित की गई हैं।

इसके अलावा Sexual Harassment of Women at Workplace Act 2013 कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करता है।

राजनीतिक भागीदारी में वृद्धि

स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 73rd Constitutional Amendment Act और 74th Constitutional Amendment Act के माध्यम से पंचायतों और शहरी निकायों में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गईं।

हाल ही में पारित Nari Shakti Vandan Adhiniyam लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान करता है।

आर्थिक सशक्तिकरण

महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ लागू की गई हैं।

  • Deendayal Antyodaya Yojana – National Rural Livelihood Mission के तहत 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवार स्वयं सहायता समूहों से जुड़े हैं।

  • Pradhan Mantri Mudra Yojana के तहत दिए गए ऋणों में लगभग 68% लाभार्थी महिलाएँ हैं।

  • Stand-Up India के माध्यम से 2 लाख से अधिक महिला उद्यमियों को सहायता मिली है।

इसके अतिरिक्त NaMo Drone Didi जैसी पहलें ग्रामीण महिलाओं को नई तकनीकों से जोड़ रही हैं।

विकसित भारत 2047 की दिशा में नारी शक्ति

आज महिलाएँ उद्यमिता, विज्ञान, शासन, कृषि और तकनीक सहित अनेक क्षेत्रों में नेतृत्व कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से लेकर स्टार्ट-अप और स्थानीय शासन तक, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भारत के विकास को अधिक समावेशी और सशक्त बना रही है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 इस परिवर्तन को रेखांकित करता है और यह संदेश देता है कि अधिकार, न्याय और ठोस कार्रवाई के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी ही विकसित भारत 2047 की आधारशिला है।


अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर “शक्ति वॉक – #SheLeadsBharat” का आयोजन कर्तव्य पथ पर

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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (Ministry of Women and Child Development) अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कल 8 मार्च 2026 को “शक्ति वॉक – #SheLeadsBharat” नामक महिला-नेतृत्व वाली पदयात्रा का आयोजन कर्तव्य पथ पर करेगा।

International Women’s Day, जो हर वर्ष 8 मार्च को विश्वभर में मनाया जाता है, जीवन के सभी क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों, नेतृत्व और योगदान का सम्मान करता है तथा लैंगिक समानता, सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराता है। इसी भावना के साथ शक्ति वॉक का आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य एक प्रगतिशील और समावेशी भारत के निर्माण में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका को उजागर करना है।

शक्ति वॉक का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के नेतृत्व और योगदान का उत्सव मनाना, महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करना, महिलाओं के लिए चल रही प्रमुख सरकारी योजनाओं और पहलों को प्रदर्शित करना, विविध पृष्ठभूमि की महिलाओं के बीच एकजुटता और सामूहिक गर्व की भावना को बढ़ावा देना तथा यह संदेश देना है कि महिला-नेतृत्व वाला विकास राष्ट्रीय प्रगति का एक महत्वपूर्ण आधार है।

यह पदयात्रा सुबह 7:30 बजे से 10:00 बजे तक आयोजित की जाएगी और लगभग 2 किलोमीटर की दूरी तय करेगी, जो “इंडिया गेट से विजय चौक तक कर्तव्य पथ के मार्ग पर होगी।

इस कार्यक्रम में लगभग 3000 महिलाओं के भाग लेने की अपेक्षा है, जो 150 से अधिक मंत्रालयों, विभागों और संगठनों का प्रतिनिधित्व करेंगी। इनमें सशस्त्र बलों, पुलिस, मीडिया, स्वास्थ्य सेवा, खेल, सरकारी संस्थानों, उद्योग और जमीनी संगठनों की प्रतिनिधि महिलाएँ शामिल होंगी। प्रतिभागी #SheLeadsBharat विषय के अंतर्गत एक साथ पदयात्रा करेंगे, जो एक प्रगतिशील और समावेशी भारत के निर्माण में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करेगा।

भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की महिला अधिकारी भी इसमें भाग लेंगी। इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों की भी भागीदारी देखने को मिलेगी।

इस पदयात्रा का नेतृत्व महिला जनप्रतिनिधियों द्वारा किया जाएगा, जिनमें केंद्रीय मंत्री, राज्य मंत्री, संसद सदस्य, विधायक तथा विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट महिला नेता और प्रमुख हस्तियाँ शामिल होंगी।

कार्यक्रम की शुरुआत गणमान्य व्यक्तियों के संक्षिप्त संबोधन से होगी, जिसके बाद पदयात्रा को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा।

कर्तव्य पथ पर महिलाओं के लिए सरकार की प्रमुख योजनाओं और विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने वाली विशेष स्थापनाएँ (इंस्टॉलेशन) भी प्रदर्शित की जाएंगी।

इंडिया गेट पर एक विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति आयोजित की जाएगी, जो नारी शक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना का उत्सव मनाएगी। इसमें डोल्लू कुनीथा, कलारीपयट्टू, श्रृंगारिमेलम, रनचंडी और घूमर जैसे पारंपरिक प्रस्तुतियाँ शामिल होंगी, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और महिलाओं की शक्ति को दर्शाती हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत “वंदे मातरम्” के सामूहिक गायन से होगी। इस अवसर पर “Shakti Walk – #SheLeadsBharat” संदेश वाले गुब्बारे भी आकाश में छोड़े जाएंगे।

ये समारोह विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित करते हैं।


अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मानेकशॉ सेंटर में राष्ट्रीय समारोह आयोजित होगा

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भारत सरकार कल 8 मार्च 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का उत्सव मना रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में एक राष्ट्रीय स्तर का समारोह आयोजित करेगा, जिसमें भारत की माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू  मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी।

यह कार्यक्रम महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी तथा महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित किया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, जो हर वर्ष 8 मार्च को विश्वभर में मनाया जाता है, विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों और योगदान का सम्मान करता है तथा लैंगिक समानता, सुरक्षा, सम्मान और महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को पुनः दृढ़ करता है।

कार्यक्रम की शुरुआत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव श्री अनिल मलिक के स्वागत भाषण से होगी। इसके बाद ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती कार्यबल भागीदारी को प्रदर्शित किया जाएगा और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रमुख नीतियों और योजनाओं को भी दिखाया जाएगा।

इस अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य संबोधन (Keynote Address) देंगी।

इसके पश्चात महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी भी सभा को संबोधित करेंगी और देश में महिला-नेतृत्व वाले विकास को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों और पहलों पर प्रकाश डालेंगी।

उद्घाटन सत्र के बाद कार्यक्रम में दो पैनल चर्चाएँ आयोजित की जाएंगी।

  • पहली पैनल चर्चा का विषय होगा “लेबर कोड्स – महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा”।

  • दूसरी पैनल चर्चा “स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ उद्यमी के रूप में” विषय पर केंद्रित होगी।

इस कार्यक्रम में लगभग 1000 महिलाओं के भाग लेने की अपेक्षा है, जो 150 से अधिक मंत्रालयों, विभागों और संगठनों का प्रतिनिधित्व करेंगी। इनमें सशस्त्र बलों, पुलिस, मीडिया, स्वास्थ्य सेवा, खेल तथा अन्य क्षेत्रों की प्रतिनिधि महिलाएँ शामिल होंगी। यह देशभर में महिलाओं के विविध योगदान और भारत सरकार की महिला-नेतृत्व वाले विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

यह कार्यक्रम लाइव वेबकास्ट के माध्यम से भी देखा जा सकेगा:


महिला मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा: भारत सरकार की बहुआयामी पहल

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“जन स्वास्थ्य और स्वच्छता; अस्पताल और डिस्पेंसरी’’ भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची में शामिल है, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य भी आता है। इसलिए, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, अस्पतालों, सामुदायिक देखभाल और पुनर्वास की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की है।

फिर भी, भारत सरकार राज्य सरकारों का समर्थन करती है और एक व्यापक, बहु-आयामी और समन्वित दृष्टिकोण अपनाती है, जो अधिकार आधारित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल, टेली-मेंटल हेल्थ सेवा, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, कार्यस्थल सुरक्षा उपाय, लिंग-संवेदनशील कानून प्रवर्तन इंटरफेस और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण कार्यक्रमों को जोड़ती है। इन पहलों का उद्देश्य महिलाओं में तनाव को रोकना, कम करना और प्रबंधित करना है।

मुख्य पहल और कार्यक्रम:

  1. केन्द्रीय मार्गदर्शन और प्रशिक्षण:

    • केंद्रीय कर्मचारियों के लिए डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एंड ट्रेनिंग (DoPT) के तहत यौन उत्पीड़न रोकथाम, लिंग-संवेदनशीलता, लचीले कार्य समय और आंतरिक शिकायत तंत्र के दिशा-निर्देश।

  2. आपातकालीन सहायता और सुरक्षा:

    • महिला हेल्पलाइन (181), बाल हेल्पलाइन (1098), और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली ERSS-112।

    • ज़ीरो FIR और ई-FIR जैसी सुविधा।

  3. कानूनी और मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा:

    • मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017: आत्महत्या के प्रयास को अपराधमुक्त करना, मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों का पंजीकरण और निगरानी।

    • राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP) और जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (DMHP) के तहत 767 जिलों में सेवाएँ।

    • 1.81 लाख प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप-स्वास्थ्य केंद्रों को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में अपग्रेड किया गया।

    • टेली-मेंटल हेल्थ कार्यक्रम Tele-MANAS: 53 सेल्स, 20 भाषाओं में सेवा, 29.82 लाख कॉल्स।

  4. महिला सुरक्षा और सहायता:

    • मिशन शक्ति के तहत One Stop Centres (OSC): 864 OSCs, 12.67 लाख महिलाओं को सहायता।

    • महिला हेल्प डेस्क: 14,649 पुलिस स्टेशनों में, महिला अधिकारियों द्वारा संचालित।

    • SHe-Box पोर्टल: कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों के लिए केंद्रीय मंच।

  5. सुरक्षित कार्यस्थल और रोजगार:

    • चार श्रम संहिता (वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा, कार्यस्थल सुरक्षा और स्वास्थ्य) लागू।

    • समान कार्य के लिए समान वेतन, रात की शिफ्ट और खतरनाक काम में महिलाओं की अनुमति सुरक्षित वातावरण के तहत।

    • कार्यदिवस 8 घंटे और 48 घंटे प्रति सप्ताह, ओवरटाइम स्वीकृति और दोगुना वेतन।

    • निःशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य जांच।

  6. सामाजिक-सामर्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण:

    • कौशल भारत, उद्यमिता और जीविका कार्यक्रम।

    • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, वित्तीय समावेशन, माइक्रोक्रेडिट और स्वयं-सहायता समूह।

इन सभी पहलों को राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर लागू किया जाता है, जो स्वास्थ्य सेवा वितरण के मुख्य एजेंट हैं। केंद्र सरकार नीति मार्गदर्शन, क्षमता निर्माण, तकनीकी दिशा-निर्देश, वित्तीय सहायता, अंतर-मंत्रालय समन्वय और निगरानी के माध्यम से समर्थन देती है।

इन उपायों का उद्देश्य महिलाओं में तनाव को रोकना और कम करना, समय पर मानसिक स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करना, हिंसा और उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करना और महिलाओं की गरिमा, लचीलापन और कल्याण को बढ़ावा देना है।

सूचना स्रोत: मंत्री राज्य महिला एवं बाल विकास, सवित्री ठाकुर, लोकसभा में आज दिए गए उत्तर के अनुसार।

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