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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे में जैबिल की उन्नत विनिर्माण इकाई का उद्घाटन किया

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केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 17 जून 2026 को पुणे के रंजनगांव में जैबिल इंक. (Jabil Inc.) की अत्याधुनिक उन्नत विनिर्माण (एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग) इकाई का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर वरिष्ठ नेता दिलीप वलसे पाटिल, युवा नेता ज्ञानेश्वर काटके, जैबिल सर्किट्स के कार्यकारी उपाध्यक्ष एवं मुख्य परिचालन अधिकारी एंडी प्रीस्टली सहित महाराष्ट्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और जैबिल की टीम उपस्थित रही।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) वैश्विक प्रगति का एक प्रमुख इंजन बन चुकी है और इसके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का देश में विकास करना रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एआई डेटा सेंटर आज दुनिया भर में तीव्र विकास के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ दृष्टिकोण के तहत यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इन डेटा सेंटरों में उपयोग होने वाले प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक घटकों का निर्माण भारत में ही हो।

उन्होंने बताया कि जैबिल अपनी आधुनिक और उच्च-तकनीकी सुविधा के माध्यम से पुणे में डेटा सेंटरों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक घटकों का निर्माण करेगी। यह संयंत्र भारत की घरेलू तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में निर्यात को भी बढ़ावा देगा।

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण की सराहना की, जिसके कारण इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभों में से एक बन गया है। उन्होंने कहा कि सरकार की लक्षित नीतियों के परिणामस्वरूप इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ा है और आज यह भारत के निर्यात की तीसरी सबसे बड़ी श्रेणी बन चुका है।

जैबिल की अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षमताएं

जैबिल की यह नई सुविधा अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तकनीकों से सुसज्जित है। यहां निम्नलिखित क्षेत्रों से संबंधित उत्पादों का निर्माण किया जाएगा:

  • एआई आधारित डेटा सेंटर उपकरण (AI Systems)

  • 5G प्रौद्योगिकी उपकरण

  • उच्च स्तरीय नेटवर्किंग उपकरण

  • औद्योगिक विद्युत प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक्स

  • उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स

यह उच्च-प्रौद्योगिकी संयंत्र घरेलू मांग को पूरा करने के साथ-साथ वैश्विक निर्यात बाजारों की आवश्यकताओं को भी पूरा करने में सक्षम होगा।

इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर 11,000 तक रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। साथ ही, यह घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को वैश्विक प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियां

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक भारत से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और निर्यात की वर्तमान उपलब्धियों की कल्पना भी कठिन थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की स्पष्ट और दूरदर्शी नीति ने भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक विनिर्माण भागीदार बना दिया है।

मुख्य उपलब्धियां:

  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग का मूल्य: ₹13 लाख करोड़

  • निर्यात में प्रगति: इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात श्रेणी 9वें स्थान से बढ़कर 7वें, 5वें, 4वें और फिर 3वें स्थान पर पहुंची।

  • 2025 में उपलब्धि: इलेक्ट्रॉनिक्स भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बनी।

  • अगला लक्ष्य: इलेक्ट्रॉनिक्स को भारत की दूसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बनाना।

अश्विनी वैष्णव ने आश्वासन दिया कि सरकार प्रतिभा विकास, कौशल निर्माण, प्रशिक्षण तथा उच्च-सटीकता वाले यांत्रिक पुर्जों के विनिर्माण के लिए विशेष पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं के व्यापक स्थानीयकरण के लिए वैश्विक नवप्रवर्तकों के साथ साझेदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया।

MeitY ने ECMS के तहत 22 नए प्रस्तावों को मंजूरी दी, 41,863 करोड़ रुपये के निवेश और 33,791 रोजगार सृजन की उम्मीद

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पूर्व में घोषित 24 प्रस्तावों के लिए 12,704 करोड़ रुपये की मंजूरी के क्रम में, सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय (MeitY) ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 22 और प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन प्रस्तावों में अनुमानित निवेश 41,863 करोड़ रुपये और अनुमानित उत्पादन 2,58,152 करोड़ रुपये का है। इन अनुमोदनों से लगभग 33,791 प्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित होने की उम्मीद है।

ये अनुमोदन 11 लक्षित उत्पादों के निर्माण से संबंधित हैं, जिनका उपयोग मोबाइल निर्माण, दूरसंचार, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, स्ट्रैटेजिक इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव और आईटी हार्डवेयर उत्पादों सहित कई क्षेत्रों में होता है। ये 11 उत्पाद इस प्रकार हैं:

1. पांच बेसिक कंपोनेंट्स: PCB, कैपेसिटर, कनेक्टर्स, एन्क्लोज़र और Li-ion सेल
2. तीन सब-असेंबली: कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले मॉड्यूल और ऑप्टिकल ट्रांससीवर
3. तीन सप्लाई चेन आइटम्स: एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न, एनोड मैटेरियल और लैमिनेट (कॉपर क्लैड)

मुख्य अनुमोदन विवरण:

  • PCB (HDI सहित): 9 कंपनियों को मंजूरी—India Circuits Pvt Ltd, Vital Electronics Pvt Ltd, Signum Electronics Ltd, Epitome Components Pvt Ltd, BPL Ltd, AT & S India Pvt Ltd, Ascent-K Circuit Pvt Ltd, CIPSA TEC India Pvt Ltd, Shogini Technoarts Pvt Ltd

  • कैपेसिटर: Deki Electronics Ltd और TDK India Pvt Ltd

  • हाई-स्पीड कनेक्टर्स: Amphenol High Speed Technology India Pvt Ltd

  • एन्क्लोज़र: Yuzhan Technology (India) Pvt Ltd, Motherson Electronic Components Pvt Ltd, Tata Electronics Pvt Ltd

  • Li-ion सेल: ATLbattery Technology (India) Pvt Ltd

सब-असेंबली:

  • ऑप्टिकल ट्रांससीवर (SFP): Dixon Electroconnect Pvt Ltd

  • कैमरा मॉड्यूल: Kunshan Q Tech Microelectronics (India) Pvt Ltd

  • डिस्प्ले मॉड्यूल: Samsung Display Noida Pvt Ltd

सप्लाई चेन सामग्री:

  • एनोड मैटेरियल: NPSPL Advanced Materials Pvt Ltd

  • लैमिनेट (कॉपर क्लैड): Wipro Global Engineering and Electronic Materials Pvt Ltd

  • एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न: Hindalco Industries Ltd

भौगोलिक वितरण: अनुमोदित इकाइयाँ आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में फैली हैं। अब तक ECMS के तहत कुल 46 आवेदन मंजूर हो चुके हैं, जिनमें 11 राज्यों में कुल निवेश 54,567 करोड़ रुपये और लगभग 51,000 प्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित हुए हैं।

अश्विनी वैष्णव, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाता है और घरेलू मांग के बड़े हिस्से को स्थानीय उत्पादन से पूरा करने में मदद करता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत 2047 तक युवा जनसांख्यिकी बनाए रखेगा और 2100 तक आर्थिक वृद्धि जारी रहेगी, इसलिए इस क्षेत्र के लिए सभी संरचनात्मक आधार स्थापित करना आवश्यक है।

जितिन प्रसाद, राज्य मंत्री, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी ने कहा कि भारत अगली बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण दिशा के रूप में उभर रहा है और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच एक भरोसेमंद साझेदार बन रहा है।

एस. कृष्णन, सचिव MeitY ने कहा कि इस ताजे अनुमोदन चरण में चयनित प्रस्ताव देश के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं और ECMS के महत्वपूर्ण लक्ष्यों की प्राप्ति में मदद करेंगे।

ये अनुमोदन घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करेंगे, महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक घटकों के लिए आयात पर निर्भरता कम करेंगे और भारत में उच्च-मूल्य वाले निर्माण क्षमताओं के विकास का समर्थन करेंगे।

ECMS के तहत ये अनुमोदन भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण हब बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप एक साहसी और दूरदर्शी कदम को दर्शाते हैं।

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स नवाचार को बढ़ावा: इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF) की सफलता

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परिचय

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र ने हाल के वर्षों में अभूतपूर्व विकास देखा है, जिसे सरकार की पहलों और उद्योग सुधारों ने मजबूती प्रदान की है। देश धीरे-धीरे वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन और निर्माण हब के रूप में उभर रहा है, जो तेजी से बदलती तकनीक और नवाचार के लिए जाना जाता है।

इस गति को और मजबूत करने और एक मजबूत नवाचार इकोसिस्टम विकसित करने के लिए भारत सरकार ने 15 फरवरी 2016 को इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF) की स्थापना की। इस फंड का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स, नैनो-इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान, विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देना है।

EDF एक फंड ऑफ फंड्स के रूप में कार्य करता है, जो पेशेवर रूप से प्रबंधित डॉटर फंड्स (जैसे कि प्रारंभिक चरण के एंजेल और वेंचर फंड्स) में निवेश करता है। ये डॉटर फंड्स स्टार्टअप्स और नई तकनीक विकसित करने वाली कंपनियों को रिस्क कैपिटल प्रदान करते हैं। इस प्रकार, EDF ने एक स्व-संवहनीय इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो नवाचार, उत्पाद डिजाइन और बौद्धिक संपदा निर्माण को प्रोत्साहित करता है।

उद्देश्य और रणनीतिक लक्ष्य

EDF की स्थापना भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में नवाचार और अनुसंधान की मजबूत नींव बनाने के लिए की गई है। इसका उद्देश्य ऐसे फंड्स का समर्थन करना है जो स्टार्टअप्स और अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने वाली कंपनियों को जोखिम पूंजी प्रदान करें।

मुख्य उद्देश्य:

  1. नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देना: इलेक्ट्रॉनिक्स, नैनो-इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी में उद्योग-संचालित नवाचार और अनुसंधान को प्रोत्साहित करना।

  2. डॉटर फंड्स का समर्थन: पेशेवर रूप से प्रबंधित डॉटर फंड्स में निवेश करना, जो स्टार्टअप्स और तकनीकी उद्यमों को पूंजी प्रदान करें।

  3. उत्पाद और तकनीक विकास को प्रोत्साहित करना: नई उत्पाद, प्रक्रिया और तकनीक बनाने वाली कंपनियों का समर्थन कर उद्यमिता को बढ़ावा देना।

  4. घरेलू डिजाइन क्षमता को मजबूत करना: इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग (ESDM) क्षेत्र में भारत की स्वदेशी डिजाइन क्षमता को बढ़ाना।

  5. राष्ट्रीय आईपी संसाधन निर्माण: प्रमुख तकनीकी क्षेत्रों में बौद्धिक संपदा का मजबूत आधार तैयार करना और नवाचार का स्वामित्व भारत में बनाए रखना।

  6. रणनीतिक अधिग्रहण में सहायता: विदेशी तकनीक और कंपनियों का अधिग्रहण करना, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो और आत्मनिर्भरता बढ़े।

फंड के प्रमुख परिचालन विशेषताएँ

EDF एक लचीले और पेशेवर रूप से प्रबंधित संरचना के माध्यम से कार्य करता है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी क्षेत्रों में निवेश और नवाचार को प्रोत्साहित करता है।

संचालन ढांचा (Operational Framework at a Glance):

  • एंकर निवेशक: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार

  • ट्रस्टी और स्पॉन्सर: केनरा बैंक

  • इन्वेस्टमेंट मैनेजर: Canbank Venture Capital Funds Ltd. (CVCFL), केनरा बैंक की 100% सहायक कंपनी

डॉटर फंड्स को भारत में पंजीकृत होना आवश्यक है और उन्हें SEBI (Alternative Investment Funds) Regulations, 2012 के अनुसार Category I या II AIF के रूप में काम करना होगा।

मुख्य विशेषताएँ:

  • EDF डॉटर फंड्स में गैर-विशेषाधिकार आधारित भागीदारी करता है, जिससे उद्योग में व्यापक सहयोग बढ़ता है।

  • EDF आमतौर पर प्रत्येक डॉटर फंड में अल्पांश भागीदारी करता है, जिससे निजी निवेश और पेशेवर प्रबंधन को प्रोत्साहन मिलता है।

  • डॉटर फंड्स के निवेश प्रबंधकों को पूंजी जुटाने, निवेश करने और प्रदर्शन मॉनिटर करने की स्वतंत्रता दी जाती है।

  • EDF पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और संबंधित इकोसिस्टम में निवेश कर सकता है।

उपलब्धियां और प्रभाव

EDF ने भारत के नवाचार इकोसिस्टम को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। EDF ने कुल ₹216.33 करोड़ जुटाए, जिसमें से ₹210.33 करोड़ MeitY से प्राप्त हुए।

स्टार्टअप्स के क्षेत्र:

  • इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT)

  • रोबोटिक्स

  • ड्रोन और ऑटोनॉमस व्हीकल्स

  • हेल्थटेक

  • साइबर सुरक्षा

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग

EDF का निवेश विवरण (30 सितंबर 2025 तक):

  • डॉटर फंड्स में निवेश: ₹257.77 करोड़

  • डॉटर फंड्स द्वारा स्टार्टअप्स में निवेश: ₹1,335.77 करोड़

  • स्टार्टअप्स की संख्या: 128

  • रोजगार सृजन: 23,600+

  • बौद्धिक संपदा (IP): 368

  • एक्सिट्स: 37 निवेश

  • EDF से प्राप्त रिटर्न: ₹173.88 करोड़

निष्कर्ष

Electronics Development Fund (EDF) ने भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी क्षेत्रों में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसने स्टार्टअप्स को जोखिम पूंजी उपलब्ध कराई, उन्नत तकनीकों पर काम करने वाली कंपनियों का समर्थन किया और देश में घरेलू डिजाइन और बौद्धिक संपदा निर्माण को मजबूत किया। EDF की पारदर्शी और पेशेवर रूप से प्रबंधित संरचना ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया और देश में स्वावलंबी और सशक्त इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम की नींव रखी है।


भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा: ECMS के तहत ₹5,532 करोड़ की 7 परियोजनाओं को मंजूरी

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केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत सात परियोजनाओं की पहली किस्त को मंजूरी देने की घोषणा की। अब भारत में मल्टी-लेयर प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB), एचडीआई PCB, कैमरा मॉड्यूल, कॉपर क्लैड लैमिनेट और पॉलीप्रोपाइलीन फिल्म्स का निर्माण किया जाएगा।

यह कदम भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण यात्रा में एक बड़ा मील का पत्थर है — तैयार उत्पादों से आगे बढ़ते हुए अब देश मॉड्यूल, घटक, कच्चे माल और मशीनरी निर्माण में कदम रख रहा है।

योजना को मिला अभूतपूर्व प्रतिसाद

इस योजना को देशी और विदेशी दोनों कंपनियों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है। अब तक 249 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें कुल ₹1.15 लाख करोड़ निवेश, ₹10.34 लाख करोड़ उत्पादन और 1.42 लाख रोजगार सृजन की संभावना है। यह भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव है।

आज जिन सात परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, उनकी कुल लागत ₹5,532 करोड़ है। इन परियोजनाओं से ₹36,559 करोड़ मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक घटकों का उत्पादन और 5,100 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होंगे।

स्वीकृत इकाइयां तमिलनाडु (5), आंध्र प्रदेश (1) और मध्य प्रदेश (1) में स्थापित होंगी — जिससे हाई-टेक विनिर्माण का विस्तार महानगरों से बाहर भी होगा और क्षेत्रीय संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा।

घरेलू मांग की पूर्ति और निर्यात की संभावनाएं

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि नई इकाइयों के माध्यम से भारत की 20% घरेलू PCB मांग और 15% कैमरा मॉड्यूल सब-असेंबली की मांग पूरी होगी।
इसके साथ ही, कॉपर क्लैड लैमिनेट (CCL) की पूरी घरेलू मांग अब देश में ही पूरी होगी और अतिरिक्त 60% उत्पादन का निर्यात किया जाएगा।

स्वीकृत उत्पादों में शामिल

  • HDI एवं मल्टी-लेयर PCB – हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की मूल सर्किट प्रणाली

  • कैमरा मॉड्यूल – स्मार्टफोन, ड्रोन, लैपटॉप, चिकित्सा उपकरण, रोबोट, और ऑटोमोबाइल सिस्टम में उपयोग

  • कॉपर क्लैड लैमिनेट (CCL) – मल्टी-लेयर PCB निर्माण का आधारभूत घटक

  • पॉलीप्रोपाइलीन फिल्म्स – कैपेसिटर निर्माण में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकॉम, ईवी और औद्योगिक उपकरणों में इस्तेमाल होती है

रणनीतिक उपलब्धियां और औद्योगिक प्रभाव

  • भारत में पहली बार कॉपर क्लैड लैमिनेट (CCL) निर्माण संयंत्र स्थापित होगा।

  • परियोजनाएं आयात निर्भरता कम करेंगी, जिससे घरेलू बाजार में उत्पाद सस्ते होंगे।

  • उच्च कौशल वाले रोजगार और अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा मिलेगा।

  • रक्षा, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों के लिए विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) तैयार होगी।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

भारत अब “डिवाइस से लेकर डिज़ाइन”, “चिप्स से लेकर कंपोनेंट्स” और “मैन्युफैक्चरिंग से लेकर इनोवेशन” तक एक पूर्ण मूल्य श्रृंखला (Value Chain) तैयार कर रहा है।
यह योजना PLI स्कीम और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) को पूरक बनाती है — जिससे भारत एक सच्चे “प्रोडक्ट नेशन” के रूप में उभर रहा है।


DRDO द्वारा ‘इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC-2025)’ का कर्टन रेज़र कार्यक्रम हैदराबाद में आयोजित

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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा आगामी ‘इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC-2025)’ के लिए एक कर्टन रेज़र कार्यक्रम का आयोजन 17 अक्टूबर 2025 को रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (DRDL), हैदराबाद में किया गया। DRDO इस आयोजन के प्रमुख आयोजकों में से एक है और कॉन्क्लेव के 11 विषयगत सत्रों में से “इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग” पर होने वाले सत्र का नेतृत्व कर रहा है।

DRDL हैदराबाद में आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग (DDR&D) के सचिव एवं DRDO के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कमत ने आधुनिक तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र में सेमीकंडक्टर्स की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर्स आज स्वास्थ्य, संचार, परिवहन, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ऊर्जा प्रदान करने वाले प्रमुख घटक बन चुके हैं। जैसे-जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्थाएँ डिजिटलीकरण और स्वचालन की दिशा में आगे बढ़ रही हैं, सेमीकंडक्टर्स राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक प्रगति और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए अत्यंत आवश्यक हो गए हैं।

भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा का उल्लेख करते हुए डॉ. कमत ने कहा कि 2021 में ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM)’ के शुभारंभ के बाद से भारत ने मात्र चार वर्षों में दृष्टि से क्रियान्वयन तक की यात्रा सफलतापूर्वक तय की है। उन्होंने इस राष्ट्रीय लक्ष्य को दोहराया कि भारत वर्ष 2036 तक सेमीकंडक्टर अनुसंधान, नवाचार और मानव संसाधन विकास के क्षेत्रों में विश्व के शीर्ष तीन देशों में स्थान प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने यह भी बताया कि DRDO ने सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है और 4-इंच सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) वेफर्स के उत्पादन तथा 150W तक की गैलियम नाइट्राइड (GaN) हाई इलेक्ट्रॉन मोबिलिटी ट्रांजिस्टर (HEMTs) के निर्माण के लिए स्वदेशी विधियाँ विकसित की हैं।

ESTIC-2025 का आयोजन भारत सरकार के 13 मंत्रालयों और विभागों द्वारा, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। यह कॉन्क्लेव 3 से 5 नवम्बर 2025 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होगा, जिसका विषय है —

“विकसित भारत 2047 – सतत नवाचार, तकनीकी प्रगति और सशक्तिकरण में अग्रणी भूमिका।”

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