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'छात्रों का भविष्य सर्वोपरि'... धर्मेंद्र प्रधान ने मंत्री पद से दिया इस्तीफा, अगले साल से 'नीट' में बड़ा बदलाव

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नई दिल्ली- नीट-यूजी परीक्षा में हुई धांधली और देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर दो पन्नों का एक भावुक पत्र साझा कर अपने इस फैसले की जानकारी दी और कहा कि वे नहीं चाहते कि राजनीतिक गतिरोध के कारण देश के छात्रों का भविष्य खराब हो।

इस्तीफे की 3 सबसे बड़ी वजहें

* छात्रों को कानूनी पेचीदगियों से बचाना: प्रधान ने लिखा कि वे नहीं चाहते कि देश का कोई भी विद्यार्थी कानूनी विवादों और अदालती चक्करों में उलझे। उनका मकसद है कि छात्र अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान दें।

* देश विरोधी ताकतों को रोकने का संकल्प: पत्र के अनुसार, जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में जो हालात बने हैं, उसका देश विरोधी ताकतें फायदा न उठा सकें, इसलिए उन्होंने पद छोड़ना सही समझा।

* आहत महसूस करना: उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम से वे बेहद दुखी हैं और यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है।


धर्मेंद्र प्रधान के पत्र की मुख्य बातें

* 4 दशकों का नाता: उन्होंने कहा कि वे पिछले 40 से अधिक वर्षों से छात्र राजनीति, शिक्षकों और शिक्षा सुधारों के लिए समर्पित रहे हैं।

* CBI जांच और बड़ा फैसला: उन्होंने माना कि 3 मई को हुई नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताएं हुई थीं, जिसकी जांच तुरंत सीबीआई को सौंपी गई। साथ ही ऐलान किया कि अगले साल से नीट परीक्षा पूरी तरह CBT (कंप्यूटर आधारित परीक्षा) मोड में होगी।

* परीक्षा माफिया पर वार: प्रधान ने कहा कि परीक्षा माफिया के कारण किसी भी मेधावी छात्र का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने कुछ लोगों पर छात्रों को गुमराह करने का आरोप भी लगाया।

* पीएम का आभार: उन्होंने मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग के लिए प्रधानमंत्री मोदी और कैबिनेट के सभी सहयोगियों का धन्यवाद किया।

आगे क्या?

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वे आने वाले समय में प्रभु श्रीजगन्नाथ जी के आशीर्वाद से ओडिशा की जनता और देश के युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए खुद को समर्पित रखेंगे।

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राज्यपाल डेका से निजी विश्वविद्यालयों के पदाधिकारियों ने की भेंट

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रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका से आज यहां लोकभवन में राज्य के निजी विश्वविद्यालयों के पदाधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से संबंधित प्रावधानों पर राज्यपाल से विचार-विमर्श किया। डेका ने राज्य में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के विस्तार के सबंद्ध में अपने विचार साझा किए।

इस अवसर पर मैट्स विश्वविद्यालय रायपुर के कुलाधिपति गजराज पगारिया, शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई दुर्ग के कुलाधिपति आईपी मिश्रा, भारती विश्वविद्यालय दुर्ग के कुलाधिपति सुशील चंद्राकर, कलिंगा विश्वविद्यालय रायपुर के कुलाधिपति डॉ. संदीप अरोड़ा, आईएसबीएम विश्वविद्यालय, गरियाबंद और रायपुर के कुलपति डॉ. आनंद महलवार, अंजनेय विश्वविद्यालय रायपुर के कुलाधिपति अभिषेक अग्रवाल, दावड़ा विश्वविद्यालय रायपुर के सीईओ चिन्मय दावड़ा, कोलंबिया विश्वविद्यालय रायपुर के प्रो. कुलाधिपति हरजीत सिंह हूरा उपस्थित थे।

उच्च शिक्षा विभाग ने ‘साधना सप्ताह 2026’ के तहत भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आयोजित किया इंटरैक्टिव सत्र

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नई दिल्ली- उच्च शिक्षा विभाग ने 2 से 8 अप्रैल 2026 तक मनाए गए ‘साधना सप्ताह 2026’ के अंतर्गत भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) पर एक सफल इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन किया। यह सप्ताह क्षमता निर्माण आयोग (CBC) के स्थापना दिवस और ‘मिशन कर्मयोगी’ के पांच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मनाया गया, जो नागरिक-केंद्रित शासन की दिशा में भारत की एक महत्वपूर्ण पहल है।

कार्यक्रम की शुरुआत उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव (प्रशासन) सैयद एकराम रिजवी के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने मिशन कर्मयोगी के तहत क्षमता निर्माण आयोग की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आयोग विभिन्न ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के माध्यम से ज्ञान, कौशल और क्षमता विकास को बढ़ावा दे रहा है।

इस सत्र का उद्देश्य समकालीन शिक्षा, अनुसंधान और शासन में भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता पर सार्थक चर्चा और संरचित सह-अधिगम (peer learning) को बढ़ावा देना था। इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि भारत की समृद्ध बौद्धिक परंपराएं आधुनिक समस्या-समाधान, नवाचार और नीति-निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण IIT हैदराबाद के बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोहन राघवन का संबोधन रहा। उन्होंने अपने अंतःविषय (interdisciplinary) कार्य के अनुभव साझा किए, जिसमें तकनीक, विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपराओं का समन्वय शामिल है।

डॉ. राघवन ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) की बाजार संभावनाएं भले ही व्यापक हों, लेकिन इसकी वास्तविक शक्ति उच्च शिक्षा में परिवर्तनकारी भूमिका निभाने में है। उन्होंने जोर दिया कि IKS को एक अलग विषय के रूप में नहीं, बल्कि एक बहुविषयक ढांचे के रूप में देखा जाना चाहिए, जो विज्ञान, इंजीनियरिंग, मानविकी और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को समृद्ध कर सकता है।

उन्होंने बताया कि IKS को उच्च शिक्षा में शामिल करने से रटने की पद्धति से आगे बढ़कर एक समग्र शिक्षा मॉडल विकसित किया जा सकता है, जिसमें ज्ञान, उसके अनुप्रयोग और मूल्यों (धर्म) का संतुलन हो। यह दृष्टिकोण वर्तमान शैक्षिक सुधारों के अनुरूप है, जो अनुसंधान, नवाचार और आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देता है।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों के साथ प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता और उसे शासन में शामिल करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई।

इस सत्र में शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस पहल के माध्यम से विभाग ने मिशन कर्मयोगी के तहत ज्ञान-आधारित, अनुकूलनशील और मानवीय शासन प्रणाली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से शिक्षा को रोजगारोन्मुख, नवाचारपरक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है-उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर मंथन, रायपुर में हुई उच्च स्तरीय एकदिवसीय कार्यशाला

रायपुर- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों एवं संभावनाओं पर विमर्श के उद्देश्य से उच्च शिक्षा विभाग द्वारा न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस रायपुर में एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।    

कार्यशाला में उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को केवल कागज़ों तक सीमित न रखकर प्रत्येक विद्यार्थी तक पहुँचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का कुलपति,कुलसचिव,महाविद्यालय के प्राचार्य एवं प्राध्यापक स्वयं अध्ययन करें।उन्होंने राज्य स्तर पर संचालित समितियों द्वारा नियमित समीक्षा, जिला क्लस्टर व्यवस्था, टास्क फोर्स की बैठकें तथा विश्वविद्यालय स्तर पर प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में समावेशित कर विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति, विरासत और मूल्यों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। स्थानीय लोक कला और शिल्प कला को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।भारतीय ज्ञान परंपरा पर विद्यार्थियों के बीच ऑनलाइन प्रतियोगिता आयोजित कर उनमें जागरूकता बढ़ाई जाएगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से शिक्षा को रोजगारोन्मुख, नवाचारपरक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है। मंत्री वर्मा ने भविष्य में इस प्रकार की विस्तृत एवं बहुदिवसीय कार्यशालाओं के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यशाला में विशेष अतिथि के रूप में भारतीय शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के अध्यक्ष अतुल कोठारी, राष्ट्रीय सह संयोजक, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के डॉ. ओम प्रकाश शर्मा, निदेशक आईआईटी भिलाई डॉ. राजीव प्रकाश, शिक्षाविद दिलीप केशरवानी, डॉ. नारायण गवांडकर सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर उच्च शिक्षा आयुक्त डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों और इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला।मुख्य वक्ता अतुल कोठारी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने, क्रेडिट सिस्टम, मल्टीपल एंट्री एवं एग्जिट सिस्टम तथा टास्क फोर्स के गठन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। वहीं डॉ. राजीव प्रकाश ने नीति के व्यावहारिक क्रियान्वयन से जुड़े अनुभव साझा किए। इसी तरह ओम प्रकाश शर्मा ने राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला।

कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। जिसमें प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया गया।

परीक्षा पे चर्चा बनी जन आंदोलन, विकसित भारत की शिक्षा यात्रा में निर्णायक बदलाव

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक लेख साझा किया, जिसमें बताया गया है कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ किस तरह एक जन आंदोलन बन चुकी है और यह भारत की शिक्षा यात्रा में एक निर्णायक बदलाव का प्रतीक है, जो विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में मार्ग प्रशस्त कर रही है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के एक्स (X) पर किए गए एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO India) ने कहा कि इस लेख में यह स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा पे चर्चा केवल एक संवाद कार्यक्रम नहीं रह गई है, बल्कि यह देशव्यापी जन आंदोलन का रूप ले चुकी है, जिसने शिक्षा को लेकर सोच और दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन लाया है।

लेख में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह नीति बाल-केंद्रित दृष्टिकोण, भारतीय ज्ञान परंपरा पर जोर और मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा देकर विद्यार्थियों को 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए तैयार करती है।

प्रधानमंत्री ने इस पहल को शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव बताते हुए कहा कि परीक्षा पे चर्चा छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को तनावमुक्त और सकारात्मक माहौल में जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रही है। यह पहल न केवल छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ा रही है, बल्कि शिक्षा को आनंदमय और उद्देश्यपूर्ण बनाने में भी योगदान दे रही है।

यह पहल भारत को एक शिक्षित, सशक्त और विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक अहम कदम के रूप में देखी जा रही है।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक संपन्न

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में शिक्षकों की कमी को गंभीरता से लेते हुए 5000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उक्त शिक्षक भर्ती व्यापमं के माध्यम से की जाए तथा इसके लिए फरवरी 2026 तक विज्ञापन जारी किया जाए, ताकि समयबद्ध तरीके से नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण हो सके।

बैठक में शिक्षक भर्ती परीक्षा–2023 से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई। इस दौरान यह निर्णय लिया गया कि परीक्षा–2023 की प्रतीक्षा सूची की मान्यता नहीं बढ़ाई जाएगी, ताकि पिछले वर्षों में उत्तीर्ण युवाओं को भी शासकीय सेवा में आने का मौका दिया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में सभी आवश्यक कदम तेज़ी से उठाए जाएंगे।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ‘समग्र शिक्षा 3.0’ पर हितधारकों के साथ परामर्श बैठक की अध्यक्षता की

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन, प्रवासी भारतीय केंद्र में ‘रीइमैजिनिंग समग्र शिक्षा’ शीर्षक से आयोजित एक दिवसीय परामर्श बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक समग्र शिक्षा 3.0 के लिए एक रणनीतिक, परामर्शात्मक और क्रियान्वयन योग्य रोडमैप तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित की गई, जिसमें राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और शिक्षा क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया।


बैठक में उभरती चुनौतियों, सर्वोत्तम प्रथाओं और अगले चरण में शासन, अवसंरचना, शिक्षक प्रशिक्षण तथा छात्र हितलाभों को सुदृढ़ करने हेतु आवश्यक प्राथमिक हस्तक्षेपों पर विचार-विमर्श किया गया।

इस अवसर पर जयंत चौधरी, कौशल विकास एवं उद्यमिता तथा शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); संजय कुमार, सचिव (स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता); डॉ. विनीत जोशी, सचिव (उच्च शिक्षा); मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी; 11 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा सचिव एवं समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक; विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधि तथा शिक्षा क्षेत्र के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ उपस्थित थे।

अपने संबोधन में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य तभी साकार हो सकता है जब देश के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और कक्षा 12 तक शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित हो। उन्होंने सीखने की खाइयों को पाटने, ड्रॉपआउट दर कम करने, अधिगम एवं पोषण परिणामों में सुधार, शिक्षक क्षमता निर्माण, महत्वपूर्ण कौशलों के विकास तथा ‘अमृत पीढ़ी’ को मैकाले मानसिकता से आगे ले जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि इस मंच पर साझा किए गए विचार और सुझाव स्कूली शिक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने तथा समग्र शिक्षा को परिणामोन्मुख, वैश्विक प्रतिस्पर्धी, भारतीय मूल्यों से जुड़ा और छात्रों की विविध आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील बनाने में सहायक होंगे। उन्होंने प्रौद्योगिकी के सार्थक एकीकरण के माध्यम से छात्रों के समग्र विकास और ज्ञान तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विद्यालयों को पुनः समाज के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

समग्र शिक्षा के अगले चरण का उल्लेख करते हुए प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन के पांच वर्ष बाद देश शैक्षिक सुधार के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने सभी हितधारकों से शैक्षणिक वर्ष 2026–27 के लिए एक मजबूत और समग्र वार्षिक योजना तैयार कर इसे एक राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि योजनाएं तभी सफल होती हैं जब वे विद्यालयों और राज्यों की जमीनी वास्तविकताओं पर आधारित ‘बॉटम-अप’ दृष्टिकोण से तैयार की जाती हैं। उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा 3.0, राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना का व्यावहारिक रूप है, जहां विद्यालय परिवर्तन के केंद्र बनते हैं और बहुविषयक शिक्षा के माध्यम से छात्रों को कार्य, जीवन और तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के लिए तैयार किया जाता है।

इस अवसर पर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्रालय के अपर सचिव धीरज साहू ने एक विस्तृत प्रस्तुति दी, जिसमें समग्र शिक्षा और एनईपी 2020 के अंतर्गत हुई प्रगति तथा आगामी वर्षों के लिए रूपरेखा और प्रमुख उपलब्धि लक्ष्यों को रेखांकित किया गया।

समग्र शिक्षा एक एकीकृत, केंद्रीय प्रायोजित योजना है, जो पूर्व-प्राथमिक से लेकर वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक संपूर्ण स्कूली शिक्षा को समग्र दृष्टिकोण से कवर करती है।


जशपुर जिले के शासकीय विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने नई पहल

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मुख्यमंत्री की मौजूदगी में जिला प्रशासन, एसईसीएल एवं ईडीसीआईएल के बीच हुआ एमओयू

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में आज बगिया में जशपुर जिले के शासकीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हुआ। विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन जशपुर, एसईसीएल एवं ईडीसीआईएल के मध्य त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से कलेक्टर रोहित व्यास, एसईसीएल की ओर से जनरल मैनेजर सी. एम. वर्मा तथा ईडीसीआईएल की ओर से प्रोजेक्ट डायरेक्टर विकास सहरावत ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिक्षा को रोचक एवं प्रभावी बनाना समय की आवश्यकता है, ताकि ग्रामीण एवं दूरस्थ अंचलों के बच्चों को भी शहरों के समान बेहतर शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराए जा सके। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों में नवाचार, जिज्ञासा एवं तकनीकी दक्षता का विकास होगा, जो उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बनेगा। 

एमओयू के तहत जशपुर जिले के चयनित शासकीय विद्यालयों में चरणबद्ध रूप से इंटरएक्टिव पैनल स्थापित किए जाएंगे। इन उपकरणों के माध्यम से शिक्षक डिजिटल कंटेंट, वीडियो, प्रेजेंटेशन एवं ई-लर्निंग संसाधनों का उपयोग कर कक्षाओं को अधिक रोचक, सरल एवं प्रभावी बना सकेंगे। साथ ही एमओयू में इंटरएक्टिव पैनल की स्थापना के साथ-साथ उनके प्रशिक्षण, संचालन एवं नियमित मेंटेनेंस के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं, ताकि उपकरणों का सतत एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके। 

इस परियोजना के लिए एसईसीएल द्वारा सीएसआर मद से 5 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिसके अंतर्गत जिले के शासकीय विद्यालयों में 206 इंटरएक्टिव पैनल लगाए जाएंगे। इस पहल से जिले के सैकड़ों विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षा की सुविधा प्राप्त होगी। कलेक्टर रोहित व्यास ने एसईसीएल एवं ईडीसीआईएल के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि इस परियोजना से विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

बच्चों के भविष्य को स्वर्णिम बनाने की महती जिम्मेदारी शिक्षा विभाग पर - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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  • छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के तहत शिक्षा विभाग की रणनीति पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
  • अंजोर विजन के लघु, मध्यम और दीर्घकालीन लक्ष्यों पर व्यापक एवं गहन विमर्श
  • मुख्यमंत्री ने कहा — लक्ष्य बड़े हैं, इसलिए कार्ययोजना ठोस हो और क्रियान्वयन पूरी ईमानदारी से हो

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के तहत शिक्षा विभाग के लक्ष्यों की प्राप्ति को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में उन्होंने वर्ष 2030 तक के लघु अवधि, 2035 तक के मध्य अवधि तथा दीर्घकालीन लक्ष्यों पर विस्तृत चर्चा की और अधिकारियों को ठोस कार्ययोजना तैयार कर त्वरित एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विकसित भारत 2047 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, और इसी क्रम में ‘अंजोर विजन’ के माध्यम से विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों की प्राप्ति का सबसे सशक्त आधार शिक्षा है, क्योंकि दक्ष, कुशल और स्मार्ट बच्चे ही भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश में शिक्षकों की संख्या राष्ट्रीय औसत से बेहतर है और सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। बैठक के दौरान स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से समस्त जानकारी मुख्यमंत्री के साथ साझा की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यदि एक शिक्षक अपनी जिम्मेदारी को दृढ़ता से निभा ले, तो बच्चों के भविष्य को स्वर्णिम बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने शिक्षकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने, प्रतिभाशाली शिक्षकों को नेतृत्व के अवसर प्रदान करने और बेहतर अकादमिक माहौल विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने आंगनबाड़ी एवं बालवाड़ी के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए। बैठक में अंजोर विजन 2047 के अंतर्गत 1000 मॉडल स्कूलों की स्थापना, स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली, अंतर्राष्ट्रीय स्तर के स्कूलों की शुरुआत, एआई-आधारित मूल्यांकन प्रणाली, डिजिटल ऐप के माध्यम से व्यक्तिगत पाठ योजनाएं, शिक्षक प्रशिक्षण के उन्नयन तथा STEM शिक्षा के विस्तार जैसे प्रमुख लक्ष्यों की समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री ने STEM शिक्षा को प्रोत्साहित करने हेतु साइंस सिटी की स्थापना, विज्ञान मेलों के आयोजन और एआई एवं रोबोटिक्स लैब प्रारंभ करने पर विशेष जोर दिया। बैठक में वर्ष 2035 तक ड्रॉपआउट दर को शून्य करने, राज्य स्तरीय ECCE समिति के गठन, शिक्षकों की भर्ती, मूल्यांकन केंद्रों को सुदृढ़ करने और आगामी तीन वर्षों के लक्ष्यों को निर्धारित कर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने संबंधी विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की कार्यप्रणाली — परीक्षार्थियों के डेटा संकलन, प्रश्नपत्र निर्माण, परीक्षा संचालन एवं मूल्यांकन — की समीक्षा की तथा हायर सेकेंडरी स्तर पर अतिरिक्त विषयों के विकल्प, प्रतियोगी परीक्षाओं पर आधारित प्रश्न बैंक, त्रुटिरहित मूल्यांकन व्यवस्था और गोपनीय प्रश्नपत्रों के परिवहन हेतु ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए।

बैठक में एनईपी 2020 के तहत नामांकन दर में हुई उल्लेखनीय वृद्धि, बालवाड़ी को स्कूली शिक्षा से जोड़ने, मातृभाषा-आधारित शिक्षण, ‘जादुई पिटारा’ एवं संवाद कार्यक्रम, इको क्लब की गतिविधियाँ, पीएम ई-विद्या के अंतर्गत डिजिटल प्रसारण तथा व्यावसायिक शिक्षा के विस्तार जैसी उपलब्धियाँ भी प्रस्तुत की गईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंजोर विजन 2047 के लक्ष्य छत्तीसगढ़ की आने वाली पीढ़ी को सशक्त, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

बैठक में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, मुख्य सचिव  विकास शील, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की अध्यक्ष रेणु पिल्लै, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव रजत कुमार सहित स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

वार्षिक NES सम्मेलन 2025: नेवल स्कूलों में गुणवत्ता, समानता और NEP-2020 के अनुरूप परिवर्तन पर फोकस

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वार्षिक नेवी एजुकेशन सोसाइटी (NES) सम्मेलन 2025 सफलतापूर्वक 10 से 13 नवंबर 2025 तक ईस्टर्न नेवल कमांड, विशाखापत्तनम में आयोजित किया गया।

सम्मेलन की मुख्य विशेषताएँ

सम्मेलन में कार्यकारी समिति, प्रबंधन सलाहकार समिति (MAC), और अकादमिक सलाहकार समिति (AAC) की महत्वपूर्ण बैठकों का आयोजन किया गया, जिसमें नेवल स्कूलों की नीति संरचना और संचालनात्मक पहलुओं पर चर्चा हुई, विशेष रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के परिवर्तनकारी कार्यान्वयन के संदर्भ में।

  • कार्यकारी समिति की बैठक 12 नवंबर 2025 को आयोजित हुई और इसकी अध्यक्षता वी.एdm सीआर प्रवीण नायर, कंट्रोलर पर्सनल सर्विसेज और NES के अध्यक्ष ने की।

  • MAC और AAC सत्र की अध्यक्षता कमोडोर (नौसेना शिक्षा) Cmde SM उरूज अथर और NES के उपाध्यक्ष ने की।

सम्मेलन में नेवल हेडक्वार्टर से अधिकारी तथा देशभर के नेवल स्कूलों का प्रतिनिधित्व करने वाले शैक्षणिक और प्रशासनिक नेताओं ने भाग लिया।

प्रमुख गतिविधियाँ और चर्चा

  • प्रतिभागियों ने केस स्टडी प्रस्तुत कीं, जिसमें चुनौतियों और उनके समाधान की प्रभावी रणनीतियों पर प्रकाश डाला गया।

  • मुद्दा-आधारित चर्चाओं के माध्यम से विशेषज्ञता साझा की गई और महत्वपूर्ण कार्यात्मक मामलों पर रचनात्मक संवाद हुआ, जिससे ठोस और लागू करने योग्य समाधान तैयार हुए।

नवाचार और समावेशिता

इस बार पहली बार सम्मेलन में संकल्प स्कूलों ने भाग लिया – ये संस्थाएँ नेवल समुदाय के बच्चों के लिए शिक्षा, पूर्व-व्यावसायिक प्रशिक्षण और जीवन कौशल विकास को बढ़ावा देती हैं। यह कदम समावेशिता और सहयोगी विकास के प्रति NES की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मुख्य भाषण

वी.एडमनायर ने अपने मुख्य भाषण में नेवल स्कूलों में समानता और समावेशी शैक्षणिक वातावरण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने पिछले वर्ष की प्रगति की समीक्षा करते हुए NEP-2020 के अनुरूप चल रहे सुधारों, मानकीकरण और नीति सुविधा में प्रगति, साथ ही बुनियादी ढांचे और शिक्षक विकास में निवेश को रेखांकित किया।

उन्होंने NES के संशोधित विज़न और मिशन स्टेटमेंट्स भी प्रस्तुत किए, जो छात्रों को भविष्य के लिए तैयार नागरिक बनाने के उद्देश्य से एक मजबूत मूल्य प्रणाली पर आधारित हैं। यह संशोधन NEP-2020 की परिवर्तनकारी सोच को प्रतिबिंबित करता है और उच्च गुणवत्ता, समावेशी शिक्षा प्रदान करने के NES के संकल्प को पुष्ट करता है।

उपलब्धियाँ और पुरस्कार

सम्मेलन के दौरान NES अकादमिक पुरस्कार 2024-25 प्रदान किए गए, जिससे शैक्षणिक उत्कृष्टता को सम्मानित किया गया। इसके अलावा, प्रतिभागियों को विशाखापत्तनम के नेवल चिल्ड्रन स्कूलों का गाइडेड टूर भी कराया गया।


छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य शिक्षा को नई दिशा —9 नए नर्सिंग कॉलेजों के भवन निर्माण के लिए 78 करोड़ 15 लाख रुपए की स्वीकृति

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की एक और महत्वपूर्ण घोषणा को राज्य सरकार ने मूर्त रूप दे दिया है। राज्य बजट में शामिल 9 नवीन नर्सिंग महाविद्यालयों के भवन निर्माण कार्य के लिए 78 करोड़ 15 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी गई है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा को नई दिशा देगा और स्वास्थ्य क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करने में मदद करेगा।

प्रत्येक नर्सिंग महाविद्यालय के भवन निर्माण के लिए 8 करोड़ 68 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। ये नवीन नर्सिंग कॉलेज दंतेवाड़ा, बैकुंठपुर, बीजापुर, बलरामपुर, जशपुर, रायगढ़, धमतरी, जांजगीर-चांपा और नवा रायपुर (अटल नगर) में स्थापित किए जाएंगे। इन संस्थानों की स्थापना से प्रदेश के दूरस्थ और जनजातीय अंचलों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण नर्सिंग शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए द्वार खुलेंगे और राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता और सुदृढ़ होगी।

"हमारा उद्देश्य है कि प्रदेश के हर युवा को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य शिक्षा मिले और हर जिले में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कुशल मानव संसाधन भी तैयार हो। 9 नए नर्सिंग कॉलेजों के भवन निर्माण की स्वीकृति प्रदेश के स्वास्थ्य शिक्षा क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ेगी। यह पहल न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था को सशक्त बनाएगी, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर भी बढ़ाएगी।" -मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

"मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दूरदर्शी नेतृत्व में राज्य सरकार ने स्वास्थ्य शिक्षा को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक निर्णय लिया है। 9 नए नर्सिंग कॉलेजों के भवन निर्माण की स्वीकृति से प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण नर्सिंग शिक्षा के साथ ही रोजगार और आत्मनिर्भरता के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। यह पहल छत्तीसगढ़ को स्वास्थ्य सेवाओं और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने में मदद करेगी।" - स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल

"मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रही है। 9 नए नर्सिंग कॉलेजों के भवन निर्माण के लिए 78 करोड़ 15 लाख रुपए की स्वीकृति इस बात का प्रतीक है कि सरकार प्रदेश के युवाओं के लिए अवसर सृजन और सेवा क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।" - वित्त मंत्री ओ पी चौधरी

छत्तीसगढ़ में होगी 5000 शिक्षकों की भर्ती, वित्त विभाग की स्वीकृति

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शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और युवाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में बड़ा निर्णय 

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य शासन के वित्त विभाग ने आज 5000 शिक्षकों के पदों पर भर्ती की सहमति प्रदान कर दी है। यह निर्णय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उस घोषणा का मूर्त रूप है, जिसमें उन्होंने कहा था कि— “शिक्षा किसी भी राज्य की प्रगति की सबसे मजबूत नींव है और हमारी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि हर बच्चे तक ज्ञान और अवसर दोनों पहुँचे।”

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस निर्णय को “नए छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में ऐतिहासिक कदम” बताते हुए कहा—

“शिक्षा के बिना कोई समाज, कोई राज्य आगे नहीं बढ़ सकता। यह भर्ती हमारे युवाओं के लिए रोजगार का अवसर तो देगी ही, साथ ही ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता और निरंतरता भी सुनिश्चित करेगी। हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले — यही हमारी प्रतिबद्धता है।”

शिक्षा में निवेश, भविष्य में निवेश

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने बीते महीनों में शिक्षा सुधार से जुड़े कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।

  1. विद्यालय भवनों के निर्माण और मरम्मत कार्य को गति दी गई है,
  2. डिजिटल शिक्षा सामग्री और स्मार्ट क्लासेज़ की पहल शुरू की गई है,
  3. शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आधुनिक स्वरूप दिया गया है।
  4. इन सबके बीच 5000 शिक्षकों की भर्ती की स्वीकृति शिक्षा क्षेत्र में “नवाचार और विस्तार” का प्रतीक बनकर उभरी है।
  5. वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा – शिक्षा में किया गया हर निवेश, भविष्य में किया गया निवेश है

राज्य के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा—

“मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप शिक्षा को राज्य की शीर्ष प्राथमिकता बनाया गया है। वित्त विभाग द्वारा 5000 शिक्षकों के पदों की भर्ती की सहमति देना इसी संकल्प का हिस्सा है।

शिक्षा में किया गया प्रत्येक निवेश, प्रदेश के उज्जवल भविष्य में किया गया निवेश है। इस निर्णय से स्कूलों में शिक्षकों की कमी पूरी होगी, ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ेगी और हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।

वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए शिक्षा जैसे मूलभूत क्षेत्र को संसाधन उपलब्ध कराना हमारी सरकार की जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता दोनों है।”

ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में शिक्षा को नई गति

प्रदेश में लंबे समय से शिक्षकों की कमी एक चुनौती रही है, विशेषकर दूरस्थ और आदिवासी अंचलों में। अनेक विद्यालय विषयवार शिक्षकों के अभाव से जूझ रहे थे। नई भर्ती से इन क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी। बच्चों को अब अपने ही गाँव और क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। यह पहल ‘सबके लिए शिक्षा’ के लक्ष्य को साकार करेगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा—

“शिक्षा राज्य के विकास की सबसे सशक्त आधारशिला है। हमारी सरकार का संकल्प है कि छत्तीसगढ़ के हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और हर विद्यालय में योग्य शिक्षक उपलब्ध हों। 5000 शिक्षकों की भर्ती की स्वीकृति उसी दिशा में बड़ा कदम है। यह निर्णय न केवल शिक्षा के क्षेत्र को सशक्त करेगा, बल्कि प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगा।”

‘विकसित छत्तीसगढ़’ के विज़न की दिशा में निर्णायक कदम

राज्य सरकार शिक्षा को सर्वांगीण विकास का आधार मानते हुए स्कूल इन्फ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण, छात्रवृत्तियों के विस्तार, और छात्रहितैषी योजनाओं पर निरंतर निवेश कर रही है।

यह नई भर्ती उसी दीर्घकालिक दृष्टि का हिस्सा है जो ‘शिक्षित, सक्षम और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़’ के निर्माण की ओर अग्रसर है।

इस निर्णय से जहाँ शिक्षण संस्थानों को नई गति और दिशा मिलेगी, वहीं हजारों युवाओं के सपनों को साकार करने का मार्ग खुलेगा। यह पहल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में उस नवछत्तीसगढ़ की नींव को मजबूत करेगी, जहाँ हर बच्चे को शिक्षा, हर युवा को अवसर और हर परिवार को सम्मानजनक भविष्य मिलेगा।

स्कूलिंग में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार की पहल

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भारत सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में जीवन और शिक्षा की सुविधा (Ease of Living & Schooling) को बढ़ावा देने के लिए कई विधायी, नीति और संस्थागत सुधारों की पहल की है।

एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, विद्यालय शिक्षा और साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) और अन्य संबंधित हितधारकों को पत्र लिखकर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को स्कूलों में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। इसका उद्देश्य स्कूल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाना, विशेषकर स्कूलों में वित्तीय लेन-देन से संबंधित कार्यों को सरल और पारदर्शी बनाना है।

UPI, मोबाइल वॉलेट और नेट बैंकिंग जैसी डिजिटल भुगतान प्रणालियों की व्यापक और बढ़ती पहुँच का लाभ उठाते हुए, विभाग ने सभी राज्यों, UTs और मंत्रालय के अंतर्गत स्वायत्त निकायों जैसे NCERT, CBSE, KVS, NVS को यह सुझाव दिया है कि वे स्कूलों में प्रवेश और परीक्षा शुल्क की डिजिटल माध्यम से वसूली के लिए सुरक्षित और पारदर्शी तरीके अपनाएँ।

पत्र में कहा गया है कि नकद-आधारित भुगतान से डिजिटल भुगतान में संक्रमण करने के कई फायदे हैं। यह अभिभावकों और छात्रों के लिए सुविधाजनक, पारदर्शी और घर से भुगतान करने योग्य विकल्प उपलब्ध कराता है, जिससे उन्हें स्कूल आने की आवश्यकता नहीं होती।

विभाग ने राज्यों और UTs को इसी दिशा में कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित किया है और कहा कि स्कूलों में डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ना सरकारी डिजिटल परिवर्तन के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम होगा। इससे सभी हितधारकों की वित्तीय साक्षरता बढ़ेगी और डिजिटल लेन-देन की दुनिया खुल जाएगी।

यह पहल विकसित भारत 2047 के विज़न को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी — एक डिजिटल रूप से सशक्त, समावेशी और नागरिक-केंद्रित शिक्षा प्रणाली की दिशा में।


नानदमाली शाला में शिक्षक पदस्थापना से बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार

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रायपुर-प्राथमिक शाला नानदमाली में विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने युक्तियुक्तकरण के तहत अतिरिक्त शिक्षकों की पदस्थापना की है, जिससे विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण पूरी तरह बदल गया है। शिक्षक पदस्थापना से बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिसकी अभिभावकों ने सराहना की है।

विद्यालय की वर्तमान स्थिति:

सरगुजा जिले के नानदमाली प्राथमिक शाला में वर्तमान में 123 विद्यार्थी दर्ज हैं। पहले शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही थी, लेकिन नवीन पदस्थापना के बाद अब विद्यालय में कुल 5 शिक्षक उपलब्ध हैं:

  • प्रधान पाठक: पुष्पा बड़ा

  • सहायक शिक्षक: दीनानाथ कैवर्त

  • सहायक शिक्षक: पुष्पा पंडो

  • सहायक शिक्षक: हरी चंद पटेल

  • सहायक शिक्षक (युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया): नीलिमा सिंह

इन शिक्षकों के चलते प्रत्येक कक्षा में विद्यार्थियों को पर्याप्त समय और व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिल रहा है, जिससे उनकी सीखने की क्षमता में सुधार देखा जा रहा है।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में बड़ा कदम:

पांचों शिक्षक अब बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर करने में सक्रिय हैं। कक्षाओं में शिक्षक-छात्र अनुपात संतुलित होने से पढ़ाई अधिक व्यवस्थित और सरल ढंग से संचालित हो रही है। बच्चों को अब व्यक्तिगत मार्गदर्शन और पर्याप्त समय मिल रहा है।

अभिभावकों की प्रतिक्रिया:

अभिभावकों ने शिक्षक पदस्थापना और युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया की सराहना की है। उनका कहना है कि पहले कक्षाओं में शिक्षकों की कमी से पढ़ाई अधूरी रह जाती थी, लेकिन अब परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की इस पहल से न केवल विद्यार्थियों का शैक्षणिक स्तर सुधर रहा है, बल्कि पूरे गांव का शैक्षिक वातावरण सकारात्मक बन रहा है।

सरकारी पहल:

प्रदेश सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के मानकों के अनुरूप हर विद्यालय में शिक्षक-छात्र अनुपात संतुलित रखने के लिए लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

निष्कर्ष:

युक्तियुक्तकरण के तहत शिक्षक पदस्थापना से नानदमाली शाला में बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार आया है और यह ग्रामीण शिक्षा में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


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