Media24Media.com: #EconomicDiplomacy

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #EconomicDiplomacy. Show all posts
Showing posts with label #EconomicDiplomacy. Show all posts

कनाडा दौरे पर पीयूष गोयल ने निवेश, तकनीक और व्यापार सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर, 50 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य पर सहमति

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अपने कनाडा दौरे के दूसरे दिन टोरंटो में वरिष्ठ कनाडाई व्यापार नेताओं और संस्थागत निवेशकों के साथ कई उच्च स्तरीय बैठकें कीं। इस दौरे का उद्देश्य भारत–कनाडा द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना तथा निवेश और प्रौद्योगिकी साझेदारी को रणनीतिक क्षेत्रों में बढ़ावा देना है।

दिन की शुरुआत उन्होंने कनाडा–इंडिया “बिल्डिंग ब्रिजेस” कार्यक्रम में मुख्य भाषण के साथ की, जिसे ग्लोबल अफेयर्स कनाडा, CII और ASSOCHAM द्वारा वर्ल्ड ट्रेड सेंटर टोरंटो में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में 150 से अधिक व्यापार प्रतिनिधियों, निवेश समूहों और उद्योग संगठनों ने भाग लिया, जिनमें उन्नत विनिर्माण, फार्मास्यूटिकल्स, जैव प्रौद्योगिकी, स्वच्छ तकनीक, ऊर्जा तथा तेल एवं गैस क्षेत्र शामिल थे।

इसके बाद गोयल और कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनींदर सिद्धू के बीच एक फायरसाइड चैट हुई। इसमें गोयल ने भारत और कनाडा के बीच बढ़ती पूरकताओं पर प्रकाश डालते हुए मजबूत और पूर्वानुमान योग्य व्यापारिक माहौल की आवश्यकता पर जोर दिया। मंत्री सिद्धू ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई और कनाडा के अब तक के सबसे बड़े भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति की सराहना की। उन्होंने नवंबर में भारत के लिए “टीम कनाडा ट्रेड मिशन” की घोषणा की, जिसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, महत्वपूर्ण खनिज, परमाणु ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ तकनीक, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग के अवसर तलाशना है।

दोनों पक्षों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने और वर्ष के अंत तक CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) वार्ता को पूरा करने के साझा लक्ष्य की पुष्टि की।

इसके बाद भारत–कनाडा निवेश गोलमेज बैठक आयोजित हुई, जिसकी सह-अध्यक्षता दोनों मंत्रियों ने की। इसमें कनाडा के प्रमुख पेंशन फंड्स, बैंक और निवेश संस्थान शामिल हुए। चर्चा का केंद्र भारत सरकार की बुनियादी ढांचा विकास, वित्तीय क्षेत्र सुधार और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस नीतियाँ रहीं, जो वैश्विक निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा कर रही हैं। गोयल ने निवेशकों को स्वच्छ ऊर्जा, तकनीक, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई, विनिर्माण और सप्लाई चेन विविधीकरण जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ साझेदारी के लिए आमंत्रित किया।

उन्होंने कनाडा की कई प्रमुख कंपनियों और वित्तीय निवेशकों के साथ व्यक्तिगत बैठकें भी कीं, जिनमें बीमा, खाद्य प्रसंस्करण, बैंकिंग और महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण क्षेत्र शामिल थे। इन बैठकों में भारत के मैक्रोइकोनॉमिक आउटलुक, व्यापार समझौतों पर बढ़ता फोकस, उच्च-विकास क्षेत्रों के अवसर, STEM प्रतिभा और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की वृद्धि, PLI योजनाएँ तथा भारत के बेहतर होते नियामक ढांचे पर चर्चा हुई।

इसके बाद गोयल ने टोरंटो के Humber Bay Park स्थित कनिष्क स्मारक का दौरा किया, जहाँ उन्होंने पुष्पांजलि अर्पित की और एयर इंडिया फ्लाइट AI-182 आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी।

दिन का समापन ब्रैम्पटन स्थित पियर्सन कन्वेंशन सेंटर में भारतीय महावाणिज्य दूतावास द्वारा आयोजित स्वागत समारोह के साथ हुआ। यहाँ भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित करते हुए उन्होंने कनाडा में भारतीय समुदाय की भूमिका और भारत–कनाडा व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान को रेखांकित किया।

गोयल इस दौरे पर 100 से अधिक भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधियों सहित अब तक के सबसे बड़े भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। यह तीन दिवसीय यात्रा भारत–कनाडा आर्थिक संबंधों को पुनर्जीवित करने और CEPA वार्ता को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।



WTO MC14 में भारत की मजबूत पैरवी, समानता और सर्वसम्मति आधारित व्यापार प्रणाली पर जोर

No comments Document Thumbnail

याउंडे (कैमरून)- विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) के दूसरे दिन WTO सुधार से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदस्य देशों के व्यापार मंत्रियों ने चर्चा की। भारत की ओर से केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।

बैठक में गोयल ने कहा कि सर्वसम्मति (consensus) आधारित निर्णय प्रक्रिया WTO की विश्वसनीयता की आधारशिला है और किसी भी सदस्य देश को उसकी सहमति के बिना नियमों में बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने पारदर्शी, समावेशी और सदस्य-आधारित चर्चा पर जोर देते हुए कहा कि WTO को वर्तमान चुनौतियों का गंभीरता से आकलन करना चाहिए।

भारत के प्रमुख मुद्दे

  • खाद्य सुरक्षा (Food Security)

  • पब्लिक स्टॉकहोल्डिंग (PSH)

  • विशेष सुरक्षा तंत्र (SSM)

  • कॉटन से जुड़े मुद्दे

भारत ने कहा कि इन लंबित मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और वैश्विक व्यापार प्रणाली में मौजूद असमानताओं (asymmetries) को दूर करना आवश्यक है।

अन्य महत्वपूर्ण बिंदु

  • डिस्प्यूट सेटलमेंट सिस्टम की कमजोरी पर चिंता

  • छोटे देशों के हितों की रक्षा की आवश्यकता

  • पारदर्शिता का दुरुपयोग कर व्यापारिक दबाव बनाने के खिलाफ चेतावनी

  • सभी देशों को समान अवसर देने पर जोर

भारत का रुख

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने WTO सुधार प्रक्रिया को समयबद्ध और ठोस आधार पर आगे बढ़ाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सुधार प्रक्रिया:

  • पारदर्शी

  • समावेशी

  • सदस्य-प्रेरित (member-driven) होनी चाहिए

द्विपक्षीय बैठकें

सम्मेलन के दौरान पीयूष गोयल ने:

  • अमेरिका, चीन, कोरिया, स्विट्जरलैंड, न्यूजीलैंड, कनाडा, मोरक्को और ओमान के प्रतिनिधियों से मुलाकात की

  • व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की

WTO MC14 में भारत ने वैश्विक व्यापार में संतुलन, समान अवसर और विकासशील देशों के हितों की रक्षा पर जोर दिया।


भारत–यूएई सीईपीए संयुक्त समिति की तीसरी बैठक में व्यापार वृद्धि और सहयोग पर जोर

No comments Document Thumbnail

भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने भारत–यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के तहत संयुक्त समिति की तीसरी बैठक नई दिल्ली में सफलतापूर्वक आयोजित की। बैठक की सह-अध्यक्षता वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव अजय भाडू और यूएई के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मामलों के सहायक अवर सचिव ह.E. जुमा अल कैत ने की। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार में तेज वृद्धि का स्वागत किया, जो वित्त वर्ष 2024–25 में 100.06 अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर गया, जो 19.6% की मजबूत बढ़ोतरी को दर्शाता है और भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदार के रूप में यूएई की स्थिति की पुन: पुष्टि करता है। भारत-यूएई संयुक्त आयोग सीईपीए के कार्यान्वयन, प्रगति की समीक्षा और चुनौतियों के समाधान के लिए प्रमुख संस्थागत तंत्र के रूप में कार्य करता है।

दोनों पक्षों ने सीईपीए के तहत हुई प्रगति की व्यापक समीक्षा की और बाजार पहुंच संबंधी मुद्दों, डेटा साझाकरण, गोल्ड TRQ आवंटन, एंटी-डंपिंग मामलों, सेवाओं, मूल नियम (Rules of Origin), बीआईएस लाइसेंसिंग आदि पर विस्तृत चर्चा की। भारतीय पक्ष ने यूएई को गोल्ड TRQ को पारदर्शी प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से आवंटित करने के अपने हालिया निर्णय की भी जानकारी दी।

दोनों पक्षों ने हाल के उच्च-स्तरीय संपर्कों की समीक्षा की, जिनमें मुंबई और दुबई में माननीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ह.E. डॉ. थानी के बीच हुई बैठकें शामिल थीं। उन्होंने 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर के लक्ष्य की दिशा में गैर-तेल/ गैर-कीमती धातु व्यापार के विस्तार के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। चर्चाओं में औषधि क्षेत्र में नियामक सहयोग, मूल प्रमाणपत्र (Certificates of Origin) से संबंधित मुद्दों के समाधान, बीआईएस समन्वय तथा भारत के APEDA और यूएई के MoCCAE के बीच खाद्य सुरक्षा और तकनीकी आवश्यकताओं पर एमओयू के शीघ्र हस्ताक्षर को भी शामिल किया गया।

बैठक का समापन दोनों पक्षों द्वारा व्यापार सुगमता, नियामक सहयोग, डेटा साझाकरण को मजबूत करने और सेवाओं की उपसमिति की बैठक बुलाने पर सहमति के साथ हुआ। यूएई प्रतिनिधिमंडल ने वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल से भी मुलाकात की, जहां सीईपीए के सर्वोत्तम उपयोग से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की गई। यूएई प्रतिनिधिमंडल की यह यात्रा व्यापार संतुलन को गहरा करने, बाजार अवसरों के विस्तार और सीईपीए के तहत सामरिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।


भारत–स्लोवेनिया JCTEC का 10वां सत्र नई दिल्ली में सम्पन्न

No comments Document Thumbnail

भारत–स्लोवेनिया व्यापार एवं आर्थिक सहयोग संयुक्त समिति (JCTEC) के 10वें सत्र का आयोजन नई दिल्ली में हुआ। यह बैठक भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव साकेत कुमार और स्लोवेनिया के विदेश और यूरोपीय मामलों के मंत्रालय में आर्थिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक कूटनीति के महानिदेशक पीटर जापेल्ज़ की सह-अध्यक्षता में संपन्न हुई।

यह सत्र भारत और स्लोवेनिया के बीच वर्तमान आर्थिक संबंधों की समीक्षा, प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने और व्यापार एवं निवेश के लिए एक अग्रदृष्टि-आधारित रोडमैप तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।

पिछले कई वर्षों में भारत और स्लोवेनिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार निरंतर बढ़ोतरी दर्शाता रहा है, जो इस साझेदारी की गहराई और मजबूती को प्रतिबिंबित करता है।

स्लोवेनिया की मध्य यूरोप के चौराहे पर स्थित रणनीतिक स्थिति और यूरोप के साथ भारत की बढ़ती भागीदारी, दोनों देशों के लिए क्षेत्रों को और नज़दीक लाने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है। भौगोलिक और आर्थिक हितों का यह संगम व्यापार, प्रौद्योगिकी, नवाचार और संपर्कता (कनेक्टिविटी) में सहयोग को और मजबूत करने का ठोस आधार है।

बैठक के दौरान वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिदृश्य की व्यापक समीक्षा की गई, साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों का मूल्यांकन भी किया गया। कृषि, रसायन एवं फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य, परिवहन, ऊर्जा, पर्यटन, MSMEs, तथा आयुर्वेद एवं पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों सहित कई क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने एक संतुलित और परस्पर लाभकारी भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के शीघ्र निष्कर्ष पर आशावाद व्यक्त किया।

अपनी यात्रा के दौरान,पीटर जापेल्ज़ ने भारत सरकार के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की।

10वें JCTEC सत्र ने भारत और स्लोवेनिया की मजबूत आर्थिक साझेदारी के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्टि की, जो आपसी विश्वास, साझा मूल्यों और दीर्घकालिक मित्रता पर आधारित है। यह सत्र यूरोप और भारत के बीच व्यापक सहयोग के लिए एक सुदृढ़ आधार भी स्थापित करता है।


इज़राइल दौरे में पीयूष गोयल की उच्चस्तरीय बैठकों से कृषि, प्रौद्योगिकी और व्यापार सहयोग को नई गति

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अपने आधिकारिक इज़राइल दौरे के दौरान व्यापक बैठकों की एक श्रृंखला आयोजित की, जिससे कृषि, प्रौद्योगिकी, नवाचार और व्यापार के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग और मजबूत हुआ।

अपनी बैठकों के क्रम में, 21 नवंबर 2025 को गोयल ने इज़राइल के कृषि और खाद्य सुरक्षा मंत्री एवी डिक्टर से मुलाकात की और कृषि सहयोग को आगे बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की। मंत्री डिक्टर ने गोयल को इज़राइल की 25-वर्षीय खाद्य सुरक्षा रोडमैप, उन्नत बीज-सुधार रणनीतियों और कृषि के लिए जल-पुन: उपयोग तकनीकों में देश की वैश्विक नेतृत्व क्षमता के बारे में जानकारी दी।

अपने कार्यक्रम के दौरान, गोयल ने ‘पेरिस सेंटर फॉर पीस एंड इनोवेशन’ का दौरा किया, जहाँ उन्हें इज़राइल के अग्रणी तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र से अवगत कराया गया। उन्हें ड्रिप सिंचाई प्रणाली, स्टेंट तकनीक, आयरन डोम सिस्टम सहित कई महत्वपूर्ण नवाचार दिखाए गए, साथ ही भविष्य की उभरती तकनीकों और वर्चुअल रियलिटी समाधान भी प्रस्तुत किए गए। उन्होंने पेरिस सेंटर को एक प्रेरणादायक संस्था बताया, जो इज़राइल की सृजनात्मकता, नवाचार और सामाजिक प्रभाव की यात्रा को दर्शाती है।

मंत्री ने मोबिलआई द्वारा प्रदर्शित स्वचालित-ड्राइव तकनीक के माध्यम से इज़राइल की अगली पीढ़ी की गतिशीलता समाधानों में प्रगति का अनुभव भी किया। उन्होंने किब्बुत्ज़ रमात रचेल का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने सहकारी जीवनशैली, टिकाऊ कृषि पद्धतियों और समुदाय-चालित नवाचार के उनके मॉडल को देखा। इन अनुभवों ने इज़राइल की तकनीकी क्षमता और ग्रामीण विकास व सततता के प्रति उसके दृष्टिकोण की महत्वपूर्ण समझ प्रदान की।

इससे पहले, 20 नवंबर 2025 को,पीयूष गोयल ने इज़राइल के अर्थव्यवस्था मंत्री नीर बरकाट के साथ बैठक से अपने आधिकारिक कार्यक्रम की शुरुआत की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार की वर्तमान प्रगति की समीक्षा की और सहयोग के नए क्षेत्रों का पता लगाया। इसके बाद भारत–इज़राइल बिजनेस फोरम आयोजित हुआ, जिसमें दोनों देशों के मंत्रियों और उद्योग जगत के वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। इस फोरम में तकनीकी सत्र और बी2बी बैठकें शामिल थीं, जो प्रौद्योगिकी, नवाचार, कृषि और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की मजबूत रुचि को दर्शाती हैं। अपने संबोधन में गोयल ने भारत–इज़राइल संबंधों की विश्वास-आधारित नींव पर जोर दिया और फिनटेक, एग्रीटेक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, मशीन लर्निंग, फार्मास्यूटिकल्स, अंतरिक्ष और रक्षा जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाओं का उल्लेख किया।

गोयल ने इज़राइल के वित्त मंत्री बेज़लेल स्मोट्रिच के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें निवेश संबंधों को मजबूत करने, वित्तीय प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने और अधिक प्रभावी आर्थिक आदान–प्रदान के लिए नियामक सहयोग पर चर्चा हुई।

अपने उद्योग संवाद के तहत, मंत्री ने इज़राइल की अग्रणी कंपनियों—चेक पॉइंट (साइबर सुरक्षा), आईडीई टेक्नोलॉजीज (जल समाधान), एनटीए (मेट्रो परियोजनाएँ) और नेटाफिम (प्रिसिजन कृषि)—के वरिष्ठ नेतृत्व से मुलाकात की। चर्चाएँ साइबर सुरक्षा, जल एवं सीवेज प्रबंधन, शहरी गतिशीलता समाधान और उन्नत सिंचाई तकनीकों पर केंद्रित रहीं—जो भारत की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं।

दौरे का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था भारत–इज़राइल मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए टर्म्स ऑफ़ रेफ़रेंस पर हस्ताक्षर। दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई और विश्वास व्यक्त किया कि वार्ताएँ संतुलित और परस्पर लाभकारी एफटीए की दिशा में सफल होंगी।

गोयल ने प्रमुख इज़राइली मीडिया से भी संवाद किया और डायमंड समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की, जो भारत–इज़राइल व्यापार संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ है। बाद में उन्होंने मंत्री बरकाट के साथ भारत–इज़राइल सीईओ फोरम में भाग लिया, जहाँ उन्होंने द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी की मजबूती, गहराई और बढ़ती संभावनाओं को रेखांकित किया।

पीयूष गोयल की इन गतिविधियों ने भारत और इज़राइल की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाया, जिसमें दोनों देश आर्थिक संबंधों को गहरा करने, तकनीकी सहयोग बढ़ाने और रणनीतिक महत्व के क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने के लिए तत्पर हैं।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.