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वाइस एडमिरल एएन प्रमोद, एवीएसएम, वाईएसएम ने 01 अगस्त 2026 को उप नौसेना प्रमुख (Deputy Chief of Naval Staff) का पदभार ग्रहण किया।

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38वें इंटीग्रेटेड कैडेट कोर्स, नौसेना अकादमी, गोवा के पूर्व छात्र वाइस एडमिरल एएन प्रमोद को 01 जुलाई 1990 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त हुआ था। वे श्रेणी ‘A’ (CAT ‘A’) सी किंग एयर ऑपरेशंस ऑफिसर तथा संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Communication and Electronic Warfare) विशेषज्ञ हैं। उन्होंने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन तथा नेवल वॉर कॉलेज, गोवा से नेवल हायर कमांड कोर्स भी किया है।

36 वर्षों से अधिक के अपने विशिष्ट सैन्य करियर में उन्होंने समुद्र और तट—दोनों क्षेत्रों में कमान, संचालन, प्रशिक्षण और स्टाफ से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। उनके प्रमुख समुद्री दायित्वों में गाइडेड मिसाइल विध्वंसक आईएनएस राजपूत के कार्यकारी अधिकारी (Executive Officer), पनडुब्बी रोधी युद्धक गश्ती पोत आईएनएस अभय, लैंडिंग शिप टैंक (लार्ज) आईएनएस शार्दुल तथा गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस सतपुड़ा की कमान शामिल है। उन्होंने गलवान घटना के बाद ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के दौरान पश्चिमी बेड़े (Western Fleet) के फ्लीट ऑपरेशंस ऑफिसर के रूप में भी सेवाएं दीं। इसके अतिरिक्त उन्होंने वर्ष 1999 के ऑपरेशन विजय तथा वर्ष 2001 के ऑपरेशन पराक्रम में भी भाग लिया।

तटीय नियुक्तियों में उन्होंने श्री विजयपुरम स्थित नौसेना वायु स्टेशन आईएनएस उत्क्रोश के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में कार्य किया तथा डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन में डायरेक्टिंग स्टाफ के रूप में भी सेवाएं दीं। नौसेना मुख्यालय में उनकी प्रमुख नियुक्तियों में संयुक्त निदेशक (नेवल एयर स्टाफ), निदेशक तथा प्रधान निदेशक (विमान अधिग्रहण) शामिल रहे। वे वर्ष 2006 से 2009 तक टैक्टिकल ऑडिट ग्रुप तथा वर्ष 2016 से 2019 तक भारतीय नौसेना की स्ट्रैटेजिक एंड ऑपरेशनल काउंसिल के सदस्य भी रहे।

रियर एडमिरल के पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने भारतीय नौसेना अकादमी के उप कमांडेंट, सहायक नौसेना प्रमुख (वायु) तथा फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग, महाराष्ट्र नौसैनिक क्षेत्र के रूप में दायित्व निभाए।

वाइस एडमिरल के पद पर पदोन्नति के उपरांत उन्होंने 13 दिसंबर 2023 से 31 जुलाई 2026 तक महानिदेशक नौसैनिक संचालन (Director General Naval Operations – DGNO) के रूप में कार्य किया। डीजीएनओ के रूप में वे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना की योजना, तैयारी और परिचालन तत्परता तथा पश्चिम एशिया में जारी संकट के दौरान समुद्री सुरक्षा अभियानों के संचालन में महत्वपूर्ण रूप से जुड़े रहे।

उनकी विशिष्ट सेवाओं और उत्कृष्ट परिचालन नेतृत्व के सम्मान में उन्हें वर्ष 2024 में अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) तथा वर्ष 2025 में युद्ध सेवा पदक (YSM) से सम्मानित किया गया।

उन्होंने वाइस एडमिरल तरुण सोबती, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम का स्थान लिया है, जो 38 वर्षों से अधिक की विशिष्ट सेवा के बाद 31 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्त हुए।

आईएनएस इक्षाक सेशेल्स पहुंचा, राष्ट्रीय दिवस समारोह में करेगा भारत का प्रतिनिधित्व

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना का स्वदेशी रूप से निर्मित सर्वे वेसल लार्ज (Survey Vessel Large - SVL) आईएनएस इक्षाक (INS Ikshak) 26 जून 2026 को दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी परिचालन तैनाती के तहत सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया बंदरगाह (Port Victoria) पहुंच गया।

आईएनएस इक्षाक की यह यात्रा सेशेल्स के 50वें राष्ट्रीय दिवस समारोह के साथ हो रही है, जो भारत और सेशेल्स के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत समुद्री संबंधों और मित्रता को और सुदृढ़ करने का प्रतीक है।

राष्ट्रीय दिवस समारोह और नौसैनिक सहयोग

अपने प्रवास के दौरान आईएनएस इक्षाक सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लेगा। इसके साथ ही भारतीय नौसेना और सेशेल्स डिफेंस फोर्सेज के बीच कई पेशेवर बैठकों और संयुक्त गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग, समन्वय (Interoperability) और सामरिक साझेदारी को और मजबूत करना है।

सामुदायिक सेवा गतिविधियों का भी आयोजन

इस दौरे के दौरान भारतीय नौसेना स्थानीय समुदायों के लिए निःशुल्क चिकित्सा शिविर, आवश्यक वस्तुओं का वितरण तथा अन्य सामुदायिक सेवा कार्यक्रम भी आयोजित करेगी। इन पहलों का उद्देश्य दोनों देशों के लोगों के बीच विश्वास, सद्भाव और आपसी संबंधों को और मजबूत करना है।

आम नागरिकों के लिए भी खुलेगा जहाज

पोर्ट कॉल के दौरान आईएनएस इक्षाक को आम नागरिकों के लिए भी खोला जाएगा, जिससे लोग भारतीय नौसेना की आधुनिक क्षमताओं, स्वदेशी तकनीक और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा एवं सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को करीब से जान सकेंगे।

MAHASAGAR विजन को मिलेगा बल

आईएनएस इक्षाक की यह तैनाती MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विजन के अनुरूप हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, स्थिरता और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की भारत की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करती है।

यह यात्रा एक बार फिर दर्शाती है कि भारत अपने मित्र देशों के साथ समुद्री साझेदारी को मजबूत करते हुए सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र के निर्माण के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

डीआरडीओ के स्वदेशी ‘नेत्र’ AEW&C सिस्टम को मिली अंतिम परिचालन मंजूरी, भारतीय वायुसेना को सौंपा गया FOC प्रमाणपत्र

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बेंगलुरु- भारत ने रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। Defence Research and Development Organisation (DRDO) द्वारा विकसित स्वदेशी ‘नेत्र’ एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) सिस्टम को अंतिम परिचालन मंजूरी (Final Operational Clearance - FOC) मिल गई है। इस अवसर पर भारतीय वायुसेना को आधिकारिक रूप से FOC प्रमाणपत्र सौंपा गया।

यह प्रणाली भारतीय वायुसेना, डीआरडीओ और उद्योग जगत के सहयोग से विकसित की गई है। इसका उद्देश्य हवाई निगरानी, युद्धक्षेत्र की वास्तविक समय की जानकारी (Situational Awareness) और बैटल मैनेजमेंट क्षमताओं को मजबूत करना है। इससे भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता और रणनीतिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

बेंगलुरु में आयोजित समारोह की अध्यक्षता वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने की। कार्यक्रम में पूर्व वायुसेना प्रमुख आर.के.एस. भदौरिया, पूर्व डीआरडीओ अध्यक्ष डॉ. एस. क्रिस्टोफर, डीआरडीओ और भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने स्वदेशी नेत्र AEW&C सिस्टम की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रणाली ने ऑपरेशन सिंदूर और 2019 बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसे अभियानों में अपनी विश्वसनीयता और प्रभावशीलता साबित की है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी तकनीकें बदलते युद्ध परिदृश्यों के अनुसार आवश्यक संशोधन और उन्नयन की सुविधा प्रदान करती हैं।

डीआरडीओ के एरोनॉटिक्स क्लस्टर की महानिदेशक डॉ. के. राजलक्ष्मी मेनन ने नेत्र परियोजना की विकास यात्रा और सामने आई तकनीकी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि मजबूत सिस्टम इंजीनियरिंग और सटीक परीक्षण प्रक्रिया ने परियोजना को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।

इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर के महानिदेशक डॉ. बी.के. दास ने कहा कि डीआरडीओ, भारतीय वायुसेना और उद्योग क्षेत्र के बीच उत्कृष्ट तालमेल ही इस परियोजना की सफलता का आधार रहा है। उन्होंने नेत्र AEW&C को आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

कार्यक्रम के दौरान परियोजना में योगदान देने वाले विभिन्न संगठनों और इकाइयों को सम्मानित भी किया गया। अधिकारियों ने कहा कि नेत्र AEW&C प्रणाली का सफल परिचालन भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई प्रदान करेगा और यह वैज्ञानिक संस्थानों, रक्षा उत्पादन इकाइयों तथा सैन्य बलों के बीच मजबूत सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है।


भारतीय नौसेना को मिलेगा बड़ा स्वदेशी बल: 21 जून को तीन अत्याधुनिक युद्धपोतों का होगा कमीशनिंग समारोह

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कोलकाता- भारतीय नौसेना 21 जून 2026 को कोलकाता में स्वदेशी रूप से निर्मित तीन अत्याधुनिक अग्रिम पंक्ति के नौसैनिक प्लेटफॉर्म — दुनागिरी, संशोधक और अग्रय — को औपचारिक रूप से अपने बेड़े में शामिल करेगी। यह ऐतिहासिक समारोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित होगा।

भारतीय नौसेना के वारशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किए गए और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा निर्मित ये तीनों प्लेटफॉर्म समुद्री युद्ध, हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण और पनडुब्बी रोधी अभियानों जैसी महत्वपूर्ण क्षमताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनकी तैनाती से भारत की समुद्री सुरक्षा और नौसैनिक शक्ति को नई मजबूती मिलेगी।

दुनागिरी: अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट

दुनागिरी प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित पांचवां स्टील्थ फ्रिगेट है। यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MRSAM) सहित आधुनिक हथियारों और सेंसरों से लैस है। यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमता को और अधिक सशक्त बनाएगा।

संशोधक: समुद्री सर्वेक्षण में नई ताकत

संशोधक बड़े सर्वेक्षण पोत (Survey Vessel Large) श्रृंखला का चौथा जहाज है। इसे तटीय और गहरे समुद्र में हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण, समुद्री भू-वैज्ञानिक और महासागरीय आंकड़ों के संग्रह के लिए तैयार किया गया है। यह ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (AUV) और रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV) जैसी आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित है।

अग्रय: पनडुब्बी रोधी अभियानों का नया प्रहरी

अग्रय अर्नाला श्रेणी के एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट का चौथा पोत है। इसमें हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और शैलो वाटर सोनार सिस्टम लगाए गए हैं, जो तटीय क्षेत्रों में छिपे पानी के भीतर के खतरों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम हैं।

आत्मनिर्भर भारत की बड़ी सफलता

इन तीनों प्लेटफॉर्म में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। इनके निर्माण में देशभर के 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) की भागीदारी रही, जिससे हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी मिला।

समुद्री शक्ति को नई ऊंचाई

दुनागिरी, संशोधक और अग्रय की कमीशनिंग भारतीय नौसेना, सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्ड, निजी उद्योगों और MSMEs के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करने के साथ-साथ भारत की समुद्री सुरक्षा, समुद्री निगरानी क्षमता और ब्लू-वॉटर ऑपरेशंस को नई मजबूती प्रदान करेगी।



आत्मनिर्भर भारत को बड़ी मजबूती: भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर खरीदेगा रक्षा मंत्रालय

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना की क्षमताओं को और मजबूत करने तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने के लिए पुणे स्थित भारत फोर्ज लिमिटेड के साथ लगभग 425 करोड़ रुपये की लागत से 12 सेट 1.25 मेगावाट मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर की खरीद का अनुबंध किया है।

यह अनुबंध नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में ‘बाय (इंडियन)’ श्रेणी के तहत हस्ताक्षरित किया गया। परियोजना में कम से कम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री (Indigenous Content) का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे देश में रक्षा उत्पादन का मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों में भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर आधुनिक युद्धपोतों में विद्युत उत्पादन का प्रमुख स्रोत होते हैं। ये जनरेटर नौसेना के महत्वपूर्ण लड़ाकू प्रणालियों, उन्नत हथियारों और अत्याधुनिक सेंसरों को ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसलिए इन्हें नौसैनिक युद्धक क्षमताओं की रीढ़ माना जाता है।

इस अनुबंध के माध्यम से भारत में पहली बार बड़े पैमाने पर मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर के स्वदेशी निर्माण की क्षमता विकसित होगी। साथ ही, उपकरणों के पूरे जीवनचक्र (Life-Cycle) के दौरान रखरखाव और तकनीकी सहायता भी देश में ही उपलब्ध होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारतीय नौसेना की परिचालन तैयारियों को बढ़ाने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।



लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे भारतीय सेना के नए प्रमुख, 30 जून से संभालेंगे कमान

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नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने वर्तमान उप सेना प्रमुख (Vice Chief of Army Staff) लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को भारतीय सेना का अगला थल सेना प्रमुख (Chief of the Army Staff) नियुक्त किया है। वह 30 जून 2026 की दोपहर से यह जिम्मेदारी संभालेंगे। वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी उसी दिन सेवा से सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), खडकवासला के पूर्व छात्र हैं और दिसंबर 1986 में आर्मर्ड कॉर्प्स में कमीशन प्राप्त किया था। लगभग चार दशकों के अपने शानदार सैन्य करियर में उन्होंने संचालन, रणनीति, सैन्य आधुनिकीकरण और संस्थागत विकास के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

अपने सैन्य जीवन के दौरान उन्होंने विभिन्न चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में नेतृत्व किया है। उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्र में आर्मर्ड रेजिमेंट, पश्चिमी मोर्चे पर आर्मर्ड ब्रिगेड तथा जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी बल का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया। लेफ्टिनेंट जनरल के रूप में उन्होंने भारतीय सेना की प्रमुख स्ट्राइक फॉर्मेशन सुदर्शन चक्र कोर की कमान भी संभाली।

इसके बाद उन्होंने दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सैन्य गतिविधियों तथा औपचारिक जिम्मेदारियों का संचालन किया। आर्मी कमांडर बनने के बाद उन्होंने दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान दोनों का नेतृत्व किया, जो भारतीय सेना में एक दुर्लभ उपलब्धि मानी जाती है।

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को सेना के आधुनिकीकरण और क्षमता विकास में उनके योगदान के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। उन्होंने सेना मुख्यालय में रणनीतिक योजना और क्षमता विकास से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए भारतीय सेना की आधुनिक युद्ध आवश्यकताओं और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप कई महत्वपूर्ण योजनाओं को दिशा दी।

एक उत्कृष्ट सैन्य अधिकारी के रूप में उन्होंने सैन्य शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। वे हायर कमांड कोर्स और नेशनल डिफेंस कॉलेज के स्नातक हैं तथा उन्होंने पेरिस में प्रतिष्ठित कमांड एंड स्टाफ कोर्स भी पूरा किया है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में भारतीय सेना आधुनिकीकरण, तकनीकी नवाचार और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने की दिशा में और अधिक सशक्त होगी।



सेशेल्स पहुंचा आईएनएस तरकश, भारत-सेशेल्स समुद्री साझेदारी हुई और मजबूत

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सेशेल्स- भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तरकश दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी परिचालन तैनाती के दौरान सेशेल्स की राजधानी पोर्ट विक्टोरिया पहुंचा। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और सेशेल्स के बीच समुद्री सहयोग तथा द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत बनाना है।

आईएनएस तरकश ने सेशेल्स कोस्ट गार्ड के जहाज पीएस ज़ोरोस्टर को भारत से सेशेल्स तक सुरक्षित रूप से एस्कॉर्ट किया। यह जहाज कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) में मरम्मत और उन्नयन कार्य पूरा करने के बाद सेशेल्स लौट रहा था। यह सहयोग दोनों देशों के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी और आपसी विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।

इस दौरे के दौरान आईएनएस तरकश के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन रोहित मिश्रा सेशेल्स सरकार और रक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा।

भारतीय नौसेना सेशेल्स सरकार को महत्वपूर्ण तकनीकी उपकरण, आवश्यक स्पेयर पार्ट्स और अन्य जरूरी सामग्री भी सौंपेगी, जिससे समुद्री सुरक्षा और संचालन क्षमता को और मजबूती मिलेगी।

यह पोर्ट कॉल भारत और सेशेल्स के बीच मित्रता, आपसी सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही, हिंद महासागर क्षेत्र में साझा समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों की सामरिक साझेदारी को भी बल मिलेगा।



आईएमए की पासिंग आउट परेड में राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन, महिला कैडेट्स को बताया नए भारत की ताकत

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देहरादून- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में 158वें रेगुलर कोर्स और 141वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स की पासिंग आउट परेड की समीक्षा की।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने अधिकारी कैडेट्स को देश के सबसे कठिन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से एक को सफलतापूर्वक पूरा करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि उनका साहस और विवेक भविष्य में उनकी सबसे बड़ी ताकत होंगे।

राष्ट्रपति ने विशेष रूप से परेड में शामिल नौ महिला कैडेट्स को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इसे भारतीय सैन्य अकादमी के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि यह केवल भारतीय सशस्त्र बलों के इतिहास में एक नया अध्याय नहीं है, बल्कि महिला-नेतृत्व वाले विकास की दिशा में भारत की प्रगति का प्रेरणादायक उदाहरण भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में और अधिक महिला कैडेट्स अकादमी का हिस्सा बनेंगी।

राष्ट्रपति मुर्मू ने मित्र देशों से आए विदेशी कैडेट्स को भी बधाई देते हुए कहा कि वे आईएमए से प्राप्त मूल्यों और प्रशिक्षण के बल पर अपने-अपने देशों की सेनाओं में उत्कृष्ट योगदान देंगे।

उन्होंने कहा कि आईएमए में विदेशी कैडेट्स की मौजूदगी भारत की मित्रता, सहयोग और वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यहां विकसित होने वाले आपसी विश्वास और पेशेवर संबंध देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के रक्षक हैं और 140 करोड़ से अधिक भारतीयों के विश्वास की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। उन्होंने उन्हें हमेशा सेवा को सर्वोच्च कर्तव्य मानने की सलाह दी।

राष्ट्रपति ने कहा कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों, तकनीकी प्रगति और जटिल वैश्विक परिस्थितियों के इस दौर में भारतीय सेना को हमेशा भविष्य के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने युवा अधिकारियों से आजीवन सीखते रहने, साहसिक निर्णय लेने और नैतिक नेतृत्व का परिचय देने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि एक सैन्य अधिकारी के रूप में उनकी जिम्मेदारी केवल नेतृत्व करना ही नहीं, बल्कि अपने सैनिकों का मार्गदर्शन और उनकी देखभाल करना भी है। उन्हें उदाहरण प्रस्तुत करते हुए टीम भावना, समर्पण और विश्वास को मजबूत बनाना होगा ताकि वे अपनी इकाइयों की युद्ध क्षमता को और अधिक प्रभावी बना सकें।


वाइस एडमिरल अजय कोचर ने भारतीय नौसेना के 48वें वाइस चीफ के रूप में संभाला कार्यभार

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वाइस एडमिरल अजय कोचर, पीवीएसएम, एवीएसएम, एनएम ने 29 मई 2026 को भारतीय नौसेना के 48वें वाइस चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ (VCNS) के रूप में कार्यभार संभाला। पदभार ग्रहण करने पर फ्लैग ऑफिसर ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि दी।

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, पुणे के पूर्व छात्र वाइस एडमिरल अजय कोचर को 01 जुलाई 1988 को भारतीय नौसेना में कमीशन मिला था। गनरी और मिसाइल सिस्टम्स के विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने अपने 37 वर्षों से अधिक के शानदार करियर में विभिन्न कमांड, ऑपरेशनल और स्टाफ जिम्मेदारियां निभाई हैं।

उन्होंने आईएनएस नाशक, विभूति और किरण की कमान संभाली तथा फ्रिगेट त्रिकंद के कमीशनिंग कमांडिंग ऑफिसर रहे। उन्होंने विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य की भी कमान संभाली, जिसके दौरान इसके एयर विंग का सफल एकीकरण और संचालन किया गया।

वे डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन, नेवल वॉर कॉलेज, गोवा तथा रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज, यूनाइटेड किंगडम के स्नातक हैं। उन्होंने नौसेना मुख्यालय में संयुक्त निदेशक (नेवल प्लान्स), निदेशक (स्टाफ रिक्वायरमेंट्स) और प्रधान निदेशक DSCT जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।

फ्लैग रैंक में पदोन्नति के बाद उन्होंने 2018 में असिस्टेंट कंट्रोलर (कैरियर प्रोजेक्ट्स) और असिस्टेंट कंट्रोलर (वारशिप प्रोडक्शन एंड एक्विजिशन) के रूप में सेवाएं दीं। इसके बाद 2021 में उन्होंने वेस्टर्न फ्लीट की कमान संभाली और बाद में नेशनल डिफेंस अकादमी के कमांडेंट के रूप में प्रशिक्षण मानकों और बुनियादी ढांचे के विकास में योगदान दिया।

उन्होंने 25 मई 2024 को वेस्टर्न नेवल कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ का पद संभाला और पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऑपरेशन सिंदूर सहित कई अभियानों में उन्होंने नौसेना की प्रतिक्रिया का नेतृत्व किया। उनके उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए उन्हें 2022 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2026 में परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया।

पदभार ग्रहण से पहले वे अंडमान और निकोबार कमांड के कमांडर-इन-चीफ के रूप में कार्यरत थे, जहां उन्होंने तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्तता को मजबूत किया।

वाइस एडमिरल अजय कोचर का परिवार उनकी पत्नी रेमन, जो विज्ञापन और शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी एक कलाकार हैं, और उनके दो बच्चों से मिलकर बना है। उनकी पुत्री सबा स्वतंत्र पत्रकार हैं तथा पुत्र करण एक वित्तीय परामर्श फर्म में कार्यरत हैं।

डीआरडीओ और भारतीय वायुसेना ने किया ‘TARA’ हथियार का सफल पहला परीक्षण

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Defence Research and Development Organisation (DRDO) और Indian Air Force (IAF) ने 7 मई 2026 को ओडिशा तट के पास Tactical Advanced Range Augmentation (TARA) हथियार का सफल पहला उड़ान परीक्षण किया।

TARA भारत का पहला स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम है, जो बिना गाइडेड वारहेड्स को अत्याधुनिक प्रिसीजन गाइडेड हथियारों में बदलने की क्षमता रखता है। यह सिस्टम कम लागत में दुश्मन के जमीनी ठिकानों को अधिक सटीकता और ताकत के साथ निशाना बनाने में सक्षम है।

इस अत्याधुनिक प्रणाली को Research Centre Imarat (RCI), हैदराबाद और DRDO की अन्य प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित किया गया है। इसमें आधुनिक और कम लागत वाली तकनीकों का उपयोग किया गया है।

TARA परियोजना का निर्माण Development cum Production Partners (DcPP) और कई भारतीय उद्योगों के सहयोग से किया गया है, जिन्होंने इसके उत्पादन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण पर DRDO, भारतीय वायुसेना और सभी साझेदार उद्योगों को बधाई दी। उन्होंने इसे भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया।

वहीं, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के चेयरमैन समीर वी कामत ने भी इस सफल उड़ान परीक्षण से जुड़ी पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं।


DRDO और भारतीय नौसेना की बड़ी कामयाबी, एंटी-शिप मिसाइल NASM-SR का सफल परीक्षण

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भारत ने एक बार फिर अपनी रक्षा क्षमता का दम दिखाया है। Defence Research and Development Organisation (DRDO) और Indian Navy ने मिलकर नेवल एंटी-शिप मिसाइल (NASM-SR) का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण ओडिशा तट के पास बंगाल की खाड़ी में नौसेना के हेलीकॉप्टर से किया गया।

इस परीक्षण की खास बात यह रही कि एक ही हेलीकॉप्टर से दो मिसाइलों को एक साथ (salvo) लॉन्च किया गया, जो भारत के लिए पहली बार है। दोनों मिसाइलों ने अपने लक्ष्य को सटीकता से भेदा और सभी परीक्षण मानकों को पूरी तरह हासिल किया।

अत्याधुनिक तकनीक से लैस मिसाइल

NASM-SR मिसाइल पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित की गई है। इसमें:

  • उन्नत सीकर और एवियोनिक्स सिस्टम

  • फाइबर-ऑप्टिक आधारित नेविगेशन सिस्टम

  • हाई-बैंडविड्थ टू-वे डेटा लिंक

  • सटीक गाइडेंस और कंट्रोल तकनीक

जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं, जो इसे दुश्मन के जहाजों के खिलाफ बेहद प्रभावी बनाती हैं।

सटीक निशाना और सफल परीक्षण

इस परीक्षण के दौरान मिसाइल ने वॉटरलाइन हिट क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया, यानी जहाज के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से पर सटीक वार किया। परीक्षण की निगरानी चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से रडार और अन्य आधुनिक उपकरणों के जरिए की गई।

कई संस्थानों का संयुक्त प्रयास

इस मिसाइल को हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) सहित DRDO की कई प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योगों के सहयोग से विकसित किया गया है। इससे देश की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को भी मजबूती मिली है।

रक्षा मंत्री ने दी बधाई

राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर DRDO, नौसेना, वायुसेना और सभी संबंधित टीमों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता भारत की समुद्री सुरक्षा को और सशक्त बनाएगी।

वहीं DRDO प्रमुख समीर वी. कामत ने भी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की मेहनत की सराहना की।

क्या है महत्व?

यह परीक्षण भारत के लिए एक बड़ा कदम है, जिससे:

  • समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी

  • दुश्मन के जहाजों पर सटीक हमला संभव होगा

  • आत्मनिर्भर भारत की दिशा में रक्षा क्षेत्र और मजबूत होगा

कुल मिलाकर, यह सफलता भारत को आधुनिक और शक्तिशाली रक्षा तकनीक वाले देशों की श्रेणी में और मजबूत स्थान दिलाती है।

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर भारतीय वायुसेना का शक्ति प्रदर्शन, आपात लैंडिंग की सफल टेस्टिंग

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सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश- भारतीय वायुसेना ने एक बार फिर अपनी ताकत और तैयारियों का प्रदर्शन करते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) को सफलतापूर्वक सक्रिय किया। यह ऑपरेशन दिन और रात—दोनों समय किया गया, जिससे वायुसेना की हर परिस्थिति में ऑपरेशन करने की क्षमता साबित हुई।

इस महत्वपूर्ण अभ्यास का आयोजन सुल्तानपुर  जिले में किया गया, जहां राज्य के मंत्री ओम प्रकाश राजभर और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

आधुनिक विमानों और कमांडो का प्रदर्शन

इस ऑपरेशन में वायुसेना के कई अत्याधुनिक विमान और हेलीकॉप्टर शामिल हुए:

  • जगुआर, मिराज-2000 और सुखोई-30 MKI जैसे फाइटर जेट

  • C-295 और AN-32 जैसे ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट

  • Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर

  • गरुड़ कमांडो टीम

इन सभी ने एक्सप्रेसवे पर सफलतापूर्वक लैंडिंग और टेक-ऑफ कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।

कम समय में ELF एक्टिवेशन

भारतीय वायुसेना ने उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर:

  • बेहद कम समय में ELF को सक्रिय किया

  • दिन और रात दोनों समय सफल संचालन किया

  • अपने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को वैलिडेट किया

क्यों है यह अहम?

यह अभ्यास कई मायनों में महत्वपूर्ण है:

  • पारंपरिक रनवे के बिना भी वायुसेना ऑपरेशन कर सकती है

  • युद्ध या आपात स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया संभव

  • एक्सप्रेसवे एयरस्ट्रिप्स फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में काम करते हैं

आपदा राहत में भी बढ़ेगी ताकत

इस तरह की सुविधाएं न केवल रक्षा क्षेत्र में, बल्कि:

  • आपदा राहत (HADR) ऑपरेशन

  • दूरदराज इलाकों में मेडिकल और राहत पहुंचाने
    में भी बेहद कारगर साबित होंगी।

मजबूत तालमेल का उदाहरण

इस पूरे ऑपरेशन में वायुसेना, UPEIDA और स्थानीय प्रशासन के बीच शानदार तालमेल देखने को मिला, जिसने देश की रणनीतिक तैयारी और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता को और मजबूत किया।

निष्कर्ष

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर किया गया यह सफल अभ्यास भारतीय वायुसेना की तत्परता, तकनीकी दक्षता और लचीलापन का स्पष्ट प्रमाण है, जो देश की सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती देता है।


भारत–मिस्र रक्षा सहयोग पर बड़ी खबर

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काहिरा- भारत और मिस्र के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती मिली है। दोनों देशों की संयुक्त रक्षा समिति (JDC) की 11वीं बैठक 20 से 22 अप्रैल तक काहिरा में आयोजित हुई, जिसमें द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और आगे बढ़ाने पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।

बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संयुक्त सचिव (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) अमिताभ प्रसाद ने किया, जबकि मिस्र की ओर से रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

क्या रहे मुख्य फैसले?

दोनों देशों ने 2026–27 के लिए रक्षा सहयोग योजना पर सहमति जताई। इसके तहत:

  • सैन्य सहयोग तंत्र को और मजबूत किया जाएगा

  • संयुक्त प्रशिक्षण और अभ्यास बढ़ाए जाएंगे

  • समुद्री सुरक्षा में सहयोग को विस्तार दिया जाएगा

  • सैन्य अभ्यासों का दायरा और जटिलता बढ़ेगी

  • रक्षा उत्पादन और तकनीक में साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा

रक्षा उद्योग में बढ़ता सहयोग

भारत ने अपने तेजी से बढ़ते रक्षा उत्पादन पर प्रस्तुति दी:

  • कुल उत्पादन 20 अरब डॉलर से अधिक

  • 100 से ज्यादा देशों को लगभग 4 अरब डॉलर का निर्यात

दोनों देशों ने रक्षा निर्माण में साझा उत्पादन (co-production) और सह-विकास (co-development) के अवसर तलाशने पर सहमति जताई।

नौसेना और वायुसेना सहयोग

  • पहली बार नौसेना-से-नौसेना स्टाफ वार्ता आयोजित हुई

  • भारतीय नौसेना की हिंद महासागर में सुरक्षा भूमिका और सूचना साझाकरण तंत्र को सराहा गया

  • भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने मिस्र वायुसेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अम्र अब्देल रहमान साकर से भी मुलाकात की

 शहीदों को श्रद्धांजलि

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने काहिरा के हेलियोपोलिस युद्ध स्मारक पर जाकर
प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में शहीद भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।

रणनीतिक महत्व

  • 2022 में रक्षा सहयोग पर समझौता (MoU) हुआ था

  • 2023 में संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिला

यह बैठक दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों और क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।


भारतीय नौसेना कमांडर्स सम्मेलन 2026 शुरू, भविष्य की रणनीति और सुरक्षा पर मंथन

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नई दिल्ली- Indian Navy का बहुप्रतीक्षित कमांडर्स सम्मेलन 01/2026 नौ सेना भवन में शुरू हो गया। सम्मेलन का उद्घाटन एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी (नौसेना प्रमुख) द्वारा किया गया, जिसमें देशभर से वरिष्ठ नौसेना अधिकारी, ऑपरेशनल एवं क्षेत्रीय कमांडर तथा मुख्यालय के अधिकारी शामिल हुए।

नौसेना प्रमुख का संबोधन

अपने उद्घाटन भाषण में नौसेना प्रमुख ने भारत के समुद्री हितों की रक्षा में नौसेना की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने, ऑपरेशनों की बढ़ती गति और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल को बड़ी उपलब्धि बताया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए नौसेना को हर समय युद्ध के लिए तैयार (Combat Ready) रहना चाहिए। साथ ही, आधुनिक तकनीकों को अपनाकर एक “Future Ready Force” तैयार करना समय की आवश्यकता है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग और रणनीतिक दृष्टिकोण

नौसेना प्रमुख ने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सक्रिय भूमिका को दोहराया। उन्होंने मित्र देशों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यासों और सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया, ताकि एक मजबूत, समन्वित और विश्वसनीय रणनीति विकसित की जा सके।

 सम्मेलन में प्रमुख चर्चाएं

सम्मेलन के दौरान कई अहम विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया—

  • संयुक्त सैन्य संचालन (Joint Operations)

  • समुद्री और तटीय क्षमता में वृद्धि

  • जहाजों की मरम्मत और रखरखाव

  • बहु-क्षेत्रीय सुरक्षा उपाय

  • प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

  • मानव संसाधन विकास

  • नवाचार और आत्मनिर्भरता (Indigenisation)

 सीडीएस का महत्वपूर्ण संदेश

जनरल अनिल चौहान (Chief of Defence Staff) ने भी सम्मेलन को संबोधित किया।
उन्होंने बदलते वैश्विक परिदृश्य और युद्ध के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए नौसेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आर्थिक और तकनीकी पहलुओं का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है।

निष्कर्ष

भारतीय नौसेना कमांडर्स सम्मेलन 2026 देश की समुद्री सुरक्षा, रणनीतिक योजना और भविष्य की तैयारियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है।
इस सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्ष आने वाले समय में भारत की रक्षा रणनीति को और मजबूत बनाएंगे।


IOS सागर 2026 की शुरुआत, समुद्री सहयोग को नया बल

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हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोगात्मक समुद्री सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, इंडियन ओशन शिप (IOS) सागर का दूसरा संस्करण 16 मार्च 2026 को प्रारंभ हुआ।

फरवरी 2026 में भारतीय नौसेना ने इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम (IONS) की अध्यक्षता संभाली। इसलिए इस संस्करण में हिंद महासागर क्षेत्र के 16 IONS देशों की भागीदारी शामिल है।

यह पहल भारत के लंबे समय से चले आ रहे समुद्री सहयोग प्रयासों पर आधारित है और “सागर” (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) के भारत सरकार के दृष्टिकोण को दर्शाती है, साथ ही “महासागर” (क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) के व्यापक ढांचे को भी आगे बढ़ाती है।

IOS सागर एक अनूठा परिचालन कार्यक्रम है, जिसके तहत मित्र देशों के नौसैनिक कर्मियों को भारतीय नौसेना के जहाज पर साथ प्रशिक्षण और यात्रा करने का अवसर मिलता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों को जहाज पर गतिविधियों और पेशेवर प्रशिक्षण मॉड्यूल में शामिल कर यह पहल व्यावहारिक सहयोग, इंटरऑपरेबिलिटी और समुद्री संचालन की साझा समझ को बढ़ावा देती है।

IOS सागर के इस संस्करण में 16 मित्र देशों के नौसैनिक कर्मी भाग ले रहे हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत कोच्चि स्थित भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण संस्थानों में पेशेवर प्रशिक्षण सत्रों से होगी, जहां प्रतिभागियों को नौसैनिक संचालन, समुद्री कौशल और समुद्री सुरक्षा के प्रमुख पहलुओं से अवगत कराया जाएगा। इसके बाद प्रतिभागियों को भारतीय नौसेना के जहाज पर तैनात किया जाएगा, जहां वे भारतीय नौसेना के कर्मियों के साथ समुद्र में परिचालन गतिविधियों में भाग लेंगे।

यात्रा के दौरान जहाज विभिन्न समुद्री सहभागिता गतिविधियों और बंदरगाह दौरों को अंजाम देगा, जिससे क्षेत्र के साझेदार नौसेनाओं और समुद्री एजेंसियों के साथ संवाद संभव होगा। इन गतिविधियों का उद्देश्य पेशेवर संबंधों को मजबूत करना, श्रेष्ठ प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान करना और साझा समुद्री चुनौतियों की गहरी समझ विकसित करना है।

तटरक्षक बल को मिलेगा नया बल, OPV जहाज निर्माण में प्रगति

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छह नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल्स (OPVs) में से दूसरे और तीसरे जहाज (यार्ड 16402 एवं 16403) की कील बिछाने (Keel Laying) समारोह 17 मार्च 2026 को रत्नागिरी स्थित M/s YMPL में आयोजित किया गया।

5000 नॉटिकल मील की रेंज के साथ ये जहाज अधिकतम 23 नॉट की गति प्राप्त करने में सक्षम होंगे। 117 मीटर लंबाई वाले इन जहाजों में 11 अधिकारियों और 110 कर्मियों की क्षमता होगी। इनमें अत्याधुनिक मशीनरी और उन्नत तकनीकी प्रणालियां भी शामिल होंगी, जैसे एआई आधारित प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस सिस्टम, रिमोट पायलटेड ड्रोन, इंटीग्रेटेड ब्रिज सिस्टम (IBS) और इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम (IPMS)।

यह जहाज ‘बाय (इंडियन-IDDM)’ श्रेणी के अंतर्गत स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित किया जा रहा है, जो सरकार के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है। छह नेक्स्ट जेनरेशन OPVs के निर्माण का अनुबंध 20 दिसंबर 2023 को किया गया था।

यह पहल भारतीय तटरक्षक बल (ICG) की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने और तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। नए NGOPVs का बेड़ा शामिल होने से भारत के समुद्री हितों की सुरक्षा में ICG की भूमिका और मजबूत होगी।

इस समारोह की अध्यक्षता आईजी सुधीर साहनी, टीएम, डीडीजी (एमएंडएम) ने की, जिसमें भारतीय तटरक्षक बल (ICG) और एमडीएल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव (GMC-26) 21 फरवरी को, हिंद महासागर क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा पर होगा मंथन

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गोवा- गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव (GMC-26) का पांचवां संस्करण 21 फरवरी 2026 को नेवल वॉर कॉलेज, गोवा में आयोजित किया जाएगा। भारतीय नौसेना की प्रमुख रणनीतिक पहल के तहत आयोजित यह सम्मेलन हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों और नौसैनिक नेतृत्व को एक मंच पर लाता है, जहां समकालीन समुद्री चुनौतियों के लिए व्यावहारिक समाधान और रणनीतियां तैयार की जाती हैं।

रक्षा राज्य मंत्री होंगे मुख्य अतिथि

इस सम्मेलन में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी 14 देशों के नौसेना प्रमुखों और समुद्री बलों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की मेजबानी करेंगे।

सम्मेलन में भाग लेने वाले देशों में बांग्लादेश, कोमोरोस, इंडोनेशिया, केन्या, मेडागास्कर, मलेशिया, मालदीव, मॉरीशस, म्यांमार, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड और तंजानिया शामिल हैं।

सम्मेलन की थीम

इस वर्ष सम्मेलन की थीम है:

“हिंद महासागर क्षेत्र में साझा समुद्री सुरक्षा चुनौतियां — IUU फिशिंग और अन्य अवैध समुद्री गतिविधियों जैसी गतिशील चुनौतियों से निपटने के प्रयास”।
इसका उद्देश्य समुद्री देशों के बीच सहयोग, समन्वय और तालमेल को मजबूत करना है।

MAHASAGAR विज़न के अनुरूप पहल

गोवा मैरीटाइम सिम्पोजियम (GMS) और गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव (GMC) की शुरुआत 2016 और 2017 में की गई थी, जो MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विज़न के अनुरूप हैं। यह मंच समुद्री पड़ोसी देशों के साथ सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों की पहचान और क्षमता निर्माण की दिशा तय करता है।

समुद्री सुरक्षा की प्रमुख चुनौतियां

हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री आतंकवाद, तस्करी, अवैध मछली पकड़ना (IUU Fishing), समुद्री डकैती, सशस्त्र लूट और अवैध प्रवासन जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन, साइबर खतरे और डार्क शिपिंग जैसी नई चुनौतियां भी क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर रही हैं।

विशेषज्ञों के विचार और मुख्य भाषण

सम्मेलन में समुद्री जानकारी के वास्तविक समय आदान-प्रदान और संयुक्त क्षमता निर्माण पर विशेषज्ञों द्वारा विचार-विमर्श किया जाएगा। पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश (सेवानिवृत्त) मुख्य भाषण देंगे।

गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के लिए सहयोगात्मक समाधान तैयार करने का एक महत्वपूर्ण मंच बना हुआ है।


भारतीय नौसेना ने CTF-154 की कमान संभाली – समुद्री सुरक्षा सहयोग में ऐतिहासिक कदम

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भारतीय महासागर क्षेत्र और उससे आगे सहयोगात्मक समुद्री सुरक्षा तथा क्षमता निर्माण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए, भारतीय नौसेना ने कंबाइंड टास्क फोर्स (CTF)-154 की कमान संभाल ली है। यह टास्क फोर्स कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज (CMF) के तहत एक प्रमुख बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण टास्क फोर्स है।

कमांड परिवर्तन समारोह 11 फरवरी 2026 को बहरीन के मनामा स्थित CMF मुख्यालय में आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता वाइस एडमिरल कर्ट ए. रेनशॉ, कमांडर CMF / US NAVCENT / US फिफ्थ फ्लीट ने की। इस अवसर पर वाइस एडमिरल तरुण सोबती, डिप्टी चीफ ऑफ नेवल स्टाफ (DCNS), भारतीय नौसेना, तथा अन्य सदस्य देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी उपस्थित थे।

कमोडोर मिलिंद एम. मोकाशी (शौर्य चक्र) ने औपचारिक रूप से इतालवी नौसेना के निवर्तमान कमांडर से CTF-154 की कमान संभाली।

CTF-154 का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण है। यह 47 सदस्य देशों वाले CMF में भारत की पेशेवर विशेषज्ञता, संचालन अनुभव और पसंदीदा सुरक्षा साझेदार के रूप में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

CTF-154 की स्थापना मई 2023 में हुई थी और यह मध्य पूर्व तथा व्यापक क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से समुद्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए समर्पित है।

प्रशिक्षण के पाँच प्रमुख स्तंभ हैं:

  1. समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA)

  2. समुद्री कानून (Law of the Sea)

  3. समुद्री अवरोधन संचालन

  4. समुद्री बचाव और सहायता

  5. नेतृत्व विकास

टास्क फोर्स नियमित Maritime Security Enhancement Training (MSET) कार्यक्रम, Compass Rose तथा Northern/Southern Readiness जैसे अभ्यास और साझेदार देशों की क्षमता बढ़ाने हेतु आउटरीच गतिविधियाँ आयोजित करता है। इसका उद्देश्य अवैध तस्करी, समुद्री डकैती और अवैध प्रवासन जैसी साझा चुनौतियों से निपटना है।

CTF-154, CMF की अन्य टास्क फोर्सेस—

  • CTF-150 (समुद्री सुरक्षा)

  • CTF-151 (समुद्री डकैती विरोधी)

  • CTF-152 (अरब खाड़ी में समुद्री सुरक्षा)

  • CTF-153 (लाल सागर में समुद्री सुरक्षा)
    के साथ मिलकर कार्य करता है।

भारतीय नौसेना ने उच्च प्रभाव वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने और वैश्विक समुद्री साझेदारियों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है, जिससे शांति, समृद्धि और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।



एयर मार्शल इंदरपाल सिंह वालिया ने ईस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का कार्यभार संभाला

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नई दिल्ली- एयर मार्शल इंदरपाल सिंह वालिया ने 01 फरवरी 2026 को भारतीय वायु सेना (IAF) के ईस्टर्न एयर कमांड (EAC) के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (AOC-in-C) के रूप में कार्यभार ग्रहण किया।

एयर मार्शल वालिया राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पूर्व छात्र हैं और उन्हें 11 जून 1988 को भारतीय वायु सेना के फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त हुआ। वे MiG-21, MiG-23, MiG-27, जैगुआर और Su-30 MKI के सभी संस्करणों पर योग्य हैं और उनके पास 3200 घंटे से अधिक का दुर्घटना/घटना-मुक्त उड़ान अनुभव है।

तीन दशकों से अधिक के अपने विशिष्ट सैन्य करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कमान और स्टाफ नियुक्तियाँ संभाली हैं। उन्होंने MiG-27 स्क्वाड्रन, टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (TACDE) का नेतृत्व किया तथा एक अग्रिम पंक्ति के वायुसेना अड्डे के एयर ऑफिसर कमांडिंग भी रहे।

एयर मार्शल वालिया फाइटर स्ट्राइक लीडर, इंस्ट्रूमेंट रेटिंग इंस्ट्रक्टर एवं एग्ज़ामिनर (IRIE) हैं। उन्होंने यूनाइटेड किंगडम में एडवांस कमांड एंड स्टाफ कोर्स तथा बांग्लादेश के नेशनल डिफेंस कॉलेज से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इसके अतिरिक्त, वे जापान और दक्षिण कोरिया में भारतीय दूतावासों में रक्षा अताशे के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं।

उन्होंने एयर स्टाफ निरीक्षण निदेशालय (DASI) में एयर कमोडोर, एयर मुख्यालय में सहायक वायुसेना प्रमुख (प्रशिक्षण) तथा मुख्यालय वेस्टर्न एयर कमांड में एयर डिफेंस कमांडर के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं। ईस्टर्न एयर कमांड के AOC-in-C का पदभार संभालने से पूर्व वे मुख्यालय EAC में सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर थे।

उनकी विशिष्ट सेवाओं के सम्मान में उन्हें वायु सेना पदक (VM) – 2008 तथा अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) – 2018 से अलंकृत किया गया है।

एयर मार्शल इंदरपाल सिंह वालिया ने यह पद एयर मार्शल सूरत सिंह से ग्रहण किया, जो 31 जनवरी 2026 को राष्ट्र की 39 वर्षों की समर्पित और उत्कृष्ट सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए।



भारतीय नौसेना ने कमीशन किया INS माहे: स्वदेशी माहे-क्लास एंटी-सबमरीन युद्धपोत से तटीय सुरक्षा मजबूत

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भारतीय नौसेना ने मुंबई स्थित नौसैनिक डॉकयार्ड में 24 नवंबर 2025 को INS माहे को कमीशन किया। यह भारतीय डिजाइन और निर्माण की पहली माहे-क्लास एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) है।

इस समारोह की मेज़बानी वाइस एडमिरल कृष्ण स्वामिनाथन, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वेस्टर्न नेवल कमांड ने की, जबकि समारोह की अध्यक्षता चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ, जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने की। इसमें वरिष्ठ नौसेना अधिकारी, कोचिन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि के प्रतिनिधि और विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।

जहाज का विवरण और विशेषताएँ:

INS माहे का नाम मालाबार तट के ऐतिहासिक तटीय शहर माहे से लिया गया है। जहाज के क्रेस्ट में कलरीपयट्टू की लचीली तलवार “उरूमी” को चित्रित किया गया है, जो चपलता, सटीकता और घातक कौशल का प्रतीक है। इसका मास्कॉट चीतल है, जो गति और फोकस का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि “Silent Hunters” का मोट्टो जहाज की गुप्तता, सतर्कता और निरंतर तत्परता को दर्शाता है।

INS माहे को कोचिन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा डिज़ाइन और निर्मित किया गया है और यह अपने वर्ग का प्रमुख जहाज है। BEL, L&T Defence, महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स, NPOL और 20 से अधिक MSMEs की विशेषज्ञता पर आधारित, यह परियोजना भारत की नौसैनिक डिजाइन, उपकरण और सिस्टम इंटीग्रेशन क्षमताओं को मजबूत करती है। INS माहे में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सैन्य और तकनीकी क्षमता:

INS माहे की कमीशनिंग भारतीय नौसेना की एंटी-सबमरीन क्षमताओं में वृद्धि करेगी, विशेषकर तटीय और उथले जल क्षेत्र में खतरों का मुकाबला करने के लिए। जहाज में उन्नत हथियार, सेंसर और कम्युनिकेशन सिस्टम लगे हैं, जो समुद्र की सतह के नीचे खतरों का पता लगाने, ट्रैक करने और उन्हें समाप्त करने में सक्षम हैं। यह लंबी अवधि तक संचालन कर सकता है और अत्याधुनिक मशीनरी और नियंत्रण प्रणाली से लैस है।

समारोह में संबोधन:

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि INS माहे की कमीशनिंग केवल एक शक्तिशाली नई समुद्री प्लेटफॉर्म की शुरूआत नहीं है, बल्कि यह भारत की जटिल युद्धपोतों को स्वदेशी तकनीक के माध्यम से डिजाइन, निर्माण और परिचालित करने की क्षमता का प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि यह जहाज भारतीय नौसेना की क्षमता को बढ़ाएगा, तटीय सुरक्षा को मजबूत करेगा और भारत के समुद्री हितों की रक्षा सुनिश्चित करेगा।

माहे-क्लास जहाज तटीय रक्षा की पहली पंक्ति बनाएगा और बड़े सतही युद्धपोतों, पनडुब्बियों और विमानन संपत्तियों के साथ मिलकर भारत के समुद्री क्षेत्र पर सतत निगरानी सुनिश्चित करेगा। INS माहे भारतीय नौसेना की “Combat Ready, Cohesive और Aatmanirbhar” स्थिति को पुनः प्रमाणित करता है, जो समृद्ध और विकसित भारत के लिए समुद्र की सुरक्षा करता है।

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