Media24Media.com: #DefenceNews

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #DefenceNews. Show all posts
Showing posts with label #DefenceNews. Show all posts

भारतीय नौसेना को मिलेगी नई मिसाइल ताकत, पहली Next Generation Missile Vessel की Keel Laying

No comments Document Thumbnail

कोच्चि- भारतीय नौसेना के लिए पहली Next Generation Missile Vessel (NGMV) के निर्माण की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। कोच्चि स्थित Cochin Shipyard Limited (CSL) में 18 सितंबर 2026 को NGMV परियोजना के पहले जहाज की Keel Laying Ceremony आयोजित की गई। इसकी जानकारी रक्षा मंत्रालय ने  दी है। 

अत्याधुनिक हथियारों और सेंसर से होगी लैस

PIB के अनुसार, NGMV को अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों और सेंसर से लैस करने की योजना है। इससे भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमताओं को मजबूत करने और उसे भविष्य की समुद्री चुनौतियों के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी।

मार्च 2023 में हुआ था निर्माण का अनुबंध

Next Generation Missile Vessel के निर्माण का अनुबंध मार्च 2023 में Cochin Shipyard Limited के साथ किया गया था। इस परियोजना को भारतीय नौसेना की भविष्य के लिए तैयार और सक्षम समुद्री ताकत विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया है। 

स्वदेशी रक्षा निर्माण पर जोर

इस परियोजना में प्रमुख भूमिका निभाने वाले उपकरणों के स्वदेशी विकास और निर्माण पर जोर दिया गया है। PIB के मुताबिक, यह पहल आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड की दिशा में भारत की बढ़ती स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को भी दर्शाती है। 


नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल परियोजना के दूसरे युद्धपोत की ‘स्टील कटिंग’ से निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ी

No comments Document Thumbnail

कोच्चि- भारतीय नौसेना की नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल (NGMV) परियोजना के तहत दूसरे युद्धपोत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। दूसरे NGMV की ‘स्टील कटिंग’ समारोह 17 सितंबर 2026 को कोच्चि स्थित कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) में आयोजित की गई।

समारोह में रियर एडमिरल कपिल मेहता, असिस्टेंट कंट्रोलर ऑफ वॉरशिप प्रोडक्शन एंड एक्विजिशन, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर भारतीय नौसेना और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

मार्च 2023 में हुआ था निर्माण अनुबंध

नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल के निर्माण के लिए भारतीय नौसेना और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के बीच मार्च 2023 में अनुबंध किया गया था।

NGMV को अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों और सेंसर से लैस करने की योजना है। इन आधुनिक प्रणालियों से युद्धपोतों की युद्धक क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि होने की उम्मीद है।

इन जहाजों का निर्माण भारतीय नौसेना को एक ‘Future Ready and Combat Ready Force’ के रूप में और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ेगी नौसैनिक क्षमता

NGMV परियोजना के तहत तैयार किए जा रहे युद्धपोत जटिल समुद्री परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से संचालन के लिए डिजाइन किए जा रहे हैं।

इन जहाजों का निर्माण हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में भारत की समुद्री सुरक्षा और नौसैनिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे भारतीय नौसेना की भविष्य की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।

आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया को बढ़ावा

NGMV परियोजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि युद्धपोत की भूमिका निर्धारित करने वाले प्रमुख उपकरण और प्रणालियां स्वदेशी रूप से विकसित और निर्मित की गई हैं।

यह भारत की बढ़ती रक्षा विनिर्माण क्षमता और स्वदेशी तकनीकी दक्षता को दर्शाता है। साथ ही यह परियोजना केंद्र सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ जैसी पहलों के अनुरूप है।

स्वदेशी उपकरणों और प्रणालियों के अधिक इस्तेमाल से भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ देश में विकसित तकनीकों को वैश्विक स्तर पर ले जाने की दिशा में भी अवसर पैदा होंगे।

आधुनिक और मजबूत नौसेना की दिशा में कदम

दूसरे NGMV की ‘स्टील कटिंग’ भारतीय नौसेना के लिए आधुनिक युद्धपोतों के निर्माण की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। अत्याधुनिक हथियारों, सेंसर और स्वदेशी तकनीकों से लैस इन युद्धपोतों के निर्माण से भारतीय नौसेना की भविष्य की युद्धक और समुद्री संचालन क्षमता को और मजबूत करने का लक्ष्य है।

अरब सागर में भारत-पाकिस्तान की नौसेनाओं के जहाज टकराए, भारत ने पाकिस्तान के राजनयिक को किया तलब

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारत और पाकिस्तान के बीच समुद्री क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाली एक घटना सामने आई है। 15 सितंबर की शाम उत्तर अरब सागर में भारतीय नौसेना के एक जहाज और पाकिस्तान नौसेना के एक पोत के बीच टक्कर हो गई। घटना अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के Charge d’Affaires को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

क्या हुआ?

भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय नौसेना का जहाज उत्तर अरब सागर में routine surveillance mission पर था। इसी दौरान पाकिस्तान नौसेना का एक जहाज तेज गति से भारतीय पोत के करीब आया और manoeuvring के दौरान दोनों जहाजों के बीच टक्कर हो गई।

भारतीय पक्ष ने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई के इस व्यवहार को “unacceptable and unprofessional” बताया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, टक्कर से भारतीय जहाज को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ और वह अपना मिशन जारी रखने में सक्षम रहा।

पाकिस्तान के किस जहाज से हुई टक्कर?

मीडिया रिपोर्टों में पाकिस्तानी पोत की पहचान PNS Hunain के तौर पर की गई है। रिपोर्टों के अनुसार यह पाकिस्तान नौसेना का Yarmook-class offshore patrol vessel है।

कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि टक्कर के बाद PNS Hunain को नुकसान हुआ और वह अपने बंदरगाह की ओर रवाना हुआ।

भारत ने क्या कार्रवाई की?

घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने नई दिल्ली में पाकिस्तान के Charge d’Affaires को तलब किया और औपचारिक रूप से कड़ा विरोध दर्ज कराया।

MEA के अनुसार, पाकिस्तान के राजनयिक से कहा गया कि संबंधित पाकिस्तानी अधिकारियों तक यह संदेश पहुंचाया जाए कि समुद्र में सभी सैन्य इकाइयां उचित सावधानी बरतें और दोनों देशों के बीच लागू समझौतों का सम्मान करें, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

1991 के समझौते का भी दिया गया हवाला

भारत ने इस घटना के संदर्भ में अप्रैल 1991 में हुए India-Pakistan Agreement on Advance Notice on Military Exercises, Manoeuvres and Troops Movements का हवाला दिया है।

MEA के मुताबिक, पाकिस्तानी नौसैनिक पोत का आचरण इस समझौते के Article 10 के सीधे contravention में था। भारत ने इसी आधार पर पाकिस्तान के सामने औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है।

क्या यह सैन्य हमला था?

फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक और विश्वसनीय रिपोर्टों में इस घटना को जानबूझकर किया गया सैन्य हमला घोषित नहीं किया गया है। भारत ने इसे पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई के unsafe और unprofessional conduct से जुड़ी collision बताया है।

वहीं, घटना को लेकर पाकिस्तान की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। इसलिए टक्कर की पूरी परिस्थितियों और दोनों पक्षों के दावों का स्वतंत्र आकलन आगे की जानकारी पर निर्भर करेगा।

क्यों अहम है यह घटना?

भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से संवेदनशील संबंधों के बीच दोनों देशों की नौसेनाओं के जहाजों का अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में इस तरह टकराना सुरक्षा और कूटनीति, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

हालांकि, अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी बड़े नुकसान या व्यापक सैन्य कार्रवाई की सूचना नहीं है। फिलहाल भारत की प्रतिक्रिया राजनयिक विरोध, सावधानी बरतने की मांग और द्विपक्षीय समझौतों के पालन पर केंद्रित है।

बड़ी बात

उत्तर अरब सागर में भारतीय और पाकिस्तानी नौसेना के जहाजों की टक्कर के बाद भारत ने पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक को तलब किया है। भारत ने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई के व्यवहार को “अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर” बताते हुए 1991 के द्विपक्षीय समझौते का हवाला दिया है। फिलहाल घटना में किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है और पाकिस्तान की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

PM मोदी–पुतिन की अहम मुलाकात शुक्रवार को, रक्षा से परमाणु ऊर्जा तक कई मुद्दों पर होगी चर्चा

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को प्रस्तावित अहम बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं। दोनों नेताओं की मुलाकात में भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ-साथ रक्षा सहयोग, आधुनिक सैन्य तकनीक, Su-57 लड़ाकू विमान और परमाणु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और भविष्य की सैन्य जरूरतों को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत हो सकती है। खासतौर पर Su-57 को लेकर संभावित सहयोग को रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

इसके अलावा भारत और रूस के बीच परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग, तकनीकी साझेदारी और दीर्घकालिक ऊर्जा सहयोग पर भी बातचीत की उम्मीद है। ऐसे समय में जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं, मोदी-पुतिन की यह मुलाकात दोनों देशों के संबंधों की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बैठक से दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

मिस्र के एयर शो में भारतीय वायुसेना की सारंग टीम दिखाएगी दमदार हवाई करतब

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारतीय वायुसेना (IAF) की प्रसिद्ध सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम मिस्र पहुंच गई है। टीम 8 से 10 सितंबर 2026 तक एल अलामीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आयोजित होने वाले दूसरे एल अलामीन इंटरनेशनल एयर शो में हिस्सा लेगी।

सारंग टीम दुनिया की एकमात्र पांच हेलीकॉप्टरों वाली डिस्प्ले टीम है। एयर शो के दौरान टीम अपने सटीक गठन, बेहतरीन तालमेल और शानदार उड़ान कौशल का प्रदर्शन करेगी। भारतीय वायुसेना की यह भागीदारी भारत और मिस्र के बीच बढ़ते रक्षा एवं राजनयिक संबंधों को भी दर्शाती है।

स्वदेशी ध्रुव हेलीकॉप्टर से होगा प्रदर्शन

सारंग टीम स्वदेश में डिजाइन और निर्मित एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) ध्रुव से अपने हवाई करतब पेश करेगी। टीम क्लोज-प्रॉक्सिमिटी फ्लाइंग, कठिन फॉर्मेशन मूवमेंट और सिंक्रोनाइज्ड एरियल सीक्वेंस के लिए दुनियाभर में जानी जाती है। इसका प्रदर्शन भारतीय वायुसेना के पायलटों के कौशल और अनुशासन के साथ-साथ देश की स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता को भी प्रदर्शित करेगा।

‘डॉल्फिन लीप’ के साथ नया ‘स्पॉट स्टॉल टर्न’

एयर शो में सारंग टीम अपने प्रसिद्ध ‘डॉल्फिन लीप’ हवाई करतब का प्रदर्शन करेगी। इसके अलावा टीम पहली बार ‘स्पॉट स्टॉल टर्न’ नामक नए मैनोवर को भी पेश करेगी। इन प्रदर्शनों के जरिए दर्शकों को ध्रुव हेलीकॉप्टर की गति, चपलता और बहुमुखी क्षमता देखने का अवसर मिलेगा।

एल अलामीन इंटरनेशनल एयर शो में दुनिया की प्रमुख वायु सेनाओं के साथ-साथ एयरोस्पेस, रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ और पेशेवर हिस्सा ले रहे हैं। मिस्र के आसमान में सारंग टीम का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय टीमों के साथ सहयोग बढ़ाने और भारत-मिस्र रक्षा संबंधों को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


अरुणाचल सीमा विवाद पर किरेन रिजिजू का बड़ा बयान: 60 किमी चीनी घुसपैठ के दावे को बताया गलत

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- अरुणाचल प्रदेश में चीन की कथित घुसपैठ को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने 60 किलोमीटर अंदर तक चीनी सैनिकों के प्रवेश के दावे को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह दावा गलत है और सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो या सूचनाएँ साझा करना भ्रम पैदा कर सकता है।

रिजिजू ने कहा कि भारत-चीन सीमा के कुछ हिस्सों में वास्तविक समस्या है, लेकिन इसका प्रमुख कारण सीमा का जमीन पर पूरी तरह स्पष्ट रूप से सीमांकन (demarcation) न होना है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच अरुणाचल प्रदेश में सीमा को लेकर अलग-अलग धारणाएँ हैं, जिसके कारण कुछ क्षेत्रों में स्थिति को लेकर भ्रम बना रहता है।

60 किलोमीटर घुसपैठ के दावे पर सफाई

रिजिजू ने स्पष्ट किया कि यह कहना सही नहीं है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश में 60 किलोमीटर अंदर तक प्रवेश कर लिया है या किसी भारतीय गांव पर कब्जा कर लिया है। उनके अनुसार, कुछ क्षेत्रों में सीमा स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं होने के कारण दोनों पक्ष संबंधित भू-भाग पर अलग-अलग दावे करते हैं। 

उन्होंने यह भी कहा कि सीमा क्षेत्र के गांवों में रहने वाले लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों द्वारा सीमा और पारंपरिक भूमि को लेकर उठाई गई चिंताएँ वास्तविक हैं और सरकार इन्हें गंभीरता से लेती है।

चीन की गतिविधियों पर भी नजर

रिजिजू ने माना कि अरुणाचल प्रदेश के कुछ सीमावर्ती इलाकों में चीनी गतिविधियों में वृद्धि हुई है। हालांकि, उन्होंने इसे 60 किलोमीटर की नई सैन्य घुसपैठ के रूप में पेश किए जाने से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि सीमा की स्थिति को लेकर गलत सूचनाएँ फैलाने से देश में अनावश्यक भ्रम पैदा हो सकता है और सुरक्षा बलों का मनोबल प्रभावित हो सकता है। 

रिपोर्टों के अनुसार, यह बयान अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले और लॉन्गजू क्षेत्र के आसपास चीनी गतिविधियों को लेकर उठी चिंताओं के बीच आया है। 

सीमा पर बुनियादी ढांचे को लेकर भी चर्चा

रिजिजू ने भारत और चीन के सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चीन ने भारत की तुलना में सीमा क्षेत्रों में सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण पहले शुरू कर दिया था। उन्होंने बताया कि 2014 के बाद भारत ने भी सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क और अन्य आधारभूत ढांचे के विकास को तेज किया है। 

सरकार का संदेश

केंद्रीय मंत्री के बयान का मुख्य संदेश यह है कि 60 किलोमीटर चीनी घुसपैठ या भारतीय गांव पर कब्जे की खबरों को सही नहीं माना जाना चाहिए, जबकि सीमा के कुछ हिस्सों में सीमांकन से जुड़ी वास्तविक चुनौतियाँ मौजूद हैं। सरकार स्थानीय लोगों की चिंताओं को गंभीरता से लेने और सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा एवं बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दे रही है। 

महत्वपूर्ण: 60 किमी घुसपैठ का दावा फिलहाल मंत्री के बयान के अनुसार गलत बताया गया है; इसे तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मैत्री-XV’ के लिए भारतीय सेना की टुकड़ी थाईलैंड रवाना

No comments Document Thumbnail

18 से 31 अगस्त तक होगा 15वां संस्करण, जंगल और अर्ध-शहरी क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियानों का होगा संयुक्त प्रशिक्षण

नई दिल्ली- भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मैत्री-XV (2026)’ में हिस्सा लेने के लिए भारतीय सेना की टुकड़ी आज थाईलैंड के लिए रवाना हुई। इस अभ्यास का आयोजन 18 से 31 अगस्त 2026 तक थाईलैंड के विभावादी रंगसित कैंप, सूरत थानी में किया जाएगा। इस अभ्यास का पिछला संस्करण सितंबर 2025 में मेघालय के उमरोई स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में आयोजित हुआ था।

अभ्यास में भारतीय सेना और रॉयल थाई आर्मी की 85-85 सैनिकों की टुकड़ियां हिस्सा लेंगी। भारतीय दल में मुख्य रूप से 9 गोरखा राइफल्स के जवान शामिल हैं, जबकि रॉयल थाई आर्मी की टुकड़ी 5वीं डिवीजन की 25वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड की 3वीं बटालियन के सैनिकों से बनी है।

जंगल और अर्ध-शहरी क्षेत्र में होगा प्रशिक्षण

मैत्री-XV के दौरान कंपनी स्तर पर संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण दिया जाएगा। अभ्यास का मुख्य फोकस जंगल और अर्ध-शहरी इलाकों में संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभियानों को प्रभावी ढंग से अंजाम देने की क्षमता विकसित करना होगा।

यह प्रशिक्षण संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII के तहत आतंकवाद विरोधी अभियानों में दोनों सेनाओं की संयुक्त क्षमता को बढ़ाने पर केंद्रित रहेगा।

फील्ड एक्सरसाइज से लेकर आधुनिक तकनीक का प्रदर्शन

अभ्यास के दौरान फील्ड एक्सरसाइज, युद्ध संबंधी चर्चा, व्याख्यान, प्रदर्शन और अंत में एक वैधता परीक्षण अभ्यास (Validation Exercise) आयोजित किया जाएगा। दोनों देशों के सैनिक संयुक्त अभियानों से जुड़े अपने परिचालन अनुभव साझा करेंगे। साथ ही, संयुक्त अभियानों में इस्तेमाल किए जाने वाले आधुनिक उपकरणों और तकनीकों का भी प्रदर्शन किया जाएगा।

2006 में हुई थी अभ्यास की शुरुआत

‘मैत्री’ सैन्य अभ्यास की शुरुआत वर्ष 2006 में हुई थी। यह भारत और थाईलैंड के बीच सैन्य सहयोग बढ़ाने, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने और दोनों सेनाओं की परिचालन क्षमता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच है।

अभ्यास के माध्यम से दोनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी, आपसी समझ और सौहार्द को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, यह भारत और थाईलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती प्रदान करेगा।

भारतीय नौसेना को 30 महीने के लिए मिलेंगे दो MQ-9B Sea Guardian ड्रोन, 1,943 करोड़ रुपये का हुआ करार

No comments Document Thumbnail

General Atomics के साथ रक्षा मंत्रालय ने किया समझौता, हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी क्षमता होगी मजबूत

नई दिल्ली- रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए दो MQ-9B Sea Guardian High-Altitude Long-Endurance (HALE) Remotely Piloted Aircraft Systems (RPAS) को 30 महीने की अवधि के लिए लीज पर लेने हेतु General Atomics Aeronautical Systems Inc. (GA-ASI) के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। इस करार की कुल कीमत लगभग 1,943 करोड़ रुपये है।

यह अनुबंध 17 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं महानिदेशक (अधिग्रहण) ए. अंबारासु की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

समुद्री निगरानी क्षमता होगी और मजबूत

MQ-9B Sea Guardian HALE RPAS अत्याधुनिक प्रणालियों, आधुनिक सेंसर और उन्नत पेलोड से लैस हैं। इनके शामिल होने से भारतीय नौसेना की Maritime Domain Awareness (MDA) यानी समुद्री क्षेत्र में गतिविधियों की निगरानी और जानकारी जुटाने की क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी।

ये सिस्टम समुद्री क्षेत्र के विशाल इलाकों में लगातार खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही (ISR) उपलब्ध कराने में सक्षम होंगे। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों पर भारत की नजर और मजबूत होगी तथा किसी भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर समय रहते निगरानी एवं प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढ़ेगी।

यह करार भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और हिंद महासागर क्षेत्र में निरंतर निगरानी क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भारत-अमेरिका नौसेना का 8वां EOD अभ्यास 2026 कोच्चि में संपन्न

No comments Document Thumbnail

विशेषज्ञों ने IED, बारूदी सुरंग निष्क्रिय करने और अंडरवॉटर सिस्टम के इस्तेमाल पर साझा किए अनुभव

कोच्चि- भारत और अमेरिका की नौसेनाओं के बीच आयोजित 8वां Explosive Ordnance Disposal (EOD) अभ्यास 2026 दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अभ्यास के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं की टीमों ने गहन पेशेवर संवाद, सर्वोत्तम प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान और विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन किया।

इस द्विपक्षीय अभ्यास ने EOD अभियानों के विभिन्न पहलुओं पर ज्ञान और अनुभव साझा करने के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। विषय विशेषज्ञों के बीच हुए आदान-प्रदान में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) से उत्पन्न वास्तविक समय के खतरों, विस्फोटकों को सुरक्षित बनाने की प्रक्रियाओं, बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने तथा मानवरहित अंडरवॉटर सिस्टम के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

डाइविंग ऑपरेशन में भी हुआ संयुक्त प्रशिक्षण

अभ्यास के क्रॉस-ट्रेनिंग चरण में डाइविंग से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया। इसमें डूबे हुए जहाजों या संरचनाओं का पता लगाना और उन्हें निकालना, विशेषज्ञ उपकरणों का इस्तेमाल तथा स्लिदरिंग ऑपरेशन शामिल रहे।

संयुक्त प्रशिक्षण से दोनों नौसेनाओं की डाइविंग टीमों की पेशेवर दक्षता और तकनीकी कौशल में वृद्धि हुई। साथ ही, इससे दोनों देशों के बीच बेहतर आपसी समझ और परिचालन क्षमता विकसित करने में भी मदद मिली।

अभ्यास का सफल समापन भारत और अमेरिका की नौसेनाओं की विशेष समुद्री अभियानों में परिचालन तालमेल, सहयोग और आपसी क्षमता को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इंडियन डिफेंस एस्टेट्स सर्विस के अधिकारी प्रशिक्षुओं से की मुलाकात

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारतीय रक्षा संपदा सेवा (Indian Defence Estates Service) के 2025 बैच के अधिकारी प्रशिक्षुओं ने आज नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। ये अधिकारी राष्ट्रीय रक्षा संपदा प्रबंधन संस्थान (NIDEM) में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने देशभर में रक्षा भूमि के प्रबंधन और छावनी बोर्डों के नगर प्रशासन में रक्षा संपदा विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।

‘सेवा भाव’ के साथ काम करें अधिकारी

राजनाथ सिंह ने कहा कि बदलती आकांक्षाओं और जरूरतों को पूरा करने में लोक सेवकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने सिविल सेवकों से पूरे ‘सेवा भाव’ के साथ लोगों के अनुकूल तरीके से सेवाएं प्रदान करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों को नियमित रूप से आम लोगों से मिलना चाहिए और उनकी समस्याओं एवं शिकायतों को ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए। इससे उनकी वास्तविक चिंताओं को समझने के साथ-साथ लोगों में सरकार और प्रशासन के प्रति विश्वास तथा आश्वासन की भावना मजबूत होगी।

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी दें ध्यान

रक्षा मंत्री ने लोक सेवकों और युवा अधिकारियों से अपने शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर समान रूप से ध्यान देने की अपील की। उन्होंने अधिकारियों को आध्यात्मिक मार्ग अपनाने और नियमित रूप से ध्यान का अभ्यास करने की सलाह दी।

इस अवसर पर रक्षा संपदा महानिदेशक शोभा गुप्ता भी उपस्थित रहीं।

वाइस एडमिरल एएन प्रमोद, एवीएसएम, वाईएसएम ने 01 अगस्त 2026 को उप नौसेना प्रमुख (Deputy Chief of Naval Staff) का पदभार ग्रहण किया।

No comments Document Thumbnail

38वें इंटीग्रेटेड कैडेट कोर्स, नौसेना अकादमी, गोवा के पूर्व छात्र वाइस एडमिरल एएन प्रमोद को 01 जुलाई 1990 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त हुआ था। वे श्रेणी ‘A’ (CAT ‘A’) सी किंग एयर ऑपरेशंस ऑफिसर तथा संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Communication and Electronic Warfare) विशेषज्ञ हैं। उन्होंने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन तथा नेवल वॉर कॉलेज, गोवा से नेवल हायर कमांड कोर्स भी किया है।

36 वर्षों से अधिक के अपने विशिष्ट सैन्य करियर में उन्होंने समुद्र और तट—दोनों क्षेत्रों में कमान, संचालन, प्रशिक्षण और स्टाफ से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। उनके प्रमुख समुद्री दायित्वों में गाइडेड मिसाइल विध्वंसक आईएनएस राजपूत के कार्यकारी अधिकारी (Executive Officer), पनडुब्बी रोधी युद्धक गश्ती पोत आईएनएस अभय, लैंडिंग शिप टैंक (लार्ज) आईएनएस शार्दुल तथा गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस सतपुड़ा की कमान शामिल है। उन्होंने गलवान घटना के बाद ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के दौरान पश्चिमी बेड़े (Western Fleet) के फ्लीट ऑपरेशंस ऑफिसर के रूप में भी सेवाएं दीं। इसके अतिरिक्त उन्होंने वर्ष 1999 के ऑपरेशन विजय तथा वर्ष 2001 के ऑपरेशन पराक्रम में भी भाग लिया।

तटीय नियुक्तियों में उन्होंने श्री विजयपुरम स्थित नौसेना वायु स्टेशन आईएनएस उत्क्रोश के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में कार्य किया तथा डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन में डायरेक्टिंग स्टाफ के रूप में भी सेवाएं दीं। नौसेना मुख्यालय में उनकी प्रमुख नियुक्तियों में संयुक्त निदेशक (नेवल एयर स्टाफ), निदेशक तथा प्रधान निदेशक (विमान अधिग्रहण) शामिल रहे। वे वर्ष 2006 से 2009 तक टैक्टिकल ऑडिट ग्रुप तथा वर्ष 2016 से 2019 तक भारतीय नौसेना की स्ट्रैटेजिक एंड ऑपरेशनल काउंसिल के सदस्य भी रहे।

रियर एडमिरल के पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने भारतीय नौसेना अकादमी के उप कमांडेंट, सहायक नौसेना प्रमुख (वायु) तथा फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग, महाराष्ट्र नौसैनिक क्षेत्र के रूप में दायित्व निभाए।

वाइस एडमिरल के पद पर पदोन्नति के उपरांत उन्होंने 13 दिसंबर 2023 से 31 जुलाई 2026 तक महानिदेशक नौसैनिक संचालन (Director General Naval Operations – DGNO) के रूप में कार्य किया। डीजीएनओ के रूप में वे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना की योजना, तैयारी और परिचालन तत्परता तथा पश्चिम एशिया में जारी संकट के दौरान समुद्री सुरक्षा अभियानों के संचालन में महत्वपूर्ण रूप से जुड़े रहे।

उनकी विशिष्ट सेवाओं और उत्कृष्ट परिचालन नेतृत्व के सम्मान में उन्हें वर्ष 2024 में अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) तथा वर्ष 2025 में युद्ध सेवा पदक (YSM) से सम्मानित किया गया।

उन्होंने वाइस एडमिरल तरुण सोबती, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम का स्थान लिया है, जो 38 वर्षों से अधिक की विशिष्ट सेवा के बाद 31 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्त हुए।

आईएनएस इक्षाक सेशेल्स पहुंचा, राष्ट्रीय दिवस समारोह में करेगा भारत का प्रतिनिधित्व

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारतीय नौसेना का स्वदेशी रूप से निर्मित सर्वे वेसल लार्ज (Survey Vessel Large - SVL) आईएनएस इक्षाक (INS Ikshak) 26 जून 2026 को दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी परिचालन तैनाती के तहत सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया बंदरगाह (Port Victoria) पहुंच गया।

आईएनएस इक्षाक की यह यात्रा सेशेल्स के 50वें राष्ट्रीय दिवस समारोह के साथ हो रही है, जो भारत और सेशेल्स के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत समुद्री संबंधों और मित्रता को और सुदृढ़ करने का प्रतीक है।

राष्ट्रीय दिवस समारोह और नौसैनिक सहयोग

अपने प्रवास के दौरान आईएनएस इक्षाक सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लेगा। इसके साथ ही भारतीय नौसेना और सेशेल्स डिफेंस फोर्सेज के बीच कई पेशेवर बैठकों और संयुक्त गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग, समन्वय (Interoperability) और सामरिक साझेदारी को और मजबूत करना है।

सामुदायिक सेवा गतिविधियों का भी आयोजन

इस दौरे के दौरान भारतीय नौसेना स्थानीय समुदायों के लिए निःशुल्क चिकित्सा शिविर, आवश्यक वस्तुओं का वितरण तथा अन्य सामुदायिक सेवा कार्यक्रम भी आयोजित करेगी। इन पहलों का उद्देश्य दोनों देशों के लोगों के बीच विश्वास, सद्भाव और आपसी संबंधों को और मजबूत करना है।

आम नागरिकों के लिए भी खुलेगा जहाज

पोर्ट कॉल के दौरान आईएनएस इक्षाक को आम नागरिकों के लिए भी खोला जाएगा, जिससे लोग भारतीय नौसेना की आधुनिक क्षमताओं, स्वदेशी तकनीक और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा एवं सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को करीब से जान सकेंगे।

MAHASAGAR विजन को मिलेगा बल

आईएनएस इक्षाक की यह तैनाती MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विजन के अनुरूप हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, स्थिरता और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की भारत की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करती है।

यह यात्रा एक बार फिर दर्शाती है कि भारत अपने मित्र देशों के साथ समुद्री साझेदारी को मजबूत करते हुए सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र के निर्माण के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

डीआरडीओ के स्वदेशी ‘नेत्र’ AEW&C सिस्टम को मिली अंतिम परिचालन मंजूरी, भारतीय वायुसेना को सौंपा गया FOC प्रमाणपत्र

No comments Document Thumbnail

बेंगलुरु- भारत ने रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। Defence Research and Development Organisation (DRDO) द्वारा विकसित स्वदेशी ‘नेत्र’ एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) सिस्टम को अंतिम परिचालन मंजूरी (Final Operational Clearance - FOC) मिल गई है। इस अवसर पर भारतीय वायुसेना को आधिकारिक रूप से FOC प्रमाणपत्र सौंपा गया।

यह प्रणाली भारतीय वायुसेना, डीआरडीओ और उद्योग जगत के सहयोग से विकसित की गई है। इसका उद्देश्य हवाई निगरानी, युद्धक्षेत्र की वास्तविक समय की जानकारी (Situational Awareness) और बैटल मैनेजमेंट क्षमताओं को मजबूत करना है। इससे भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता और रणनीतिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

बेंगलुरु में आयोजित समारोह की अध्यक्षता वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने की। कार्यक्रम में पूर्व वायुसेना प्रमुख आर.के.एस. भदौरिया, पूर्व डीआरडीओ अध्यक्ष डॉ. एस. क्रिस्टोफर, डीआरडीओ और भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने स्वदेशी नेत्र AEW&C सिस्टम की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रणाली ने ऑपरेशन सिंदूर और 2019 बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसे अभियानों में अपनी विश्वसनीयता और प्रभावशीलता साबित की है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी तकनीकें बदलते युद्ध परिदृश्यों के अनुसार आवश्यक संशोधन और उन्नयन की सुविधा प्रदान करती हैं।

डीआरडीओ के एरोनॉटिक्स क्लस्टर की महानिदेशक डॉ. के. राजलक्ष्मी मेनन ने नेत्र परियोजना की विकास यात्रा और सामने आई तकनीकी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि मजबूत सिस्टम इंजीनियरिंग और सटीक परीक्षण प्रक्रिया ने परियोजना को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।

इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर के महानिदेशक डॉ. बी.के. दास ने कहा कि डीआरडीओ, भारतीय वायुसेना और उद्योग क्षेत्र के बीच उत्कृष्ट तालमेल ही इस परियोजना की सफलता का आधार रहा है। उन्होंने नेत्र AEW&C को आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

कार्यक्रम के दौरान परियोजना में योगदान देने वाले विभिन्न संगठनों और इकाइयों को सम्मानित भी किया गया। अधिकारियों ने कहा कि नेत्र AEW&C प्रणाली का सफल परिचालन भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई प्रदान करेगा और यह वैज्ञानिक संस्थानों, रक्षा उत्पादन इकाइयों तथा सैन्य बलों के बीच मजबूत सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है।


भारतीय नौसेना को मिलेगा बड़ा स्वदेशी बल: 21 जून को तीन अत्याधुनिक युद्धपोतों का होगा कमीशनिंग समारोह

No comments Document Thumbnail

कोलकाता- भारतीय नौसेना 21 जून 2026 को कोलकाता में स्वदेशी रूप से निर्मित तीन अत्याधुनिक अग्रिम पंक्ति के नौसैनिक प्लेटफॉर्म — दुनागिरी, संशोधक और अग्रय — को औपचारिक रूप से अपने बेड़े में शामिल करेगी। यह ऐतिहासिक समारोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित होगा।

भारतीय नौसेना के वारशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किए गए और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा निर्मित ये तीनों प्लेटफॉर्म समुद्री युद्ध, हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण और पनडुब्बी रोधी अभियानों जैसी महत्वपूर्ण क्षमताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनकी तैनाती से भारत की समुद्री सुरक्षा और नौसैनिक शक्ति को नई मजबूती मिलेगी।

दुनागिरी: अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट

दुनागिरी प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित पांचवां स्टील्थ फ्रिगेट है। यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MRSAM) सहित आधुनिक हथियारों और सेंसरों से लैस है। यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमता को और अधिक सशक्त बनाएगा।

संशोधक: समुद्री सर्वेक्षण में नई ताकत

संशोधक बड़े सर्वेक्षण पोत (Survey Vessel Large) श्रृंखला का चौथा जहाज है। इसे तटीय और गहरे समुद्र में हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण, समुद्री भू-वैज्ञानिक और महासागरीय आंकड़ों के संग्रह के लिए तैयार किया गया है। यह ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (AUV) और रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV) जैसी आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित है।

अग्रय: पनडुब्बी रोधी अभियानों का नया प्रहरी

अग्रय अर्नाला श्रेणी के एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट का चौथा पोत है। इसमें हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और शैलो वाटर सोनार सिस्टम लगाए गए हैं, जो तटीय क्षेत्रों में छिपे पानी के भीतर के खतरों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम हैं।

आत्मनिर्भर भारत की बड़ी सफलता

इन तीनों प्लेटफॉर्म में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। इनके निर्माण में देशभर के 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) की भागीदारी रही, जिससे हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी मिला।

समुद्री शक्ति को नई ऊंचाई

दुनागिरी, संशोधक और अग्रय की कमीशनिंग भारतीय नौसेना, सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्ड, निजी उद्योगों और MSMEs के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करने के साथ-साथ भारत की समुद्री सुरक्षा, समुद्री निगरानी क्षमता और ब्लू-वॉटर ऑपरेशंस को नई मजबूती प्रदान करेगी।



आत्मनिर्भर भारत को बड़ी मजबूती: भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर खरीदेगा रक्षा मंत्रालय

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना की क्षमताओं को और मजबूत करने तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने के लिए पुणे स्थित भारत फोर्ज लिमिटेड के साथ लगभग 425 करोड़ रुपये की लागत से 12 सेट 1.25 मेगावाट मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर की खरीद का अनुबंध किया है।

यह अनुबंध नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में ‘बाय (इंडियन)’ श्रेणी के तहत हस्ताक्षरित किया गया। परियोजना में कम से कम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री (Indigenous Content) का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे देश में रक्षा उत्पादन का मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों में भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर आधुनिक युद्धपोतों में विद्युत उत्पादन का प्रमुख स्रोत होते हैं। ये जनरेटर नौसेना के महत्वपूर्ण लड़ाकू प्रणालियों, उन्नत हथियारों और अत्याधुनिक सेंसरों को ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसलिए इन्हें नौसैनिक युद्धक क्षमताओं की रीढ़ माना जाता है।

इस अनुबंध के माध्यम से भारत में पहली बार बड़े पैमाने पर मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर के स्वदेशी निर्माण की क्षमता विकसित होगी। साथ ही, उपकरणों के पूरे जीवनचक्र (Life-Cycle) के दौरान रखरखाव और तकनीकी सहायता भी देश में ही उपलब्ध होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारतीय नौसेना की परिचालन तैयारियों को बढ़ाने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।



लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे भारतीय सेना के नए प्रमुख, 30 जून से संभालेंगे कमान

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने वर्तमान उप सेना प्रमुख (Vice Chief of Army Staff) लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को भारतीय सेना का अगला थल सेना प्रमुख (Chief of the Army Staff) नियुक्त किया है। वह 30 जून 2026 की दोपहर से यह जिम्मेदारी संभालेंगे। वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी उसी दिन सेवा से सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), खडकवासला के पूर्व छात्र हैं और दिसंबर 1986 में आर्मर्ड कॉर्प्स में कमीशन प्राप्त किया था। लगभग चार दशकों के अपने शानदार सैन्य करियर में उन्होंने संचालन, रणनीति, सैन्य आधुनिकीकरण और संस्थागत विकास के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

अपने सैन्य जीवन के दौरान उन्होंने विभिन्न चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में नेतृत्व किया है। उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्र में आर्मर्ड रेजिमेंट, पश्चिमी मोर्चे पर आर्मर्ड ब्रिगेड तथा जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी बल का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया। लेफ्टिनेंट जनरल के रूप में उन्होंने भारतीय सेना की प्रमुख स्ट्राइक फॉर्मेशन सुदर्शन चक्र कोर की कमान भी संभाली।

इसके बाद उन्होंने दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सैन्य गतिविधियों तथा औपचारिक जिम्मेदारियों का संचालन किया। आर्मी कमांडर बनने के बाद उन्होंने दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान दोनों का नेतृत्व किया, जो भारतीय सेना में एक दुर्लभ उपलब्धि मानी जाती है।

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को सेना के आधुनिकीकरण और क्षमता विकास में उनके योगदान के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। उन्होंने सेना मुख्यालय में रणनीतिक योजना और क्षमता विकास से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए भारतीय सेना की आधुनिक युद्ध आवश्यकताओं और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप कई महत्वपूर्ण योजनाओं को दिशा दी।

एक उत्कृष्ट सैन्य अधिकारी के रूप में उन्होंने सैन्य शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। वे हायर कमांड कोर्स और नेशनल डिफेंस कॉलेज के स्नातक हैं तथा उन्होंने पेरिस में प्रतिष्ठित कमांड एंड स्टाफ कोर्स भी पूरा किया है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में भारतीय सेना आधुनिकीकरण, तकनीकी नवाचार और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने की दिशा में और अधिक सशक्त होगी।



सेशेल्स पहुंचा आईएनएस तरकश, भारत-सेशेल्स समुद्री साझेदारी हुई और मजबूत

No comments Document Thumbnail

सेशेल्स- भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तरकश दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी परिचालन तैनाती के दौरान सेशेल्स की राजधानी पोर्ट विक्टोरिया पहुंचा। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और सेशेल्स के बीच समुद्री सहयोग तथा द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत बनाना है।

आईएनएस तरकश ने सेशेल्स कोस्ट गार्ड के जहाज पीएस ज़ोरोस्टर को भारत से सेशेल्स तक सुरक्षित रूप से एस्कॉर्ट किया। यह जहाज कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) में मरम्मत और उन्नयन कार्य पूरा करने के बाद सेशेल्स लौट रहा था। यह सहयोग दोनों देशों के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी और आपसी विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।

इस दौरे के दौरान आईएनएस तरकश के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन रोहित मिश्रा सेशेल्स सरकार और रक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा।

भारतीय नौसेना सेशेल्स सरकार को महत्वपूर्ण तकनीकी उपकरण, आवश्यक स्पेयर पार्ट्स और अन्य जरूरी सामग्री भी सौंपेगी, जिससे समुद्री सुरक्षा और संचालन क्षमता को और मजबूती मिलेगी।

यह पोर्ट कॉल भारत और सेशेल्स के बीच मित्रता, आपसी सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही, हिंद महासागर क्षेत्र में साझा समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों की सामरिक साझेदारी को भी बल मिलेगा।



आईएमए की पासिंग आउट परेड में राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन, महिला कैडेट्स को बताया नए भारत की ताकत

No comments Document Thumbnail

देहरादून- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में 158वें रेगुलर कोर्स और 141वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स की पासिंग आउट परेड की समीक्षा की।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने अधिकारी कैडेट्स को देश के सबसे कठिन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से एक को सफलतापूर्वक पूरा करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि उनका साहस और विवेक भविष्य में उनकी सबसे बड़ी ताकत होंगे।

राष्ट्रपति ने विशेष रूप से परेड में शामिल नौ महिला कैडेट्स को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इसे भारतीय सैन्य अकादमी के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि यह केवल भारतीय सशस्त्र बलों के इतिहास में एक नया अध्याय नहीं है, बल्कि महिला-नेतृत्व वाले विकास की दिशा में भारत की प्रगति का प्रेरणादायक उदाहरण भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में और अधिक महिला कैडेट्स अकादमी का हिस्सा बनेंगी।

राष्ट्रपति मुर्मू ने मित्र देशों से आए विदेशी कैडेट्स को भी बधाई देते हुए कहा कि वे आईएमए से प्राप्त मूल्यों और प्रशिक्षण के बल पर अपने-अपने देशों की सेनाओं में उत्कृष्ट योगदान देंगे।

उन्होंने कहा कि आईएमए में विदेशी कैडेट्स की मौजूदगी भारत की मित्रता, सहयोग और वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यहां विकसित होने वाले आपसी विश्वास और पेशेवर संबंध देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के रक्षक हैं और 140 करोड़ से अधिक भारतीयों के विश्वास की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। उन्होंने उन्हें हमेशा सेवा को सर्वोच्च कर्तव्य मानने की सलाह दी।

राष्ट्रपति ने कहा कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों, तकनीकी प्रगति और जटिल वैश्विक परिस्थितियों के इस दौर में भारतीय सेना को हमेशा भविष्य के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने युवा अधिकारियों से आजीवन सीखते रहने, साहसिक निर्णय लेने और नैतिक नेतृत्व का परिचय देने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि एक सैन्य अधिकारी के रूप में उनकी जिम्मेदारी केवल नेतृत्व करना ही नहीं, बल्कि अपने सैनिकों का मार्गदर्शन और उनकी देखभाल करना भी है। उन्हें उदाहरण प्रस्तुत करते हुए टीम भावना, समर्पण और विश्वास को मजबूत बनाना होगा ताकि वे अपनी इकाइयों की युद्ध क्षमता को और अधिक प्रभावी बना सकें।


वाइस एडमिरल अजय कोचर ने भारतीय नौसेना के 48वें वाइस चीफ के रूप में संभाला कार्यभार

No comments Document Thumbnail

वाइस एडमिरल अजय कोचर, पीवीएसएम, एवीएसएम, एनएम ने 29 मई 2026 को भारतीय नौसेना के 48वें वाइस चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ (VCNS) के रूप में कार्यभार संभाला। पदभार ग्रहण करने पर फ्लैग ऑफिसर ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि दी।

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, पुणे के पूर्व छात्र वाइस एडमिरल अजय कोचर को 01 जुलाई 1988 को भारतीय नौसेना में कमीशन मिला था। गनरी और मिसाइल सिस्टम्स के विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने अपने 37 वर्षों से अधिक के शानदार करियर में विभिन्न कमांड, ऑपरेशनल और स्टाफ जिम्मेदारियां निभाई हैं।

उन्होंने आईएनएस नाशक, विभूति और किरण की कमान संभाली तथा फ्रिगेट त्रिकंद के कमीशनिंग कमांडिंग ऑफिसर रहे। उन्होंने विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य की भी कमान संभाली, जिसके दौरान इसके एयर विंग का सफल एकीकरण और संचालन किया गया।

वे डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन, नेवल वॉर कॉलेज, गोवा तथा रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज, यूनाइटेड किंगडम के स्नातक हैं। उन्होंने नौसेना मुख्यालय में संयुक्त निदेशक (नेवल प्लान्स), निदेशक (स्टाफ रिक्वायरमेंट्स) और प्रधान निदेशक DSCT जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।

फ्लैग रैंक में पदोन्नति के बाद उन्होंने 2018 में असिस्टेंट कंट्रोलर (कैरियर प्रोजेक्ट्स) और असिस्टेंट कंट्रोलर (वारशिप प्रोडक्शन एंड एक्विजिशन) के रूप में सेवाएं दीं। इसके बाद 2021 में उन्होंने वेस्टर्न फ्लीट की कमान संभाली और बाद में नेशनल डिफेंस अकादमी के कमांडेंट के रूप में प्रशिक्षण मानकों और बुनियादी ढांचे के विकास में योगदान दिया।

उन्होंने 25 मई 2024 को वेस्टर्न नेवल कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ का पद संभाला और पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऑपरेशन सिंदूर सहित कई अभियानों में उन्होंने नौसेना की प्रतिक्रिया का नेतृत्व किया। उनके उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए उन्हें 2022 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2026 में परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया।

पदभार ग्रहण से पहले वे अंडमान और निकोबार कमांड के कमांडर-इन-चीफ के रूप में कार्यरत थे, जहां उन्होंने तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्तता को मजबूत किया।

वाइस एडमिरल अजय कोचर का परिवार उनकी पत्नी रेमन, जो विज्ञापन और शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी एक कलाकार हैं, और उनके दो बच्चों से मिलकर बना है। उनकी पुत्री सबा स्वतंत्र पत्रकार हैं तथा पुत्र करण एक वित्तीय परामर्श फर्म में कार्यरत हैं।

डीआरडीओ और भारतीय वायुसेना ने किया ‘TARA’ हथियार का सफल पहला परीक्षण

No comments Document Thumbnail

Defence Research and Development Organisation (DRDO) और Indian Air Force (IAF) ने 7 मई 2026 को ओडिशा तट के पास Tactical Advanced Range Augmentation (TARA) हथियार का सफल पहला उड़ान परीक्षण किया।

TARA भारत का पहला स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम है, जो बिना गाइडेड वारहेड्स को अत्याधुनिक प्रिसीजन गाइडेड हथियारों में बदलने की क्षमता रखता है। यह सिस्टम कम लागत में दुश्मन के जमीनी ठिकानों को अधिक सटीकता और ताकत के साथ निशाना बनाने में सक्षम है।

इस अत्याधुनिक प्रणाली को Research Centre Imarat (RCI), हैदराबाद और DRDO की अन्य प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित किया गया है। इसमें आधुनिक और कम लागत वाली तकनीकों का उपयोग किया गया है।

TARA परियोजना का निर्माण Development cum Production Partners (DcPP) और कई भारतीय उद्योगों के सहयोग से किया गया है, जिन्होंने इसके उत्पादन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण पर DRDO, भारतीय वायुसेना और सभी साझेदार उद्योगों को बधाई दी। उन्होंने इसे भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया।

वहीं, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के चेयरमैन समीर वी कामत ने भी इस सफल उड़ान परीक्षण से जुड़ी पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.